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                <title>tribal girls hostel - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>tribal girls hostel RSS Feed</description>
                
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                <title>धार के छात्रावास में हंगामा, खिड़की से कूदकर सड़क पर निकलीं छात्राएं, 2.5 किलोमीटर पैदल चलकर प्रशासन से लगाई मदद की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के धार जिले के निसरपुर स्थित माता शबरी आदिवासी कन्या छात्रावास से अव्यवस्थाओं और घटिया भोजन से परेशान 40 छात्राएं आधी रात खिड़की से कूदकर पैदल ही विरोध करने निकल पड़ीं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने समझाइश देकर उन्हें रोका और समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-in-the-hostel-of-dhar-the-girl-students-jumped/article-163124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/dhar.png" alt=""></a><br /><p>धार। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील के निसरपुर पुनर्वास स्थल स्थित माता शबरी आदिवासी कन्या छात्रावास में अव्यवस्थाओं से परेशान करीब 40 छात्राएं रविवार आधी रात खिड़की से कूदकर कुक्षी के लिए पैदल निकल गईं। छात्राओं के रात करीब 12 बजे छात्रावास से निकलने की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। लगभग ढाई किलोमीटर पैदल चलने के बाद कटनेरा पुल के पास सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोककर समझाइश दी। इसके बाद वाहनों से छात्राओं को कुक्षी लाया गया। कुक्षी पहुंचकर छात्राओं ने तहसीलदार प्रवीण पाटीदार, एसडीओपी सुनील गुप्ता और थाना प्रभारी के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। छात्राओं ने बताया कि 50 छात्राओं की क्षमता वाले छात्रावास भवन में वर्तमान में करीब 140 छात्राएं रह रही हैं। इनमें कन्या शिक्षा परिसर की 50 छात्राएं भी शामिल हैं। जगह की कमी के कारण कई बार एक ही बिस्तर पर दो से तीन छात्राओं को सोना पड़ता है।</p>
<p>सूचना मिलने पर जयस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज बघेल भी छात्राओं से मिले और उनकी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। अधिकारियों द्वारा सोमवार दोपहर तक समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद छात्राएं रात करीब दो बजे वाहनों से छात्रावास वापस पहुंचीं। छात्राओं ने छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि उन्हें घटिया भोजन दिया जाता है और सुबह के नाश्ते में निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं किया जाता। छात्राओं ने छात्रावास प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कन्या शिक्षा परिसर की छात्राओं को दूसरे छात्रावास में स्थानांतरित करने तथा वर्तमान प्रबंधन को हटाने की मांग की।</p>
<p>छात्राओं ने शिक्षा एवं प्रशासन विभाग के अधिकारियों के निरीक्षण की प्रक्रिया पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि अधिकारी निरीक्षण के दौरान बाहर से देखकर लौट जाते हैं और छात्राओं से उनकी वास्तविक समस्याओं के बारे में बातचीत नहीं करते। अधिकारियों ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि सोमवार को संबंधित अधिकारी छात्रावास पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे तथा शिकायतों के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 17:01:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पछाड़ में सरकारी जनजातीय छात्रावास की हालत दयनीय, खतरे में 40 छात्राओं का जीवन </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की टीम जब मौके पर पहुंची, तो देखा कि छात्रावास की छतें बुरी तरह से चटक चुकी थीं। दीवारें झुक चुकी थीं और प्लास्टर जगह-जगह से झड़ रहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-condition-of-the-government-tribal-hostel-in-pachhad-is-pathetic/article-114655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(3)35.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद।  राजकीय जनजातीय बालिका छात्रावास पछाड़ का भवन सरकारी रिकॉर्ड में तो दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह भवन किसी मौत के फंदे से कम नहीं है।  दैनिक नवज्योति की टीम जब मौके पर पहुंची, तो देखा कि छात्रावास की छतें बुरी तरह से चटक चुकी थीं। दीवारें झुक चुकी थीं और प्लास्टर जगह-जगह से झड़ रहा था। बारिश में यह इमारत टपकती नहीं, बहने लगती है। इस इमारत में करीब 40 आदिवासी छात्राएं रह रही हैं। जिनके माता-पिता ने अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उन्हें यहां भेजा, लेकिन वे यह नहीं जानते कि यह छात्रावास अब बच्चियों के लिए खतरे की जगह से कम नहीं है। </p>
<p><strong> सरकारी संवेदनहीनता का नमूना</strong><br /> यह भवन वर्ष 2017 में बना था, लेकिन मात्र 8 वर्षों में इसकी हालत कबाड़ से भी बदतर हो गई है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकार और प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहा? या फिर जान-बूझकर नजरें फेर ली गई हैं? 5 वर्षों से भवन की हालत बद से बदतर होती जा रही है, लेकिन न तो मरम्मत हुई, न निरीक्षण, और न ही कोई कार्यवाही। सरकार के नारे  'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ इस इमारत के नीचे दम तोड़ रही है। सीलन भरे कमरों में फर्श उखड़ा पड़ा है, छतों से चूने का पानी टपक रहा है और दीवारों में दरारें ऐसी कि आंखों के सामने मौत खड़ी दिखे।</p>
<p><strong> माता-पिता ने बच्चों के नाम हटवाए </strong><br />स्थिति इतनी भयावह है कि कई अभिभावकों ने अपनी बच्चियों को छात्रावास से निकाल लिया है। माता-पिता का कहना है कि हम बच्चों को पढ़ाने भेजते हैं, लेकिन वहां तो जान पर बन आती है। अगर कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा?"</p>
<p><strong>सरकारी दावों की खुली पोल, नारों से नहीं बदलती जमीनी सच्चाई</strong><br />छात्रावास की ये हालत दिखाती है कि ग्रामीण बालिकाओं की शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में कहीं नहीं है। हर वर्ष करोड़ों के बजट पास होते हैं, लेकिन जब धरातल पर देखा जाए तो हालात ऐसे हैं कि बच्चियों की जान सांसत में है।</p>
<p>छात्रावास की हालत भयावह है। उच्चाधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से सूचित किया जा चुका है।<br /><strong>- ममता गौतम, वार्डन </strong><br />   <br />यह बालिकाओं के जीवन से सीधा खिलवाड़ है। सरकार ने आंखें मूंद रखी हैं। अगर किसी बच्ची की जान गई तो इसका पूरा दोष प्रशासन पर होगा।<br /><strong>- मूलचंद शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष </strong></p>
<p>मेरे कार्यकाल में छात्रावास की स्थिति ठीक थी, हमने समय-समय पर निरीक्षण कर सुझाव भी दिए थे। अब जो हालत दिख रही है, वह बेहद चिंताजनक है। यदि समय रहते रखरखाव में लापरवाही न बरती जाती, तो ये स्थिति नहीं बनती। मैं मांग करता हूं कि इसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। बच्चियों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। <br /><strong> - प्रेमसिंह मीणा, पूर्व ब्लॉक शिक्षा अधिकारी।    </strong></p>
<p> हमने सोचा था कि बच्ची छात्रावास में रहकर पढ़ाई करेगी और भविष्य संवार पाएगी, लेकिन अब तो रोज उसकी चिंता लगी रहती है। दीवारें गिरने जैसी हालत हैं, छत टपकती है, और रात को बच्चियां डर के साए में सोती हैं। <br /><strong>  - रामकिशन, अभिभावक </strong><br />    <br />समस्या के समाधान को लेकर पत्र भेज चुके हैं। जल्द टेंडर प्रक्रिया करवा दी जाएगी।<br /><strong>- जब्बर सिंह, एडीएम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 18:22:05 +0530</pubDate>
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