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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - नारी है शक्ति, नारी है ज्योति, नारी बिना ये दुनिया है खोती ....</title>
                                    <description><![CDATA[महिला अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/international-women-s-day---woman-is-power--woman-is-light--without-woman-this-world-is-lost/article-106839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  नारी शक्ति अगर ठान ले तो हर मुकाम पर अपना परचम लहरा देती है। आज के युग में महिलाएं पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। वे अपनी आत्मनिर्भरता, जोश और जज्बे से अपने सपने साकार कर रही है। शिक्षा, व्यवसाय, उच्च सरकारी पद, खेल, बिजनेस, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में कामयाबी के शिखर पर पहुंच रही है। अंतरराष्टÑीय महिला दिवस पर हम ऐसे ही हाड़ौती की महिलाओं से आपको मुखातिब करवा रहे है। इन महिलाओं का कहना है कि बेटियों को सपने देखने दीजिए। उन्हें उड़ने दीजिए। अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं। हर महिला में असीम शक्ति है। अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकते हैं। </p>
<p>मेहनत से सफलता तक अपनी कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी से प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान बनाई। माता-पिता एवं परिवार की प्रेरणा से मैंने अपनी क्षमताओं को निखारा। शिक्षा, आत्मनिर्भरता और संकल्प ही सफलता की कुंजी हैं। जब एक महिला ठान लेती है, तो हर चुनौती छोटी हो जाती है। एक सुरक्षित समाज ही महिला सशक्तिकरण की नींव है। जागरूकता, सशक्त कानून और समाज की सकारात्मक सोच से महिलाएं निर्भय होकर आगे बढ़ सकती हैं। कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से हर महिला अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती है। महिला शक्ति, समाज की असली ताकत है। <br /><strong>-भावना सिंह,एसडीएम  लाखेरी </strong></p>
<p><strong>निरंतर मेहनत पर ही अपनी मंजिल मिल सकती है</strong><br /> शुरू से ही परिवार का सहयोग रहा तो संघर्ष तो नही करना पड़ा लेकिन मेहनत बहुत करनी पड़ी है। जो भी  महिला जीवन मे कुछ करना चाहती है वो लक्ष्य निर्धारित कर के निरंतर मेहनत कर अपनी मंजिल को हासिल कर सकती है। महिला मजूबत और सफल हो सके इसके लिए जरूरी हो कि महिला अंदर से मजबूत हो अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हो, क्योंकि जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आ जाए हमे हमारी नाकामी के पीछे परिस्थियों का हवाला नही देना चाहिए।  सकारात्मक ऊर्जा के साथ परिस्थितियों का सामने करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। समाज में महिला अपने आप को सुरक्षित महसूस करे इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने लड़के और लड़कियों की परवरिश समानता के साथ करे। उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नही करें। क्योंकि अगर माता पिता अपनी लड़कियों के साथ ही लड़कों को भी सही संस्कार देंगे तो समाज मे निश्चित ही महिलाएं सुरक्षित माहौल को महसूस करेंगी।<br /><strong>-सपना कुमारी, उपखण्ड अधिकारी सांगोद</strong></p>
<p><strong>बदलाव लाने के लिए सिर्फ  इच्छा ही नहीं , निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं</strong><br />आशा शर्मा जो कभी एक साधारण गृहिणी थीं। उन्होंने अपने संघर्ष और संकल्प के बल पर लाखेरी नगर परिषद की चेयरमैन बनने का गौरव हासिल किया। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी उन्होंने समाज सेवा को प्राथमिकता दी और यह साबित किया कि इच्छाशक्ति से हर सपना साकार किया जा सकता है। चेयरमैन बनने के बाद आशा शर्मा ने शहर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का दृढ़ निश्चय किया। उन्होंने स्वच्छता, विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका मानना है कि बदलाव लाने के लिए सिर्फ  इच्छा ही नहीं बल्कि निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं। अंतरराष्टीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा छात्राओं और महिलाओं को संदेश दिया कि महिला शक्ति आज किसी से कम नहीं है। आशा शर्मा ने कहा हर महिला में असीम शक्ति है। अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकते हैं। आशा शर्मा हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करना चाहती है। उनका संघर्ष और सफ लता यह साबित करता है कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई भी मुकाम दूर नहीं। <br /><strong>-आशा शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका लाखेरी</strong></p>
<p>उन्हें देखकर जनसेवा का जज्बा जगा। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सिंधिया का विधानसभा क्षेत्र हैं । वो भी एक महिला है तो उनसे प्रेरित होकर राजनीति के जरिए जनसेवा का मौका मिला। अपने पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में लोगों के लिए जी जान से विकास कार्य किए। जिस मुकाम पर मैं हू वह परिवार के सहयोग से ही सम्भव हो पाता है। समय का बेहतर प्रबंधन दोनों कार्य मे सफलता दिलाता है और परिवार के सहयोग से ऊर्जा मिलती है। समाजसेवा हो या राजनीति, संघर्ष तो कदम कदम पर हर होते है, विरोध भी होते है खासकर जब आप महिला है तो हौसला तोड़ने वाले भी मिलते है लेकिन जनता के प्यार से हौसला और ताकत मिलती रहती है।<br /><strong>-वर्षा मनीष चांदवाड़, नगरपालिका अध्यक्ष, झालरापाटन</strong><br /><strong> </strong><br /><strong> डर को छोडो, हौसले को पकडो</strong><br />बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। परंतु समाज में बेटियों की पढाई लिखाई पर खर्चा व्यर्थ समझा जाता था फि र भी मेरे माता पिता के बेटे बेटी को समान शिक्षा प्रदान करने के विचार व मेरे अथक परिश्रम व लगन के चलते मैंने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।  इन्द्रगढ कस्बे से पहली महिला डॉक्टर बनी।  नीट परीक्षा की तैयारी के लिए दिन में 14 से 15 घंटे तक अध्ययन किया। शारिरीक विकलांगता होने के बावजूद मैंने कभी इसे अपनी कमजोरी नही माना और निरंतर मेहनत की। अपने अथक प्रयासों के दम पर ये मुकाम हासिल किया। पिता बैंक मैनेजर और माता गृहिणी है। जिनका मेरी इस सफ लता में अहम योगदान है। मेरे तीन छोटे भाई बहिन भी डॉक्टरी की तैयारी कर रहे है तथा एक बहिन आईएएस की तैयारी कर रही है। बाद में मेरे पति डॉ0 चन्दन मीना के प्रोत्साहन से पीजी की पढाई पूरी कर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में अपने कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपनी सेवाएं दे रही हूं। महिला सुरक्षा समान कानून और व्यक्तिगत जागरूकता से जुडा मुद्दा है। सख्त कानून आत्मरक्षा शिक्षा व जागरुकता से इसे मजबूत किया जा सकता है। महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने में समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ अधिकार हासिल करना नही बल्कि अपने आत्मविश्वास स्वाभिमान और काबिलियत को पहचानना भी है। महिला दिवस पर सभी महिलाओं व बालिकाओं को मेरा संदेश है कि  डर को छोडा, हौसले को पकड़ो। शिक्षा तुम्हारा सबसे बडा हथियार है, इसे कभी मत छोड़ो। आर्थिक स्वतंत्रता तुम्हे आत्मनिर्भर बनाएगी इसे अपनाओ। गलत के खिलाफ आवाज उठाओ, क्योंकि चुप्पी भी अन्याय को बढ़ावा देती है।<br /><strong> -डॉ. प्रियंका मीना महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p><strong>सही दिशा और अवसर मिले तो बेटियां हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं</strong><br />छीपाबड़ौद कस्बे के ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की लेकिन  सपना इससे कहीं आगे था।  एमबीबीएस की तैयारी के लिए कोटा जाने की इच्छा जताई तो समाज ने सवाल उठाए। लड़की को इतना पढ़ाने की क्या जरूरत। इतनी दूर भेजकर क्या करेंगे? लेकिन  माता-पिता ने समाज की परवाह किए बिना उन्हें पूरा समर्थन दिया। कोटा में  दिन-रात मेहनत की। 16-16 घंटे पढ़ाई की। न मनोरंजन देखा, न पारिवारिक कार्यक्रमों में भाग लिया। एक ही लक्ष्य था डॉक्टर बनकर अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए कुछ करना। लगातार पांच वर्षों की मेहनत के बाद विजय लक्ष्मी का चयन अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुआ। जहां से उन्होंने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उनका सरकारी नौकरी में चयन हुआ और 2021 में छीपाबड़ौद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं शुरू कीं। लड़कियों को सिर्फ  स्कूल भेजना काफ ी नहीं है, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और सही संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। महिला सुरक्षा को लेकर वे कहती हैं। सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए और पुलिस को महिलाओं की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। आज भी कई महिलाओं के साथ हिंसा होती है। हर लड़की के माता-पिता से यह कहना है कि बेटियों को सपने देखने दीजिए। उन्हें उड़ने दीजिए। अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं।<br /><strong>-डॉ विजय लक्ष्मी चौरसिया, स्त्री एवं प्रसूति विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छीपाबडौद</strong></p>
<p>मैं पेशे से एक ब्यूटीशियन है। पिछले 4 सालों में लगभग 500 से ज्यादा युवतियों व महिलाओं को ब्यूटीपार्लर का कोर्स करवा कर हुनरमंद बनाया है। ब्यूटी कोर्स का कोई चार्ज नही लिया, यह बिल्कुल निशुल्क है। जो आज भी अनवरत जारी है। स्कूल व कॉलेज की युवतियों के लिए यह फ्री ब्यूटी कोर्स समर वेकेशन के समय करवाया जाता है। यह सब नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक अच्छा कदम है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के कौशल विकास व आत्मनिर्भर भारत, नारी सशक्तिकरण जैसे ध्येय को भी बढ़ावा दे रही है। हर महिला को अपनी जिद और जुनून से अपने जीवन की कहानी खुद लिखनी चाहिए। मैं  इंदौर जैसे बड़े शहर की रहने वाली थी, शादी भवानीमंडी में हुई। एक बेटी का अपने पापा के प्रति अटूट विश्वास ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। सब में उनके माता-पिता व पति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। <br /><strong>-सविता घुता -ब्यूटीशियन, भवानीमंडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:00:02 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट, अचानक सड़क से निकलने लगी आग</title>
                                    <description><![CDATA[ बिजली की लाइन में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और वायरिंग को रिपेयर कर चालू कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/short-circuit-in-power-suddenly-fire-started-coming/article-100471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy37.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी के टोंक रोड स्थित जयपुर नगर निगम ग्रेटर ऑफिस के सामने वाली रोड पर करीब 12.30 बजे अचानक सड़क से आग निकलने लगी। मौके पर अफवाह फैल गई कि सीएनजी की लाइन में आग लग गई। सूचना मिलने पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और गांधी नगर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बाद में पता चला कि सड़क के नीचे बिजली की लो टेंशन लाइन है। बिजली की लाइन में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और वायरिंग को रिपेयर कर चालू कर दिया।</p>
<p><strong>400 वॉल्ट की है लाइन</strong><br />डिस्कॉम के कर्मचारियों ने बताया कि यहां से 400 वॉल्ट की लाइन गुजर रही है, जो कट गई थी। सुबह बारिश का पानी इस लाइन के संपर्क में आया तो लाइन में फॉल्ट हो गया। चिंगारी निकलने के बाद बिजली सप्लाई बंद हो गई। बिजली वायर जलने लगा और रोड के नीचे से आग निकलते दिखाई देने लगी, जिसे ठीक कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jan 2025 10:29:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया की 8 महाशक्तियों की लिस्ट में भारत का बजा डंका, ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट के मुताबिक चीन की बढ़त के बाद भी अमेरिका दुनिया का का सबसे ताकतवर देश बना हुआ है। चीन ने जहां दूसरे नंबर पर है, वहीं रूस तीसरे स्थान पर बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-beats-britain-and-france-in-the-list-of-worlds-power/article-97849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6633-copy.jpg1.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। दुनिया में तेजी से अपनी धाक बना रहे भारत ने विश्व की 8 महान शक्तियों की लिस्ट में अपना डंका बजाया है। साल 2024 के खत्म होते-होते जारी इस ताजा लिस्ट में भारत ने ब्रिटेन, फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्ट को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक प्रभाव, राजनीतिक स्थिरता और सैन्य ताकत के आधार पर बनाया गया है। द एट ग्रेट पावर्स के नाम से जारी इस लिस्ट में सुपरपावर अमेरिका को पहला, चीन को दूसरा, रूस को तीसरा, जापान को चौथा, भारत को पांचवां, फ्रांस को छठवां, ब्रिटेन को सातवां और दक्षिण कोरिया को आठवां नंबर मिला है। </p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक चीन की बढ़त के बाद भी अमेरिका दुनिया का का सबसे ताकतवर देश बना हुआ है। चीन ने जहां दूसरे नंबर पर है, वहीं रूस तीसरे स्थान पर बरकरार है। भारत को भी इस लिस्ट में एक बड़े ग्लोबल पावर के रूप में पेश किया गया है। इस पूरी लिस्ट में खास बात यह है कि एशिया के दबदबा है और 4 देशों को इसमें जगह मिली है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया का दबदबा यह दर्शाता है कि वैश्विक ताकत अब यूरो अटलांटिक क्षेत्र से हटकर हिंद प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ रही है।</p>
<p><strong>सुपरपावर अमेरिका और चीन के बारे में क्या कहा?</strong><br />पिछले 500 सालों में पश्चिमी देशों ने वैश्विक ताकत में मुख्य रूप से अपना प्रभाव रखा। पिछली सदी में अमेरिका ने जहां निर्णायक भूमिका निभाई लेकिन वह एक अटलांटिक महाशक्ति है। वहीं अगर इस सदी में भी अमेरिका निर्णायक भूमिका निभाएगा तो यह हिंद प्रशांत क्षेत्र होगा। इस रैंकिंग में कहा गया है कि अमेरिका के पास दुनिया के सबसे घातक और व्यापक रक्षा प्रतिष्ठान है। अमेरिका एकमात्र ऐसा देश है जो किसी भी समय दुनिया के किसी भी महाद्वीप में सैन्य कार्रवाई करने की ताकत रखता है। इसमें चीन को दूसरे नंबर पर जगह दी गई है लेकिन जनसंख्या में आ रही गिरावट का उस पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी खाई कम हो रही है और ड्रैगन लगातार अपनी अर्थव्वस्था और रक्षा औद्योगिक आधार को बढ़ा रहा है।</p>
<p><strong>भारत लिस्ट में बना न्यूकमर</strong><br />भारत को 5वीं रैकिंग मिली है और उसे इसे लिस्ट में न्यूकमर का दर्जा मिला है। इसमें कहा गया है कि भारत के पास बहुत अच्छी जनसंख्या है और उसकी आर्थिक प्रगति की दर इस लिस्ट में शामिल किसी अन्य देश से ज्यादा है। भारत का राजनीतिक सिस्टम खुला है और इससे तकनीकी कंपनियों को नई खोज करने के लिए प्रेरित करता है। भारत का ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका और रूस के साथ बहुत अच्छा रक्षा संबंध है। इससे भारत को सबसे आधुनिक सैन्य तकनीक आसानी से मिल जाती है। हालांकि भारत को पाकिस्तान लगातार प्रभावित कर रहा है जिससे नई दिल्ली का व्यापक अंतरराष्ट्रीय असर प्रभावित हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2024 10:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठरको म्हारा सरकारी अफसरां को </title>
                                    <description><![CDATA[कभी एम्बेसडर कार अधिकारियों की पहचान होती थी लेकिन आज सरकारी दफ्तरों में फोर्च्यूनर से लेकर स्कॉर्पियो तक अधिकारियों की सवारी लिस्ट में शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/stop-my-government-officers/article-63994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/sd.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश और राज्य की सत्ता को चलाने की जिम्मेदारी सरकारी अफसरों की होती है जो सरकार के हर छोटे बड़े फैसले को धरातल पर क्रियान्वित कराते हैं। वहीं इस बात में कोई दो राय नहीं हैं कि सरकार के कामकाज को ठीक तरह से चलाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं अफसरों की होती है। अफसर जिस वाहन में सवारी करते हैं उसकी भी एक शान होती है। अपनी अफसरी की शान बनाए रखने को अधिकारी अब लक्जरी गाड़ियों की मांग करने लगे हैं। हालांकि सरकार भी अपने अधिकारियों के ठाट बाट में कोई कमी नहीं आने देती। बंगला गाड़ी से लेकर नौकर चाकर तक अधिकारियों को हर तरह की सुविधा दी जाती है। अपनी इन्हीं सुविधाओं में अधिकारी भी दो कदम आगे बढ़ते हुए अब लग्जरी कारों की सवारी करने लगे हैं। कभी एम्बेसडर कार अधिकारियों की पहचान होती थी लेकिन आज सरकारी दफ्तरों में फोर्च्यूनर से लेकर स्कॉर्पियो तक अधिकारियों की सवारी लिस्ट में शामिल हैं।</p>
<p><strong>किसी के पास फोर्च्यूनर तो किसी के पास मिड साइज एसयूवी </strong><br />कोटा में दर्जन भर आईएस, आईपीएस के अलावा कई सारे आरएएस और आरपीएस अधिकारी तैनात हैं। बता दें कि इन अधिकारियों के आवागमन और कार्य की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा इन्हें वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। जो या तो अनुबंध पर होते हैं या विभाग द्वारा ही खरीदे जाते हैं। इन वाहनों में कोटा कलेक्टर के पास फोर्च्यूनर और एसपी के पास स्कॉर्पियो मौजूद है। यह दोनों ही वाहन मिड साइज एसयूवी की कैटेगरी  में आते हैं। दूसरी ओर कोटा के सभी एडीएम और एसडीएम को बोलेरो कैम्पर कार दी हुई है। इसके अलावा कोटा में पुलिस विभाग में तैनात सभी उप पुलिस अधिक्षक व अतिरिक्त पुलिस अधिकक्ष को महिंद्रा की टीयूवी 300 कार दी गई है। गौरतलब है कि कोटा में अधिकारियों को दिए गए ये सभी वाहन लग्जरी श्रेणी के वाहन हैं जिनकी कीमत 15 लाख से 40 लाख तक है। वहीं इसके अलावा द्वितीय स्तर के दफ्तर व अधिकारियों को भी लग्जरी सिडान कारें मुहैया कराई गई हैं। जिनमें स्वीफ्ट डिजायर से लेकर मारूती की सियाज मौजूद हैं।</p>
<p><strong>कुछ विभागों में बिना टैक्सी नंबर चल रहे वाहन</strong> <br />सरकारी अधिकारियों को वाहन उपलब्ध कराना सरकार का कार्य है जिसमें विभाग की आवश्यकतानुसार वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं अनुबंध के तहत लगने वाले वाहनों के लिए सरकार द्वारा दिशा निर्देश जारी हैं लेकिन उन निर्देशों की पालना में कुछ विभाग विफल नजर आए। सरकार के निर्देशानुसार अनुबंध के तहत लगने वाले वाहनों को कमर्शियल रजिस्ट्रेशन होने के साथ ही उनकी आयु 7 वर्ष से कम होनी जरूरी है लेकिन जिले मेंदोनों नगर निगमों, जलदाय विभाग, जिला परिषद जैसे कई विभागों में अनुबंध के तहत लगाए गए वाहन में कई वाहन बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन के ही अनुबंधित हैं। जिससे सरकार को लाखों रु. के राजस्व का नुकसान हो रहा है। </p>
<p><strong>लग्जरी वाहनों से सरकारी वाहन की पहचान हो रही कम</strong><br />जिले में सरकारी अधिकारियों के लिए तैनात वाहनों के लग्जरी होने से उनकी सरकारी पहचान भी कम हो रही है। अगर किसी पर नेमप्लेट ना लगा हो तो किसी भी अधिकारी के वाहन को आसानी से नहीं पहचाना जा सकता। अधिकारियों के पास मौजूद ये लग्जरी वाहन किसी निजी वाहनों की तरह प्रतीत होते हैं। </p>
<p>विभागों में लगे वाहनों का रजिस्ट्रेशन कमर्शियल होना जरूरी है ताकी भुतान करने में आसानी रहे कई बार वाहन मालिक अनुबंधित वाहन के स्थान पर दूसरा वाहन भी ले आता है। बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन के वाहन लगाने के लिए अनुमति जरूरी है अगर ऐसा नहीं है तो नियमानुसार गलत है।<br /><strong>- आशीष शर्मा, कोषाधिकारी</strong></p>
<p>विभाग के सभी वाहन नियमानुसार व परमिशन लेकर ही लगे हुए हैं, रजिस्ट्रेशन कमर्शियल होना नहीं होना इसकी जानकारी नहीं है ये जिम्मेदारी राजकोष विभाग की हैं क्योंकि इनका भुगतान राजकोष विभाग से ही किया जाता है।<br /><strong>- महेश जांगिड़, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 19:35:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मानसून के चलते बिजली की मांग में कमी, 3 महीने बाद बढ़ सकता है संकट</title>
                                    <description><![CDATA[कोयले की कमी से राजस्थान में बिजली का संकट बरकरार है। कटौती के जरिए बिजली मैनेजमेंट के बीच बदलते मौसम ने भले ही कुछ दिनों के लिए संकट स्थगित कर दिया है, लेकिन 3 महीने बाद बिजली संकट फिर गहरा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-power-crisis-may-be-increased/article-13940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4546546520.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोयले की कमी से राजस्थान में बिजली का संकट बरकरार है। कटौती के जरिए बिजली मैनेजमेंट के बीच बदलते मौसम ने भले ही कुछ दिनों के लिए संकट स्थगित कर दिया है, लेकिन 3 महीने बाद बिजली संकट फिर गहरा सकता है। ऊर्जा विभाग अभी से अक्षय ऊर्जा के जरिए बिजली के व्यवस्था में लग गया है। प्रदेश में कोयला संकट के चलते प्रदेश की 23 बिजली उत्पादन इकाइयों में करीब 6 में उत्पादन बंद पड़ा है। शेष उत्पादन इकाइयों में कोयले की कम आपूर्ति के कारण पर्याप्त क्षमता से उत्पादन नहीं हो पा रहा।संकट के बीच छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत नहीं बनने के कारण राजस्थान को आवंटित दो खान ब्लॉक से भी खनन समय पर अभी तक शुरू नहीं हुआ। सरकार को आम उपभोक्ताओं के साथ किसानों को फसली सीजन में बिजली देने की चुनौती बनी हुई है। ऊर्जा विभाग की चिंता यह भी है कि कोयला उत्पादित इकाइयों पर निर्भरता के चलते अक्टूबर के बाद बिजली संकट और गहरा सकता है।</p>
<p>अभी मानसून के चलते तापमान में जारी गिरावट से बिजली की डिमांड में कमी बनी हुई है। किसान के पास भी अभी खेतों में काम नहीं है। संकट थोड़ा कम नजर आ रहा है। अक्टूबर के बाद स्थितियों में बदलाव होगा, क्योंकि बारिश सीजन के बाद फसली सीजन शुरू होगा, तो किसानों में बिजली की डिमांड बढ़ेगी। ऐसे में प्रदेश में पर्याप्त कोयला नहीं मिला, तो बिजली का संकट खड़ा होगा। इसी वजह से ऊर्जा विकास निगम ने अभी से अक्षय ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन इकाइयों से सस्ती बिजली खरीद प्रक्रिया तेज कर दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jul 2022 12:43:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंतर-मंतर पर योग: हमारी आत्मिक शक्ति में वृद्धि करता है योग</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। आठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पुरातत्व विभाग की ओर से जंतर-मंतर पर योग प्रोटोकॉल का अभ्यास करवाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग दिवस पर संबोधन को सुनने के बाद सभी ने विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/yoga-at-jantar-mantar-yoga-increases-our-spiritual-power/article-12706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/sdfgsd.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पुरातत्व विभाग की ओर से जंतर-मंतर पर योग प्रोटोकॉल का अभ्यास करवाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग दिवस पर संबोधन को सुनने के बाद सभी ने विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया।<br /><br />कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंत्री अर्जुन मेघवाल ने योग के महत्व को बताते हुए कहा की योग में हम आसन, प्राणायाम, व ध्यान को सम्मिलित करते है योग हमारी आत्मिक शक्ति को बढ़ाता है। मानवता के लिए योग इस वर्ष की थीम को ध्यान में रखकर दुनियाभर में लोग योगाभ्यास, ध्यान, प्राणायाम इत्यादि कर रहे हैं और भारत के लिए गर्व का विषय है कि पूरी दुनिया उसे देखकर स्वस्थ रहने के लिए संकल्पित हो रही है।<br /><br />बीएसएफ के डीआईजी पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि योग को दुनिया के सामने लाने में भारत का बहुत बड़ा योगदान रहा है।बार्डर एरियाज में देखिए 50 डिग्री तापमान में भी हमारे जवान योग करके खुद को फिट रख रहे हैं। उनकी ड्यूटी के समय में भी योग को जोड़ दिया गया है जिससे जवान जो ड्यूटी करते है वह तनावमुक्त रहकर दुश्मन पर पैनी नजर रख सके।<br /><br />संस्थान के कुलपति प्रोफ़ेसर संजीव शर्मा ने बताया की आठवें अंन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम की श्रृंखला में जयपुर में पिछले 100 दिनो से कुछ ना कुछ स्वास्थ्य वर्धक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इस शृंखला  में 2 मई को जलमहल पर, 17 जून को हवामहल पर योग प्रदर्शन किया गया। 18 जून  को जवाहर सर्कल पर योग प्रोटकॉल का अभ्यास करवाया गया और दिनांक 20 जून को योग जागरूकता रैली व जुम्बा डान्स पर्फ़ोर्मन्स जैसे अनेक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में युवाओं और शहरवासियों ने भाग लेकर योग के महत्व को जाना है। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य जन-जन में यह संदेश पहुंचना है की योग हमारे शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य एवं दीर्घ निरोग आयु के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। <br /><br />कार्यक्रम में बीएसएफ के अधिकारियों, जवानों, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ साथ सीआरपीएफ, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के शिक्षकों , छात्र, कर्मचारी, एपेक्स विश्वविद्यालय के छात्र, प्रतिनिधि,  नेहरू युवा केंद्र, अन्य सामाजिक संगठनों एवं आमजन ने मिलकर योगाभ्यास किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 14:57:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>CM गहलोत बोले......फासिस्ट लोग सत्ता में बैठे हैं, उनको सत्याग्रह का मीनिंग ही नहीं मालूम है   </title>
                                    <description><![CDATA[  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की अग्निपथ और राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर कहा कि  ये ऐसे लोग (भाजपा) फासिस्टी लोग सत्ता में बैठे हैं, उनको सत्याग्रह का मीनिंग ही नहीं मालूम है, सत्याग्रह सत्य के लिए आग्रह होता है, जिसमें हिंसा नहीं होती है, तनाव नहीं होता है और अपनी बात कहने का तरीका होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gehlot-said-that-fascist-people-are-sitting-in-power--they-do-not-even-know-the-meaning-of-satyagraha/article-12667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ashok-j.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की अग्निपथ और राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर कहा कि  ये ऐसे लोग (भाजपा) फासिस्टी लोग सत्ता में बैठे हैं, उनको सत्याग्रह का मीनिंग ही नहीं मालूम है, सत्याग्रह सत्य के लिए आग्रह होता है, जिसमें हिंसा नहीं होती है, तनाव नहीं होता है और अपनी बात कहने का तरीका होता है।<br /><br /> गहलोत सोमवार को नई दिल्ली में जंतर मंतर पर दुर्भाग्य से जो अभी सत्ता में बैठे हुए लोग हैं, ये गांधी जी का सत्याग्रह था, उनकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहे हैं, इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार ये चौथा दिन है, जब शांति से, सद्भावना से बैठे हुए हैं या अरेस्ट दे रहे हैं अपने आपको जो कायदा होता है लोकतंत्र के अंदर, परंतु ये लोग जो हैं, पुलिस जो है वो उल्टा अत्याचार कर रही है कार्यकर्ताओं पर, उलटा हो रहा है। कल ही मैंने कहा था कि कार्यकर्ता तो शांति से हैं, सद्भावना से बैठे हैं और ये पुलिस अत्याचार कर रही है कार्यकर्ताओं पर, जगह-जगह रोक रही है। हां, अगर हिंसा हो, पत्थरबाजी हुई हो कहीं पर, आगजनी हुई हो, तो आपका हक है कि आप अरेस्ट करो, उनको रोको, कार्रवाई करो, मुकदमा दर्ज करो, ये कुछ हो ही नहीं रहा है, ये ऐसा उदाहरण आपके सामने है जहाँ बिल्कुल शांति-सद्भावना से सब बैठे हुए हैं, अपनी बात कह रहे हैं, राहुल गांधी जी और सोनिया गांधी जी पर जो ईडी के नोटिस दिए गए हैं गलत तरीके से, जब हम बार-बार कहते हैं कि वो कंपनियां ऐसी हैं, जो नॉन-प्रॉफिट वाली हैं, जिसमें 1 रुपया ले नहीं सकता आदमी, चाहे तो नहीं ले सकता है, वो कंपनियां कानून के अंतर्गत बनी हुई हैं, उसमें मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हो सकती है? पूरा देश समझ रहा है, सभी कार्यकर्ता समझ रहे हैं, पूरे देश के कार्यकर्ताओं में इतना भयंकर आक्रोश है कि सरकार को अहसास नहीं है, अहसास करवाने के लिए ही कार्यकर्ता आए हैं और मैं ये समझता हूं कि अल्टीमेटली सत्य की जीत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 15:49:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिजली संकट में किसानों को झेलनी पड़ेगी कटौती की मार</title>
                                    <description><![CDATA[कोयले की कमी से जारी बिजली संकट का फिलहाल समाधान नजर नहीं आ रहा। मानसून से कोयला संकट की चिंताएं और बढ़ गई हैं। कोयला खदानों में पानी भरने से कोयला सप्लाई में बाधा बढ़ेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-cut-in-power-crisis-to-coustumers/article-12396"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/electricity1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोयले की कमी से जारी बिजली संकट का फिलहाल समाधान नजर नहीं आ रहा। मानसून से कोयला संकट की चिंताएं और बढ़ गई हैं। कोयला खदानों में पानी भरने से कोयला सप्लाई में बाधा बढ़ेगी। राजस्थान की थर्मल इकाइयों को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिला, तो ग्रामीण उपभोक्ताओं और किसानों को कटौती की मार ज्यादा झेलनी पड़ेगी। फिलहाल बिजली संकट में सभी श्रेणी उपभोक्ताओं से कटौती जारी है। मानसून की बारिश से बिजली का लोड कम होगा, तो उपभोक्ताओं को पावरकट का कम सामना करना पड़ेगा, लेकिन कोयला सप्लाई के हालातों से संकट खत्म होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही। छत्तीसगढ़ कोयला खदान विवाद के चलते पहले ही स्टॉक मिलने में परेशानी बनी हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार से अभी सहमति नहीं बनी हैं। यदि सहमति बन भी जाती है, लेकिन खदानों में बारिश का पानी भर गया तो कोयला सप्लाई पाना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p><strong>ग्रामीण-किसानों पर ज्यादा असर</strong><br />प्रदेश में 14 हजार मेगावाट डिमांड बनी हुई है। बाजार से महंगी बिजली खरीद इसे पूरा भी किया जा रहा है। तेज गर्मी में अधिक डिमांड रहती है, लेकिन बारिश के चलते घरेलू उपभोक्ताओं का लोड कम हो जाता है। थर्मल इकाइयों में कोयला संकट बना रहा, तो डिमांड पूरी करना चुनौती भरा काम होगा।</p>
<p><strong>अभी मिल रहा 21 रैक कोयला</strong><br />राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम में 23 विद्युत उत्पादन इकाइयों की 7580 मेगावाट उत्पादन क्षमता है। नियमानुसार इन इकाइयों में 20 से 26 दिन का कोयला स्टॉक रहना जरूरी है। छत्तीसगढ़ खदान विवाद के बाद अभी इकाइयों के पास महज चार से पांच दिन का कोयला स्टॉक ही बचा है। वर्तमान में कोल इंडिया और अन्य माध्यमों से राजस्थान को 20 से 21 रैक कोयला रोजाना मिल रहा है। मौजूदा हालातों में यह कोयला पर्याप्त है, लेकिन रबी सीजन में डिमांड बढ़ने पर संकट और कटौती का दौर बरकरार रहेगा। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 10:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> भारत बन रहा है दुनिया में नई परमाणु शक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[ दुनिया में सिर्फ 9 देश हैं, जिनके पास परमाणु हथियार हैं। इनमें भारत का नाम भी शामिल है। भारत के पास 160 परमाणु हथियार हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि भारत इन हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/-india----becoming---new-nuclear---power----world/article-12117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/french_nuclear_test_1280x720.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दुनिया में सिर्फ 9 देश हैं, जिनके पास परमाणु हथियार हैं। इनमें भारत का नाम भी शामिल है। भारत के पास 160 परमाणु हथियार हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि भारत इन हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है, यह दावा किया है स्टॉकहोम के डिफेंस थिंक टैंक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने। सिपरी ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान के साथ भी ऐसा ही अंदाजा है। वह भी अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने में लगा है।</p>
<p><strong>300 से ज्यादा नए मिसाइल साइलो</strong> <br /><br />सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन भी अपने परमाणु हथियारों की ताकत में इजाफा कर रहा है। वह 300 से ज्यादा नए मिसाइल साइलो बना रहा है। साइलो जमीन के अंदर ऐसे गहरे और सिलेंडर जैसे सुराख होते हैं, जिनके अंदर से मिसाइल निकलती है। आमतौर पर उसमें वह रखी रहती है। ये मिसाइल परमाणु हथियारों से लैस हो सकते हैं। पिछले साल जनवरी में और इस साल जनवरी में चीन के पास परमाणु हथियारों की संख्या 350 ही बताई गई है।</p>
<p><strong>चीन के पास है 350 परमाणु हथियार</strong><br /><br />ये बात सच है कि चीन के पास पिछले दो साल से परमाणु हथियारों की संख्या 350 ही बताई जा रही है लेकिन सिपरी के अनुसार पिछले साल चीन ने कई नए लॉन्चर्स फील्ड में उतारे हैं। यानी भले ही चीन के परमाणु हथियारों की संख्या कम बताई जा रही हो लेकिन वह भी अपने वॉरहेड्स की संख्या बढ़ाने में लगा हो सकता है।<br /><br /><strong>भारतीय मिसाइलों की रेंज में पूरा पाकिस्तान</strong><br /><br />भारत के पास कम दूरी की मिसाइल पृथ्वी है। इसकी मारक क्षमता 350 किमी है। अग्नि-1 रेंज 700 किमी, अग्नि-2 2000 किमी और अग्नि-3 की रेंज 3000 किमी है। ये सभी सेना में शामिल की जा चुकी हैं। अग्नि-5 की रेंज 5000 किलोमीटर है। यानी इन मिसाइलों की मदद से भारत पाक के सभी शहरों को निशाना बना सकता है। अगर भारत पाक पर परमाणु बम गिराता है तो इससे रावलपिंडी, लाहौर, इस्लामाबाद, नवशेरा और कराची शहर पूरी तरह बर्बाद हो सकते हैं। परमाणु हथियार भारत के पास भी हैं, लेकिन भारत की नीति है वह पहले परमाणु हथियार नहीं दागेगा। लेकिन पाकिस्तान में ऐसी कोई नीति या नियम नहीं बनाए गए हैं। <br /><br /><strong>पाकिस्तान की मिसाइलों की जद में आधा हिंदुस्तान</strong><br /><br />पाकिस्तान के पास कम दूरी की मिसाइलें-नस्त्र, हत्फ, गजनवी और अब्दाली हैं। इनकी मारक क्षमता 60 से 320 किमी है, जबकि मध्यम दूरी की मिसाइलें-गौरी और शाहीन की मारक क्षमता 900 से 2700 किमी है। अगर इन दोनों मिसाइलें से हमला होता है तो दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, भोपाल, नागपुर, लखनऊ इसकी जद में आ सकते हैं। अब तबाही कितनी होगी यह निर्भर करता है मिसाइल में लगे हथियार पर। पारंपरिक हथियार लगाने पर बबार्दी कम होगी, लेकिन परमाणु हथियार लगाया तो नुकसान बहुत ज्यादा हो सकता है। <br /><br /><strong>2021 से नहीं बढ़ी हथियारों की संख्या</strong></p>
<p>भारत के पास जनवरी 2021 में 156 परमाणु हथियार थे, जो जनवरी 2022 में बढ़कर 160 हो गया है। सिपरी के अनुसार पाकिस्तान में दोनों ही समयों पर 165 परमाणु हथियार थे। सिपरी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु हथियारों को बढ़ाने में लगे हैं। भारत अपने परमाणु हथियारों का खुलासा आधिकारिक तौर पर नहीं करता। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपनी मिसाइलों के परीक्षण की जानकारी तो देते हैं। लेकिन कभी भी उसमें लगने वाले हथियारों की ताकत, आकार या क्षमता के बारे में नहीं बताते।</p>
<p>दुनिया में 12,705 परमाणु हथियार मौजूद है। दुनिया में 9440 परमाणु हथियार जो अलग-अलग देशों की मिलिट्री के पास हैं, उनमें से 3730 मिसाइल्स और बमवर्षकों में तैनात हैं। बाकी के परमाणु हथियारों को रिटायर कर दिया गया है। उनको डिस्मैंटल करना बाकी है। इनमें से भारत और पाकिस्तान ने अपने एक भी परमाणु हथियार तैनात नहीं कर रखे हैं।</p>
<table style="height:465px;width:449.35px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:447.35px;" colspan="2">
<p> </p>
इन 9 देशों के पास हैं सबसे ज्यादा परमाणु हथियार</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">रूस   </td>
<td style="width:93.35px;">5977</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;"><br />अमेरिका   </td>
<td style="width:93.35px;">5428</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">चीन   </td>
<td style="width:93.35px;">350</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;"><br />फ्रांस </td>
<td style="width:93.35px;">290</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">यूके</td>
<td style="width:93.35px;">225</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">पाकिस्तान  </td>
<td style="width:93.35px;">165</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">भारत  </td>
<td style="width:93.35px;">160</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">इजरायल   </td>
<td style="width:93.35px;">90</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:354px;">उत्तरी कोरिया   </td>
<td style="width:93.35px;">20</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/-india----becoming---new-nuclear---power----world/article-12117</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 14:55:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्रदेश की बिजली व्यवस्था आज हो सकती है ठप, बिजली अभियंताओं का विद्युत भवन पर महापड़ाव शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली कंपनियों के कनिष्ठ अभियंताओ ने वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर सोमवार से विद्युत भवन परिसर में अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर दिया है। इसमें तीनों विद्युत वितरण कंपनी, विद्युत उत्पादन निगम और प्रसारण निगम के कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/today-the-power-system-of-the-state-may-come-to-a-standstill--the-power-engineers-started-a-big-halt-on-the-power-building/article-11996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ee2.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p>जयपुर।बिजली कंपनियों के कनिष्ठ अभियंताओ ने वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर सोमवार से विद्युत भवन परिसर में अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर दिया है। इसमें तीनों विद्युत वितरण कंपनी, विद्युत उत्पादन निगम और प्रसारण निगम के कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं।इससे प्रदेश में बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक प्रभावित होने की आशंका बन गई है। अभियंताओं की ऊर्जा विभाग और डिस्कॉम्स प्रबंधन से रविवार को वार्ता भी हुई, लेकिन किसी तरह का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ सका।<br /><br />इसके बाद पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान ने प्रदेशवासियों के नाम अपील जारी की। इसमें बताया गया कि उन्हें मजबूरन महापड़ाव करना पड़ रहा है। ऐसे में विद्युत उत्पादन और सप्लाई में व्यवधान होता है तो प्रबंधन जिम्मेदार होगा।बिजली कंपनियों में 5192 कनिष्ठ अभियंता हैं। एसोसिएशन ने दावा किया है कि महापड़ाव में अधिकतर कनिष्ठ अभियंता शामिल होंगे और जो जयपुर नहीं आ पाएंगे वे अपने कार्यस्थल पर ही कार्य बहिष्कार करेंगे। एसोसिएशन के पदाधिकारियो के अनुसार राजनीतिक दलों ने वेतन विसंगति दूर करने का वादा किया था। यहां तक कि तत्कालीन और मौजूदा मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री से भी आश्वासन मिला, लेकिन हुआ कुछ नहीं। ऐसे में मजबूरन आंदोलन करना पड़ रहा है। वही विभाग के आलाधिकारियों और मंत्री से आज भी एसोसिएशन के पदाधिकारियों की वार्ता हो सकती है।<br /><br /> </p>
<p></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 13:13:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्र का पुनरुत्थान जल शक्ति के लिए अभिसरण</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत अब तक 41,450 गांवों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की जा चुकी है और करीब 4 लाख गांवों में न्यूनतम अपशिष्ट पानी रुका हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/convergence-for-water-power/article-11864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/4-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत अब तक 41,450 गांवों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की जा चुकी है और करीब 4 लाख गांवों में न्यूनतम अपशिष्ट पानी रुका हुआ है। ओडीएफ प्लस योजना के तहत लगभग 22 हजार गांवों को आदर्श (मॉडल) गांव का नाम दिया गया है और अन्य 51,000 गांव इस प्रतिष्ठित तमगे को हासिल करने की राह पर हैं। हम सभी ने लकड़ियों के गट्ठर की कहानी सुनी होगी। उस कहानी का आधार यह है कि एक अकेली लकड़ी टूट सकती है, लेकिन जब कई लकड़ियों को एक साथ बांध कर रख दिया जाता है तो फिर उन्हें तोड़ना कठिन होता है उसी तरह जब विचारों, परियोजनाओं और योजनाओं का आपस में विलय होता है, तो चमत्कार होते हैं। प्रधानमंत्री इस विचार के ध्वज वाहक हैं। इस सरकार के लिए अभिसरण (कन्वर्जेन्स) की अवधारणा के महत्व को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि सरकार के पहले कार्यकाल के पहले बजट भाषण (2014) के दौरान स्वर्गीय अरुण जेटली ने अभिसरण (कन्वर्जेन्स) को सरकार के प्राथमिक संचालन सिद्धांतों में से एक के रूप में प्रस्तुत  किया था।  जल शक्ति मंत्रालय में हमने इस अवधारणा का परीक्षण किया है। इसका सबसे अच्छा प्रदर्शन इसका जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन है, जो एक साथ  मिलकर काम करते हैं और परस्पर एक दूसरे को सक्षम बनाते हैं।</p>
<p>हमारी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान खुले में शौच की समस्या को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता थी और इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया गया था। एक रिकॉर्ड सेटिंग के रूप में 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया था, लेकिन जो अब दिखता है वह एक दुस्वप्न भी हो सकता था, अगर इस सरकार के पास ट्विन पिट डिजाइन पर शौचालय बनाने की दूरदर्शिता नहीं होती, जिसमें मल एवं  कीचड़ का एक साथ उपचार होता है। दूसरे कार्यकाल में जल जीवन मिशन के माध्यम से घरेलू नल के पानी के कनेक्शन के मुद्दे को हल किया जा रहा है। अगस्त, 2019 में प्रधानमंत्री द्वारा इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की घोषणा के बाद से अब तक 50 प्रतिशत से अधिक यानी 9.6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल के पानी की आपूर्ति मिल रही है और विशेष रूप से 6.36 करोड़ से अधिक घरों में नल के पानी के कनेक्शन प्रदान किए गए है, लेकिन जल जीवन मिशन को अब एक वैसी ही समस्या  का सामना करना पड़ रहा है जैसी स्वच्छ भारत मिशन के सामने  मल कीचड़ प्रबंधनयानी अपशिष्ट जल गंदले (भूरे पानी) की निकासी  के सफल प्रबंधन के साथ आई थी। चूंकि सभी घरेलू घरों से अपशिष्ट रूप में बाहर जाने वाले पानी का 70 प्रतिशत गंदले  (ग्रे) पानी में बदल जाता है और जिसे अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, उसके तो अवांछनीय परिणाम होते है।</p>
<p>ऐसे यही वह जगह है, जहां सरकार ने अभिसरण की अवधारणा का उपयोग किया है। सरकार ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन,  जैविक रूप से विखण्डनीय (बायो डिग्रेडेबल) ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रेवाटर प्रबंधन और मल कीचड़ प्रबंधन पर ध्यान देने के साथ ही स्वच्छ भारत मिशन, चरण 2 शुरू किया। इस प्रकार, यह ध्यान देने योग्य है कि सरकार अपनी सोच में कैसे एकदम तैयार और नवीन होने में सक्षम रही है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए अभिनव प्रयोग था जब उसने ऐसे ट्विन पिट शौचालयों का उपयोग किया, जिन्हें घरेलू नल कनेक्शन और कम मात्रा के कीचड़ की आवश्यकता नहीं थी और जब इसे घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किया जाना था, तब इसने समग्र स्वच्छता प्राप्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के साथ अभिसरण कर लिया, जिससे यह  ग्रे वाटर प्रबंधन का उपचार एक महत्वपूर्ण घटक बन गया। स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत अब तक 41,450 गांवों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की जा चुकी है और करीब 4 लाख गांवों में न्यूनतम अपशिष्ट  पानी रुका हुआ है।</p>
<p>ओडीएफ  प्लस योजना के तहत लगभग 22 हजार गांवों को  आदर्श (मॉडल) गांव का नाम दिया गया है और अन्य 51,000 गांव इस प्रतिष्ठित तमगे को हासिल करने की राह पर हैं। कम समय में ही जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन दोनों ने उल्लेखनीय प्रगति का प्रदर्शन किया है, जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अभिसरण (कन्वर्जेन्स) से क्या हासिल किया जा सकता है। अभिसरण के अलावा हमारी सोच  का एक और हृदयस्पर्शी  पहलू पूर्णता की निरंतर खोज करना, सभी ढीले सिरों को समाहित करने, सेवा प्रदान करने में मौजूदा अंतराल को पाटने और हाशिए पर खड़े  अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए अडिग इच्छाशक्ति है। इसका एक उदाहरण यह है कि कैसे स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) चरण-2 में  एसबीएम चरण-1 से पहले की  समस्याओं से किस तरह  निपटा जा रहा है। एसबीएम की शुरुआत  से पहले लगभग 1,20,000 टन मल कीचड़ को अनुपचारित छोड़ दिया गया था, क्योंकि सभी शौचालयों में से दो-तिहाई मुख्य सीवर लाइनों से जुड़े ही नहीं थे। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में, भारत के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रदूषण का पैमाना चौंका देने वाला है। ये दोनों समस्याएं एसबीएम चरण-2 के एजेंडे में अब खुद को पाती हैं। कुछ ही समय में3.50 लाख गांव प्लास्टिक डंप मुक्त हो गए हैं और जिसमें लगभग 4.23 लाख गाँव अपने यहां न्यूनतम कूड़ा दिखा रहे हैं। इसी तरह इसके लिए  लगभग 178 मल कीचड़ उपचार संयंत्र और लगभग 90,000 किलोमीटर नालियों का निर्माण किया गया है।</p>
<p><strong>- गजेंद्र सिंह शेखावत</strong><br /><strong>केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/convergence-for-water-power/article-11864</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 11:12:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> फिर बिजली संकट</title>
                                    <description><![CDATA[आने वाले महीनों में कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार बिजली मंत्रालय का एक आंतरिक आंकलन दिखाता है कि सितंबर तिमाही में बिजली की कमी और बढ़ सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/power-crisis-again/article-11588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/electricity-d-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>आने वाले महीनों में कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार बिजली मंत्रालय का एक आंतरिक आंकलन दिखाता है कि सितंबर तिमाही में बिजली की कमी और बढ़ सकती है। बिजली मंत्रालय के आंकलन के अलावा स्वतंत्र जांच संगठन सीआरईए ने भी बिजली संकट गहराने की संभावना बताई है। यदि ऐसा होता है, तो देश में उत्पादन प्रभावित होगा। इस संगठन के मुताबिक जुलाई-अगस्त में एक बार फिर बिजली संकट गहरा सकता है। रिपोर्ट बताती है कि देश के ताप विद्युत संयंत्रों में प्री-मानसून कोयला स्टॉक में कमी के कारण ये स्थिति आ सकती है। इस समय खदान  निकास पावर स्टेशनों में कोयले का स्टॉक 13.5 मिलियन टन है और देश के सभी बिजली संयंत्रों में 20.7 मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक है। सीआरईए के आंकड़ों के मुताबिक कोयले से संचालित होने वाले बिजली संयंत्र बिजली की मांग में मामूली वृद्धि को भी झेलने की स्थिति में नहीं हैं। संगठन के मुताबिक, भारत का बिजली संकट कोयला प्रबंधन के कारण पैदा हुआ संकट है। अब संगठन की राय है कि बिजली संकट से बचने के लिए कोयले के परिवहन पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इसके परिवहन की कारगर योजना बनाने की जरूरत है।</p>
<p>कोयले का घरेलू उत्पादन बिजली की बढ़ती मांग के साथ तालमेल नहीं रख पा रहा है। खबरें हैं कि छोटे कारोबारी बिजली की सुनिश्चित उपलब्धता की कमी के कारण प्रभावित हैं। महामारी के कारण मची उथलपुथल से उबर रहा देश का उद्योग जगत अब बिजली की कमी नहीं झेल सकता। यदि बिजली की कमी लगातार बनी रही तो छोटे कारोबार ठप पड़ सकते हैं। उत्पादकों को कोयला आयात के लिए कहने के बाद बताया गया है कि अब सरकार ने यह तय किया है कि कोल इण्डिया भी विदेशों से कोयला खरीद कर बिजली उत्पादकों को देगी। अब यह देखना शेष है कि कोयले की उपलब्धता कितनी जल्दी सुधरती है, लेकिन इस क्षेत्र का संकट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति इस क्षेत्र के लिए ज्यादा चिंता का विषय है। ये कंपनियां अपना बकाया नहीं चुका पा रही हैं और यही कारण है कि केन्द्र सरकार को एक के बाद एक इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज जारी करना पड़ रहा है। लेकिन फिर भी कोई ठोस बदलाव नहीं हो रहा है। बिजली संकट के कई कारण हैं, लेकिन फिलहाल तो व्यवस्था में कारगर सुधारों की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 10:44:31 +0530</pubDate>
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