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                <title>social justice - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>social justice RSS Feed</description>
                
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                <title>अखिलेश का केंद्र पर हमला: 2027 चुनाव से पहले महिला आरक्षण पर सरकार अपना रुख साफ करें, बंगाल में मिली प्रंचड़ जीत पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र से महिला आरक्षण को यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में तुरंत लागू करने की चुनौती दी है। प्रधानमंत्री मोदी के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने इसे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सामाजिक न्याय से जोड़ा। सपा अब इस अधिकार की मांग को लेकर प्रदेश भर में साप्ताहिक आंदोलन करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhileshs-attack-on-the-center-government-should-clear-its-stand/article-152731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/akhilesh.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की स्पष्ट मांग है कि संसद में पारित महिला आरक्षण को उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव में लागू करने की तत्काल घोषणा की जाए। अखिलेश यादव ने कहा कि यह विधेयक समस्त विपक्ष के सहयोग से पारित हुआ है, ऐसे में अब केंद्र सरकार को अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सरकार इस पर घोषणा नहीं करती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या केंद्र सरकार और उसके सहयोगी दल महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ हैं।</p>
<p>उन्होने कहा कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा नहीं की जाती, तब तक उनकी पार्टी इस मांग को लगातार उठाती रहेगी। पार्टी हर सप्ताह अलग-अलग स्थानों पर इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी और महिला आरक्षण लागू कराने के लिए दबाव बनाएगी। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि प्रदेश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाना समय की मांग है।</p>
<p>गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली पार्टी कार्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए सपा पर निशाना साधा था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण का विरोध किया था लेकिन महिलायें उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। आने वाले समय में महिलायें समाजवादी पार्टी को सबक सिखाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:01:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>खड़गे ने इंटक के स्थापना दिवस पर गौरवशाली विरासत की सराहना की, आर्थिक चुनौतियों के बीच श्रमिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्धता जताने का किया आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंटक (INTUC) के 79वें स्थापना दिवस पर श्रमिकों के संघर्ष को सलाम किया। उन्होंने गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के लिए सामाजिक सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का आह्वान किया। गांधीवादी मूल्यों से प्रेरित यह संगठन दशकों से मजदूरों की गरिमा और अधिकारों के लिए समर्पित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharge-praised-the-glorious-heritage-of-intuc-on-its-foundation/article-152515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/mallikarjun-kharge-33.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के 79वें स्थापना दिवस पर संगठन की गौरवशाली विरासत की सराहना की और उभरती आर्थिक चुनौतियों के बीच श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता जताने का आह्वान किया। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक संदेश में संगठन के सदस्यों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने दशकों से श्रमिकों के अधिकारों और गरिमा के लिए उनके संघर्ष को याद करते हुए कहा, "इंटक के 79 वर्ष पूरे होने पर मैं इसके उन अनगिनत सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने श्रमिक अधिकारों के लिए अथक संघर्ष किया है।"</p>
<p>इंटक की वैचारिक जड़ों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह संगठन भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और शुरुआती शासन के दिग्गज नेताओं जैसे जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, जगजीवन राम, अरुणा आसफ अली और गुलजारी लाल नंदा से प्रेरित रहा है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी मूल्यों पर आधारित इस यूनियन ने हमेशा हर क्षेत्र के श्रमिकों के हितों का समर्थन किया है। खरगे ने समकालीन चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्रमिकों असुरक्षित वर्गों के लिए सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "आज के दिन हमें असंगठित क्षेत्र, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स, खेतीहर मजदूरों, कारीगरों और अन्य श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक न्याय के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।"</p>
<p>गौरतलब है कि 1947 में स्थापित इंटक भारत के सबसे पुराने ट्रेड यूनियन महासंघों में से एक है, जो परंपरागत रूप से कांग्रेस पार्टी से जुड़ा रहा है। उदारीकरण और हाल के वर्षों में अनौपचारिक एवं गिग रोजगार के बढ़ने के बावजूद इसने श्रम नीतियों को आकार देने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खरगे का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश में श्रम सुधारों और गिग इकोनॉमी में काम करने वालों के लिए कानूनी सुरक्षा और कल्याणकारी उपायों की मांग तेज हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 16:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मजदूर दिवस पर मायावती का संदेश : मेहनतकश वर्ग की स्थिति में अब तक सुधार नहीं, मजदूरों और श्रमिकों की स्थिति को लेकर जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[बसपा प्रमुख मायावती ने मजदूर दिवस पर श्रमिकों की बदहाली और रोजगार अनिश्चितता पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए ठेका प्रथा और महिला सुरक्षा के मुद्दों को उठाया। मायावती ने सरकारों से विकास में मेहनतकश वर्ग की उचित भागीदारी और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mayawatis-message-on-labor-day-condition-of-working-class-has/article-152306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/मजदूर.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने मजदूर दिवस के अवसर पर देश के मजदूरों और श्रमिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देशभर में पुरुष और महिला मजदूरों तथा श्रमिक समाज की हालत में कई प्रयासों के बावजूद अब तक अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ‘मजदूर दिवस’ का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने रोज़ाना जीवन संघर्ष में जुटे मेहनतकश वर्ग के सभी लोगों को बधाई दी और उनके बेहतर भविष्य तथा अच्छे दिनों की कामना की।</p>
<p>मायावती ने कहा कि देश निर्माण में मजदूरों और मेहनतकश समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आज़ादी से पहले और बाद में भी मजदूरों के लिए सम्मानजनक और खुशहाल जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया था। हालांकि, उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ठेका प्रथा, दैनिक वेतन व्यवस्था और काम पर रखने तथा निकालने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण मजदूर वर्ग को नई समस्याओं और रोजगार की अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर उनके परिवारों के पालन-पोषण के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण का अभाव भी एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। मायावती ने सभी सरकारों से अपील करते हुए कहा कि देश के विकास में मजदूर और श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी का संघर्ष हमेशा मेहनतकश बहुजन समाज के अधिकारों के लिए समर्पित रहा है और आगे भी जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:43:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक बुलाए सरकार : जयराम ने कहा-संसद के विशेष सत्र के दौरान नहीं था महिलाओं का आरक्षण वास्तविक मुद्दा </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को तत्काल प्रभावी बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनावी शोर थमने के बाद अब 2029 तक इंतजार करने के बजाय महिलाओं को न्याय दिलाने हेतु ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि संसद में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-called-all-party-meeting-on-womens-reservation-jairam-said/article-151962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित थे, वहां अब चुनाव लगभग समाप्त हो गए हैं, इसलिए सरकार को महिला आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अब विभिन्न राज्य विधानसभाओं के लिए होने वाले चुनाव का प्रचार समाप्त हो चुका है और लोकसभा के परिसीमन को लागू करने का सरकार का प्रयास विपक्ष की एकजुटता के कारण विफल रहा है, तो अब केंद्र सरकार को महिला आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर पहल करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को वर्ष 2029 से लोकसभा की मौजूदा संख्या के साथ किस प्रकार लागू किया जा सकता है, इस पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। यह कदम संभव, वांछनीय और आवश्यक है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि संसद के विशेष सत्र के दौरान महिलाओं का आरक्षण वास्तविक मुद्दा नहीं था, बल्कि उस समय का एजेंडा परिसीमन से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 15:10:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर कमलनाथ का केंद्र सरकार पर निशाना : आरक्षण के नाम पर भ्रम फैलाने का लगाया आरोप, विशेष सत्र पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की कि 33% आरक्षण इसी संसद सत्र से लागू होना चाहिए। कमलनाथ ने चेतावनी दी कि परिसीमन के बहाने दक्षिण भारत के साथ अन्याय न हो और सरकार महंगाई व बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों पर ध्यान दे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kamal-nath-targets-central-government-on-womens-reservation-accuses-it/article-151847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kamal-nath.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि संसद में आरक्षण के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर किए गए अपने ट्वीट में कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो चुका है और उस समय कांग्रेस ने इसका समर्थन भी किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी मौजूदा संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के माध्यम से दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अन्याय करने की मंशा रखती है और इसी तथ्य को छुपाने का प्रयास कर रही है। कमलनाथ ने सवाल किया कि यदि भाजपा की नीयत वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने की है, तो वर्तमान संसद में ही इसे लागू करने में क्या दिक्कत है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर चर्चा करने के बजाय सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विशेष सत्र बुलाना चाहिए था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:54:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला कांग्रेस ने हैदराबाद में शुरू किया पोस्टकार्ड अभियान: महिला आरक्षण अधिनियम को तुरंत लागू करने की मांग, छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना महिला कांग्रेस ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू करने के लिए पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया है। अध्यक्ष एर्राबेली स्वर्ण ने आरक्षण को परिसीमन से अलग करने और 2029 चुनावों से ही प्रभावी बनाने की मांग की। कांग्रेस ने सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु इसमें ओबीसी उप-कोटा और जाति जनगणना की आवश्यकता पर भी जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mahila-congress-started-postcard-campaign-in-hyderabad-demanded-immediate-implementation/article-151225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress1.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना राज्य महिला कांग्रेस ने मंगलवार को गांधी भवन में पोस्टकार्ड हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया। जिसमें महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को तुरंत लागू करने की मांग की गई। "महिला आरक्षण विधेयक: आज करो, अभी करो" नारे के तहत आयोजित इस अभियान में प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पोस्टकार्ड भेजकर मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का आग्रह किया।</p>
<p>सभा को संबोधित करते हुए तेलंगाना राज्य महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एर्राबेली स्वर्ण ने कहा कि संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आरक्षण मौजूदा लोकसभा सीटों पर लागू किया जाए और 2029 के आम चुनावों से प्रभावी हो। उन्होंने अधिनियम के कार्यान्वयन को नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने का विरोध किया और आरोप लगाया कि ऐसा करने से दक्षिणी और छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने से पहले जाति जनगणना की भी मांग की।</p>
<p>स्वर्ण ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए प्रावधानों के अलावा, 33 प्रतिशत आरक्षण में ओबीसी महिलाओं के लिए उप-कोटा की भी मांग की और कहा कि नीति में सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से देरी किये जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अधिनियम के कार्यान्वयन को स्थगित करना महिला सशक्तिकरण को कमजोर करता है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी देश भर की महिलाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप कानून को तत्काल लागू करने के लिए दबाव बनाना जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:25:44 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय लोक मोर्चा का बड़ा ऐलान : महागठबंधन में शामिल पार्टियों के खिलाफ 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में निकालेगी धिक्कार मार्च</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिलों में धिक्कार मार्च निकालेगा। प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने कांग्रेस और महागठबंधन पर महिला आरक्षण विधेयक रोकने का आरोप लगाया। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का दावा है कि विपक्ष ने परिसीमन सुधार का विरोध कर महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-announcement-of-rashtriya-lok-morcha-that-it-will-take/article-151003"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bihr.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो)संसद में महिला आरक्षण विधेयक एवं संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के विरोधी महागठबंधन में शामिल पार्टियों के खिलाफ 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में धिक्कार मार्च निकालेगी। रालोमो के प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने रविवार को बताया कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक एवं संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के विरोध में वोट देकर कांग्रेस एवं महागठबंधन की पार्टियों ने देश की आधी आबादी को लोकसभा एवं विधानसभाओ में जाने से रोका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिल रहे अधिकारों से उनको वंचित किया है।</p>
<p>सिन्हा ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद उपेंद्र कुशवाहा पार्टी की ओर से संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के तहत बिहार में आवाज बुलंद करते रहे है, लेकिन इस अभियान को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विपक्षी दलों ने संसद में इसका विरोध कर रोक दिया। उन्होंने कहा कि यदि यह बिल कानून का रूप लेता तो बिहार में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ जाती। यदि संसद में यदि विपक्ष का सहयोग मिलता तो 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं सासंद और विधायक बनती, लेकिन महागठबंधन के सांसदों ने ऐसा नहीं होने दिया।संसद में विपक्ष की इस रवैया के खिलाफ राष्ट्रीय लोक मोर्चा 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में धिक्कार मार्च निकालेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:08:02 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार परिसीमन की आड़ में देश का निर्वाचक मानचित्र बदलना चाहती है : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे ओबीसी और दलितों के हितों पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और चुनावी लाभ के लिए भारत का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है। राहुल ने इसे 'मनुवाद' का प्रयास करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-government-wants-to-change-the-electoral-map-of-the/article-150845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi-on-mnerga.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार परिसीमन की आड़ में भारत का निर्वाचक मानचित्र बदल देना चाहती है लेकिन इससे महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं होने वाला है। राहुल गांधी ने संसदीय सीटों के परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह 'देश द्रोह' है और विपक्ष इसे किसी कीमत नहीं होने देगा। राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में शामिल होते हुए यह भी कहा कि सरकार लोक सभा सीटों का परिसीमन और विधायिका में महिलाओं का आरक्षण जिस तरह से देना चाहती है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) , दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों पर हमला है। विपक्षी सदस्य इसका कड़ा विरोध करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा, "आप ओबीसी को, दलितों को हिन्दू तो कहते हैं लेकिन सत्ता में उन्हें स्थान नहीं देते। आप इन्हें हिन्दू तो कहते हैं, लेकिन इन्हें कोई स्थान नहीं देते। कार्पोरेट में ओबीसी, दलित कहां हैं, शिक्षा क्षेत्र में वंचित वर्ग कहां है, निजी क्षेत्र में ओबीसी-दलित कहां हैं। सार्वजनिक क्षेत्र से वंचित वर्गों को हटाया जा रहा है।" राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाला पुराना विधेयक लाइये, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों के लोगों के साथ बहुत क्रूर बर्ताव किया गया। अब यह विधेयक लाकर उनके साथ बिल्कुल वही काम किया जा रहा है। ऐसा काम किया जा रहा है, जिससे पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता कभी न आने दी जाये। उन्होंने कहा, " मनुवाद संविधान पर हावी है। "</p>
<p>विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करना चाहती है, वह जानती है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। वह महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के नाम पर चुनावी लाभ लेना चाहती है। अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं कहें, जो सदन की गरिमा और मर्यादा के खिलाफ हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:06:39 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव ने साधा निशाना : संविधान संशोधन विधेयक के सहारे सत्ता की राजनीति कर रही सरकार, एसआईआर के जरिए वोट काटने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में सरकार पर तीखा हमला करते हुए महिला आरक्षण को परिसीमन लागू करने की 'साजिश' बताया। उन्होंने जातिगत जनगणना और मुस्लिम व पिछड़ी महिलाओं के लिए 'कोटे में कोटा' की मांग की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार वोट बैंक के लिए संवैधानिक संशोधन का सहारा ले रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadav-targeted-the-government-which-is-doing-power-politics/article-150711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/akhilesh-yadav2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। समाजवाद पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार सत्ता में बने रहने के लिए संविधान में 131वें संशोधन के जरिए वह महिला आरक्षण विधेयक के सहारे परिसीमन संबंधी विधेयक को पारित करवाना चाहती है। अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोकसभा में "संविधान 131 वां संशोधन विधेयक 2026" पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण विरोधी है इसलिए वह एसआईआर के जरिए घपले करवा कर सत्ता में बना रहना चाहती है। एसआईआर के माध्यम से वोट काटे जा रहे हैं और जब पकड़े जा रहे हैं तो फिर नयी तरकीब लगा कर वोट काटे जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार एसआईआर के जरिए लोगों के वोट कटवा रही है और ऐसा कर केंद्र सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट बैंक सुरक्षित करने की राजनीति कर रही है। उनका यह भी कहना था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के जरिये वोट काटे गए और जब पकड़े गए तो फॉर्म 7 लेकर उसमें नकली दस्तखत करवाए गये लेकिन इसमें भी पकड़े गए तो फॉर्म 7 का इस्तेमाल ही बंद करवा दिया गया। अब केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक के जरिए महिलाओं के वोट पाकर सत्ता में बना रहना चाहती है और अपने खोए वोट को वापस पाना चाहती है लेकिन उसे मालूम होना चाहिए कि देश की महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं और अब एलपीजी सिलेंडर ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी है इसलिए महिलाओं को रिझाकर उनका वोट हासिल करने का उनका षड्यंत्र भी बेकार हो गया है।</p>
<p>सपा नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील है तो उसे मेरठ और नोएडा की आंदोलन कर रही महिलाओं की समस्याओं की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए और इस तरह का संकट महिलाओं के सामने फिर ना आए विधेयक में इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार महिला आरक्षण के सहारे रणनीतिक तरीके से राजनीतिक लाभ पाने के लिए परिसीमन के वास्ते संविधान संशोधन विधयेक लेकर आई है।</p>
<p>सपा नेता ने कहा कि पहले जाति के आधार पर जनगणना आवश्यक है यदि जनगणना होती है तो उसके आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है लेकिन सरकार आरक्षण नहीं देना चाहती इसलिए वह जनगणना जाति के आधार पर नहीं करना चाहती है। वह अल्पसंख्यकों और खासकर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहती है। यदि जनगणना जाति के आधार पर होती है तो पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक महिलाओं को इसका वाजिब लाभ मिल सकता है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार जनगणना जाति के आधार पर नहीं करती है तो फिर महिला आरक्षण विधेयक धोखा है। उनका कहना था कि विधेयक में महिलाओं के हित के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है और पिछड़े अल्पसंख्यक महिलाओं को आरक्षण मिले बिना आरक्षण विधेयक का कोई मतलब नहीं रह जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:19:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक को जोड़ना केंद्र की बड़ी साजिश : कविता की चेतावनी-राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाले कदम से जन आंदोलन का होगा जन्म </title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना जागृति अध्यक्ष के. कविता ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को केंद्र की 'बड़ी साजिश' बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि इससे तेलंगाना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। कविता ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हकों से समझौता हुआ, तो तेलंगाना के गठन जैसा एक और जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/linking-the-delimitation-bill-with-the-womens-reservation-bill-is/article-150618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kalvakuntla-kavitha.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना जागृति पार्टी की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने गुरुवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण विधेयक के साथ जोड़ना केंद्र की एक 'बड़ी साजिश' है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेलंगाना के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाला कोई भी कदम राज्य में एक और जन आंदोलन को जन्म दे सकता है। बंजारा हिल्स स्थित तेलंगाना जागृति कार्यालय से जारी एक वीडियो बयान में कविता ने कहा कि हालांकि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है लेकिन इसे परिसीमन के साथ जोड़ने का प्रयास भ्रामक और राजनीति से प्रेरित है।</p>
<p>कविता ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने केंद्र पर परिसीमन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 'महिलाओं को ढाल के रूप में उपयोग करने' का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने टिप्पणी की, "वे प्रभावी रूप से महिलाओं के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।" कविता ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि यह निष्पक्ष लग सकता है लेकिन इसका तेलंगाना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों की तुलना में तेलंगाना की सीटों की हिस्सेदारी असमान रूप से कम हो सकती है, जिससे उसका राजनीतिक महत्व कम हो जाएगा।</p>
<p>जागृति नेता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व 3.13 प्रतिशत है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिसीमन के बाद भी यह हिस्सा अपरिवर्तित रहे, चाहे कोई भी मानदंड अपनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी, "यदि तेलंगाना के राजनीतिक महत्व को कम किया गया, तो राज्य के गठन के आंदोलन जैसा ही एक और आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा।" कविता ने देय धनराशि जारी न करने और प्रमुख राज्य पहलों को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा न देने के लिए भी केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक महत्व में और कमी आने से स्थिति और खराब हो जाएगी। जागृति नेता ने कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण विधेयक से जोड़ने के बजाय, केंद्र को वास्तविक सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए महिला कोटे के भीतर पिछड़े वर्गों (बीसियों) के लिए उप-कोटा सुनिश्चित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:49:42 +0530</pubDate>
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                <title>महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नीयत पर कांग्रेस ने उठाया सवाल : जातिगत जनगणना से बचने का लगाया आरोप, 16 अप्रैल से शुरू होगा संसद का विशेष सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ओबीसी चेयरमैन डॉ. अनिल जय हिंद ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर जातिगत जनगणना से बचने का आरोप लगाया और कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण अधूरा है। जय हिंद ने राहुल गांधी की यात्रा के प्रभाव का जिक्र करते हुए ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटे पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-raised-questions-on-the-intention-of-the-central-government/article-150501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ओबीसी विभाग के चेयरमैन डॉ अनिल जय हिंद ने कहा है कि लोक सभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण चर्चा का नहीं, बल्कि उसके तत्काल क्रियान्वयन का मामला है। उन्होंने बताया कि सरकार 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुला रही है, जिसमें संविधान संशोधन लाने की तैयारी है। जय हिंद के अनुसार, पहले सरकार ने 2027 में जातिगत जनगणना, उसके बाद परिसीमन और फिर महिला आरक्षण लागू करने का रोडमैप बनाया था, लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लागू करने की बात कही जा रही है, जो मौजूदा जनसंख्या बदलावों के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना से बचना चाहती है। इस संदर्भ में 2021 में संसद दिये गये आश्वासन और उच्चतम न्यायालय में दिये गये हलफनामों का हवाला दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के बाद दबाव में सरकार ने रुख बदला। उन्होंने केंद्र सरकार पर ओबीसी महिलाओं को आरक्षण से वंचित रखने का आरोप लगाया और साथ ही याद दिलाया कि राजीव गांधी सरकार की ओर से लाये गये 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में ओबीसी आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है। जय हिंद ने कहा कि बड़े वर्ग को प्रतिनिधित्व से दूर रखना लोकतंत्र के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:28:36 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को अर्पित की श्रद्धांजलि : नोएडा की घटना के लिए राज्य सरकार को ठहराया जिम्मेदार, सत्ता परिर्वतन की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बाबा साहब को नमन करते हुए नोएडा घटना पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे इंटेलिजेंस फेलियर बताते हुए 'संवैधानिक मूल्यों' की रक्षा का संकल्प लिया। अखिलेश ने सत्ता पक्ष पर सामाजिक न्याय की अनदेखी का आरोप लगाया और 2027 में जनता द्वारा बदलाव का दावा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadav-paid-tribute-to-baba-saheb-bhimrao-ambedkar-held/article-150339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/akhilesh-yadav1.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौक़े पर उन्होंने नोएडा में हुई घटना को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि इंटेलिजेंस पूरी तरह फेल रही और प्रशासन को पहले से जानकारी होने के बावजूद घटना को होने दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर यह कोई बड़ी साजिश है तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार पर आती है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में सत्तारूढ़ पार्टी को हटाया जाएगा और उनकी पार्टी बाबा साहब के संविधान पर आधारित समाज की स्थापना करेगी।</p>
<p>अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि उनसे बड़ा झूठ बोलने वाला कोई “संत” नहीं है। उन्होंने उन्हें “नकली संत” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार का संविधान से कोई सरोकार नहीं है। सपा प्रमुख ने कहा कि राज्य सरकार के नेता हार के डर से भूमिगत हो गए हैं, लेकिन जनता मिलकर उन्हें हराने और सत्ता से हटाने का काम करेगी। उन्होंने भीमराव अंबेडकर के संविधान को “लोहे की तलवार” बताते हुए कहा कि यह देश के लोगों को न्याय और सम्मान दिलाने का माध्यम है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दौरान बाबा साहब की प्रतिमाओं को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया गया है और चुनाव से पहले बजट के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और पीडीए वर्ग के खिलाफ भेदभाव जारी है, हालांकि जनता अब इन साजिशों को समझ चुकी है। अखिलेश यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं द्वारा 400 से अधिक सीटें जीतने और संविधान बदलने के दावे किए गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता ने मतदान के जरिए संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 12:52:54 +0530</pubDate>
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