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                <title>iit jodhpur - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>iit jodhpur RSS Feed</description>
                
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                <title>आईआईटी जोधपुर में रॉकेट को हल्का और पुन: प्रयोग योग्य बनाने पर शोध, धमाकों से मिलेगी सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[आईआईटी जोधपुर में रॉकेट को हल्का और पुन: प्रयोग योग्य बनाने पर शोध। शॉक वेव्स एंड हाई-स्पीड फ्लो लैब में चल रहा शोध भारत की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने जा रहा है। नवाचार से रॉकेट अधिक हल्के, किफायती और तीव्र गति से उड़ने में सक्षम होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/research-on-making-rockets-light-and-reusable-in-iit-jodhpur/article-129708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/55552.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के वैज्ञानिकों ने हाइपरसोनिक प्रणोदन, जल शुद्धिकरण, शीतलन और धमाका-रोधी सुरक्षा तकनीकों के क्षेत्र में अभिनव शोध कर नई दिशा दिखाई है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग एवं स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च डिवीजन के सहायक प्रो. डॉ. अरुण कुमार के निर्देशन में शॉक वेव्स एंड हाई-स्पीड फ्लो लैब में चल रहा शोध भारत की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने जा रहा है। डॉ. कुमार की टीम ऐसे स्क्रैमजेट इंजन विकसित कर रही है जो वायुमंडल की ऑक्सीजन का उपयोग करेंगे, जिससे भारी ऑक्सीजन टैंकों की आवश्यकता नहीं रहेगी। इसमें हाइपरसोनिक प्रणोदन से हल्के और सस्ते रॉकेट बनाए जा रहे हैं। इस नवाचार से रॉकेट अधिक हल्के, किफायती और तीव्र गति से उड़ने में सक्षम होंगे। </p>
<p><strong>कल्पना नहीं, ठोस समाधान</strong><br />डॉ. अरुण कुमार ने कहा, हमारा शोध भविष्य की कल्पनाएं नहीं, बल्कि ठोस समाधान है। चाहे हाइपरसोनिक उड़ान हो, पानी व शीतलन की समस्या हो, या नागरिकों की सुरक्षा। यह भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करेगा और विकसित भारत के सपने को साकार करेगा।</p>
<p><strong>शोध डीआरडीओ और एआरडीबी की ओर से समर्थित</strong><br />यह शोध डीआरडीओ और एआरडीबी की ओर से समर्थित है और सीधे भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ा है। आईआईटी जोधपुर की टीम रॉकेट को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की दिशा में भी कार्यरत है जो अंतरिक्ष अभियानों की लागत को काफी कम करेगा। इसके साथ ही, धमाकों से उत्पन्न शॉक वेव्स से सुरक्षा को लेकर विशेष सुरक्षात्मक पदार्थ और ढांचे तैयार किए जा रहे हैं, जो रक्षा और नागरिक सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में उपयोगी होंगे। संस्थान की दूसरी बड़ी पहल सौर ऊर्जा आधारित संयुक्त समुद्री जल शुद्धिकरण व शीतलन प्रणाली है। एएनआरएफ और एआरजी की ओर से समर्थित इस परियोजना के तहत ऐसी तकनीक विकसित की गई है जो एक साथ पेयजल और ठंडक प्रदान कर सकती है। इसका प्रयोगशाला स्तर पर सफल परीक्षण किया जा चुका है और अब इसका प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। यह तकनीक विशेष रूप से पानी और बिजली की कमी वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 14:12:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आईआईटी जोधपुर की माइक्रोबियल शोध से संक्रमण पर लगेंगी रोक, मस्तिष्क रोग के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[आईआईटी जोधपुर के बायो साइंस और बायो इंजीनियरिंग विभाग की फंक्शनल एमीलॉइड बायोलॉजी लैब, डॉ. नेहा जैन के नेतृत्व में काम कर रही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/iit-jodhpurs-microbial-research-will-prevent-infection-on-infection/article-127073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म जीवों पर हो रहे शोध में बड़ी प्रगति की है। यह शोध संक्रमणों की रोकथाम से लेकर मस्तिष्क स्वास्थ्य की सुरक्षा तक, लोगों की जिंदगी को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने की नई राह खोल रहा है।आईआईटी जोधपुर के बायो साइंस और बायो इंजीनियरिंग विभाग की फंक्शनल एमीलॉइड बायोलॉजी लैब, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नेहा जैन के नेतृत्व में काम कर रही है। यह टीम बैक्टीरिया द्वारा बनाई जाने वाली एमीलॉइड संरचनाओं का अध्ययन कर रही है, जो संक्रमण को जटिल और उपचार को कठिन बना देती हैं।</p>
<p>डॉ. जैन की टीम ने हाल ही में ऐसे एमीलॉइड अवरोधक खोजे हैं जो न केवल बैक्टीरिया में बल्कि मानव शरीर में भी हानिकारक एमीलॉइड जमाव को रोक सकते हैं। मस्तिष्क में एमीलॉइड का जमाव अल्जाइमर और पाकिंर्संस जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। इस खोज से संक्रमण और मस्तिष्क रोग दोनों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव की संभावना है। इस शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है, कि इससे मस्तिष्क रोगों का प्रारंभिक चरण में पता लगाया जा सकता है, जो अब तक चिकित्सा जगत के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इससे नई दवाओं और उपचार विधियों के विकास का रास्ता खुलता है।</p>
<p><strong>सामाजिक प्रभाव और उपयोगिता </strong><br />टीम ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुलभ समाधान विकसित कर रही है। अस्पताल में संक्रमण की रोकथाम के लिए विशेष सेंसर और शिक्षा कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। विज्ञान जागरूकता को लेकर स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के लिए लोगों को शिक्षित किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए शोध यह भी समझने की कोशिश कर रहा है, कि आंत के बैक्टीरिया मस्तिष्क की बीमारियों को कैसे प्रभावित करते हैं।</p>
<p><strong> समाज सेवा में भी विज्ञान काम आए</strong><br />डॉ. नेहा जैन ने कहा, हमारा उद्देश्य है कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज की सेवा में भी लगे। हम किफायती और प्रभावी उपचार तकनीकें विकसित कर रहे हैं जो हर किसी तक पहुंच सकें।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:24:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी जोधपुर स्थानीय और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध : बिरला</title>
                                    <description><![CDATA[इसके अलावा, संस्थान की नई वेबसाइट का लोकार्पण भी किया गया, जो सभी उप-साइट्स के साथ एकीकृत हैं और अद्यतन सामग्री प्रबंधन प्रणाली से युक्त हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/iit-jodhpur-committed-to-the-solution-of-local-and-national/article-116926"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)40.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर में सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नवनिर्मित व्याख्यान कक्ष, बहुभाषी विज्ञान कॉमिक्स शृंखला तथा कई नई शैक्षणिक पहलों का शुभारंभ किया। व्याख्यान कक्ष-कक का निर्माण 3,381 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 14.80 करोड़ की लागत से हुआ है। अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इस कॉम्प्लेक्स में तीन बड़े कक्ष हैं, प्रत्येक में 160 छात्रों के बैठने की क्षमता है। इनमें स्मार्ट पोडियम, नवीनतम ऑडियो-विजुअल प्रणाली और मल्टीपर्पज हॉल शामिल हैं। इमारत को दिव्यांगजनों की सुविधा अनुसार डिजाइन किया गया है और यह ऊर्जा-कुशल निर्माण का आदर्श उदाहरण है।  बिरला ने खेल-खेल में विज्ञान नामक बहुभाषी विज्ञान कॉमिक्स शृंखला का विमोचन किया। आईआईटी जोधपुर के शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी केंद्र तथा स्कूल ऑफ डिजाइन की ओर से विकसित इस शृंखला में एसटीईएम शिक्षा को रोचक कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>ये कॉमिक्स 12 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप हैं।  इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य तकनीक, टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देना है। अपने संबोधन में ओम बिरला ने कहा, आईआईटी जोधपुर विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय है। संस्थान स्थानीय एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा व रक्षा क्षेत्र में संस्थान के योगदान की सराहना की। निदेशक प्रो. अग्रवाल ने कहा कि आईआईटी जोधपुर एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है जहां विश्व स्तरीय शोध, अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा और सामाजिक सरोकार एक साथ जुड़ते हैं। </p>
<p><strong>संस्थान की नई वेबसाइट का लोकार्पण </strong><br />इसके अलावा, संस्थान की नई वेबसाइट का लोकार्पण भी किया गया, जो सभी उप-साइट्स के साथ एकीकृत हैं और अद्यतन सामग्री प्रबंधन प्रणाली से युक्त हैं। समारोह में 18 नव-नियुक्त संकाय सदस्यों को 3.6 करोड़ की कुल निधि वाले शोध नवाचार अनुदान प्रदान किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jun 2025 13:28:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआईटी जोधपुर का कमाल : पेयजल मेंआर्सेनिक प्रदूषण का चलेगा पता, स्वास्थ और पर्यावरण गंभीर खतरे को कम करने में मिलेगी मदद </title>
                                    <description><![CDATA[इस नवाचार से जल गुणवत्ता मूल्यांकन में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने की उम्मीद है तथा यह सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी कार्यक्रमों में मापनीयता और सामर्थ्य प्रदान करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/iit-jodhpur-will-help-in-reducing-health-and-environmental-threat/article-113277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर में सुरक्षित व सुलभ पेयजल सुनिश्चित करने की दिशा में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ.महेश कुमार व उनकी टीम ने जल स्रोतों में आर्सेनिक प्रदूषण का मौके पर ही पता लगाने के लिए कम लागत का महत्वपूर्ण उपकरण विकसित किया है। भूजल में आर्सेनिक विषाक्तता सूक्ष्म स्तरों पर भी जानलेवा बीमारियों का कारण बनती हैं। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के शोधकर्ताओं की एक टीम ने पीने के पानी में आर्सेनिक प्रदूषण का मौके पर ही पता लगाने के लिए एक कम लागत वाला नया मोबाइल सेंसर विकसित किया हैं। जिसके तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक को कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। </p>
<p>उपयोगिता और पहुंच के लिए डिजाइन किए इस उपकरण को जटिल प्रयोगशाला बुनियादी ढांचे या कुशल कर्मियों की आवश्यकता नहीं रहेंगी इसे सीधे ही क्षेत्र में संचालित किया जा सकता है। आईओपी पब्लिशिंग के जर्नल नैनोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित लेख अनुसार इस नए उपकरण को पानी की गुणवत्ता की वास्तविक समय की निगरानी के लिए सक्षम बनाता हैं। विशेष रूप से दूरदराज और कम आय वाले क्षेत्रों में। भारत के विभिन्न भागों और विश्वस्तर पर व्याप्त आर्सेनिक संदूषण, त्वचा के घाव व कैंसर और हृदय संबंधी समस्याओं सहित गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों का कारण बनता है।</p>
<p><strong>सेंसर आर्सेनिक सांद्रता का पता लगाएगा</strong><br />स्पेक्ट्रोस्कोपी और इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसिंग जैसी पारंपरिक पहचान तकनीकें अक्सर महंगी होती हैं। वहीं परिष्कृत प्रयोगशाला सेटअप पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं जिससे उन्हें व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल करना अव्यावहारिक हो जाता है। इसके विपरीत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर में विकसित सेंसर मात्र 3.2 सेकंड के प्रभावशाली प्रतिक्रिया समय के साथ 0.90 पार्ट्स प्रति बिलियन पीपीबी जितनी कम आर्सेनिक सांद्रता का पता लगा सकता हैं।</p>
<p><strong>कॉम्पेक्ट और पोर्टेबल टूल बनाया </strong><br />महेश कुमार ने कहा, सेंसर को सर्किट बोर्ड और एक आरडुईनो मॉड्यूल के साथ एकीकृत कर हमने वास्तविक समय में पता लगाने के लिए एक कॉम्पेक्ट और पोर्टेबल टूल बनाया है। हम इस नवाचार की कल्पना करते हैं, जिससे समुदायों को सुरक्षित पानी तक पहुंच प्राप्त करने और आर्सेनिक के संपर्क से उत्पन्न होने वाली जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थितियों को रोकने में मदद मिलेगी। इस नवाचार से जल गुणवत्ता मूल्यांकन में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने की उम्मीद है तथा यह सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी कार्यक्रमों में मापनीयता और सामर्थ्य प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 12:56:31 +0530</pubDate>
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