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                <title>बांग्लादेश में खसरे का कहर : पांच और बच्चों की मौत, कुल मौतों का आंकड़ा 464 पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप खतरनाक रूप ले चुका है। पिछले 24 घंटों में 5 और बच्चों की मौत के साथ कुल मौतों की संख्या 464 हो गई है। यह बीमारी देश के 61 जिलों में फैल चुकी है और अब तक 7,856 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। प्रभावितों में 80% मासूम बच्चे और शिशु हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/measles-wreaks-havoc-in-bangladesh-five-more-children-die-total/article-154321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bangladesh.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार को पिछले 24 घंटों के दौरान इस बीमारी से जुड़े लक्षणों के कारण पांच और बच्चे इसका शिकार हो गये, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 464 हो गयी है। इसी अवधि के दौरान देश भर के अस्पतालों में खसरे जैसे लक्षणों वाले 1,405 मरीजों को भर्ती कराया गया था। इनमें से 89 मामलों में टेस्ट में खसरे की पुष्टि हुई।</p>
<p>इस बीमारी ने सबसे ज्यादा कहर ढाका संभाग पर बरपाया है, जबकि राजशाही, चट्टोग्राम और खुलना संभागों में भी इसके गंभीर मामले देखे गये हैं। यह बीमारी देश के 64 में से 61 जिलों में फैल चुकी है। अब तक 75 और बच्चों की इस बीमारी से मौत होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 389 अन्य बच्चों की मौत खसरे से मिलते-जुलते लक्षणों के कारण हुई है, जिससे कुल मौतों का आंकड़ा 464 पर पहुंच गया है।</p>
<p>स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से 18 मई के बीच लैब टेस्ट के माध्यम से खसरे के कुल 7,856 मामलों की पुष्टि हुई। इसमें शिशु और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जो कुल मामलों का लगभग 80 प्रतिशत हैं। खसरे के 54,911 संदिग्ध मामलों की पहचान की गयी है, हालांकि वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की संभावना जतायी गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:25:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नाइजीरिया में बड़ा आतंकी हमला: हमलावरों ने की अंधाधुंध गोलीबारी, 45 से अधिक स्कूली बच्चों का अपहरण </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण-पश्चिम नाइजीरिया के ओयो प्रांत में सैन्य वर्दीधारी नकाबपोश बंदूकधारियों ने तीन प्राइमरी स्कूलों पर हमला कर 45 से अधिक बच्चों का अपहरण कर लिया। मोटरसाइकिलों पर आए हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की और बच्चों को जंगलों में ले गए। सुरक्षा बलों ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-attack-on-schools-in-nigeria-attackers-fired-indiscriminately-kidnapped/article-154150"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(2).png" alt=""></a><br /><p>अबूजा। दक्षिण-पश्चिम नाइजीरिया के ओयो इलाके में हथियारबंद बंदूकधारियों ने 45 से अधिक स्कूली बच्चों का अपहरण कर लिया है। इस बेहद स्तब्ध करने वाली घटना को तीन अलग-अलग स्कूलों पर दिनदहाड़े एक समन्वित हमले के जरिए अंजाम दिया गया। स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने ओरीरे स्थानीय सरकारी क्षेत्र में सुबह की कक्षाओं के दौरान निशाना बनाया। उन्होंने यावोटा स्थित तीन प्राइमरी स्कूलों पर धावा बोला। मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की और बच्चों को बंधक बनाकर पास के जंगली इलाकों में फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों ने ओल्ड ओयो नेशनल पार्क एक्सिस के आसपास के संभावित रास्तों को सील कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।</p>
<p>यह वारदात शुक्रवार सुबह की है। एक शिक्षिका ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमलावर सैन्य वर्दी और नकाब पहने हुए युवा थे। शिक्षिका एलिजाबेथ ओलागोके ने बताया, "आतंकवादी सुबह करीब 8 बजे आए, जब सुबह का सत्र शुरू हो चुका था। वे छह मोटरसाइकिलों पर आए थे और हर बाइक पर दो लोग सवार थे। वे अंधाधुंध फायरिंग करने से पहले योरूबा, हौसा और पिजिन अंग्रेजी में चिल्ला रहे थे, जिससे हर तरफ अफरातफरी मच गई।" इस सिलसिले में अब तक तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। इस घटना के बाद से पूरे राज्य में रोते-बिलखते माता-पिता और स्थानीय निवासी सरकार से तुरंत कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>नाइजीरियाई सरकार के लिए इन सशस्त्र आपराधिक गुटों से निपटना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन गिरोहों ने ज़मफ़ारा, कत्सिना, कडुना, सोकोतो, केब्बी और नाइजर जैसे राज्यों के घने जंगलों में अपने ठिकाने बना रखे हैं। ये समूह यहीं से आसपास के रिहायशी इलाकों पर छापे मारते हैं, मवेशी और संपत्ति लूटते हैं और स्थानीय नागरिकों की हत्या व फिरौती के लिए अपहरण जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। रविवार तक प्रशासन ने अपहृत बच्चों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का ऑपरेशन लगातार जारी है।</p>
<p>स्कूली बच्चों के अपहरण की यह वारदात ठीक उसी समय सामने आई है, जब नाइजीरिया और अमेरिका ने एक संयुक्त सैन्य अभियान में खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के एक शीर्ष नेता को मार गिराने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मारे गए आतंकी अबू-बिलाल अल-मिनुक्की को "वैश्विक स्तर पर आईएसआईएस का सेकंड-इन-कमांड" और "दुनिया का सबसे सक्रिय आतंकवादी" करार दिया था।</p>
<p>नाइजीरियाई राष्ट्रपति बोला टिनुबू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देशों ने एक "साहसिक संयुक्त अभियान चलाकर आईएस को करारा झटका दिया है।" वाशिंगटन द्वारा 2023 में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया अल‑मिनुक्की, लेक चाड बेसिन (नाइजीरिया, चाड, नाइजर और कैमरून की सीमा पर स्थित दलदली क्षेत्र) में अपने ठिकाने पर हुए हमले में अपने कई साथियों के साथ मारा गया। सेना के प्रवक्ता के अनुसार, खुफिया इनपुट से पता चला था कि मिनुक्की ने बोर्नो राज्य के मेटेले इलाके में एक मजबूत किला बना रखा था। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में आईएस का ध्यान बदला है और उसके लगभग 90 प्रतिशत हमले अब उप-सहारा अफ्रीका में हो रहे हैं, जिसमें उसकी नाइजीरियाई शाखा सबसे ज्यादा सक्रिय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 15:03:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का  : छात्रावास व स्कूल क्षेत्र में चला सफाई अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--sanitation-drive-conducted-in-hostel-and-school-areas/article-153793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)23.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा । वनवासी परिषद छात्रावास और आदर्श विद्या मंदिर क्षेत्र में दूषित पानी व फैली गंदगी को लेकर दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। खबर प्रसारित होते ही नगर पालिका ने चारभुजा क्षेत्र, बप्पा रावल आश्रम छात्रावास और आदर्श विद्या मंदिर स्कूल मार्ग पर विशेष सफाई अभियान चलाकर नालियों और सड़कों की सफाई करवाई। अभियान के दौरान मुख्य सड़क और नालियों में जमा गंदगी हटाई गई तथा रुके हुए पानी की निकासी करवाई गई। लंबे समय से बनी समस्या के समाधान के लिए सफाई कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में व्यापक सफाई कार्य किया गया। विशेष सफाई अभियान में सेक्टर जमादार शिवचरण, चैनल अर्जुन कुमार और स्वच्छता मित्र मौजूद रहे। । गौरतलब है कि छात्रावास और विद्यालय परिसर में रहने वाले करीब 350 बच्चों को पिछले कई दिनों से दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। बच्चों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और डायरिया जैसी शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए थे।</p>
<p><strong>यी जल निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी</strong><br />संस्था प्रधान ने बताया कि पिछले करीब एक महीने से बच्चों को दूषित पानी की समस्या झेलनी पड़ रही थी। कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। अब सफाई अभियान शुरू होने से स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है। छात्रावास प्रभारी ने कहा कि परिसर के आसपास लंबे समय से गंदगी और रुका हुआ पानी बड़ी समस्या बना हुआ था। सफाई से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन स्वच्छ पेयजल और स्थायी जल निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी है।</p>
<p><strong>नाली के बीचों-बीच स्थित बोरिंग बनी समस्या</strong><br />विद्यार्थी प्रमुख ने बताया कि छात्र काफी दिनों से परेशानी झेल रहे थे। अब सफाई कार्य शुरू होने से राहत महसूस हो रही है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा नहीं होनी चाहिए। वहीं सफाई कर्मचारी ने बताया कि क्षेत्र में बनी बोरिंग नाली के बीचों-बीच स्थित है, ग्रामीण टोज़गार की नई गारंटी जिससे समस्या और बढ़ रही है। हालांकि सफाई से जुड़े अन्य कार्य पूरे कर दिए गए हैं।</p>
<p> पालिका द्वारा प्रतिदिन दो पारियों में सफाई कार्य कराया जाता है। शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। हमारे ओर से आमजन से भी नालियों में कचरा नहीं डालने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई है।<br /><strong>- नरपत सिंह, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका,रावतभाटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:22:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नौनिहालों को गुणवत्ता परोस रहीं, खुद 'कुपोषण' जैसी दिहाड़ी पर मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[विडंबना: नाममात्र की वेतन वृद्धि ने तोड़ी कुक-कम-हेल्परों की उम्मीद।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/serving-quality-nutrition-to-children--yet-forced-to-subsist-on-a--malnourished--daily-wage/article-153683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)53.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्कूलों में जब दोपहर की घंटी बजती है, तो सैकड़ों मासूम चेहरों पर मुस्कान खिल उठती है वहीं राजस्थान सरकार एक ओर 'स्वस्थ बचपन' का नारा देती है और स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियम बनाती है। लेकिन दूसरी ओर उस भोजन को पकाने वाले कुक कम हेल्पर के साथ बजट में मानदेय की वृद्धि उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं। जिले के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 1891 कुक-कम-हेल्पर पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों को पोषण परोस रहे हैं, लेकिन सरकार उनके खुद के परिवार के पोषण और आर्थिक सुरक्षा को लेकर पूरी तरह मौन साधे हुए है।</p>
<p><strong>गुणवत्ता की शर्त, पर मानदेय में 'कंजूसी'</strong><br />स्कूलों में पोषाहार तैयार करने वाली ये महिलाएं भोजन की शुद्धता, पोषण और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखती हैं। दालों के चयन से लेकर बच्चों को परोसने तक, हर कदम पर 'क्वालिटी' सुनिश्चित की जाती है। लेकिन जब बात इन महिलाओं की मेहनत के बदले 'क्वालिटी लाइफ' की आती है, तो सरकार की ओर से मात्र 170 रुपये की मासिक वृद्धि की गई है जो कि नाकाफी हैं।पोषाहार तैयार करने वाली कुक कम हेल्पर पोषाहार तैयार करने के दौरान पूरा गुणवत्ता व पोषण का पूरा ध्यान रखती है। सरकार की ओर से हाल ही में उनके मानदेय में मात्र 170 रुपए मासिक की बढ़ोतरी की गई है। अब उन्हें पहले 2297 रुपए की बजाय 2467 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे।शहर सहित जिले के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत कुक कम हेल्पर वर्तमान में बढ़ती महंगाई के दौरान मिलने वाला वेतन बहुत ही कम क्योकि खाद्य सामग्री, रसोई गैस, तेल, दाल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।</p>
<p><strong>10 माह का ही मिलता है मानदेय </strong><br />कुक कम हेल्परों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उन्हें पूरे साल का भुगतान नहीं मिलता। गर्मी, दीपावली और शीतकालीन अवकाश के दौरान उन्हें मानदेय नहीं दिया जाता, जिससे साल में केवल 10 माह की ही आय मिलती है। इस स्थिति में उनकी औसत मासिक आय और भी कम हो जाती है। वहीं बड़ा सवाल ये है कि अन्य विभागों में भी कर्मचारियों सहित अधिकारियों को अवकाश के भी पैसे मिलते है पर कुक कम हेल्परों को क्यों नहीं मिलते हैं। ये बात सोचने वाली हैं।</p>
<p><strong>अकुशल मजूदरी से भी कम मानदेय </strong><br />यदि दैनिक मजदूरी के हिसाब से तुलना करें तो कुक कम हेल्परों को करीब 82.23 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान मिलता है, जबकि मनरेगा मजदूरों को लगभग 281 रुपए प्रतिदिन मिलते हैं। इस तरह कुक कम हेल्परों का मानदेय अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी के मुकाबले भी काफी कम है। कुक कम हेल्परों का कहना है कि मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके। सरकार तक बात पहुंचाई लेकिन उनकी समस्या को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए मानदेय में बढ़ोतरी करनी चाहिए।</p>
<p><strong>बनाने से लेकर परोसने तक की जिम्मेदारी </strong><br />सरकारी विद्यालयों में पोषाहार तैयार करने वाली इन महिलाओं का कार्य सुबह से शुरू होकर दोपहर तक चलता है। कुक कम हेल्पर भोजन बनाना, बच्चों को परोसना, बर्तन साफ करना और अन्य कार्यों में पूरा दिन निकल जाता है। इतनी मेहनत के बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनके श्रम के अनुरूप नहीं है। हर वर्ष बजट से पहले इन महिलाओं को उम्मीद रहती है कि उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकारी स्कूलों में पोषाहार बनाने वाले कुक कम हेल्परों को वेतन केंद्रीय सरकार द्वारा मिलता हैं।<br />-रूपसिंह मीणा, प्रारंभिक डीईओ कोटा<br /> मैं स्कूल में कुक कम हेल्पर का कार्य करती हंूं। पर सरकार द्वारा बजट में बढ़ाया गये पैसे हमारे लिए पर्याप्त नहीं हैं। वहीं हम लोग तो न्यूनतम मजूदरी से भी कम पर कार्य कर रहीं हैं।<br /><strong>-कमला बाई , परिवर्तित नाम</strong></p>
<p> स्कूलों में पोषाहार बनाने के दौरान पूरी गुणवत्ता व पोषाहार का ध्यान रखती हूं। पर हम लोगों को वेतन काफी कम मिलता हैं। जिससे घर चलना बहुत ही मुश्किल भरा रहता हैं।<br /><strong>- पर्वती बाई , परिवर्तित नाम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:18:26 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूलों में जहरीला भोजन खिलाए जाने की घटना बेहद शर्मनाक और आपराधिक, उच्चस्तरीय जांच की मांग : भाकपा माले</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के सहरसा में जहरीला मध्याह्न भोजन खाने से सैकड़ों बच्चे बीमार हो गए। भाकपा माले ने इस घटना को आपराधिक लापरवाही बताते हुए दोषी एनजीओ की गिरफ्तारी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी ने निजीकरण को बच्चों की जान के लिए खतरा बताते हुए स्थानीय रसोइयों द्वारा ताजा भोजन की व्यवस्था बहाल करने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-incident-of-serving-poisonous-food-in-schools-is-extremely/article-153247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bihar1.png" alt=""></a><br /><p>पटना। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले) के राज्य सचिव कुणाल ने सहरसा जिले महिषी प्रखंड के विभिन्न स्कूलों में मध्याह्न भोजन खाने से सैकड़ों बच्चों के बीमार होने की घटना को बेहद शर्मनाक और आपराधिक बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच तथा दोषी एनजीओ संचालकों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। कुणाल ने आज बयान जारी कर कहा कि भोजन में जहरीले सांप के अवशेष मिलने की खबर भयावह और गंभीर लापरवाही का मामला है। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।</p>
<p>कुणाल ने आरोप लगाया कि बिहार की डबल इंजन सरकार ने मिड डे मील जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना को निजी एनजीओ और ठेकेदारों के हवाले कर दिया है, जिसका नतीजा आज बच्चों की जान पर बन आया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण और लागत कम करने की नीति के कारण सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बदहाल हो गई है।उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी एनजीओ संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी बीमार बच्चों के निशुल्क और समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।</p>
<p>माले नेता कुणाल ने कहा कि पूर्व की व्यवस्था के तहत स्कूलों में स्थानीय रसोइयों द्वारा ताजा भोजन तैयार कर बच्चों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई और मिड डे मील व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भाकपा माले राज्यव्यापी आंदोलन चलाने को बाध्य होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:57:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मदन दिलावर और सुरेश सिंह रावत ने जयपुर बाल महोत्सव में बच्चों की रचनात्मकता को सराहा</title>
                                    <description><![CDATA[सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में आयोजित जयपुर बाल महोत्सव 2026 में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने शिरकत की। मंत्रियों ने बच्चों द्वारा लगाई गई झांकियों और स्टॉल्स का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच बच्चों के आत्मविश्वास और नवाचार को बढ़ावा देकर उन्हें व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/madan-dilawar-and-suresh-singh-rawat-appreciated-the-creativity-of/article-152801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/madan-dilawr.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा, पंचायती राज एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के मंत्री मदन दिलावर ने आज सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में आयोजित जयपुर बाल महोत्सव 2026 का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ राजस्थान सरकार के जल संसाधन विभाग के मंत्री सुरेश सिंह रावत भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने विभिन्न जिलों से आए बच्चों द्वारा लगाई गई झांकियों, स्टॉल और प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। मंत्री मदन दिलावर ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि इस तरह के मंच शिक्षा को किताबों से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन से जोड़ते हैं, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है।</p>
<p>मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि बच्चे अपने-अपने क्षेत्रों की विशेषताओं को जिस तरह प्रस्तुत कर रहे हैं, वह भविष्य में स्थानीय पहचान और विकास की नई दिशा तय कर सकता है। इस अवसर पर KogniVera के संस्थापक कमलेश शर्मा, जो इस आयोजन के सहयोगी के रूप में जुड़े हैं, ने बच्चों के साथ संवाद करते हुए उनकी प्रस्तुतियों को सराहा। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपने आसपास की वास्तविकताओं को समझकर उन्हें रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं, तो वही सोच आगे चलकर नवाचार और उद्यमिता की नींव बनती है। डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को अपने जिले को समझने, उससे जुड़ने और उसे नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:22:45 +0530</pubDate>
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                <title>निर्धन अनाथ बच्चों को वितरण की गई शिक्षण सामग्री </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के भांकरोटा में श्री हनुमान चालीसा प्रबंध समिति द्वारा एक सराहनीय पहल की गई। संस्थापक संत अमरनाथ महाराज के सानिध्य में आई इंडिया द्वारा संचालित 'प्रेम पाठशाला' के अनाथ एवं बी.पी.एल. बच्चों को शिक्षण सामग्री बांटी गई। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद करना और उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/educational-material-distributed-to-poor-orphan-children/article-152797"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। श्री हनुमान चालीसा प्रबंध समिति के संस्थापक संत अमरनाथ महाराज के सानिध्य में भांकरोटा स्थित आई इंडिया जयपुर द्वारा बी.पी.एल. एवं अनाथ बच्चों के लिए संचालित प्रेम पाठशाला में अध्ययनरत बच्चों को शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। इस अवसर पर बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। समिति द्वारा इन आवश्यक वस्तुओं का वितरण कर बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:18:51 +0530</pubDate>
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                <title>पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है</title>
                                    <description><![CDATA[खलिहानों में जाकर जगाई शिक्षा की अलख।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wings-alone-are-not-enough--it-is-courage-that-enables-flight/article-152626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है कोटा जिले के लालाहेड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक रेवतीरमण नागर ने। अभावों में पले-बढ़े और विपरित परिस्थितियों से लड़कर निकले रेवतीरमण आज उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। अपनी मेहनत के दम पर न केवल उन्होंने उच्च शिक्षा में हमेशा प्रथम श्रेणी प्राप्त की, बल्कि एक शिक्षक के रूप में अपनी कर्तव्यनिष्ठा से सरकारी स्कूलों के प्रति समाज का नजरिया भी बदल दिया। उनके इसी जज्बे को साल 2023 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया। नागर ने बताया कि हम तीन भाई जिनमें बड़े भाई भी सरकारी शिक्षक है, दूसरा में स्वयं ,तीसरे भाई भी प्राइवेट स्कूल में कार्यरत हैं।</p>
<p><strong>अभावों के बीच रहा शिक्षा का सफर </strong><br />रेवतीरमण नागर ने बताया कि उनका बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता खेती का कार्य करते थे और घर की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। घर की तंगहाली के चलते उन्होंने कोटा में मामा के पास रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।</p>
<p><strong>2015 में शुरू हुआ सेवा का संकल्प</strong><br />साल 2015 में रेवतीरमण का चयन शिक्षक के पद पर हुआ। उनकी पहली पोस्टिंग सुल्तानपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय छोटी जाखड़ौन्द में हुई। स्कूल ज्वाइन करते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कम नामांकन की थी। उन्होंने हार मानने के बजाय विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने (नामांकन वृद्धि) पर जोर दिया और ग्रामीण परिवेश में शिक्षा की अलख जगाई।</p>
<p><strong>खेत-खलिहानों तक पहुंचे, ड्रॉप आउट बच्चों को जोड़ा </strong><br />जब उनका स्थानांतरण राजकीय प्राथमिक विद्यालय लालाहेड़ा में हुआ, तो वहां भी स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। स्कूल में बच्चों की संख्या काफी कम थी और कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने जा रहे थे। नागर ने हार नहीं मानी और खुद घर-घर व खेतों में जाकर अभिभावकों से संपर्क किया। उन्होंने उन बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया जो मजदूरी में लगे थे। विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने माता-पिता को प्रेरित किया कि वे बच्चों को स्कूल भेजें। उनके इस 'डोर-टू-डोर' अभियान का नतीजा यह रहा कि स्कूल से बाहर (ड्रॉप आउट) हो चुके बच्चे फिर से मुख्यधारा से जुड़ गए। वहीं स्कूल के बुनियादी ढांचे को सुधारने का बीड़ा भी उठाया। उन्होंने समाज के दानदाताओं को प्रेरित किया और उनके सहयोग से स्कूल में रंग-रोगन का कार्य करवाया, पानी की टंकी बनवाई और बच्चों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं जुटाईं। उनके इन प्रयासों से स्कूल का वातावरण निजी स्कूलों जैसा आकर्षक नजर आने लगा है।</p>
<p><strong>सम्मान की चमक: जिला स्तर से राज्य स्तर तक</strong><br />रेवतीरमण नागर के समर्पण को पहचान मिलना तब शुरू हुई जब साल 2022 में उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। उनकी मेहनत और निष्ठा का सफर यहीं नहीं रुका। साल 2023 में जयपुर में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अध्यक्ष डॉ. बुलाकी दास (बीडी)कल्ला शिक्ष मंत्री, विशिष्ट अतिथि जाहिदा खान राज्यमंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग स्वतंत्र प्रभार, शिक्षा सचिव नवीन जैन ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी सरकारी शिक्षकों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बदलाव लाने का जज्बा रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:14:48 +0530</pubDate>
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                <title>रील बनाने का शौक बना हादसा: सीढ़ी टूटने से 16 घंटे फंसे रहे दो मासूम, Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर से चला रेस्क्यू ऑपरेशन </title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धार्थनगर में वायुसेना ने हेलीकॉप्टर के जरिए 16 घंटे से पानी की टंकी पर फंसे दो बच्चों को सुरक्षित निकाला। सोशल मीडिया वीडियो बनाने के चक्कर में सीढ़ी टूटने से यह हादसा हुआ, जिसमें एक बच्चे की मौत हो गई। NDRF के विफल होने पर वायुसेना ने गोरखपुर से आकर महज 15 मिनट में यह साहसिक ऑपरेशन पूरा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/reel-making-hobby-turned-into-an-accident-two-innocent-children/article-152528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/up-news.png" alt=""></a><br /><p>सिद्वार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में रविवार सुबह एक जटिल रेस्क्यू अभियान को भारतीय वायुसेना ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। कांशीराम आवासीय कॉलोनी की एक ऊंची पानी की टंकी पर फंसे दो बच्चों को करीब 16 घंटे बाद सुरक्षित नीचे उतारा गया। यह घटना शनिवार की है, जब पांच बच्चे सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने के उद्देश्य से टंकी पर चढ़ गए थे। इसी दौरान टंकी की सीढ़ी अचानक टूट गई, जिससे सिद्धार्थ, शनि और गोलू नीचे गिर गए, जबकि पवन और कल्लू ऊपर ही फंस गए। हादसे में सिद्धार्थ की गंभीर चोटों के कारण मृत्यु हो गई, जबकि शनि और गोलू को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है।</p>
<p>रात में बचाव के लिए एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन टंकी तक पहुंचने का रास्ता न होने के कारण उनकी मशीनरी काम नहीं कर सकी। प्रशासन ने वैकल्पिक रास्ता बनाने का प्रयास भी किया, जो बारिश के कारण अधूरा रह गया। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से मदद मांगी, जिसके बाद वायुसेना का हेलीकॉप्टर गोरखपुर से रवाना किया गया। रविवार सुबह हेलीकॉप्टर घटनास्थल पर पहुंचा और जवानों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज 15 मिनट में दोनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतार लिया। रेस्क्यू के बाद बच्चों को हेलीकॉप्टर से गोरखपुर ले जाकर चिकित्सकीय जांच कराई गई। इस पूरे अभियान के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी में जुटी रहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:33:27 +0530</pubDate>
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                <title> सांप पकड़ने वाले हाथों में अब किताबों की ताकत, कक्षा एक से करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाई </title>
                                    <description><![CDATA[घुमंतु समाज के बच्चों की तकदीर गढ़ रहा छात्रावास।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-hands-once-used-for-catching-snakes-now-hold-the-power-of-books--free-education-provided-from-class-1-to-class-8/article-151829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। यदि आप शाम के समय  महावीर नगर प्रथम स्थित श्री गोविंद गुरू घुमंतु छात्रावास के आसपास से गुजर रहे तो वहां पर शाम के समय पर होता हनुमान चालीसा का पाठ व भारत माता की जय के गूंजते जयकारों को सुनकर आप चौंकिए नहीं। ये कोई मंदिर नहीं हैं। यहां पर हाड़ौती भर के घुमंतु जातियों के बच्चों को कक्षा एक से लेकर करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाया जाता हैं। वहीं छात्रावास में पढ़ाई के साथ बच्चों का सुबह से लेकर शाम तक का व्यवस्थित शेड्यूल बना हुआ। जिसका वे पालन करत हैं।</p>
<p>छात्रावास के कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि छात्रावास में हाड़ौती की विभिन्न जगह जिसमें खानपुर,भवानीमंडी, सारोला, इटावा, बूंदी सहित अन्य जगहों के नट,भोपा,ओड़,कंजर,गाड़िया लुहार,मोगिया,कालबेलिया,रैबारी, जोगी,बंजारा समाज के बच्चों की आर्थिक, सामाजिक व भूगोेलिक जांच पड़ताल करके उनको प्रवेश दिया जाता हैं। वहीं ये बच्चें यहां पर आने से पहले अपने माता-पिता के साथ पुश्तैनी काम में सहयोग करते है जिनमें सांप पकड़ाना, लोहा पिटाना सहित अन्य कामों में सहयोग करते हैं।</p>
<p>कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि भारत की आजादी में घुमंतु जातियों का बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। वहीं ये जातियां समाज की मुख्यधारा से अलग होती जा रही हैं। अत: इन जातियों व बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए छात्रावास की स्थापना सन 2024 में 25 बच्चों से हुई व वहीं अभी करीब छात्रावा में 38 बच्चे निवासरत व अध्ययनरत हैं। वहीं घोषित रिजल्ट में 8 वीं में करीब 5 बच्चों ने ए ग्रेड़ प्राप्त किया। वहीं अभी छात्रावास में बच्चों के लिए जयपुर से आएं ट्रेनर दिनेश शर्मा बच्चों को संस्कृत सीखा रहे हैं।</p>
<p><strong>संस्कारों का अद्भुत संगम</strong></p>
<p>छात्रावास के अध्यक्ष गणपत शर्मा कहते हैं, हम चाहते हैं कि जब ये बच्चे यहाँ से निकलें, तो दुनिया की मुख्यधारा से जुड़े रहे जिसके चलते यहाँ का माहौल बेहद आधुनिक और अनुशासित है। यहाँ के बच्चे जब फराटेदार अंग्रेजी में अपना परिचय देते हैं और साथ ही झुककर बड़ों के चरण स्पर्श करते हैं, तो देखने वालों की आंखें नम हो जाती हैं। यह दृश्य बताता है कि यदि अवसर मिले, तो प्रतिभा किसी जाति या भूगोल की मोहताज नहीं होती।</p>
<p><strong>ये रहती है दिनचर्या </strong></p>
<p>छात्रावास कार्यकारिणी सदस्य विमल जैन व गौरीशंकर नागर छात्रावास अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के दिनभर की व्यवस्थित दिनचर्या बनी हुई हैं। जिसमें सुबह करीब 6 बजे जागना होता है। उसके बाद प्रात: स्मरण व 7बजे से अल्पाहार 7.30 बजे होता है। उसके बाद विद्यालय जाना वहां पर पढ़ाई करना वहां से लौटाने के बाद पुन: विद्यार्थियों की दिनचर्या शुरू हो जाती हैं।</p>
<p><strong>भामाशाहों के सहयोग से संचालित होता है</strong></p>
<p>छात्रावास की कार्यकारिणी में मंत्री भूपेंद्र जैन, संरक्षक अरविंद गोयल, सुरेंद्र गौतम,राजेंद्र विजय सहित अन्य ने बताया कि यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यकारिणी सदस्यों ने बताया कि ये बच्चें कभी अपने माता-पिता के मजदूरी करने जाते थे। कुछ बच्चे कालबेलिया समुदाय से है जो कि सांप पकड़ने का काम करते हैं। आज उन बच्चों का छात्रावास में प्रवेश के बाद उनको पढ़ने के साथ-साथ संस्कारित किया जा रहा हैं। साथ ही यहां पर आने वालों बच्चों के लिए सबकुछ नि:शुल्क रहता हैं। साथ ही भामाशाह के सहयोग से छात्रावास का संचालन किया जा रहा हैं।</p>
<p>डॉ. मोहन लाल साहू व विपिन योगी ने बताया कि छात्रावास परिसर सीसीटीवी से लैस हैं। साथ ही बच्चों को पढ़ने के लिए सुव्यवस्थित लाइब्रेरी बनी हुई हैं व ट्यूटर भी लगा रखे हैं। बीते सत्र में एक बच्चें ने खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वहीं बच्चों भोजन करने के दौरान एक-दूसरे से संस्कृत में बातचीत करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:24:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मांडूहेड़ा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का मामला : भवन के अभाव में छोटे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[ जर्जर भवन के बाद नहीं बना नया स्कूल, घोषणाओं के बावजूद निर्माण अधूरा; ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-of-the-government-primary-school-in-manduheda-village--young-children-forced-to-study-under-a-small-tin-shed-due-to-lack-of-a-building/article-147086"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/manduhera-gaanv-k-rajakey-prathamik-vidyalay-ka-mamala-bhavan-k-abhav-mein-chhote-teen-shed-k--niche-padhane-ko-majaboor-naunihal...kanwas,-kota-news-19.03.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई है, जहां ग्राम पंचायत मामोर के गांव मांडूहेड़ा में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन के अभाव में बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। जानकारी अनुसार कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे या ग्रामीणों द्वारा चंदे से बनाए गए छोटे टीन शेड में पढ़ाई करनी पड़ रही है। गर्मी, सर्दी और बारिश के बीच पढ़ाई करने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर मामोर ने बताया कि सांगोद पंचायत समिति क्षेत्र के इस गांव में पुराना स्कूल भवन जर्जर होने के कारण पहले ही गिर चुका है, लेकिन अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं भी अधूरी </strong></p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं भी अधूरी साबित हो रही हैं। ओम बिरला और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर द्वारा विद्यालय भवन के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। गौरतलब है कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी इसी जिले से हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना सवाल खड़े करता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार </strong></p>
<p>ग्रामीण मुकेश मेघवाल, ओमप्रकाश, छोटूलाल, रामचंद्र नागर, रिंकू एरवाल, दिग्विजय सिंह, भेरूलाल, रामप्रसाद बेरवा और शशिकांत मेघवाल सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए। गांव के अधिकांश विद्यार्थी दलित समुदाय से हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संसाधनों के अभाव में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, विशेषकर बरसात और तेज गर्मी के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>- रामेश्वर मामोर, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता</strong></p>
<p>नए भवन के लिए एडीपीसी को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>
<p><strong>- आनंद स्वरूप बड़ोलिया, कार्यवाहक सीबीईओ, शिक्षा विभाग</strong><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नायडू सरकार का बड़ा कदम, 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाई रोक, 90 दिनों में लागू होगा नियम</title>
                                    <description><![CDATA[नायडू सरकार ने बच्चों को मानसिक दुष्प्रभावों से बचाने के लिए 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के उपयोग को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में घोषणा की कि 90 दिनों के भीतर सख्त कानून लागू किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के बाद, अब आंध्र प्रदेश और कर्नाटक इस दिशा में कदम उठाने वाले देश के पहले राज्य बनेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-step-of-naidu-government-ban-on-use-of-social/article-145536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-naidu.png" alt=""></a><br /><p>आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश की नायडू सरकार ने राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला लिया है और इसके लिए सरकार 90 दिनों के अंदर कानून लागू कर देगी। सीएम नायडू ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा, उनकी सरकार 13 से 16 साल के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने पर फैसला करेगी और इसके जल्द ही राज्य सरकार कानून भी पारित करेगी। सीएम नायडू ने कहा कि उनकी सरकार ने ये निर्णय इसलिए लिया है ताकि सोशल मीडिया से बच्चों पर बुरा असर न पड़े। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, सीएम नायडू की ये घोषणा उनके कर्नाटक के समकक्ष सिद्धारमैया के उस घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो  कर्नाटक और आंध्र प्रदेश देश के पहले राज्य बन जाएंगे जो बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाएंगे। इससे पहले दिसंबर में, ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया था। हाल ही में, ब्रिटेन ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉमर्स, गेमिंग प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रोक लगाने के बारे में अभिभावकों से राय मांगी थी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:25:32 +0530</pubDate>
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