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                <title>social justice - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रधानमंत्री बालेन शाह का बड़ा फ़ैसला : दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार के लिए मांगेंगे माफ़ी, सामाजिक संगठनों ने की भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग</title>
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                        <![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दलित समुदाय पर सदियों से हुए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी का ऐलान किया है। सरकार की 100-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत 15 दिनों में विशेष सुधार कार्यक्रम शुरू होंगे। सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है, हालांकि जाति-आधारित भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए अभी सख्त कानूनी क्रियान्वयन की चुनौती बरकरार है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prime-minister-balen-shahs-big-decision-will-apologize-for-centuries/article-149015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/balen-shah.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के देश के दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार को लेकर माफी मांगने के ऐलान का आम लोगों, सामाजिक संगठनों ने दिल खोल कर स्वागत किया है। गौरतलब है कि नेपाल में दलित समुदाय को दशकों से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा गया है। उनको पीढ़ियों से, सामाजिक जगहों और सरकारी तंत्र, दोनों में ही गंभीर अन्याय और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है।</p>
<p>सदियों से चले आ रहे इस उत्पीड़न को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने अपने 100-सूत्रीय कार्ययोजना के हिस्से के तौर पर, दलितों और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों से औपचारिक रूप से माफी मांगने और 15 दिनों के भीतर उनके उत्थान के लिए विशेष सुधार कार्यक्रमों की घोषणा करने का फैसला किया। उनके इस ऐलान का दलित समुदाय के नेताओं, समाज सुधार के लिए काम करने वाले संगठनों ने खुशी का इजहार किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि यह एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण क्षण है। फिर भी, वास्तविक बदलाव लाकर इस माफी को सार्थक बनाना, कहने में जितना आसान है, करने में उतना ही मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि नेपाल ने 1963 में एक नए राष्ट्रीय कानून के ज़रिए छुआछूत को खत्म कर दिया था, लेकिन इसके कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण हाशिए पर पड़े समूहों के साथ भेदभाव जारी रहा। बाद में, 1990 के संविधान ने छुआछूत को फिर से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किया। साल 2006 की अंतरिम संसद ने भी नेपाल को छुआछूत-मुक्त देश घोषित किया।</p>
<p>इसके अलावा, 2011 में, सरकार ने 'जाति-आधारित भेदभाव और छुआछूत अधिनियम' पेश किया। 2015 के संविधान ने अनुच्छेद 40 के तहत उनके अधिकारों की गारंटी दी, जिसमें सभी सरकारी निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा के प्रावधान भी शामिल थे। ये कानून महत्वपूर्ण और आवश्यक थे। फिर भी, इन कानूनी सुधारों के बावजूद, दलितों की स्थिति में बड़े पैमाने पर कोई बदलाव नहीं आया।</p>
<p>अखबार ने यह भी लिखा है कि यह बेहद खराब स्थिति सरकार से सिर्फ़ एक दिखावटी कदम से कहीं ज़्यादा की मांग करती है—खासकर उस सरकार से जिसे हाल के चुनावों में सुधारों के लिए लोगों का ज़बरदस्त समर्थन मिला है। सरकार के पास हाशिए पर पड़े समूहों का जीवन बेहतर बनाने की बहुत बड़ी ताकत है। इसलिए, भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना, हाशिए पर पड़े समूहों की शिक्षा और रोज़गार के बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाना, और जाति-आधारित हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत ज़रूरी है। इसका मतलब यह भी है कि राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। लेकिन, बदकिस्मती से, मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में भी सिर्फ़ एक दलित सदस्य है और संसद में सिर्फ़ 17 दलित सांसद हैं, जबकि 134 सांसद 'खास' समुदाय से हैं, जो ऐतिहासिक रूप से एक दबदबा रखने वाला समूह रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>बसपा प्रमुख मायावती का बड़ा ऐलान: आपराधिक छवि वाले किसी भी व्यक्ति को टिकट नही देगी ​पार्टी, संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को तेज करने पर दिया ज़ाेर </title>
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                        <![CDATA[बसपा प्रमुख मायावती ने आगामी यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अपराधिक छवि वालों को टिकट नहीं मिलेगा। लखनऊ बैठक में उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा। मायावती ने कार्यकर्ताओं से 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती को मिशनरी भावना से मनाने और सर्वसमाज को जोड़ने का आह्वान किया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bsp-chief-mayawatis-big-announcement-will-not-give-ticket-to/article-148557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/mayawati-photo.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि चुनाव में किसी भी आपराधिक छवि वाले को पार्टी टिकट नही देगी। साथ ही उम्मीदवारों के चयन में सर्वसमाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। रविवार को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की अहम बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को तेज करने पर जोर दिया। </p>
<p>बैठक में मायावती ने पार्टी के पिछले दिशा-निर्देशों की समीक्षा करते हुए कहा कि देश और जनहित के प्रति सरकारों की उदासीनता से जनता त्रस्त है और अब वह उम्मीद भरी नजरों से बसपा की ओर देख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी निष्ठा, मेहनत और लगन के साथ काम करना होगा, किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और गरीब राज्य में रोजगार, महंगाई और आजीविका की समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। सरकारें इन मुद्दों पर ठोस समाधान देने के बजाय केवल वादों और जुमलेबाजी तक सीमित हैं, जिससे आमजन का जीवन और कठिन हो गया है।</p>
<p>मायावती ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक तनाव, विशेषकर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पेट्रोल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मेहनतकश वर्ग पर पड़ा है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर कहा कि यह केवल नारा नहीं बल्कि इसे वास्तविकता में बदलने की जरूरत है। इसके लिए सरकार को दीर्घकालीन और सर्वसम्मति आधारित नीति बनानी चाहिए, जिसमें सभी दलों को शामिल किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने 14 अप्रैल को भीमराव अम्बेडकर जयंती को पूरे प्रदेश में मिशनरी भावना से मनाने का आह्वान किया और लखनऊ स्थित अम्बेडकर स्मारक पर बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रद्धांजलि देने की अपील की। उन्होंने आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि बहुजन समाज के हितों की रक्षा के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:26:06 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: बोले-बड़े पदों पर कमजोर वर्ग की हिस्सेदारी हो सुनिश्चित, दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने का लगाया आरोप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संस्थानों में बहुजन समाज की कम भागीदारी पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और प्रदर्शन के बहाने दलित-आदिवासी कर्मचारियों की पदोन्नति रोकी जाती है। राहुल ने आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधारों की मांग की है ताकि उच्च पदों पर पिछड़े वर्गों को समान हक मिल सके।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-attacked-the-centre-said-ensure-that-weaker/article-148426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश के संस्थानों में बहुजन समाज की बड़े पदों पर हिस्सेदारी कम है और उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधार किए जाने चाहिए। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीड़िया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनसे मिलने जब भी किसी संस्थान या संगठन के लोग आते हैं तो सबकी शिकायत यही रहती है कि उनके संस्थान में वरिष्ठ पदों पर कमजोर वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी नहीं के बराबर है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हाल ही में जनसंसद में ग्रामीण बैंक के एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी यह बात सामने आई कि प्रोन्नति में रोस्टर नियम होने के बावजूद दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जाता है। कभी प्रदर्शन तो कभी मेरिट के नाम पर उनकी तरक्की रोकी जाती है, जबकि आवाज उठाने पर दूरदराज क्षेत्रों में तबादले जैसी कार्रवाई भी की जाती है।"</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि आरक्षण के चलते इन समुदायों को प्रारंभिक स्तर पर नौकरियां तो मिल जाती हैं, लेकिन उच्च पदों तक पहुंचना नीतिगत भेदभाव के कारण लगभग असंभव बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा ताकि हर वर्ग को संस्थाओं में समान भागीदारी मिल सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 15:55:22 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विहिप ने किया स्वागत, कहा-अनुसूचित समाज के अधिकारों से समझौता नहीं, धर्मांतरण गतिविधियों पर लगेगा अंकुश</title>
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                        <![CDATA[विश्व हिंदू परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है। सुरेंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि धर्मांतरण के बाद व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में नहीं रहता और उसे एट्रोसिटी एक्ट का संरक्षण नहीं मिलेगा। विहिप के अनुसार, यह फैसला संवैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकेगा और केवल हिंदू, सिख एवं बौद्ध अनुयायियों के हक की रक्षा करेगा।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/vhp-welcomed-the-decision-of-the-supreme-court-and-said/article-147829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना को सुदृढ़ करने वाला बताया है। विहिप के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि धर्मांतरण के बाद कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति की संवैधानिक श्रेणी में नहीं आता और उसे अनुसूचित जाति एव जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता।</p>
<p>जैन ने कहा कि यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की भावना के अनुरूप है, जिसमें केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन प्रवृत्तियों पर रोक लगाएगा, जिनमें धर्म परिवर्तन के बाद भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर संवैधानिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार, इससे तथाकथित धर्मांतरण गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा।</p>
<p>डॉ. जैन ने कहा कि अनुसूचित जातियों को दिए गए अधिकारों का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से भी अलग हो जाता है, जिसके आधार पर ये विशेष अधिकार दिए गए हैं।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुनः हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटता है और समाज उसे स्वीकार करता है, तो वह दोबारा इन अधिकारों का पात्र बन सकता है। विहिप नेता ने कहा कि यह निर्णय सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि संगठन देशभर में ऐसे लोगों की पहचान करेगा, जिन्होंने कथित रूप से अनुसूचित समाज के अधिकारों का दुरुपयोग किया है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक दिलाया जा सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 16:15:00 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>ट्रांसजेंडर विधेयक के खिलाफ ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं ने की राहुल गांधी से मुलाकात: समुदायों से जुड़े लोगों, की कानूनी पहचान और संरक्षण खतरे में पड़ने का लगाया आरोप</title>
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                        <![CDATA[ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात कर केंद्र के प्रस्तावित विधेयक का विरोध किया। उन्होंने आत्म-पहचान के अधिकार और अमानवीय मेडिकल जांच पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताते हुए संसद में विधेयक का कड़ा विरोध करने और ट्रांसजेंडर समुदाय की गरिमा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/transgender-rights-activists-met-rahul-gandhi-against-the-transgender-bill/article-147709"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul--gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देशभर से ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को संसद में नेता विपक्ष लोकसभा राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ सांसद और नेता भी मौजूद रहे।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रस्तावित ट्रांसजेंडर पर्सन्स बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक उनकी आत्म-पहचान के अधिकार को कमजोर करता है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने मान्यता दी है। उनका कहना था कि इस बिल के लागू होने से लाखों ट्रांसजेंडर खासकर पारंपरिक समुदायों से जुड़े लोगों, की कानूनी पहचान और संरक्षण खतरे में पड़ सकते हैं। कार्यकर्ताओं ने बिल के कुछ प्रावधानों को अमानवीय और दंडात्मक बताते हुए अनिवार्य मेडिकल जांच, पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना दंडात्मक प्रावधानों और मौजूदा अधिकारों में कटौती पर भी चिंता जताई।</p>
<p>राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और गरिमा के साथ खड़ी है और इस विधेयक का संसद में विरोध करेगी। राहुल गांधी ने इसे खुला हमला करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का ट्रांसजेंडर व्यक्ति (संशोधन) विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर एक खुला हमला है। उन्होंने कहा ट्रांसजेंडर लोगों से अपनी पहचान स्वयं निर्धारित करने का अधिकार छीनता है, जो उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लंघन है। यह देशभर के विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को खत्म करता है और ट्रांसजेंडर लोगों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष अमानवीय जांच के लिए मजबूर करता है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:34:09 +0530</pubDate>
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                <title>मायावती का राजनीति दलों पर हमला: बोली-सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर काम करती है बसपा, जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटने का लगाया आरोप</title>
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                        <![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी हुंकार भरी। उन्होंने विरोधी दलों पर जाति-धर्म की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल बसपा ही 'सर्वजन सुखाय' पर टिकी है। मायावती ने कार्यकर्ताओं को दलित-आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ गांव-गांव जाकर संगठन मजबूत करने का निर्देश दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mayawati-attacked-political-parties-said-bsp-works-on-the-principles/article-147436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/mayawati-photo.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये पार्टियां चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दल जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटकर राजनीति करते हैं, जबकि बसपा सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर काम करती है।</p>
<p>रविवार को मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में इन राज्यों में पार्टी की स्थिति, संगठन विस्तार, जनाधार बढ़ाने और चुनावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।</p>
<p>मायावती ने कहा कि बीएसपी “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है, जिसका लक्ष्य समाज के सभी वर्गों दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक को समान सम्मान और अधिकार दिलाना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को लोगों तक पहुंचाएं तथा अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर संगठन को मजबूत करें।</p>
<p>बैठक में मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में बढ़ती जातीय घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। मायावती ने कहा कि इन राज्यों में खासकर दलित और आदिवासी समाज के साथ हो रहे अत्याचार गंभीर मुद्दा हैं और सरकारों को इस पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कानून-व्यवस्था बेहतर थी और सभी वर्गों को सुरक्षा व सम्मान मिला था। उन्होंने दावा किया कि बीएसपी ही एकमात्र पार्टी है जो अपने वादों को जमीन पर लागू करती है। मायावती ने कार्यकर्ताओं से आगामी कार्यक्रमों कांशीराम जयंती, डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती और पार्टी स्थापना दिवस को मिशनरी भावना से मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती, जमीनी स्तर पर सक्रियता और जनता के बीच निरंतर संपर्क ही चुनावी सफलता की कुंजी है।</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:21:54 +0530</pubDate>
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                <title>ईद-उल-फितर पर मायावती ने दी देश और प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं: समतामूलक विकास को मिले रफ्तार, सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की</title>
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                        <![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने ईद-उल-फितर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने इस त्योहार को आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक बताया। मायावती ने डॉ. अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की याद दिलाते हुए सभी नागरिकों से शांति, संयम और समानता बनाए रखने की अपील की है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-eid-ul-fitr-mayawati-congratulated-and-wished-the-people-of-the/article-147311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mayawati1.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पवित्र रमजान माह के समापन पर मनाए जाने वाले ईद उल फितर के अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने खासतौर पर देश-दुनिया में रह रहे सभी मुस्लिम परिवारों को ईद की दिली मुबारकबाद देते हुए सभी भारतीयों के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की है । </p>
<p>मायावती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि एक महीने तक रोजा और तरावीह जैसी इबादतों के बाद आने वाला यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। </p>
<p>बसपा की मुखिया मायावती ने कहा कि भीम राव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मानजनक जीवन की गारंटी दी है, जिसे बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मेलजोल, भाईचारा, संयम और सहनशीलता की परंपरा को आगे बढ़ाएं, ताकि देश में समतामूलक विकास को गति मिले। उन्होंने कहा कि देश की खुशहाली और तरक्की में सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, जिससे हर व्यक्ति गर्व महसूस कर सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 13:58:58 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी ने की बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र</title>
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                        <![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर बहुजन नायक कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की है। राहुल ने उन्हें सामाजिक न्याय का योद्धा बताते हुए कहा कि कांशीराम जी ने वंचितों में राजनीतिक चेतना जगाई। उन्होंने इस सम्मान को करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-wrote-a-letter-to-the-prime-minister-demanding/article-146585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता कांशीराम की जयंती के अवसर पर पत्र लिखकर उनको मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की है।</p>
<p>राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक मान्यवर कांशीराम जी ने भारतीय राजनीति की प्रकृति को बदलने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों, वंचितों और गरीब तबकों में राजनीतिक चेतना जगाई और उन्हें यह अहसास कराया कि उनका वोट, आवाज़ और प्रतिनिधित्व बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिखा कि कांशीराम जी ने अपना पूरा जीवन संविधान द्वारा वादा किए गए समानता, गरिमा और भागीदारी के सिद्धांतों को समाज के सबसे निचले पायदान तक पहुंचाने के लिए समर्पित किया। उनके प्रयासों से भारतीय लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुईं और राजनीति अधिक प्रतिनिधिक और न्यायपूर्ण बनी।</p>
<p>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कई वर्षों से दलित बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और नेता कांशीराम जी को भारत रत्न देने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भी इस मांग को जोरदार तरीके से दोहराया गया, जो व्यापक जनभावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांशीराम जी को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करना उनके महान योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने के साथ-साथ उन करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं को भी सम्मान देगा जो उन्हें सशक्तिकरण और उम्मीद के प्रतीक के रूप में देखते हैं।<br />राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से इस मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 18:23:28 +0530</pubDate>
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                <title>मायावती ने कांशीराम को अर्पित की श्रद्धांजलि: कहा बसपा आंदोलन से जुड़कर बहुजन समाज बने ईमानदार और मिशनरी अम्बेडकरवादी </title>
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                        <![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने समर्थकों से मिशनरी अंबेडकरवादी बनने और वोट की ताकत से 'मास्टर चाबी' हासिल करने का आह्वान किया। मायावती ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति ही कांशीराम का असली सपना है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mayawati-paid-tribute-to-kanshi-ram-and-said-that-by/article-146578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mayawati.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित देते हुए बहुजन समाज से अपील की है कि वे बसपा आंदोलन से जुड़कर ईमानदार और मिशनरी अम्बेडकरवादी बनें। उन्होने कहा कि बहुजन समाज अपने वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल कर सकता है, जिससे संविधान में दिए गए अधिकारों को जमीन पर लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि यही कांशीराम का मिशन और उनके जीवन का संदेश भी है।</p>
<p>मायावती ने रविवार को एक्स पर जारी संदेश में कहा कि मान्यवर कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होने कहा कि कांशीराम ने डॉ. आंबेडकर की सोच और आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए देशभर में बहुजन समाज को संगठित किया। उन्होंने जाति के आधार पर उपेक्षित और पिछड़े लोगों को एकजुट कर उन्हें सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने का काम किया। उनके नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी ने सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के मिशन को आगे बढ़ाया।</p>
<p>बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांशीराम के ऐतिहासिक प्रयासों के कारण बहुजन समाज में राजनीतिक जागरूकता आई और समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिली। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे कांशीराम के विचारों और मिशन को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 16:33:47 +0530</pubDate>
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                <title>प्रियंका गांधी ने दी कांशी राम की जयंती पर श्रद्धांजलि, सामाजिक न्याय के महारथी और दलितों एवं अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों की सशक्त आवाज के रूप में किया याद</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बहुजन आंदोलन के प्रणेता कांशी राम को उनकी जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कांशी राम को दलितों और पिछड़ों की सशक्त आवाज़ बताते हुए कहा कि उनके विचारों ने समानता और संवैधानिक न्याय को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। कांशी राम का राजनीतिक सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन का संघर्ष पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/priyanka-gandhi-pays-tribute-to-kanshi-ram-on-his-birth/article-146557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/priyanka-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने रविवार को बहुजन आंदोलन के नेता कांशी राम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सामाजिक न्याय के महारथी और दलितों एवं अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों की सशक्त आवाज के रूप में याद किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सुश्री गांधी ने कहा कि कांशी राम के जीवन और विचारों ने समानता और न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>उन्होंने लिखा, सामाजिक न्याय की विचारधारा के महापुरुष और दलितों, हाशिए पर पड़े लोगों और शोषितों की सशक्त आवाज श्री कांशी राम जी की जयंती पर हार्दिक श्रद्धांजलि। अपने विचारों और आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने समानता एवं न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके विचार हम सभी को सदा प्रेरित करते रहेंगे।</p>
<p>कांशी राम का जन्म 1934 में पंजाब में हुआ था। स्वतंत्रता के बाद के भारत में दलित आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और हाशिए पर पड़े समुदायों को संगठित करने का काम किया, साथ ही ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक सशक्तिकरण की वकालत की।</p>
<p>उन्होंने पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी संघ (बीएएमसीईएफ) और बाद में दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (डीएस-4) जैसे संगठनों की भी स्थापना की, जिसने दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के बीच एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन की नींव रखी।</p>
<p>कांशी राम के प्रयासों ने उत्तर भारत में दलित राजनीति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया और मायावती जैसी नेताओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो बाद में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। सामाजिक न्याय एवं राजनीतिक सशक्तिकरण में उनके योगदान को याद करने के लिए पूरे देश में उनके समर्थकों और राजनीतिक नेताओं द्वारा उनकी जयंती मनाई जाती है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:28:36 +0530</pubDate>
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                <title>तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क का केंद्र सरकार पर हमला, बोलें-राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर ही देश की समस्याओं का होगा समाधान</title>
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                        <![CDATA[तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने विकाराबाद में आयोजित कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में कहा कि देश की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर ही संभव है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bhatti-vikramarks-attack-on-the-central-government-says-that-the/article-144316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/te.png" alt=""></a><br /><p>विकाराबाद। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने सोमवार को कहा कि देश की गहन समस्याओं का समाधान तभी होगा जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे। भट्टी ने यहाँ डीसीसी अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में जातिगत मुद्दे और आरक्षण-जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कैसे लडऩा चाहिए विषय पर बोलते हुए कहा कि जहाँ कहीं भी छुआछूत या जातिगत भेदभाव की घटनाएँ होती हैं, राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) के अध्यक्षों से दोनों राज्यों में अधिकतम लोकसभा सीटें सुरक्षित करने के लिए काम करने का आह्वान किया।</p>
<p>रोहित वेमुला की मृत्यु का संदर्भ देते हुए भट्टी ने कहा कि राहुल गांधी ने परिसर का दौरा किया था, छात्रों के साथ बातचीत की और आंदोलन का समर्थन किया, साथ ही यह सुनिश्चित किया कि इस मुद्दे को राजनीतिक बनाने के बजाय एक सामाजिक सरोकार के रूप में देखा जाए। उन्होंने बताया कि कर्नाटक और तेलंगाना में रोहित वेमुला के नाम पर कानून बनाने के प्रयास चल रहे हैं।</p>
<p>उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने चुनावों से पहले संसाधनों और धन के समान वितरण का वादा किया था और कांग्रेस द्वारा गठित सरकारें उसी दिशा में कल्याण और विकास कार्यक्रम लागू कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार, 50 दिनों के भीतर जाति जनगणना पूरी की गई और विधानसभा में पेश की गई, जहाँ इसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।</p>
<p>केंद्र सरकार पर कांग्रेस पार्टी को खत्म करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए भट्टी ने कहा कि जिस पार्टी ने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक समानता प्राप्त करने के उद्देश्य से कानून बनाए, उसे अब कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के तहत निशाना बनाया जा रहा है। भट्टी ने केंद्र सरकार पर संविधान को कमजोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, एससी/एसटी सब-प्लान, भूमि सुधार और बैंकों का राष्ट्रीयकरण जैसे उपाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कांग्रेस सरकारों के तहत लागू किए गए थे।</p>
<p>बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, डॉ. वंशी चंदर रेड्डी, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के नेता विश्वनाथन, सावंत, सचिन राव और अन्य पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:50:35 +0530</pubDate>
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                <title>सामाजिक न्याय का वैश्विक संकल्प और चुनौती</title>
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                        <![CDATA[प्रतिवर्ष 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-global-commitment-and-challenge-of-social-justice/article-143897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>प्रतिवर्ष 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वैश्विक समुदाय को याद दिलाता है कि शांति, स्थिरता और विकास की आधारशिला सामाजिक न्याय ही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2007 में इस दिवस की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया था कि गरीबी, बेरोजगारी, बहिष्कार और असमानता जैसी चुनौतियां केवल आर्थिक प्रश्न नहीं हैं, बल्कि न्याय और मानव गरिमा के प्रश्न हैं। 2009 से यह दिवस औपचारिक रूप से मनाया जा रहा है और हर वर्ष यह सरकारों, संस्थाओं और नागरिक समाज को यह सोचने के लिए बाध्य करता है कि विकास का लाभ किन तक पहुंच रहा है और कौन अब भी हाशिये पर है। दरअसल विश्व सामाजिक न्याय दिवस वैश्विक विकास मॉडल की नैतिक और व्यावहारिक समीक्षा का क्षण है। यह हमें यह सोचने के लिए बाध्य करता है कि आर्थिक वृद्धि, तकनीकी उन्नति और नीतिगत सुधारों के बीच मनुष्य की गरिमा को कितना महत्व दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>विकास की बुनियादी शर्त :</strong></p>
<p>सामाजिक न्याय कोई भावनात्मक अवधारणा नहीं, बल्कि किसी भी समाज की स्थिरता और दीर्घकालिक विकास की बुनियादी शर्त है। अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि जहां असमानता गहरी होती है, वहां सामाजिक तनाव, असुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है। रोजगार की अनिश्चितता, श्रम का अवमूल्यन, सामाजिक सुरक्षा का कमजोर ढांचा और पहचान के आधार पर भेदभाव ये सभी कारक विकास के लाभों को सीमित वर्गों तक सिमटने देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अपनाया गया बाजार केंद्रित विकास मॉडल तब तक संतुलित नहीं हो सकता, जब तक उसके साथ सामाजिक संरक्षण और न्यायपूर्ण वितरण की ठोस व्यवस्था न जुड़ी हो। भारत के संदर्भ में यह प्रश्न और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहां सामाजिक संरचना ऐतिहासिक असमानताओं से गहराई से प्रभावित रही है। संविधान निर्माताओं ने इस वास्तविकता को स्वीकार करते हुए सामाजिक न्याय को राज्य की मूल जिम्मेदारी माना।</p>
<p><strong>नीतिगत लक्ष्य बनाया गया :</strong></p>
<p>समानता और बंधुत्व को केवल नैतिक आदर्श नहीं, बल्कि नीतिगत लक्ष्य बनाया गया। आरक्षण, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधान इसी सोच का परिणाम हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन उपायों ने सामाजिक गतिशीलता को बढ़ाया और बड़ी आबादी को अवसरों के दायरे में लाया है। फिर भी, वास्तविक स्थिति का विश्लेषण यह बताता है कि उपलब्धियां और सीमाएं साथ साथ मौजूद हैं। आर्थिक विकास की गति तेज है, लेकिन उसका सामाजिक प्रभाव असमान है। आय और संपत्ति का संकेंद्रण बढ़ा है, जिससे सामाजिक दूरी गहरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी भूमि और संसाधनों पर सीमित वर्गों का वर्चस्व बना हुआ है। शहरीकरण ने अवसर बढ़ाए हैं, पर साथ ही असंगठित श्रम, असुरक्षित आवास और अस्थायी रोजगार जैसी समस्याएं भी पैदा की हैं। विशेषज्ञ दृष्टि से यह संकेत है कि विकास की दिशा में सामाजिक संतुलन अभी पर्याप्त नहीं है।</p>
<p><strong>सामाजिक न्याय की कसौटी :</strong></p>
<p>महिलाओं की स्थिति सामाजिक न्याय की कसौटी पर एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है। शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन श्रम बाज़ार में उनकी सीमित उपस्थिति यह दर्शाती है कि संरचनात्मक बाधाएं अब भी मौजूद हैं। समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी जैसे मुद्दे केवल कानूनी नहीं, सामाजिक स्वीकृति से भी जुड़े हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक घरेलू और सामाजिक भूमिकाओं को लेकर दृष्टिकोण नहीं बदलेगा, तब तक महिलाओं के लिए वास्तविक समानता संभव नहीं होगी। युवाओं के संदर्भ में बेरोजगारी और कौशल असंगति एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरती है। शिक्षा प्रणाली और रोजगार बाज़ार के बीच बढ़ता अंतर सामाजिक न्याय के प्रयासों को कमजोर करता है। बड़ी संख्या में शिक्षित युवा यदि उत्पादक अवसरों से वंचित रहते हैं, तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक असंतोष का कारण बनता है।</p>
<p><strong>मुख्यधारा से जोड़ना संभव :</strong></p>
<p>आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की स्थिति यह दर्शाती है कि विकास और न्याय के बीच संतुलन कितना नाजुक है। खनन, अवसंरचना और औद्योगिक परियोजनाओं के कारण विस्थापन और आजीविका का संकट लगातार सामने आया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि विकास स्थानीय समुदायों की सहभागिता और सहमति के बिना आगे बढ़ता है, तो वह सामाजिक न्याय को कमजोर करता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की बुनियादी सुविधाओं के बिना किसी भी समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना संभव नहीं है। एक और महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक मानसिकता का है। कानून और नीतियां ढांचा प्रदान कर सकती हैं, लेकिन भेदभाव और पूर्वाग्रह को समाप्त करने के लिए सामाजिक चेतना में परिवर्तन अनिवार्य है। शिक्षा, सार्वजनिक विमर्श और मीडिया की भूमिका यहां निर्णायक होती है।</p>
<p><strong>व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा :</strong></p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक समाज समानता को केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य के रूप में स्वीकार नहीं करेगा,तब तक न्याय अधूरा रहेगा। समग्र रूप से देखें तो भारत की स्थिति सामाजिक न्याय के मोर्चे पर प्रगति और चुनौती दोनों का मिश्रण है। उपलब्धियां यह बताती हैं कि दिशा सही है, लेकिन सीमाएं यह संकेत देती हैं कि गति और गहराई दोनों बढ़ाने की आवश्यकता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस विशेषज्ञ दृष्टि से आत्मसंतोष का नहीं, आत्मावलोकन का अवसर है। यह याद दिलाता है कि न्याय कोई अंतिम अवस्था नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यदि विकास को सचमुच टिकाऊ और मानवीय बनाना है, तो नीतियों के केंद्र में अंतिम व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा को रखना ही होगा।</p>
<p><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 12:35:40 +0530</pubDate>
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