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                <title>उत्तर चला रहा पुराने से काम, दक्षिण ने बढ़ाए कई गुना दाम</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा दक्षिण में सामुदायिक भवनों की पिछले तीन सप्ताह से बुकिंग ही नहीं हुई है
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/north-is-running-the-same-old-work--south-has-increased-the-prices-several-times/article-111091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  एक ही शहर में नगर निगम  कोटा उत्तर व दक्षिण के सामुदायिक भवनों के किराए में  इतना अधिक अंतर है कि उत्तर में किराया कम और दक्षिण में अधिक है। हालत यह है कि दक्षिण निगम में जब से सामुदायिक भवनों का किराया बढ़ाया गया है उसके बाद से एक भी सामुदायिक भवन की बुकिंग नहीं हुई है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में छोटे-बड़े करीब 15-15 सामुदायिक भवन है। जो बरसों पुराने होने से उनमें पर्याप्त सुविधाएं तक नहीं है। उसके बावजूद भी इनका किराया कम होने व छोटे- आयोजनों के लिए लोग निगम के सामुदायिक भवनों का उपयोग करते रहे हैं। निगम की तुलना में केडीए के सामुदायिक भवनों का किराया अधिक है। लेकिन केडीए के सामुदायिक भवन बड़े और सुविधा युक्त भी है। जिससे लोगों को उनका किराया अधिक होने पर भी बुक करवाने में कोई समस्या नहीं है।  बिना सुविधाओं के भी लोग निगम के सामुदायिक भवनों को बुक कर उनका उपयोग कर रहे थे। कोटा उत्तर निगम में अभी भी किया जा रहा है। लेकिन कोटा दक्षिण में सामुदायिक भवनों की पिछले तीन सप्ताह से बुकिंग ही नहीं हुई है। </p>
<p><strong>पार्षदों ने जताया विरोध, नहीं हुआ असर</strong><br />निगम आयुक्त द्वारा 24 मार्च को सामुदायिक भवनों का किराया बढ़ाने का आदेश जारी होने के साथ ही कांग्रेस पार्षदों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया था। पार्षद अनुराग गौतम, कपिल शर्मा, गफ्फार हुसैन, प्रफुल्ल पाठक समेत कई पार्षदों ने विरोध करते हुए किराए को कम करने की मांग की थी।  उनका कहना था कि इतना अधिक किराया बढ़ाकर निगम जनता पर आर्थिक भार डाल रहा है। जबकि निगम के सामुदायिक भवन सस्ते होने से अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग ही इनका उपयोग करते हैं।  पार्षदों का कहना है कि किराया बढ़ाने से न तो  सामुदायिक भवनों की बुकिंग हो रही है। जिससे  न तो लोगों को उसका लाभ मिल रहा है और न ही निगम को राजस्व प्राप्त हो रहा है। दोनों तरफ से नुकसान भुगतना पड़ रहा है। लेकिन अभी तक उस पर कोई निर्णय नहीं किया गया। </p>
<p><strong>24 मार्च से लागू किया बढ़ा किराया</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से गत माह 24 मार्च को आदेश जारी कर उनके क्षेत्र के सभी सामुदायिक भवनों, भीतरिया कुंड बारहद्वारी का ुकराया 5 से 10 गुना बढ़ा दिया है।  निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार सामदायिक भवनों की बुकिंग निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से की जाती है। लेकिन किराया बढ़ाने के बाद 24 मार्च से कोटा दक्षिण निगम में न तो भीतरिया कुंड बारहद्वारी की बुकिंग हुई है और न ही सामुदिायिक भवनों की। जिससे कम किराए में निगम को जो राजस्व प्राप्त हो रहा था वह भी बंद हो गया है। </p>
<p><strong>जानकारी कर रहे लेकिन बुक नहीं</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार किराया बढ़ाने से पहले भीतरिया कुंड समेत अन्य सामुदायिक भवनों की नियमित बुकिंग हो रही थी। हालांकि बुकिंग आॅफ लाइन ही की जाती है। लेकिन हालत यह है कि सबसे अधिक आयोजनों के लिए बुक होने वाला भीतरिया कुंड तक में 24 मार्च के बाद कोई बुकिंग नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार लोग सामुदायिक भवन व भीतरिया कुंड की बारहद्वारी को बुक तो करना चाहते है। यही कारण है कि निगम में इसकी जानकारी भी कर रहे है। साथ ही यह भी पूछ रहे हैं कि  किराया कम हुआ या नहीं। जवाब नहीं मिलने पर वे दोबारा  लौटकर ही नहीं आ रहे। </p>
<p> नगर निगम के सामुदायिक भवन व भीतरिया कुंड के बारहद्वारी सस्ते होने से अधिक लोग इनका उपयोग कर पा रहे थे। लेकिन निगम ने बिना उनमें सुधार किए उनका किराया इतना अधिक बढ़ा दिया कि आम आदमी उनका किराया देखकर ही घबराने लगा है। निगम के सामुदायिक भवनों में सुविधाएं नहीं होने से साथ ही ये छोटे भी है। ऐसे में इनका किराया बढ़ाने से आम आदमी पर आर्थिक भार डाला जा रहा है। <br /><strong>- राजेन्द्र सिंह, शिवपुरा</strong></p>
<p>छावनी समेत कई जगह पर निगम के सामुदायिक भवन तो हैं लेकिन उनकी दशा इतनी अधिक खराब हो रही है कि उनका उपयोग करने से पहले लोग उसी दशा देखकर ही दूर भागते है। लेकिन किराया कम होने से कई लोग इनका उपयोग भी कर रहे थे। वहीं निगम ने बिना इनकी मरम्मत करवाए और सुविधाएं बढ़ाए बिना किराया बढ़ा दिया जिससे मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों के लिए समस्या खड़ी कर दी है। वे इन्हें किराए पर लेना तो चाहते हैं लेकिन किराया पहले से कई  गुना बढ़ाने पर इनका उपयोग नहीं कर रहे हैं। <br /><strong>- वल्लभ अग्रवाल, छावनी</strong></p>
<p><strong>महापौर ने लिखा था यृू ओ नोट</strong><br />इधर आयुक्त द्वारा किराया बढ़ाए जाने का आदेश जारी होते ही कोटा दक्षिण निगम के महापौर राजीव अग्रवाल ने उसी दिन आयुक्त के नाम यू ओ नोट लिखा था। जिसमें बढ़ाए गए किराए को आगामी आदेश तक स्थगित रखने के लिए निर्देशित किया गया था।  लेकिन हालत यह है कि तीन सप्ताह होने के बाद भी न तो यू ओ नोट पर कोई कार्रवाई की गई और न ही उसका जवाब दिया गया। </p>
<p>निगम के सामुदायिक भवनों का किराया इतना अधिक बढ़ाना जनता पर सीधा आर्थिक भार डालना है। किराया बढ़ाने की जानकारी मिलते ही आयुक्त को यू ओ नोट लिख दिया था। जिसमें बढ़े हुए किराए को फिलहाल स्थगित रखने के लिए निर्देशित किया था। लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ना ही आयुक्त ने यू ओ नोट का कोई जवाब दिया है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>नगर निगम कोटा उत्तर में सामुदायिक भवनों का किराया नहीं बढ़ाया है। पुरानी दर से ही किराया लिया जा रहा है। वहीं निगम के सामुदायिक भवनों की नियमित बुकिंग भी हो रही है। <br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:31:39 +0530</pubDate>
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