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                <title>अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस आज : प्रदेश के भवाई नृत्य में महिलाएं सिर पर मटकें रखकर दिखाती हैं स्टंट </title>
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                        <![CDATA[राजस्थान के कई तरह के डांस देश-विदेश में अपनी पहचान रखते है, लेकिन ज्यादा पब्लिसिटी नहीं होने की वजह से ये डांस विधाएं बॉलीवुड की तरह आमजन तक नहीं पहुंच पाती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-dance-day-today-in-bharai-dance-of-the-state/article-112363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(3)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हर साल 29 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाया जाता है। कथक, भरतनाट्यम्, हिप हॉप, बैले, साल्सा, लावणी जैसे कई डांस फॉर्म हैं, जो दुनियाभर में लोकप्रिय हैं। यह दिन डांस के जादूगर कहे जाने वाला जॉर्जेस नोवेर को समर्पित है। डांसर्स का मानना है कि डांस करके सिर्फ  दिल ही नहीं खुश होता, बल्कि ये आपको फिट रखने का भी काम करता है। थोड़ी देर डांस करने से मूड फ्रेश हो जाता है, हार्ट हेल्दी रहता है, वजन कम होता है और तो और तनाव भी दूर होता है। साथ ही डांस से पूरी बॉडी एक्टिव हो जाती है और साथ ही तनाव भी दूर हो जाता है। राजस्थान के कई तरह के डांस देश-विदेश में अपनी पहचान रखते है, लेकिन ज्यादा पब्लिसिटी नहीं होने की वजह से ये डांस विधाएं बॉलीवुड की तरह आमजन तक नहीं पहुंच पाती है।</p>
<p><strong>भवाई</strong><br />भवाई पश्चिमी राजस्थान में किया जाने वाला एक स्टंट नृत्य है। यह नृत्य अपनी चमत्कारिता के लिए प्रसिद्ध है। इसमें विभिन्न शारीरिक करतब दिखाने पर अधिक बल दिया जाता है। यह भवाई जाति की स्त्रियों द्वारा किया जाता है। भवाई नृत्य मूलत: मटका नृत्य है, इस नृत्य की यही पहचान है। इसे करने वाला अपने सिर पर मटका लिए रहता है। यह उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में लोकप्रिय है। सिर पर 7-8 मटके रखकर नृत्य करना, तलवारों की धार पर नृत्य करना, जमीन से मुंह से रूमाल उठाना, गिलासों पर नाचना, थाली के किनारों पर नाचना आदि इस नृत्य की मुख्य विशेषताएं हैं। इसमें शारीरिक क्रियाओं के अद्भुत चमत्कार तथा लयकारी देखने को मिलती है।</p>
<p><strong>कालबेलिया नृत्य</strong><br />यह नृत्य और इस से जुड़े गीत इनकी जनजाति के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह नृत्य सपेरों की एक प्रजाति द्वारा बदलते हुए सामाजिक, आर्थिक परस्थितियों के प्रति रचनात्मक अनुकूलन का एक शानदार उदाहरण है। यह राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में इस जनजाति के स्थान की भी व्याख्या करता है।</p>
<p><strong>कच्छी घोड़ी </strong><br />कच्छी घोड़ी नृत्य राजस्थान का एक लोकनृत्य है। यह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से आरम्भ हुआ था। यह केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य भागों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में भी प्रसिद्ध है। इसमें नर्तक नकली घोड़ों पर सवारी करते हैं। इसका प्रदर्शन सामाजिक एवं व्यावसायिक दोनों तरह से होता है। यह नृत्य दूल्हा पक्ष के बारातियों के मनोरंजन करने के लिए और अन्य खुशी के अवसरों पर किया जाता है।</p>
<p><strong>चरी नृत्य</strong><br />चरी नृत्य राजस्थान का आकर्षक व बहुत प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह महिलाओं द्वारा किया जाने वाला सामूहिक लोक नृत्य है। यह राजस्थान के अजमेर और किशनगढ़ में अति प्रचलित है। चरी नृत्य राजस्थान में किशनगढ़ और अजमेर के गुर्जर समुदाय की महिलाओं का एक सुंदर नृत्य है। चरी नृत्य राजस्थान में कई बड़े समारोह, त्योहारों, लड़के के जन्म पर, शादी के अवसरों पर किया जाता है। फलकू बाई इसकी प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं।</p>
<p><strong>घूमर </strong><br />घूमर राजस्थान का एक परंपरागत लोकनृत्य है। इसका विकास भील जनजाति ने मां सरस्वती की आराधना करने के लिए किया था। बाद में बाकी राजस्थानी बिरादरियों ने इसे अपना लिया। इसमें महिलाएं घूंघट लगाकर और एक घुमेरदार पोशाक जिसे घाघरा कहते हैं पहनकर करती है।</p>
<p><strong>कठपुतली नृत्य </strong><br />कठपुतली नृत्य में कई हास्य किरदार होते हैं, जिसमें मुख्य रूप में हीर-रांझा, लैला-मजनूं, शीरी-फरहाद के अलावा व्यंग्य और मनोरंजन के लिए कई स्थानीय किरदारों के माध्यम से कठपुतली नृत्य में दिखाया जाता है।</p>
<p><strong>गेर नृत्य</strong><br />गेर नृत्य राजस्थान का पारम्परिक प्रसिद्ध और सुन्दर लोक नृत्य है। यह नृत्य प्रमुखत: भील मीणा आदिवासियों द्वारा किया जाता है, यह भील प्रदेश यानी प्रतापगढ़, बासवाड़ा और डूगंरपुर में ज्यादा किया जाता है।</p>
<p>एक डांसर के तौर पर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में डांस का महत्व बहुत है। इससे वो अपने आप को फिट और मूड फ्रेश रख सकता है।<br />-अल्का श्रीवास्तव (कोरियाग्राफर)</p>]]>
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                                            <category>जयपुर</category>
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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 10:11:45 +0530</pubDate>
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