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                <title> hathi gav - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> hathi gav RSS Feed</description>
                
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                <title>विश्व पर्यटन दिवस आज : किले-महलों के साथ वाइल्डलाइफ भी अब पर्यटकों की पहली पसंद, हाथी गांव में हाथी की सवारी भी बेहद लोकप्रिय</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर अब केवल किले और महलों का शहर नहीं रहा, बल्कि वाइल्ड लाइफ और एडवेंचर टूरिज्म का भी उभरता हुआ केंद्र बन चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-tourism-day-today-with-fort-palaces-wildlife-is-also-now/article-128019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(5)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर अपने भव्य किले, महलों और संग्रहालयों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर साल लाखों पर्यटक यहां इतिहास और संस्कृति की झलक देखने आते हैं लेकिन अब जयपुर पर्यटन का दायरा और भी बढ़ रहा है। ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ पर्यटक अब वन्यजीवों के रोमांच को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं। झालाना, आमागढ़ और बीड़ पापड़ लेपर्ड सफारी से लेकर नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित लायन एवं टाइगर सफारी और आमेर महल की हाथी सवारी पर्यटकों को नया अनुभव प्रदान कर रही हैं।</p>
<p><strong>शहर के बीचों-बीच झालाना लेपर्ड सफारी </strong><br />झालाना लेपर्ड सफारी जयपुर शहर के बीचों-बीच स्थित है और यहां पर्यटक विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को करीब से देख पाते हैं। खास बात यह है कि यहां के लेपर्ड्स को नाम दिए गए हैं। मेल लेपर्ड्स को राणा, बहादुर, तो मादा लेपर्ड्स को फ्लोरा, चंदा जैसे नाम से जाना जाता है। इनमें से लेपर्ड राणा सबसे बोल्ड साइटिंग के लिए प्रसिद्ध है।</p>
<p><strong>आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व का मनमोहक दृश्य</strong><br />गलता के पास स्थित आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व पर्यटकों को पहाड़ियों और जलमहल के अद्भुत नजारे दिखाता है। हाल की बारिश के बाद यहां की हरियाली और भी आकर्षक हो गई है। लेपर्ड्स, हायना, नीलगाय, सियार और सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षी यहां पर्यटकों का दिल जीतते हैं।</p>
<p><strong>बीड़ पापड़ सफारी का डेजर्ट और पहाड़ी रोमांच</strong><br />विद्याधर नगर में बीड़ पापड़ लेपर्ड सफारी का शुभारंभ इसी वर्ष जून में हुआ। यहां सफारी ट्रैक डेजर्ट और पहाड़ी दोनों से होकर गुजरता है। सफारी के एग्जीट रूट की ओर बढ़ने पर बारिश के समय बहता झरना पर्यटकों का मन मोह लेता है। लेकिन गाड़ी से उतरकर इस ओर जाने की मनाही है। लेकिन इस बीच कमी ये है कि यहां झालाना और आमागढ़ की तरह ऑनलाइन बुकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। अगर यहां भी ये पर्यटकों को ये सुविधा मिले तो सैलानियों की संख्या में इजाफा हो सकता है। </p>
<p><strong>हाथी की सवारी का अनूठा अनुभव</strong><br />आमेर महल और हाथी गांव में हाथी की सवारी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। खासकर विदेशी पर्यटक जलेब चौक तक हाथी पर बैठकर महल की भव्यता का आनंद उठाते हैं। वहीं दूसरी ओर दिल्ली रोड स्थित हाथी गांव भी रोमांचक अनुभव प्रदान करता है।</p>
<p>जयपुर अब केवल किले और महलों का शहर नहीं रहा, बल्कि वाइल्ड लाइफ और एडवेंचर टूरिज्म का भी उभरता हुआ केंद्र बन चुका है। यहां की लेपर्ड, टाइगर और लायन सफारी तथा हाथी की सवारी पर्यटकों को इतिहास और प्रकृति दोनों का रोमांचक संगम प्रदान करती हैं।<br />संजय कौशिक, पर्यटन विशेषज्ञ  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 11:16:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>हाथी मालिकों ने कहा- उनके काम नहीं आ रहा हाथी कल्याण कोष का पैसा, 3 साल से न हाथियों को झूलें मिले और न महावतों को पोशाक</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने झूलों से चला रहें काम, कई हाथी मालिकों ने अपने स्तर पर की इनकी व्यवस्था, हाथी गांव में रह रहे 70 से अधिक हाथी और इतने ही महावत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/elephant-owners-said-their-work-is-not-coming-the-money/article-112246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(1)40.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के दिल्ली रोड स्थित हाथीगांव में हर साल हजारों पर्यटक हाथी सवारी का लुत्फ उठाते हैं। आमेर महल के बाद जयपुर में पर्यटक को सुविधाएं मिलती हैं। इस बीच हाथी मालिकों और महावतों की एक समस्या सामने आई। उनका कहना है कि वन विभाग की ओर से हर साल हाथी कल्याण कोष के जरिए हाथियों के लिए नए झूले और महावतों को नई पोशाक दी जाती है, लेकिन पिछले तीन साल से ये चीजें हमें नहीं मिली हैं। साल 2022 से साल 2024 तक इन्हें हर साल पत्र लिखकर निवेदन किया जाता है, परंतु अधिकारियों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। पुरानी झूलों से ही काम चलाया जा रहा है। वहीं कुछ हाथीमालिकों ने अपने पैसों से इनकी व्यवस्था की है। </p>
<p><strong>ये चीजें दी जाती हैं</strong><br />वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हाथीगांव में 70 से अधिक हाथी हैं। वहीं महावतों की संख्या भी लगभग इतनी ही है। हर साल हाथी कल्याण कोष की ओर से नववर्ष पर हाथियों के लिए झूले और महावतों को पोशाक के रूप में साफा, कोट, पायजामा, चादर सहित अन्य चीजें दी जाती हैं। जो पिछले तीन साल से इन्हें नहीं दी गई हैं। हाथी मालिकों का कहना है कि हर बार अधिकारियों से मिलने और पत्र लिखकर मांग करने पर हमें केवल आश्वासन ही मिलता है।</p>
<p><strong>इनका कहना...</strong><br />एलिफेंट वेलफेयर फंड के लिए ही पैसा एकत्रित किया जाता है। लेकिन वही पैसा हमारे काम नहीं आ रहा है। पिछले तीन सालों से वन विभाग के अधिकारियों को हाथियों की झूलें, हाथी महावतों की पोशाक हाथी कल्याण कोष की ओर से दिए जाने के लिए पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया गया है। <br />-अब्दुल अजीज, अध्यक्ष, <br />हाथी मालिक विकास समिति</p>
<p>हाथी मालिकों से बातचीत के दौरान ये बात भी सामने आई थी। उच्च अधिकारियों से स्वीकृति मिलने के बाद जल्द आगे की कार्यवाही की जाएगी। <br />-प्राची चौधरी, प्रावैधिक सहायक एवं सहायक वन संरक्षक, चिड़ियाघर जयपुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 09:27:31 +0530</pubDate>
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