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                <title>exhibition of paintings - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>exhibition of paintings RSS Feed</description>
                
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                <title>जयपुर में दिखी बिहार की लोक कलाओं की अनोखी झलक : लोक कला के रंगों में दिखी सीता की संवेदनशीलता और गरिमा</title>
                                    <description><![CDATA[कलाकृतियों में जटायु युद्ध, राम-सीता दरबार, अशोक वाटिका में हनुमान-सीता भेंट, सीता अपहरण और अयोध्या दीपोत्सव जैसे प्रसंगों को पारंपरिक शैली में बारीकी से उकेरा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sitas-sensitivity-and-dignity-seen-in-the-colors-of-folk/article-125636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/526348.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आरआईसी में मंगलवार को लोक कला प्रदर्शनी वैदेही सीता: द डॉटर ऑफ बिहार मंगलवार को शुरू हुई। प्रदर्शनी 30 सितम्बर तक प्रतिदिन प्रात: 11 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहेगी। प्रदर्शनी में बिहार की समृद्ध लोककलाओं-मधुबनी, सुजनी, मंजूषा, टिकुली और एप्लीक (कशीदाकारी) के माध्यम से सीता को सिर्फ देवी स्वरूप में नहीं बल्कि एक स्त्री, पुत्री, सखी और पत्नी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी की थीम गरिमा और स्त्री को शक्तिसम्पन्न  बनाने को केंद्र में रखती है। प्रदर्शनी में करीब 35 प्रख्यात लोक कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की गई हैं। जिनमें 4 पद्मश्री से सम्मानित कलाकारों सहित राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त कलाकार भी शामिल हैं।</p>
<p>कलाकृतियों में जटायु युद्ध, राम-सीता दरबार, अशोक वाटिका में हनुमान-सीता भेंट, सीता अपहरण और अयोध्या दीपोत्सव जैसे प्रसंगों को पारंपरिक शैली में बारीकी से उकेरा गया है। विशेष आकर्षण में एप्लीक कला की जटायु युद्ध कृति शामिल है। जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कमला देवी ने निर्मित किया है। इसमें रावण द्वारा सीता हरण और जटायु के साहसिक संघर्ष को दर्शाया गया है। वहीं मिथिला पेंटिंग में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विभा लाल की चित्रकला में मग्न सीता कृति दर्शकों को जोड़ती है। इसमें सीता अपनी सहेलियों संग वृक्ष तले चित्रकारी करती दिखाई गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:20:47 +0530</pubDate>
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                <title>जेकेके में प्रदर्शित हुई वरिष्ठ पारंपरिक चित्रकारों की पेंटिंग्स : रंगरीत महोत्सव के तहत तैयार चित्रों की प्रदर्शनी 18 मई तक चलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[चित्रकार समंदर सिंह खंगारोत ने पारंपरिक वसली पेपर पर सूर्य पुत्र अश्विनी कुमार का चित्र उकेरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/exhibition-of-paintings-prepared-under-the-paintings-festival-of-senior/article-113938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)32.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केन्द्र की अलंकार कला दीर्घा में हुए दस दिवसीय रंगरीत कला महोत्सव के तहत देश के नामी कलाकारों की तैयार चित्र कृतियों की एक विशाल प्रदर्शनी सोमवार को अलंकार कला दीर्घा में शुरू हुई। केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक अलका मीणा और वरिष्ठ कलाकारों ने इसका उद्घाटन किया। इस दौरान मीणा ने कहा कि यह कला महोत्सव बेहद खास रहा। वैदिक चित्रकार रामू रामदेव ने कहा की पारम्परिक चित्रकलाओं को औपचारिक शिक्षा पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>पौराणिक कथाओं की चित्रात्मक महागाथा</strong><br />यहां प्रदर्शित गोविन्द रामदेव की पेंटिंग्स में दुर्गा सप्तशती के विविध प्रसंगों का जीवंत चित्रण किया गया है। इन कृतियों में महिषासुर और रक्तबीज वध, बगलामुखी माता, अर्द्धनारीश्वर, मां काली, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां कालरात्रि जैसे प्रसंग पारंपरिक शैली में जीवंत हो उठे। रामू रामदेव ने अपनी ढाई दर्जन से अधिक पेंटिंग्स में पारंपरिक शैली को जयपुर की ढूंढाड़ी शैली की सुगंध से सराबोर किया है। गणपति के बाल स्वरूप की उनकी कृति विशेष आकर्षण का केंद्र है, जिसमें बाल गणेश शिव-पार्वती के संग अठखेलियां करते नजर आते हैं। बीकानेर से महावीर स्वामी ने महोत्सव के दौरान बीकानेर की परंपरागत शैली में बंशी बजैया श्रीकृष्ण के अक्स की रचना को अपनी कलाकृति में उकेरा।</p>
<p><strong>पारंपरिक वसली पेपर पर उकेरा अश्विनी कुमार का चित्र</strong><br />चित्रकार समंदर सिंह खंगारोत ने पारंपरिक वसली पेपर पर सूर्य पुत्र अश्विनी कुमार का चित्र उकेरा। डेढ़ गुणा दो फुट आकार की इस पेन्टिंग को खंगारोत ने जापानी टैम्परा कलर से बनाया है। </p>
<p><strong>अहलावत के कैनवास पर राजस्थानी घूमर</strong><br />दिल्ली से आई वरिष्ठ चित्रकार सुमित्रा अहलावत ने राजस्थानी घूमर को कैनवास पर उतारा। कैनवास पर एक्रेलिक रंग के माध्यम से राजस्थानी नृत्य घूमर को अपने सृजन का माध्यम बनाया, जिसमें कसूमल रंग का प्रमुखता से प्रयोग किया गया है। यह प्रदर्शनी अलंकार दीर्घा में 18 मई तक आमजन के लिए चलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 09:41:10 +0530</pubDate>
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