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                <title>Central Government - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Central Government RSS Feed</description>
                
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                <title>वंदे मातरम पर राजनीति करने की बजाय जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना जरुरी: मायावती</title>
                                    <description><![CDATA[बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 'वंदे मातरम' के गायन पर हो रही राजनीति को अनुचित ठहराया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर देश और जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों जैसे- बेरोजगारी, युवाओं, स्कूली बच्चों और बाढ़ की समस्या पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/instead-of-doing-politics-on-vande-mataram-it-is-important/article-163484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/mayawati03.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने देश में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर शुक्रवार को कहा कि इस मुद्दे को लेकर इस समय राजनीति करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सभी राजनीतिक दलों से जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। मायावती ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि देश में ‘वंदे मातरम’ का पूरा गाना गाया जाना है अथवा उसके शुरुआती दो छंद गाए जाने हैं, इसको लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का स्पष्ट मत है कि वंदे मातरम के गायन को लेकर संसद में जो कानून पारित किया गया है, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।</p>
<p>बसपा प्रमुख ने कहा कि केंद्र और राज्यों में सत्ता परिवर्तन के दौरान राजनीतिक दल अपने राजनीतिक स्वार्थ और फायदे के लिए अथवा अपनी कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए पहले से बने कानूनों में बदलाव करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति के बजाय जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और जनहित से जुड़े कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर केंद्र तथा सभी राज्य सरकारों के साथ राजनीतिक दलों को भी समुचित ध्यान देना चाहिए। मायावती ने विशेष रूप से बेरोजगार युवाओं, ‘जेन-जी’ और स्कूली बच्चों के मुद्दों का उल्लेख किया।<br />बसपा अध्यक्ष ने देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि समेत अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में इन मुद्दों पर ध्यान देना ही देश और जनहित में सबसे जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 13:22:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>खड़गे-राहुल का केंद्र पर बड़ा हमला: सच जान चुके युवाओं को डराया-धमकाया नहीं जा सकता, युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने का लगाया आरोप  </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज के बाद अब युवाओं पर प्राथमिकी दर्ज करना और सोशल मीडिया अकाउंट बंद करना सरकार की बदले की राजनीति को दर्शाता है। कांग्रेस ने गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharge-rahuls-big-attack-on-the-center-youth-who-have-known/article-161525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्र आंदोलन के बाद प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश का युवा सरकार का सच जान चुके इसलिए उन्हें अब डरा-धमकाकर चुप नहीं कराया जा सकता है। खरगे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि 10 दिन पहले सरकार ने युवाओं पर लाठी-डंडों और पेलेट गन का इस्तेमाल किया और अब आंदोलन वापस लेने के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है तथा उन्हें जबरन हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन वापस लेने के दौरान किए गए वादे से मुकर गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए जा रहे हैं, उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक की जा रही है और सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे हथकंडे नहीं चलेंगे क्योंकि युवा सरकार का सच जान चुका है। उन्होंने गृह मंत्री का इस्तीफा लेने की भी मांग दोहराई। राहुल गांधी ने कहा कि गृहमंत्री 'जेन जेड' को धमकाकर चुप नहीं करा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और अब उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है तथा उनके सोशल मीडिया अकाउंट हटाए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, "आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इसे लेकर सावधान रहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 14:05:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रमोद तिवारी का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला, बोले- कौरवी शासन का अंत शुरू, पांडवों की हो चुकी है वापसी </title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने मौजूदा केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे तानाशाही करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब अन्याय के खिलाफ सड़क पर उतर चुकी है और देश में बदलाव की ऐतिहासिक लहर शुरू हो चुकी है, जिससे सत्ताधारी दल की मुश्किलें आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने वाली हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pramod-tiwaris-big-attack-on-the-central-government-said/article-161033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pramod-tiwari-i.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाते हुए कहा है कि देश में "कौरवी शासन" के अंत की शुरुआत हो चुकी है और अब "पांडवों की वापसी" हो रही है। उन्होंने कहा कि यह वापसी युवाओं, राहुल गांधी और एक मजबूत विपक्ष के रूप में दिखाई दे रही है। प्रमोद तिवारी ने कहा, "आज का सूरज एक नई रोशनी लेकर आया है। 12 साल के कौरवी शासन के बाद अब पांडवों की वापसी हो चुकी है, युवाओं के रूप में, राहुल गांधी जी के रूप में और एक मजबूत विपक्ष के रूप में।" </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के शासन में महिलाओं का सम्मान सुरक्षित नहीं है, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है और शांतिपूर्ण आवाज़ों को लाठियों के बल पर दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब-जब नारी शक्ति और जनता का अपमान होता है, तब-तब इतिहास करवट लेता है। महाभारत का संदर्भ देते हुए तिवारी ने कहा कि देश में अब "कुरुक्षेत्र" का माहौल बन चुका है। उनका दावा था कि जनता लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो रही है और विपक्ष पहले से अधिक मजबूत होकर सामने आया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "कुरुक्षेत्र का मैदान सज चुका है। देश को बेचने वाली और तानाशाही चलाने वाली इस बर्बर सरकार का अंत निश्चित है। पांडव लौट आए हैं और जीत सच की होगी।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 16:35:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मणिपुर को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर वार, कहा- लोग आज भी हिंसा की कीमत चुका रहे हैं, हजारों परिवार हुए तबाह</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य वर्षों से हिंसा और नफरत की आग में जल रहा है। उन्होंने सरकार पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि मणिपुर में शांति, न्याय और एकता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-attack-on-center-regarding-manipur-said-people/article-158659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rahul-gandhiii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि राज्य वर्षों से हिंसा और नफरत की आग में जल रहा है लेकिन केंद्र सरकार इस संकट के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि मणिपुर वर्षों से जल रहा है और एक बार फिर नफरत तथा हिंसा की आग में 20 घर जलकर राख हो गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दो सरकारों और राष्ट्रपति शासन के बावजूद राज्य में संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और अनगिनत परिवार उजड़ चुके हैं। मणिपुर जिस असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है उसकी कल्पना करना भी कठिन है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार की विभाजनकारी विचारधारा जिम्मेदार है और सरकार लोगों को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के आधार पर बांटती है। उन्होंने कहा "मणिपुर बेहतर का हकदार है और इसके लिए 'भारत जोड़ना' ही एकमात्र रास्ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 14:13:49 +0530</pubDate>
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                <title>महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक को जोड़ना केंद्र की बड़ी साजिश : कविता की चेतावनी-राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाले कदम से जन आंदोलन का होगा जन्म </title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना जागृति अध्यक्ष के. कविता ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को केंद्र की 'बड़ी साजिश' बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि इससे तेलंगाना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। कविता ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हकों से समझौता हुआ, तो तेलंगाना के गठन जैसा एक और जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/linking-the-delimitation-bill-with-the-womens-reservation-bill-is/article-150618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kalvakuntla-kavitha.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना जागृति पार्टी की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने गुरुवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण विधेयक के साथ जोड़ना केंद्र की एक 'बड़ी साजिश' है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेलंगाना के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाला कोई भी कदम राज्य में एक और जन आंदोलन को जन्म दे सकता है। बंजारा हिल्स स्थित तेलंगाना जागृति कार्यालय से जारी एक वीडियो बयान में कविता ने कहा कि हालांकि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है लेकिन इसे परिसीमन के साथ जोड़ने का प्रयास भ्रामक और राजनीति से प्रेरित है।</p>
<p>कविता ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने केंद्र पर परिसीमन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 'महिलाओं को ढाल के रूप में उपयोग करने' का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने टिप्पणी की, "वे प्रभावी रूप से महिलाओं के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।" कविता ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि यह निष्पक्ष लग सकता है लेकिन इसका तेलंगाना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों की तुलना में तेलंगाना की सीटों की हिस्सेदारी असमान रूप से कम हो सकती है, जिससे उसका राजनीतिक महत्व कम हो जाएगा।</p>
<p>जागृति नेता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व 3.13 प्रतिशत है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिसीमन के बाद भी यह हिस्सा अपरिवर्तित रहे, चाहे कोई भी मानदंड अपनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी, "यदि तेलंगाना के राजनीतिक महत्व को कम किया गया, तो राज्य के गठन के आंदोलन जैसा ही एक और आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा।" कविता ने देय धनराशि जारी न करने और प्रमुख राज्य पहलों को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा न देने के लिए भी केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक महत्व में और कमी आने से स्थिति और खराब हो जाएगी। जागृति नेता ने कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण विधेयक से जोड़ने के बजाय, केंद्र को वास्तविक सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए महिला कोटे के भीतर पिछड़े वर्गों (बीसियों) के लिए उप-कोटा सुनिश्चित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:49:42 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर बोला हमला : प्रतिनिधित्व पर दिए आश्वासनों पर उठाया सवाल, जनता को जानबूझकर धोखा देने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र को 'धोखा' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण और पूर्वी राज्यों का लोकसभा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जो संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। रमेश ने इसे डॉ. अंबेडकर की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-attacked-the-center-over-delimitation-raised-questions-on-the/article-150483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jairam-ramesh-4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर केंद्र सरकार के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता वाली पार्टी है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, “सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा केंद्र सरकार और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा,“वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”</p>
<p>कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। जयराम रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:07 +0530</pubDate>
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                <title>सोनिया गांधी का सरकार पर निशाना : असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन, राजनीतिक लाभ लेने की मंशा का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" करार दिया। उन्होंने लेख के जरिए चेतावनी दी कि जनगणना में देरी और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है। सोनिया ने जातिगत जनगणना और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhis-target-on-the-government-is-that-the-real/article-150190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sonia-gandhi-issued-notice.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने "बेहद खतरनाक" और "संविधान पर हमला" करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो। इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है।</p>
<p>अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                <title>सबरीमाला मंदिर : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने किया महिलाओं के प्रवेश प्रतिबंध का समर्थन, मुस्लिम-पारसियों से भी सामने आया कनेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकारों पर सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे धार्मिक स्वायत्तता का विषय बताते हुए कहा कि लैंगिक भेदभाव की विदेशी अवधारणाएं भारतीय परंपराओं पर थोपी नहीं जानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-supported-womens-entry-ban-in-sabarimala-temple-supreme/article-149492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sabrimala-mandir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच ने मंगलवार से धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकार और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के मामले पर सुनवाई शुरु कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच के समक्ष चल रही सुनवाई के समक्ष केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सबरीमाला मंदिर में माहवारी से जुड़े आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक धार्मिक आस्था और स्वायतता का मामला है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने कोर्ट से इस प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा सीमित होनी चाहिए। आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ बराबरी दी है, बल्कि कई बार उन्हें ऊंचा स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ हालिया फैसलों में पितृसत्ता और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन ये अवधारणाएं भारतीय सभ्यता के मूल में नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार बाहर से आए हैं और भारत की सांस्कृतिक परंपरा से मेल नहीं खाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:55:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना : कोविड़ जैसी अव्यवस्था अब एलपीजी संकट में भी, दिहाड़ी श्रमिकों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए एलपीजी संकट की तुलना कोविड कुप्रबंधन से की है। उन्होंने कहा कि "नीति शून्य" सरकार के कारण गरीब और प्रवासी श्रमिक पलायन को मजबूर हैं। राहुल ने इसे कूटनीतिक चूक और विनिर्माण क्षेत्र की बर्बादी बताते हुए जनता से चुप्पी तोड़ने का आह्वान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-target-on-the-center-is-chaos-like-covid/article-149249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्र के पास रसोई गैस (एलपीजी) संकट से निपटने की कोई नीति नहीं है और इस समय भी वही अवस्था देखने को मिल रही है जो देश के लोगों ने कोविड के समय देखी थी। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "केंद्र सरकार ने कहा था-एलपीजी संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे और सच में वही किया। बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ गरीबों पर। हर रोज 500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा शहर छोड़ो, गाँव भागो।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो मज़दूर कपड़ा मिल्स और फैक्टरियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। कपड़ा क्षेत्र पहले से ही गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में है। विनिर्माण क्षेत्र दम तोड़ रहा है। राहुल गांधी ने इस संकट की वजह बताते हुए कहा "और यह संकट आया कहाँ से। कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती। जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।"</p>
<p>उन्होंने संकट के समय लोगों को चुप नहीं रहने का आह्वान करते हुए कहा कि सवाल एक ही है कि हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है। चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:01:08 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला: बोले-स्मार्ट सिटी योजना आम नागरिकों के साथ धोखा, ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं   </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की स्मार्ट सिटी परियोजना पर तीखा हमला करते हुए इसे विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि ₹48,000 करोड़ खर्च होने के बावजूद नागरिकों को स्वच्छ पानी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। राहुल ने धंसती सड़कों और दूषित पानी का हवाला देते हुए योजना को जमीनी हकीकत से दूर बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-big-attack-on-the-center-said-smart/article-148518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए मंगलवार को इसे 'धोखा' करार दिया और कहा कि यह योजना अपने उद्देश्य से भटक गई और आम नागरिकों को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा। राहुल गांधी ने एक बयान में आरोप लगाया कि परियोजना के तहत शहरों के समग्र विकास के बजाय सीमित क्षेत्रों में काम कर उसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया, जबकि ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।</p>
<p>उन्होंने कहा "कोई भी शहर तब तक ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, जब तक वह अपने नागरिकों को साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा जैसी बुनियादी गरिमा उपलब्ध नहीं कराता। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 48 हजार करोड़ रुपये खर्च होने और 97 प्रतिशत परियोजनाओं के पूरे होने का दावा किया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है।" कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि कितने शहरों में वास्तव में ठोस बदलाव आया और लोगों के जीवन में क्या सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि दूषित पानी, खुले सीवर, गिरते पुल और धंसती सड़कें इस योजना की विफलता को उजागर करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:26:49 +0530</pubDate>
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                <title>मल्लिकार्जुन खड़गे का केंद्र पर निशाना: कोरोना काल में मजदूरों को राहत देने में मनरेगा को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप, वीबी-जयराम-जी योजना लागू नहीं को लेकर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों मजदूरों का 'काम का अधिकार' छीना जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट गहरा गया है। खरगे ने कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधूरे कार्यों और बढ़ती महंगाई पर चिंता व्यक्त की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mallikarjun-kharge-targets-center-accuses-it-of-ignoring-mnrega-in/article-148473"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/mallikarjun-kharge-33.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा खत्म करने और नया कानून लागू नहीं करने को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए सोमवार को कहा कि कोरोना काल में मजदूरों को राहत देने में इस योजना की अहम भूमिका रही है लेकिन केंद्र ने उसे नजरअंदाज किया है। खड़गे ने कहा "एक ओर मनरेगा पर प्रभावी रूप से रोक जैसी स्थिति बना दी गई है, वहीं दूसरी ओर घोषित वीबी-जयराम-जी योजना अब तक लागू नहीं हो पाई है। कई राज्यों में मनरेगा खत्म करने की खबरें हैं जिसके कारण करोड़ों श्रमिकों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो गया है।"</p>
<p>उन्होंने मनरेगा को लेकर कई राज्यों में आंदोलन होने का दावा किया औऱ कहा कि बिहार के मुजफ्फरपुर में पिछले 87 दिनों से लगभग 12 हजार मजदूर काम न मिलने के कारण आंदोलन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से मनरेगा के तहत काम बंद होने की खबरें आ रही हैं, जिससे ग्रामीण मजदूरों के सामने रोज़गार का संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने मनरेगा को कमजोर कर करोड़ों मजदूरों के 'काम के अधिकार' को छीना है श्रमिकों को पर चोट पहुंचाई है।</p>
<p>खड़गे ने महाराष्ट्र की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों में से 53 प्रतिशत से भी कम कार्य पिछले पांच वर्षों में पूरे हुए हैं, जबकि करीब 2.5 लाख कार्य शुरू ही नहीं हो सके। रसोई गैस की महंगाई और उद्योगों की बदहाली के कारण शहरों से प्रवासी मजदूरों का पलायन बढ़ रहा है, लेकिन गांवों में उनके लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल में मनरेगा ने करोड़ों मजदूरों को राहत दी थी, जिसे आज नजरअंदाज किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>LPG संकट पर बीआरएस का विरोध प्रदर्शन, केटीआर ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना में केटीआर के नेतृत्व में बीआरएस विधायकों ने रसोई गैस की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र पर एलपीजी आपूर्ति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। युद्ध के कारण उपजे संकट और सिलेंडरों का वजन घटाने की आशंका के बीच, केटीआर ने पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/brs-protest-on-lpg-crisis-ktr-targets-central-and-state/article-147669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/k-t-ramarao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने मंगलवार को एलपीजी की कमी को लेकर गन पार्क पर विरोध प्रदर्शन किया और गैस सिलेंडरों के पोस्टर दिखाकर समस्या की गंभीरता को दर्शाया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि युद्ध के बाद उत्पन्न स्थिति के कारण एलपीजी की भारी कमी से आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार भले ही कमी से इनकार कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद गंभीर है। केटीआर ने कहा कि राज्य सरकार ने भी इस मामले में यह कहकर अपनी असमर्थता जताई है कि पेट्रोलियम क्षेत्र केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि भविष्य में 14 किलोग्राम के मानक एलपीजी सिलेंडर को घटाकर 10 किलोग्राम किया जा सकता है।</p>
<p>केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर आम लोगों पर बोझ डालने का आरोप लगाते हुए केटीआर ने कहा कि जनता दो बैलों की लड़ाई में फंसे बछड़े की तरह परेशान हो रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण एलपीजी की कमी अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि एक ओर केंद्र सरकार कमी से इनकार कर रही है, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार आपूर्ति की बाधाओं का हवाला दे रही है, जिससे दोनों ही जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाकर एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और इस संबंध में स्पष्ट बयान जारी करने की मांग की, ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:05:13 +0530</pubDate>
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