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                <title>colleges - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बजट होते हुए भी विकास कार्यों में खर्च नहीं कर पा रहे कॉलेज, प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में लेखाधिकारी नहीं, बजट लेप्स होने का मंडराया खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-having-a-budget--colleges-are-unable-to-spend-on-development-projects/article-144941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(5).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र के अधिकांश सरकारी महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी (डबलएओ) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिसका असर कॉलेजों की वित्तीय व्यवस्था और शैक्षणिक सुविधाओं पर पड़ रहा है। जरूरी सामान की खरीद से लेकर बिल भुगतान तक के काम अटक रहे हैं, जिससे महाविद्यालय प्रशासन को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि 10 हजार रुपए से अधिक की किसी भी वस्तु की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया जरूरी होती है, जो सहायक लेखाधिकारी के अभाव में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। नतीजन फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, कंप्यूटर और अन्य आवश्यक उपकरण की बजट होते हुए भी कॉलेज प्रशासन खरीद नहीं कर पा रहे हैं। इससे कॉलेजों की मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p><strong>प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</strong><br />शिक्षकों ने बताया कि कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों के एक दर्जन से अधिक सरकारी कॉलेजों में सहायक लेखाधिकारी का पद भरा नहीं है। जिसकी वजह से सिर्फ वित्तीय संबंधित कार्य ही नहीं बल्कि शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। लेखा संबंधित छोटे मोटे कार्यों का जिम्मा जिन शिक्षकों को दिया जाता है, उनका शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा दैनिक कैशबुक का रख-रखाव, नोटशीट पर टिप्पणियां व ट्रेजरी से जुड़े बिलों का निपटान जैसे कार्यों में तकनीकी और लेखा संबंधी समझ की आवश्यकता होती है, जो सामान्यत: शिक्षकों के कार्यक्षेत्र से अलग है। ऐसे में प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>फर्नीचर का बजट लेप्स होने का खतरा</strong><br />सुकेत कॉलेज के छात्रों का कहना है, महाविद्यालय में फर्नीचर खरीद के लिए 4 लाख का बजट आया हुआ है लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण अब तक खरीद नहीं हो पाई, जबकि अगले माह वित्तीय वर्ष समाप्त होने के साथ बजट भी लेप्स होने का खतरा मंडरा रहा है । जरूरी संसाधनों की समय पर खरीद न होने और वित्तीय प्रक्रियाओं के लंबित रहने का सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधाओं और पढ़ाई पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती के इन कॉलेजों में नहीं डबल एओ</strong><br />कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर हाड़ौती के एक दर्जन से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी के पद खाली पड़े हैं। जिनमें राजकीय महाविद्यालय इटावा, कनवास, सांगोद, रामगंजमंडी, सुकेत, चेचट, दीगोद, बारां जिले में राजकीय महाविद्यालय छिपाबडौद, अटरु, बूंदी जिले के गवर्नमेंट कॉलेज तालेड़ा, हिंडोली, डाबी सहित कई कॉलेज शामिल हैं। इन कॉलेजों को विकास सामग्री खरीदने के लिए या तो नोडल महाविद्यालय या फिर रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है।</p>
<p><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे कॉलेज प्रशासन</strong><br />शिक्षकों का कहना है, महाविद्यालयों में फर्नीचर, कम्यूटर, इनवर्टर, कूलर-पंखें, टेबल-कुर्सियां खरीद व संविदा पर लगे शिक्षकों का वेतन संबंधित, विद्यार्थियों का फीस स्ट्रक्चर, स्टेशनरी क्रय, एडमिशन के दौरान आने वाली फीस को विभिन्न मदों में विभाजित करना, कक्षा-कक्ष मेंटिनेंस, अनुमानित बजट बनाना, लाइब्रेरी का सेटअप तैयार करना व किताबें खरीदने सहित सम्पूर्ण वित्तीय कार्य सहायक लेखाधिकारी द्वारा किए जाते हैं। जिनके अभाव में महाविद्यालय प्रशासन आवश्यक साधन संसाधनों की खरीद नहीं कर पाते। संभाग में कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य व प्रोफेसर</strong><br />लाइब्रेरी के लिए अलग-अलग मद में बजट आया हुआ है। लाइब्रेरी सेटअप, कताबें वह अन्य सामानों के लिए 75 - 75 हजार का बजट मिला है। इनमें मात्र 20 हजार रुपए की ही खरीद हो पाई है। जबकि 55 हजाररुपए यूं ही पड़े हैं, क्योंकि एसपीपीपी पोर्टल पर खरीद प्रकिया के लिए टेंडर किए जाने होते हैं, जो वित्त संबंधी नियमों की जानकारी के बगैर नहीं हो सकते। ऐसे में सहायक लेखा अधिकारी नहीं होने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- ललित कुमार, प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय कनवास</strong></p>
<p>सहायक लेखाधिकारी नहीं होने से वित्तीय संबंधी कार्यों के लिए काफी परेशानी हो रही है। वर्तमान में कॉलेज में 600 स्टूडेंट है जिसके मुकाबले टेबल कुर्सियां 300 ही है। ऐसे सहायक लेखाधिकारी के अभाव में आवश्यक सामग्री की खरीद समय पर नहीं हो पाती। टेंडर संबंधित कार्य नियमों के अभाव में शिक्षक नहीं कर पाते हैं। अनावश्यक देरी से बजट लेप्स होने का खतरा बना रहता है।<br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय इटावा</strong></p>
<p>सुकेत कॉलेज में फर्नीचर के लिए 4 लाख का बजट मिला हुआ है। लेकिन खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं होने से बजट लेप्स का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में आयुक्तालय को भी लिखा है। इस बजट से 200 से टेबल कुर्सी खरीदनी है। हालांकि बजट लेफ्ट ना हो इसके लिए खादी ग्रामोद्योग से फर्नीचर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन हर कॉलेज सहायक लेखाधिकारी होना चाहिए।<br /><strong>- संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कॉलेज में डबल एओ का पद रिक्त है। ऐसे में आवश्यक संसाधनों की खरीद के लिए या तो नोडल कॉलेज या फिर रे- सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। पिछले साल भी डबल एओ के अभाव में टेंडर प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाने से बजट लैप्स हो गया। वित्तिय संबंधी कार्यों में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>- डॉ. बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय अटरु</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बड़े कॉलेजों में लेखाधिकारी कार्यरत हैं, संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा मांग करने पर दूसरे नोडल महाविद्यालयों या रे- सेंटर से व्यवस्था की जाती है।<br /><strong>- प्रो. विजय पंचोली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चालू वित्त वर्ष में शैक्षणिक संस्थानों की आय 11-13 प्रतिशत बढऩे की संभावना: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार नामांकन और फीस वृद्धि से चालू वित्त वर्ष में शैक्षणिक संस्थानों की आय 11–13 प्रतिशत बढ़ सकती है, हालांकि खर्च बढ़ने से परिचालन लाभ स्थिर रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/income-of-educational-institutions-likely-to-increase-by-11-13-percent/article-139328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/education-sector.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। नामांकन और फीस वृद्धि के कारण चालू वित्त वर्ष में देश के शैक्षणिक संस्थानों की आमदनी चालू वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच बढऩे की संभावना है। बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। इसमें कहा गया है कि आय बढऩे के बावजूद कंपनियों का परिचालन लाभ 27-28 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। इसके पीछे नये कर्मचारियों की नियुक्ति, उनके वेतन और अन्य मदों में संबंधित खर्च को मुख्य कारण बताया गया है। </p>
<p>क्रिसिल का तर्क है कि लोगों के पास अब खर्च योग्य आय पहले से अधिक है और वे बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। यह लगातार पांचवां साल होगा जब शैक्षणिक संस्थानों की आमदनी की वृद्धि दर दहाई अंक में रहेगी। वहीं, ज्यादा छात्रों के लिए संस्थानों को अपनी क्षमता में भी विस्तार करना होगा। </p>
<p>एजेंसी ने किडर गार्टन से 12वीं तक (के-12) और उच्च शिक्षा के कुल 107 संस्थानों की वित्तीय स्थितियों के आंकलन के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इन संस्थानों की सम्मिलित सालाना आय 26 हजार करोड़ रुपये है। इसमें के-12 संस्थानों की आय में नौ से दस प्रतिशत तक वृद्धि की उम्मीद है।</p>
<p>क्रिसिल रेटिग्स के निदेशक हिमांक शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कुल आय में दहाई अंकों की स्वस्थ वृद्धि अपेक्षित है। इसमें मुख्य योगदान फीस में बढ़ोतरी का है। इसके साथ ही नामांकन बढऩे का असर भी होगा, हालांकि इसकी रफ्तार कम रहेगी। इसके बावजूद कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर खर्च के कारण परिचालन लाभ में सुधार नहीं दिखेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 16:06:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हाड़ौती के दो बड़े कॉलेजों में 37 शिक्षकों के पद रिक्त, दो सेशन के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर लगानी पड़ती है क्लास</title>
                                    <description><![CDATA[सेमेस्टर के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thirty-seven-teaching-positions-are-vacant-in-two-major-colleges-in-hadoti--forcing-students-from-two-semesters-to-sit-together-for-classes/article-129639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(25).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के दो बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में स्टूडेंट्स ही नहीं फैकल्टीज की भी आधी से ज्यादा सीटें खाली हैं। वाणिज्य महाविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों  के मुकाबले आधे से ज्यादा पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। जिससे विद्यार्थियों पढ़ाई में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर कक्षाएं नहीं लगने सहित अन्य समस्याओं के कारण विद्यार्थियों का भी नियमित कॉलेज आने में रुझान घटने लगा है। इधर, विशेषज्ञों का तर्क है कि वर्तमान दौर आर्टिफिशल इंटेलीजेंस से रुबरू हो रहा है लेकिन कॉमर्स के पाठ्यक्रम में एआई की उपयोगिता को शामिल नहीं किया गया। साथ ही महाविद्यालयों में थ्यौरी के अलावा प्रेक्टिकली नॉलेज का अभाव भी घटते रुझान का बड़ा कारण है। क्योंकि, कॉमर्स पढ़ने वाले छात्रों की कमी का असर आगामी वर्षों में फैकल्टीज के रूप में नजर आएगा।  यही वजह है कि कॉलेजों में आज स्वीकृत पदों के विपरीत  रिक्त पदों की संख्या अधिक है। </p>
<p><strong>बॉयज में 7.50 तो गर्ल्स कॉलेज में 5.50 सौ स्टूडेंट्स ने एडमिशन नहीं लिया  </strong><br />वाणिज्य उच्च शिक्षा में घटते रुझान का सबसे बड़ा उदारहण  बयॉज व गर्ल्स कॉमर्स कॉलेज की प्रथम वर्ष की सीटों के आंकड़ों से स्पष्ट होते हैं। गवर्नमेंट कॉमर्स में बीकॉम फर्स्ट ईयर में 1400 सीटें हैं, जिन पर 6.50 ही एडमिशन हुए हैं। शेष 7.50 सौ विद्यार्थियों ने दाखिला लेने में ही रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह गर्ल्स कॉलेज में 800 सीटों के मुकाबले 250 छात्राओं ने ही एडमिशन लिया है और 5.50 सौ सीटें खाली रह गई। </p>
<p><strong>शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी</strong><br />विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने का विपरीत असर कॉलेज शिक्षा में देखने को मिल रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर होती जा रही है। हालात यह है, यहां बच्चे सालभर में बहुत ही कम समय कॉलेज आते हैं। जिसमें पहली बार कॉलेज में नामांकन कराने, दूसरी बार परीक्षा फार्म भरने व तीसरी बार परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड लेने और चौथी बार परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। क्योंकि, कॉलेज में विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित रहती है।  विद्यार्थी अखिलेश नागर, दीपांशु मेहरा ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है। ऐसे में शिक्षकों की कमी से कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता। </p>
<p><strong>दोनों कॉलेजों में 67 में से 37 शिक्षकों के पद रिक्त </strong><br />आयुक्तालय के क्षेत्रिय सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बयॉज व गर्ल्स कॉलेजों में  शिक्षकों के कुल 67 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 30 ही कार्यरत हैं। ऐसे में 37 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इनमें अकाउंटिंग, अर्थशास्त्र तथा बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्ल्स कॉलेज में अकाउंटिंग में शिक्षकों के 8 पद स्वीकृत हैं, जिसके मुकाबले 2 , बीएडीएम में 8 के विपरीत 4 तथा इकोनोमिक्स में 7 के मुकाबले 4 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।</p>
<p><strong>कॉमर्स के प्रति घटते रुझानके प्रमुख कारण</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय में वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनू माहेश्वरी बतातीं हैं, कोटा सहित प्रदेश में लगातार कॉमर्स के प्रति रुझान घट रहा है। जिसका विपरीत असर फैकल्टीज की उपलब्धता में कमी के रूप में भी देखे जा रहे हैं। हालांकि, रुझान घटने के कई प्रमुख कारण हैं,जो इस प्रकार हैं। <br />- वर्तमान में विद्यार्थी 11वीं-12वीं में कॉमर्स विषय का चयन करते हैं, जबकि कई वर्षों पहले 9वीं कक्षा से ही वाणिज्य शिक्षा शुरू हो जाती थी और सीनियर सैकंडरी तक विद्यार्थी कॉमर्स में कॅरियर के विकल्पों से परिचित हो जाते और उच्च शिक्षा में स्पेशलाइजेशन कर किस क्षेत्र में कॅरियर बनाना है, इससे भलीभांती परिचित हो सकते हैं।  <br />- स्कूल शिक्षा में कॉमर्स अभ्यर्थियों को केवल फर्स्ट ग्रेड शिक्षक बनने का आॅप्शन रहता है। हालांकि, थर्ड ग्रेड में भी शिक्षक बन सकते हैं लेकिन सैकंड ग्रेड में कॉमर्स विषय नहीं मिलता।<br />- जूनियर अकाउंटेंट परीक्षा के लिए साइंस-आर्ट्स के अभ्यर्थी भी पात्र होते हैं, जबकि यह क्षेत्र कॉमर्स का है फिर भी वरियता नहीं है। </p>
<p><strong>यूं बढ़ सकता है वाणिज्य के प्रति रुझान</strong><br />- लेखांकन, वित्त, अंकेक्षण, बीमा, इनकम टैक्स, इंश्योरेंस के अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए स्कूली शिक्षा में कक्षा-6 से ही हिन्दी, अंगे्रजी, सामाजिक विज्ञान सहित अन्य विषयों के साथ वाणिज्य शिक्षा को भी शुरू किया जाना चाहिए।<br />- प्राथमिक कक्षाओं से ही वाणिज्य पढ़ाया जाए  तो न केवल विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा बल्कि शिक्षकों की आवश्यकता भी बढ़ेगी। जिससे नए पद सजृन होंगे और आगे जाकर विद्यार्थी शिक्षक बन कॅरियर बना सकेंगे। <br />- प्रतियोगी परीक्षा जूनियर अकाउंटेंट, अकाउंटेंट जैसी परीक्षाओं में कॉमर्स अभ्यर्थियों को वरियता दी जानी चाहिए। इन परीक्षाओं के सिलेबस में 80% प्रश्न वाणिज्य से संबंधित होने चाहिए। <br />- यूजीसी की नेट परीक्षा कॉमर्स से संबंधित अन्य विषयों में भी करवाई जानी चाहिए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />कॉलेजों में अकाउंट्स, अर्थशास्त्र व बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन के शिक्षकों के पद पिछले चार-पांच सालों से चल रहे हैं। जो टीचर्स कार्यरत हैं, उनमें से कुछ को गैर शैक्षणिक कार्य एनएसएस, छात्रवृति, स्पोर्ट्स कई गतिविधियों में लगा रखा है। ऐसे में यह शिक्षक अपनी क्लास नहीं ले पाते। नतीजन, पढ़ाई का नुकसान होता है। <br /><strong>-अर्पित जैन, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेजों में पहले ही सब्जेक्ट टीचर्स की कमी है और प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर भी बना दिया जाता है। जिससे पढ़ाई ठप हो जाती है। क्योंकि, पेपर तक महाविद्यालय में छुट्टियां लगी होती है। वहीं, दो-दो सेशन के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाना मजबूरी बन जाती है। <br /><strong>-सतीश कुमार, बलवीर, छात्र कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>कॉमर्स कॉलेजों में फैकल्टीज के पद व प्रथम वर्ष की सीटें आधी से ज्यादा खाली हैं। वर्तमान में आरपीएससी से शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है। आर्ट्स-साइंस के शिक्षक मिल चुके हैं। जल्द ही कॉमर्स के भी मिलने की संभावना है। सरकार रिक्त पदों को भरने की पूरा प्रयास कर रही है। वहीं, विद्यार्थियों में रुझान बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में जॉब आॅरियंटेड टॉपिक को शामिल किए जा रहे हैं। <br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 16:48:53 +0530</pubDate>
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                <title>संस्कृत व इंग्लिश में एक भी एडमिशन नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-a-single-admission-in-sanskrit-and-english/article-124287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/7852014.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में छात्राओं के लिए खोले गए राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में छात्राओं का एडमिशन लेने में रुझान नहीं दिखा। कैथून व सुकेत में बीए प्रथम वर्ष में एक भी छात्रा ने संस्कृत विषय नहीं लिया है। जबकि, सुकेत महाविद्यालय में तो इंग्लिश लिक्टेचर में भी शुन्य नामांकन है।  वहीं, बूंदी जिले के डाबी में 5 छात्राओं  ने जी संस्कृत विषय लिया है। लेकिन, आयुक्तालय के नियमानुसार  प्रत्येक विषय में 10 छात्राओं का नामांकन होने पर ही उसकी कक्षाएं संचालित की जा सकती है। ऐसे में इन छात्राओं में संस्कृत की कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है।  स्थानीय छात्राओं व अभिभावकों का तर्क है कि आयुक्तालय ने नए कॉलेजों को विषय आवंटन में क्षेत्र की मांग को नजरअंदाज किया है।  जबकि, यहां उर्दू व होम साइंस की डिमांड थी।  दरअसल, वर्ष 2025 में सरकार ने कोटा-बंूदी व झालावाड़ में कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन चार राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले थे। जिसमें झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।</p>
<p><strong>संस्कृत व अंग्रेजी साहित्यके प्रति बेरुखी </strong><br />राजकीय कन्या कला महाविद्यालय कैथून में एक भी छात्रा  ने संस्कृत विषय नहीं लिया। हालांकि, नोडल जेडीबी आर्ट्स महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्राओं द्वारा सब्जेक्ट चेंज करने की एप्लीकेशन दी जा रही है। वहीं, सुकेत महाविद्यालय में तो संस्कृत के साथ अंग्रेजी साहित्य में भी एक भी बालिका ने दाखिला नहीं लिया। ऐसे में यहां इन दोनों विषयों की कक्षाएं संचालित नहीं हो सकेगी। </p>
<p><strong>डाबी कॉलेज : छात्राओं में असमंजस</strong><br />आयुक्तालय के नियमानुसार, किसी भी विषय की कक्षा के संचालन के लिए 10 विद्यार्थियों का होना आवश्यक है। ऐसे में यहां संस्कृत व अंगे्रजी साहित्य में बालिकाओं की संख्या दस से कम है। ऐसे में जिन्होंने इन विषयों में दाखिला लिया है, उनमें अब कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है। इधर, कॉलेज प्रशासन का कहना है, नए महाविद्यालय होने के नाते 5 स्टूडेंट पर भी आयुक्तालय द्वारा कक्षा संचालन की अनुमति दे सकता है।  </p>
<p><strong>4 बार एडमिशन का मौका फिर भी सीटें खाली</strong><br />कॉलेज आयुक्तालय द्वारा 4 बार आॅनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर छात्राओं को एडमिशन का मौका दिया था। इसके बावजूद बालिकाओं ने नए कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाए पुराने स्थापित महाविद्यालयों में ही रुचि दिखाई। नतीजन, कोटा, बूंदी के तीन राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में 600 में से 400 से ज्यादा सीट्स खाली रह गई। हालांकि, आयुक्तालय द्वारा रिक्त सीटों को भरने के लिए आॅफलाइन आवेदन भी लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन तीनों महाविद्यालय में सीटें खाली रहेंगी। </p>
<p><strong>नामांकन घटने का कारण </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय महाविद्यालय कोटा के प्रोफेसर ने बताया कि नवीन गर्ल्स कॉलेजों में घटते नामांकन के पीछे कई कारण हैं, जो इस प्रकार है। <br />- आवश्यकता से अधिक गर्ल्स कॉलेज खोलना।<br />- नए कॉलेजों के पास न खुद का भवन व न ही स्थाई फैकल्टी।<br />- दो-दो कमरों में कॉलेज संचालित करना। भौतिक संसाधनों की कमी। <br />- क्षेत्र की आवश्यकता के विपरीत सब्जेक्ट आवंटित करना। <br />- नए कॉलेजों का प्रचार-प्रसार का अभाव।<br />- नए महाविद्यालयों में सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर आशंकाएं। </p>
<p><strong>कब-कब बड़ी आवेदन की अंतिम तिथि </strong><br />- राजकीय महाविद्यालयों में गत 4 जून से ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई थी। <br />- दूसरी बार अंतिम तिथि 16 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दी गई। <br />- तीसरी बार में 5 दिन और बढ़ाकर अंतिम तिथि 25 जून कर दी गई। <br />- सीटों के मुकाबले आवेदन नहीं आने पर फिर से लास्ट डेट बढ़ाकर 3 जुलाई कर दी गई। <br />- 7 जुलाई को प्रथम वरियता सूची जारी की गई। <br />- 16 जुलाई को विभिन्न श्रेणियों में रिक्त रही सीटों पर फिर से आवेदन मांगे गए। <br />- अब गत 18 अगस्त से 23 अगस्त तक खाली रह गई सीटों पर आॅफलाइन एडमिशन देने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं व अभिभावक</strong><br />सरकार ने नए कॉलेज तो खोल दिए लेकिन बिल्डिंग व फैकल्टी भी स्थाई नहीं है। गत वर्ष भी राजसेस महाविद्यालयों में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने के एक से डेढ़ माह पहले ही शिक्षकों को हटा दिया था। इस बार भी ऐसी  स्थिति रहने की आशंका के चलते बूंदी गर्ल्स कॉलेज में दाखिला लेना ज्यादा मुनासिब लगा। <br /><strong>-अहिल्या कंवर, छात्रा डाबी</strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला तो खुशी थी लेकिन ऐसे विषय अलॉट कर दिए, जो छात्राओं के लिए रुचिकर नहीं है। यहां होम साइंस व उर्दू विषय दिया जाना चाहिए था। इसलिए सुकेत कॉलेज में दाखिला लेने की बजाए रामगंजमंडी महाविद्यालय की ओर रुख करना ज्यादा सही लगा। <br /><strong>-पार्वती कुमारी,  रेहाना, (परिवर्तित नाम) सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे का कॉलेज राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल के तीन कमरोें में चल रहा है।  क्षेत्र की आवश्यकतानुसार सब्जेक्ट नहीं होना नामांकन में कटौती का मुख्य कारण है। यहां उर्दू, जीपीएम व होम साइंस विषय नहीं खोला गया। बीए में तीन आॅफनल सब्जेक्ट लेने होते हैं। ऐसे में छात्राओं ने कस्बे से बाहर शहर के कॉलेजों में दाखिला लिया है।  <br /><strong>- मोहम्मद अख्तर, बंशीलाल, अभिभावक कैथून </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी यह कॉलेज नए हैं। सुविधाएं विकसित होने में थोड़ा समय लगेगा। यदि, छात्राओं की ओर से विषयों को लेकर कोई कम्पलेन आती है तो उसे आयुक्तालय भिजवाकर समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>-डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्ताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 15:00:14 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार ने नए कॉलेज तो खोल दिए, पर चलेंगे कहां, पता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[छात्रों में असमंजस, कब और कौनसी बिल्डिंग में शुरू होंगे महाविद्यालय  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-government-has-opened-new-colleges--but-it-is-not-known-where-they-will-run/article-114647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/sarakar-ne-nae-collage-toh-khol-diya,-par-chalenge-kahan,-pata-nhi...kota-news-19.05.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  सरकार ने कोटा जिले में दो नए राजकीय कला कन्या महाविद्यालय तो खोल दिए, लेकिन इन कॉलेजों को चलाने के लिए अभी तक कोई अस्थाई बिल्डिंग नहीं मिली है। जबकि, जुलाई माह से प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जानी है। ऐसे में विद्यार्थी व शिक्षाविदें में असमंजस बना हुआ है कि कॉलेज कब और किस भवन में संचालित होगा। हालांकि, आयुक्तालय के अधिकारी व नोडल प्राचार्यों का कहना है कि अस्थाई भवन जल्द ही मिलेगा, इसकी तैयारियां की जा रही है। </p>
<p><strong>दोनों गर्ल्स कॉलेज को नहीं मिले अस्थाई भवन </strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कैथून व सुकेत कॉलेज का संचालन के लिए अभी तक अस्थाई भवन नहीं मिला है। हालांकि, अस्थाई बिल्डिंग में कॉलेज चलाने के लिए  भवन का चयन किया जा रहा है। कैथून कॉलेज जेडीबी आर्ट्स कॉलेज के अधीन संचालित किया जाएगा। नोडल प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान व कॉलेज कमेटी के सदस्यों ने  कैथून में कॉलेज के लिए भवन चिन्हित कर चुके हैं। वहीं, सुकेत कॉलेज रामगंजमंडी राजकीय महाविद्यालय के अधीन संचालित होगा। नोडल प्राचार्य डॉ. संजय गुर्जर का कहना है कि भवन चयनित कर लिया है, जिसके अलॉट करवाने के लिए कलक्टर को पत्र लिख चुके हैं। </p>
<p><strong>महाविद्यालय में 7-7 सब्जेक्ट अलॉट</strong><br />राजकीय कन्या कला महाविद्यालय सुकेत तथा कैथून कॉलेज को आयुक्तालय से 7-7 विषय आवंटित हुए हैं।  दोनों ही महाविद्यालय में हिन्दी-अंगे्रजी साहित्य, ज्योग्राफी, पॉलिटिकल साइंस, संस्कृत तथा हिन्दी-अंगे्रजी अनिवार्य शामिल हैं। इन कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया आॅनलाइन होंगे। </p>
<p><strong>राजसेस के अधीन संचालित होंगे कॉलेज </strong><br />सरकार ने बजट घोषणा में सत्र 2025-26 सत्र के लिए  कोटा जिले में दो राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले हैं। जिनमें कैथून व सुकेत शामिल हैं। इनमें से सुकेत कॉलेज के लिए करीब 12 बीघा जमीन अलॉट हो गई है। लेकिन, कैथून कॉलेज के लिए अभी जमीन अलॉट नहीं हो सकी। इन दोनों महाविद्यालयों का संचालन कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन किया जाएगा। यहां विद्या संबल पर शिक्षक लगाए जाएंगे। </p>
<p><strong>200 छात्राओं को मिलेगा एडमिशन</strong><br />कैथून गर्ल्स कॉलेज की नोडल प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान ने बताया कि जुलाई से एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार दो सेशन संचालित होंगे और 200 छात्राओं को एडमिशन दिया जाएगा। कस्बे में कॉलेज खुलने से स्थानीय छात्राओं को अब पढ़ने के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। घर के नजदीक स्कूल होने से उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ेगी।</p>
<p>हमने कैथून कॉलेज के लिए अस्थाई भवन लगभग चिन्हित कर लिया है। कॉलेज कमेटी के साथ रविवार को कस्बे में गए थे, जहां अस्थाई भवन को फाइनल करने से संबंधित कार्यवाही की गई। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय कैथून</strong></p>
<p>सुकेत कॉलेज के लिए अभी अस्थाई भवन नहीं मिला है। हालांकि, एक बिल्डिंग देखी है, जहां पहले स्कूल संचालित होता था, जो अब वह अपनी नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया है। भवन कॉलेज संचालित करने के लिए सही स्थिति में है। जिसे अलॉट करवाने के लिए जिला कलक्टर को पत्र लिखा है।<br /><strong>- डॉ. संजय गुर्जर, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय सुकेत</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 17:29:27 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार भी भंवर में फंसेगी छात्रों की नैया!</title>
                                    <description><![CDATA[राजसेस कॉलेजों में शिक्षण कार्य विद्या संबल शिक्षकों द्वारा करवाया जाता है। जिनकी चयन प्रक्रिया सेमेस्टर वाइज होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-too-the-boat-of-students-will-be-stuck-in-the-whirlpool/article-98289"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555435.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था  फिर से बेपटरी होने की कगार पर है। हर साल की तरह इस साल भी परीक्षा से पहले ही विद्या संबल पर लगे शिक्षकों को हटाने की कवायद शुरू हो गई है। जबकि, हाड़ौती के अधिकतर राजसेस कॉलेजों  में अब तक 40 से 50% कोर्स ही पूरे हो सके हैं। जबकि, सत्र 2024-25 में खुले नए कॉलेजों में तो 60 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। जबकि, यूजी प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम आगामी जनवरी माह में होने हैं। इसके बावजूद  अतिथि शिक्षकों को हटाने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में आयुक्तालय ने नोडल महाविद्याय व प्राचार्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, राजसेस कॉलेजों में शिक्षण कार्य विद्या संबल शिक्षकों द्वारा करवाया जाता है। जिनकी चयन प्रक्रिया सेमेस्टर वाइज होती है। लेकिन, शिक्षा सत्र देरी से शुरू होने पर इनकी नियुक्ति भी देरी से की गई। नियमानुसार, 24 सप्ताह या 28 फरवरी इनमें से जो भी पहले हो, तब तक ही यह अध्यापन करवा सकते हैं। लेकिन, यह अवधि सेमेस्टर एग्जाम से पहले होनी चाहिए। जबकि, कई कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति ही सितम्बर-अक्टूबर माह में हुई है। ऐसे में इनके 24 सप्ताह पूरे होने से पहले ही इन शिक्षकों  की छुट्टी कर दी जाएगी। इस अटपटे नियम से शिक्षक व छात्रों में रोष है। </p>
<p><strong>50% तक कोर्स अधूरे </strong><br />हाड़ौती के कई राजसेस कॉलेजों में यूजी प्रथम व थर्ड सेमेस्टर में 50 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। वहीं, जनवरी माह में प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम प्रस्तावित हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही शिक्षकों को हटा दिए जाने से विद्यार्थियों का कोर्स पूरा नहीं हो सकेगा। ऐसे में उनका परीक्षा परिणाम प्रभावित होने की आशंका रहेगी। </p>
<p><strong>नए कॉलेजों में अभी 60 दिन ही लगी क्लासें</strong><br />राजकीय महाविद्यालय दीगोद में कार्यरत विद्या संबल शिक्षिका शर्मिला ने बताया कि यहां 1 अक्टूबर से फैकल्टी लगाई गई है। 80 दिनों में से एक महीना दीपावली व सरकारी अवकाश में गुजर गया। इस दरमियान मात्र 60 दिन ही कक्षाएं लगी हैं। ऐसे में यूजी प्रथम सेमेस्टर का 50 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो सका है। जनवरी में एग्जाम होने हैं। वहीं, परीक्षा से पहले हमारे 24 सप्ताह पूरे नहीं हो पाएंगे। इसके बावजूद विद्या संबल शिक्षकों को हटा दिया जाएगा।   जिससे विद्यार्थियों को अध्यापन में काफी परेशानी होगी। सरकार को कोर्स पूरा होने तक रखना चाहिए। </p>
<p><strong>नियुक्ति में लेटलतीफी, अब हटाने में उतावलापन</strong><br />बारां जिले के राजकीय सीसवाली कॉलेज में कार्यरत   सहायक आचार्य डॉ. रवि कुमार कहते हैं, सरकारी कॉलेजों में शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद में भी शिक्षण के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में लेटलतीफी बरती गई। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद में शिक्षण कार्य शुरू हो पाया। एनईपी में सेमेस्टर सिस्टम होने के कारण सेमेस्टर कक्षाओं में अब तक कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। मगर दूसरी तरफ आयुक्तालय की ओर से 21 जून 2024 को जारी आदेश की पालना करने के निर्देश जारी हो गए हैं। इन आदेशों में साफ तौर पर अतिथि शिक्षकों को 24 सप्ताह या फिर 28 फरवरी 2025 तक हटाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जितनी फुर्ती हटाने में दिखाई जाती है उतनी ही   फुर्ति शिक्षकों की नियुक्ति में भी दिखाई जानी चाहिए।</p>
<p><strong>शिक्षक-विद्यार्थी दोनों तनाव में </strong><br />कोटा संभाग में राजसेस के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक बेरोजगार होने से तनाव में हैं, वहीं पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों को परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है। जबकि, जनवरी माह में यूजी प्रथम सेमेस्टर एग्जाम होने हैं और परीक्षा से पहले शिक्षकों को हटाया जाना है लेकिन अधिकतर महाविद्यालयों में 40 से 50 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। ऐसे में इन दिनों गुरु-शिष्य दोनों ही तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले- परिणाम बिगड़ने का सता रहा डर</strong><br />अभी तक यूजी प्रथम वर्ष का करीब 40 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हुआ है, जनवरी में पेपर है। एग्जाम से पहले विद्या संबल पर लगे शिक्षकों को हटा देंगे तो शेष सिलेबस को कौन पूरा करवाएगा। छात्रों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, द्वितीय वर्ष के सैकंड सेमेस्टर का तो अभी 25 प्रतिशत ही सिलेबस पूरा हुआ है। प्रेक्टिकल व असाइनमेंट भी अधूरे हैं। सरकार एक तरह तो क्वालिटी एजुकेशन देने का दवा करती है और दूसरी तरफ शिक्षकों को हटाने पर तुली है। शिक्षकों के बिना पास होने के भी लाले पड़ जाएंगे।<br /><strong>-भूपेश कुमार, तस्यम नेग, छात्र, सीसवाली व तालेड़ा कॉलेज</strong></p>
<p>सरकार के जो निर्देश मिले हैं, उसकी पालना की जाएगी। हमारे यहां शिक्षक सितम्बर माह में लगे थे। जिनके 24 सप्ताह जनवरी के अंत में पूरे हो जाएंगे। परीक्षा से पूर्व कोर्स पूरे होने की संभावना है। <br /><strong>-प्रो. राजेश कुमार प्राचार्य रामपुरा कन्या महाविद्यालय कोटाक्या कहते हैं शिक्षक</strong></p>
<p>विद्या संबल शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। हर सेमेस्टर में चयन प्रक्रिया के तहत शिक्षकों से फॉर्म भरवाए जाते हैं। वर्ष 2024 में ही 3 बार फॉर्म भर चुके हैं। जिसकी वजह से बार-बार कॉलेज बदल रहा है। <br /><strong>-डॉ. शर्मिला कुमारी, सहायक आचार्य विद्या संबल</strong></p>
<p>राजसेस महाविद्यालय में लगे शिक्षकों को बीच-बीच में न हटाया जाए। चयन प्रक्रिया साल में एक बार होनी चाहिए और जो विद्या संबल शिक्षक जिन कॉलेज में लगे हैं, उन्हें  उसी कॉलेज में लगाया जाए। बार-बार कॉलेज बदलने से शिक्षक व विद्यार्थियों को परेशानी होती है। ऐसे में बार-बार चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।<br /><strong>-डॉ. हनिफ खान, सहायक आचार्य विद्या संबंल</strong></p>
<p>संभाग में 19 पुराने व 4 नए राजसेस कॉलेज हैं। इनमें से अधिकतर कॉलेजों में सिलेबस अधूरा है। ऐसे में परीक्षा से पहले शिक्षकों को हटाने से विद्यार्थियों की न केवल पढ़ाई प्रभावित होगी बल्कि उनका परिणाम भी बिगड़ने का खतरा रहेगा।  सरकार भले ही विद्या संबंल शिक्षकों को नियमित न करे लेकिन उन्हें एक साल तक के लिए तो कॉलेज में लगाए और बार-बार चयन प्रक्रिया बंद की जानी चाहिए। <br /><strong>-डॉ. रवि कुमार, सहायक आचार्य सीसीवाली कॉलेज बारां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2024 14:11:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आयुक्तालय ने कॉलेजों को दी राहत, अब 5 स्टूडेंट्स पर भी एसएफएस के तहत कॉलेज चला सकेंगे पीजी कोर्स  </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में जेडीबी साइंस व जेडीबी आर्ट्स में एसएफएस में चल रहे कोर्स ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/commissionerate-gives-relief-to-colleges--now-colleges-can-run-pg-courses-under-sfs-even-with-5-students/article-97600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)21.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों को बड़ी राहत देते हुए एसएफएस(सेल्फ फाइनेन्स स्कीम) में संचालित कोर्सेज चलाने के लिए 20 विद्यार्थियों के होने की बाध्यता समाप्त कर दी है। अब 5 विद्यार्थी होने पर भी कॉलेज प्रशासन सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत चलने वाले पीजी कोर्स चला सकते हैं। आयुक्तालय ने यह कदम पीजी कोर्सेज में दाखिले नहीं होने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमों में ढील दी है। ऐसे में अब पांच स्टूडेंट्स मिलने पर भी कॉलेज में सेल्फ फाइनेंस स्कीम (एसएफएस) के तहत कोर्स चलाया जा सकेगा। </p>
<p><strong>16 दिसम्बर तक होंगे एडमिशन</strong><br />आयुक्तालय द्वारा नियमों में परिवर्तन किए जाने के बाद अब 16 दिसंबर तक कॉलेजों में एडमिशन लिए जा सकेंगे। पीजी कोर्सेज में दाखिले के लिए आयुक्तालय ने पहले ऑनलाइन आवेदन की 12 नवंबर अंतिम तिथि तय की थी। इस तिथि तक एडमिशन के बाद भी जेडीबी साइंस व आर्ट्स कॉलेज में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित एमएससी कैमेस्ट्री व एमए जीपीईएम व होम साइसं में  सीटें खाली रह गई। ऐसे में आयुक्तालय ने दाखिले की अंतिम तिथि 16 दिसम्बर तक बढ़ा दी है। </p>
<p><strong>5 से कम स्टूडेंट्स तो नहीं चलेगा कोर्स  </strong><br />आयुक्तालय द्वारा कॉलेज प्राचार्यों को कहा गया है कि प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या 5 से कम रहने की स्थिति में उस विषय का शिक्षण कार्य वर्तमान सत्र 2024-25 के लिए स्थगित रहेगा। विद्यार्थियों द्वारा अनुरोध करने पर उसी कॉलेज के अन्य पाठ्यक्रम में या उसी पाठ्यक्रम में अन्य कॉलेज में स्थान रिक्त  हों तो स्थानांतरित किया जा सकता है या फिर स्टूडेंट्स को शुल्क वापस लौटाया जा सकता है। </p>
<p><strong>16 तक शुल्क जमा किया जा सकेगा</strong><br />आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान जयपुर के संयुक्त निदेशक प्रो. विजय सिंह जाट ने आदेश जारी किए हैं। अब रिक्त सीटों पर ऑफलाइन आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स से 16 दिसंबर तक शुल्क जमा किया जा सकेगा। वहीं, जिन विश्वविद्यालयों में परीक्षा आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि पूर्ण हो गई हैं, उनसे संबंधित महाविद्यालयों पर यह लागू नहीं होगा। </p>
<p><strong>एमए जीपीईएम में 16 व होमसाइंस में 28 सीट खाली</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय (जेडीबी) में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित एमए जीपीईएम में 20 सीटें हैं, जिस पर अब तक मात्र 4 ही एडमिशन हुए हैं। जबकि, 16 सीटें खाली हैं। वहीं, होम साइंस में 40 सीटें हैं, जिसके मुकाबले अब तक 12 ही छात्राओं ने दाखिला लिया है। प्रोफेसर बिंदू चतुर्वेदी व दीपा स्वामी ने बताया कि सरकार का निर्णय सराहनीय है। लेकिन, जीपीईएम व होम साइंस जैसे महत्वपूर्ण कोर्स को सेल्फ फाइनेंस के तहत संचालित होने से इसकी फीस अधिक है, जिसकी वजह से छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। यदि, यही कोर्स को सरकारी कर दिया जाए तो इसमें एडमिशन भी बढ़ेंगे और  छात्राओं पर आर्थिक भार भी कम होगा। सरकार को बालिकाओं के हित में इन कोर्सेज को एसएफएस से सरकारी में तब्दील करना चाहिए।</p>
<p><strong>कैमेस्ट्री में 10 सीटें खाली</strong><br />जेडीबी साइंस में कैमेस्ट्री विषय सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। इसकी 15 सीटें हैं, जिसमें से मात्र 5 ही बालिकाओं ने एडमिशन  लिया है, जबकि 10 सीट खाली है। इसकी  प्रति ईयर फीस 18 हजार है। जबकि, यह विषय रेगुलर हो तो इसकी फीस दो गुना कम हो जाएगी। </p>
<p><strong>झालावाड़-बारां में होमसाइंस सरकारी और कोटा में एसएफएस में </strong><br />जेडीबी आर्ट्स कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। इसके बावजूद यहां होम साइंस जैसा महत्वपूर्ण विषय सरकारी न होकर सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित किया जा रहा है। इसकी प्रथम वर्ष की फीस 10 हजार रुपए है। जबकि, बारां-झालावाड़ में यह विषय रेगुलर यानी सरकारी है। जिससे वहां की फीस पांच हजार है। ऐसे में कोटा की छात्राएं भी बारां-झालावाड़ में एडमिशन ले रहीं है। जिसकी वजह से जेडीबी आर्ट्स में एडमिशन कम हो रहे हैं। ऐसे में यहां भी होम साइंस विषय को सरकारी किया जाना चाहिए।</p>
<p>सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित कोर्सेज में 20 स्टूडेंट्स के प्रवेश लेने की बाध्यता समाप्त कर 5 करने का आयुक्तालय का फैसला सराहनीय है। हमारा प्रयास रहेगा की ज्यादा से ज्यादा एडमिशन हो। हमारे यहां एसएफएस में एमए जीपीईएम व होम साइंस संचालित हो रहे हैं। सेल्फ फाइनेंस में होने के कारण इनकी फीस महंगी हो जाती है। ऐसे में इन कोर्सेज को रेगुलाइज होना चाहिए। जबकि, जीपीईएम  में दाखिला लेने के लिए अजमेर, अलवर सहित अन्य जिलों से छात्राएं आती हैं। इस विषय को सरकारी में करने को हमने पहले भी कई बार आयुक्तालय को पत्र लिखे हैं।  सरकार को छात्राहित में यह कोर्स रेगुलाइज करना चाहिए। <br /><strong>-प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य राजकीय कला कन्या महाविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 17:35:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आईटी फेस्ट मोजेक मोंटेज का शुभारम्भ, देश के 25 कॉलेज ले रहे है हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[तकनीकी ज्ञान के आदान प्रदान का मंच है, बल्कि युवा प्रतिभाओं को उनके कौशल और रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का अनूठा अवसर भी प्रदान करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/it-fest-mosaic-montage-is-begins--25-colleges-of-the-country-is-participate/article-97469"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6633-copy63.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इंटरनेशनल स्कूल ऑफ इन्फार्मेटिक्स एंड मैनेजमेंट, टेक्निकल कैंपस (आईआईआईएम) मानसरोवर के मैनेजमेंट एवं कंप्यूटर संकाय का प्रतिवर्ष होने वाले दो दिवसीय संयुक्त मैनेजमेंट एवं आईटी फेस्ट मोजेक मोंटेज 2024 का शुभारम्भ किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस भव्य उत्सवमाला में देश के 25 कॉलेज एवं यूनिवर्सिटीज हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन से किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिषेक तिवारी सीईओ ग्रीनफिंच ग्लोबल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड ने स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा की इस तरह का आयोजन छात्रों के बीच न केवल नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान प्रदान का मंच है, बल्कि युवा प्रतिभाओं को उनके कौशल और रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का अनूठा अवसर भी प्रदान करता है। </p>
<p>फेस्ट के पहले दिन मैनेजमेंट एंड आई टी क्विज ब्रेन बेंच, विज्ञापन प्रतियोगिता एड गुरू, वेब डिजाइनिंग प्रतियोगिता वेब विजिन, बिग आईडिया पोस्टर कॉम्पिटिशन, बुल्स एण्ड बियर्स शेयर ट्रेडिंग प्रतियोगिता व डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समापन यूफोनी से किया जाएगा, जिसमें रनिंग ट्रॉफी विजेता टीम को प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम के अतिथि सुशील शर्मा फाउण्डर एण्ड सीईओ मारवाडी कैट्लिस्ट वैनचर्स होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2024 12:36:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेमेस्टर तक सिमट कर रह गई नई शिक्षा नीति</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद भी मल्टी डिसिप्लिनरी नहीं बन सके कॉलेज, सेमेस्टर सिस्टम बना बोझ, बढ़ती फीस दे रही तनाव  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-education-policy-limited-to-semesters/article-94720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के उच्च शिक्षण संस्थानों में नई शिक्षा नीति लागू हुए दो साल बीत चुके हैं। लेकिन, यूनिवर्सिटी व महाविद्यालय अब तक न्यू एजुकेशन पॉलिसी का 10 प्रतिशत हिस्सा भी लागू नहीं कर पाई। वजह, बुनियादी सुविधाएं और इंफ्रस्ट्रेक्चर का अभाव।  कोटा यूनिवर्सिटी ने आपाधापी में न्यू एजुकेशन पॉलीसी 2020 लागू तो कर दी लेकिन उसके उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकी। नई शिक्षा नीति के नाम पर सिर्फ सेमेस्टर प्रणाली ही लागू किया गया, जो विद्यार्थियों पर बोझ बन गया और मल्टीपल सब्जेक्ट च्वाइस, क्रेडिट सिस्टम व मल्टीपल एंट्री-एक्जिट जैसी सुविधाएं पहुंच से दूर हो गई।  कोटा संभाग में एक भी मल्टी डिसिप्लिनरी कॉलेज नहीं है, जहां विद्यार्थियों को मल्टीपल सब्जेक्ट पढ़ने की सुविधा मिल सके। ऐसे में नई शिक्षा नीति इंफ्रास्ट्रक्चर की लचरता के भंवर में फंसकर रह गई। विशेषज्ञों का तर्क है, इंफ्रास्ट्रक्चर व बुनियादी सुविधाओं के बिना विद्यार्थियों का सम्रग विकास संभव नहीं है और न ही नई न्यू एजुकेशन पॉलिसी के उद्देश्यों की पूर्ति हो पाएगी। </p>
<p><strong>पढ़ाने को शिक्षक नहीं, मल्टी डिसिप्लिनरी कैसे बने कॉलेज</strong><br />नई शिक्षा नीति में प्रावधान है कि आर्ट्स के स्टूडेंट्स साइंस, कॉमर्स या कोई भी रुचिकर विषय पढ़ सकता है। ताकि, छात्र मल्टी टास्किंग बन सके। लेकिन, पिछले दो साल में हाड़ौती का एक भी राजकीय महाविद्यालय मल्टी डिसिप्लिनरी तक नहीं बन सका। कॉलेजों में पढ़ाने को शिक्षक नहीं है, ऐसे में यहां मल्टी टास्किंग स्टूडेंट्स तैयार होना तो दूर उनका पास होना ही चुनौति बना हुआ है। </p>
<p><strong>मल्टीपल एंट्री-एक्जिट तक की सुविधा नहीं</strong><br />कोटा विवि से संबद्ध हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में अब तक नई शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री-एक्टिजट तक की सुविधा नहीं मिली। जबकि, एनईपी में तीन वर्षीय डिग्री कोर्स में कोई विद्यार्थी प्रथम वर्ष का पहला सेमेस्टर पूरा करता है तो उसे सर्टिफिकेट मिलता है और दूसरा सेमेस्टर करने पर डिप्लोमा का सर्टिफिकेट दिया जाना है। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई किसी दूसरे कॉलेज या विवि से कर सकता है। ऐसी स्थिति में उसके क्रेडिट (अंक) संबंधित शिक्षक संस्था में ट्रांसफर किए जाने का प्रावधान है। लेकिन, संभाग के विद्यार्थियों को यह सुविधा भी नहीं मिल रही। छात्र महीप सिंह </p>
<p><strong>सेमस्टर ने मानसिक तनाव व फीस का बोझ बढ़ाया</strong><br />नई शिक्षा नीति के नाम पर शुरू की गई सेमेस्टर स्कीम  विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बन गई। हर छह माह में सेमेस्टर एग्जाम से फीस का बोझ बढ़ गया। जबकि, परीक्षाएं भी 6 माह की जगह ढाई से तीन  माह में हो रही है। साल में दो बार एग्जाम होने से विद्यार्थियों को प्रति समेस्टर ढाई हजार का नुकसान हो रहा है। जबकि, पहले वार्षिक स्कीम के तहत साल में एक बार ही एग्जाम फीस लगती थी। वहीं, रिजल्ट भी समय पर जारी होते थे। </p>
<p><strong>आर्ट्स के स्टूडेंट्स कैसे पढ़ेंगे साइंस</strong><br /> : एनईपी छात्रों को बहु विषयक पढ़ने की सुविधा देती है लेकिन संभाग के महाविद्यालय संसाधनों से जूझ रहे।  हालात यह हैं, कॉलेजों में बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं है, शिक्षकों के नहीं होने से महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे महाविद्यालयों में आर्ट्स के विद्यार्थियों को कैसे साइंस या अन्य रुचिकर सब्जेक्ट  पढ़ने को मिलेंगे। मल्टीपल च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एक्जिट की सुविधाएं तब तक नहीं मिल सकेगी जब तक मल्टीपल डिसिप्लिीनरी कॉलेज की स्थापना नहीं होगी। </p>
<p><strong>यह बोले शिक्षाविद्</strong><br /><strong>एबीसी आईडी व एक समान हो सिलेबस </strong><br />जब तक विद्यार्थियों की एबीसी आईडी, एक समान सिलेबस और सभी यूनिवर्सिटी व महाविद्यालय एक प्लेटफॉर्म पर नहीं आएगी तब तक नई शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू कर पाना मुश्किल होगा। हालांकि, ऐसे इंडिज्यूवल कॉलेज जहां पर 10 विषय संचालित हैं, वहां  स्टूडेंट्स के तीन विषयों को छोड़कर अन्य सात विषयों में च्वाइस दे सकते हैं। लेकिन संबंधित कॉलेजों में 10 विषयों के शिक्षक भी तो हो, जो वर्तमान में कई राजकीय महाविद्यायों में नहीं है। संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद एनईपी लागू करनी चाहिए थी। <br /><strong>-केशव दत्ता, शिक्षक, निजी महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>डिविजन लेवल पर हो ज्वाइंट डायरेक्टर की नियुक्ति</strong><br />राजकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी दूसरे स्ट्रीम का विषय कहां और कैसे पढ़ेगा, इसकी व्यवस्था कैसे होगी, यह नीति निर्धारण करना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ। हमारे पास जो साधन-संसाधन उपलब्ध हैं, उसी में बेहतर करना है। इसके लिए जरूरी है कि संभाग मुख्यालय पर एक ज्वाइंट डायरेक्टर नियुक्त किया जाना चाहिए। क्योंकि, उनके पास सरकार द्वारा निहित शक्तियां होती हैं, जिसका उपयोग कर दो तरह से प्रयास कर सकते हैं, पहला-आर्ट्स के छात्रों को साइंस कॉलेज में तीन दिन पढ़ाने की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन इसमें स्टूडेंट्स मूव करने में दिक्कत होगी। दूसरा- साइंस कॉलेज से शिक्षक को तीन दिन आर्ट्स कॉलेज में भेजकर पढ़ा सकते हैं।  <br /><strong>-प्रो. संजय भार्गव, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य जेडीबी</strong></p>
<p><strong>मल्टीपल एंट्री-एक्जिट पॉलीसी हो लागू  </strong><br />नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य मल्टीपल डिसिप्लिीनरी कॉलेज की स्थापना करना है, जो अब तक नहीं हुआ। जबकि, आबादी को देखते हुए ऐसा महाविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए, जहां पर सभी विषयों की फैकल्टी उपलब्ध हो। ताकि, विद्यार्थी किसी भी स्ट्रीम का विषय पढ़ने का मौका मिल सके। मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट स्कीम, के्रडिट सिस्टम तक नहीं अपना सके। मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट के तहत यदि, कोई छात्र 6 महीने ही पढ़ाई करता है और फिर छोड़ देता है तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाता है। एक साल पढ़ाई करने पर डिप्लोमा, दो साल पढ़ने पर पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा, तीन साल पर डिग्री, चार साल पर आॅनर्स और पांच साल लगातार पढ़ाई करने पर रिसर्च की डिग्री दी जाती है। लेकिन, हाड़ौती ही नहीं प्रदेश के किसी भी कॉलेज व विवि में यह लागू नहीं हो सका।   <br /><strong>-डॉ. अनुज विलियम, प्रोफेसर</strong></p>
<p>एनईपी-2020 की मूल भावना के अनुरूप अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सेमेस्टर स्कीम तो न्यू एजुकेशन पॉलिसी का छोटा सा कदम है। विद्यार्थियों के लिए इसे व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता है, इस दिशा में हम लगातार कार्य किया जा रहा है। <br /><strong>-प्रो. कैलाश सोढानी, कुलपति, कोटा विश्वविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Nov 2024 15:31:03 +0530</pubDate>
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                <title>प्राइवेट कॉलेजों के साथ एमओयू कर सरकार देगी क्वालिटी एजुकेशन, निखारेगी प्रतिभाएं </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा में 16 निजी महाविद्यालयों ने सरकार से एमओयू करने के प्रस्तावों पर दी मंजूरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-government-will-provide-quality-education-and-enhance-talents-by-signing-mous-with-private-colleges/article-94531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/one-student-one-id.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राइजिंग राजस्थान के तहत सरकारी कॉलेजों के सूरतेहाल बदलने की तैयारी है। सरकार ने बड़ी पहल करते हुए प्राइवेट कॉलेजों के साथ एमओयू करने जा रही है। जिसका फायदा सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को साधन-संसाधनों की उपलब्धता के रूप में मिल सकेगा। वहीं, क्वालिटी एजुकेशन, रिसर्च वर्क, स्किल डवलपमेंट, पसर्नालटी डवलपमेंट को निखारने के संयुक्त प्रयास हो सकेंगे। शिक्षाविदें का मानना है, सरकार के इस प्रयास से संसाधनों व रिसोर्सेज से जूझते सरकारी महाविद्यालय को संजीवनी मिल सकती है, साथ ही छात्र-शिक्षकों के बीच मैं की जगह हम की भवना विकसित होगी।  </p>
<p><strong>संभाग को मिले 44 निजी कॉलेज</strong><br />कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय से कोटा संभाग को 44 प्राइवेट कॉलेजों की सूची जारी हुई है, जिसके साथ एमओयू किया जाना है। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह एमओयू प्रदेश के हर जिले के नोडल कॉलेज की ओर से किए जाएंगे। हाड़ौती में 44 प्राइवेट कॉलेजों के लिए 17 सरकारी कॉलेजों को नोडल बनाया गया है, जो आयुक्तालय (उच्च शिक्षा विभाग) और प्राइवेट कॉलेजों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाते हुए एमओयू करवाएंगे। इसके लिए सभी नोडल कॉलेजों द्वारा अपने अधीन प्राइवेट कॉलेजों से परिपत्र भरवाकर संस्था में उपलब्ध सुविधाएं व संसाधनों से जुड़ी जानकारियां एकत्रित की जा रही है। वहीं, निजी महाविद्यालयों को दो तरह के परिपत्र दिए जा रहे हैं, जिनमें पहला-वर्तमान का निवेश व दूसरा-भविष्य में निवेश। फिलहाल वर्तमान के निवेश पर काम किया जा रहा है। </p>
<p><strong>सबसे ज्यादा कॉमर्स को मिले निजी कॉलेज </strong><br />डॉ. गीताराम शर्मा ने बताया कि नोडल कॉलेजों में से सबसे ज्यादा 12 निजी कॉलेज राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय को मिले थे। इस पर कॉमर्स कॉलेज ने आयुक्तालय और इन महाविद्यालयों के बीच सामजंस्य बनाकर सरकार के साथ एमओयू के प्रपत्र साइन करवाकर सहमति प्राप्त कर ली है। उन्होंने बताया कि गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज को 1, कनवास को 1, सांगोद को 2, इटावा को 3 तथा रामगंजमंडी को 1 निजी महाविद्यालय का नोडल बनाया गया है। इनमें से रामगंजमंडी में स्थित निजी स्कूल ने एमओयू करने में रुचि नहीं दिखाई। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों को यह होंगे फायदे</strong><br />छात्र कुणाल शर्मा, रुचिता गोस्वामी, शंकर तिवारी, इकबाल खान,महिमा रस्तोगी ने बताया कि इस एमओयू के जरिए राजकीय और प्राइवेट कॉलेज मिलकर एजुकेशन के नए आइडियाज, नवाचार और स्किल डवलपमेंट के क्षेत्र में काम करेंगे। वहीं, प्राइवेट कॉलेजों और राजकीय कॉलेजों में क्या-क्या सुविधाएं ऐसी हैं जो अलग हैं, इसे देखा जाएगा। ताकि, सभी कॉलेजों को एक दूसरे की मदद से विद्यार्थियों को नया सिखाने का मौका मिलेगा। एमओयू में कॉमन पहलू यह होंगे कि एजुकेशन के क्षेत्र में होने वाले नवाचारों, नए आइडियाज को एक-दूसरे से शेयर करके इस पर मिलकर काम किया जाएगा। एमओयू में शामिल कॉलेज अपने संसाधनों का उपयोग भी दूसरे को करने देंगे। सरकारी कॉलेज का विद्यार्थी भी उस कॉलेज में जाकर संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। स्किल डवलमेंट पर फोकस करके सभी कॉलेज क्वालिटी एजुकेशन का माहौल तैयार कर सकेंगे। इससे छात्रों को काफी फायदा होगा। </p>
<p><strong>20 में से 16 निजी कॉलेजों ने किया एमओयू</strong><br />क्षेत्रिय सहायक निदेशक डॉ. गीताराम शर्मा ने बताया कि कॉलेज आयुक्तालय से मिली 44 निजी महाविद्यालयों की सूची में कोटा जिले के 20 प्राइवेट कॉलेज शामिल हैं। सरकार के साथ एमओयू करवाने के लिए 6 राजकीय महाविद्यालयों को नोडल बनाया गया है। जिनमें गवर्नमेंट आटर्स कॉलेज कोटा, गवर्नमेंट कॉमर्स  कॉलेज, कनवास, सांगोद, इटावा, रामगंजमंडी शामिल हैं। जिन्हें तहसील स्तर पर कॉलेज आवंटित किए हैं। इनमें से 4 को छोड़कर अन्य सभी कॉलेजों ने अपने अधीन 16 कॉलेजों की  सरकार के साथ एमओयू करवाने की सहमति प्राप्त कर ली है और उनके प्रपत्र भी भरवाकर आयुक्तालय को भेज दिए गए हैं, अब आगे की कार्रवाई उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की जाएगी। </p>
<p><strong>नियमों की पेचीदगी में देगी शिथिलता</strong><br />राजस्थान राइजनिंग के तहत कोई भी संस्था या समूह राज्य व शिक्षा के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकता है। संस्था, सरकार या सरकारी महाविद्यालय जिसके भी साथ एमओयू करना चाहती है तो कर सकती है। यदि, कोई संस्था सरकारी कॉलेजों में विकास कार्य करवाना चाहते हैं, स्किल डवलपमेंट व कम्प्यूटर ट्रैनिंग प्रोग्राम, स्पोकन इंग्लिश, लैब की सुविधा देना चाहते हैं तो इसमें एमओयू हो सकते हैं। वहीं, कोई प्राइवेट कॉलेज अपने कैम्पस में ही फैकल्टी बढ़ाकर कोई नया कोर्स शुरू करना चाहते हंै तो भी सरकार से एमओयू कर सकते है। सरकार, नियमों की पेचीदगी में शिथिलता प्रदान करेगी। लेकिन, इसके बदले हमारी अपेक्षा यही रहेगी कि इसका लाभ सरकारी कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी मिले, उनकी पढ़ाई में मदद करें।<br /><strong>- डॉ. सुनील भाटी, एडिशनल कमीशनर, कॉलेज आयुक्तालय जयपुर</strong></p>
<p>सरकार का यह सराहनीय कदम है। सरकार और निजी क्षेत्रों के संयुक्त निवेश, प्रयास और संसाधनों से कॉलेजों में उच्च शिक्षा का गुणवत्तापूर्ण परिवेश तैयार होगा। साथ ही सहयोग की भावना भी बढ़ेगी। वहीं, वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप विद्यार्थियों को साधन-संसाधनों की उपलब्धता के साथ क्वालिटी एजुकेशन मिल सकेगी। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Nov 2024 15:40:19 +0530</pubDate>
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                <title>यूनिवर्सिटी में नहीं हो सुनवाई तो सीधे लोकपाल से करें सम्पर्क</title>
                                    <description><![CDATA[जय मिनेश यूनिवर्सिटी के लोकपाल एमएल गुप्ता से नवज्योति की सीधी बात। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-your-complaints-are-not-heard-in-the-university--contact-lokpal-directly/article-86006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विश्वविद्यालय में किसी भी स्तर पर विद्यार्थी की सुनवाई नहीं होती है, कमेटी समस्याओं का निवारण नहीं करती है तो स्टूडेंट्स परेशान न हों, वे सीधे लोकपाल से सम्पर्क कर सकते हैं। विद्यार्थी व्यक्तिगत, ई-मेल व व्हाट्स एप के माध्यम से लोकपाल को अपनी शिकायत भेज सकते हैं। विश्वविद्यालय में स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण बनाने, अनियमितताओं पर लगाम कसने और विद्यार्थियों का सर्वागिंण विकास ही पहली प्राथमिकता है। यह कहना है, जय मिनेश यूनिवर्सिटी के नवनियुक्त लोकपाल एमएल गुप्ता का। गुप्ता 25 साल से कोटा में जेडीबी कॉलेज में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, प्रशासनिक अधिकारी, कोटा यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक सचिव, अकेडमिक काउंसलिंग व बोर्ड आॅफ मैनेजमेंट में विशेष आमंत्रित सदस्य रहे हैं। इसके अलावा गुप्ता, वीएमओयू में रिसर्च कमेटी के मेम्बर रहे हैं। साथ ही राजस्थान यूनिवर्सिटी सहित जोधपुर व उदयपुर विश्वविद्यालय में रिसर्च से संबंधित कार्य किए हैं। वे कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालयों में कई सर्वोच्चय पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। पेश है, खबर के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>- नवज्योति : लोकपाल के रूप में आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?</strong><br /><strong>एमएल गुप्ता :</strong> विश्वविद्यालय में किसी भी तरह की कोई अनियमितताएं न हो। विद्यार्थियों की शिकायतों का प्रथम स्तर पर ही निवारण हो। एडमिशन, फीस, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समय पर परीक्षाएं और परिणाम जारी हो और डिग्री से संबंधित किसी भी तरह की काई समस्या न हो। <br /><strong>- नवज्योति : सुनवाई नहीं हो तो लोकपाल तक कैसे पहुंचे विद्यार्थी</strong><br /><strong>ए गुप्ता : </strong>किसी छात्र को कोई शिकायत है तो वह सबसे पहले विवि की लोकल कमेटी में दर्ज कराएं। यदि, कमेटी के निर्णय से छात्र संतुष्ठ नहीं है तो फिर लोकपाल के नाम पर रजिस्ट्रार को शिकायत दे सकता है। विद्यार्थी चाहे तो ई-मेल व व्हाट्स ऐप के माध्यम से सीधे लोकपाल से सम्पर्क कर सकता है। <br /><strong>- नवज्योति : विवि की वेबसाइड पर लोकपाल की जानकारी नहीं है, व्हाट्स ऐप नम्बर व ई-मेल आईडी भी नहीं है।</strong><br /><strong>ए गुप्ता :</strong> यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार विवि की वेबसाइड पर लोकपाल की सूचना अपलोड होनी चाहिए। यदि, जानकारी अपलोड नहीं की गई तो रजिस्ट्रार को कहकर आॅनलाइन करवाएंगे। वैसे विवि में एक बोर्ड लगा है, जिस पर लोकपाल  का नाम, नम्बर व ई-मेल आईडी लिखी है।<br /><strong>-  नवज्योति : लोकपाल कितने दिनों में शिकायत का निस्तारण करेंगे</strong><br /><strong>ए गुप्ता :</strong> लोकपाल के पास शिकायत आने के बाद 8 दिन में समस्या पर निर्णय देंगे। विद्यार्थी रजिस्ट्रार के माध्यम से भी लोकपाल की ई-मेल आईडी व व्हाट्सएप नम्बर प्राप्त कर सकता है। क्योंकि रजिस्ट्रार विवि का प्रशासनिक अधिकारी होता है। विद्यार्थी चाहे तो कुल सचिव को भी लोकपाल के नाम शिकायत दे सकते हैं। <br /><strong>-  नवज्योति : यदि, स्टूडेंट्स सीधे आपसे मिलना चाहे तो मिल सकता है</strong><br /><strong>ए गुप्ता :</strong> जी बिलकुल मिल सकते हैं। हम विश्वविद्यालय में व्यक्तिगत मिल सकते हैं और आॅनलाइन भी मिल सकते हैं। <br /><strong>-  नवज्योति : प्रोपर समय पर एग्जाम व क्वालिटी एजुकेशन मिले और फीस को लेकर परेशानी न हो, इसके लिए क्या कदम उठाएंगे</strong><br /><strong>ए गुप्ता  : </strong>विश्वविद्यालय प्रशासन को समय समय पर निर्देश देंगे। छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की संख्या, परीक्षाएं कब हो रही, परिणाम कब जारी कर रहे सहित अन्य कार्यों पर सिस्टेमेटिक तरीके से नजर रखेंगे। विद्यार्थियों का सर्वागिण विकास ही हमारी पहली प्राथमिकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jul 2024 12:03:34 +0530</pubDate>
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                <title>स्टूडेंट वीएमओयू में बिना परेशानी शिक्षा ग्रहण करें उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो</title>
                                    <description><![CDATA[छात्रों की शिकायतों पर अब शीघ्र निर्णय हो पाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/students-should-receive-education-in-vmou-without-any-hassles--they-should-not-face-any-problem/article-85734"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वीएमओयू से शिक्षा ग्रहण करने वाले किसी भी स्टूडेंट को किसी भी तरह की तकलीफ नहीं हो। वह भयमुक्त होकर अपनी शिक्षा ग्रहण करें। यूनिवर्सिटी के  कामकाज में पारदर्शिता के साथ ऐसी व्यवस्था रहेगी कि किसी स्टूडेंट को परेशान होकर भटकना नहीं पड़े। यह कहना है वर्धमान खुला  विश्वविद्यालय के नव नियुक्त लोकपाल पवन एन चन्द्रा का। पवन एन चन्द्रा कोटा के गुमानपुरा इलाके के ही निवासी हैं। चन्द्रा इससे पूर्व डिस्ट्रीक एन्ड सेशन जज रह चुके हैं। चन्द्रा 1982 से 2001 तक ज्यूडिशियल सर्विस में रहे हैं। वह धौलपुर, प्रतापगढ़ और सीकर में जिला एवं सेशन न्यायाधीश रह चुके हैं। इसके साथ बाडमेर सवाई माधोपुर में चीफ डिस्ट्रीक जज रह चुके हैं। 2016 से 2021 कर चन्द्रा बारां के उपभोक्ता मंच अध्यक्ष भी रहे। </p>
<p><strong>- नवज्योति- वीएमओयू ने आपको लोकपाल नियुक्त किया इसके लिए बधाई,क्या काम रहेगा।</strong><br /><strong>चन्द्रा- </strong>अब छात्रों की शिकायतों पर ना केवल शीघ्र निर्णय हो पाएगा अपितु उनके हित में आ रही अड़चनें भी दूर हो पाएंगी।  छात्र समुदाय की शिकायतों के निस्तारण के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों में लोकपाल नियुक्त कर दिए हैं। कुलपति ने इनका अनुमोदन कर दिया है। लोकपाल नियुक्ति से तीन वर्ष तक अथवा 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक के लिए यह नियुक्ति की गई है। <br /><strong>- नवज्योति-काम की क्या प्राथमिकता रहेगी। </strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong>किसी बी स्टूडेंट को किसी भी तरह की तकलीफ नहीं हो। उसको परेशानी है तो वह कॉलेज  स्तर की कमेटी में जाएं। वहां से भी परेशानी का निस्तारण नहीं हो तो यूनिवर्सिटी में ग्रीवेंसेज कमेटी में जाए। यदि वहां भी उसे न्याय नहीं मिलता तो वह लोकपाल के पास आ सकता है। लोकपाल का निर्णय ही अंतिम होगा। कोशिश करेंगे कि बच्चे अच्छे माहौल में शिक्षा ग्रहण कर सकें।<br /><strong>- नवज्योति- वीएमओयू से ज्यादातर स्टूडेंट को सूचनाएं सही समय पर नहीं मिलने की रहती हैं। कब एक्जाम होने हैं? इसका पता तक नहीं चलता। </strong><br /><strong>कोविड के समय तो हालात ही खराबथे।</strong><br /><strong>ए चन्द्रा- </strong>मैं इस बारे में बात करूंगा। आज इन्टरनेट का जमाना है। सभी चीजें आॅनलाइन करवा दूंगा। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी। ऐसी व्यवस्था करवा देंगे। इसके साथ सभी परीक्षा समय पर हों। उनके रिजल्ट भी समय पर निकलें। इस पर भी हम ध्यान रखेंगे।<br /><strong>- नवज्योति- आप की नियुक्ति की सूचना भी अब तक आॅन लाइन नजर नहीं आती। जब कि यह सूचना आॅन लाइन होनी चाहिए।</strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong> यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार लोकपाल की सूचना आॅन लाइन होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी को अपनी वेब साइट पर इसे डालना होता है। शायद इसे डाल भी दिया है। फिर भी ऐसा है तो मैं पता करूंगा। यूनिवर्सिटी ने मुझसे इसे आॅन लाइन करने को कहा था। <br /><strong>- नवज्योति- राज्य में स्थित दूरस्थ शिक्षा केन्द्रों पर कब कक्षाएं लगेंगी, कब फार्म भरे जाएंगे। क्या अमेन्डमेन्ट हो रहा है कुछ पता नहीं चलता।</strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong> मैं जो भी शिकायत आएगी उस मामले को देखूंगा। वीसी और रजिस्ट्रार से भी बात कर समस्याओं को सॉल्व करेंगे।<br /><strong>- नवज्योति- फिलहाल आप कहां निवास कर रहे हैं।अपने बारे में बताएं</strong><br /><strong>ए चन्द्रा-</strong> बाडमेर सवाईमाधोपुर में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, लक्षमणगढ़, छबड़ा, बूंदी में एडिशनल डिस्ट्रीक एन्ड सेशन जज, अजमेर में बार्ड आॅफ रेवेन्यू मैम्बर, लेबर कोर्ट व ट्रिब्यिूनल कोर्ट जज, लोकायुक्त सचिवालय जयपुर, प्रतापगढ़,सीकर में ्िडस्ट्रीक एंड सेशन जज रहा हूं। फिलहाल वीएमओयू का लोकपाल हूं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 24 Jul 2024 16:38:47 +0530</pubDate>
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