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                <title>crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाने से नहीं रुकेंगी किसानों की आत्महत्याएं, मूल कारण को दूर करने की आवश्यकता: क्रॉपलाइफ इंडिया</title>
                                    <description><![CDATA[क्रॉपलाइफ इंडिया ने 'पैराक्वाट' और 'कार्बोसल्फान' पर संभावित प्रतिबंध की समीक्षा के बीच सरकार से व्यावहारिक रुख अपनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्पादों को हटाने से कर्ज और फसल की बर्बादी जैसे मूल कारण खत्म नहीं होंगे। खरीफ सीजन में इन किफायती विकल्पों के अचानक बंद होने से किसानों का वित्तीय तनाव और बढ़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/banning-pesticides-will-not-stop-farmer-suicides-need-to-address/article-155067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/croplife.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तेलंगाना में प्रतिबंध और जहर से होने वाली मौतों पर चिंता के बाद फसल सुरक्षा उत्पादों 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड' और 'कार्बोसल्फान' की बिक्री की समीक्षा किए जाने के बीच, क्रॉपलाइफ इंडिया ने आग्रह किया है कि कोई भी निर्णय किसानों की आत्महत्या के वास्तविक कारणों की स्पष्ट समझ और गंभीर तनाव से जूझ रहे किसानों पर इस प्रतिबंध के पड़ने वाले व्यावहारिक असर को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने से साधन तो हट जाता है, लेकिन समस्या का मूल कारण खत्म नहीं होता। वास्तव में, किसी उत्पाद को प्रतिबंधित करने से वह संकट और गहरा सकता है, जो किसी किसान को अपनी जान लेने के लिए मजबूर करता है।</p>
<p>वैज्ञानिक अध्ययनों और साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि किसानों की आत्महत्या के पीछे कर्ज, फसल की बर्बादी, वैकल्पिक आजीविका का अभाव और फसल खराब होने पर ऋण चुकाने में असमर्थता जैसे निरंतर बने रहने वाले मुख्य कारण हैं। उदाहरण के लिए, 'इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन' में प्रकाशित वर्ष 2024 के एक गुणात्मक अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मुख्य कारण मानसिक स्वास्थ्य के बजाय आर्थिक हैं, जिसमें कर्ज और उसके कारण पैदा हुआ ऋण-जाल सबसे प्रमुख कारक है। इसी तरह, 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट' के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, किसानों की आत्महत्या का सीधा संबंध वर्षा की स्थिति से है।</p>
<p>पांच अत्यधिक प्रभावित राज्यों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्षा में पांच प्रतिशत के बदलाव पर जहां प्रतिवर्ष औसतन 810 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, वहीं वर्षा में 25 प्रतिशत की कमी होने पर यह संख्या बढ़कर 1,188 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी अध्ययन में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में गारंटीकृत रोजगार और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध थी, वहां फसल खराब होने के बाद भी आत्महत्या के मामलों में कमी देखी गई। इन साक्ष्यों से साफ है कि आत्महत्या एक गहरे संकट का लक्षण है, और महत्वपूर्ण फसल सुरक्षा उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से यह संकट और बढ़ सकता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सभी हितधारकों और उद्योग जगत से आग्रह किया है कि वे सरकार द्वारा आय सहायता, फसल बीमा, संस्थागत ऋण और ग्रामीण रोजगार गारंटी के माध्यम से तैयार किए गए सुरक्षा चक्र को और मजबूत करें ताकि किसानों को इस संकट से उबारा जा सके।</p>
<p>खरीफ बुवाई के सीजन की शुरुआत को देखते हुए यह मामला बेहद संवेदनशील और जरूरी हो जाता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से खेतों की व्यावहारिक आवश्यकताओं पर विचार करने का अनुरोध किया है, क्योंकि किसान इस साल के लिए अपनी लागत की योजना और प्रतिबद्धता पहले ही तय कर चुके हैं। सीजन के बीच में किफायती और स्थापित खरपतवार एवं कीट नियंत्रण विकल्पों को अचानक रोकने से किसानों की लागत बढ़ेगी और उन पर वित्तीय दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा, जो कि इन त्रासदियों का असली कारण है।</p>
<p>यह वित्तीय दबाव मामूली नहीं है। 'निदेशालय खरपतवार अनुसंधान' (भाकृअनुप संस्थान) और 'फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' द्वारा 11 राज्यों के 3,200 किसानों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, देश में खरपतवारों के कारण हर साल लगभग 92,000 करोड़ रुपये की फसल उत्पादकता का नुकसान होता है, जो खरीफ फसलों में 25-26 प्रतिशत और रबी फसलों में 18-25 प्रतिशत तक है। 'पैराक्वाट' का उपयोग सालाना करीब 80 लाख एकड़ भूमि पर किया जाता है और यह चाय, कपास, आलू, मक्का, कॉफी, रबर और बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बिना जुताई (जीरो-टिलेज) और संरक्षण प्रथाओं का भी समर्थन करता है जिन्हें सरकार स्वयं बढ़ावा देती है। लगभग 300-350 रुपये प्रति एकड़ की लागत के साथ, पैराक्वाट विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक अत्यधिक किफायती समाधान बना हुआ है, जिसकी लागत श्रमिकों की भारी कमी के कारण महंगी हो चुकी हाथ से निराई की तुलना में बहुत कम है। दूसरी ओर, 'कार्बोसल्फान' धान में 'गाल मिज' कीट के खिलाफ सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है और इसका उपयोग लगभग 32 लाख एकड़ में किया जाता है। कृषि लागत में वृद्धि और पैदावार में कमी किसानों को उसी वित्तीय तनाव की ओर धकेलती है जो इस संकट की जड़ में है।</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा, "किसी उत्पाद पर बहस करते समय हम किसानों की आत्महत्या की मुख्य चिंता से भटक रहे हैं। मुख्य मुद्दा यह है कि किसी उत्पाद को रात भर में हटा देने से किसान का संकट दूर नहीं हो जाता। कर्ज, बर्बाद हुई फसल और भविष्य का डर वैसे ही बना रहता है। यदि उद्देश्य जीवन बचाना है, तो समाधान मूल कारण तक पहुंचना चाहिए, जिसमें ऋण की उपलब्धता, फसल की उचित कीमत, फसल खराब होने पर प्रभावी बीमा और जमीनी स्तर पर बेहतर कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण शामिल हो।"</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन और सरकार के विचारशील, परामर्शदात्री तथा विज्ञान आधारित दृष्टिकोण का स्वागत किया है। अनुसंधान एवं विकास पर आधारित 17 फसल सुरक्षा कंपनियों के शीर्ष निकाय के रूप में, क्रॉपलाइफ इंडिया इस समीक्षा में केंद्र, राज्यों और सभी हितधारकों के साथ एक भागीदार के रूप में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि ध्यान उस वास्तविक संकट पर केंद्रित रहे जो देश के किसानों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:50:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस में 'हीट डोम' का कहर : भीषण गर्मी से 7 लोगों की मौत, सरकार ने बुलाई आपातकालीन बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस में मई महीने की ऐतिहासिक गर्मी और अति भीषण लू (Heatwave) के कारण सात लोगों की मौत हो गई है। मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस के अनुसार, 'हीट डोम' की स्थिति से तापमान 36°C तक पहुंच गया है। पेरिस मैराथन और फ्रेंच ओपन पर भी इसका असर दिखा है, जिसके बाद पीएम सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/heat-record-broken-in-france-7-people-died-due-to/article-155087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/frace.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस में भीषण गर्मी के कारण सात लोगों की मौत के मामले सामने आये हैं और बढ़ते तापमान को देखते हुए दक्षिण-पश्चिम फ्रांस के समुद्र तटों पर सामान्य से अधिक भीड़ उमड़ने लगी है। इसी बीच, सरकार ने सप्ताह के अंत तक जारी रहने की आशंका वाली गर्मी से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने कहा कि सोमवार का दिन फ्रांस में मई माह का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। एजेंसी के अनुसार सप्ताह के दौरान कुछ क्षेत्रों में तापमान 33 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।</p>
<p>फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने गुरुवार को प्रमुख मंत्रियों की बैठक बुलाई है जिसमें लू से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों की समीक्षा की जायेगी। इसे वर्ष के शुरुआती चरण में असामान्य रूप से तेज गर्मी से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर बढ़ती चिंता के रूप में देखा जा रहा है। पेरिस में सप्ताहांत के दौरान तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गया। शनिवार को वर्ष 2026 में पहली बार तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पेरिस में रविवार को आयोजित 10 किलोमीटर दौड़ के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गयी। नागरिक सुरक्षा सेवाओं ने इसकी पुष्टि की है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार राजधानी के दक्षिण-पूर्वी उपनगर मैजों-अलफोर्ट में आयोजित एक अन्य दौड़ के दौरान 10 धावकों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।</p>
<p>फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट में भी गर्मी का असर देखने को मिला, जहां सोमवार को रोलां-गैरो में दर्शकों और खिलाड़ियों को सामान्य से कहीं अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह असामान्य गर्मी "हीट डोम" नामक स्थिति के कारण उत्पन्न हुई है। इसके तहत उत्तरी अफ्रीका से आयी गर्म हवा पश्चिमी यूरोप के ऊपर बने उच्च दबाव क्षेत्र के नीचे फंस गयी है। पूर्वानुमान कर्ताओं का कहना है कि इस कारण तापमान मई के सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया है और यूरोप के बड़े हिस्से में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन इन चरम परिस्थितियों को और अधिक तीव्र बना रहा है, जिससे हीटवेव अधिक बार, अधिक लंबी और अधिक गंभीर होती जा रही हैं। यूरोप वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है, जिसके चलते सरकारों पर स्कूलों, अस्पतालों, परिवहन नेटवर्क और आवासीय व्यवस्थाओं को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप ढालने का दबाव बढ़ता जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिजली संकट पर अखिलेश का राज्य सरकार पर निशाना: विधायक-सांसद बना रहे दिखावटी चिट्ठी का ‘कागजी कवच’, हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार को घेरा । उन्होंने इस स्थिति को 'महा विद्युत आपदा' बताते हुए कहा कि आक्रोश से बचने के लिए सांसद-विधायक दिखावटी चिट्ठियां लिख रहे । अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की मुश्किलें नजरअंदाज कर रही ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-targets-the-state-government-on-power-crisis-mlas-and/article-154925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में असहनीय ‘महा विद्युत आपदा’ की वजह से लगातार बढ़ते आक्रोश से बचने के लिए भयभीत भाजपाई विधायक-सांसद दिखावटी चिट्ठी का ‘कागजी कवच’ बना रहे हैं। अखिलेश यादव ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि यह चिट्ठी दरअसल अपनी सरकार को लिखा कोई ‘जन हित का पत्र’ नहीं है, बल्कि भाजपा रूपी डूबते जहाज को छोड़कर विपक्ष से आगामी चुनावों में टिकट पाने के लिए ‘आवेदन पत्र’ है।</p>
<p>उन्होंने साफ किया कि हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है, जो जनता को दुख-दर्द और दिक्कतों के सिवा कुछ नहीं देते हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि इस जानलेवा गर्मी में परिवारों में बड़े बुजुर्गों, बीमारों, बच्चों और खाने-पानी की व्यवस्था में झुलसती महिलाओं की क्या दुर्दशा हो रही है, ये केवल परिवारवाले ही समझ सकते हैं। कभी आपदा में अवसर ढूंढने वालों ने, अवसर की जगह जिस ‘अफसर’ को ढूंढा था, वो अफसर अब स्वयं आपदा साबित हो रहा है।</p>
<p>अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि समस्या का समाधान पूछने पर दोनों हाथ खड़ा करके नारा लगाकर बच निकलने वालों के रहते समस्या नहीं सुलझेगी। उन्होंने कहा कि किसी के लिए ये बड़ा मौका है कि वो पूरी तरह से नाकाम हो चुके किसी ‘दूत-मंत्री’ को हटा दे। इससे मुख्य जी को अपना मंत्रिमंडल विस्तार करने और किसी एक ‘घाटहीन’ को समायोजित करने का मौका भी मिल जाएगा। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उप्र की भाजपा सरकार भी जानती है कि अब वो कभी वापस नहीं आएगी। इसीलिए वो जनता की मुश्किलों और मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज करके बस अपने खजाने भरने में लगी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 17:21:18 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी में पेयजल को तरसे ग्रामीण, गहराया संकट</title>
                                    <description><![CDATA[कई मोहल्लों में जलापूर्ति बाधित, महिलाओं-बच्चों को दूर से लाना पड़ रहा पानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/villagers-thirsty-for-drinking-water-amidst-scorching-heat--crisis-deepens/article-154954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(8)12.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। सातलखेड़ी क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने से ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि पशुओं के लिए भी पानी की किल्लत र्मिक होने लगी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।  क्षेत्र में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान के बीच गांव में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। कई मोहल्लों में दिनों तक पानी की सप्लाई नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /> <br />ग्रामीणों का कहना है कि नलों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें दूर-दूर से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से ही पानी तलाश में निकल जाते हैं, जिससे उनके दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे की हैं। <br />कई स्थानों पर हैंडपंप भी सूख चुके हैं या पर्याप्त पानी नहीं दे रहे, जिससे समस्या और विकट हो गई है।</p>
<p><strong>जल संकट को लेकर पूर्व में कर चुके हैं प्रदर्शन</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि इससे पूर्व भी जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन कर सड़क जाम किया गया था, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>पशुपालकों को भी हो रही परेशानी</strong><br />भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है, जिससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /> <br />कस्बे के मलवे क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मुख्य सड़क के किनारे रहने वाले लोग टैंकरों से आसानी से पानी भर लेते हैं, लेकिन उनके क्षेत्र तक बाइक तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में उन्हें दूर से पानी भरकर लाना पड़ता है, जिससे काफी कठिनाई होती है। <br /><strong>- सफी खान, ग्रामीण, सातलखेड़ी</strong><br /> <br />सातलखेड़ी में पेयजल समस्या उत्पन्न हो रही है तो ग्राम पंचायत की ओर सेइस संबंध में संबंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा। ताकि समस्या का शीघ्र समाधान हो सके।<br /><strong>- पुष्पेंद्र शर्मा, वीडीओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:38:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एक हैंडपंप के सहारे पूरा गांव, पेयजल संकट से जूझ रहे झोटोली के ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा पीने का, फ्लोराइडयुक्त जल से बढ़ी परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/entire-village-relies-on-a-single-handpump--villagers-in-jhotoli-grapple-with-drinking-water-crisis/article-154949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)23.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। क्षेत्र के झोटोली गांव में पेयजल समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। गांव के लोगों को पीने लिए करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पूरे गांव की ननिर्भरता एकमात्र हैंडपंप पर होने के कारण ग्रामीणों को घंटों लाइन में खड़े रहकर पानी भरने  का इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल एसमस्या को लेकर पिछले विधानसभा चुनाव में गांव के लोगों ने मतदान - बहिष्कार का निर्णय लिया था। उस समय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद कुछ लोगों ने मतदान किया। लेकिन कर करीब पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद या गांव में पेयजल संकट का स्थायी कर समाधान नहीं हो सका।</p>
<p><strong>दस वर्षों से बनी हुई है समस्या </strong><br />ग्रामीण मायाराम गोचर ने बताया कि गांव के अधिकांश हैंडपंपों का पानी फ्लोराइडयुक्त है, जो न तो पीने योग्य है और न ही भोजन बनाने के लिए मान उपयोगी। इसके चलते ग्रामीणों को बाबा शाह वली की दरगाह के समीप स्थित हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह समस्या पिछले करीब दस वर्षों से बनी हुई है।</p>
<p><strong>समय रहते समाधान जरूरी</strong><br />ग्रामीण रामप्रताप गोस्वामी ने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। एक ही हैंडपंप होने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा दरगाह पर आनें वाले यात्रियों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर</strong><br />ग्रामीण महिला रेनू गोचर ने बताया कि घर-परिवार के दैनिक कार्यों में पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में महिलाओं को रोजाना गांव से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका काफी समय और श्रम खर्च होता है। उन्होंने कहा कि दिनभर की चिंता यही रहती है कि पीने के पानी की व्यवस्था कैसे होगी।</p>
<p><strong>कुआं भी नहीं रहा उपयोगी</strong><br />ग्रामीण परमानंद गोचर ने बताया कि पहले गांव के कुएं और हैंडपंपों का पानी पीने योग्य था, लेकिन समय के साथ पानी की गुणवत्ता खराब होती गई। फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से पानी पीने लायक नहीं रहा। गांव का पुराना कुआं भी गंदगी के कारण पेयजल के उपयोग में नहीं लिया जा सकता।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र समाधान के प्रयास किए जाएंगे।<br /><strong>- दीपक महावर, उपखंड अधिकारी, दीगोद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:36:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कब थमेगा सिलसिला? मुंबई में 111 तो दिल्ली में 100 के पार पहुंचा पेट्रोल, जानें आम आदमी के मंथली बजट पर कितना बढ़ेगा बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल कंपनियों ने कीमतें फिर बढ़ा दी हैं। दिल्ली में पेट्रोल ₹2.61 महंगा होकर ₹102.12 और डीजल ₹2.71 बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर हो गया है। हालांकि, अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से नीचे आ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/when-will-this-trend-stop-petrol-crossed-111-in-mumbai/article-154903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/petrol-diesel.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ा दिये हैं और दिल्ली में चार साल बाद पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज से गैर-ब्रांडेड यानी सामान्य पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। अब इसकी कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। सामान्य डीजल भी अब 95.20 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। इसकी कीमत में 2.71 रुपये का इजाफा किया गया है।</p>
<p>दोनों जीवाश्म ईंधनों का यह 21 मई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। इस साल 15 मई से अब तक चार बार में दिल्ली में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.53 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। इनके दाम 30 अक्टूबर 2024 के बाद गत 15 मई को पहली बार बढ़ाये गये थे। दिल्ली में इंडियन ऑयल के प्रीमियम पेट्रोल एक्सपी95 की कीमत भी 2.61 रुपये बढ़कर 109.24 रुपये और प्रीमियम डीजल एक्सजी की कीमत 2.71 रुपये बढ़कर 100.52 रुपये प्रति लीटर हो गयी है।</p>
<p>कोलकाता में पेट्रोल 2.87 रुपये और चेन्नई में 2.46 रुपये महंगा हुआ है। दोनों शहरो में इसकी नयी कीमत क्रमशः 113.51 रुपये और 107.77 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। डीजल कोलकाता में 2.80 रुपये और चेन्नई में 2.57 रुपये बढ़कर क्रमशः 99.82 रुपये और 99.55 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में ठोस प्रगति के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आज कच्चे तेल के दाम में चार प्रतिशत से ज्यादा गिरावट देखी गयी है। कच्चे तेल का मानक ब्रेंट क्रूड वायदा फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे उतर गया है।</p>
<p>गत 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमत में उछाल आया है। इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:05:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल, गैस कीमतों और NEET लीक पर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, गलत नीतियों से बढ़ी महंगाई</title>
                                    <description><![CDATA[पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार राजस्थान की सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां 23 मई से 1 जून 2026 तक एसडीएम कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेंगी। कांग्रेस पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, बिजली-पानी की किल्लत और नीट-2026 पेपर लीक के विरोध में ज्ञापन सौंपकर अपना आक्रोश दर्ज कराएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-movement-of-congress-on-petrol-diesel-gas-prices-and-neet/article-154852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/govind-dotasara.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर, 23 मई। देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बढ़ते दामों तथा बिजली- पानी सहित रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति में कमी के कारण आमजन को हो रही परेशानी एवं नीट पेपर लीक के कारण देश के छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ केन्द्र सरकार द्वारा खिलवाड़ करने के विरोध में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार प्रदेश की सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों द्वारा एसडीएम कार्यालय के समक्ष विरोध-प्रदर्शन किये जायेंगे। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं मीडिया चेयरपर्सन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि केन्द्र सरकार की गलत आर्थिक एवं विदेश नीति के कारण देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई का बोझ आमजन पर डाला जा रहा है। </p>
<p>रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, बिजली तथा पेयजल की आपूर्ति आवश्यकता से कम हो रही है, जिस कारण आमजन को जीवनयापन में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही देश की महत्वपूर्ण परीक्षा नीट-2026 के पेपर लीक होने से लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ केन्द्र सरकार ने खिलवाड़ किया है, इसके विरोध में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां 23 मई से 1 जून, 2026 के मध्य अपने क्षेत्रीय एसडीएम कार्यालय के समक्ष विरोध-प्रदर्शन कर अपनी मांगों का एक ज्ञापन सरकार के नाम एसडीएम को सौपेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 16:28:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश में विद्युत संकट से हाहाकार, 24 घंटे बिजली देने का दावा निकला जुमला : सुप्रिया श्रीनेत</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सोशल मीडिया चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत ने उत्तर प्रदेश में भीषण बिजली कटौती पर योगी सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच 75 जिलों में जनता त्रस्त है और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। कांग्रेस ने 24 घंटे बिजली देने में विफल जिम्मेदार मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/due-to-power-crisis-in-uttar-pradesh-the-claim-of/article-154841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/supriya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में विद्युत कटौती से हाहाकार मचा हुआ है और जनता घोर संकट का सामना कर रही है। कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग की चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत ने एक बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बिजली कटौती से विकराल स्थिति उत्पन्न हो गयी है। जनता तकलीफें झेलने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि देश के 50 सबसे गर्म शहरों में से 26 शहर उत्तर प्रदेश के हैं, लेकिन भीषण गर्मी के बीच लोगों को 24 घंटे में केवल सात-आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरठ से लेकर बलिया तक लोग बिजली संकट से परेशान हैं और कई जगहों पर लोग रात में घरों से निकलकर सड़कों पर सोने को मजबूर हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ तक में घंटों बिजली गुल रहने से अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एक्स-रे और स्कैन जैसी सुविधाएं ठप पड़ गयी हैं। कानपुर देहात के मेडिकल कॉलेज के छात्रों को देर रात तक बिजली नहीं मिलने के कारण धरने पर बैठना पड़ा। कांग्रेस नेता ने कहा कि बिजली संकट का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है, क्योंकि मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे हैं और ऑनलाइन पढ़ाई बाधित हो रही है। उन्होंने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और किसान सभी इस समस्या से परेशान हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग बिजली की मांग को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं, तो प्रशासन उनकी समस्याएं सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों द्वारा प्रदर्शन कर रहे लोगों को मुकदमे की धमकी दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा, “रामराज्य लाने की बात बाद में कीजिए, पहले लोगों को इस भीषण गर्मी और बिजली संकट से राहत दिलाइए।” कांग्रेस ने राज्य सरकार से बिजली व्यवस्था तुरंत सुधारने और ‘24 घंटे बिजली’ के दावों के लिए जिम्मेदार मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मायावती का राज्य सरकार पर निशाना : बिजली संकट पर जताई चिंता, बोली- आमजन को निजात दिलाने के लिए उचित कदम उठाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और भारी बिजली कटौती पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बिजली संकट से किसान, गरीब और छोटे व्यापारियों का जीवन कष्टदायी हो गया है। मायावती ने सरकार से तत्काल निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और नए बिजलीघर बनाने की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mayawati-targets-state-government-expresses-concern-over-power-crisis-says/article-154649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/mayawati-759.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती पर चिंता जताते हुये कहा कि सरकार को बिजली संकट से आमजन को निजात दिलाने के त्वरित उपाय करने चाहिये। मायावती ने एक्स पर जारी संदेश में कहा कि बिजली संकट से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारी और करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बन गया है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम आपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा समाचार माध्यमों में भी काफी व निरन्तर रहती है। सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये जरूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। साथ ही, नये बिजलीघर आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्यापक जनहित में उचित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच कई जिलों से अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। विपक्ष लगातार बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रांसपोर्ट कारोबार पर मंडराया संकट: गुरुग्राम समेत दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू,  जानिए क्या खुला और क्या बंद?</title>
                                    <description><![CDATA[ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर दिल्ली-एनसीआर में तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। ग्रीन टैक्स और नए प्रतिबंधों के विरोध में 21 से 23 मई तक माल ढुलाई पूरी तरह बंद रहेगी। गुरुग्राम के औद्योगिक हब में इसके चलते करोड़ों का कारोबार और आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/crisis-looms-on-transport-business-three-day-strike-of-transporters-begins/article-154575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/strike.png" alt=""></a><br /><p>गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर गुरुवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हुई। हड़ताल का सीधा असर गुरुग्राम में देखने को मिल रहा है। पहले ही दिन गुरुग्राम से दिल्ली जाने वाले ट्रकों और कॉमर्शियल वाहनों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गयी, जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो गयी हैं। ट्रांसपोर्ट संघों ने स्पष्ट किया है कि 21 मई की सुबह से 23 मई की रात तक माल ढुलाई से जुड़ी कोई भी छोटी या बड़ी गाड़ी दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं करेगी। ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों का आरोप है कि दिल्ली सरकार लगातार कमर्शियल वाहनों पर नये प्रतिबंध लागू कर रही है और ग्रीन टैक्स के नाम पर भारी शुल्क वसूला जा रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार संकट में पहुंच गया है।</p>
<p>ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत और समस्याओं के समाधान की मांग की गयी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में उन्हें सांकेतिक हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। गुरुग्राम को देश के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब में गिना जाता है। यहां ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां संचालित हैं, जिनकी आपूर्ति शृंखला पूरी तरह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर निर्भर है। हड़ताल के चलते उद्योग जगत में चिंता बढ़ गयी है। व्यापारिक विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यदि हड़ताल आगे बढ़ती है, तो दिल्ली-एनसीआर में फल, सब्जियां, दूध और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बांसी का रावजी मोहल्ला : नाममात्र जलापूर्ति से मोहल्लेवासियों में बढ़ा आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाने के बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-s-raoji-mohalla--growing-outrage-among-residents-due-to-meager-water-supply/article-154550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-1111.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे स्थित रावजी मोहल्ले में पिछले दो माह से पेयजल संकट गहराने से मोहल्लेवासियों में भारी नाराजगी है। जलदाय विभाग की ओर से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को भीषण गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान नहीं होने पर उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।</p>
<p>जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग द्वारा बांसी कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में घर-घर नल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन रावजी मोहल्ले में पिछले लंबे समय से नलों में नाममात्र का पानी ही पहुंच रहा है। कई मकानों की दूसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। ऑनलाइन शिकायत के बाद नैनवां के कनिष्ठ अभियंता विभागीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जलापूर्ति शुरू करवाई। हालांकि उस समय भी उपभोक्ताओं के नलों में बहुत कम मात्रा में पानी पहुंचता दिखाई दिया। इसके बाद अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्धारित समय से 20 मिनट अतिरिक्त जलापूर्ति करने के निर्देश दिए।</p>
<p>मोहल्लेवासियों हुकमचंद शर्मा, मुकेश कुमार जैन, अंकित जैन, लोकेश शर्मा, सत्यनारायण सोनी, नीरूशंकर शर्मा, सीमा जैन, ममता जैन एवं अवधेश कुमार जैन सहित अन्य लोगों ने बताया कि कई बार विभागीय कर्मचारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। बिजली कटौती के दौरान मोटर बंद रहने से जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो जाती है, जिससे लोगों को निजी नलकूपों से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे जलदाय विभाग कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों को भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने समझाइश कर लोगों को शांत किया।</p>
<p>बांसी के जिस मोहल्ले में जलापूर्ति समस्या है। वह लाइन के टेल क्षेत्र के है। इस समस्या के समाधान के लिए निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक समय तक जलापूर्ति करने के लिए कर्मचारी को निर्देशित किया गया है। मोहल्ले में समय से जलापूर्ति हो जाएगी।<br /><strong>- योगिता जांगिड़, जेईएन,जलदाय विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:55:12 +0530</pubDate>
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                <title>खड़गे ने की सिद्दारमैया और शिवकुमार से मुलाकात, क्या कनार्टक में होने वाला है नेतृत्व परिर्वतन?  </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की संभावित साझेदारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार के साथ बेंगलुरु में अहम बैठक की। हालांकि, आलाकमान ने फिलहाल किसी भी फेरबदल की बात से इनकार करते हुए सरकार को स्थिर बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharge-met-siddaramaiah-and-shivkumar-is-there-going-to-be/article-154457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को लेकर बुधवार को कयासों का बाजार फिर गर्म हो गया, जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दल के भीतर बढ़ी राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ चर्चा की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, केरल में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद खड़गे ने सिद्दारमैया, शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ तिरुवनंतपुरम से बेंगलुरु तक का सफर किया। इसके बाद नेताओं ने कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज के आवास पर बैठक की, जिससे राज्य में नये सिरे से राजनीतिक सुगबुगाहट शुरू हो गयी।</p>
<p>कयासों का यह नया दौर मई 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता की संभावित साझेदारी की लगातार आ रही खबरों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हाल के दिनों में शिवकुमार के समर्थकों ने नेतृत्व के मुद्दे पर स्थिति साफ करने की मांग को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी तेज कर दी है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान पर इस मामले को सुलझाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p>इन चर्चाओं को हवा देते हुए मंगलवार को बेंगलुरु में सिद्दारमैया के करीबी माने जाने वाले मंत्रियों ने कथित तौर पर नाश्ते पर बैठक की, जिसने संभावित राजनीतिक फेरबदल और कैबिनेट विस्तार की अटकलों को और तेज कर दिया। इससे पहले खरगे ने नेतृत्व के विवाद को कमतर आंकने की कोशिश करते हुए कहा था कि कर्नाटक में ‘फिलहाल कोई बदलाव नहीं’ होगा और मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भी फैसला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरे के बाद पार्टी नेतृत्व द्वारा सामूहिक रूप से लिया जाएगा। कांग्रेस आलाकमान और राज्य के नेताओं ने आधिकारिक तौर पर किसी नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा नहीं की है और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी लगातार यही दावा कर रहे हैं कि सरकार पूरी तरह स्थिर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:48:29 +0530</pubDate>
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