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                <title>transmission - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>WHO की चेतावनी: कांगो-युगांडा में इबोला का आतंक, संक्रमण और मौतों ने बढ़ाई दुनिया की चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का कहर जारी है, जहां अब तक 138 लोगों की मौत हो चुकी है और 695 मामले सामने आए हैं। डब्ल्यूएचओ ने कांगो में खतरे को 'बेहद उच्च' घोषित किया है। चमगादड़ों से फैलने वाली इस जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ebola-outbreak-in-congo-and-uganda-death-toll-rises-to/article-156958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ibola.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में बुंडिबुग्यो वायरस के कारण फैली इबोला बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अभी तक इस जानलेवा वायरस से 138 लोगों की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों में अब तक इस बीमारी से संक्रमित 695 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 138 लोगों की मौत हो चुकी है। कांगो में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ संक्रमितों की संख्या बढ़कर 676 हो गई है और 136 लोगों की जान जा चुकी है। यहाँ मृत्यु दर 20.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। कांगो के इतुरी प्रांत में इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। राहत और बचाव कार्य में जुटे कम से कम 16 स्वास्थ्य कर्मी भी इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। कांगो में सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं और आबादी का लगातार पलायन इस बीमारी को नियंत्रित करने में बड़ी बाधा बन रहा है।</p>
<p>पड़ोसी देश युगांडा में अब तक इबोला के 19 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें से दो मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा एक संभावित मरीज की भी जान गई है। युगांडा में राहत की बात यह है कि पिछले छह दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यहाँ के सभी मामले कांगो से आये संक्रमितों या उनके संपर्क में आये लोगों से जुड़े हैं और अभी तक स्थानीय स्तर पर आम जनता में इसके फैलने के संकेत नहीं मिले हैं।</p>
<p>बुंडिबुग्यो वायरस से होने वाली यह बीमारी इबोला का ही एक बेहद गंभीर रूप है। यह पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारी है, जिसके फैलने की शुरुआत चमगादड़ों या संक्रमित वन्यजीवों के संपर्क में आने से होती है। इसके बाद यह इंसानों के बीच खून या लार आदि के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। अभी तक इस वायरस के इलाज के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने कांगो में इस बीमारी के खतरे के स्तर को 'बेहद उच्च' और युगांडा सहित सीमा साझा करने वाले पड़ोसी देशों में 'उच्च' श्रेणी में रखा है। वैश्विक स्तर पर इसका खतरा फिलहाल कम आंका गया है। डब्ल्यूएचओ, अफ्रीका स्वास्थ्य नियंत्रण केंद्र और दोनों देशों के स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर इस महामारी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। इस संकट से निपटने के लिए कुछ संभावित दवाओं के चिकित्सीय परीक्षण (क्लिनिकल ट्रायल) की तैयारी भी की जा रही है। संगठन ने फिलहाल दोनों देशों के साथ यात्रा या व्यापार पर किसी भी तरह का प्रतिबंध न लगाने की सलाह दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:50:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डीआरसी में इबोला का प्रकोप: संक्रमितों का आंकड़ा 381 के पार; 63 की मौत, WHO ने घोषित किया हेल्थ इमरजेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[कांगो (DRC) में इबोला वायरस के मामले बढ़कर 381 हो गए हैं, जिनमें 63 की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री रोजर कंब के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय मदद से जांच क्षमता और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (55%) में सुधार हुआ है। तीन प्रांतों में फैले इस प्रकोप को WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ebola-wreaks-havoc-in-democratic-republic-of-congo-63-dead/article-156124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ibola.png" alt=""></a><br /><p>किंशासा। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 381 से अधिक हो गयी है, जिनमें से 63 लोगों की मौत हो चुकी है। डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री रोजर कंब ने गुरुवार शाम को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वर्तमान में लगभग 233 मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कुछ लोगों को जांच रिपोर्ट आने तक अलग रखा गया है, तो कुछ लोगों का बीमारी के लक्षण दिखने बाद इलाज किया जा रहा है। डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ‘अफ़्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र’ से 4,000 से अधिक जांच किट मिलने और अन्य अंतरराष्ट्रीय मदद के बाद देश में जांच करने की क्षमता काफी बेहतर हुई है। इसकी मदद से स्वास्थ्य अधिकारी अब मिलने वाले लगभग सभी नमूनों की जांच कर पा रहे हैं और 24 घंटे के भीतर उसकी रिपोर्ट भी दे रहे हैं।</p>
<p>कंब ने यह भी बताया कि संक्रमित लोगों के संपर्क में आये अन्य लोगों की पहचान करने के काम में काफी सुधार हुआ है। इस अभियान की शुरुआत में केवल नौ प्रतिशत संपर्कों का ही पता चल पा रहा था, जो अब बढ़कर 55 प्रतिशत हो गया है। हमारा लक्ष्य इसे 90 प्रतिशत तक पहुंचाना है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारी लगभग सभी संपर्कों की पहचान कर सकेंगे और यह पहले से अनुमान लगा पाएंगे कि नये मामले कहां आ सकते हैं।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बुंडिबुग्यो वायरस के कारण फैला यह प्रकोप अब तक देश के तीन प्रांतों, इतुरी, उत्तर किवु और दक्षिण किवु में फैल चुका है। कांगो ने 15 मई को इबोला के इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद से स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने प्रभावित पूर्वी प्रांतों में जांच, मरीजों को अलग रखने, इलाज करने और संक्रमितों के संपर्क में आये लोगों की तलाश करने के काम को काफी तेज कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बाद में इस बीमारी को अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया था। पड़ोसी देश युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वहां भी इबोला के 16 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से एक नये मामले की पुष्टि गुरुवार को ही हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूरोप में तीन सालों में 80,000 नए HIV मामले और 9000 TB से मौतें होने की आशंका : ईसीडीसी</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ECDC) ने चेतावनी दी है कि यूरोप में अगले तीन सालों में 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले आ सकते हैं। साथ ही, टीबी के कारण 9,000 से अधिक मौतें होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में सिफलिस और गोनोरिया जैसे यौन संचारित रोगों की दरें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/80000-new-hiv-cases-and-9000-tb-deaths-expected-in/article-155932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/europ.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। यूरोप में अगले तीन वर्षों में लगभग 80,000 नए एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आने और टीबी के कारण 9,000 से अधिक मौतें होने की आशंका है। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र (ईसीडीसी) की निदेशक पामेला रेंडी-वैगनर ने यह जानकारी दी है। गत 21 मई को ईसीडीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में यूरोप में एक दशक से ज़्यादा समय में यौन संचारित संक्रमणों की सबसे ज़्यादा दरें देखी गईं, जिसमें सिफलिस और गोनोरिया शामिल हैं।</p>
<p>ईयू ऑब्जर्वर न्यूज़ एजेंसी ने बुधवार को रेंडी-वैगनर के हवाले से कहा, "हम यूरोप में आने वाले तीन सालों में 80,000 नए एचआईवी संक्रमण और टीबी से 9,000 से ज़्यादा मौतें देखेंगे।" रिपोर्ट में कहा गया है कि ईयू रेगुलेटर का अनुमान है कि टीबी और यौन संचारित संक्रमणों में तेज़ी से बढ़ोतरी होगी। साथ ही, इन बीमारियों की वजह से ईयू , आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में हर साल 59,000 मौतें होती हैं। ईयू , आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में अभी लगभग 800,000 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:45:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने बांग्लादेश को दी ट्रांसशिपमेंट की सुविधा वापस ली, जायसवाल ने कहा- भारतीय क्षेत्र से होकर नेपाल या भूटान को बंगलादेश से होने वाले निर्यात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा   </title>
                                    <description><![CDATA[ भारत ने बांग्लादेश को निर्यातित कार्गो के ट्रांसशिपमेंट की सुविधा को वापस ले लिया है हालांकि भारत के इस फैसले का बांग्लादेश से भारतीय क्षेत्र से होकर नेपाल एवं भूटान को होने वाले निर्यात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-withdrew-the-facility-of-transmission-facility-to-bangladesh-jaiswal/article-110279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news25.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने बांग्लादेश को निर्यातित कार्गो के ट्रांसशिपमेंट की सुविधा को वापस ले लिया है हालांकि भारत के इस फैसले का बांग्लादेश से भारतीय क्षेत्र से होकर नेपाल एवं भूटान को होने वाले निर्यात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश को दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा के कारण पिछले कुछ समय से हमारे हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर काफी भीड़भाड़ हो रही थी। </p>
<p>लॉजिस्टिक्स में देरी और उच्च लागत के कारण हमारे अपने निर्यात में बाधा आ रही थी और बैकलॉग बन रहे थे। इसलिए, यह सुविधा मंगलवार से वापस ले ली गई है। इन उपायों से भारतीय क्षेत्र से होकर नेपाल या भूटान को बंगलादेश से होने वाले निर्यात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/india-withdrew-the-facility-of-transmission-facility-to-bangladesh-jaiswal/article-110279</link>
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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 11:26:33 +0530</pubDate>
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