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                <title>oil - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव से महंगा हुआ तड़का, खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से बिगड़ा बजट</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/middle-east-tensions-drive-up-cooking-oil-prices--rising-costs-disrupt-household-budgets/article-148548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे आमजन की रसोई तक पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते खाद्य तेलों के दाम में अचानक उछाल आ गया है। पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड तेल 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक महंगा हो गया है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। व्यापारियों के अनुसार भारत में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। मिडिल ईस्ट और आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। पाम आॅयल, जो सस्ता विकल्प माना जाता है, उसके दाम भी बढ़ने लगे हैं।</p>
<p><strong>आमजन की जेब पर बढ़ा बोझ</strong><br />गृहिणियों का कहना है कि खाद्य तेल हर घर की जरूरत है, ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से पूरे महीने का बजट गड़बड़ा गया है। कई परिवार अब तेल की खपत कम करने या सस्ते विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। काफी समय से खाद्य तेल की कीमत होने से तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लिया जा रहा था। अब अचानक से दामों में तेजी आने से घरेलू  बजट गड़बड़ाने लगा है। खाद्य तेलों के बिना कोई सा भी पकवान नहीं बन सकता है। अब कीमत बढ़ने से खर्चा अधिक होने लगा है। सरकार को खाद्य तेलों की कीमत को कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय करने चाहिए।</p>
<p><strong>स्थानीय बाजार में दिख रहा असर</strong><br />कोटा के थोक और खुदरा बाजारों में तेल की कीमतों में तेजी साफ नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। कुछ जगहों पर उपभोक्ताओं ने ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे मांग और बढ़ गई है। वहीं होटल और ढाबा संचालकों पर भी इसका असर पड़ा है, जहां लागत बढ़ने के कारण या तो कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं या मुनाफा कम करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है तो खाद्य तेलों की कीमतों में और उछाल आ सकता है।</p>
<p>पहले ही सब्जियां और राशन महंगा है, अब तेल भी महंगा हो गया। हर महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। हमें अब खाने में तेल कम करना पड़ रहा है।<br /><strong>-सीमा शर्मा, गृहिणी</strong></p>
<p>कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं। हर 2-3 दिन में नए दाम आ जाते हैं। ग्राहक भी परेशान हैं और हमारी बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।<br /><strong>-राजेश अग्रवाल, दुकानदार</strong></p>
<p>तेल महंगा होने से लागत बढ़ गई है। अगर खाने के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, नहीं बढ़ाते तो मुनाफा खत्म हो जाता है।<br /><strong>-इमरान खान, ढाबा संचालक</strong></p>
<p>रिफाइंड तेल के 15 किलो के पीपे में 200 से 250 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मूंगफली और सरसों के तेल में भी 50 से 70 रुपए तक की तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण सप्लाई प्रभावित है।<br /><strong>-गजेन्द्र गर्ग, थोक व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:22:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तेल एक्सपोर्ट में गिरावट : रूस को एक महीने में 32 हजार करोड़ का नुकसान, खरीददार कम कर रहे तेल खरीदना</title>
                                    <description><![CDATA[ निर्यात में गिरावट के साथ-साथ यूराल क्रूड की कीमतें भी गिरीं। यह 8.2 डॉलर प्रति बैरल घटकर 43.52 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। एक बैरल में लगभग 159 लीटर तेल होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/decline-in-oil-exports-causes-russia-a-loss-of-rs/article-135803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के तेल निर्यात में नवंबर में भारी गिरावट आई है। यह यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे निचला स्तर है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि खरीदार रूस से तेल खरीदना कम कर रहे हैं। अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और यूक्रेन के बढ़ते हमलों का भी इस पर असर पड़ा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपनी नई रिपोर्ट में बताया है कि नवंबर में रूस के तेल निर्यात में 420 किलो बैरल प्रति दिन (केबी/डी) की कमी आई। इससे कुल निर्यात घटकर 6.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (एमबी/डी) रह गया। निर्यात की मात्रा में कमी और कीमतों में गिरावट के कारण रूस की तेल से होने वाली कमाई भी कम हो गई। नवंबर में यह कमाई 11 अरब डॉलर रही, जो पिछले साल इसी महीने की तुलना में 3.6 अरब डॉलर  कम है। आईईए ने यह भी कहा कि निर्यात की मात्रा और कीमतें दोनों गिरी हैं। इससे रूस की तेल निर्यात से होने वाली कमाई फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से सबसे कम हो गई है।</p>
<p><strong>यूराल क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट</strong><br />निर्यात में गिरावट के साथ-साथ यूराल क्रूड की कीमतें भी गिरीं। यह 8.2 डॉलर प्रति बैरल घटकर 43.52 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। एक बैरल में लगभग 159 लीटर तेल होता है। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे निचला स्तर है। आईईए के अनुसार, इस गिरावट के कारण रूस की निर्यात से होने वाली कमाई युद्ध शुरू होने के बाद से किसी भी महीने में सबसे कम रही।</p>
<p><strong>शैडो फ्लीट पर भी दिखाई दिया असर</strong><br />आईईए ने बताया कि यूक्रेन ने रूस के उन जहाजों पर हमले किए जो प्रतिबंधों को तोड़कर तेल ले जाते थे। इन्हें शैडो फ्लीट कहा जाता है। इसके अलावा, समुद्री तेल सुविधाओं पर भी हमले हुए। इन हमलों के कारण नवंबर में काला सागर से होने वाले रूस के समुद्री तेल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा रुक गया।</p>
<p><strong>रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले</strong><br />रूस पर शिपमेंट और कीमतों के मामले में यह दबाव तब पड़ रहा है जब वह धीमी आर्थिक वृद्धि, प्रतिबंधों के संचित प्रभाव और यूक्रेन के उसके ऊर्जा ढांचे पर हमलों से जूझ रहा है। गर्मियों और शुरूआती शरद ऋतु में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले तेज कर दिए थे। इससे देश के अंदर पेट्रोल की कीमतें बढ़ गईं और कुछ रूसी क्षेत्रों को ईंधन की राशनिंग करनी पड़ी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 10:45:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शनि जन्मोत्सव के अवसर पर शनिदेव का 151 किलो तेल से हुआ तेल अभिषेक </title>
                                    <description><![CDATA[एमआई रोड, नाहरगढ़ सहित सभी शनि मंदिरों में जन्मोत्सव पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-occasion-of-shani-janmotsav-shani-dev-was-anointed/article-80652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बापू नगर जनता स्टोर स्थित शनि धाम में श्रद्धा भाव एवं हर्षोल्लास के साथ शनि जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर सुबह पुजारी नारायण गौशिल की मौजूदगी में भगवान शनि देव का दूध, दही, शहद आदि से पंचामृत अभिषेक किया गया। तत्पश्चात गंगाजल से स्नान कराने के बाद शनि महाराज को नवीन पोशाक धारण कराई गई। पोशाक धारण करने के बाद शनि महाराज का 151 किलो तेल से तेल अभिषेक का कार्यक्रम दिन भर चलता रहा।</p>
<p>दोपहर बाद शनि महाराज के तरह-तरह के फूलों से मनमोहन फूल बंगला की झांकी सजाई गई इसके बाद शाम को भजन संध्या में कलाकारों ने शनि महाराज के भजन सुना कर अपनी हाजिरी लगाई। इस अवसर पर भंडारे में सैकड़ो श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।</p>
<p>इसी तरह एमआई रोड, नाहरगढ़ सहित सभी शनि मंदिरों में जन्मोत्सव पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jun 2024 16:44:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्लादिमीर पुतिन को झटका, भारत ने रूस से तेल खरीदना किया बंद</title>
                                    <description><![CDATA[टैंकर की कड़ी जांच से रूसी तेल ले जाने वाले अन्य तेल के नाव भी फंस गई हैं, दो नाव बिना किसी संकेत के दक्षिण एशियाई तट पर कई हफ्तों तक इंतजार कर रहे हैं कि वे कब तेल उतारेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/shock-to-vladimir-putin--india-stopped-buying-oil-from-russia/article-73522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(10)8.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। भारत के सभी रिफाइनर ने पीजेएससी सोवकॉम्फ्लोट टैंकरों पर ले जाए जाने वाले रूसी कच्चे तेल को लेने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रिफाइनर्स की ओर से ये कदम उठाया गया है। इंडियन ऑयल कॉपोर्रेशन जैसे बड़े रिफाइनर समेत निजी और राज्य-संचालित प्रोसेसरों ने सोवकॉम्फ्लोट टैंकरों पर कार्गो लेना बंद कर दिया है। रिफाइनर प्रत्येक जहाज के स्वामित्व की जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे कंपनी या अन्य स्वीकृत समूहों से संबद्ध नहीं हैं। दो साल पहले यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद इस व्यापार में तेजी आई थी लेकिन अब इस पर संकट खड़ा हो गया है। एक खबर के मुताबिक इस सप्ताह की शुरूआत में रिपोर्ट की गई भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनर कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के इसी तरह के कदम के बाद व्यापक विरोध हुआ है। कहा जा रहा है कि टैंकर की कड़ी जांच से रूसी तेल ले जाने वाले अन्य तेल के नाव भी फंस गई हैं, दो नाव बिना किसी संकेत के दक्षिण एशियाई तट पर कई हफ्तों तक इंतजार कर रहे हैं कि वे कब तेल उतारेंगे।</p>
<p><strong>कंपनियां नहीं दे रही हैं जवाब</strong><br />इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और नायरा एनर्जी लिमिटेड - रूस की रोसनेफ्ट पीजेएससी के स्वामित्व वाली 49% हिस्सेदारी ने टिप्पणी मांगने वाले ईमेल का जवाब नहीं दिया है। वहीं सोवकॉम्फ्लोट ने भी अपनी परिचालन गतिविधियों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पिछले महीने अमेरिकी ट्रेजरी के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने सोवकॉम्फ्लोट को नामित करते हुए 14 कच्चे तेल टैंकरों की पहचान की थी। यह रूसी तेल की कीमत पर ग्रुप ऑफ सेवन कैप के उल्लंघन के लिए अक्टूबर से गैर-सोवकॉम्फ्लोट जहाजों और रूस-अनुकूल कंपनियों पर पहले से ही लगाए गए व्यापक उपायों के शीर्ष पर आया है। शिपर सोवकॉम्फ्लोट ने भी माना है कि जुर्माने से उसके परिचालन पर दबाव पड़ रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 14:21:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी क्रूड ऑयल के लिए चीनी मुद्रा में पेमेंट की मांग को भारत सरकार ने किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[ मोदी सरकार ने कच्चे तेल के इम्पोर्ट के लिए चीनी मुद्रा में भुगतान करने के रूसी तेल सप्लायर्स के दबाव को खारिज करके झटका दे दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indian-govt-reject-demand-for-payment-in-chinese-currency-for-oil/article-60076"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(8)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले कुछ समय से चीन और रूस लगातार करीब आ रहे हैं। रूस और चीन की दोस्ती धीरे-धीरे मजबूत हो रही है, जो न सिर्फ पश्चिमी देशों के लिए, बल्कि भारत के लिए भी चिंता का विषय है। इस बीच, भारत को क्रूड ऑयल बेच रहा रूस चीनी मुद्रा में पेमेंट की मांग कर रहा है। मोदी सरकार ने कच्चे तेल के इम्पोर्ट के लिए चीनी मुद्रा में भुगतान करने के रूसी तेल सप्लायर्स के दबाव को खारिज करके झटका दे दिया। इसके पीछे बीजिंग और नई दिल्ली के बीच लंबे समय से जारी तनाव वजह है। बातचीत में सीधे शामिल एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी और सरकार के स्वामित्व वाली तेल रिफाइनरी के एक अन्य वरिष्ठ व्यक्ति के अनुसार, कुछ रूसी तेल सप्लायर्स युआन में भुगतान की मांग कर रहे हैं। दोनों लोगों ने पहचान उजागर न करने को कहा क्योंकि चर्चाएं निजी हैं। इन दो लोगों और दो अन्य भारतीय सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उन अनुरोधों पर सहमत नहीं होगी। भारत की लगभग 70 फीसदी रिफाइनरी सरकारी स्वामित्व वाले हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें वित्त मंत्रालय के निदेर्शों का पालन करना होगा।</p>
<p><strong>सरकार ने युआन में भुगतान पर लगाई रोक</strong><br />सबसे बड़ी सरकारी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने पिछले दिनों रूसी कच्चे तेल के लिए युआन का भुगतान किया था। सरकार ने तब से उस पर रोक लगा दी है। निजी रिफाइनरी युआन में भुगतान का समाधान कर सकते हैं। रूस के पास रुपए की अतिरिक्त सप्लाई है, जिसका इस्तेमाल करने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि पिछले वर्ष में युआन की मांग तेजी से बढ़ी है और अर्थव्यवस्था इम्पोर्ट के लिए चीन पर अधिक निर्भर हो गई है।</p>
<p><strong>ज्यादातर व्यापार युआन में ही कर रहा रूस</strong><br />रूसी बिजनेसमैन अपना ज्यादातर व्यापार युआन में ही कर रहे हैं। इस वर्ष चीनी मुद्रा डॉलर की जगह रूस में सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा भी बन गई है। यदि तेल की कीमतें अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा रूसी तेल पर लगाई गई 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा से ऊपर हैं, तो भारतीय रिफाइनरी ज्यादातर रूसी तेल इम्पोर्ट के लिए दिरहम - संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा-अमेरिकी डॉलर और थोड़ी मात्रा में रुपये का भुगतान करती हैं, जबकि युआन का इस्तेमाल कभी-कभी छोटे लेनदेन में ही किया जाता है। रूस अब भारत के लिए कच्चे तेल का शीर्ष सप्लायर है, जो दक्षिण एशियाई देशों की खरीद का लगभग आधा हिस्सा बनाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 10:49:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत को रूस ने फिर दिया झटका, चीनी मुद्रा युआन में ही पेमेंट पर बल</title>
                                    <description><![CDATA[विवाद के बावजूद रूस की कुछ कंपनियां जैसे रोसनेफ्ट, भारतीय रिफाइनरों को तेल उपलब्ध करा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/7-shipments-of-the-oil-not-paid/article-59834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(1)15.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। भारत सरकार, सरकारी रिफाइनरों को रूसी तेल की खरीद पर भुगतान के लिए चीनी मुद्रा की अनुमति नहीं देना चाहती है। एक रिपोर्ट में इस नई जानकारी के साथ ही एक बार फिर दोनों देशों के बीच तेल की खरीद के भुगतान में पेमेंट का मामला सामने आ गया है। भारत सरकार की अनिच्छा के कारण तेल की कम से कम 7 शिपमेंट का भुगतान नहीं हो सका है। विवाद के बावजूद रूस की कुछ कंपनियां जैसे रोसनेफ्ट, भारतीय रिफाइनरों को तेल उपलब्ध करा रही हैं।</p>
<p><strong>सितंबर महीने से अटकी पेमेंट</strong><br />भारतीय रिफाइनर ने कुछ रूसी तेल भुगतान के लिए चीनी युआन का प्रयोग करना शुरू कर दिया, जबकि अधिकांश तेल खरीद के लिए डॉलर में ही पेमेंट हो रही है। भारत सरकार ने भुगतान के लिए युआन का प्रयोग करने में असुविधा व्यक्त की है। प्रभावित रिफाइनर के अधिकारियों ने नोट किया है कि कम से कम सात शिपमेंट का भुगतान अभी भी लंबित है, जिनमें से कुछ सितंबर के अंत से बकाया हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सरकार ने साफ तौर पर सरकारी रिफाइनरों को युआन का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया है या नहीं। लेकिन यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत इसे स्वीकार नहीं करेगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि हालांकि यह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन सरकार ऐसे व्यापार को न तो प्रोत्साहित करती है और न ही सुविधा देती है। भारतीय रिफाइनर द्वारा खरीदा गया अधिकांश रूसी तेल व्यापारियों से आता है, जिसमें कुछ रूसी कंपनियों से सीधी खरीद के तहत लिया जाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 10:52:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेल निर्यात के मामले में सऊदी अरब को भारत ने दिया झटका</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने सितंबर में इस साल सबसे कम तेल खरीदा है, क्योंकि तेल रिफाइनरी में मेंटेनेंस शटडाउन शुरू हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-gave-a-blow-to-saudi-arabia-in-the-oil-case/article-58632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/si-(16).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक देशों में से एक सऊदी अरब को भारत से बड़ा झटका लगा है। सितंबर महीने में भारत ने सबसे ज्यादा कच्चा तेल रूस और इराक से खरीदा है। जबकि आमतौर पर सऊदी अरब इराक के बाद भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश रहा है। <br />एक अंग्रेजी वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में सऊदी अरब ने भारत को प्रतिदिन लगभग 5 लाख 56 हजार बैरल तेल निर्यात किया, जो अगस्त की तुलना में लगभग एक तिहाई कम है, वहीं, जनवरी 2022 से लेकर अगस्त 2023 तक सऊदी अरब ने औसतन साढ़े सात लाख बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात किया था।  कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस फर्म के मुताबिक, इससे पहले अगस्त महीने में भारत ने रूस और इराक से कम तेल आयात किया था। जबकि सितंबर महीने में रूस और इराक से तेल आयात काफी बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इराकी और रूसी तेल की कीमत सऊदी तेल की कीमत की तुलना में कम है। यही कारण है कि भारत ने सितंबर महीने में सऊदी तेल की कम खरीद की है।<br />हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने सितंबर में इस साल सबसे कम तेल खरीदा है, क्योंकि तेल रिफाइनरी में मेंटेनेंस शटडाउन शुरू हो गया है।</p>
<p><strong>रूस और इराक से तेल आयात में भारी बढ़ोतरी</strong><br />इससे पहले अगस्त में भारत का रूसी तेल आयात पिछले सात महीने के निचले स्तर पर आ गया था। भारत ने अगस्त में रूस से सिर्फ 1.55 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया था। जो सितंबर में लगभग 18 प्रतिशत बढ़कर 1.83 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है। वहीं, इराक से तेल आयात में भी लगभग 7.4 प्रतिशत वृद्धि हुई है। भारत ने सितंबर महीने में इराक से लगभग 0.91 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा। सितंबर महीने में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत तो इराक की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत है। वहीं, अगस्त महीने में यह हिस्सेदारी क्रमश: 35.4 प्रतिशत और 19.5 प्रतिशत थी। वहीं, सितंबर महीने में भारत के कुल तेल आयात में सऊदी अरब की हिस्सेदारी घटकर 13 प्रतिशत रह गई है, जबकि अगस्त महीने में सऊदी अरब की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत थी। भारत ने सितंबर में सऊदी अरब से लगभग 5 लाख 56 हजार बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया है. जो अगस्त की तुलना में लगभग एक तिहाई कम है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Oct 2023 11:03:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान ने रूस से तेल आयात किया बंद </title>
                                    <description><![CDATA[रिफाइनिंग प्रक्रिया में पेट्रोल की तुलना में फर्नेस ऑयल भारी मात्रा में निकलता है। इस तेल का कोई फायदा नहीं होता है। इसी वजह से पाकिस्तान से कच्चे तेल का आयात निलबिंत करने का फैसला किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-stopped-importing-oil-to-russia/article-54548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/news-(7)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कराची। पाकिस्तान ने भारत की तर्ज पर रूस से कच्चे तेल का आयात शुरू किया था, लेकिन अब इस आयात को बंद कर दिया है। पाकिस्तान की सरकार ने रूस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत रियायती दरों पर कच्चे तेल की पहली खेप का आभार व्यक्त किया था, लेकिन अब इस फैसले से सब कुछ मुश्किलों में पड़ता दिख रहा है।</p>
<p><strong>यह है वजह</strong><br />रिफाइनिंग प्रक्रिया में पेट्रोल की तुलना में फर्नेस ऑयल भारी मात्रा में निकलता है। इस तेल का कोई फायदा नहीं होता है। इसी वजह से पाकिस्तान से कच्चे तेल का आयात निलबिंत करने का फैसला किया है। सूत्रों ने दावा किया है कि पाकिस्तान रिफाइनरी ने रूसी तेल की ज्यादा मात्रा को रिफाइन करने से इनकार कर दिया है। कहा जा रहा है कि इससे अरब लाइट सी क्रूड ऑयल की तुलना में 20 फीसदी से ज्यादा फर्नेस ऑयल होता है। रूस से तेल आयात के मुद्दे ने पिछले एक साल में जमकर राजनीतिक और कूटनीतिक अहमियत प्राप्त की है। पाकिस्तान ने रूस से आने वाले तेल की कीमत और उसके आने की जानकारी को पूरी तरह से सीक्रेट रखा था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 10:52:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय कंपनियां रूस से सस्ता तेल खरीदने के लिए दिरहम में कर रही भुगतान </title>
                                    <description><![CDATA[ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार स्पेसिफिक ट्रेडर्स की मांग के आधार पर पेमेंट्स कार्गो टू कार्गो बदल रहा है। हालांकि, रिलायंस, बीपीसीएल और नायरा ने इस पर तक्काल कोई टिप्पणी नहीं की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indian-companies-paying-in-dirhams-to-buy-cheap-oil-from/article-36906"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/q-105.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूक्रेन पर हमले के बाद रूस का तेल निर्यात रोकने के लिए पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत ने इसके कई रास्ते निकाल लिए। रुपी-रूबल ट्रेड को एक नया आयाम मिला। भारत किसी से नहीं डरा और इसने रूस से जमकर कच्चा तेल खरीदा। अब रूसी तेल खरीदने के लिए भारतीय कंपनियों ने एक नया रास्ता निकाला है। यह संयुक्त अरब अमीरात से होकर जाता है। यानी वहां की करेंसी दिरहम यूज होती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपीसीएल और नायरा एनर्जी रूसी तेल खरीदने के लिए दिरहम का उपयोग कर रही हैं। इस तरह वे पश्चिमी प्रतिबंधों से बच रही हैं। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार खरीदारों ने कुछ लेनदन इस करेंसी में किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार स्पेसिफिक ट्रेडर्स की मांग के आधार पर पेमेंट्स कार्गो टू कार्गो बदल रहा है। हालांकि, रिलायंस, बीपीसीएल और नायरा ने इस पर तक्काल कोई टिप्पणी नहीं की है।</p>
<p><strong>भारत यूएई का दूसरा बड़ा ट्रेड पार्टनर</strong><br />यूएई दिरहम भारतीय खरीदारों और रूसी सेलर्स को ग्रीनबैक के संभावित प्रतिबंधों की जटिलताओं के बिना अपेक्षाकृत अनुमानित करेंसी प्रदान करता है। भारत यूएई का दूसरा बड़ा ट्रेड पार्टनर है। अधिकारी दिरहम और रुपए के बीच व्यापार बढ़ाने के मैकेनिज्म पर काम कर रहे हैं।</p>
<p><strong>अधिकतर डील्स अभी भी डॉलर में</strong><br />अधिकतर आयल डील्स अभी भी डॉलर में की जाती हैं। भारत के तेल मंत्री ने कहा कि उन्हें तेल खरीद में दिरहम के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी। हरदीप सिंह पुरी ने बेंगलुरु में एक इंटरव्यू में कहा कि यदि आप मुझसे आधिकारिक तौर पर पूछ रहे हैं कि क्या मैं इन भुगतान चैनलों के बारे में जानता हूं तो नहीं, मैं नहीं जानता हूं। अगर जरूरत पड़ी तो हम बात करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Feb 2023 11:03:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस का सस्ता तेल अमेरिका को बेच रहा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[ पिछले साल की तुलना में इस साल भारत ने अमेरिका को बहुत ही अधिक मात्रा में वैक्यूम गैस ऑयल की आपूर्ति की है। मई 2021 में अमेरिका ने भारत से जहां सिर्फ एक कार्गो वीजीओ खरीदा था, वहीं, इस साल अमेरिका ने अभी तक कई खेप कार्गो वीजीओ खरीद चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-is-selling-russias-cheap-oil-to-america/article-29345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/d-1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रूस से तेल खरीद पर रोक लगाने के बाद अमेरिका ने देश में तेल की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए भारत की ओर रुख किया है। मार्केट सूत्र के अनुसार, ग्लोबल ऑयल ट्रेडर्स  विटोल और  टेराफीग्रा दोनों ने भारतीय रिफाइनरी नायरा एनर्जी से 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से एक-एक कार्गो वैक्यूम गैस ऑयल (वीजीओ) खरीदा है। सूत्रों की मानें तो दिसंबर में यह कार्गो भारत के वादीनार पोर्ट से अमेरिका या यूरोप जाएगा. वीजीओ एक प्रकार का कच्चा तेल है जिससे गैसोलिन और डीजल बनाया जाता है।  इससे पहले एफ्रामैक्स टेंकर शंघाई डॉन ने भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर पोर्ट से कम से कम 80 हजार टन वीजीओ खरीदा था। यह खेप अक्टूबर के अंत में या नवंबर की शुरूआत में अमेरिका पहुंचा था। <br /><br /><strong>पिछले साल की तुलना सप्लाई कई गुना बढ़ी</strong><br />पिछले साल की तुलना में इस साल भारत ने अमेरिका को बहुत ही अधिक मात्रा में वैक्यूम गैस ऑयल की आपूर्ति की है। मई 2021 में अमेरिका ने भारत से जहां सिर्फ एक कार्गो वीजीओ खरीदा था, वहीं, इस साल अमेरिका ने अभी तक कई खेप कार्गो वीजीओ खरीद चुका है। यूक्रेन युद्ध से पहले अमेरिका को सबसे ज्यादा वीजीओ रूस निर्यात करता था। यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस कई प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। अमेरिका और कनाडा ने रूस से तेल खरीद पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। वहीं, यूरोपियन यूनियन भी 5 दिसंबर और 5 फरवरी 2023 से रूस से तेल खरीद पर रोक लगाने जा रहा है।<br /><br /><strong>भारत रूस से भारी मात्रा में खरीद रहा है तेल</strong><br />भारत दुनिया का तेल खरीदने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बावजूद भारत रूस से भारी मात्रा में रियायत कीमतों के साथ कच्चे तेल खरीद रहा है। भारत इस कच्चे तेल को रिफाइन कर पश्चिमी देशों को महंगे दामों में निर्यात कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Nov 2022 11:11:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मास्को से तेल खरीदने पर भारत की आलोचना पश्चिम का दोगलापन: राजदूत डेनिस अलीपोव</title>
                                    <description><![CDATA[ कुछ हफ्तों पहले यूरोप यात्रा के दौरान एस जयशंकर से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने पश्चिम के आरोपों का करारा जवाब दिया था। राजदूत ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-s-hypocrisy-criticizing-india-for-buying-oil-from-moscow-ambassador-denis-alipov/article-20811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/denis-alipov.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने रविवार को कहा कि उनके देश से कच्चा तेल आयात करने पर भारत की आलोचना करना, लेकिन खुद को अपने अवैध प्रतिबंधों से छूट देना, पश्चिमी देशों के सिद्धांतहीन रुख और दोहरे मापदंड को दशार्ता है। रूस यूक्रेन युद्ध पर भारत तटस्थ नीति का पालन कर रहा और बातचीत से मुद्दे को हल करने की बात कह रहा है। अमेरिका और कई पश्चिमी देश भारत के इस रुख से नाराज हैं।<br /><br />कुछ हफ्तों पहले यूरोप यात्रा के दौरान एस जयशंकर से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने पश्चिम के आरोपों का करारा जवाब दिया था। राजदूत ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भुगतान की कई प्रणालियां मौजूद हैं और एशिया एवं पश्चिम एशिया में व्यवहार्य विकल्पों की पेशकश करने वाले कुछ साझेदारों के साथ तीसरे देशों की मुद्राओं का उपयोग करने का भी एक विकल्प है। ऐतिहासिक रूप से, रूस भारत के लिए जीवाश्म ईंधन का प्रमुख स्रोत नहीं रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में भारत में रियायती दाम पर रूसी कच्चे तेल के आयात में भारी वृद्धि देखी गई है।</p>
<p><strong>भारत की आलोचना पश्चिम के दोहरे मापदंड<br /></strong>हालांकि पश्चिमी देश इस पर आपत्ति जता चुके हैं। अलीपोव ने कहा कि भारत की आलोचना करने वाले पश्चिमी देश स्वयं को अपने अवैध प्रतिबंधों से छूट देकर रूसी ऊर्जा संसाधन खुद सक्रिय रूप से खरीदने के तथ्य को लेकर ना केवल चालाकी से चुप्पी साधे रहते हैं, बल्कि ऐसा करके वे अपने सिद्धांतहीन रुख और दोहरे मापदंडों को भी स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। यूरोप में एक इंटरव्यू के दौरान जयशंकर से पूछा गया था कि क्या देश हित के लिए आप इस युद्ध में पैसा लगा रहे हैं?</p>
<p><strong>जयशंकर ने दिया करारा जवाब<br /></strong>जयशंकर ने इसका जवाब दिया कि क्या रूस से गैस खरीदना युद्ध में पैसा लगाना नहीं है? क्यों सिर्फ भारत का पैसा और भारत आने वाला तेल ही युद्ध की फंडिंग है यूरोप आने वाली गैस नहीं? अगर यूरोपीय व पश्चिमी देशों और अमेरिका को इतनी चिंता है तो वे क्यों ईरान और वेनेजुएला के तेल को बाजार में आने की अनुमति नहीं देते? उन्होंने तेल के हमारे अन्य सभी स्रोतों को बंद कर दिया और फिर कहते हैं कि आप मार्केट में नहीं जाएंगे और अपने लोगों के लिए सबसे अच्छा सौदा नहीं करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Aug 2022 11:52:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>तेल का खेल भूल अब तीर्थयात्रा से नगदी कमाने में जुटा सऊदी</title>
                                    <description><![CDATA[रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/forgetting-the-game-of-oil--now-saudi-is-busy-earning-cash-from-pilgrimage/article-13889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/d-12.jpg" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है। मौजूदा समय में तेल की उच्च कीमतों के बावजूद सऊदी अरब यह जानता है कि दुनिया वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेजी से मुड़ रही है। ऐसे में सऊदी प्रशासन ने भविष्य के लिए राजस्व के अपने स्रोतों में विविधता लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। उन स्रोतों में से एक तीर्थयात्रा है, जिस पर पूरी तरह से सऊदी अरब का एकाधिकार है। इस्लाम के दो सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल मक्का और मदीना सऊदी अरब में हैं और दुनियाभर के करी दो अरब मुसलमान अपनी पूरी जिंदगी में एक न एक बार इन दोनों जगहों की यात्रा जरूर करना चाहते हैं।<br /><br /><strong>2015 में सऊदी ने लॉन्च किया मिशन तीर्थयात्रा</strong><br />2015 में किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज के सत्ता में आने के तुरंत बाद सऊदी अरब ने मक्का में ग्रैंड मस्जिद का विस्तार करने के लिए 21 बिलियन डॉलर की परियोजना शुरू की थी। इसके जरिए मस्जिद में 300000 अतिरिक्त श्रद्धालुओं को समायोजित किया जाना था। इसके एक साल बाद तत्कालीन डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तीर्थयात्रा को 2030 तक सऊदी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की योजना के एक प्रमुख घटक के रूप में पहचान दी। बहरीन के डेरासैट थिंक टैंक के डॉयरेक्टर आॅफ रिसर्च उमर अल-उबैदली ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के विपरीत हज और उमराह के क्षेत्र में सऊदी अरब को एकाधिकार प्राप्त है।<br /><br /><strong>10 लाख मुसलमानों की अगवानी करेगा सऊदी</strong><br />कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण दो साल के अंतराल के बाद वार्षिक हज यात्रा करने के लिए दुनिया भर के मुसलमान इस सऊदी अरब पहुंचना शुरू हो गए हैं। यह मुसलमानों के लिए जीवन भर के धार्मिक दायित्व को पूरा करने का अवसर है, लेकिन साथ ही सऊदी अरब के पवित्र शहरों की अर्थव्यवस्था को हैवी बूस्ट मिलने का मौका भी है। कोरोना महामारी के कारण 2020 में सिर्फ सऊदी अरब के 1000 तीर्थ यात्रियों ने ही हज किया था, लेकिन 2021 में यह बढ़कर लगभग 60,000 हो गई थी। लेकिन, इस साल सऊदी ने हज के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं। ऐसा अनुमान है कि इस साल 10 लाख मुसलमान अलग-अलग देशों से सऊदी अरब पहुंचेंगे।<br /><br /><strong>सऊदी के खजाने की चाबी बनेंगे मक्का-मदीना</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। सऊदी अरब हर दिन अरबों डॉलर का तेल बेचता है। वहीं, तीर्थयात्रा से होने वाला आर्थिक लाभ तेल की तुलना में बहुत कम है। लेकिन, यह ऐसा क्षेत्र है, जो आने वाले दिनों में सऊदी अरब के खजाने को भरने की चाबी बन सकता है। वॉशिंगटन में अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट के सीनियर स्कॉलर रॉबर्ट मोगिएलनिकी ने कहा कि सऊदी अरब में धार्मिक पर्यटन आने वाले कई दशकों तक तेल और गैस से होने वाली कमाई का मुकाबला नहीं कर सकता है। लेकिन, मक्का और मदीना का धार्मिक महत्व कभी भी खत्म नहीं होगा। ऐसे में ये दोनों शहर सऊदी पर्यटन क्षेत्र के निर्माण और स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।<br /><br /><br /><strong>तीर्थयात्रा से हर साल अरबों डॉलर कमा रहा सऊदी</strong><br />लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर स्टीफन हर्टोग ने बताया कि हज के जरिए सऊदी अरब के पर्यटन के क्षेत्र में विकास की अनगिनत संभावनाएं हैं। तीर्थयात्रियों को अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने या मनोरंजन के लिए आकर्षित किया जा सकता है। उमराह के दौरान भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर पर्यटन के बाजार को और मजबूत और साल भर प्रॉफिट देने वाला बनाया जा सकता है।  2018 में मक्का ने पर्यटकों के जरिए 20 बिलियन डॉलर का ट्रांजेक्शन किया था। यहां आंकड़ा दुबई के बाद दूसरे नंबर पर है। सऊदी अरब का तीर्थयात्रा राजस्व औसतन लगभग 30 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष था। तब 2022 तक सउदी के लिए 100,000 रोजगार पैदा करने का अनुमान लगाया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महामारी से पहले हर साल 10-दिवसीय हज और उमराह तीर्थयात्रा के दौरान सऊदी अरब में 2 करोड़ 10 लाख तीर्थयात्री हर साल पहुंचते थे। महामारी के दौरान तीर्थयात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन सरकार 2030 तक हर साल 3 करोड़ तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने की प्लानिंग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 13:29:11 +0530</pubDate>
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