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                <title> jawahar kala kendra foundation day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> jawahar kala kendra foundation day RSS Feed</description>
                
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                <title>JAWAHAR KALA KENDRA : संगीत के जरिए कलाकारों ने बहाई रस की गंगा, दृष्टिबाधित कलाकारों की सुरीली हारमोनी बैंड प्रस्तुति</title>
                                    <description><![CDATA[जेकेके की ओर से आयोजित तीन दिवसीय म्यूजिकल सिम्फनी कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन रंगायन के मंच पर पंजाब, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश से आए दृष्टिबाधित दस कलाकारों के तीन बैंड्स की प्रस्तुति हुई। हारमोनी नामक इस प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। गुजरात से आए कलाकारों ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए लता मंगेशकर के गीतों को अपनी प्रस्तुति में शामिल किया। अंकिता चौहान और राजेश ठाकुर ने नैनों में बदरा छाए... गीत से मिठास घोली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jawahar-kala-kendra-artists-sang-the-ganges-through-music-melodious/article-131447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेकेके की ओर से आयोजित तीन दिवसीय म्यूजिकल सिम्फनी कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन रंगायन के मंच पर पंजाब, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश से आए दृष्टिबाधित दस कलाकारों के तीन बैंड्स की प्रस्तुति हुई। हारमोनी नामक इस प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। गुजरात से आए कलाकारों ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए लता मंगेशकर के गीतों को अपनी प्रस्तुति में शामिल किया। अंकिता चौहान और राजेश ठाकुर ने नैनों में बदरा छाए... गीत से मिठास घोली। इसके बाद आज मौसम बड़ा बेईमान है... गीत ने माहौल को जीवंत कर दिया। इसके बाद भक्तिमय माहौल बनाते हुए उन्होंने राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे.. भजन की प्रस्तुति दी गई। वहीं, राजस्थानी गीतों का सुरीला मैशअप प्रस्तुत कर कलाकारों ने राजस्थानी संस्कृति के रंग में सभी को रंग दिया। इसके बाद कार्यक्रम का रुख पंजाब की ओर हुआ और चंडीगढ़ से आए कलाकारों ने मैं तैनूं समझावां की... गीत से शुरुआत की। रोमी कुमार ने गायन के साथ मधुर बांसुरी वादन से श्रोताओं का मन मोह लिया।</p>
<p>इसके बाद दो दिल मिल रहे हैं... और लंबी जुदाई... जैसे गीतों प्रस्तुत दी और माहियां वे..., अंबर तो आई हुई हूर सोनिए... की बनूं दुनिया दां सच्चे बादशाह.. और छल्ला जैसे पंजाबी लोकगीतों से उन्होंने शाम में विविध संस्कृति के रंग भर दिए। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति नॉर्थ-ईस्ट से आए लेट नाइट मेलोडीज बैंड द्वारा दी गई। अरुणाचल प्रदेश के कलाकार न्योन्योक तलोम ने जा जिन जा.. लोकगीत से शुरुआत करते हुए माहौल में पूवार्ेत्तर की लोकधुनों की मिठास घोल दी। इसके बाद उन्होंने राजस्थान की झलक पेश करते हुए लोकप्रिय गीत चौधरी गाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। साथ ही उन्होंने रूप तेरा मस्ताना.., प्यार तेरा दीवाना.. जैसे सदाबहार गीतों से शाम को रूमानी रंग दिया। इन बेमिसाल कलाकारों ने असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग को ट्रिब्यूट देते हुए जाने क्या चाहे मन..., फिर दिल क्या करे.. और जरा सी दिल में दे जगह.. जैसे गीतों से शाम को यादगार बना दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 10:34:19 +0530</pubDate>
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                <title>जवाहर कला केंद्र स्थापना दिवस : 100 से अधिक लोक वाद्य यंत्रों ने रचा सुर और ताल का जादुई संसार</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र के इतिहास, केंद्र में हुए कार्यक्रमों, गतिविधियों व केंद्र की विशेषताओं को ऑडियो-विजुअल माध्यम से दर्शाया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jawahar-kala-kendra-foundation-day-more-than-100-folk-instruments/article-110261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jkk-summer-camp.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केंद्र का मध्यवर्ती बुधवार शाम राजस्थानी लोक वाद्य यंत्रों से निकली सुर-ताल की अठखेलियों से आबाद हो उठा। जवाहर कला केंद्र के 32वें स्थापना दिवस समारोह में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों व जनजातियों के लोक वाद्य यंत्रों का जादू शहरवासियों को देखने को मिला। शाम के समय हल्की बारिश से तरोताजा हुए माहौल में जब लोक कलाकारों ने वाद्य यंत्रों पर अपने सधे हुए हाथों का जादू बिखेरा तो जेकेके का पूरा प्रांगण राजस्थानी लोक संस्कृति में रचे-बसे संगीत के रंगों से सराबोर हो गया। प्रदेशभर से आए कलाकारों ने सौ से अधिक वाद्य यंत्र बजाए। स्थापना दिवस समारोह का गुरुवार को समापन होगा।</p>
<p><strong>इन वाद्य यंत्रों ने सजाई शाम</strong><br />कार्यक्रम में बम नगाड़ा, रावण हत्था, गूजरी, ढोल, बकरी की मसक, पाबू जी का माटा, जोगिया सारंगी, धूम धड़ाम, सिंगी, बीन, तूमड़ी, चंटर, पेडी, रणसिंह, नौबत, झांझ, शंख, सुरिंदा, नड़, नौबत, मुरली, सुरिंदा, भपंग सहित 100 से अधिक वाद्य यंत्रों का वादन किया गया।</p>
<p><strong>डूडल वॉल बनी पसंदीदा स्पॉट प्रदर्शनी में दिखा जेकेके का सफर</strong><br />जेकेके के डोम एरिया में बनाई गई डूडल वॉल पर दिनभर कलाकारों ने अपनी भावनाओं को चित्रों के माध्यम से उकेरा। केंद्र में नियमित आने वाले कलाकारों के साथ ही केंद्र को देखने आए लोगों ने भी डूडल वॉल पर रंगों की कलाकारी कर चित्र बनाए। केंद्र के इतिहास, केंद्र में हुए कार्यक्रमों, गतिविधियों व केंद्र की विशेषताओं को ऑडियो-विजुअल माध्यम से दर्शाया गया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 10:51:18 +0530</pubDate>
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