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                <title>struggle - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सिस्टम की खामियों में पिस गया सोना का संघर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[सोना का सफर केवल एक नौकरी का नहीं, बल्कि हालातों से लड़कर ऊपर उठने का जुनून था।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sona-s-struggle-crushed-by-systemic-flaws/article-149848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अपनी पुरानी नौकरी (कांस्टेबल ) गंवा चुकीं और नई नौकरी (एसआई 2021) पर संकट के बादल देख, सोना कुमारी आज अपने पीहर में वक्त काट रही हैं। जो सोना कभी अपनी दहाड़ और मेहनत के लिए जानी जाती थीं, आज उन्होंने खुद को घर के एक कमरे में कैद कर लिया है।<br />उनके पति किशोर कुमार कहते हैं कि सिस्टम की खामियों ने एक ईमानदार और संघर्षशील अभ्यर्थी को गुनहगारों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है। सोना कुमारी जिनके लिए साल 2021 किसी बड़े सपने के सच होने जैसा था, लेकिन आज वही सपना एक धुंधली याद और अनकहे दर्द में तब्दील हो गया है। गांव व परिवार के लिये अभिमान दिलाने वाली आज व्यवस्था की अनिश्चितता के कारण अपने ही घर में खामोश बैठी है। संघर्ष के साक्षी व सहभागी रहे पति किशोर की तो मानो सारी तपस्या ही निष्फल चली गयी। वहीं सोना के जीवन को अनिश्चितता ने घेर लिया है,बल्कि मेहनत से हासिल पुरानी नौकरी के भी चले जाने से मानो जीवन की सारी पुंजी ही लुट गयी हो।<br />राजस्थान पुलिस की हाड़ी रानी महिला बटालियन में जब 2009 में एक 19 साल की दुबली-पतली लड़की कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह एक दिन प्रदेश की मेरिट लिस्ट में ( एसआई भर्ती 2021 ) में अपना नाम दर्ज कराएगी। सोना कुमारी का सफर केवल एक नौकरी का नहीं, बल्कि अपने हालातों से लड़कर ऊपर उठने का जुनून था।</p>
<p><strong>छुट्टियों में बुने कामयाबी के सपने</strong><br />एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना नामुमकिन सा होता है, लेकिन मैंने अपनी सीएल (उछ) और पीएल (ढछ) को आराम के लिए नहीं, बल्कि किताबों के लिए बचाया।<br />2014: शादी के बंधन में बंधीं, लेकिन लक्ष्य नहीं बदला।<br />2016: सब-इंस्पेक्टर भर्ती के फिजिकल में दौड़ के आखिरी पॉइंट पर असफल हुईं। उसी साल फअर प्री निकाला, पर मेंस में रह गईं।<br />2018: फिर फअर प्री पास किया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। इन असफलताओं ने मुझे तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया।</p>
<p><strong>वो ऐतिहासिक सफलता और बड़ा फैसला</strong><br />साल 2021 सोना के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। उन्होंने न केवल सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा पास की, बल्कि रउ कैटेगरी में पूरे राजस्थान में सेकंड रैंक हासिल करके सबको चौंका दिया। इस सपने को जीने के लिए उन्होंने एक बहुत बड़ा जोखिम लिया।<br />7 अक्टूबर 2023 सोना ने अपनी 14 साल पुरानी सुरक्षित कांस्टेबल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्हें विश्वास था कि अब वह खाकी के नए और ऊंचे रूतबे के साथ समाज की सेवा करेंगी।</p>
<p><strong>जब अरमानों पर फिरा पानी</strong><br />दिसंबर 2024 में उन्हें बूंदी जिला अलॉट हुआ। ट्रेनिंग का पहला फेज पूरा हुआ, लेकिन जैसे ही फील्ड पोस्टिंग का समय आया, एसआई भर्ती पर उठे विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उन्हें फील्ड ट्रेनिंग से रोक दिया गया। जिस वर्दी को उन्होंने 14 साल ईमानदारी से पहना और जिस पद को पाने के लिए पुरानी नौकरी तक छोड़ दी, आज वही भविष्य अधर में लटका है। भर्ती प्रक्रिया में आई रुकावटों और विवादों ने सोना कुमारी को मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया है।</p>
<p><strong>सोना कुमारी का कहना है</strong><br />शून्य से उठकर, अभावों को पीछे छोड़कर यहाँ तक पहुँची थी। लेकिन आज जब सब कुछ गवां बैठने की नौबत आई है, तो उस दर्द को शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। अब कहानी सुनाने को कुछ बाकी नहीं रहा।सोना की यह कहानी आज राजस्थान के उन हजारों युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रही है, जो मेहनत के दम पर आसमान छूना चाहते हैं, लेकिन सिस्टम की अनिश्चितता उन्हें जमीन पर लाकर पटक देती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:43:44 +0530</pubDate>
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                <title>दो वक्त की रोटी से पहले पानी जुटाना बनी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं रतजगा तो कहीं आंख खुलते ही बर्तन लेकर दौड़ पड़ते लोग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/collecting-water-before-two-meals-a-day-became-a-challenge/article-74274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/photo-size.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मां चर्मण्यवती के तट पर बसे कोटा शहर में जल संकट....सुनने में भले ही अजीब लगे पर ऐसी तस्वीर हर साल शहर में नजर आती है। कहीं, पानी के लिए पूरी रात आंखों में कटती है तो कहीं आंख खुलते ही लोग बर्तन लेकर सड़क पर दौड़ पड़ते हैं। हालात यह है, दो वक्त की रोटी से पहले दो वक्त पानी का जुगाड़ करना चंबल किनारे बसे लोगों के लिए चूनौती बन गया। हालात यह हैं, पानी की मारामारी में काम-धंधे तक छूट जाते हैं। लेकिन, पानी उपलब्ध करवाने  के लिए जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। जलदाय विभाग की घोर लापरवाही के कारण कुन्हाड़ी व बोरखेड़ा के इलाकों की आबादी भयंकर जल संकट से जूझ रही है। </p>
<p><strong>रातभर जागते 150 परिवार</strong><br />कुन्हाड़ी क्षेत्र के बापू नगर में गर्मी की शुरुआत से ही जल संकट गहरा गया। इस इलाके के लोगों का पूरा दिन पानी का जुगाड़ करने में ही बीत जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी देव नारायण मंदिर वाले इलाके में बनी हुई है। यहां करीब 150 से 200 परिवार बूंद-बूंद के लिए रतजगा करने को मजबूर हैं। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाओं की दिनचर्या में सबसे बड़ा काम ही पानी का बंदोबस्त करना है। इन दिनों पानी की किल्लत के चलते लोगों के काम-धंधे तक छूट रहे हैं।</p>
<p><strong>दिनभर हैंडपम्प पर लगती भीड़  </strong><br />कांग्रेस नेता चेतराम शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में पुरूष रातभर जागकर पीने का पानी एकत्रित करते हैं और सुबह से दोपहर तक हैंडपम्प पर  महिलाओं की भीड़ लगी रहती है। हैंडपम्प का पानी खारा होने से पीने लायक नहीं है लेकिन नहाने व कपड़े धोने के लिए तेज धूप में पानी का जुगाड़ करना महिलाओं के लिए मजबूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रेशर नहीं बढ़ाए जाने के कारण नलों में पानी नहीं आता। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल संकट गहरा रहा है। </p>
<p><strong>दिनचर्या बिगड़ गई </strong><br />स्थानीय निवासी पूजा शर्मा कहतीं हैं नलों में पानी नहीं आने से दिनभर पानी का जुगाड़ करना पड़ता है। जिसकी वजह से पूरी दिनचर्या ही बिगड़ गई। पहले तो पानी कम आ रहा था, किसी तरह से काम चल रहा था लेकिन अब तो पूरी तरह से पानी आना बंद हो गया है। खाना बनाने से पहले पानी का इंतजाम करना पड़ता है। घर के काम रूके हुए हैं।  घर पर छोटे बच्चे हैं, पानी की कमी से कई तरह की परेशानी होती है। जलदाय अधिकारियों को मौखिक व लिखित में समस्या बताई फिर भी समाधान नहीं हुआ। </p>
<p><strong>15 दिनों से नलों में नहीं पानी </strong><br />बापू नगर वार्ड 69 निवासी युवा कांगे्रस नेता लोकेश शर्मा ने बताया कि इलाके में करीब 15-20 दिन से नलों में पानी नहीं आ रहा। शाम को आधे घंटे के लिए पानीआता है लेकिन वह भी ढलान वाले क्षेत्र में जबकि, ऊंचाई वाले क्षेत्र में तो रात 12 से 1 बजे के बीच धीमी गति से पानी आता है। ऐसे में लोगों को पूरी रात जागकर जरूरत का पानी एकत्रित करना पड़ता है। पहले तो सुबह-शाम नलों में पानी आता था लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह भी नहीं आ रहा। इसकी शिकायत जलदाय विभाग के अधिकारियों से कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ। हालात यह है, रातभर मोटरें चलती हैं, जिससे बिजली के बिल दोगुने बढ़ गए। अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। </p>
<p><strong>छूट रही मजदूरी </strong><br />सूर्य कॉलोनी निवासी राकेश मेघवाल ने बताया कि पानी का जुगाड़ करने में कई घंटे तो कभी पूरा दिन ही बीत जाता है। कम दबाव से जलापूर्ति से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। हालात यह है, पानी का जुगाड़ करने के चक्कर में कई लोगों की मजदूरी तक छूट जाती है। कई बार तो लोग सुबह आंख खुलते ही बर्तन लेकर हैंडपम्प की ओर दौड़ पड़ते हैं। दोपहर तक पानी लाने ले जाने का सिलसिला चलता रहता है।  </p>
<p><strong>हैंडपम्प उगल रहा गंदा पानी</strong><br />फैंड्स कॉलोनी निवासी भैरुलाल गुर्जर बताते हैं, रेलवे पटरी स्थित बस्ती बसे 60 साल हो गए लेकिन आज तक पाइप लाइन तक नहीं पहुंची। यहां गंदे नाले के पास एक हैंडपम्प लगा हुआ है जिसमें गंदा व बदबूदार पानी आ आता है। उससे सिर्फ नहा सकते हैं, कपड़े धो सकते हैं। पीने का पानी 500 मीटर सरकारी हैंडपम्प से लाना पड़ता है। जहां सुबह से शाम तक लंबी कतारें लगी रहती है। हालात यह हैं 500 मीटर कड़ी धूप में लोगों को पैदल जाकर पानी लाना पड़ता है।  </p>
<p><strong>एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों में जल संकट</strong><br />बोरखेड़ा क्षेत्र की एक दर्जन से अधिक कॉलोनियां जल संकट से जूझ रही है। फ्रेंड्स कॉलोनी, लाजपत नगर, सूर्य नगर, आदित्य नगर सहित अन्य कॉलोनियों में दो वक्त ही पानी आता है, वह भी धीमी गति से।  जरूरत का पानी जुटाने के लिए लोग मोटरें चलाते हैं, जिससे आखिरी छोर तक पानी पहुंच ही नहीं पाता। ऐसे में दिनभर हैंडपम्प पर भीड़ लगी रहती है। जलदाय विभाग की लापरवाही के कारण लोग दोहरी मार झेल रहे हैं। पानी के लिए तरस रहे और रातभर मोटर चलने दो गुना बिजली का बिल भुगत रहे हैं। फ्रेंड्स कॉलोनी में करीब 20 पुरानी पाइप लाइन है,जो जगह जगह से लीकेज है। घरों तक पानी पहुंचने से पहले ही व्यर्थ बह जाता है। <br /><strong>- बबलू कसाना, पार्षद, वार्ड 17 बोरखेड़ा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 15:24:42 +0530</pubDate>
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                <title>किसान के बेटे ने शिक्षक भर्ती में पहली रैंक हासिल की, चाय वाले का बेटा बना टीचर</title>
                                    <description><![CDATA[चयनित अभ्यर्थियों को कस्बेवासियों व परिवारजनों ने बधाई दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/farmer-s-son-secured-first-rank-in-teacher-recruitment--tea-seller-s-son-also-became-a-teacher/article-57503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/kisan-k-bete-ne-shikshak-bhrti-me-phli-rank-hasil-ki,-chai-wale-ka-beta-bhi-bna-teacher...harnavdashahji,-baran-news-19-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। बिना संघर्ष के चमक नहीं मिलती, जो जल रहा है तिल-तिल उसी दीए में उजाला होता है। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता। इन्हीं कहावतों को सार्थक कर दिखाया कस्बे के उन युवा अभ्यर्थियों ने जिन्होंने पारिवारिक और आर्थिक स्थितियां विपरीत होने के बावजूद मेहनत, लगन व कठोर परिश्रम से मंजिल तय कर अपने गरीब मां बाप ओर परिवारजनों का नाम रोशन किया। इसमें किसान के बेटे सोनू कुशवाह ने जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में पहली रैंक हासिल की। चाय वाले के बेटे ने भी शिक्षक बनने मुकाम हासिल किया। पानी पतासे बेचकर परिवार चलाते हुए दिनेश राठौर ने भी अपने टीचर बनने का सपना पूरा करने में कामयाबी हासिल की। कस्बे के इस प्रार छह अभ्यर्थियों की पारिवारिक व आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद भी हालही में आए तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल करने से परिवार व रिश्तेदारों को ही नहीं कस्बेवासियों को खुशी हुई है। चयनित अभ्यर्थियों को कस्बेवासियों व परिवारजनों ने बधाई दी। </p>
<p><strong>मजदूर के बेटे ने मेहनत कर मुकाम पाया</strong><br />कस्बे के असलम बेग के बेटे दानिश का तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में चयन हुआ है। पिता मजदूरी करते हैं, माता सिलाई कर परिवार का जीवन-यापन करती है। दानिश ने पारिवारिक व आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी मेहनत जारी रखी। वे बताते हैं कि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने के साथ साथ कार्य भी किया। बड़ी बहन भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही है। इसी प्रकार 49 मील रेगर बस्ती निवासी पूरणमल रेगर पुत्र चतुर्भुज रेगर का तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में चयन हुआ है। इनके पिता मजदूरी कर घर चलाते हैं। माता का निधन हो गया है। इनकी पारिवारिक व आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद भी मेहनत जारी रखी। रेगर ने कई कठिनाइयों का सामना किया। पूरणमल का शिक्षक भर्ती में चयन होने पर परिवार में खुशी का माहौल है।</p>
<p>मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य को सही दिशा में मेहनत करने के पश्चात समय आने पर जो फल प्राप्त होता है, वह सुकून भरा होता हैं। छीपाबड़ौद रोड पर टी स्टॉल लगाकर परिवार चलाने वाले कुंजबिहारी प्रजापति के पुत्र हेमंत प्रजापति ने भी न केवल माता-पिता का गर्व से सीना तान दिया, बल्कि परिवार का नाम भी रोशन किया। पारिवारिक व आर्थिक स्थिति शुरू से ही खराब होने के बावजूद माता पिता ने मेहनत कर उच्च शिक्षा हासिल करवाई।</p>
<p><strong>गरीब भाई-बहन गजेंद्र व मनीषा ने भी मान बढाया</strong><br />नागर मोहल्ला निवासी भाई-बहन गजेंद्र नागर व मनीषा नागर ने एक साथ तृतीय श्रेणी शिक्षक बनकर मेहनत मजदूरी से घर का गुजारा करने वाली मां का सपना न केवल पूरा किया, बल्कि समाज में अपना मान भी बढाया है। मां ने मेहनत-मजदूरी कर कर बच्चों को पढ़ाया। शिक्षक भर्ती परीक्षा 2022 में जनरल फाइट कर तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में दोनों भाई बहन का एक साथ चयन हुआ है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी दोनों ने शिक्षा जारी रखी और सफलता हासिल की। दोनों भाई-बहन अपनी इय सफलता का श्रेय कड़ी लगन, शिक्षकों और परिजन को देते हैं।</p>
<p><strong>पानी पतासे बेचकर परिवार को पाला फिर टीचर बनने का सपना पूरा किया</strong><br />दिनेश राठौर पतासी का ठेला लगाकर अपने घर का खर्चा चलाता है। दिनेश राठौर ने ठेला लगाने के बाद अपनी पढ़ाई भी जारी रखते हुए 7 साल पढ़ाई कर शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल की। इसके लिए वो अपने माता पिता व गुरुजनों को श्रय देते हैं। इसी प्रकार कमलेश कुशवाह ने खेती-बाडी व सब्जी बेचकर परिवार चलाने वाले पिता के पुत्र कमलेश कुशवाह ने भी विपरीत हालात में उच्च शिक्षा पढकर शिक्षक बनने का गौरव हासिल किया।</p>
<p><strong>किसान के बेटे सोनू कुशवाह ने जिले में पहली रैंक की हासिल</strong><br />श्रेणी अध्यापक शिक्षक भर्ती में बारां जिले में प्रथम रैंक हासिल की है। जिसके बाद से गांव व परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं आॅल राजस्थान में 245 वीं रैंक प्राप्त की। ग्रामीणों व परिवारजनों ने अभ्यर्थी मोतीपुरा कलां निवासी सोनू कुशवाह तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती में अंतिम रूप से चयनित होने पर बधाई दी। चयनित सोनू कुशवाह ने इस सफलता का श्रेय अपने संयुक्त परिवार को दिया है। बता दे कि सोनू के  पिता-माता किसान है। यह पूरा परिवार खेती से जुड़ा हुआ है। सोनू कुशवाह बताते हैं कि संघर्ष की हमेशा जीत होती है। कठिन मेहनत करने से सफलता जरूर मिलती है। सोनू ने नर्सरी से ही सरकारी विद्यालय में अध्ययन कर उच्च शिक्षा प्राप्त की। किसान माता-पिता ने खेती किसानी कर उच्च शिक्षा हासिल करवाई। पढ़ने के लिए शहर में जाने के लिए और कोचिंग के पैसे न होने के कारण घर पर रहकर स्वयं अध्ययन किया। पिछली तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती की तैयारी करने के लिए छबड़ा शहर में किराए से रहकर पढ़ाई की। लेकिन दो अंकों से असफल रहे। फिर से कठिन मेहनत कर तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2022 में चयन होकर माता-पिता, परिवार, गुरुजनों और गांव नाम रोशन किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 19 Sep 2023 16:23:45 +0530</pubDate>
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                <title>फादर्स डे : राजनीतिक दिग्गजों ने सोशल मीडिया पर अपलोड की पिता की फोटो, बताया संघर्ष की प्रेरणा</title>
                                    <description><![CDATA[ फादर्स डे पर समाज के हर वर्ग के लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के साथ पुरानी फोटो शेयर करते हुए अनुभव लिखे। राजनीतिक जगत के कई दिग्गजों ने भी अपने पिता के साथ फोटो शेयर की। भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं ने भी ऐसे फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fathers-day-political-veterans-uploaded-fathers-photo-on-social-media/article-12644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/fathers-day-1.jpg-jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> फादर्स डे पर समाज के हर वर्ग के लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के साथ पुरानी फोटो शेयर करते हुए अनुभव लिखे। राजनीतिक जगत के कई दिग्गजों ने भी अपने पिता के साथ फोटो शेयर की। भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं ने भी ऐसे फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किए।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>कांग्रेस के इन नेताओं के फोटो रहे चर्चित</strong></span><br /><br />पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पिता वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजेश पायलट के साथ पुराना फोटो शेयर करते हुए लिखा कि पिता-पुत्र का बंधन एक बहुत ही खास है। मैं वास्तव में एक पिता के लिए धन्य था, जो मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी थे। उनकी याद हर रोज आती है।<br /><br />विधायक दिव्या मदेरणा ने पिता महिपाल मदेरणा के साथ बचपन की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि आज फादर्स डे है, लेकिन मेरे और मेरी बहन रूबल के लिए हर दिन फादर्स डे है। हमारी दुनिया हमारे पिता में है और हमेशा रहेगी। मेरी बहन हर दिन मेरे पिता के लिए पत्र लिखती है। दिव्या ने पत्र का एक अंश भी शेयर किया।</p>
<p>खेल मंत्री अशोक चांदना ने अपने पिता देवा गुर्जर के साथ फोटो शेयर कर लिखा कि सत्य के लिए लड़ना, उसके लिए जीवन में हमेशा संघर्ष करना और निर्भयता के साथ हमेशा सेवा करना, पिता द्वारा दिया गया संकल्प ही मेरे जीवन की प्रेरणा है। इस दौरान चांदना ने अपने पिता के अनुभव को भी बताया।</p>
<p>शिक्षा राज्यमंत्री जाहिदा खान ने अपने पिता चौधरी तैय्यब हुसैन की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि आपके ही नाम से जानी जाती हूं वालिद, भला इससे बड़ी शोहरत मेरे लिए क्या होगी। अल्लाह मेरे वालिद मरहूम चौधरी तैय्यब हुसैन को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम आता फरमाए। इस तरह से उन्होंने अपने अनुभवों को शेयर किया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>वसुन्धरा राजे</strong>  </span></p>
<p>पूर्व सीएम एवं भाजपा की राष्टÑीय उपाध्यक्ष वसुन्धरा राजे ने इस मौके पर अपने पिता जीवाजीराव सिन्धिया और खुद के बचपन को याद किया। उन्होंने ट्वीटर पर खुद की पांच-छह साल की उम्र में पिता के साथ की फोटो अपलोड कर फादर्स डे पर अपनी भावनाओं को जाहिर किया है। सभी को फादर्स डे की बधाई भी दी है।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>गजेन्द्र सिंह शेखावत</strong> </span></p>
<p>केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री एवं जोधपुर सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने पिता और परिजनों की खुद के साथ फोटो ट्वीटर पर शेयर की है। पिता की अहमियत बताते हुए लिखा है कि पिता जिम्मेदारियों के सर्वोच्च प्रतीक की संज्ञा है। वे समयानुसार व्यवहार कर परिस्थितियों की परख कराते हैं। संतान की सफलता में वस्तुत: पिता का प्रयास छिपा होता है। आज उनके समक्ष अंतर्मन की कृतज्ञता समर्पित करने का विशेष दिवस है। यह लिखते हुए सभी को फादर्स डे की शुभकामनाएं दी है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>कैलाश चौधरी</strong> </span> </p>
<p>केन्द्रीय राज्यमंत्री और बाड़मेर सांसद कैलाश चौधरी ने अपने ट्वीटर पर पिता का आशीर्वाद लेते हुए फोटो अपलोड की है। साथ ही लिखा है कि मेरे जीवन के अमूल्य व्यक्ति मेरे पिताजी ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी दी हुई शिक्षा हर कठिन घड़ी में मेरा मार्ग प्रशस्त करती है। आज पितृ दिवस पर मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं।</p>
<p><br />मेरे पिता स्वर्गीय श्री जीवराज सोनी (अगरोया) संत प्रवृति के इंसान थे। भगवान के अनन्य भक्त थे। वे मेरे लिए गुरु और भगवान दोनों ही थे। उनकी प्रेरणा से हर सफलता अर्जित की। 1982 में ब्रेन ट्यूमर होने के कारण अस्पताल में भर्ती हुए। मैं उस समय फर्स्ट ईयर में था। 13 दिन तक उन्होंने जीवन का शाश्वत सत्य बताया। मैं आज भी खुद को उनके बिना अकेला महसूस करता हूं। उन्होंने साफ-सुथरा जीवन जीना सिखाया।<strong> -भगवान लाल सोनी, महानिदेशक</strong></p>
<p>भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो राजस्थानुंमेरे पिता श्री अमरनाथ सिंह गरीब घर से थे। उन्होंने बाबू की नौकरी से शुरुआत की और कलक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बड़ी कठिनाइयों का सहज और धैर्य से सामना किया। सही रास्ते पर चलना हमने उनसे विरासत में सीखा है। सत्य के साथ खड़े रहना और सही बात बेबाकी से बोलना उनसे ही सीखा है। ये दोनों ही सीख आज मेरी भी ताकत है। आज अपने पैसों से अपना पेट पाल रहा हूं, मेरी हर ख्वाहिश मेरे पापा ने पूरी की है। <br /><strong>-विकास कुमार, महानिरीक्षक पुलिस राजस्थान</strong><br /><br /><br /><br /><br /></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 14:45:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सात घंटे जिंदगी और मौत से संघर्ष के बाद महिला ने दम तोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[भवानीमंडी मेगा हाइवे पर रविवार रात तीर्थयात्रियों की कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई। इसमें महिला ने सात घंटे जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया जबकि दो लोग गंभीर घायल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/after-seven-hours-of-struggle-with-life-and-death--the-woman-died/article-12063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/33.jpg" alt=""></a><br /><p>झालरापाटन। भवानीमंडी मेगा हाइवे पर रविवार रात तीर्थयात्रियों की कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई। इसमें महिला ने सात घंटे जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया जबकि दो लोग गंभीर घायल हैं। कार में कुल 6 लोग सवार थे जिनमें मृतका का 5 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। कार सवार सभी लोग रिश्तेदार हैं। </p>
<p>पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के भिंड मुरैना निवासी परिवार 11 जून की रात को इंदौर से खाटू श्याम दर्शन के लिए गया था, यहां से रविवार रात ये तीर्थयात्री वापस इंदौर के लिए जा रहे थे कि सिंघानिया टोल नाका के पास इनकी कार डिवाइडर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना में घायल महिला पूनम शर्मा की झालावाड़ राजकीय जिला चिकित्सालय में सोमवार को उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। उसका भाई विष्णु शर्मा गंभीर रूप से घायल है। उसका चिकित्सालय में उपचार चल रहा है। कार में मृतका का 5 वर्षीय पुत्र अर्थव भी मौजूद था। परिजनों ने बताया कि यह बालक उसकी मां के बिल्कुल पास चिपक कर बैठा था लेकिन इतने बड़े हादसे में उसको एक खरोच तक नहीं आई। इसी तरह कार सवार आशिक व शुभम भी इस दुर्घटना में पूरी तरह से सुरक्षित बच गए लेकिन कार चला रहा धर्मेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया।</p>
<p>राहगीरों ने पहुंचाया अस्पताल</p>
<p>कार पलटने के बाद मेगा हाइवे पर गुजर रहे राहगीरों ने सभी घायलों को जिला चिकित्सालय पहुंचाया। सूचना मिलने के बाद सदर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और घायलों के बयान लिए। दुर्घटना में घायल पूनम शर्मा की हालत सबसे ज्यादा गंभीर थी। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड तक पहुंचते-पहुंचते उसके हृदय ने भी काम करना बंद कर दिया था, लेकिन यहां तैनात चिकित्सकों ने सीपीआर कर उसकी जान बचाई जिसके बाद उसे अस्पताल के आईसीयू वेंटीलेटर पर रखा गया था, लेकिन यहां मौत से जंग लड़ते हुए पूनम की सोमवार दोपहर को मृत्यु हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 12:11:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बाघिन के लिए दो बाघों में होता है संघर्ष </title>
                                    <description><![CDATA[रणथम्भौर बाघ परियोजना में नर और मादा बाघ का लिंगानुपात गड़बड़ा गया है। रणथम्भौर में बाघ और बाघिन का लिंगानुपात अनुपात 1, 1.3 है, जबकि एक बाघ के साथ तीन से चार बाघिन होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--sawaimadhopur--struggle-between-2-tigers-for-tigress/article-8540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/tiger--copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर/ सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर बाघ परियोजना में नर और मादा बाघ का लिंगानुपात गड़बड़ा गया है। रणथम्भौर में बाघ और बाघिन का लिंगानुपात अनुपात 1, 1.3 है, जबकि एक बाघ के साथ तीन से चार बाघिन होनी चाहिए। एक नर बाघ, मादा बाघिन को अपने साथ अपनी टेरेटरी में रखने के लिए दूसरे नर बाघ से टकरा जाता है। सूत्रों के अनुसार बाघ परियोजना से बड़ी संख्या में बाघों के पलायन करने का एक बड़ा कारण यह भी है कि वहां पर एक बाघ के पीछे एक ही बाघिन है, जबकि आदर्श स्थिति है कि एक बाघ के साथ तीन या चार बाघिन होनी चाहिए।</p>
<p>वन मंत्री ने बताया कि बाघ परियोजना में 23 नर बाघ और 30 मादा बाघिन है। वर्तमान में नर एवं मादा बाघ का अनुपात 1,1.3 हो गया है, जो असामान्य है। अनेक शोधों में खुलासा हुआ है कि एक बाघ की टेरेटरी काफी बड़ी होती है, जिसमें बाघिन तो रह सकती है, लेकिन कोई दूसरा बाघ उसमें विचरण नहीं कर सकता है। ऐसे में टेरेटरी और बाघिन के लिए दो बाघों में संघर्ष होता है और नर बाघ जंगल छोड़कर कहीं दूर चला जाता है।</p>
<p><strong>राज्य में सर्वाधिक बाघ रणथम्भौर बाघ परियोजना में</strong></p>
<p>बाघ परियोजना की स्थापना 1973 में हुई थी। बाघ परियोजना में वर्ष 2019 में 66, 2020 में 68 और 2021 में 81 हो गई है।</p>
<p>लिंगानुपात गड़बड़ाना ठीक नहीं माना जाता है। <br /><strong>- डॉ. डीएन पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक,राजस्थान सरकार</strong></p>
<p>आमतौर पर एक बाघ के साथ तीन या चार बाघिन होनी चाहिए। यदि बाघिन की संख्या कम है तो बाघों में बाघिन को लेकर बाघों में टकराव होता है, जिससे बाघ जंगल छोड़ देते है। <br />- <strong>राजपाल सिंह, प्रख्यात बाघ विशेषज्ञ,जयपुर</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 11:55:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंततः उत्तरप्रदेश सरकार को देशभर से उठ रही आवाज़ को सुनना पड़ा: CM गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार को मामले में हस्तक्षेप कर सुनिश्चित करना चाहिये कि दोषी गिरफ्तार हों और पीड़ितों को न्याय मिले-गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%A4%E0%A4%83-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A0-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE--cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4/article-1475"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ashok-gehlot1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल, प्रियंका और कांग्रेस पार्टी द्वारा लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के खिलाफ़ संघर्ष और बीजेपी सरकार की तानाशाही पूरा देश देख रहा है। अंततः उत्तरप्रदेश सरकार को देशभर से उठ रही आवाज़ को सुनना पड़ा और प्रियंका  को 52 घंटे की गैरकानूनी हिरासत से रिहा किया गया है। गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि राहुल, प्रियंका और कांग्रेस नेता लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में मारे गए किसानों के शोक संतप्त परिजनों से मिलने, उन्हें ढांढस बंधाने के लिए वहां जा रहे हैं। अभी तक किसी भी अपराधी को गिरफ्तार नहीं करना आश्चर्यजनक है, केन्द्र सरकार को मामले में हस्तक्षेप कर सुनिश्चित करना चाहिये कि दोषी गिरफ्तार हों और पीड़ितों को न्याय मिले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Oct 2021 16:28:37 +0530</pubDate>
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