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                <title>crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आरपी सिंह का निशाना: पंजाब को खोखले दावों की जरूरत नहीं, बोले-सरकार ने राज्य के युवाओं को पूरी तरह से ड्रग माफिया के हवाले कर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने पंजाब की मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खोखले दावों के बीच ड्रग माफिया बेखौफ हैं, जिससे तंग आकर कोटकपुरा में लोग पलायन को मजबूर हैं। जेलों से लाइव ड्रग्स सेवन के वीडियो तंत्र की 'अभूतपूर्व विफलता' को उजागर करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rp-singhs-target-is-that-punjab-does-not-need-empty/article-156998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने नशीले पदार्थों के मुद्दे पर पंजाब की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य को खोखले दावों, कॉमेडी-शो जैसे कार्यक्रमों से ध्यान भटकाने वाले कामों या दिखावटी फोटो-ऑप्स की ज़रूरत नहीं है, बल्कि ऐसी सरकार की जरूरत है जो सचमुच शासन करे। सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के खोखले वादे पंजाब की भयानक ज़मीनी हकीकत के बोझ से आधिकारिक तौर पर ढह गये हैं। जो प्रशासन कुछ ही महीनों में ड्रग्स की समस्या को खत्म करने के बड़े-बड़े और नाटकीय दावों के दम पर सत्ता में आया था, उसने शासन चलाने में ‘अभूतपूर्व विफलता’ दिखाई है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस शासन के तहत आम नागरिकों की बेबसी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोटकपुरा की राम बस्ती में कानून का पालन करने वाले आम परिवारों को अपनी दीवारों पर ‘घर बिक्री के लिए है’ के पोस्टर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। भाजपा नेता ने कहा कि यह आर्थिक कारणों से किया गया पलायन नहीं है। यह जीवित रहने के लिए की गयी एक हताश कोशिश है। भगवंत मान के शासन कार्यकाल में खुलेआम ड्रग्स की तस्करी इतनी बढ़ गयी है कि माता-पिता अपने बच्चों को ‘चिट्टा’ की सर्वव्यापी पकड़ से बचाने के लिए अपने पुश्तैनी घर आधी कीमत पर बेचने को तैयार हैं। इन परिवारों की रक्षा करने के बजाय प्रशासन का तंत्र जनसम्पर्क (पीआर) इकाई की तरह काम करता है। स्थानीय पुलिस इस त्रासदी को महज ‘निजी विवाद’ बताकर कमतर दिखाने की कोशिश करती है ताकि सरकार को राजनीतिक शर्मिंदगी से बचाया जा सके।</p>
<p>आरपी सिंह ने कहा कि यह नशा सड़कों से लेकर राज्य के सबसे सुरक्षित इलाकों तक फैली हुई है। होशियारपुर केंद्रीय कारागार का एक कैदी जेल के अंदर से लाइव वीडियो ब्रॉडकास्ट करने में कामयाब रहा, जिसमें उसने खुलेआम ‘आईसीई’ (मेथामफेटामाइन) जैसे सिंथेटिक नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए दिखया और आरोप लगाया कि जेल अधिकारी खुद ही आपूर्ति श्रृंखला चेन चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय कार्टेल और स्थानीय तस्कर सरकारी जेलों के अंदर से आसानी से अपने काम को स्ट्रीम कर सकते हैं, तो स्पष्ट है कि राज्य सरकार बहुत प्रचारित ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान महज एक बेअसर मीडिया स्टंट है।</p>
<p>भाजपा नेता ने कहा कि आप सरकार ने संरचनात्मक क्रांति का वादा किया था लेकिन उसने केवल एक दुखद स्थिति दी है जहाँ ड्रग माफिया बिना किसी डर के काम करते हैं जबकि आम नागरिक डर के साये में जीते हैं। फरीदकोट की सड़कों के कोनों से लेकर होशियारपुर के उच्च सुरक्षा वाले बैरकों तक मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व वाले राज्य तंत्र ने राज्य के युवाओं को पूरी तरह से ड्रग माफिया के हवाले कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:07:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टीएमसी को बड़ा झटका: अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा, उच्च सदन में तृणमूल के बचे सिर्फ 9 सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस में जारी उथल-पुथल के बीच प्रसिद्ध अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक के बाद यह चौथा बड़ा इस्तीफा है। इस सियासी संकट से उच्च सदन में टीएमसी की संख्या घटकर महज 9 रह गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-blow-to-tmc-actress-koel-mallik-resigns-from-rajya/article-156704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/koel-mullick.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक अनिश्चितता और उथल-पुथल के बीच मशहूर अभिनेत्री और नेता कोयल मल्लिक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मल्लिक के इस कदम से पहले राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय और सुस्मिता देव भी उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, आज ही सुबह एक और टीएमसी सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपा था। बड़ाइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी की सदस्य संख्या घटकर 10 रह गई थी, जो दोपहर बाद कोयल मल्लिक के इस्तीफे के साथ ही अब गिरकर महज 9 पर आ गई है।</p>
<p>बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक को टीएमसी नेतृत्व द्वारा विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। इसे पार्टी की एक बड़ी रणनीतिक चाल के रूप में देखा गया था। सांसद बनने के बाद कोयल अपने पिता व दिग्गज अभिनेता रंजित मल्लिक और परिवार के साथ नई दिल्ली में नए संसद भवन भी गई थीं और उन्होंने कई मौकों पर पार्टी के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी चौतरफा राजनीतिक चुनौतियों और लगातार लग रहे झटकों का सामना कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अभिनेत्री पिछले कुछ समय से चल रहे राजनीतिक विवादों से खुद को दूर रखना चाहती थीं और उन्होंने इस बढ़ती सियासी हलचल में उलझने के बजाय गरिमापूर्ण तरीके से पद छोड़ना बेहतर समझा। विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष के सुर उभरने लगे थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस्तीफों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला है और आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इसी राह पर चल सकते हैं। </p>
<p>हालांकि, पार्टी ने अभी तक इन सामूहिक इस्तीफों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पद छोड़ने वाले अधिकांश नेताओं ने भी अभी तक अपने भविष्य के राजनीतिक पत्तों को नहीं खोला है। सांसद पद की शपथ लेते समय देश सेवा का संकल्प दोहराने वाली कोयल मल्लिक का महज कुछ महीनों के भीतर ही इस्तीफा दे देना, राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी के घटते प्रभाव और पार्टी के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक संकट की ओर साफ इशारा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:18:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ग्राउंड रिपोर्ट: क्या हादसाें के बाद ही जागने की रीत कभी तोड़ी जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[ बिना जांच 'अवैध टैंकरों' से सप्लाई हो रहा हजारों लीटर पानी,नई कॉलोनियों में मंडराया संकट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ground-report--will-the-pattern-of-waking-up-only-after-a-tragedy-occurs-ever-be-broken/article-156433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्तर पर संकट से निपटने के लिए कोटा शहर में 12 हाइड्रेंट/बोरिंग पॉइंट्स अनुबंधित (पूरी तरह टेस्टेड) किए गए हैं। इसी तरह रामगंजमंडी में 16 कुएं और सांगोद में 3 से 4 ट्यूबवेल रिजर्व रखे गए हैं, जहां से पूरी तरह जांचा हुआ पानी ही टैंकरों में भरा जाता है।<br />शिक्षा नगरी कोटा में भीषण गर्मी के बीच एक बड़ा जल-संकट और छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की कोटा लैब सरकारी स्तर पर लक्ष्य से आगे बढ़कर पानी की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के पॉश और घने कोचिंग इलाकों सहित बाहरी कॉलोनियों में अवैध और बिना जांचे पानी के टैंकरों का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। रोजाना हजारों छात्र और स्थानीय नागरिक इस अनियंत्रित पानी को पीने और इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे किसी बड़ी महामारी के फैलने का अंदेशा पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>जवाहर नगर हादसे' की याद हुई ताजा</strong><br />शहर में पानी की मॉनिटरिंग को लेकर बरती जा रही यह लापरवाही सीधे तौर पर मासूमों की जान से खिलवाड़ है। विज्ञान नगर इलाके में दुषित पानी की सप्लाई के बाद वर्तमान स्थिति को देखकर कुछ साल पहले जवाहर नगर क्षेत्र में एक साथ फैली उस महामारी की याद ताजा हो जाती है, जब दूषित पानी की समस्या के चलते 70 से अधिक कोचिंग छात्रों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा था।<br /><strong>-मनू सोलंकी निवासी जवाहर नगर</strong></p>
<p><strong>निजी वाटर सप्लाई पर नहीं है कोई निगरानी</strong><br />उस बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। आज भी स्थिति यह है कि केवल कच्ची बस्तियां ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कोचिंग इलाकों और हॉस्टल्स में भी पानी की मॉनिटरिंग या उसकी नियमित जांच करवाने की कोई कानूनी बाध्यता तय नहीं की गई है। आखिर पानी जैसी बेहद बुनियादी लेकिन सबसे जरूरी चीज के लिए कोटा में एक 'प्रोपर और जिम्मेदार' सिस्टम आज तक क्यों नहीं बन पाया?<br /><strong>-सीता प्रजापित निवासी कोरल पार्क</strong></p>
<p><strong>बिना जांच सीधे पेट तक पहुंच रहा पानी</strong><br />आवासीय और कोचिंग जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में बिना किसी केमिकल या बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट के पानी की लगातार सप्लाई हो रही है, लेकिन इन टैंकरों पर विभाग की कोई मॉनिटरिंग नहीं है। यह पानी बस्ती वासियों के रोजमर्रा के काम से लेकर उनके पेट तक पहुंच रहा है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि न तो चिकित्सा विभाग (CMHO) के पास और न ही जलदाय विभाग के पास इन हॉस्टल्स और निजी स्रोतों की पूरी स्क्रीनिंग का कोई डेटा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>हॉस्टल्स और घनी आबादी 'टैंकर माफिया' के भरोसे</strong><br />जिन क्षेत्रों में जलदाय विभाग की सीधी पाइपलाइन नहीं है, वहां निजी स्रोतों के नाम पर टैंकर माफियाओं का राज चल रहा है। शहर के सबसे संवेदनशील और वीआईपी माने जाने वाले कोचिंग हब इस समय पूरी तरह निजी टैंकरों के जाल में हैं। कोरल पार्क और लैंडमार्क सिटी जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले हॉस्टल क्षेत्रों में हजारों कोचिंग छात्र रह रहे हैं। यहां रोजाना बिना किसी शुद्धता जांच के धड़ल्ले से टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है।</p>
<p><strong>आवासीय बस्तियों व निजी कॉलोनियों मेेें बडा खेल</strong><br />नयागांव, आंवली, रोजड़ी, नांता के करणी नगर,बरड़ा, अनन्तपुरा के भीतरी इलाके,क्रेशर बस्ती, बृज धाम, मान सरोवर, प्रताप नगर पुनम कॉलोनी, श्री विहार, रायपुर की कॉलोनियां, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, बूंदी रोड और बालिता की कॉलोनियां पूरी तरह इन निजी टैंकरों के भरोसे चल रही हैं। यहां निजी काॅलोनियां ताे विकसीत हो गयी लेकिन पानी जैसी बुनियादि जरूरत के लिये या तो घर के भीतर बने बोरिंग या फिर महंगे बोरिग सप्लाई के साथ टेन्करों की सप्लाई पर निर्भर है। यही नही इनके बदले पानी के इन सौदागरों की मोटी कमाई भी बडी है।</p>
<p><strong>पीएचईडी लाचार, गेंद सीएमएचओ के पाले में</strong><br />पीएचईडी के सीनियर केमिस्ट तरुण कुमार जैन ने बताया कि विभाग निजी स्रोतों और टैंकरों के पानी की जांच के लिए मात्र 297:रूपये की नॉमिनल फीस लेता है, जिसमें 48 घंटे में बैक्टीरियोलॉजिकल और केमिकल टेस्ट की रिपोर्ट आ जाती है। लेकिन सबसे बड़ा पेंच नियमों का है PHED लैब के पास प्राइवेट ट्यूबवेल या अवैध रूप से चल रहे टैंकर्स पर सीधे कानूनी कार्रवाई या जब्ती का अधिकार नहीं है। यदि पानी दूषित भी पाया जाता है, तो उस पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार केवल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के पास होता है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी का फायदा टैंकर संचालक उठा रहे हैं।</p>
<p><strong>हर 6 महीने में जांच है जरूरी</strong><br />जलदाय विभाग के जानकारों के अनुसार, आमतौर पर लोग एक बार पानी की जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए हर 6 महीने में दोबारा जांच करवानी चाहिए। विशेषकर प्री-मानसून (बारिश से पहले) और पोस्ट-मानसून (बारिश के बाद) जांच अनिवार्य है, क्योंकि बारिश के दिनों में भूजल में खतरनाक बैक्टीरिया पनपने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।</p>
<p><strong>यह है कोटा में पानी की कहानी</strong><br />कोटा शहर में चंबल नदी से पानी लिफ्ट कर सकतपुर (130 व 70 MLD), अकेलगढ़ (64 MLD की 3 और 75 MLD की 1 यूनिट) तथा श्रीनाथपुरम (50 MLD) प्लांट्स से शुद्ध पानी सप्लाई किया जा रहा है। हमारे पास पानी की पयार्प्त व्यवस्था है। जहां कमी हो वहां टैंकर भेजते हैं।<br /><strong>-दीपक झा, अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पीएचईडी</strong></p>
<p>यदि आपके क्षेत्र में नल से बदबूदार या गंदा पानी आ रहा है, तो बीमारी फैलने का इंतजार न करे। तुरंत संबंधित अधिकारीयों को सूचित करें। निजी स्रोतों का उपयोग करने वाले नागरिक बीमारी को न्योता न दें और नजदीकी पीएचईडी लैब में अपने पानी के सैंपल की जांच अवश्य करवाएं।<br /><strong>-तरूण कुमार जैन ,सीनीयर केमिस्ट पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:14:20 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का तीखा प्रहार, बोले- केंद्र सरकार में शिक्षा व्यवस्था हुई बर्बाद, आकांक्षा की मौत इसी विफलता का परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने छात्रा आकांक्षा की मृत्यु पर गहरा दुख जताते हुए इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि लगातार लीक होते पेपरों और प्रशासनिक विफलता का नतीजा बताया। राहुल ने कहा कि इस टूटी व्यवस्था की कीमत पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-sharp-attack-said-the-education-system-in/article-155967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नीट परीक्षा गड़बड़ी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाली आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था का परिणाम है। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। उसके पिता किसान हैं, जिन्होंने बेटी के सपने को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख रुपये का कर्ज लिया और नागपुर में रसोइए की नौकरी की, ताकि वह कोचिंग कर सके।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि एक पिता ने अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया, लेकिन नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद पैदा हुई अनिश्चितता के बीच आकांक्षा हमें छोड़कर चली गई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह केवल एक छात्रा की त्रासदी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री अब भी पद पर बने हुए हैं और सरकार की ओर से केवल समितियां गठित करने, अधिकारियों के तबादले करने तथा जांच की घोषणा करने तक ही कार्रवाई सीमित है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस स्थिति में पहुंचाया गया है, उसकी कीमत देश की पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले परीक्षा विवादों, पेपर लीक और प्रशासनिक अव्यवस्था ने छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।</p>
<p><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:51:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इज़रायली बमबारी से गाजा बना कब्रिस्तान: 72 हजार से ज्यादा लोगों की मौत, नहीं थम रहा मासूमों की मौत का सिलसिला</title>
                                    <description><![CDATA[गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक 72,938 फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है और 1,72,919 लोग घायल हुए हैं। हमास के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल ने हमले जारी रखे हैं, जिससे पिछले 48 घंटों में ही कई नागरिक हताहत हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gaza-became-a-graveyard-due-to-israeli-bombing-more-than/article-155731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/gaza.png" alt=""></a><br /><p>गाजा। फ़िलिस्तीन के गाजा पट्टी क्षेत्र पर इजरायल के हमले निरंतर जारी है और इन हमलों से गाजा में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 72,938 पहुंच गयी है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि पिछले 48 घंटों के दौरान सात शवों और 25 घायलों को गाजा के अस्पतालों में लाया गया है। मंत्रालय के अनुसार पिछले साल 11 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक गाजा में 929 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,811 अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा मलबे के नीचे से 781 शवों को भी निकाला गया है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सात अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में मृतकों की कुल संख्या 72,938 और घायलों की संख्या 172,919 तक पहुंच गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से सात अक्टूबर 2023 को गाजा पट्टी के निवासियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। हालांकि, वह हमास आंदोलन को समाप्त करने और इजरायल के बंदियों की वापसी सुनिश्चित करने के अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा और अंततः हमास के साथ युद्धविराम पर सहमत होना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल ने इसके कुछ प्रावधानों को लागू करने से इनकार किया है और गाजा पट्टी पर अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन पर रूस का बड़ा हवाई हमला : 13 लोगों की मौत, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने लगाई अमेरिका से मदद की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने यूक्रेन पर 73 मिसाइलें और 656 ड्रोन दागकर भीषण हमला किया है, जिसमें कीव और निप्रो में 13 नागरिकों की मौत हो गई। राजधानी में बिजली गुल है और इमारतें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिका से तत्काल पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russias-major-air-attack-on-ukraine-kills-13-president-zelensky/article-155739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ukraine-1.png" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन पर रूस के मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी है। इनमें से नौ लोग निप्रो में और चार राजधानी कीव में मारे गये। यह हाल के महीनों में मॉस्को की ओर से किये गये सबसे बड़े हमलों में से एक है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रात भर हुए इन हवाई हमलों में आवासीय इमारतें मलबे में तब्दील हो गयीं, जिसमें कई बच्चों सहित दर्जनों लोग घायल हुए हैं। आपातकालीन दल कीव में मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तेजी से काम कर रहा है। मंगलवार तड़के यूक्रेन के अधिकतर हिस्सों में हवाई हमले के अलर्ट जारी कर दिये गये थे।</p>
<p>मंगलवार को राजधानी कीव के केंद्र से धुएं के बड़े गुबार उठते देखे गये, जहां सैन्य प्रशासन प्रमुख ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की चेतावनी दी। वहीं, कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने निवासियों से शेल्टरों में ही रहने का आग्रह किया। सुबह-सुबह हुए इन हमलों के दौरान एक के बाद एक दर्जन से अधिक तेज विस्फोटों की आवाजों के बीच ड्रोनों की गूंज सुनी जा सकती थी। मेयर क्लिट्स्को ने बताया कि इस हमले के कारण एक पेट्रोल पंप, एक निर्माण स्थल, कई अपार्टमेंट ब्लॉकों और दो घरों के पास आग लग गयी। पूरे शहर में बिजली गुल होने की भी रिपोर्टें हैं।</p>
<p>रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस कार्रवाई को यूक्रेन के पिछले हमलों का जवाब बताते हुए एक बयान में कहा कि इस 'हमले के सभी उद्देश्य' पूरे कर लिये गये हैं। पिछले हफ्ते पूर्वी यूक्रेन के कब्जे वाले हिस्से में एक छात्र छात्रावास पर हुए घातक हमले के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराते हुए रूस ने 'व्यवस्थित हमला' शुरू करने की चेतावनी दी थी। वहीं, यूक्रेन का कहना था कि उसने रूस की एक सैन्य इकाई को निशाना बनाया था।</p>
<p>यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोमवार रात अपने वीडियो संबोधन में ही एक 'बड़े हमले' की आशंका जताते हुए निवासियों से हवाई हमले के अलर्ट पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया था। मंगलवार सुबह जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने रात भर चले इस हमले में 656 स्ट्राइक ड्रोन और बैलिस्टिक, क्रूज व एंटी-शिप सहित विभिन्न प्रकार की 73 मिसाइलें दागी हैं। रूसी मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंटरसेप्शन हार्डवेयर का जिक्र करते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, "हमें पैट्रियट सिस्टम के लिए मिसाइलों की आपूर्ति के लिए अमेरिका से तत्काल मदद की आवश्यकता है।"</p>
<p>अमेरिका-इजराइल के ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण पैट्रियट मिसाइलों की भारी कमी हो गयी है। पिछले साल सत्ता में आने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप ने भी यूक्रेन को सीधी आपूर्ति रोक दी है, जिसके चलते यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगी देश अब अमेरिका से इन्हें खरीदकर यूक्रेन भेज रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:24 +0530</pubDate>
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                <title>जल संकट के खिलाफ कांग्रेस का जल सत्याग्रह मार्च, खाली मटकी लेकर सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में बढ़ते जल संकट और टैंकर माफिया के खिलाफ कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठ ने 'जल सत्याग्रह मार्च' निकाला। प्रदेश अध्यक्ष योगिता शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सिर पर खाली मटके रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने रामगढ़ बांध से अतिक्रमण हटाने और पेयजल समस्या का स्थाई समाधान करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congresss-water-satyagraha-march-against-water-crisis-workers-took-to/article-155596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी में जल संकट और टैंकर माफिया के मुद्दे के खिलाफ  रविवार को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के तत्वावधान में जल सत्याग्रह मार्च निकाला गया। प्रदेश अध्यक्ष योगिता शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने गांधी सर्किल से अल्बर्ट हॉल तक सिर पर खाली मटकी रखकर पैदल मार्च किया। शर्मा ने कहा कि नल सूखे हैं, सरकार मौन है और टैंकर माफिया 500 रुपए का पानी 1500 रुपए में बेच रहा है। सरकार सिर्फ  घोषणाएं करती है, लेकिन स्थाई समाधान पर मौन है। जयपुर की जीवनरेखा रहे रामगढ़ बांध, कूकस बांध और मावठा बांध आज अतिक्रमण और अवैध खनन की भेंट चढ़ गए हैं।</p>
<p>यदि इन बांधों के कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाकर पुनर्जीवन किया जाए तो रामगढ़ बांध में पर्याप्त जल भराव संभव है और पूरे जयपुर शहर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। शर्मा ने कहा कि जल संकट का समाधान नहीं होने पर सात दिन हम इंतजार करेंगे और उसके बाद आगामी रणनीति बनाएंगे। इस अवसर पर कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण सूद, महासचिव गौरी शंकर, प्रदेश सचिव मोनू शर्मा, श्रेयांश जोशी, नितिन बगरीया, दीपक धीर, कैलाश मीणा आदि मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 11:46:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईंधन संकट का असर: जयपुर से 7 उड़ानें बंद, मुंबई-दिल्ली रूट सबसे ज्यादा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक ईंधन संकट के चलते एयरलाइंस कंपनियों ने जयपुर एयरपोर्ट से सात नियमित उड़ानें बंद कर दी हैं। इसमें मुंबई-नवी मुंबई की चार, दिल्ली की दो और बेंगलुरु की एक फ्लाइट शामिल है। उड़ानों में इस कटौती से यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है और हवाई किराया महंगा होने के आसार हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/impact-of-fuel-crisis-7-flights-closed-from-jaipur-mumbai-delhi/article-155581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/airport-jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वैश्विक स्तर पर उभर रहे ईंधन संकट का असर अब देश के विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। एयरलाइंस कंपनियों ने परिचालन लागत बढ़ने और ईंधन उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों के चलते कई उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है। इसका प्रभाव जयपुर एयरपोर्ट पर भी पड़ा है, जहां आज से सात नियमित उड़ानों का संचालन बंद किया जा रहा है। सबसे अधिक असर मुंबई रूट पर देखने को मिलेगा। जयपुर से मुंबई और नवी मुंबई के लिए संचालित होने वाली चार उड़ानें बंद रहेंगी। इनमें सुबह 6 बजे की एयर इंडिया फ्लाइट, दोपहर 1:40 बजे की स्पाइसजेट फ्लाइट, दोपहर 3:55 बजे की इंडिगो की नवी मुंबई फ्लाइट तथा शाम 7:40 बजे की एयर इंडिया की मुंबई फ्लाइट शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली के लिए संचालित एयर इंडिया की दो उड़ानें भी प्रभावित होंगी। </p>
<p>दोपहर 1:40 बजे और शाम 5:10 बजे दिल्ली जाने वाली उड़ानों का संचालन बंद रहेगा। वहीं रात 10:55 बजे जयपुर से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की सेवा भी स्थगित कर दी गई है। हवाई यात्रा पर बढ़ते दबाव के बीच इन उड़ानों के बंद होने से यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन संकट की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले दिनों में अन्य रूटों पर भी उड़ानों में कटौती की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 10:25:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरकार अपनी कमी पहचान, बिजली संकट से राहत दिलाए: जूली</title>
                                    <description><![CDATA[नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने ऊर्जा मंत्री की कॉलोनी में बिजली ट्रिपिंग की खबरों पर भाजपा को घेरा है। जूली ने कहा कि जब मंत्री खुद संकट झेल रहे हैं, तो पूरे प्रदेश और ग्रामीण इलाकों के बुरे हाल का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सरकार से कमियां सुधारने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-should-recognize-its-shortcomings-and-provide-relief-from-electricity/article-155562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tikaram-jullyy.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: ऊर्जा मंत्री की कॉलोनी में बिजली ट्रिपिंग मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार अपनी कमी स्वीकार करते हुए प्रदेशवासियों को बिजली संकट से राहत दे। जूली ने मीडिया में छपी खबरों के आधार पर कहा है कि अब तो ऊर्जा मंत्री ने भी मान लिया है कि उनकी कॉलोनी की लाइट बार-बार ट्रिप हो रही है। मैंने यह बात विधानसभा में भी उठाई थी, लेकिन उस समय ऊर्जा मंत्री ने इसे स्वीकार नहीं किया। प्रदेश में बिजली की भयंकर समस्या है, विशेष रूप से गांवों में बिजली बार-बार ट्रिप हो रही है।</p>
<p>इतना ही नहीं, विधानसभा की लाइट तक चली गई थी। एसएमएस अस्पताल सहित बड़े-बड़े अस्पतालों में भी बिजली गुल हो जाती है। खैर, अब मंत्री ने स्वयं स्वीकार कर लिया है कि उनकी कॉलोनी की बिजली भी बार-बार जा रही है। ऊर्जा मंत्री  आपकी कॉलोनी की समस्या तो आपको दिखाई दे रही है, लेकिन पूरे प्रदेश के लोग लगातार बिजली ट्रिपिंग से परेशान हैं, उस ओर मंत्री का ध्यान ही नहीं है। आप अपनी कमियों को पहचानिए और प्रदेशवासियों को बिजली की समस्या से जल्द से जल्द राहत दिलाइए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 17:32:59 +0530</pubDate>
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                <title>संयुक्त राष्ट्र की खौफनाक रिपोर्ट: 2025 में युद्ध क्षेत्रों में यौन हिंसा के मामले दोगुने से अधिक बढ़े, 10,000 मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया के संघर्षग्रस्त देशों में यौन हिंसा के 9,788 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल से दोगुने से भी अधिक हैं। विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पट्टन ने बताया कि अफ्रीका, यूरोप और मध्य पूर्व में दुष्कर्म और यौन दासता को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-related-sexual-violence-cases-to-more-than-double-by/article-155503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/un.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि 2025 में दुनिया में संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के लगभग 10,000 मामले दर्ज किए गए जो 2024 के आंकड़े से दोगुने से भी अधिक हैं जिसमें दुष्कर्म, यौन दासता और अपहरण को अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप और कैरेबियाई देशों में युद्ध हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया गया। संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट शुक्रवार को जारी करते हुए, विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पट्टन ने कहा कि ये आंकड़े एक गंभीर वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं जिसमें बढ़ती असुरक्षा, विस्थापन एवं पीड़ितों के लिए घटते संसाधन सभी इस संकट को बढ़ावा दे रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, "2025 में युद्ध, यातना, आतंकवाद और राजनीतिक दमन की रणनीति के रूप में यौन हिंसा के मामलों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं एवं लड़कियों को निशाना बनाया गया।" रिपोर्ट में 2025 के दौरान संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के 9,788 मामलों की पुष्टि की गई हालांकि प्रमिला ने इस बात पर बल दिया कि यह आंकड़ा क्रूर वास्तविकता को नहीं दर्शाता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट में 21 संघर्षग्रस्त देशों में राज्य और गैर-राज्य दोनों ही पक्षों द्वारा किए गए बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, तस्करी एवं अपहरण के मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं एवं लड़कियों को ही मुख्य रूप से निशाना बनाया गया, हालांकि पुरुषों एवं लड़कों को भी यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा, अक्सर हिरासत में एवं यातना के रूप में। तीसरे जैंडर को भी लक्षित उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार का जोखिम झेलना पड़ा। पीड़ितों की उम्र एक से 70 वर्ष के बीच थी जिसमें दिव्यांगजनों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।</p>
<p>प्रमिला ने कहा कि हिंसा के साथ अत्यधिक शारीरिक दुर्व्यवहार भी होता था, जिसमें बलात्कार के बाद हत्याएं और पीड़ितों द्वारा की गई आत्महत्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह रिपोर्ट मूल रूप से युद्ध की छाया में रहने वाले इन सभी बचे हुए लोगों एवं समुदायों की मानवीय पीड़ा से संबंधित है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:16:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अफगानिस्तान में भयावह हादसा: शरणार्थियों से भरा ट्रक पलटने से 18 लोगों की मौत, 30 अन्य घायल</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान के लघमान प्रांत में शनिवार सुबह अफगान शरणार्थियों को ले जा रहा एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 30 अन्य घायल हो गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/horrific-accident-in-afghanistan-18-people-died-and-30-others/article-155488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/afghanistan.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान के लघमान प्रांत के सोरखाकन इलाके में अफगान शरणार्थियों को ले जा रहा एक ट्रक शनिवार सुबह पलट गया जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से दी। टोलो न्यूज ने कहा कि घायलों को इलाज के लिए नांगरहार प्रांतीय अस्पताल ले जाया गया जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 15:05:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाने से नहीं रुकेंगी किसानों की आत्महत्याएं, मूल कारण को दूर करने की आवश्यकता: क्रॉपलाइफ इंडिया</title>
                                    <description><![CDATA[क्रॉपलाइफ इंडिया ने 'पैराक्वाट' और 'कार्बोसल्फान' पर संभावित प्रतिबंध की समीक्षा के बीच सरकार से व्यावहारिक रुख अपनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्पादों को हटाने से कर्ज और फसल की बर्बादी जैसे मूल कारण खत्म नहीं होंगे। खरीफ सीजन में इन किफायती विकल्पों के अचानक बंद होने से किसानों का वित्तीय तनाव और बढ़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/banning-pesticides-will-not-stop-farmer-suicides-need-to-address/article-155067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/croplife.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तेलंगाना में प्रतिबंध और जहर से होने वाली मौतों पर चिंता के बाद फसल सुरक्षा उत्पादों 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड' और 'कार्बोसल्फान' की बिक्री की समीक्षा किए जाने के बीच, क्रॉपलाइफ इंडिया ने आग्रह किया है कि कोई भी निर्णय किसानों की आत्महत्या के वास्तविक कारणों की स्पष्ट समझ और गंभीर तनाव से जूझ रहे किसानों पर इस प्रतिबंध के पड़ने वाले व्यावहारिक असर को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने से साधन तो हट जाता है, लेकिन समस्या का मूल कारण खत्म नहीं होता। वास्तव में, किसी उत्पाद को प्रतिबंधित करने से वह संकट और गहरा सकता है, जो किसी किसान को अपनी जान लेने के लिए मजबूर करता है।</p>
<p>वैज्ञानिक अध्ययनों और साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि किसानों की आत्महत्या के पीछे कर्ज, फसल की बर्बादी, वैकल्पिक आजीविका का अभाव और फसल खराब होने पर ऋण चुकाने में असमर्थता जैसे निरंतर बने रहने वाले मुख्य कारण हैं। उदाहरण के लिए, 'इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन' में प्रकाशित वर्ष 2024 के एक गुणात्मक अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मुख्य कारण मानसिक स्वास्थ्य के बजाय आर्थिक हैं, जिसमें कर्ज और उसके कारण पैदा हुआ ऋण-जाल सबसे प्रमुख कारक है। इसी तरह, 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट' के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, किसानों की आत्महत्या का सीधा संबंध वर्षा की स्थिति से है।</p>
<p>पांच अत्यधिक प्रभावित राज्यों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्षा में पांच प्रतिशत के बदलाव पर जहां प्रतिवर्ष औसतन 810 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, वहीं वर्षा में 25 प्रतिशत की कमी होने पर यह संख्या बढ़कर 1,188 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी अध्ययन में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में गारंटीकृत रोजगार और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध थी, वहां फसल खराब होने के बाद भी आत्महत्या के मामलों में कमी देखी गई। इन साक्ष्यों से साफ है कि आत्महत्या एक गहरे संकट का लक्षण है, और महत्वपूर्ण फसल सुरक्षा उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से यह संकट और बढ़ सकता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सभी हितधारकों और उद्योग जगत से आग्रह किया है कि वे सरकार द्वारा आय सहायता, फसल बीमा, संस्थागत ऋण और ग्रामीण रोजगार गारंटी के माध्यम से तैयार किए गए सुरक्षा चक्र को और मजबूत करें ताकि किसानों को इस संकट से उबारा जा सके।</p>
<p>खरीफ बुवाई के सीजन की शुरुआत को देखते हुए यह मामला बेहद संवेदनशील और जरूरी हो जाता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से खेतों की व्यावहारिक आवश्यकताओं पर विचार करने का अनुरोध किया है, क्योंकि किसान इस साल के लिए अपनी लागत की योजना और प्रतिबद्धता पहले ही तय कर चुके हैं। सीजन के बीच में किफायती और स्थापित खरपतवार एवं कीट नियंत्रण विकल्पों को अचानक रोकने से किसानों की लागत बढ़ेगी और उन पर वित्तीय दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा, जो कि इन त्रासदियों का असली कारण है।</p>
<p>यह वित्तीय दबाव मामूली नहीं है। 'निदेशालय खरपतवार अनुसंधान' (भाकृअनुप संस्थान) और 'फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' द्वारा 11 राज्यों के 3,200 किसानों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, देश में खरपतवारों के कारण हर साल लगभग 92,000 करोड़ रुपये की फसल उत्पादकता का नुकसान होता है, जो खरीफ फसलों में 25-26 प्रतिशत और रबी फसलों में 18-25 प्रतिशत तक है। 'पैराक्वाट' का उपयोग सालाना करीब 80 लाख एकड़ भूमि पर किया जाता है और यह चाय, कपास, आलू, मक्का, कॉफी, रबर और बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बिना जुताई (जीरो-टिलेज) और संरक्षण प्रथाओं का भी समर्थन करता है जिन्हें सरकार स्वयं बढ़ावा देती है। लगभग 300-350 रुपये प्रति एकड़ की लागत के साथ, पैराक्वाट विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक अत्यधिक किफायती समाधान बना हुआ है, जिसकी लागत श्रमिकों की भारी कमी के कारण महंगी हो चुकी हाथ से निराई की तुलना में बहुत कम है। दूसरी ओर, 'कार्बोसल्फान' धान में 'गाल मिज' कीट के खिलाफ सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है और इसका उपयोग लगभग 32 लाख एकड़ में किया जाता है। कृषि लागत में वृद्धि और पैदावार में कमी किसानों को उसी वित्तीय तनाव की ओर धकेलती है जो इस संकट की जड़ में है।</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा, "किसी उत्पाद पर बहस करते समय हम किसानों की आत्महत्या की मुख्य चिंता से भटक रहे हैं। मुख्य मुद्दा यह है कि किसी उत्पाद को रात भर में हटा देने से किसान का संकट दूर नहीं हो जाता। कर्ज, बर्बाद हुई फसल और भविष्य का डर वैसे ही बना रहता है। यदि उद्देश्य जीवन बचाना है, तो समाधान मूल कारण तक पहुंचना चाहिए, जिसमें ऋण की उपलब्धता, फसल की उचित कीमत, फसल खराब होने पर प्रभावी बीमा और जमीनी स्तर पर बेहतर कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण शामिल हो।"</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन और सरकार के विचारशील, परामर्शदात्री तथा विज्ञान आधारित दृष्टिकोण का स्वागत किया है। अनुसंधान एवं विकास पर आधारित 17 फसल सुरक्षा कंपनियों के शीर्ष निकाय के रूप में, क्रॉपलाइफ इंडिया इस समीक्षा में केंद्र, राज्यों और सभी हितधारकों के साथ एक भागीदार के रूप में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि ध्यान उस वास्तविक संकट पर केंद्रित रहे जो देश के किसानों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:50:58 +0530</pubDate>
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