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                <title>lakhawa plantation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>लखावा प्लांटेशन -1 से 8 तक में पौधों की गणना के हुए आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[खबर छपने के 5 माह बाद पौधों की गणना करवाने की आई सुध। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/orders-for-counting-the-plants-in-lakhawa-plantation-1-to-8/article-114323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/lkhawa-plantation---1-se-8-tk-me-podho-ki-gan-na-k-hue-adesh...kota-news-16-05-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वनमंडल के लखावा प्लांटेशन-8 में हुए भ्रष्टाचार उजागर होने के 5 माह बाद अब वन विभाग को मेटिगेटिव मैजर्स में लखावा सीरीज के प्लांटेशनों में पौधों की वास्तिविक संख्या की गणना करवाने की याद आई। कोटा संभागीय मुख्य  वनसंरक्षक सोनल जोरिहार ने लखावा-1 से लेकर 8 तक के सभी प्लांटेशनों में लगे पौधों की गणना करवाने के लिए टीम गठित कर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश जारी कर दिए हैं। बता दें, 24 मई 2024 को न पौधे न चौकीदार, किसकी सुरक्षा में खर्च किए लाखों रुपए...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसकी जांच के लिए गत 27 मई को जयपुर से अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन सुरक्षा) केसी मीणा कोटा आए थे। उनकी जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि लखावा-8 प्लांटेशन में 150 पौधे भी नहीं थे। इसके बावजूद कोटा वनमंडल के अधिकारियों ने 8-8 हजार पौधे जिंदा बताकर फर्जी वाटरिंग सहित अन्य कार्यों के बिल उठाकर 21.42 लाख रुपए का गबन किया। जिसमें कार्रवाई करते हुए विभाग ने तीन वनकर्मियों को चार्ज शीट भी दे दी है। पौधों की जीविता प्रतिशत जांचेगी टीम: संभागीय मुख्य वनसंरक्षक जोरिहार द्वारा जारी किए आदेश में बताया कि कोटा वनमंडल की रेंज लाडपुरा के अधीन मेटिगेटिव मैजर्स की द्वितीय व तृतीय वर्ष संधारण कार्य की साइट्स लखावा-1 से 8 तक के सभी प्लांटेशनों में पौधों की जीविता प्रतिशत की गणना के लिए डीएफओ से रेंजर स्तर के 10 सदस्य टीम गठित कर दी गई है। जिन्हें पौधों की सरवाइवल रेट की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। </p>
<p><strong>एपीसीसीएफ के निर्देश के 10 माह बाद जारी हुए आदेश </strong><br />अतिरिक्त मुख्य प्रधान वनसंरक्षक (वन सुरक्षा) केसी मीणा ने गत वर्ष 27 मई को लखावा प्लांटेशन-8 का निरीक्षण कर जांच की थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि प्लांटेशन-8 के जैसे ही हालात लखावा-7 में भी देखें गए हैं। इससे स्पष्ट है कि इनमें जानबूझकर फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है और जिस उद्देश्य से हाइवे किनारे प्लांटेशन विकसित करने के लिए बजट दिया गया था, वह उद्देश्य पूरी तरह से विफल कर दिया गया है। जबकि, मेटिगेटिव मैजर्स के तहत बारां बायपास के सहारे हरितिमा पट्टी विकसित करना उद्देश्य था, परन्तु यहां सिर्फ सरकारी धन का ही दुरुपयोग हुआ है। प्लांटेशन (हरित पट्टी) विकसित करने का कोई सार्थक प्रयास नहीं हुए हैं। ऐसे में यहां की स्थिति व परिस्थिति को देखते हुए इस योजना में कराए गए सभी कार्य संदेह के घेरे में आ गए हैं, ऐसे में मेटिगेटिव मैजर्स के सभी प्लांटेशनों में करवाए गए कार्यों का विशेष टीम बनाकर शीघ्र ही मुल्यांकन करवाए जाना चाहिए। उनके आदेश के 10 माह बाद कोटा सीसीएफ ने   पौधों की गणना करवाए जाने के आदेश जारी किए। </p>
<p><strong>भ्रष्टाचार छिपाने को पौधे रिप्लेस करवाने का मिला मौका</strong><br />मेटिगेटिव मैजर्स के लखावा प्लांटेशनों में भ्रष्टाचार उजागर होने के 5 माह बाद पौधों की गणना के आदेश जारी किए गए हैं। जिससे कोटा वनमंडल के अधिकारियों व फिल्ड स्टाफ को अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए पौधे रिप्लेस करवाने का पूरा मौका  मिला है। जांच टीम ने लखावा सीरीज के सभी प्लांटेशनों में पौधों की गणना कार्य भी शुरू कर दिया है। वहीं, कनवास रेंज में भ्रष्टाचार की शिकायत की अब तक जांच शुरू नहीं की गई। जिससे अधिकारियों को भ्रष्टाचार छिपाने का मौका मिल रहा है। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद्</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 May 2025 16:46:57 +0530</pubDate>
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