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                <title>crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>तेलंगाना में भयावह हादसा : दीवार गिरने से चार किसानों की मौत; कई घायल, राज्य सरकार ने की 25 लाख रूपए की अनुग्रह राशि की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[मंचरियाल जिले में भारी बारिश और दीवार गिरने से चार किसानों की मौत हो गई। बीआरएस नेता केटीआर ने इसे सरकारी उदासीनता बताते हुए मृतकों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर फसलों की खरीद में देरी का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्यवाही की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/horrific-accident-in-telangana-four-farmers-died-due-to-wall/article-152851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/farmer.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के मंचरियाल जिले में मंगलवार शाम को भारी बारिश और तेज हवाओं के चलने पर अलग-अलग घटनाओं में खरीद केंद्रों की दीवारें गिरने से चार किसानों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव ने बुधवार को तेलंगाना भर में फसलों की तत्काल खरीद की मांग की। केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इन घटनाओं को दुखद बताया और कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण खरीद केंद्रों पर दीवार गिरने से चार किसानों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गये।</p>
<p>उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से मृतक किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार किसानों द्वारा महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उगाई गई फसलों की खरीद में विफल रही है और उदासीनता एवं लापरवाही दिखा रही है। केटीआर ने दावा किया कि पिछले तीन दिनों में राज्य के विभिन्न खरीद केंद्रों पर सात किसानों की मौत हो गई है और उन्होंने इन मौतों के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी मांग किया कि सरकार तेलंगाना के सभी थ्रेशिंग यार्डों और खरीद केंद्रों पर पड़ी सभी फसलों की तत्काल खरीद करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:26:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में खसरे से हाहाकार : एक दिन में 17 लोगों की मौत; तेजी से बढ़ रहे केस, सरकार ने जारी किया अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे (Measles) ने कोहराम मचा रखा है, जहाँ एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई। 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की संख्या 41,000 के पार पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने ढाका में सर्वाधिक मौतों की पुष्टि की है। टीकाकरण और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के जरिए इस संक्रामक बीमारी को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/outcry-due-to-measles-in-bangladesh-17-people-died-in/article-152714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरा और खसरा से संबंधित जटिलताओं के कारण एक ही दिन में 17 लोगों की मौत हो गई। मार्च में इस अत्यधिक संक्रामक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी के प्रकोप की शुरुआत के बाद से एक दिन में दर्ज मौत की यह सबसे अधिक संख्या है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मंगलवार को प्राप्त हुई। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार सुबह आठ बजे तक दर्ज की गई 17 मौतों में से दो की पुष्टि खसरा से होने जबकि अन्य 15 को संदिग्ध मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध मौतों में से सबसे अधिक 10 मौतें ढाका जिले में दर्ज की गईं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में खसरा से होने वाली पुष्ट मौतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है। इसके अलावा, 15 मार्च से दर्ज किए जा रहे आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से संबंधित संदिग्ध मौतों की संख्या वर्तमान में 259 है। डीजीएचएस के अधिकारियों ने बताया कि इसी अवधि के दौरान खसरे के लगभग 1,302 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 41,793 हो गयी है।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून ने कहा कि इसी अवधि के दौरान, खसरा के 154 नए पुष्ट मामले सामने आए जिससे पुष्ट संक्रमणों की कुल संख्या 5,467 हो गई। प्राप्त रिपाेर्ट के अनुसार 15 मार्च तक खसरा के संदिग्ध मामलों में से 28,832 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 25,151 मरीज स्वस्थ हो गये और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 12:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण अफ्रीकी देश चाड में पानी को लेकर 2 परिवारों में हिंसक झड़प : 42 लोगों की मौत, सेना की तैनाती के बाद नियंत्रण में स्थिति </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीकी देश चाड में पानी के स्रोत पर अधिकार को लेकर दो परिवारों के बीच हुई झड़प ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 42 लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रपति ने स्थिति संभालने के लिए उच्च स्तरीय आयोग भेजा है। शरणार्थियों के दबाव के कारण संसाधनों की कमी इस घातक संघर्ष का मुख्य कारण बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chad-violence-42-people-died-in-water-dispute-violent-clash/article-151816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)1.jpg" alt=""></a><br /><p>न्जामेना। दक्षिण अफ्रीकी देश चाड में पानी के स्रोत पर अधिकार को लेकर दो परिवारों के बीच हुई हिंसक झड़प में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। चाड के उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत के अनुसार, यह हिंसा एक जल स्रोत को लेकर दो परिवारों के बीच शुरू हुए झगड़े का परिणाम थी। यह विवाद बाद में बदले की कार्रवाइयों में बदल गया।</p>
<p>चाड के राष्ट्रपति महामत इदरीस देबी इतनो ने स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर एक आयोग भेजा है, जिसमें उप प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ के प्रमुख शामिल हैं। उप प्रधानमंत्री ने बताया कि सेना की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पड़ोसी सूडान से आने वाले शरणार्थियों के कारण चाड के पूर्वी प्रांतों में संसाधनों की कमी लगातार बढ़ रही है, जिससे इस तरह के संघर्षों की आशंका बनी रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:05:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कापरेन में गहराया पेयजल संकट, तीन दिन से नल सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[बस स्टैंड पर लगा वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा होने से यात्री परेशान हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drinking-water-crisis-deepens-in-kapren--taps-run-dry-for-three-days/article-150921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगर पालिका क्षेत्र कापरेन में बढ़ती गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर हो गया है। शहर के कई वार्डों में पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नागरिकों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार वार्ड संख्या 24, 15 और 23 स्थित जोसया का खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से नल सूखे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों नंदकिशोर खारोल, बबलू सेन, महावीर एवं सुरेश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कभी-कभी एक-दो दिन पानी की आपूर्ति कर फिर मोटर खराब होने का बहाना बनाकर सप्लाई बंद कर दी जाती है।</p>
<p>इधर बस स्टैंड पर नगर पालिका द्वारा लगाया गया वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा है। पानी उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय निवासी राजाराम गुर्जर ने कहा कि व्यस्त स्थान पर भी मूलभूत सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जहां आमजन पानी के लिए परेशान हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से बेखबर बने हुए हैं। लोगों ने शीघ्र जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने की मांग की है।<br /> <br /><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong></p>
<p>मोटर खराब होने के कारण सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिसे अब ठीक करवा लिया गया है और पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है<br /><strong>-खुशबू मीणा, जेईएन, जलदाय विभाग </strong></p>
<p> टंकी में पानी भरवाकर जल्द ही नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा, ईओ, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:22:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पेपर लीक की अंतिम कीमत किसने चुकाई: कोई लौटा दो मेरे पांच साल, निर्दोषों  के हाल बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[एक सूचना ने पैरों तले जमीन खिसका दी, परिवारों के सपनों को भी कर दिया चकनाचूर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/who-paid-the-ultimate-price-for-the-paper-leak--%22give-me-back-my-five-years-%22%E2%80%94the-plight-of-the-innocent-is-dire/article-149690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कई साल तक दिन-रात कड़ी मेहनत की। उसके बाद वह दिन आया जब सरकारी नौकरी का सपना साकार हुआ। उस सपने के पूरा होने पर खुद के साथ परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था। एसआई बनने की सूचना से पूरा परिवार झूम रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने का भी अवसर आया था। फिर पांच साल बाद एक और सूचना आई जिसने मानों जीवन की खुशियों पर ही ग्रहण लगा दिया। सूचना थी एसआई भर्ती 2021 रद्द होने की। इस नौकरी के लिए क्या नहीं किया। घर परिवार से दूर रहकर घंटो नौकरी की। इसी बीच तीन दिन पहले हाईकोर्ट के एक आदेश ने उन खुशियों पर मानो ग्रहण सा लगा दिया हो। आखिर हमारी मेहनत और परिवार के त्याग का क्या दोष है।<br />यह पीड़ा केवल जोधपुर निवासी उर्मिला सांखला की ही नहीं है जो परिवार से करीब 400 कि.मी. दूर कोटा रहकर एसआई की नौकरी कर रही है। उस जैसी कई अन्य युवा भी हैं जिन्होंने अपने सपने पूरे करने के लिए दिन-रात एक कर दिए। कई सालों तक परीक्षाओं की तैयारी की। तैयारी में परिवार ने हजारों लाखों रुपए खर्च किए। यहां तक कि कई परिवारों ने तो अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए जमीन के टुकड़े तक को बीच दिया। संकटों में जीवन बिताया केवल इसी आस में कि बेटा या बेटी नौकरी लग जाएगी तो वह सब कुछ फिर से प्राप्त हो जाएगा। लेकिन 5 साल पहले 2021 में निकली एसआई भर्ती में ऐसी गड़बड़ी हुई कि हाईकोर्ट ने तीन दिन पहले उसे रद्द कर दिया। कोर्ट के इस एक आदेश ने उन नौकरी कर रहे युवाओं के साथ ही उनके परिवारों के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया।</p>
<p><strong>अखबार पढ़ा तो होश उड़ गए</strong><br />कोटा शहर में करीब सवा साल से एसआई की नौकरी कर रही जोधपुर निवासी उर्मिला सांखला ने बताया कि 5 अप्रैेल को समाचार पढ़ा कि हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती 2021 को रद्द कर दिया है। यह पढ़ते ही होश उड़ गए। ऐसा लगा मानो पैरों के नीचे से जमीन ही खिचक गई हो। काफी देर तक तो कुछ समझ ही नहीं आया कि यह क्या हो गया। पानी पिया और खुद को संभाला। उसके बाद तो करीब 400 कि.मी. दूर बैठे परिवारजनों के फोन आना शुरु हुए। परिवार वालों का कहना था कि पल भर में उनकी आशाओं पर पानी फिर गया।</p>
<p><strong>एनसीसी में होने से नौकरी अच्छी लगी</strong><br />उर्मिला ने बताया कि कॉलेज में उनके पास एससीसी थी। जिसमें रहकर उन्हें पुलिस में नौकरी करने की इच्छा जगी थी। इसी बीच 2021 में एसआई भर्ती निकली। उसके लिए दिन रात मेहनत की। परिवार वालों ने पूरा साथ दिया। लिखित परीक्षा, इंटरव्यूह व शारीरिक दक्षता समेत सभी परीक्षाओं को एक-एक कर पार करते हुए आखिर जुलाई 2023 में वह दिन आया जब खुद के साथ घर परिवार का सपना साकार हुआ। नौकरी के लिए चयन होने पर परिवार में उसी दिन असली दिवाली मनी थी। परिवार के सभी सदस्य सोच रहे थे बेटी के कंधों पर दो स्टार और वर्दी होगी।</p>
<p><strong>15 माह की ट्रेनिंग पूरी की</strong><br />उर्मिला ने बताया कि नौकरी के लिए चयन होने के बाद अक्टूबर 2023 में ट्रेनिंग पर गए। करीब 15 माह की ट्रेनिंग घर परिवार से दूर रहकर की। उसके बाद जनवरी 2025 में आदेश मिला कि उन्हें कोटा शहर में ड्यूटी देनी है। उस आदेश के बाद भी घर परिवार वालों ने खुशी-खुशी भेजा। हालांकि घर परिवार से 400 कि.मी. दूर रहकर नौकरी करना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन भविष्य सुरक्षित करने और परिवार को आर्थिक सम्बल देने के लिए खुशी-खुशी नौकरी कर रही थी।</p>
<p><strong>एक आदेश ने किया सब कुछ खत्म</strong><br />तीन दिन पहले हाईकोर्ट के एक आदेश ने मानो सब कुछ खत्म कर दिया। पांच साल पहले जिस जगह से शुरुआत की थी वापस उसी जगह पर आ गए। उन्होंने बताया कि अब नौकरी तो जाएगी ही साथ ही परिवार की खुुशियां और उसके साथ ही नौकरी में रहते हुए जो सपने संजोए थे आर्थिक स्थिति में सुधार के वे भी मानो चकनाचूर हो गए हैं।उर्मिला ने बताया कि यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल ही में निकली एसआई भर्ती परीक्षा भी हो चुकी है। नौकरी मिलने से पहले जहां अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। नौकरी मिलने के बाद वह भी छोड़ दिया था। वहीं उस समय जिनकी नौकरी नहीं लगी उन्हें हाल ही में एसआई भर्ती की परीक्षा देने का मौका मिला लेकिन हमे तो वह भी नहीं मिल सका। अब न जाने कब और कौन सी नौकरी मिलेगी भी या नहीं।</p>
<p><strong>मुझे किस गुनाह की सजा दी गई है?</strong><br />जीवन के सबसे प्रोडक्टिव 5 साल से भी अधिक का समय इस नौकरी को हासिल करने में लगा दिया। 2021 आरएएस प्रीलिम्स उत्तीर्ण किया, एसआई भर्ती शारीरिक दक्षता परीक्षा के समय ही आरएएस मेन्स की परीक्षा भी दी । उसके बाद की सभी भर्ती परीक्षाओं में इस नौकरी के कारण भाग नहीं लिया। क्या कोई मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण 5 वर्ष से अधिक का समय जो मैंने इस नौकरी को दिया मेरे जीवन में वापस जोड़ सकता है? क्या कोई न्यायालय मुझे बताएगा कि मुझे किस गुनाह की सजा दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/who-paid-the-ultimate-price-for-the-paper-leak--%22give-me-back-my-five-years-%22%E2%80%94the-plight-of-the-innocent-is-dire/article-149690</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:11:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैस संकट से ठंडी पड़ी सब्जी बाजार की रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[रेस्टोरेंट व ढाबों में घटी सब्जियों की डिमांड, दाम कम होने से आमजन को राहत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gas-crisis-slows-down-the-vegetable-market/article-149400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जारी एलपीजी संकट का असर अब सब्जी बाजार पर गहराने लगा है। गैस सिलेंडरों की कमी के चलते होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और छोटे ढाबों में भोजन तैयार करने का काम प्रभावित हुआ है। इससे सब्जियों की थोक और खुदरा मांग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मांग घटने के कारण सब्जियों के दामों में भी कमी आई है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है, लेकिन किसानों और व्यापारियों के सामने नई चिंता खड़ी हो गई है। व्यापारियों के मुताबिक पहले जहां शहर की मंडियों में रोजाना भारी मात्रा में सब्जियों की खपत होती थी, वहीं अब हालात यह हैं कि मंडियों में माल बचने लगा है। होटल और ढाबों की खरीद आधी रह गई है, जबकि कई छोटे व्यवसाय अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं। इसके चलते थोक बाजार में आवक अधिक और खपत कम होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>इन सब्जियों के दामों में आई गिरावट</strong><br />पिछले एक सप्ताह में टमाटर, आलू, प्याज, भिंडी, लौकी, बैंगन और हरी सब्जियों के दामों में 10 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां टमाटर के भाव पहले 30-40 रुपए किलो थे, वहीं अब 10-15 रुपए किलो तक आ गए हैं। पहले भिंडी सबसे महंगी 60 रुपए प्रति किलो तक बिक रही थी। अब इसकी भी डिमांड कम होने से भाव टूट कर 30 रुपए प्रति किलो पर आ गए हैं। इसके अलावा आलू भी 10 रुपए किलो बिक रहा है। अन्य सब्जियों के भावों में कमी दर्ज की गई है। जिससे आमजन को घरेलू बजट पर कुछ राहत मिली है।</p>
<p><strong>आमजन को राहत, किसान आहत</strong><br />सब्जियों के दाम कम होने से आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिला है। गृहिणियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से बढ़ती महंगाई के बीच सब्जियों के सस्ते होने से रसोई का खर्च कुछ कम हुआ है। खासकर मध्यम वर्ग और दैनिक आय वाले परिवारों को इससे राहत महसूस हो रही है। वहीं दूसरी ओर किसानों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। कम मांग के कारण उन्हें अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। कई बार तो लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>डिमांड बढ़ते ही भावों में आएगी तेजी</strong><br />सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि अभी डिमांड कम होने से सब्जियों की खपत घट गई है। बाद में जैसे ही एलपीजी आपूर्ति सामान्य होगी और होटल और रेस्टोरेंट फिर से पूरी क्षमता से संचालित होंगे तो सब्जियों की मांग में तेजी आएगी। इसके साथ ही दामों में भी फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। अभी शादियों की सीजन भी शुरू नहीं हो पाया है। विवाह सीजन का दौर चालू होने के बाद फिर से सब्जियों के भावों में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल, बाजार में सुस्ती के बीच आमजन को सस्ती सब्जियों का लाभ मिल रहा है, जबकि किसान और व्यापारी हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>पहले रोजाना पूरा माल निकल जाता था, लेकिन अब आधा भी नहीं बिक रहा। मजबूरी में कम दाम पर बेचना पड़ रहा है, जिससे नुकसान हो रहा है।<br /><strong>-शब्बीर वारसी, सब्जी व्यापारी</strong></p>
<p>सब्जियों के दाम कम होने से थोड़ी राहत मिली है। पहले जहां 500-600 रुपए में हफ्ते की सब्जी आती थी, अब 300-400 में काम चल रहा है।<br /><strong>-मीना कुमारी, गृहिणी</strong></p>
<p>खेत में मेहनत करने के बाद भी सही दाम नहीं मिल रहे। मंडी में भाव गिर गए हैं, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।<br /><strong>-रामकेश मीणा, सब्जी उत्पादक</strong></p>
<p>गैस सिलेंडर की दिक्कत के कारण ढाबा पूरा नहीं चला पा रहे हैं। इससे सब्जियों की खरीद भी कम कर दी है।<br /><strong>-अशोक रोहिड़ा, ढाबा संचालक </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 14:31:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष जारी: तेहरान में अब तक 600 लोगों की मौत, जान-माल का भारी नुकसान  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में जारी अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के कारण तेहरान में अब तक 636 लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हैं। सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद देश में 40 दिनों का शोक घोषित है। संघर्ष में अब तक कुल 1,348 नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि ईरान ने जवाबी हमलों की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-with-america-israel-continues-600-people-have-died-so-far/article-147637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/war.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान की राजधानी तेहरान में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को तेहरान की आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख मोहम्मद इस्माइल तवक्कोली के हवाले से बताया, इस दौरान (संघर्ष शुरू होने के बाद से) राजधानी में 636 लोग मारे गए हैं और अब तक 6,848 लोग घायल हुए हैं। तेहरान में लगभग 430 जगहों पर हमले हुए हैं। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने 12 मार्च को कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के परिणामस्वरूप ईरान में 1,348 नागरिक मारे गए और 17,000 से ज्यादा लोग घायल हुए। यह अभियान 28 फरवरी को ईरान के कई शहरों में शुरू किया गया था, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ। </p>
<p>ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका और इजरायल ने शुरू में दावा किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से होने वाले कथित खतरे का मुकाबला करने के लिए उनका पूर्ववर्ती हमला जरूरी था, लेकिन जल्द ही उन्होंने यह साफ कर दिया कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना चाहते हैं। </p>
<p>सैन्य अभियान के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गये। इस्लामिक गणराज्य ने 40 दिनों के शोक की घोषणा की। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:05:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के कारण शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट : प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत गिरे, निफ्टी में भी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक कमजोरी के बीच शेयर बाजारों में भारी गिरावट। सेंसेक्स 1,600 से अधिक अंक टूटकर 78,600 के आसपास, निफ्टी भी 500 अंक फिसलकर 24,367 पर। आईटी को छोड़ धातु, बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी समेत अधिकांश सेक्टर दबाव में। एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट से निवेशकों में हड़कंप।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/big-fall-in-stock-markets-due-to-west-asia-crisis/article-145220"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/share-market-01.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक संकट और विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को जबरदस्त गिरावट रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1,710.03 अंक गिरकर 78,528.82 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 1,627.88 अंक यानी 2.03 प्रतिशत नीचे 78,610.97 अंक पर था। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 476.90 अंक गिरकर 24,388.80 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 498.35 अंक यानी दो प्रतिशत नीचे 24,367.35 अंक पर है।</p>
<p dir="ltr">आईटी को छोड़कर अन्य सभी सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। धातु, ऑटो, बैंकिंग, वित्त, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, तेल एवं गैस और रसायन समूहों में ज्यादा गिरावट रही। सेंसेक्स की कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा स्टील और एयरटेल ने बाजार पर ज्यादा दबाव बनाया। वहीं आईटी क्षेत्र की चारों कंपनियों इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर ऊपर चल रहे थे। विदेशों में भी शेयर बाजारों में आज भारी गिरावट रही। जापान का निक्केई ही 3.63 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 2.71 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.43 प्रतिशत नीचे है।</p>
<p><strong><br /><br /><br /><br /></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 10:58:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सांसों पर संकट, थर्मल की बूढ़ी इकाइयां शहर को बना रही बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[चिमनियों से उठता धुआँ थर्मल प्लांट के 4-5 किमी क्षेत्र तक शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा की आबो-हवा अब जहरीली होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कोटा थर्मल पावर प्लांट की वे बूढ़ी इकाइयां हैं, जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन आज भी धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। 1983 में स्थापित थर्मल की यूनिट1 और यूनिट 2 अपनी निर्धारित अवधि से करीब 10 साल ज्यादा समय निकाल चुकी हैं । इसके बावजूद इनसे निकलने वाला धुआं, राख और गर्म पानी शहरवासियों की सांसों और चंबल नदी दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चंबल किनारे बसें लोगों का कहना है कि थर्मल से 4 से 5 किलोमीटर की परिधि तक सीधा असर दिख रहा है। हवा में घुले सूक्ष्म कण सांसों के जरिए शरीर में जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों ने सफेद कपड़े पहनना तक बंद कर दिया है,क्योंकि छत पर कपड़े सुखाने पर कुछ ही देर में उन पर राख जम जाती है। चिमनियों से उठता धुआं दिनभर शहर की हवा को दूषित कर रहा है।अवधी पार कर चुकी इकाइयों का असर अब युवाओं पर भी साफ दिखने लगा है।</p>
<p><strong>कम उम्र  सांस, आंख और त्वचा की समस्याएं</strong><br />किशोरपुरा क्षेत्र की 35 वर्षीय रिंकू कंवर बताती हैं, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां कम उम्र के लोग भी सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। थर्मल से निकलने वाला प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है। संयंत्र से छोड़ा जा रहा गर्म और दूषित पानी सीधे चंबल नदी में मिलाया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे नदी का तापमान बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और चंबल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। मगर प्रशासन और थर्मल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट नहीं</strong><br />नियमों के अनुसार थर्मल में यह प्लांट लगना चाहिए था, ताकि सल्फर डाइआॅक्साइड जैसे जहरीले गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। लेकिन आज तक यह प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर की सांसों में जहर लगातार घुलता जा रहा है। किशोरपुरा, शिवपुरा, पाटनपोल, साबरमती कॉलोनी, केथूनीपोल, शक्ति नगर, दादाबादी, श्रीनाथपुरम से लेकर सकतपुरा और नांता तक राख का फैलाव देखा जा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में खुले में सोना तो दूर, दिन में घरों की खिड़कियां खोलना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।</p>
<p><strong>प्रभाव जो देखे जा रहे</strong><br />-5 किमी तक राख और धुएं का फैलाव।<br />-सफेद कपड़ों पर जम रही काली परत।<br />-आंख और स्वांस के रोगियों को बढ रही परेशानी।<br />-थर्मल के गर्म पानी को सीधे नदी में मिलाने से चंबल की जैव विविधता पर भी संकट बढ़ रहा है, थर्मल से डिस्चार्ज पानी के साथ आॅयल की मात्रा भी नदी में आती है, कुछ महीने पहले भी किशोरपुरा की तरफ काफी सारी मरी मछिलयां पानी पर पडी़ हुई देखी गई थी ।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />थर्मल से निकलने वाले धुएं में कईं प्रकार के टॉक्सिस औैर पार्टिकल होते है दमा ,फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी वाले रोगियों में यह गम्भीर समस्याएं पैदा कर सकता है।<br /><strong>- डॉ. राजेश ताखर,  श्वास व एलर्जी रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>अवधी पार कर चुकी थर्मल इकाइयों को चलाना बेहद खतरनाक है। बिना ट्रीटमेंन्ट प्लांट के सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर सीधे हवा में जा रहे हैं। इससे श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। साथ ही गर्म पानी नदी में छोड़ने से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों के विकास में बाधा तो होती ही साथ ही कई अन्य बुरे प्रभाव भी जन्म लेने लगते है यह पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। कोटा की आबो-हवा और चंबल की सेहत अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।<br /><strong>-अनिल रावत, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong></p>
<p>हमारे यहां पर जिला प्रदूषण बोर्ड की टीम द्वारा समय समय पर सेम्पलिंग करवायी जाती है, जिसकी रिपोर्ट भी आगे जाती है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल, मुख्य अभियन्ता कोटा थर्मल</strong></p>
<p>चम्बल के पानी और हवा की सेम्पिलंग करने के लिये हमारी टीमें लगातार जाती रहती है। जिसकी अपडेट पोर्टल पर डाल दी जाती है ।<br /><strong>-योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मनोहरथाना में 26 सरकारी विद्यालय शिफ्ट, बच्चों की सुरक्षा व पढ़ाई पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कई गांवों में बच्चों को उनके मूल विद्यालय के बजाय 3 - 4 किमी. दूर के स्कूलों में पढ़ने जाना होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/26-government-schools-shifted-in-manoharathana--raising-questions-about-children-s-safety-and-education/article-138861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)1.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना । एक ओर राज्य सरकार अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि जर्जर विद्यालय भवनों का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। पिपलोदी हादसे के बाद जिन स्कूल भवनों को जर्जर घोषित किया गया था, उन्हें समय रहते ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक में करीब 26 सरकारी विद्यालयों को पास के अन्य विद्यालयों में शिफ्ट करना पड़ा है। इस निर्णय से हजारों बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />जानकारी के अनुसार, मनोहरथाना ब्लॉक के जिन विद्यालयों को जर्जर घोषित किया गया था, वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को 10 जनवरी के बाद अन्य विद्यालयों में पढ़ने जाना होगा। कई गांवों में बच्चों को अपने मूल विद्यालय के बजाय 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में भेजा जा रहा है। इस फैसले को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।</p>
<p><strong>शिफ्ट किए गए 26 विद्यालय</strong><br />कोटड़ा चमरगढ़, ताजपुरिया, चित्तौड़ा, ढाबा, कुंजरी, गोडिया, हनोतिया, आफूखेड़ी, गुराड़खेड़ा, कंवरिया खेड़ी, भवानीपुरा, बिरजीपुरा, हमीरपुर, शोलाल का पूरा, तलाईबेह, टांडी तंवरान, बामलाबेह, बकबट पूरा, भामा का पूरा, गंगाहोनी, झिरी, गिरधरपुरा, खेड़ी बोर, कंजरी की टापरियां, मोतीपुरा, रामपुरिया गुजरान।</p>
<p><strong>इन 13 विद्यालयों ने दर्ज कराई आपत्ति</strong><br />ताजपुरिया, चित्तौड़ा, गुराड़खेड़ा, कंवरिया खेड़ी, बकबट पूरा, भामा का पूरा, गंगाहोनी, गिरधरपुरा, खेड़ी बोर, कंजरी की टापरियां, बिरजीपुरा, झिरी।</p>
<p><strong>अभिभावकों की चिंता</strong><br />अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए रोज 3-4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना आसान नहीं है। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को व्यस्त सड़क मार्ग से गुजरना पड़ेगा, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। पहले से ही पिपलोदी हादसे की टीस मन में है, ऐसे में दूरी बढ़ने से डर और गहरा गया है।</p>
<p><strong>पढ़ाई पर असर</strong><br />विद्यालय शिफ्ट होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं। नए स्कूल, नया वातावरण और पहले से भरी कक्षाओं में अतिरिक्त विद्यार्थियों का दबाव शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।</p>
<p><strong>स्थायी समाधान की मांग</strong><br />ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षाविदों की मांग है कि जर्जर भवनों को गिराकर समयबद्ध तरीके से नए सुरक्षित विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाए। जब तक नए भवन नहीं बनते, तब तक गांव स्तर पर सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था या परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p>मनोहरथाना ब्लॉक में 26 विद्यालय शिफ्ट किए गए हैं। इनमें से 13 विद्यालयों की आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। निर्देश मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-दुलीचंद लोधा, कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालावाड़ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 16:20:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इक्वाडोर हिंसा: काबू पाने के लिए नौ प्रांतों, तीन नगरपालिकाओं में आपातकाल घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने आपराधिक हिंसा और हत्याओं में वृद्धि के बाद इक्वाडोर के नौ प्रांतों में 60 दिनों के लिए आपातकाल घोषित किया है। इसका उद्देश्य आपराधिक ढांचों को नष्ट करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ecuador-declares-state-of-emergency-in-nine-provinces-three-municipalities/article-138121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ecuador.png" alt=""></a><br /><p>क्विटो। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने नौ प्रांतों और तीन नगरपालिकाओं में 60 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा की है, क्योंकि देश में आपराधिक हिंसा में वृद्धि होने के कारण गंभीर आंतरिक अशांति उत्पन्न हो गई है। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को दी। राष्ट्रपति द्वारा बुधवार को हस्ताक्षरित डिक्री के अनुसार, गुरुवार से तटीय क्षेत्र के गुयास, मनाबी, सांता एलेना, लॉस रियोस, एल ओरो और एस्मेराल्डास प्रांतों, पिचिता और सैंटो डोमिगो के मध्य-उत्तरी प्रांतों के साथ-साथ अमेजाॅन क्षेत्र के सुकुम्बियोस प्रांत में आपातकाल लागू किया गया है।</p>
<p>यह आपातकाल मध्य प्रांत कोटोपैक्सी के ला माना नगर पालिका के साथ-साथ एंडियन प्रांत बोलिवर के लास नावेस और एचेंडिया नगर पालिकाओं में भी लागू किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस अध्यादेश की 60 दिन की वैधता का उद्देश्य हिंसा को नियंत्रित करना, चल रहे या आसन्न खतरों को बेअसर करना और आपराधिक संरचनाओं को नष्ट करना है।</p>
<p>राष्ट्रीय पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल एक नवंबर से 23 दिसंबर के बीच, इक्वाडोर में गुयास, लॉस रियोस, मनाबी, एल ओरो,  एस्मेराल्डास, सांता एलेना, सैंटो डोमिगो और सुकुम्बियोस प्रांतों में हत्या के 1,232 दर्ज किए गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 14:10:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हवाई यात्रा के अभूतपूर्व संकट की जिम्मेदारी ले सरकार : यह संकट सरकार के एकाधिकार की नीति का पहला नमूना, शशिकांत सेंथिल ने कहा- सरकार जारी करे श्वेत-पत्र </title>
                                    <description><![CDATA[यह संकट अभूतपूर्व है और इसके कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में और अपने जरूरी काम करने से वंचित होना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/government-should-take-responsibility-for-the-unprecedented-crisis-in/article-134983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने देशभर में हवाई यात्रियों के समक्ष पैदा हुए अभूतपूर्व संकट को सरकार के एकाधिकार की नीति का पहला नमूना बताया और कहा कि स्थिति को संभालने में विफल रहे नागर विमानन मंत्री के राम मोहन नायडू को जिम्मेदारी लेते हुए सरकार को इस पर श्वेत-पत्र जारी करना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि विमानन कंपनी इंडिगो के कारण देश के नागरिकों के समक्ष विमानन क्षेत्र में जो अभूतपूर्व संकट खड़ा हुआ, वह सरकार की एकाधिकार नीति का एक नमूना मात्र है और आने वाले समय में एकाधिकार की सरकार की नीति का खामियाजा देश के नागरिकों को बड़े पैमाने पर भुगतना पड़ेगा। पार्टी ने कहा कि निजीकरण के काम में जुटी मोदी सरकार हर क्षेत्र में एकाधिकार को महत्व दे रही है और आने वाले समय में ऊर्जा, बंदरगाह आदि क्षेत्रों में भी इसी तरह का संकट देश को झेलना पड़ेगा इसलिए सरकार को एकाधिकार नहीं प्रतिस्पर्धा को महत्व देना चाहिए। कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश ने अब तक का सबसे बड़ा विमानन संकट देखा है। हजारों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और आज शनिवार को भी 600 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं हैं। इस संकट के कारण देश भर में अनगिनत यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं। यह संकट अभूतपूर्व है और इसके कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में और अपने जरूरी काम करने से वंचित होना पड़ रहा है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति विमानन क्षेत्र में करीब डेढ़ साल से बनी हुई है लेकिन कुछ दिनों में यह संकट अपने चरम पर पहुंचा है। नागर विमानन महानिदेशालय-डीजीसीए के पायलटों के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के कारण यह संकट खड़ा हुआ है। डीजीसीए ने पहली बार पिछले वर्ष इस संबंध में नियमों को अधिसूचित कर दिया था और इनके पालन के लिए एयरलाइंस के पास पर्याप्त समय था लेकिन हाल में ही की गई सख्ती के बाद संकट गहरा गया। सवाल है कि डीजीसीए नियमों को अधिसूचित कर इस पर अब तक चुप क्यों था जबकि नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी उसकी ही  थी। सवाल यह भी है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय अब तक क्या कर रहा था जबकि सब इन नियमों के अनुपालन की अनिवार्यता को जानते थे। सरकार को जवाब देना चाहिए कि पूरे देश को इस तरह की अराजकता में क्यों धकेला गया। </p>
<p>सेंथिल ने इस संकट का कारण एकाधिकार की नीति को बताया और कहा कि लगभग 60-65 प्रतिशत बाजार को नियंत्रित करने का अधिकार एक ही कंपनी को कैसे मिल गया। इससे साफ है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद एकाधिकार को प्रोत्साहित और इसका समर्थन करने वाली सरकार इस संकट का इंतजार कर रही थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि एयरलाइंस में ही नहीं है बल्कि हवाई अड्डों को लेकर भी एकाधिकार को महत्व दिया गया है। एकाधिकार की वजह बताते हुए उन्होंने इंडिगो का ही उदाहरण दिया और कहा कि जब चुनावी बांड डेटा का खुलासा हुआ, तो इंटरग्लोब समूह ने लगभग 36 करोड़ रुपए के चुनावी बांड खरीदे थे। इंडिगो के प्रमोटर ने कथित तौर पर 20 करोड़ रुपए के चुनावी बांड खरीदे थे। उनका कहना था कि यह भी स्पष्ट हो चुका है कि इन चुनावी बांडों को किसने भुनाया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि क्षेत्र के संकट के समाधान के लिए मुझे सरकार की ओर से कोई पहल नजर नहीं आती। स्थिति से निपटने के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जब लोग संकट से गुजर रहे हैं तो सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है और यह चुप्पी उसकी विफलता का खुलासा करती है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि सरकार ने पिछले 11 वर्षों में विमानन को एक प्रतिस्पर्धी, विविध क्षेत्र बनाने के बजाय एकाधिकार के दायरे में लाने का काम किया है। डीजीसीए संकट से निपटने में विफल क्यों रहा। यह नियम पिछले वर्ष जनवरी में अधिसूचित हो गया था और इस साल जुलाई से इसे आंशिक रूप से लागू कर अब एक नवंबर को पूरी तरह से लागू किया गया है। सवाल यह भी कि क्या सरकार ने कभी इंडिगो को इसे लेकर कोई चेतावनी दी भी थी या इस बारे में उसे सिर्फ संरक्षण ही देती रही। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 17:54:32 +0530</pubDate>
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