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                <title>Central Government - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Central Government RSS Feed</description>
                
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                <title>महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक को जोड़ना केंद्र की बड़ी साजिश : कविता की चेतावनी-राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाले कदम से जन आंदोलन का होगा जन्म </title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना जागृति अध्यक्ष के. कविता ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को केंद्र की 'बड़ी साजिश' बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि इससे तेलंगाना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। कविता ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हकों से समझौता हुआ, तो तेलंगाना के गठन जैसा एक और जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/linking-the-delimitation-bill-with-the-womens-reservation-bill-is/article-150618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kalvakuntla-kavitha.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना जागृति पार्टी की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने गुरुवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण विधेयक के साथ जोड़ना केंद्र की एक 'बड़ी साजिश' है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेलंगाना के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाला कोई भी कदम राज्य में एक और जन आंदोलन को जन्म दे सकता है। बंजारा हिल्स स्थित तेलंगाना जागृति कार्यालय से जारी एक वीडियो बयान में कविता ने कहा कि हालांकि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है लेकिन इसे परिसीमन के साथ जोड़ने का प्रयास भ्रामक और राजनीति से प्रेरित है।</p>
<p>कविता ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने केंद्र पर परिसीमन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 'महिलाओं को ढाल के रूप में उपयोग करने' का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने टिप्पणी की, "वे प्रभावी रूप से महिलाओं के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।" कविता ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि यह निष्पक्ष लग सकता है लेकिन इसका तेलंगाना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों की तुलना में तेलंगाना की सीटों की हिस्सेदारी असमान रूप से कम हो सकती है, जिससे उसका राजनीतिक महत्व कम हो जाएगा।</p>
<p>जागृति नेता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व 3.13 प्रतिशत है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिसीमन के बाद भी यह हिस्सा अपरिवर्तित रहे, चाहे कोई भी मानदंड अपनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी, "यदि तेलंगाना के राजनीतिक महत्व को कम किया गया, तो राज्य के गठन के आंदोलन जैसा ही एक और आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा।" कविता ने देय धनराशि जारी न करने और प्रमुख राज्य पहलों को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा न देने के लिए भी केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक महत्व में और कमी आने से स्थिति और खराब हो जाएगी। जागृति नेता ने कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण विधेयक से जोड़ने के बजाय, केंद्र को वास्तविक सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए महिला कोटे के भीतर पिछड़े वर्गों (बीसियों) के लिए उप-कोटा सुनिश्चित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:49:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर बोला हमला : प्रतिनिधित्व पर दिए आश्वासनों पर उठाया सवाल, जनता को जानबूझकर धोखा देने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र को 'धोखा' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण और पूर्वी राज्यों का लोकसभा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जो संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। रमेश ने इसे डॉ. अंबेडकर की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-attacked-the-center-over-delimitation-raised-questions-on-the/article-150483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jairam-ramesh-4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर केंद्र सरकार के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता वाली पार्टी है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, “सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा केंद्र सरकार और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा,“वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”</p>
<p>कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। जयराम रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:07 +0530</pubDate>
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                <title>सोनिया गांधी का सरकार पर निशाना : असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन, राजनीतिक लाभ लेने की मंशा का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" करार दिया। उन्होंने लेख के जरिए चेतावनी दी कि जनगणना में देरी और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है। सोनिया ने जातिगत जनगणना और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhis-target-on-the-government-is-that-the-real/article-150190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sonia-gandhi-issued-notice.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने "बेहद खतरनाक" और "संविधान पर हमला" करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो। इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है।</p>
<p>अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सबरीमाला मंदिर : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने किया महिलाओं के प्रवेश प्रतिबंध का समर्थन, मुस्लिम-पारसियों से भी सामने आया कनेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकारों पर सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे धार्मिक स्वायत्तता का विषय बताते हुए कहा कि लैंगिक भेदभाव की विदेशी अवधारणाएं भारतीय परंपराओं पर थोपी नहीं जानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-supported-womens-entry-ban-in-sabarimala-temple-supreme/article-149492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sabrimala-mandir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच ने मंगलवार से धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकार और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के मामले पर सुनवाई शुरु कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच के समक्ष चल रही सुनवाई के समक्ष केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सबरीमाला मंदिर में माहवारी से जुड़े आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक धार्मिक आस्था और स्वायतता का मामला है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने कोर्ट से इस प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा सीमित होनी चाहिए। आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ बराबरी दी है, बल्कि कई बार उन्हें ऊंचा स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ हालिया फैसलों में पितृसत्ता और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन ये अवधारणाएं भारतीय सभ्यता के मूल में नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार बाहर से आए हैं और भारत की सांस्कृतिक परंपरा से मेल नहीं खाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:55:21 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना : कोविड़ जैसी अव्यवस्था अब एलपीजी संकट में भी, दिहाड़ी श्रमिकों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए एलपीजी संकट की तुलना कोविड कुप्रबंधन से की है। उन्होंने कहा कि "नीति शून्य" सरकार के कारण गरीब और प्रवासी श्रमिक पलायन को मजबूर हैं। राहुल ने इसे कूटनीतिक चूक और विनिर्माण क्षेत्र की बर्बादी बताते हुए जनता से चुप्पी तोड़ने का आह्वान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-target-on-the-center-is-chaos-like-covid/article-149249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्र के पास रसोई गैस (एलपीजी) संकट से निपटने की कोई नीति नहीं है और इस समय भी वही अवस्था देखने को मिल रही है जो देश के लोगों ने कोविड के समय देखी थी। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "केंद्र सरकार ने कहा था-एलपीजी संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे और सच में वही किया। बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ गरीबों पर। हर रोज 500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा शहर छोड़ो, गाँव भागो।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो मज़दूर कपड़ा मिल्स और फैक्टरियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। कपड़ा क्षेत्र पहले से ही गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में है। विनिर्माण क्षेत्र दम तोड़ रहा है। राहुल गांधी ने इस संकट की वजह बताते हुए कहा "और यह संकट आया कहाँ से। कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती। जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।"</p>
<p>उन्होंने संकट के समय लोगों को चुप नहीं रहने का आह्वान करते हुए कहा कि सवाल एक ही है कि हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है। चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:01:08 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला: बोले-स्मार्ट सिटी योजना आम नागरिकों के साथ धोखा, ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं   </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की स्मार्ट सिटी परियोजना पर तीखा हमला करते हुए इसे विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि ₹48,000 करोड़ खर्च होने के बावजूद नागरिकों को स्वच्छ पानी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। राहुल ने धंसती सड़कों और दूषित पानी का हवाला देते हुए योजना को जमीनी हकीकत से दूर बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-big-attack-on-the-center-said-smart/article-148518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए मंगलवार को इसे 'धोखा' करार दिया और कहा कि यह योजना अपने उद्देश्य से भटक गई और आम नागरिकों को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा। राहुल गांधी ने एक बयान में आरोप लगाया कि परियोजना के तहत शहरों के समग्र विकास के बजाय सीमित क्षेत्रों में काम कर उसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया, जबकि ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।</p>
<p>उन्होंने कहा "कोई भी शहर तब तक ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, जब तक वह अपने नागरिकों को साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा जैसी बुनियादी गरिमा उपलब्ध नहीं कराता। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 48 हजार करोड़ रुपये खर्च होने और 97 प्रतिशत परियोजनाओं के पूरे होने का दावा किया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है।" कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि कितने शहरों में वास्तव में ठोस बदलाव आया और लोगों के जीवन में क्या सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि दूषित पानी, खुले सीवर, गिरते पुल और धंसती सड़कें इस योजना की विफलता को उजागर करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:26:49 +0530</pubDate>
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                <title>मल्लिकार्जुन खड़गे का केंद्र पर निशाना: कोरोना काल में मजदूरों को राहत देने में मनरेगा को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप, वीबी-जयराम-जी योजना लागू नहीं को लेकर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों मजदूरों का 'काम का अधिकार' छीना जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट गहरा गया है। खरगे ने कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधूरे कार्यों और बढ़ती महंगाई पर चिंता व्यक्त की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mallikarjun-kharge-targets-center-accuses-it-of-ignoring-mnrega-in/article-148473"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/mallikarjun-kharge-33.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा खत्म करने और नया कानून लागू नहीं करने को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए सोमवार को कहा कि कोरोना काल में मजदूरों को राहत देने में इस योजना की अहम भूमिका रही है लेकिन केंद्र ने उसे नजरअंदाज किया है। खड़गे ने कहा "एक ओर मनरेगा पर प्रभावी रूप से रोक जैसी स्थिति बना दी गई है, वहीं दूसरी ओर घोषित वीबी-जयराम-जी योजना अब तक लागू नहीं हो पाई है। कई राज्यों में मनरेगा खत्म करने की खबरें हैं जिसके कारण करोड़ों श्रमिकों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो गया है।"</p>
<p>उन्होंने मनरेगा को लेकर कई राज्यों में आंदोलन होने का दावा किया औऱ कहा कि बिहार के मुजफ्फरपुर में पिछले 87 दिनों से लगभग 12 हजार मजदूर काम न मिलने के कारण आंदोलन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से मनरेगा के तहत काम बंद होने की खबरें आ रही हैं, जिससे ग्रामीण मजदूरों के सामने रोज़गार का संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने मनरेगा को कमजोर कर करोड़ों मजदूरों के 'काम के अधिकार' को छीना है श्रमिकों को पर चोट पहुंचाई है।</p>
<p>खड़गे ने महाराष्ट्र की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों में से 53 प्रतिशत से भी कम कार्य पिछले पांच वर्षों में पूरे हुए हैं, जबकि करीब 2.5 लाख कार्य शुरू ही नहीं हो सके। रसोई गैस की महंगाई और उद्योगों की बदहाली के कारण शहरों से प्रवासी मजदूरों का पलायन बढ़ रहा है, लेकिन गांवों में उनके लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल में मनरेगा ने करोड़ों मजदूरों को राहत दी थी, जिसे आज नजरअंदाज किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:24:57 +0530</pubDate>
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                <title>LPG संकट पर बीआरएस का विरोध प्रदर्शन, केटीआर ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना में केटीआर के नेतृत्व में बीआरएस विधायकों ने रसोई गैस की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र पर एलपीजी आपूर्ति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। युद्ध के कारण उपजे संकट और सिलेंडरों का वजन घटाने की आशंका के बीच, केटीआर ने पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/brs-protest-on-lpg-crisis-ktr-targets-central-and-state/article-147669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/k-t-ramarao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने मंगलवार को एलपीजी की कमी को लेकर गन पार्क पर विरोध प्रदर्शन किया और गैस सिलेंडरों के पोस्टर दिखाकर समस्या की गंभीरता को दर्शाया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि युद्ध के बाद उत्पन्न स्थिति के कारण एलपीजी की भारी कमी से आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार भले ही कमी से इनकार कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद गंभीर है। केटीआर ने कहा कि राज्य सरकार ने भी इस मामले में यह कहकर अपनी असमर्थता जताई है कि पेट्रोलियम क्षेत्र केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि भविष्य में 14 किलोग्राम के मानक एलपीजी सिलेंडर को घटाकर 10 किलोग्राम किया जा सकता है।</p>
<p>केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर आम लोगों पर बोझ डालने का आरोप लगाते हुए केटीआर ने कहा कि जनता दो बैलों की लड़ाई में फंसे बछड़े की तरह परेशान हो रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण एलपीजी की कमी अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि एक ओर केंद्र सरकार कमी से इनकार कर रही है, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार आपूर्ति की बाधाओं का हवाला दे रही है, जिससे दोनों ही जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाकर एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और इस संबंध में स्पष्ट बयान जारी करने की मांग की, ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:05:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>LPG किल्लत के विरोध में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चूल्हा जलाकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना, विफल विदेश नीति का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[धमतरी के गांधी मैदान में महिला कांग्रेस ने रसोई गैस की किल्लत के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। सिलेंडर न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने लकड़ी का चूल्हा जलाकर केंद्र सरकार के प्रति रोष जताया। गैस एजेंसियों पर लंबी कतारों और आपूर्ति बाधित होने से परेशान महिलाओं ने नारेबाजी की और जल्द समाधान की मांग उठाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-protest-against-lpg-shortage-women-congress-workers-lit-stoves/article-146719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/women-congressb.png" alt=""></a><br /><p>धमतरी। छत्तीसगढ़ में धमतरी शहर के गांधी मैदान में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कथित किल्लत को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लकड़ी से चूल्हा जलाकर प्रतीकात्मक रूप से अपनी नाराज़गी जताई और जमकर नारेबाजी की।</p>
<p>महिला कांग्रेस का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर रोज़ाना सैकड़ों लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि गैस संकट के कारण लोगों को फिर से पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। इसी स्थिति को दर्शाने के लिए उन्होंने गांधी मैदान में लकड़ी जलाकर चूल्हा चलाया और सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।</p>
<p>गौरतलब है कि, हाल ही में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गैस की कमी को लेकर एक अन्य प्रदर्शन भी किया था, जिसमें नाले से गैस निकालकर सिलेंडर जलाने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया था। महिला कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को उसी क्रम की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:24:33 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला: केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने का लगाया आरोप, महंगाई और गैस सिलेंडर के मुद्दे पर सरकार को घेरा</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग द्वारा बंगाल के शीर्ष अधिकारियों को हटाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान शिकायतों के बावजूद दागी अधिकारियों को क्यों नहीं हटाया गया? अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केंद्र के इशारे पर भेदभाव कर रहा है और जनता को गैस किल्लत जैसी बुनियादी समस्याओं में उलझा रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadav-attacks-election-commission-regarding-west-bengal-assembly-elections/article-146672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/akhilesh-yadav2.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर अधिसूचना लागू होने के बाद चुनाव आयोग द्वारा वहां के डीजीपी, पुलिस कमिश्नर सहित एडीजी लॉ एंड ऑर्डर को हटा दिया गया है। इस मसले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब भी किसी राज्य में चुनाव होता है तो वहां केंद्र सरकार नहीं होती, लेकिन सबसे पहले वहां के चीफ सेक्रेटरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को हटा दिया जाता है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव के दौरान कभी भी डीजीपी को नहीं हटाया गया, जबकि कई बार चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की गई थी। उन्होंने पूछा कि जिन अधिकारियों के परिवार के लोग खुद चुनाव लड़ रहे थे, क्या उन्हें पद से हटाया गया? </p>
<p>सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि पूरा देश जानता है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और उसकी कार्रवाई भी उसी के अनुरूप दिखाई देती है। इसके साथ ही उन्होंने महंगाई और गैस सिलेंडर के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जो लोग जनता को गैस सिलेंडर तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, वे देश को दुनिया में आगे ले जाने की बात कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 16:29:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गैस सिलेंडर दामों में बढ़ोतरी के विरोध में कांग्रेस के जयपुर में प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में कांग्रेस ने गैस कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार का पुतला फूँका और बढ़ती महंगाई को जनविरोधी करार दिया। खाचरियावास ने कहा कि एलपीजी के ऊंचे दामों ने गृहिणियों और छोटे व्यापारियों का बजट बिगाड़ दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-protests-in-jaipur-against-increase-in-gas-cylinder-prices/article-146573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pratap.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजधानी जयपुर में रविवार को कई ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों ने गैस सिलेंडर दामों में बढ़ोतरी के विरोध में अलग अलग प्रदर्शन किए। जयपुर में हवामहल, मालवीयनगर, सांगानेर, बनीपार्क आदि क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए।</p>
<p>बनीपार्क ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और सिविल लाइन ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने रविवार को कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल हुए पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रसोई गैस के दामों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी तथा आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने में विफलता के कारण आमजन, गृहणियों और छोटे व्यापारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त है और केंद्र सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है। इसी जनविरोधी नीति और बढ़ती महंगाई के विरोध में यह प्रदर्शन किया है। धरना-प्रदर्शन के बाद मोदी सरकार का पुतला दहन किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:33:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'पीएनजी में शिफ्ट हों...', मिडिल ईस्ट तनाव के बीच एलपीजी की कमी, केंद्र सरकार ने दी पीएनजी अपनाने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट तनाव के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। केंद्र सरकार ने राहत के लिए नागरिकों से पीएनजी (PNG) अपनाने का आग्रह किया है। सरकार का लक्ष्य 60 लाख नए परिवारों को पीएनजी से जोड़ना है ताकि गैस किल्लत का दबाव कम हो सके और वितरण सुगम बने।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shift-to-png-amidst-the-middle-east-tension-there-is/article-146430"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modib-22.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत में रसोई गैस की आपूर्ति पर भी देखने को मिल रहा है। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। बढ़ती मांग और आपूर्ति में आई रुकावट के चलते कई इलाकों में गैस वितरण प्रभावित हुआ है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने नागरिकों से वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की अपील की है। सरकार ने कहा है कि जहां संभव हो, लोग एलपीजी की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का उपयोग करें। अधिकारियों के मुताबिक देश में फिलहाल करीब डेढ़ करोड़ पीएनजी उपभोक्ता हैं और लगभग 60 लाख परिवार ऐसे हैं जो आसानी से पीएनजी कनेक्शन ले सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी पर दबाव कम होगा और गैस की आपूर्ति बेहतर ढंग से संचालित की जा सकेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:18:44 +0530</pubDate>
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