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                <title>jd vance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शांति की कोशिश नाकाम : डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी घोषण ; हॉर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य की नाकेबंदी के बाद तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत की वृद्धि, ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार</title>
                                    <description><![CDATA[हॉर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल बाजार में भूचाल आ गया है। ब्रेंट क्रूड $102 के पार पहुंच गया, जबकि तेल की कीमतों में 8% का उछाल दर्ज किया गया। शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/peace-efforts-fail-donald-trumps-big-announcement-oil-prices-rise/article-150158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump--and-iran.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत का उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार दोपहर (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) "ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से निकलने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकेबंदी शुरू करने का संकल्प लिया। जून का ब्रेंट क्रूड वायदा रविवार रात (भारतीय समयानुसार सोमवार तड़के 3:31 बजे) तक पिछले बंद भाव से 7.76 प्रतिशत बढ़कर 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि मई का डब्ल्यू.टी.आई. वायदा 8.2 प्रतिशत बढ़कर 104.51 डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात को ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते की घोषणा की थी, जिसके बाद शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हुई थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने रविवार सुबह घोषणा की कि लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के स्वदेश वापस लौट रहा है।</p>
<p>इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ही घोषणा की कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और वहां से निकलने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जिन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:56:05 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम : दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, दोनों देश लौटे अपने देश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। जेडी वेंस ने ईरान पर परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया, वहीं ईरान ने अमेरिकी शर्तों को 'अत्यधिक मांगें' करार दिया। इस विफलता ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव और अनिश्चितता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच की बातचीत नाकाम हो गई है और दोनों पक्ष इस नाकामी के लिए एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का काम कर रहे हैं। अमेरिका ने एक ओर जहां समझौते की शर्तों को ठुकराने के लिए ईरान को दोषी ठहराया, वहीं ईरान ने कहा कि बातचीत बिना किसी नतीजे के इसलिए खत्म हो गई क्योंकि अमेरिका ने 'अत्यधिक मांगें' पेश कीं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे बिना किसी समझौते के स्वदेश लौट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौता न हो पाना 'अमेरिका के लिए बुरी खबर होने से कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।'</p><p>जेडी वेंस ने स्वदेश रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, "हालांकि कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई लेकिन ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया।" ईरान ने कहा कि अमेरिकी टीम की बहुत अधिक मांगों और महत्वाकांक्षाओं के कारण दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। ईरान ने अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने पर बल दिया था। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका के लिए मुख्य मुद्दा यह था कि क्या ईरान परमाणु हथियार न बनाने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जताने को तैयार है।</p><p>उन्होंने कहा, "सवाल सीधा सा है, क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की कोई बुनियादी प्रतिबद्धता नजर आती है-सिर्फ अभी के लिए नहीं, सिर्फ दो साल बाद के लिए नहीं बल्कि लंबे समय के लिए? हमें अभी तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नजर नहीं आई है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर हमें ऐसी प्रतिबद्धता देखने को मिलेगी।" जेडी वेंस ने कहा कि हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 'नष्ट' हो चुका है, फिर भी भविष्य में परमाणु हथियारों के विकास को रोकने के लिए एक स्पष्ट और स्थायी प्रतिबद्धता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव उसका 'अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव' था।</p><p>जेडी वेंस ने कहा, "हमने यह बहुत साफ कर दिया है कि हमारी 'रेड लाइन' (सीमाएं) क्या हैं, किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार हैं और किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। ईरान ने कहा कि लगभग 21 घंटे तक चली बातचीत के दौरान उनकी वार्ता टीम ने विभिन्न राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों के साथ-साथ शांतिपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ईरान के लोगों के बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' को पूरा होने से रोक दिया।</p><p>ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने कहा कि जहां ईरान ने कई 'भविष्य-उन्मुखी पहलें' सामने रखीं, वहीं अमेरिका अंततः ईरानी पक्ष का 'भरोसा जीतने' में विफल रहा। गालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैंने बातचीत से पहले ही इस बात पर बल दिया था कि हमारे पास जरूरी सद्भावना और इरादा है लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हम दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं करते।" ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तसनीम' ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध के जरिए हासिल करने में विफल रहे थे। इनमें होर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य का मुद्दा और देश से परमाणु सामग्री को हटाना शामिल था। तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रयास को विफल कर दिया।</p><p>उन्होंने कहा, "मेरे सहयोगियों ने भविष्य-उन्मुखी पहलें पेश कीं लेकिन दूसरा पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में विफल रहा।" उन्होंने कहा, "अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझा और अब यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं। हमारा मानना है कि सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'शक्ति की कूटनीति' भी एक और दृष्टिकोण है। हम ईरानियों द्वारा चालीस दिनों तक किए गए राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों की उपलब्धियों को मजबूत करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।" अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल थे, जबकि ईरानी टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और विशेषज्ञ शामिल थे।</p><p>तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी टीम ने विभिन्न पहलें पेश करके अमेरिकी पक्ष को एक साझा रूपरेखा पर पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की लेकिन अत्यधिक मांगों के प्रति अमेरिकी 'लालच' ने उन्हें तार्किकता और यथार्थवाद से बहुत दूर धकेल दिया। वैंस ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कम से कम आधा दर्जन बार बात की और दोनों पक्षों के बीच मतभेद के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ा था।</p><p>ईरानी सरकार ने पहले कहा था कि बातचीत जारी रहेगी और दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे। इस्लामाबाद में हुई यह बातचीत एक दशक से भी अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी बैठक थी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय चर्चा थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा। वे दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों के शोक में काले कपड़े पहने हुए थे। वे उन 170 छात्रों के जूते और बैग अपने साथ लाए थे, जो युद्ध की शुरुआत में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई अमेरिकी बमबारी में मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:00:35 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले किले में तब्दील हुआ इस्लामाबाद : ब्‍लू बुक प्रोटोकॉल लागू, C-130 विमान सहित 10,000 जवान तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच होने वाली इस वार्ता का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और युद्धविराम को स्थायी बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप की यह कूटनीतिक पहल वैश्विक तेल बाजार और शांति के लिए निर्णायक साबित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/islamabad-transformed-into-a-fort-before-us-iran-talks-blue-book/article-149855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan1.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत को लेकर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। यह बातचीत पश्चिम एशिया में छह हफ़्ते तक चले युद्ध के बाद पहली बार हो रही है। इस युद्ध में हज़ारों लोग मारे गए हैं और वैश्विक तेल बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पूरे इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, खासकर उन सड़कों पर जो 'रेड ज़ोन' की ओर जाती हैं, जहाँ सरकार की अहम इमारतें स्थित हैं। अधिकारियों ने दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है। साथ ही, भारी संख्या में सेना तैनात की गयी है और जगह-जगह तलाशी केंद्र बनाए गए हैं। विदेश मंत्रालय से सटा हुआ 'सेरेना होटल' बातचीत के स्थल के तौर पर पूरी तरह सील कर दिया गया है।</p>
<p>उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ़ भी शामिल हैं। इन सभी के शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचने की उम्मीद है। ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपनी टीम की पुष्टि नहीं की है, हालाँकि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ईरानी पक्ष का नेतृत्व करेंगे। दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मकसद एक नाज़ुक युद्ध विराम को मज़बूत करना, लेबनान को शामिल करने को लेकर मतभेदों को सुलझाना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल की आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री रास्ता है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर इज़रायल के हालिया हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है और बातचीत को और मुश्किल बना दिया है।</p>
<p>व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद दोनों पक्षों के एक-दूसरे से अलग प्रस्तावों के बीच कोई बीच का रास्ता निकालना है। ईरान ने 10-सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें उसके क्षेत्रीय प्रभाव और परमाणु संवर्धन के अधिकारों को मान्यता देने की बात शामिल है। वहीं, ख़बरों के मुताबिक, अमेरिका के पास 15-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव है, जिसमें परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की गयी है। इस बातचीत का नतीजा न सिर्फ़ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की दिशा तय करेगा, बल्कि दुनिया भर के ऊर्जा बाज़ारों की स्थिरता पर भी इसका असर पड़ेगा।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी सूझ-बूझ से श्री वेंस को बातचीत की अगुवाई करने के लिए आगे किया है। ऐसा करने का पहला मकसद यह संदेश देना है कि यह कूटनीतिक कोशिश पूरी तरह से गंभीर है। इसके ज़रिए उन्होंने अपने सहयोगी देशों, विरोधी ताकतों और आम जनता को यह साफ़ संकेत दिया है कि उनका प्रशासन इस संघर्ष को खत्म करने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है, न कि सिर्फ़ खानापूर्ति के लिए बातचीत कर रहा है। दूसरा मकसद यह है कि अगर ये बातचीत नाकाम रहती है या युद्ध विराम खत्म हो जाता है, तो श्री ट्रंप यह दावा कर सकते हैं कि उन्होंने अपने प्रशासन के सबसे ज़्यादा एहतियात बरतने वाले वरिष्ठ अधिकारी को ही इस संघर्ष का शांतिपूर्ण हल निकालने का मौका दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:55:03 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान के तीन-सूत्री उल्लंघन के दावों पर वेंस का बड़ा बयान : हमेशा पेचीदा होते हैं युद्धविराम, लेबनान हवाई हमलों में 254 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के आरोपों पर कहा कि युद्धविराम की प्रक्रिया अक्सर अव्यवस्थित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों का लक्ष्य बमबारी रोकना है। वेंस ने ईरान के यूरेनियम भंडार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका दावों के बजाय ईरान के वास्तविक कार्यों पर ध्यान देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/vances-big-statement-on-irans-three-point-violation-claims-ceasefire-is/article-149782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं।" जेडी वेंस ने हंगरी से प्रस्थान से पहले संवाददाताओं से बातचीत में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ के उस बयान पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन पर युद्धविराम के तीन प्रावधानों के जानबूझकर उल्लंघन का आरोप लगाया था। वेंस ने कहा कि यदि ग़ालिबाफ़ के पास केवल तीन असहमति के बिंदु हैं, तो इसका अर्थ है कि काफी हद तक सहमति भी है।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा, "युद्धविराम हमेशा थोड़ा अव्यवस्थित होता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे के भीतर ही ईरान ने पड़ोसी देशों पर कई मिसाइलें दागीं, जिसके बाद इज़रायल और कुछ खाड़ी अरब देशों ने जवाबी कार्रवाई की।" उन्होंने कहा, "यही युद्धविराम की प्रकृति है। कोई भी युद्धविराम बिना कुछ उतार-चढ़ाव के नहीं होता। हम स्पष्ट रूप से यह चाहते हैं कि बमबारी रुके। हम अपने सहयोगियों से भी बमबारी रोकने को कहते हैं और ईरान से भी यही अपेक्षा रखते हैं। हमें संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति सही दिशा में जा रही है, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा।"</p>
<p>जेडी वेंस ने यह भी कहा कि उन्हें यह "दिलचस्प" लगा कि श्री ग़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के बड़े भंडार को छोड़ने के अपने "अधिकार" से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, "हम इस बात की चिंता नहीं करते कि वे क्या करने का अधिकार होने का दावा करते हैं, बल्कि इस बात पर ध्यान देते हैं कि वे वास्तव में क्या करते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:26:32 +0530</pubDate>
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                <title>जेडी वैंस का दावा: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौते में लेबनान शामिल नहीं, समझौते की तीन धाराओं के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुए युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने ईरानी दावों को 'गलतफहमी' बताते हुए कहा कि संघर्ष विराम की प्रक्रिया जटिल होती है। वैंस के अनुसार, इजरायल और खाड़ी देशों की जवाबी कार्रवाई समझौतों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सुरक्षा का हिस्सा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jd-vance-claims-lebanon-is-not-included-in-the-ceasefire/article-149657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम पर कहा कि उनका मानना है कि ईरान को यह गलतफहमी थी कि लेबनान को भी इसमें शामिल किया गया है। श्री वैंस बुधवार को हंगरी से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कही। जेडी वैंस ने कहा कि युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं और उन्होंने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के इस दावे का जवाब दिया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की तीन धाराओं का उल्लंघन किया है।</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष ने दावा किया था कि अमेरिका युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने लेबनान में लगातार गोलीबारी, कथित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से इनकार का हवाला दिया। जेडी वेंस ने कहा कि अगर श्री ग़ालिबफ़ के असहमति के केवल तीन बिंदु हैं, तो निश्चित रूप से कई बिंदुओं पर सहमति भी होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा, "सबसे पहले, उन्होंने ईरान पर हुए एक कथित हमले का जिक्र किया और बताया कि यह युद्धविराम का उल्लंघन था। युद्धविराम हमेशा ही पेचीदा होते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे बाद ही कई मिसाइलें दागी गईं, इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की और कुछ खाड़ी अरब देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने कभी भी लेबनान को युद्धविराम समझौते में शामिल करने का वादा नहीं किया था, भले ही ईरान ने ऐसा दावा किया हो और उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच एक गलतफहमी करार दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:35:19 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत: ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले पाँच दिनों के लिए टले, ईरान का इंकार </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने जैरेड कुशनर पर अविश्वास जताते हुए वेंस को युद्धविराम में रुचि रखने वाला नेता माना है। डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक बातचीत का दावा करते हुए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले टालने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/positive-talks-between-america-and-iran-attacks-on-irans-energy/article-147806"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran8.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका से कहा है कि वह विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर के बजाय उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बातचीत करना पसंद करता है। सीएनएन प्रसारक की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आयी है। सीएनएन के अनुसार ईरान ने अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान शुरू होने से पहले हुई पिछली बातचीतों की विफलता को लेकर विटकॉफ और कुशनर पर अविश्वास जताया। वहीं, रिपोर्टस के मुताबिक उपराष्ट्रपति वेंस को ईरान एक ऐसे राजनेता के रूप में देखता है जो युद्धविराम के हित में रुचि रखते हैं। </p>
<p>गौरतलब है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बहुत सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पेंटागन को निर्देश दिया है कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को पाँच दिनों के लिए टाल दिया जाए। </p>
<p>ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि, बातचीत होने से इनकार किया और कहा कि उसे केवल ऐसे संदेश प्राप्त हुए हैं, जिनमें वॉशिंगटन की बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की गई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:51:05 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता: ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का दावा, अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत बेहतर और रचनात्मक </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा में हुई दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता सकारात्मक रही। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति बन गई है और जल्द ही समझौते का मसौदा तैयार किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-seyed-abbas-araghchi-claims-second-round-of/article-143683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/trump-and-khamnoi.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। अमेरिका के साथ हुई दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि यह बातचीत ओमान की राजधानी मस्कट में हुई पहले दौर की बातचीत से बेहतर और ज्यादा रचनात्मक थी। विदेश मंत्री अराघची ने मंगलवार को सरकारी प्रसारक इरिब के साथ विशेष बातचीत में कहा कि दिशा देने वाले सिद्धांतों पर दोनों पक्षों के बीच आम सहमति बन गयी है और जल्द ही एक संभावित समझौते का मसौदा तैयार करने की दिशा में बढ़ेंगे। </p>
<p>ओमान की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड की राजधानी जिनेवा में ओमानी दूतावास में हुई इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि एक बार मसौदा तैयार होने पर दोनों पक्ष तीसरे दौर की बातचीत के लिए तारीख निर्धारित करेंगे। इसके आगे विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच की खाई पाटने में समय लगेगा। </p>
<p>विदेश मंत्री अराघची ने बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र के एक निरस्त्रीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बातचीत से एक टिकाऊ समाधान के लिए एक नया रास्ता खुल गया है जो ईरान के अधिकारों का सम्मान करते हुए पूरे क्षेत्र और सभी पक्षों के हितों की रक्षा करेगे। </p>
<p>बैठक की मध्यस्थता करने वाले ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हम्माद बिन हमूद अलबुसैदी ने कहा कि बातचीत रचनात्मक थी और दोनों पक्षों ने तकनीकी मुद्दों एवं सामान्य उद्देश्य पहचानने में अच्छी प्रगति की है। साथ ही अंतिम समझौते के मार्गदर्शक सिद्धांतों को शक्ल देने के लिए महत्वपूर्ण कोशिशें की गयीं। </p>
<p>इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स ने मीडिया को बताया कि मंगलवार की बातचीत के कुछ पहलू सकारात्मक थे, लेकिन ईरान ने अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कुछ बातों को नहीं माना है, और इनसे पीछे नहीं हटा जा सकता। उन्होंने कहा कि सब कुछ अभी भी टेबल पर है। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में ईरान के साथ हुए पहले के परमाणु समझौते से हट गए थे। लेकिन दूसरे कार्यकाल में उन्होंने ईरान पर अधिकतम दबाव बनाया है और बार-बार चेतावनी दी है कि वह ईरान की परमाणु कार्रवाई रोकने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ईरान ने भी इसके जवाब में कहा है कि वह किसी भी हमले का उसी तरह जवाब देगा।</p>
<p>इससे पहले जैसे ही जिनेवा में मिले, तो ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स ने होर्मुज की खाड़ी में स्मार्ट कंट्रोल ऑफ़ द स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज नाम का एक अभ्यास शुरू कर दिया था। इस अभ्यास ने जरूरी शिपिंग लेन के कुछ हिस्सों को कुछ समय के लिए बंद कर दिया। इसमें तटीय एवं द्वीपीय बिन्दुओं से मिसाइल लॉन्च, त्वरित हमलों और समुद्री लक्ष्यों पर हमलों की नकल करने वाली ड्रोन इकाइयां शामिल थीं। </p>
<p>आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार आउटलेट सेपा न्यूज ने कहा कि इस अभ्यास का मकसद नौसेना की तैयारी का परीक्षण करना और समुद्र में सुरक्षा और जवाबी हमले की योजना का अभ्यास करना था। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते कहा था कि दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन को पश्चिमी एशिया में तैनात किया जा रहा है, जो तीन हफ्ते से इस इलाके में हैं। </p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार को कहा कि ईरान अपनी शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक नहीं छोड़ेगा, लेकिन यह साबित करने के लिए किसी भी तरह के सत्यापन के लिए तैयार है कि उसका कार्यक्रम हथियार बनाने के मकसद से नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और तरराष्ट्रीय समुदाय उन अफवाहों को खारिज कर देगा जिनमें यह दावा किया जाता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने ट्रंप की सैन्य हमलों की हालिया धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व के अमेरिकी राष्ट्रपतियों की तरह ट्रंप भी ईरान के इस्लामिक गणराज्य को हराने में नाकाम रहेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 15:57:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका का दावा, कहा ग्रीनलैंड को हासिल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड के अधिग्रहण को अमेरिकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं और इसे हासिल करने हेतु प्रबल उत्सुक हैं। डेनमार्क के साथ हुई उच्च स्तरीय वार्ता में 'मौलिक असहमति' के बावजूद, दोनों पक्ष भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा के लिए एक कार्य समूह बनाने पर सहमत हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-claims-that-acquiring-greenland-is-essential-for-national-security/article-139781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/220922-donald-trump-mjf-1544-99e118.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के लिए अतिआवश्यक मानते हैं और इसे हासिल करने के लिए प्रबल उत्सुक हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे। उनका मानना है कि ऐसा करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है।</p>
<p>व्हाइट हाउस की यह टिप्पणी अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद आई है। यह बातचीत ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने की राष्ट्रपति ट्रम्प की महत्वाकांक्षा को लेकर हुई थी। गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत क्षेत्र है।</p>
<p>डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि बुधवार को वॉ​शिगटन में ग्रीनलैंड के उनके समकक्ष, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई चर्चा मुख्य मतभेदों को सुलझाए बिना समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि'एक मौलिक असहमति बनी हुई है।</p>
<p>रासमुसेन ने कहा कि'हम अमेरिका की स्थिति को बदलने में कामयाब नहीं हुए'। उन्होंने हालांकि यह भी रेखांकित किया कि यह अप्रत्याशित भी नहीं था। ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री ने कहा कि मतभेदों के बावजूद डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका एक उच्च स्तरीय कार्य समूह गठित करने पर सहमत हुए हैं ताकि 'यह पता लगाया जा सके कि क्या हम आगे बढऩे का कोई साझा रास्ता खोज सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस समूह की पहली बैठक'कुछ हफ्तों के भीतर होने की उम्मीद है।</p>
<p>रासमुसेन के अनुसार, इस समूह का ध्यान डेनमार्क की 'रेड लाइन्स' की रक्षा करते हुए अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने पर होगा। उल्लेखनीय है कि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के सदस्य हैं। इस बीच, डेनमार्क और कई यूरोपीय सहयोगियों ने ग्रीनलैंड में सैनिक तैनात करने की योजना की घोषणा की है, जो इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक द्वीप पर सुरक्षा को मजबूत करने के एक बड़े प्रयास का संकेत है।</p>
<p>व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति वेंस और डेनमार्क के अधिकारियों के बीच हुई बैठक को सकारात्मक बताया है, भले ही राष्ट्रपति ट्रम्प ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के लिए दबाव बनाना जारी रखे हुए हैं। लेविट ने प्रशासन के रुख को दोहराते हुए कहा, उस बैठक में, दोनों पक्ष एक कार्य समूह स्थापित करने पर सहमत हुए हैं, जो ग्रीनलैंड के अधिग्रहण पर तकनीकी बातचीत जारी रखेंगे। मुझे बताया गया है कि वे बातचीत हर दो से तीन हफ्ते में होगी।</p>
<p>डेनमार्क के अधिकारियों ने हालांकि बातचीत के बाद बिल्कुल अलग बात कही। डेनमार्क के विदेश मंत्री ने ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री विवियन मोटफेल्ड के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमारे लिए, वे विचार जो डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान नहीं करते हैं, निश्चित रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। रासमुसेन ने कहा, हम अमेरिकी स्थिति को बदलने में सफल नहीं रहे। यह स्पष्ट है कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा है। हमने इसे बहुत स्पष्ट कर दिया है कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण 'बिल्कुल आवश्यक नहीं है और रूस या चीन से कोई'तत्काल खतरा नहीं है।</p>
<p>ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि इसकी रणनीतिक स्थिति, प्रचुर खनिज संसाधनों और इस क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर उपजी चिंताओं के कारण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 14:06:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के घर पर पथराव, कई खिड़कियां ​टूटी, आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सिनसिनाटी स्थित आवास पर सोमवार तड़के एक अज्ञात व्यक्ति ने हमला कर खिड़कियां तोड़ दीं। घटना के समय वेंस परिवार घर पर नहीं था। पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/stones-pelted-at-us-vice-president-jd-vances-house-many/article-138486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/us-vice-president-jd-vance-ohio-home-attacked-suspect-arrested.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिका से बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार, उपराष्ट्रप​ति जेडी वेंस के ओहियो स्थित घर पर संदिग्ध व्यक्ति ने हमला कर ​दिया, जिससे उनके घर की कई खिड़कियां टूट गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस वक्त ये घटना हुई उस वक्त वेंस परिवार घर पर नहीं था। इस हमले के बाद कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के घर की टूटी खिड़कियों को साफ देखा जा सकता है, लेकिन अभी तक हमले के कारणाों का पता नहीं चला सका है। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और जांच चल रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 18:31:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर के कर्मचारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए अमेरिका के व्हाइट हाउस द्वारा प्रशंसा पत्र मिला</title>
                                    <description><![CDATA[मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस के भारत दौरे के दौरान मेडिकल सपोर्ट पार्टनर के रूप में चुना गया। व्हाइट हाउस मेडिकल यूनिट के ऑडिट के बाद हॉस्पिटल टीम ने 24×7 सेवाएं दीं और उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा-पत्र प्राप्त किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/manipal-hospital-jaipur-staff-received-citation-by-us-white-house/article-135222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/manipal-hospital.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिकित्सा सेवाओं की श्रेष्ठता का प्रमाण दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस के 21 से 24 अप्रैल, 2025 तक भारत के राजकीय दौरे के दौरान जयपुर में आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए व्हाइट हाउस मेडिकल यूनिट द्वारा विस्तृत ऑडिट, निरीक्षण और मूल्यांकन के बाद मणिपाल हॉस्पिटल, जयपुर को मेडिकल सपोर्ट पार्टनर के रूप में चयनित किया गया।</p>
<p>इस उच्च सुरक्षा स्तर वाले दौरे के दौरान मणिपाल हॉस्पिटल टीम ने उच्चस्तरीय मेडिकल सेवाएँ और स्टैंडबाय एम्बुलेंस सेवा प्रदान की। इस अवधि में इमरजेंसी, मेडिकल सर्विसेज, ऑपरेशंस व सपोर्ट टीम ने 24×7 तत्परता के साथ अपनी सेवाएँ सुनिश्चित कीं। उत्कृष्ट समन्वय, प्रोफेशनलिज़्म और बेहतरीन हेल्थकेयर सपोर्ट के लिए मणिपाल हॉस्पिटल के कर्मचारियों को व्हाइट हाउस द्वारा प्रशंसा-पत्र एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।</p>
<p>इस अवसर पर हॉस्पिटल, जयपुर के डायरेक्टर रंजन ठाकुर ने कहा कि हमारे लिए यह एक गौरवपूर्ण अवसर है कि विश्व के सबसे प्रतिष्ठित सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति के राजकीय दौरे में मेडिकल सपोर्ट प्रदान करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि हमारी टीम की प्रोफेशनल क्षमता, उच्च चिकित्सा मानकों और मजबूत इमरजेंसी प्रतिक्रिया प्रणाली को दर्शाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 17:16:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें यूरोप के रास्ते : रूस को शांति वार्ता का आह्वान, वेंस बोले- हम कई यूरोपीय देशों के आवेदनों पर विचार कर रहे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका की योजना है कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी यूरोपीय देश उससे अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें खरीदें और फिर उसे यूक्रेन को दे दें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ukraine-said-tomahawk-missiles-via-europe-vance-said-russia-will/article-128253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(2)38.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका की योजना है कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी यूरोपीय देश उससे अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें खरीदें और फिर उसे यूक्रेन को दे दें। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ़ॉक्स न्यूज़ से यह बात कही है। उन्होंने कहा कि "हम कई यूरोपीय देशों के आवेदनों पर विचार कर रहे हैं।" जब उनसे यूक्रेन को मिसाइलें देने और उससे बढ़ने वाले ख़तरों पर राय मांगी गई तो उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तय करेंगे कि अमरीका के लिए क्या बेहतर है। उन्होंने साफ़ किया कि इस पर अंतिम फ़ैसला राष्ट्रपति ट्रम्प ही करेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सम्मेलन के दौरान ट्रम्प से मुलाकात में यह प्रस्ताव रखा था, जिस पर उन्होंने कहा कि "हम इस पर काम करेंगे।"</p>
<p>वेंस ने दोहराया कि ट्रम्प हुकूमत अब यूरोप से ज्यादा जिम्मेदारी उठाने और अमरीकी मदद को सीमित होने की उम्मीद कर रही है। उन्होंने रूस से भी कहा कि वह बातचीत की मेज पर आकर अमन लाने के मसले पर गंभीर चर्चा करे।</p>
<p>गौरतलब है कि टॉमहॉक मिसाइल लंबी दूरी की, सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 460 से 2,500 किलोमीटर तक होती है और यूरोप से दागे जाने पर यह मास्को के इर्द-गिर्द के इलाक़ों तक पहुंच सकती है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन या संक्षेप में नाटो 32 यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी देशों का एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, जिसे 1949 में बनाया गया था। नाटो का मकसद सियासी और फौजी तौरतरीकों से पने सदस्य देशों की आजादी और सुरक्षा देना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 15:33:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका लौटे : राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और सुधांशु पंत ने किया विदा, तेज गर्मी और पहलगाम में आतंकी हमले के कारण रद्द किया आगे का प्रोग्राम</title>
                                    <description><![CDATA[ जयपुर दौरे पर आए अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट अपना दौरा खत्म कर अमेरिका लौट गए हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jd-vance-america-lotte-minister-rajyavardhan-singh-and-chief-secretary/article-111898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)40.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर दौरे पर आए अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट अपना दौरा खत्म कर अमेरिका लौट गए हैं। वेंस अपनी भारतीय मूल की पत्नी उषा और अपने तीन बच्चो के साथ आए थे। पत्नी वे तीन रात और दो दिन जयपुर रुके। उन्होंने आमेर महल का भ्रमण किया। साथ ही आरआईसी में भारत और अमेरिका रिलेशन पर अपनी बात रखी। </p>
<p>उनका सिटी पैलेस जाने का कार्यक्रम भी था लेकिन बाद में तेज गर्मी और पहलगाम में आतंकी हमले के चलते इसको कैंसल कर दिया गया। वेंस को एयरपोर्ट विदा करने उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह और मुख्य सचिव सुधांशु पंत गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Apr 2025 15:17:08 +0530</pubDate>
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