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                <title>veterinary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बदहाली की मार, बिना भवन-संसाधन एक (कंपाउंडर) के भरोसे पशु चिकित्सालय </title>
                                    <description><![CDATA[जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा चिकित्स्थासालय,मवेशियों के उपचार हेतु पशुपालक परेशान ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-scourge-of-disrepair--without-a-building-or-resources--the-veterinary-hospital-is-dependent-on-a-single-compounder/article-143155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kkkkkkota.jpg" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाली का दंश झेल रहा है। स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी अस्पताल को न स्थायी भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो सके हैं। वर्तमान में पूरा चिकित्सालय केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल अस्थायी रूप से जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा है, जबकि इससे क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा जारी होना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत प्रशासन द्वारा पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है। इसके चलते अस्पताल पूर्व में मर्ज किए जा चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित करना पड़ रहा है।</p>
<p>देईखेड़ा पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) तथा एक पशु परिचर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल एक पशुधन निरीक्षक के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि स्थायी भवन, उपकरण और पशु चिकित्सक के अभाव में मवेशियों के उपचार में परेशानी आ रही है। गंभीर बीमार पशुओं को सर्जरी अथवा विशेष उपचार के लिए दूरस्थ केंद्रों तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और पशुपालन विभाग से शीघ्र भूमि आवंटन व रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव उपचार किया जा रहा है। भूमि आवंटन के लिये पंचायत को लिखा जा चुका है। पंचायत ने भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक बोला गया है। समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। <br /><strong>-ओमप्रकाश नागर,  पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा। </strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन के लिए प्रस्ताव ले रखे है। जल्द ही भूमि चिहिन्त कर आवंटन किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:00:37 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : पशु चिकित्सा केन्द्र पर लगा मिला ताला, अधिकारी से मांगा स्पष्टीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[कई केंद्रों पर  कंपाउंडर के भरोसे पूरा अस्पताल चलाया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--veterinary-center-found-locked--explanation-sought-from-the-officer/article-139884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को पंचायत समिति सुल्तानपुर के भौंरा में पशु चिकित्सा उप केन्द्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पशु चिकित्सा उप केन्द्र पर प्रात: 10:15 बजे ताले लगे हुए थे। संभागीय आयुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए संयुक्त निदेशक पशुपालन को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। इस दौरान संभागीय आयुक्त ने राजकीय महात्मा गांधी उच्च माध्यमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केन्द्र का भी निरीक्षण किया। संभागीय आयुक्त सुबह पशु चिकित्सा उप केन्द्र पर पहुंचे तो वहां पर कोई चिकित्सक व कर्मचारी मौजूद नहीं था और ताला लगा हुआ था। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को इस सम्बंध में पूरी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />जिले में पशु चिकित्सा की बिगड़ रही व्यवस्था को लेकर दैनिक नवज्योति में 16 जनवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि जिले सहित सैकड़ों पशु चिकित्सालय बिना पशु चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। कई केंद्रों पर तो हालात ऐसे हैं कि एक पशुधन सहायक या कंपाउंडर के भरोसे पूरा अस्पताल चलाया जा रहा है। कई पशु चिकित्सालयों में ताले लगे रहते हैँ। जिससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। चिकित्सकों की कमी के कारण यहां नियमित सेवाएं बाधित हो रही हैं। पशु चिकित्सकों की कमी से गंभीर बीमार पशुओं का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। पशुपालकों को बीमार पशुओं को निजी चिकित्सकों या दूर-दराज के शहरों में ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। इस दौरान समय और पैसा दोनों खर्च होता है।</p>
<p><strong>स्कूल में दो कार्मिक मिले अनुपस्थित</strong><br />संभागीय आयुक्त ने राजकीय महात्मा गांधी उच्च माध्यमिक विद्यालय भौंरा के निरीक्षण के दौरान उन्होंने हाजिरी रजिस्टर चेक किया। जिसमें दो कार्मिक अनुपस्थित एवं दो अवकाश पर पाए गए। पोषाहार रजिस्टर में नियमित एंट्री नहीं होने और शाला दर्पण पर विद्यार्थियों की संख्या नियमित रूप से अपलोड नहीं किए जाने पर उन्होंने प्रधानाचार्य को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए उन्हें प्रेरित करने के निर्देश प्रधानाचार्य को दिए। आंगनबाड़ी केन्द्र भौंरा पर 23 बच्चों में से मात्र तीन बच्चे ही उपस्थित थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी मौके पर नहीं थी। इस पर संभागीय आयुक्त ने संबंधित अधिकारी को व्यवस्थाएं ठीक करने के निर्देश दिए। संभागीय आयुक्त ने बारां जिले के पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गजनपुरा का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्धारित मानकों की पूर्ति नहीं होने पर संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा कोटा को कक्षा-कक्षों का निर्माण होने तक विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 14:33:55 +0530</pubDate>
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                <title>मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय: सोनोग्राफी मशीन पर जमी धूल, काफी समय से खराब होने से नहीं हो रहा उपयोग </title>
                                    <description><![CDATA[पशु चिकित्सालय में रोज 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन काफी समय से बंद पड़ी हुई है। आधुनिक जांच सुविधा के अभाव में चिकित्सकों को बीमार पशुओं का उपचार केवल लक्षणों और अनुभव के आधार पर करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि कई जटिल मामलों में पशुओं की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। पशु चिकित्सालय में रोजाना 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या दुधारू गाय-भैंसों, गर्भवती पशुओं और प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले मामलों की होती है। सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ की स्थिति, भ्रूण का विकास, आंतरिक सूजन, ट्यूमर, चोट या संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। सोनोग्राफी मशीन बंद होने से गर्भ जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है।</p>
<p><strong>निजी जांच केंद्रों का ही सहारा</strong><br />सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों को निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी स्तर पर सोनोग्राफी कराने पर 800 से 1500 रुपऐ तक खर्च आ रहा है, जो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बड़ी रकम है। कई पशुपालक आर्थिक तंगी के कारण जांच नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ रही। चिकित्सकों के अनुसार सोनोग्राफी के बिना कई बार बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे इलाज ट्रायल-बेस पर करना पड़ता है, दवाइयों की अवधि बढ़ जाती है और पशु के स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है। दुधारू पशुओं के मामलों में दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नई मशीन की मांग, लेकिन अब तक इंतजार</strong><br />पशु चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई माह पहले ही नई सोनोग्राफी मशीन की मांग उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट और प्रक्रिया का हवाला देते हुए मामला लंबित बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक मशीन मिलने से न सिर्फ जांच सटीक होगी, बल्कि रेफर के मामलों में भी कमी आएगी। स्थानीय पशुपालकों ने विभाग से मांग की है कि मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द नई सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई जाए। ताकि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं का समय पर, सटीक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने से हमें निजी जगह जांच करानी पड़ती है। खर्च ज्यादा आता है, ऊपर से समय भी बर्बाद होता है। गरीब पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या है।<br /><strong>-रामलाल, पशुपालक</strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी हुई है। नई मशीन के लिए डिमांड भेज रखी है। नई मशीन मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ. भंवर सिंह, उपनिदेशक, राजकीय पशु चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्गंध के बीच कैसे करें उपचार, डॉक्टर खुद होने लगे बीमार, बदबू के कारण सांस लेना  हो रहा  मुश्किल </title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय पशु चिकित्सालय से नहीं उठ रहे मृत मवेशी  चिकित्सालय सटाफ व पशुपालक हो रहे परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-to-provide-treatment-amidst-the-stench--doctors-themselves-are-falling-ill--breathing-is-becoming-difficult-due-to-the-foul-smell/article-137177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते कई दिनों से मृत मवेशियों को नहीं उठाए जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। दुर्गंध के कारण कई पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद मृत मवेशियों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>कई चिकित्सकों की बिगड़ी तबीयत</strong><br />अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से उन्हें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ चिकित्सकों को तो इलाज के बाद खुद चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा है। एक चिकित्सक ने बताया कि मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। लगातार ऐसे माहौल में काम करने से हमारी तबीयत बिगड़ रही है, फिर भी मजबूरी में हमें पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>पशु उपचार कार्य भी प्रभावित</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पशुओं का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अन्य बीमार पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। दुर्गंध और असहज वातावरण के चलते कई बार पशुओं का उपचार जल्दी-जल्दी निपटाना पड़ रहा है या फिर पशुपालकों को इंतजार करने को कहा जा रहा है। इससे गंभीर रूप से बीमार पशुओं के इलाज में देरी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>अब संक्रमण का खतरा बढ़ा</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। दुर्गंध के कारण मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ गई है, जो बीमारियों को और फैलाने का कारण बन सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र है कि उपचार कक्षों में लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है, जिससे नियमित जांच, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और आॅपरेशन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p>-हमारे पशु बीमार हैं, उन्हें आराम और साफ माहौल चाहिए, लेकिन यहां बदबू के कारण पशु भी बेचैन हो जाते हैं। प्रशासन को यहां की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- रमेश गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>-राजकीय पशु चिकित्सालय में मृत मवेशियों को कई दिनों से नहीं उठाए जाने के कारण फैली दुर्गंध अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। बदबू के चलते पशुओं की उपचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु चिकित्सकर्मियों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है।<br /><strong>- डॉ. भंवर सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>गौशाला में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव</title>
                                    <description><![CDATA[कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-medical-facilities-in-the-cowshed/article-125574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। यहां हजारों की संख्या में लावारिस हालत में पकड़कर लाए गए पशु रखे गए हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गौवंश के लिए गौशाला में अब तक पशु चिकित्सालय तक संचालित नहीं हो पाया है। कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ग्रीनबेल्ट पर खर्च, जरूरी काम अधूरे</strong><br />सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की ओर से गौशाला में जो आवश्यक निर्माण कार्य हैं, वे तो अधूरे पड़े हैं। इसके उलट लाखों रुपए खर्च कर ग्रीनबेल्ट विकसित की गई है। लेकिन बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा और रहने के लिए शेड जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हुई हैं।</p>
<p><strong>निगम का पक्ष</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकारियों का कहना है कि गौशाला में निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही पशुओं के लिए शेड व अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।</p>
<p><strong>कायन हाउस की स्थिति और खराब </strong><br />सिंह ने बताया कि किशोरपुरा स्थित कायन हाउस की स्थिति तो और भी खराब है। वहां तो चिकित्सा केन्द्र तक मौजूद नहीं है। कम्पाउंडरों से ही काम चलाया जा रहा है। शहर में निजी स्तर पर करीब दो दर्जन पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन निगम की गौशालाओं में मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल रही है। इससे बीमार पशुओं की देखभाल में कठिनाई आती है।</p>
<p><strong>डॉक्टर आते हैं सप्ताह में एक-दो बार</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यहां लाए जाने वाले अधिकांश गौवंश बीमार और कमजोर स्थिति में होते हैं। उन्हें लगातार चिकित्सा सुविधा की जरूरत रहती है। लेकिन निगम की ओर से यहां स्थायी पशु चिकित्सक तैनात नहीं है। बोरावास व मंडाना से सप्ताह में केवल एक-दो बार ही डॉक्टर आते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में समय पर उपचार न मिल पाने से कई बार गंभीर परेशानी खड़ी हो जाती है। फिलहाल एक रिटायर्ड डॉक्टर को निगम की ओर से नियुक्त किया गया है, जिनसे काम चल रहा है।</p>
<p><strong>टेंडर तक नहीं हुए</strong><br />समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन अब तक शेड लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। कई कार्यों के तो टेंडर तक जारी नहीं हुए हैं। इससे गौवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong> बरसात व धूप में खुले में रहने को मजबूर पशु</strong><br />गौशाला परिसर में एक और बड़ी समस्या टीनशेड की कमी है। मानसून में भारी बारिश और गर्मी में तेज धूप से बचाने के लिए शेड जरूरी है, लेकिन निगम अभी तक यह काम भी शुरू नहीं कर पाया है। इस कारण अधिकतर पशु खुले में ही खड़े रहने को मजबूर हैं। बारिश में गीली जमीन पर खड़े रहने और धूप में तपते रहने से उनकी सेहत और बिगड़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:38:48 +0530</pubDate>
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                <title>समस्या : एक पशु धन निरीक्षक के भरोसे सफर कर रहा नगर का पशु चिकित्सालय</title>
                                    <description><![CDATA[ पशुपालकों को कई बार चिकित्सक के नहीं होने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/problem--the-city-s-veterinary-hospital-is-running-on-the-strength-of-a-livestock-inspector/article-120250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer11.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। सुकेत का पशु चिकित्सालय मात्र एक पशु धन निरीक्षक के भरोसे चल रहा है। जिससे कई बार किसानों को बिना पशुओं का इलाज कराए लौटना पड़ता है। जानकारी के अनुसार नगर के आसपास लगभग 25 गांवों के किसान अपने पशुओं का इलाज कराने सुकेत पशु चिकित्सालय में आते हैं। जबकि पशु चिकित्सक का पद काफी सालों से रिक्त है। पशुधन परिचर का पद भी रिक्त है। पशुधन निरीक्षक भी डेपुटेशन पर सुकेत पशु चिकित्सालय में सेवा दे रहे हैं। जबकि इनकी ड्यूटी निकट के गांव पीपाखेड़ी में लगी हुई है। पशुपालकों ने बताया कि नगर पालिका सुकेत का राजकीय पशु चिकित्सालय केवल एक पशुधन निरीक्षक के भरोसे है। इसमें कई वर्षों से पशु चिकित्सक एवं पशुधन परिचर के पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में यहां आने वाले पशुपालकों को कई बार चिकित्सक के नहीं होने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>एक-एक चिकित्सक को तीन-तीन केंद्रों का प्रभार </strong><br />पशुपालकों ने बताया कि उपखंड के लगभग दर्जनों पशु अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। पशुपालन विभाग की लापरवाही से उपखंड के कई पशु चिकित्सालय सुविधा व संसाधनों के अभाव में बदहाली की दहलीज पर पहुंच चुके हैं। उपखंड के दर्जन पशु चिकित्सालयों में से कुछ के पास भवन नहीं है, तो कई में चिकित्सकों का अभाव है। कई चिकित्सालयों में तो चिकित्सक के अलावा कर्मियों का भी अभाव बना हुआ है। जिससे एक-एक चिकित्सक को तीन-तीन केंद्रों का प्रभार सौंपा गया है।</p>
<p><strong>बाजार से लाने पड़ते हैं इंजेक्शन</strong><br /> पालिका क्षेत्र में स्थित पशु चिकित्सालय में प्रतिदिन औसतन 100 पशु इलाज के लिए लाए जाते हैं। अस्पताल में बीमार पशुओं के उपचार अलावा गोशाला में भी प्रतिदिन गायों का चिकित्सकीय परीक्षण होता है। फार्मासिस्ट नहीं होने के कारण पशुपालकों को दिक्कत होती है। जब चिकित्सक क्षेत्र में होते हैं तो उन्हें उनके वापस आने का इंतजार करना पड़ता है। यदि फार्मासिस्ट की तैनाती चिकित्सालय पर हो तो उन्हें काफी सहूलियत होगी। वहीं कई बार यहां पशुओं को लगाने के लिए इंजेक्शन भी नहीं मिल पाते हैं। यह बाजार से ही खरीदने पड़ते हैं।</p>
<p>पशु चिकित्सक नहीं होने से महंगी एंटीबायोटिक दवाइयों की काफी कमी है, जो पशु चिकित्सक के अधिकार में आती है। पशु धन निरीक्षक की प्राथमिकता में प्राथमिक उपचार की दवाइयां ही भेजी जाती हैं। मैं नगर के पशु चिकित्सालय में डेपुटेशन पर कार्यरत हूं। पालिका क्षेत्र के समीप गांव पीपाखेड़ी में पोस्टेड हूं।<br /><strong>-विशाल मीणा, पशु धन निरीक्षक, सुकेत</strong></p>
<p> पालिका क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को पशु चिकित्सालय के लिए चिकित्सक की गुहार मंत्री से करनी चाहिए। जिससे पालिका क्षेत्र का वर्चस्व बढ़े।<br /><strong> -हेमेंद्र सांखला, ईओ, नगर पालिका, सुकेत </strong></p>
<p>डॉक्टर की नियुक्ति हो जाए तो मेडिसिन में समस्या नहीं आएगी। पदाधिकारियों को वैकल्पिक या स्थाई व्यवस्था करनी चाहिए।<br /><strong>-अनिल मीणा, ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी, रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Jul 2025 15:10:32 +0530</pubDate>
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                <title>गौशाला व बंधा गांव में हजारों पशु, फिर भी नहीं है चिकित्सालय की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ गौशाला में बीमारियों का बढ़ रहा प्रकोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-animals-in-the-cowshed-and-bandha-village--yet-there-is-no-hospital-facility/article-112416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर से कई किलोमीटर दूर बंधा गांव और वहां स्थित नगर निगम की गौशाला में जहां हजारों पशु हैं। वहां पशु चिकित्सालय की सुविधा तक नहीं है। निगम की गौशाला में इन दिनों बीमारियों का प्रकोप होने के बावजूद गौशाला कम्पाउंडरों के भरोसे है। बंधा धर्मपुरा में नगर निगम की गौशाला है।  जहां शहर से लावारिस हालत में पकड़े गए गौवंश को रखा गया है। वर्तमान में यहां करीब 3 हजार से अधिक मवेशी हैं। जिनमें सांड से लेकर गाय व बछड़े तक शामिल है। हालत यह है कि लावारिस हालत में पकड़े गए इन गौवंश में से अधिकतर बीमार  व कमजोर हालत में आते हैं। जिन्हें पशु चिकित्सक की देखभाल की आवश्यकता रहती है। गौशाला में बीमार व कमजोर गायों को अलग बाड़े में रखा हुआ है। हालांकि यहां पशु चिकित्सा केन्द्र तो बनाया हुआ है। लेकिन चिकित्सालय की सुविधा नहीं है। केन्द्र में मात्र कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं। जिनके भरोसे पूरी गौशाला में गौवंश की देखभाल व उपचार किया जा रहा है। बंधा में ही गायत्री परिवार की गौशाला भी है। साथ ही गांव में अन्य पशु पालकों के भी पशु है। ऐसे में उन सभी को  पशुओं के बीमार होने पर उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>चक्कर खाकर गिरने का बढ़ रहा रोग</strong><br />नगर निगम की गौशाला में पहले जहां लम्पी रोग से ग्रसित मवेशी सबसे पहले पाए गए थे। वहीं अब इनमें एक नई बीमारी चक्कर खाकर गिरने  वाली प्रोेयेजोमा बढ़ रही है। जिससे गौवंश की मृत्युदर में बढ़ोतरी हुई है। हालत यह है कि इस रोग के होने के बाद भी वहां न तो  पशु चिकित्सक की सुविधा है और न ही चिकित्सालय की। जिससे रोजाना मरने वाले गौवंश की संख्या सामान्य से अधिक हो गई है। </p>
<p><strong>सेवानिवृत्त उप निदेशक कार्यरत</strong><br />नगर निगम की ओर से पशु चिकित्सालय से सेवानिवृत्त उप निदेशक डॉ. नंद किशोर वर्मा को नियुक्त किया हुआ है। लेकिन वे अधिकतर समय किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में ही सेवाएं देते हैं। जबकि गौशाला में कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं।  हालांकि बोराबास पशु चिकित्सा केन्द्र से सरकारी डॉक्टर गौशाला में आते हैं लेकिन वह कभी-कभी ही आते हैं।  </p>
<p><strong>पशु चिकित्सालय व चिकित्सक हो</strong><br />निगम की गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश है।  इसके अलावा वहां निजी गौशाला व गांव में अन्य पशु भी हैं। ऐसे में वहां पशु चिकित्सालय और पशु चिकित्सक का होना आवश्यक है। जिससे इतने अधिक गौवंश के बीमार होने पर उन्हें समय पर तुरंत उपचार मिल सके। हालांकि गौशाला में कम्पाउंडर हैं लेकिन वे अपना काम तो कर रहे हैं जबकि डॉक्टर का काम तो डॉक्टर ही कर सकता है। <br /><strong>-डॉ. नंद किशोर वर्मा, रिटायर्ड उप निदेशक, पशु चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>आयुक्त समेत अधिकारियों को कई बार कराया अवगत</strong><br /> निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। यह क्षमता से काफी अधिक है। ऐसे में यहां शहर से लावारिस हालत में लाए जा रहे गौवंश को घूमने की पर्याप्त जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में वर्तमान में गौशाला में प्रोयेजोमा बीमारी का प्रकोप बढ़ा है। जिसमें पशु चक्कर खाकर गिरते हैं और वापस उठ नहीं पाते। जिससे उनकी मृत्युदर अधिक हुई है। इस बीमारी से रोजाना 5 से 6 गौवंश की मौत हो रही है। इस बीमारी के उपचार और गौशाला में पशु चिकित्सक की सुविधा करवाने के सबंध में निगम आयुक्त व अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लिखित में देने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। गौशाला में कम्पाउंडरों से काम चलाया जा रहा है। बोराबांस से पशु चिकित्सक कभी-कभी आकर गौशाला का निरीक्षण करते हैं। जबकि यहां नियमित पशु चिकित्सक होना चाहिए। <br /><strong>-जितेद्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की साप्ताहिक विजिट</strong><br />गौशाला में स्थायी रूप से तो कम्पाउंडर लगाए हुए हैं। वे पूरे समय वहां सेवाएं दे रहे हैं। उनके अलावा किशोरपुरा कायन हाउस में सेवानिवृत्त डॉक्टर को भी लगाया हुआ है।साथ ही बोराबांस से सरकारी डॉक्टर सप्ताह में निगम की गौशाला का विजिट करते हैं। वर्तमान में जो बीमारी गौशाला में हुई है  उसकी दवाईयां व उपचार की व्यवस्था की जा रही है। <br /><strong>-महेश गोयल, उपायुक्त व प्रभारी गौशाला नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 15:14:31 +0530</pubDate>
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