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                <title>children - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title> सांप पकड़ने वाले हाथों में अब किताबों की ताकत, कक्षा एक से करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाई </title>
                                    <description><![CDATA[घुमंतु समाज के बच्चों की तकदीर गढ़ रहा छात्रावास।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-hands-once-used-for-catching-snakes-now-hold-the-power-of-books--free-education-provided-from-class-1-to-class-8/article-151829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। यदि आप शाम के समय  महावीर नगर प्रथम स्थित श्री गोविंद गुरू घुमंतु छात्रावास के आसपास से गुजर रहे तो वहां पर शाम के समय पर होता हनुमान चालीसा का पाठ व भारत माता की जय के गूंजते जयकारों को सुनकर आप चौंकिए नहीं। ये कोई मंदिर नहीं हैं। यहां पर हाड़ौती भर के घुमंतु जातियों के बच्चों को कक्षा एक से लेकर करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाया जाता हैं। वहीं छात्रावास में पढ़ाई के साथ बच्चों का सुबह से लेकर शाम तक का व्यवस्थित शेड्यूल बना हुआ। जिसका वे पालन करत हैं।</p>
<p>छात्रावास के कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि छात्रावास में हाड़ौती की विभिन्न जगह जिसमें खानपुर,भवानीमंडी, सारोला, इटावा, बूंदी सहित अन्य जगहों के नट,भोपा,ओड़,कंजर,गाड़िया लुहार,मोगिया,कालबेलिया,रैबारी, जोगी,बंजारा समाज के बच्चों की आर्थिक, सामाजिक व भूगोेलिक जांच पड़ताल करके उनको प्रवेश दिया जाता हैं। वहीं ये बच्चें यहां पर आने से पहले अपने माता-पिता के साथ पुश्तैनी काम में सहयोग करते है जिनमें सांप पकड़ाना, लोहा पिटाना सहित अन्य कामों में सहयोग करते हैं।</p>
<p>कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि भारत की आजादी में घुमंतु जातियों का बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। वहीं ये जातियां समाज की मुख्यधारा से अलग होती जा रही हैं। अत: इन जातियों व बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए छात्रावास की स्थापना सन 2024 में 25 बच्चों से हुई व वहीं अभी करीब छात्रावा में 38 बच्चे निवासरत व अध्ययनरत हैं। वहीं घोषित रिजल्ट में 8 वीं में करीब 5 बच्चों ने ए ग्रेड़ प्राप्त किया। वहीं अभी छात्रावास में बच्चों के लिए जयपुर से आएं ट्रेनर दिनेश शर्मा बच्चों को संस्कृत सीखा रहे हैं।</p>
<p><strong>संस्कारों का अद्भुत संगम</strong></p>
<p>छात्रावास के अध्यक्ष गणपत शर्मा कहते हैं, हम चाहते हैं कि जब ये बच्चे यहाँ से निकलें, तो दुनिया की मुख्यधारा से जुड़े रहे जिसके चलते यहाँ का माहौल बेहद आधुनिक और अनुशासित है। यहाँ के बच्चे जब फराटेदार अंग्रेजी में अपना परिचय देते हैं और साथ ही झुककर बड़ों के चरण स्पर्श करते हैं, तो देखने वालों की आंखें नम हो जाती हैं। यह दृश्य बताता है कि यदि अवसर मिले, तो प्रतिभा किसी जाति या भूगोल की मोहताज नहीं होती।</p>
<p><strong>ये रहती है दिनचर्या </strong></p>
<p>छात्रावास कार्यकारिणी सदस्य विमल जैन व गौरीशंकर नागर छात्रावास अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के दिनभर की व्यवस्थित दिनचर्या बनी हुई हैं। जिसमें सुबह करीब 6 बजे जागना होता है। उसके बाद प्रात: स्मरण व 7बजे से अल्पाहार 7.30 बजे होता है। उसके बाद विद्यालय जाना वहां पर पढ़ाई करना वहां से लौटाने के बाद पुन: विद्यार्थियों की दिनचर्या शुरू हो जाती हैं।</p>
<p><strong>भामाशाहों के सहयोग से संचालित होता है</strong></p>
<p>छात्रावास की कार्यकारिणी में मंत्री भूपेंद्र जैन, संरक्षक अरविंद गोयल, सुरेंद्र गौतम,राजेंद्र विजय सहित अन्य ने बताया कि यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यकारिणी सदस्यों ने बताया कि ये बच्चें कभी अपने माता-पिता के मजदूरी करने जाते थे। कुछ बच्चे कालबेलिया समुदाय से है जो कि सांप पकड़ने का काम करते हैं। आज उन बच्चों का छात्रावास में प्रवेश के बाद उनको पढ़ने के साथ-साथ संस्कारित किया जा रहा हैं। साथ ही यहां पर आने वालों बच्चों के लिए सबकुछ नि:शुल्क रहता हैं। साथ ही भामाशाह के सहयोग से छात्रावास का संचालन किया जा रहा हैं।</p>
<p>डॉ. मोहन लाल साहू व विपिन योगी ने बताया कि छात्रावास परिसर सीसीटीवी से लैस हैं। साथ ही बच्चों को पढ़ने के लिए सुव्यवस्थित लाइब्रेरी बनी हुई हैं व ट्यूटर भी लगा रखे हैं। बीते सत्र में एक बच्चें ने खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वहीं बच्चों भोजन करने के दौरान एक-दूसरे से संस्कृत में बातचीत करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:24:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मांडूहेड़ा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का मामला : भवन के अभाव में छोटे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[ जर्जर भवन के बाद नहीं बना नया स्कूल, घोषणाओं के बावजूद निर्माण अधूरा; ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-of-the-government-primary-school-in-manduheda-village--young-children-forced-to-study-under-a-small-tin-shed-due-to-lack-of-a-building/article-147086"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/manduhera-gaanv-k-rajakey-prathamik-vidyalay-ka-mamala-bhavan-k-abhav-mein-chhote-teen-shed-k--niche-padhane-ko-majaboor-naunihal...kanwas,-kota-news-19.03.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई है, जहां ग्राम पंचायत मामोर के गांव मांडूहेड़ा में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन के अभाव में बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। जानकारी अनुसार कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे या ग्रामीणों द्वारा चंदे से बनाए गए छोटे टीन शेड में पढ़ाई करनी पड़ रही है। गर्मी, सर्दी और बारिश के बीच पढ़ाई करने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर मामोर ने बताया कि सांगोद पंचायत समिति क्षेत्र के इस गांव में पुराना स्कूल भवन जर्जर होने के कारण पहले ही गिर चुका है, लेकिन अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं भी अधूरी </strong></p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं भी अधूरी साबित हो रही हैं। ओम बिरला और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर द्वारा विद्यालय भवन के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। गौरतलब है कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी इसी जिले से हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना सवाल खड़े करता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार </strong></p>
<p>ग्रामीण मुकेश मेघवाल, ओमप्रकाश, छोटूलाल, रामचंद्र नागर, रिंकू एरवाल, दिग्विजय सिंह, भेरूलाल, रामप्रसाद बेरवा और शशिकांत मेघवाल सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए। गांव के अधिकांश विद्यार्थी दलित समुदाय से हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संसाधनों के अभाव में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, विशेषकर बरसात और तेज गर्मी के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>- रामेश्वर मामोर, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता</strong></p>
<p>नए भवन के लिए एडीपीसी को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>
<p><strong>- आनंद स्वरूप बड़ोलिया, कार्यवाहक सीबीईओ, शिक्षा विभाग</strong><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नायडू सरकार का बड़ा कदम, 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाई रोक, 90 दिनों में लागू होगा नियम</title>
                                    <description><![CDATA[नायडू सरकार ने बच्चों को मानसिक दुष्प्रभावों से बचाने के लिए 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के उपयोग को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में घोषणा की कि 90 दिनों के भीतर सख्त कानून लागू किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के बाद, अब आंध्र प्रदेश और कर्नाटक इस दिशा में कदम उठाने वाले देश के पहले राज्य बनेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-step-of-naidu-government-ban-on-use-of-social/article-145536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-naidu.png" alt=""></a><br /><p>आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश की नायडू सरकार ने राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला लिया है और इसके लिए सरकार 90 दिनों के अंदर कानून लागू कर देगी। सीएम नायडू ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा, उनकी सरकार 13 से 16 साल के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने पर फैसला करेगी और इसके जल्द ही राज्य सरकार कानून भी पारित करेगी। सीएम नायडू ने कहा कि उनकी सरकार ने ये निर्णय इसलिए लिया है ताकि सोशल मीडिया से बच्चों पर बुरा असर न पड़े। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, सीएम नायडू की ये घोषणा उनके कर्नाटक के समकक्ष सिद्धारमैया के उस घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो  कर्नाटक और आंध्र प्रदेश देश के पहले राज्य बन जाएंगे जो बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाएंगे। इससे पहले दिसंबर में, ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया था। हाल ही में, ब्रिटेन ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉमर्स, गेमिंग प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रोक लगाने के बारे में अभिभावकों से राय मांगी थी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूनान में भीषण हादसा: तटरक्षक पोत से टकराई प्रवासियों की नाव; 15 प्रवासियों की डूबने से मौत, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[चियोस द्वीप के पास तटरक्षक पोत से टकराई प्रवासियों की नाव डूब गई। हादसे में 15 लोगों की मौत, 25 को बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/horrific-accident-in-greece-migrant-boat-collides-with-coast-guard/article-141953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(13)3.png" alt=""></a><br /><p>एथेन्स। यूनान के चियोस द्वीप पर एक तटरक्षक पोत से प्रवासियों की नाव टकराने के बाद 15 प्रवासियों की मौत हो गयी है। रिपोर्ट में बताया कि यह नाव चियोस पहुंचने की कोशिश कर रही थी, ताकि प्रवासियों को यूनान में उतारा जा सके। स्थानीय तटरक्षक बलों ने उनका पीछा किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान दोनों नाव टकरा गयीं और समंदर में डूबने से 15 लोगों की मौत हो गयी। </p>
<p>घटना के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। दो तटरक्षकों और सात बच्चों एवं दो महिलाओं सहित 25 प्रवासियों को दुर्घटना के बाद अस्पताल ले जाया गया। 14 प्रवासियों के शव पानी में मिले, जबकि एक महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि पश्चिमी एशिया, एशिया और अफ्रीका से आने वाले प्रवासी यूनान को यूरोप के एक रास्ते के तौर पर देखते हैं। इनमें से ज्यादातर यहां तुर्की से होते हुए आते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के लिए 14 जनवरी तक अवकाश</title>
                                    <description><![CDATA[पंजीकृत बच्चों को दिए जाने वाला गरम पोषाहर, टेक होम राशन के रूप में उपलब्ध करवाने के निर्देश ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--anganwadi-centers-closed-for-children-until-january-14th/article-138545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  दैनिक नवज्योति में स्कूलों में अवकाश लेकिन आंगनबाड़ी के बच्चे केंद्र पर आने को मजबूर शीर्षक से बीते 31 दिसंबर को समाचार प्रकाशित होने के बाद सोमवार को प्रशासन हरकत में आया और आंगनबाड़ी केंद्र पर 14 जनवरी तक अवकाश घोषित किया। वहीं प्रशासन ने जिले में शीतलहर के मध्यनजर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले शालापूर्व शिक्षा गतिविधियों के 3-6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए 6 से 14 जनवरी तक के लिए अवकाश घोषित किया गया है। जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।</p>
<p>आदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दी जाने वाली अन्य सेवाएं जैसे टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस आदि पूर्व की भांति जारी रहेंगी। समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मानदेयकर्मी निर्धारित समय में नियमित रूप से उपस्थित रहकर आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन संबंधी समस्त गतिविधियां सम्पादित करेंगे। साथ ही, उक्त अवधि के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्र पर पंजीकृत बच्चों को दिए जाने वाला गरम पोषाहर, टेक होम राशन के रूप में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत में उठने लगी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक की मांग, हाईकोर्ट ने कहा- कानून पर करे विचार</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, तब तक सरकार को जागरूकता अभियानों को तेज करना चाहिए और माता-पिता की जिम्मेदारी भी अहम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/demand-to-ban-use-of-social-media-by-children-below/article-137240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी रोक लगने के बाद भारत में भी ऐसी मांग उठने लगी है। मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से ऑस्ट्रेलिया जैसे कानून पर विचार करने का सुझाव दिया है। अदालत ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि इंटरनेट बच्चों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। कोर्ट ने माना कि आपत्तिजनक कंटेंट आसानी से बच्चों तक पहुंच रहा है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, तब तक सरकार को जागरूकता अभियानों को तेज करना चाहिए और माता-पिता की जिम्मेदारी भी अहम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 10:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थिति कम, एक केंद्र मिला बंद </title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई अव्यवस्थाएँ सामने आईं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/low-attendance-at-several-anganwadi-centers-in-the-city--with-one-center-found-closed/article-134666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य सुधार के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन कोटा शहर के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति इन दावों के विपरीत दिखाई दी। बुधवार को विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई कमियां और अव्यवस्थाएँ सामने आईं। वहीं केंद्रों पर बच्चों के खेलने की सामग्री कुछ जगहों पर गोदरेज में रखी हुई है तो कुछ में अलमारी में रखी हुई।</p>
<p><strong>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र : एक ही कमरे में पूरी व्यवस्था</strong><br />बुधवार सुबह करीब 11:40 बजे दुर्गा बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र का स्कैन किया गया। यह केंद्र केवल एक कमरे में संचालित हो रहा है। केंद्र में 7 पंजीकृत बच्चों में से मौके पर सिर्फ 1 बच्चा ही मौजूद था। जब रिपोर्टर ने बाकी बच्चों के बारे में पूछा तो कार्यकर्ता सायरा मंसूरी और सहायिका जयंती राठौर ने बताया कि सर्दी के कारण बच्चे कम आ रहे हैं। दोनों ने यह भी जानकारी दी कि सुपरवाइजर किसी मीटिंग में गई हुई हैं।इस केंद्र में बच्चों के खेलने की सामग्री कमरे में बनी अलमारियों और टांड पर रखी हुई मिली। वहीं, उसी एक कमरे में बच्चों के लिए दूध गर्म करने के साथ-साथ दलिया और अन्य खाद्य सामग्री भी तैयार की जाती हैं, जिससे साफ-सफाई और जगह की कमी जैसी समस्याएँ साफ नजर आती हैं।</p>
<p><strong>सिंधी कॉलोनी द्वितीय केंद्र: व्यवस्थित लेकिन उपस्थिति फिर भी कम</strong><br />सरकारी स्कूल में संचालित सिंधी कॉलोनी द्वितीय आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण बुधवार दोपहर 12 बजे किया गया। यहां भवन की दीवारों पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग बनी हुई थीं, जो बच्चों के लिए शिक्षाप्रद वातावरण बनाती हैं।केंद्र में 10 पंजीकृत बच्चों में से 7 बच्चे ही उपस्थित थे। कार्यकर्ता सीमा कुमारी ने बताया कि सोमवार से शनिवार तक बच्चों को 10 ग्राम दूध और 5 ग्राम चीनी गर्म करके दी जाती है। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित मेन्यू चार्ट के अनुसार बच्चों को खिचड़ी, दलिया, उपमा सहित अन्य पोषक आहार भी दिया जाता है।</p>
<p><strong>साजीहेड़ा केंद: निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिला</strong><br />साजीहेड़ा में एक निजी स्कूल के पास संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर जब संवाददाता बुधवार दोपहर 12:30 बजे पहुंचे, तो केंद्र बिल्कुल खाली और बंद मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि केंद्र पर उस समय कोई मौजूद नहीं था। मकान मालिक व अन्य ने जानकारी दी कि सहायिका कुछ देर के लिए केंद्र खोलकर आई थी और थोड़ी देर बाद ही चली गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र नियमित समय पर संचालित नहीं हो रहा है।</p>
<p>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय की सुपरवाईजर ट्रेनिंग में हैं। साथ हीआंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं की डयूटी एसआईआर में लगी हुई। जिसकी वजह से कुछ व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। और अन्य समस्याओं को दिखावाता हूं।<br /><strong>- आलोक शर्मा, सीडीपीओं कोटा शहर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:40:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>63 हजार आंगनवाड़ियों में बच्चों ने गाया वंदे मातरम्</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 63 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों ने सामूहिक गायन किया। साथ ही तीन दिवसीय आंगनवाड़ी ओलंपिक खेल 2025 की शुरुआत हुई। लगभग 12 लाख पंजीकृत बच्चों की भागीदारी वाले इन खेलों की थीम इस बार खेल-खेल में सीखो रखी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/children-sang-vande-mataram-in-63-thousand-anganwadis/article-132353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रगीत  वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बाल विकास सेवाएं विभाग की ओर से प्रदेश की 63 हजार आंगनवाड़ियों में नन्हें-मुन्नों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। </p>
<p>तीन दिन के ओलंपिक खेल भी शुरू: समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गुरुवार को तीन दिवसीय आंगनवाड़ी ओलंपिक खेल 2025 का आगाज हुआ। मालावत ने बताया कि केन्द्रों पर लगभग 12 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इस वर्ष उक्त खेलों की थीम खेल-खेल में सीखो रखी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 10:51:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज रफ्तार जिंदगी पर लगाम की जरूरत, सोशल मीाडिया और रील कल्चर हिला रहा दिमाग</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों की नहीं पैरेन्ट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-fast-paced-life-needs-to-be-curbed--social-media-and-reel-culture-are-disrupting-minds/article-129169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(15)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति कार्यालय में होने वाली मासिक परिचर्चा की श्रंखला में बुधवार को मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तहत मानसिक स्वास्थ्य (मॉडर्न लाइफ स्टाइल एन्ड मेन्टल इनस्टेबिलिटी) विषय पर परिचर्चा की गई। परिचर्चा में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने कहा कि यह मुद्दा भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थितियों से जुड़ा मुद्दा है। तनाव, डिप्रेशन,  एंग्जाइटी,  नशा और अंत में पागलपन तक आदमी पहुंच जाता है।  संयुक्त परिवारों का विघटन ने इस समस्या को विस्तृत रूप दे दिया है। इसके साथ साथ आर्थिक असुरक्षा, प्रतिस्पर्धा, एकाकीपन, पारिवारिक तनाव, घरेलू हिंसा,और जागरुकता की कमी मुख्य कारण है। इसके साथ मॉर्डन लाइफ स्टाइल में सोशल मीडिया का रील कल्चर बड़ा कारण बन रहा है। अब बच्चा,किशोर, युवा बुजुर्ग सब एकाकीपन के शिकार होकर मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। तेज रफ्तार जिंदगी ने सबकुछ उलट पुलट कर दिया है।   परिचर्चा में जहां सीनियर साइकेटिस्ट, न्यूरो, पीडियाट्रिक, फिजिशियन, न्यूट्रिशियन काउंसलर, डायटीशियन, रिसर्चर, आयुर्वेद, योगा,के साथ मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले ब्रहम्माकुमारी संस्थान,आर्ट आॅफ लिविंग और रामलाल जी सिहाग के संस्थान से जुडे सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।  प्रस्तुत हैं परिचर्चा के अंश... </p>
<p><strong>एकांत में बैठकर खुद को जानने से कम होगा तनाव</strong><br />मानसिक बीमारियां व तनाव का कोई एक कारण नहीं है। परिवार के लोगों का बच्चों पर शुरुआत से ध्यान नहीं देना और उसका खान-पान सही नहीं होना। खेलने के लिए समय नहीं होने और पढ़ाई का बोझ और परिवार की बच्चों से बढ़ती अपेक्षाएं तनाव बढ़ाती है। जिससे मानसिक बीमारियां बढ़ती है। बच्चे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते हैं। जिससे गलत संगत में पढ़ने पर भी तनाव बढ़ता है। मैंटल हैल्थ पहले सरकार की प्राथमिकता में नहीं था। लेकिन अब इसे विश्व स्तर पर दिवस व सप्ताह के रूप में मानने से जागरूकता बढ़ी है। हालांकि इस तरह की बीमारियों की पहचान जितनी जल्दी हो सके उतना समय पर उपचार संभव है। वैसे एकांत में बैठकर खुद के बारे में जानने और कमियों को दूर करके भी मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है।   <br /><strong>-डॉ. एम.एल. अग्रवाल सीनियर मेंटल हेल्थ काउंसलर , प्रेसिंडेंट होप सोसाइटी  </strong></p>
<p><strong>नींद क्वालिटी बिगड़ने से बढ़ रही मानसिक बीमारियां</strong><br />एकल परिवार होने से जहां माता पिता के पास बच्चों के लिए समय ही नहीं है। समय मिलता भी है तो वे बच्चों को डांटने के सिवाय कुछ नहीं करते। उन्हें पुचकारने वाला परिवार को कोई बड़ा सदस्य नहीं है। ऐसे में बच्चे अपना अधिकतर समय टीवी या मोबाइल पर बिताने लगे है। जिससे अधिक समय स्क्रीन पर रहने से बच्चे हो या बड़े उनकी नींद क् वालिटी बिगड़ गई है। पर्याप्त नींद नहीं ले पाने से भी मानसिक तनाव व बीमारियां बढ़ रही है। 1990 के बाद इस तरह की बीमारियों के उपचार की बेहतर दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन लोग भ्रम के कारण उनका सेवन नहीं कर पाते हैं। मानसिक तनाव व बीमारियों को कम करने के लिए परिवार को आपस में समय देना होगा।<br /><strong>-डॉ. विनोद कुमार दड़िया आचार्य एवं विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा मेडिकल कॉलेज </strong></p>
<p><strong>अपेक्षा व उपेक्षा के कारण बढ़ रहा तनाव</strong><br />वर्तमान में करीब 90 फीसदी लोग मानसिक तनाव व बीमारियों से ग्रसित है। सभी के  कारण अलग-अलग हो सकते हैं। मोबाइल  समय की जरूरत है। संयुक्त परिवार और कामकाजी तनाव जैसे सभी मुद्दे तो रहेंगे। उन पर नियंत्रण कैसे किया जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़े। लोग अपनी अपेक्षा बच्चों पर थोपते हैं। मैं कहता हूं कि बच्चों की नहीं पैरेन्ट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए।  इस पर बात हो लेकिन परिवार का उस पर नियंत्रण रखना होगा। उम्र बढ़ने के साथ कई बार बीमारियां बढ़ती जाती है। घर में बुजुर्ग व बच्चों से सम्पर्क बनाए रखना होगा। ऐसा करने से सभी एक दूसरे की बातें व भावनाएं व्यक्त कर सकेंगे तो उनका तनाव कम होगा और बीमारियां भी नहीं होंगी।  अपेक्षा और उपेक्षा यह दो तनाव के बड़े कारण हैं।  इन दोनों से बचकर भी तनाव व बीमारियों को कम किया जा सकता है। <br /><strong>-डॉ. एस.एन. गौतम, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष न्यूरो सर्जरी विभाग मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का आधार</strong><br />मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह केवल कार्य क्षमता का विषय नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और उपयोगी बनाने की प्रक्रिया है।  मानसिक बीमारी किसी कमजोरी का संकेत नहीं है। लगभग 50 प्रतिशत मानसिक बीमारियों की शुरूआत 15 वर्ष की उम्र तक हो जाती है, जबकि 75 प्रतिशत 24 वर्ष तक पहुँच जाती हैं। वास्तव में मानसिक विकास मां के गर्भ से ही प्रारंभ हो जाता है और किशोरावस्था इसका सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। मानसिक स्वास्थ्य की नींव घर से रखी जाती है। आज के दौर में एकल परिवारों के बढ़ने से बच्चों को दादा-दादी या नाना-नानी का भावनात्मक सहयोग नहीं मिल पाता, जिससे वे मानसिक रूप से कमजोर हो सकते हैं।  बच्चों का मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक और यौन स्वास्थ्य समान रूप से सशक्त होना आवश्यक है।<br /><strong>-डॉ. अविनाश बंसल, नवजात शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य विभाग, भारत विकास परिषद चिकित्सालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>बच्चों से मित्रवत व्यवहार करना होगा</strong><br />परिवार में माता पिता जो खुद नहीं कर सके वह अपने बच्चों से पूरी करवाना चाहते हैं। जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ने से वे तनाव में रहने लगते है। बच्चे अपनी भावनाएÞं परिवार में शेयर नहीं कर पाते। उनकी इच्छाओं को दबा दिया जाता है। जिससे तनाव और तनाव से मानसिक बीमारियां बढ़ती है। बच्चों से परिजनों को मित्रवत व्यवहार करना होगा। जिससे वे अपनी बात उनसे खुलकर कह सके। पैसा नहीं बच्चे सबसे बड़ा धन हैं। जिसने इसे प्रमुखता दी वहां तनाव व मानसिक बीमारियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। <br /><strong>-डॉ. रोशनी मिश्रा, असिस्टेंट गवर्नर रोटरी क्लब कोटा राउंड टाउन </strong></p>
<p><strong>गर्भ संस्कार से श्रेष्ठ संतान का निर्माण होता है</strong><br />चार हजार साल पहले भी हमारे ऋषि-मुनियों ने बताया था कि श्रेष्ठ संतान का निर्माण गर्भ के भीतर ही होता है। हर माता-पिता स्वस्थ और संस्कारी संतान की इच्छा रखते हैं। गर्भावस्था में मां का आहार-विहार, विचार और भावनाएं सीधे बच्चे पर असर डालते हैं। पांचवें माह में गर्भ में मन का निर्माण होता है और छठे माह में बुद्धि का विकास शुरू होता है। ऐसे में मां यदि नकारात्मक या हिंसक विचार रखती है, नशे या मारधाड़ जैसी प्रवृत्तियों में रहती है, तो उसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु के मन पर पड़ता है। आचार्य चरक ने स्मृति नष्ट होने को प्रज्ञा अपराध कहा, जो सभी रोगों की जड़ है।  प्रकृति स्वयं सबसे बड़ी चिकित्सक है। त्योहार, आहार और परंपराएं हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी हैं।<br /><strong>-डॉ. नित्यानंद शर्मा, प्राचार्य, आयुर्वेद योग नेचुरोपैथी महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्नेह जरूरी</strong><br />आज के व्यस्त जीवन में माता-पिता दोनों के कार्यरत होने के कारण बच्चों का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। बच्चों को माता-पिता से संवाद, स्नेह या ध्यान नहीं मिलता, तो वे वही अपनापन घर से बाहर तलाशने लगते हैं। संयुक्त परिवार की यही विशेषता रही है कि वहां बच्चों का न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक विकास भी संतुलित रूप से होता है। परिवार के अन्य सदस्यों के बीच रहने से बच्चे को सामाजिक व्यवहार, अनुशासन और भावनात्मक सुरक्षा मिलती है। वहीं एकल परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता के कारण बच्चे स्क्रीन तक सीमित होते जा रहे हैं। माता-पिता को चाहिए कि जब वे घर पर हों, तो बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे परिवार से जुड़ी बातें करें और उनकी इच्छाओं का सम्मान करें। <br /><strong>-डॉ. मिथिलेश खींची, मनोचिकित्सक, सहआचार्य,  मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>विजुअलाइजेशन से बढ़ेगा कॉन्संट्रेशन, बच्चे होंगे डिप्रेशन से दूर</strong><br />आज की जनरेशन मोबाइल के ज्यादा उपयोग से पढ़ाई से भटकती जा रही है।  मोबाइल को पूरी तरह दूर करना संभव नहीं है, लेकिन विजुअलाइजेशन तकनीक से इसका समाधान निकाला जा सकता है। बच्चे आंख बंद करके अपने लक्ष्य की कल्पना करें। जैसे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना या इंटरव्यू में आत्मविश्वास से उत्तर देना। इससे मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और भय दूर होता है। एक छात्र ने बताया कि लगातार सिगरेट छोड़ने की कोशिश के बाद विजुअलाइजेशन अपनाने के बाद धीरे-धीरे कम करने के बाद छोड़ दी। कई छात्रों ने इस तकनीक से मोबाइल की लत भी छोड़ दी है। कुछ ने तो विजुअलाइजेशन की मदद से अपने सपनों की फील्ड, जैसे डेंटल कॉलेज में प्रवेश भी पाया। बच्चों को सकारात्मक विजुअलाइजेशन अपनाना चाहिए, जिससे वे तनाव और डिप्रेशन से दूर रह सकें।<br /><strong>-डॉ. समर्थ उपाध्याय, फिजिशियन, यूसीएचसी, विज्ञान नगर, कोटा</strong></p>
<p><strong>अपने अंदर की शक्ति को पहचानना आवश्यक</strong><br />मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति उसके अंदर ही छिपी होती है। मेडिटेशन वह माध्यम है जो हमारे अशांत मन को शांत करता है। जब मन शांत होता है, तभी हम अपने अंदर की शक्ति से जुड़ पाते हैं। यह जुड़ाव मन की चार्जिंग के समान है। यदि हमारा मन सकारात्मक विचारों से भरा होगा तो हमारे चारों ओर सकारात्मक वाइब्रेशन फैलेंगे, और यदि मन नकारात्मक रहेगा तो नकारात्मक ऊर्जा ही उत्पन्न होगी। आज डॉक्टर भी मेडिटेशन को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बता रहे हैं, क्योंकि मन से वाइब्रेशन निकलते हैं जो हमारे शरीर और वातावरण को प्रभावित करते हैं। जब हम पॉजिटिव थॉट्स देते हैं, तो हमारा मन मजबूत और पावरफुल बनता है।  मेडिटेशन हमें यह समझने में मदद करता है कि कब धैर्य रखना है और कब कर्म करना है—यही आत्मज्ञान की दिशा है।<br /><strong>-ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी, सेवाकेंद्र प्रभारी, कोटा संभाग</strong></p>
<p><strong>मोटिवेशन के साथ मेडिटेशन जरूरी</strong><br />वर्तमान में जिस तरह की प्रतिस्पर्धा एक दूसरे में बढ़ती जा रही है। वह तनाव का बड़ा कारण है। सही खानपान नहीं होना और पर्याप्त नींद नहीं आना भी मानसिक तनाव व बीमारियों को बढ़ाने का कारण है। ऐसे में तनाव व मानसिक बीमारियों को कम करने के लिए मोटिवेशन के साथ ही मेडिटेशन भी जरूरी है। व्यक्ति के शरीर के अंदर की जो शक्ति है उसे कुंडलिनी के माध्यम से जागृत किया जाता है। जिससे एक बिन्दु पर ध्यान केन्द्रित होने पर अन्य जगह से ध्यान हटने पर तनाव व मानसिक बीमारियों से बचा जा सकता है। <br /><strong>-राजेश गौतम, प्रेस सचिव आध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र </strong></p>
<p><strong>बच्चों को चाहिए बचपन, ना कि  सुविधाएं</strong><br /> रूट कॉस्ट यानी समस्या की जड़ पर बात बहुत कम लोग करते हैं। अक्सर बच्चे घर में रहकर भी अकेलापन महसूस करते हैं। माता-पिता से दूरी बढ़ने के कारण वे बाहरी दुनिया में अपनापन तलाशने लगते हैं। बच्चों को केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और ध्यान की जरूरत होती है। उन्हें रियल स्टोरी या जीवन की सच्ची घटनाओं से समझाया जाए, तो वे चीजों को बेहतर तरीके से महसूस करते हैं। पहले दादा-दादी की सीख और स्नेह बच्चों की मानसिक मजबूती का आधार थे, पर अब वह कमी साफ झलकती है। हमें समस्या के मूल पर कामकरने की जरूरत है। <br /><strong>-रिद्धिमा नरसिंघानी,  स्टूडेंट आयुर्वेद योग नेचुरोपैथी महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य में योग का महत्व</strong><br />लगातार समय की कमी, काम का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं व्यक्ति को मानसिक थकान और तनाव की ओर ले जाती हैं। ऐसे में योग एक अत्यंत प्रभावी और आवश्यक साधन बनकर उभरता है। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है। यह तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। योग में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई प्राणायाम उपयोगी माने गए हैं।  नियमित अभ्यास से मानसिक शांति, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। योग आधुनिक जीवन के लिए एक सशक्त और संतुलित जीवन का आधार है।<br /><strong>-निमीषा कसेरा, योग प्रशिक्षक,कोटा </strong></p>
<p><strong>असुरक्षा मतलब मानसिक तनाव</strong><br /> बाहरी नकारात्मक परिस्थितियां केवल तभी हमारे स्वास्थ्य पर असर डालती हैं, जब हम अंदर से कमजोर होते हैं। ठीक उसी तरह जैसे पानी में तैरता जहाज तब डूबता है जब पानी उसके अंदर चला जाता है, हमारी मानसिक स्थिति भी तभी प्रभावित होती है जब हम अंदर से असुरक्षित हों। युवाओं के संदर्भ में, विशेषकर नीट और आइआइटी की तैयारी कर रहे कोटा के छात्र, माता-पिता की जिम्मेदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती और सकारात्मक सोच ही बच्चों की सफलता और संतुलित जीवन की कुंजी है।<br /><strong>-दीपक शर्मा, काउंसलर एवं आर्ट आॅफ लिविंग प्रशिक्षक, कोटा</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया से दूरी जरूरी</strong><br />माता-पिता दोनों के कामकाजी होने के कारण बच्चों का अधिकांश समय आया के साथ बीतता है। ऐसे में उनके भीतर सही संस्कारों का विकास होता था। न्यूक्लियरी फैमिली में बच्चों का ध्यान सोशल मीडिया की ओर अधिक बढ़ रहा है, जिससे एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन प्रभावित हो रहा है। मानसिक शांति और संतुलन के लिए ध्यान लगाना आवश्यक है। मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति उसके अंदर ही छिपी होती है। हमें अपने भीतर की पॉवर को जानना और अपनी विकृतियों को पहचानना होगा। तभी बच्चों में संस्कार मजबूत होंगे और वे मानसिक विकृतियों से दूर रहेंगे।<br /><strong>-अंशुल मेहंदीरत्ता, अधीक्षक नारी निकेतन, कोटा</strong></p>
<p><strong>प्रारम्भिक शिक्षा में शामिल हो ध्यान</strong><br />मानसिक बीमारियों का सबसे बड़ा कारण ही तनाव है। तनाव बच्चे से लेकर बड़े सभी को अलग-अलग कारणों से हो सकता है। परिवार में एक दूसरे के लिए समय नहीं है। ऐसे में लोग अपनी बात कहने के लिए दूसरों का सहारा लेते हैं। लेकिन उससे मन शांत नहीं हो सका। ध्यान व सुदर्शन क्विया मन को शांत करने के साथ ही तनाव को कम करती है। ध्यान करने से मन में अच्छे विचार आते है। जब अच्छे विचार आएंगे तो सकारात्मकता बढ़ेगी। इसलिए आवश्यक है कि ध्यान को प्रारम्भिक शिक्षा में शामिल किया जाए। <br /><strong>-योगेन्द्र हरसोरा, अपेक्स मैंबर आर्ट आॅफ लिविंग </strong></p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य पर डाइट का सीधा असर</strong><br />जैसा खाए अन्न, वैसा होय मन यह कहावत आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में और भी ज्यादा सटीक बैठती है। मानसिक स्वास्थ्य में डाइट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।  फ्रोजन या प्रोसेस्ड फूड शरीर ही नहीं, मन पर भी असर डालता है। जब भोजन का पाचन होता है, तो न्यूरॉन्स और हार्मोन्स सक्रिय होते हैं जो खुशी का अनुभव कराते हैं। परंतु अगर भोजन असंतुलित या कृत्रिम तत्वों से भरा हो, तो यह प्रक्रिया बाधित होती है और व्यक्ति अवसाद की ओर बढ़ सकता है।  फाइबरयुक्त, हल्दी और प्राकृतिक प्रोटीन से भरपूर भोजन करें, छाछ और घर का बना खाना अपनाएं तथा बाहर का फैटी और कृत्रिम स्वाद वाला भोजन सीमित करें। यही संतुलित डाइट मन को स्वस्थ रख सकती है।<br /><strong>-डॉ. नीरजा श्रीवास्तव, प्रो.गवर्नमेंट कॉलेज, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 15:21:29 +0530</pubDate>
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                <title>दशहरा विशेष : दैनिक नवज्योति ने श्री करनी नगर विकास समिति के बच्चों के साथ मनाया दशहरा, ड्रॉइंग प्रतियोगिता का आयोजन </title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों ने दशहरे के महत्व को समझा और उसे अपनी कला में व्यक्त किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dussehra-special--dainik-navjyoti-celebrated-dussehra-with-the-children-of-shri-karni-nagar-vikas-samiti/article-128481"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस खास अवसर पर दैनिक नवज्योति ने श्री करनी नगर विकास समिति के बाल गृह के बच्चों के साथ उत्साहपूर्ण ढंग से दशहरा उत्सव मनाया। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था। इस उत्सव के दौरान समिति के बच्चों के बीच दशहरा थीम पर ड्रॉइंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ भाग लिया। बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से रावण के पुतले को सजाने और उसे तैयार करने का अनूठा अवसर प्राप्त किया। समिति के कुछ बड़े बच्चों रामनिवास, राजेश, गौरव, कमल और दीपक ने मिलकर रावण का पुतला बनाया। लकड़ी, गत्ते, कागज और अन्य सामग्रियों से रावण का पुतला तैयार किया गया, जिसे बाद में सजाया गया और आतिशबाजी के साथ जलाया गया।</p>
<p><strong>रचनात्मकता में भागीदारी</strong><br />दशहरा उत्सव के तहत आयोजित ड्रॉइंग प्रतियोगिता में बच्चों ने रावण के दस सिर, राम के धनुष-बाण से रावण का वध और रावण का जलना जैसे दृश्य चित्रित किए। किसी ने रावण को जलते हुए दिखाया, तो किसी ने राम और रावण के युद्ध को अपनी कला के माध्यम से प्रस्तुत किया। इन चित्रों के माध्यम से बच्चों ने दशहरे के महत्व को अच्छे से समझा और उसे अपनी कला में व्यक्त किया।</p>
<p><strong>खुशी का माहौल</strong><br />इस आयोजन में बच्चों ने पटाखे भी चलाए, जिसमें सभी बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। फुलझड़ी, अनार और चकरी चलाते हुए बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे और यह पल उनके लिए अविस्मरणीय बन गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री करनी नगर विकास समिति की संयोजिका सुमन भंडारी, बाल गृह के सुपरवाइजर महेश मीना और विष्णु सक्सेना का सराहनीय योगदान रहा।</p>
<p><strong>समिति के ही बच्चे गोविंद (कक्षा सात) द्वारा स्वरचित कविता-</strong><br /><strong>त्यौहारों का देश हमारा </strong><br />तरस रहा माटी का कण कण, उमड़ रही रसधार है<br />त्यौहारों का देश हमारा, हमको इसे प्यार है,<br />मनभावन सावन आते है, होते खेल तमाशे है<br />दीपावली में दीपदान, फुलझड़ी, खील बताशे हैं,<br />आता है हर वर्ष दशहरा, होते खेल तमाशे है,<br />त्यौहारों का देश हमारा हमको इसे प्यार है।</p>
<p><strong>प्रतियोगिता के परिणाम</strong><br />इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया रोहित कुमार बैरवा (प्रथम वर्ष) ने, जबकि द्वितीय स्थान पर कान्हा जाटव (कक्षा 7) और तृतीय स्थान पर ललित बैरवा (कक्षा 9) रहे। इसके साथ ही, सांत्वना पुरस्कार के लिए रोहित सिंह (कक्षा 4), अंकित मेघवाल (कक्षा 8), और अंकित पांचाल (कक्षा 5) का चयन किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 15:01:17 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : किसी भी पक्षी का नेचुरल फूड नहीं है ज्वार-बाजरा, 90% कीटभक्षी व 10% बीजभक्षी होते हैं पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[अपना प्राकृतिक भोजन भूले कबूतर, अब आर्टिफिशल फूड पर हो गए निर्भर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--sorghum-and-millet-are-not-the-natural-food-of-any-bird--90--of-birds-are-insectivores-and-10--are-seed-eaters/article-127185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनाज, ज्वार-बाजरा किसी भी पक्षी का प्राकृतिक भोजन नहीं है। लेकिन, लोग ज्वार-बाजरा खिलाकर प्रकृति के फूड चैन तोड़ रहे हैं। जिसके दुष्परिणाम घातक बीमारियों के रूप में सामने आ रहे हैं। आज सार्वजनिक स्थानों से घरों की छतों तक कबूतरों का कब्जा हो गया। कबूतरों को दाना डालकर लोग न केवल ईको सिस्टम को बर्बाद कर रहे बल्कि मानव जीवन को घातक संक्रमण व बीमारियों की ओर भी धकेल रहे हैं। कबूतरों के फड़फड़ाहट के दौरान पंखों से निकलने वाले बारीक रेशें व बीट से हवा में फैलते बैक्टेरिया सांस के साथ शरीर में जाते हैं और गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं। यह बात वन्यजीव विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में आयोजित जागरूकता शिविर में उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बच्चों को जागरूक करते हुए कही। वाइल्ड लाइफ कोटा द्वारा बुधवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पुलिस लाइन व श्रीपुरा स्थित पीएमश्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। जिसमें बच्चों को पक्षियों के जीवन चक्र से रुबरू कराया।</p>
<p><strong>आस्था के नाम पर पक्षियों को गुलाम बनाना नेचर के खिलाफ</strong><br />उन्होंने बताया कि कबूतर के सम्पर्क में आने से  फंग्ल इंफेक्शन हिस्टोप्लासमोसिस और क्रिप्टोकोकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। ऐसे में घर के आंगन, बालकनी या छत पर दाना डालने से बचें। प्रकृति ने उन्हें खुद भोजन जुटाने और जीवन जीने के लायक बनाया है। उन्हें दाना डालकर प्रकृति के ईको सिस्टम से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। आस्था के नाम पर पक्षियों को गुलाम बनाना नेचर के खिलाफ है।   यदि, दान पुण्य करना है तो मवेशियों को हरा चारा, गुड़ खिला सकते हैं।  </p>
<p><strong>वन्यजीवों की जान ले रहे गुब्बारे</strong><br />उप वन संरक्षक भटनागर बताते हैं, जन्मदिवस या अन्य खुशी के मौके पर गुब्बारों का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि, यह वन्यजीव व जलीय जीवों की मौत के कारण बनते हैं। गुब्बारें दो तरह के होते हैं, पहला-बायोडिग्रेडेबल जो लेटेक्स होते हैं। वहीं,  नॉन बायोडिग्रेडेबल होते हैं, जो बेहद खतरनाक होते हैं। गैस निकलने पर इनके दो ही जगह जंगल और नदियां-समुद्र में गिरने से कछुआ, उद बिलाव,  व्हेल,  डॉल्फिन, पक्षी गुब्बारों में उलझने या इनक टुकड़े निगलने से उनकी मौत हो जाती है। </p>
<p><strong>इंसानी दखल से टूटी पक्षियों की खाद्य श्रृंखला </strong><br />डीएफओ भटनागर ने बच्चों को बताया कि दुनिया में 90% पक्षी कीटभक्षी और 10% बीजभक्षी होते हैं, जिसमें कबूतर भी शामिल है।  अनाज, ज्वार व बाजरा किसी भी पक्षी का नेचुरल फूड नहीं है। जाने-अनजाने में इंसानी दखल से पक्षियों की खाद्यय शृखंला टूट रही है। वर्तमान में स्थिति यह हो गई कि कबूतर अब अपना मुख्य भोजन बीज खाना भूल गया, अब वह आर्टिफिशल फूड पर निर्भर हो गया। इतना ही नहीं कबूतरों को ज्वार-बाजरा खिलाना इंसान की दिनचर्या में शामिल हो गया। नियमित भोजन मिलने से उनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। जबकि, इनके पंखों व बीट से हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस, फंग्ल इंफेक्शन हिस्टोप्लासमोसिस और क्रिप्टोकोकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों  का खतरा बढ़ गया है। कबूतरों की सूखी बीट के वायरस हवा के साथ शरीर में पहुंचकर फेफड़े डेमेज कर रहे हैं।</p>
<p><strong>बंदरों को भोजन व चीटिंयों को न खिलाएं आटा</strong><br />सहायक वनपाल प्रेम कंवर ने बच्चों को जागरूक करते हुए कहा, बंदरों व लंगूर को भोजन, चीटिंयों को आटा नहीं खिलाना चाहिए। बंदर बड़े बीज वाले फल जैसे तेंदु, बेल पत्र, आम के फलों को खाकर बीज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैलाते हैं, जिससे पड़ों की संख्या बढ़ती है। लेकिन, रेडिमेड फूड खिलाने से वे जंगल से आबादी के बीच बस गए। इनके काटे जाने से रेबीज तक का खतरा रहता है। इसी तरह चीटिंयों को आटा नहीं खिलाना चाहिए। इस दौरान  कोटा ग्रीन कम्यूनिटी के प्रणव सिंह खींची, ज्योत्सा खींची मौजूद रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 14:34:57 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : नवज्योति ने समाज में किया जागरूकता का संचार, स्कूलों में पहुंचा वन विभाग, कबूतरों से स्वास्थ्य नुकसान से किया रुबरु</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति की खबरों को वन्यजीव विभाग ने बनाया अवेयरनेस कैम्पेन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---navjyoti-spread-awareness-in-the-society--forest-department-reached-schools--made-people-aware-of-the-health-hazards-caused-by-pigeons/article-127022"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कबूतरों के पंखों की फड़फड़ाहट व बीट से पनपने वाले बैक्ट्रीरिया से होने वाली जानलेवा बीमारियां को लेकर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर समाज व वन विभाग को जागरूक किया। नवज्योति में छपी खबर को  वन्यजीव विभाग कोटा ने अपना अभियान बनाकर जागरूकता कैम्पेन बना लिया। वन अधिकारी व कर्मचारी अब स्कूलों में पहुंच बच्चों को कबूतरों को दाना डालने से प्रकृति के ईको सिस्टम व स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान से रुबरु कर रहा है।  शोर्ट मूवी, खबरों की कटिंग के माध्यम से बच्चों को बुनियादी शिक्षा से ही जागरूक किया जा रहा है। वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने नवज्योति के प्रयास सामाजिक सरोकार में सराहनीय है। उन्होंने बताया कि कबूतरों के पंख व बीट में जानलेवा बैक्ट्रीरिया होते हैं, जो हवा के साथ शरीर में प्रवेश करने से फेफड़ों में मधुमक्खी के छत्ते जैसे जाले और फाइब्रोसिस के खड्ढ़े बना देता है। इस पर दवाएं भी असर नहीं करती। ऐसी स्थिति में जान बचाने का एकमात्र विकल्प लंग्स ट्रांसप्लांट ही बचता है। </p>
<p>इधर, सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. केवल कृष्ण डंग कहते हैं, कबूतर की बीट और उसके पंख में थर्मोफिलिक एक्टिनोमाइ साइटिस सहित अन्य कीटाणु होते हैं, जो फेफड़ों पर बुरा असर डालते हैं। जो लोग कबूतर पालते हैं या जिनकी बालकनी, रोशनदान में कबूतर आते हैं, उन्हें एलर्जी का न्यूमोनिया होने का खतरा अधिक रहता है। जिसे हाइपरसेंसेटिव न्यूमोनाइटिस कहते हैं। यह रोग फेफड़ों की झिल्ली और श्वास नलियां खराब करता है। जिससे सांस में तकलीफ और खांसी होती है। अगर इसका तुरंत पता नहीं लगाया जाए तो फेफड़े खत्म हो सकते हैं। शरुआती दौर में खांसी बुखार जैसे लक्षण होते हैं, जो टीबी जैसे लगते हैं। भारत में बच्चों में यह बीमारी नहीं के बराबर होती है। लेकिन गत वर्ष 10 वर्षीय बच्ची का जो केस आया, वो मैंने अपने कॅरिअर में पहला मामला देखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:07:44 +0530</pubDate>
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