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                <title> Tourists attraction - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> Tourists attraction RSS Feed</description>
                
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                <title>आमेर में झील के बीच से दिखेगा किले का नजारा, मावठा सरोवर में जल्द शुरू होगी बोटिंग</title>
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                        <![CDATA[आमेर के सामने स्थित मावठा सरोवर में जल्द बोटिंग शुरू होगी। सैलानी Dal Lake की तर्ज पर शिकारा, पैडल और हाई-स्पीड बोट का आनंद ले सकेंगे। पर्यटन विभाग के अनुसार सुविधा फरवरी अंत या मार्च में शुरू होने की संभावना है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-view-of-the-fort-will-be-visible-from-the/article-143142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ऐतिहासिक आमेर किला के सामने स्थित मावठा सरोवर में पर्यटकों के लिए जल्द ही बोटिंग सुविधा शुरू की जाएगी। इस पहल से सैलानियों को किले और अरावली की पहाड़ियों के मनोहारी दृश्य झील के बीच से देखने का अनुभव मिलेगा। नई सुविधा के तहत कश्मीर की डल झील की तर्ज पर शिकारा बोटिंग, पैडल बोट और हाई-स्पीड बोट उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<p>पर्यटन विभाग के अनुसार, यह कदम आमेर को और अधिक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। झील के शांत वातावरण में बोटिंग करते हुए प्राकृतिक सौंदर्य का संगम महसूस कर सकेंगे। आरटीडीसी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बोटिंग सुविधा फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च माह में शुरू होने की संभावना है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 14:04:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>मरु मेला शोभायात्रा में आकर्षक का केंद्र बनी राजशाही पगड़ी : सात समंदर पार से आए विदेशी, अचलदास डांगरा को बंदील में देख अभिभूत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[विश्व प्रसिद्ध मरु महोत्सव की शोभायात्रा में अचलदास डांगरा का पारंपरिक जैसलमेरी बंदील आकर्षण केंद्र रहा। सुनहरे गोटे और किनारी वाली राजाशाही पगड़ी ने स्थानीय और विदेशी सैलानियों का ध्यान खींचा। फ्रांस के पर्यटक भी इसकी कलात्मकता देखकर अभिभूत हुए और फोटो खिंचवाए। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaisalmer/rajshahi-turban-became-the-center-of-attraction-in-the-desert/article-141387"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jaisalmer.png" alt=""></a><br /><p>जैसलमेर। विश्व प्रसिद्ध मरु महोत्सव की शोभायात्रा के दौरान शहर के अचलदास डांगरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। शोभायात्रा में सदियों पुरानी पारंपरिक जैसलमेरी बंदील, पगड़ी धारण किये डांगरा जैसलमेर की राजशाही परम्परा के समय की पगड़ी की याद दिला रहे थे। सुनहरे गोटे और किनारी वाली इस राजाशाही बंदील ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमानों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा। शोभायात्रा में शामिल फ्रांस के पर्यटकों ने जब अचलदास डांगरा को इस दुर्लभ और ऐतिहासिक बंदील में देखा तो वे अपनी उत्सुकता रोक नहीं पाए। सैलानियों ने अचलदास को बताया कि उन्होंने सोने के गोटे और किनारी वाली ऐसी कलात्मक बंदील पहली बार देखी है।</p>
<p>राजाशाही ठाठ-बाठ को दर्शाती पगड़ी को देख विदेशी मेहमान अभिभूत नजर आए और उन्होंने इस पल को यादगार बनाने के लिए उनके साथ जमकर फोटो खिंचवाए। डांगरा ने बताया कि यह बंदील उनकी अनमोल विरासत है, जो जैसलमेर की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को जीवंत करती है। मरु महोत्सव के रंगारंग उत्सव में यह बंदील पारंपरिक शान और स्थानीय संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जैसलमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 12:00:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>पर्यटक होंगे प्रदेश की सतरंगी संस्कृति से रू-ब-रू : श्री पुष्कर पशु मेले का आगाज 22 से, 7 नवम्बर को होगा समापन, पशुपालकों को आने का न्योता</title>
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                        <![CDATA[पशुपालन विभाग 22 अक्टूबर से 7 नवम्बर तक होने वाले श्री पुष्कर पशु मेले की तैयारियों में जुट गया है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/tourists-will-be-the-beginning-of-the-states-colorful-culture/article-128695"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। पशुपालन विभाग 22 अक्टूबर से 7 नवम्बर तक होने वाले श्री पुष्कर पशु मेले की तैयारियों में जुट गया है। मेले में आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को प्रदेश की सतरंगी संस्कृति से रूबरू कराने के लिए प्रदेश के पशुपालकों को परिवार सहित मेले में आने का न्योता दे रहा है। जिससे कि निकट भविष्य में मेले में पर्यटकों की संख्या को बढ़ाया जा सके। पुष्कर मेला, पशु मेले के नाम से विख्यात है, वहीं इसका धार्मिक महत्व भी है। हर साल मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और पशुपालक आते हैं। जो मेले के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न आयोजनों का हिस्सा बनते हैं, वहीं धार्मिक रीति-रिवाजों की रस्म अदा करते हैं। लेकिन बीते कई सालों से मेले में पशुओं की संख्या लगातार घटती जा रही है। जिससे पशु मेले का वजूद संकट में आ गया है। इसीलिए विभाग अब अधिक से अधिक पशुपालकों को मेले से जोड़ने के प्रयास कर रहा है। यही कारण है कि मेले में प्रदेश के पशुपालकों को परिवार सहित मेले में आने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। मेले में पशुपालकों को रियायती दर पर रसद सामग्री व खाने के पैकेट उपलब्ध होंगे। जिससे उन पर आर्थिक भार नहीं पड़ेगा।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर मेले का प्रचार : </strong></p>
<p>विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर मेले के प्रचार-प्रसार और पशुपालकों को परिवार सहित मेले में आने का निमंत्रण दिया जा रहा है। यह कार्य फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप पर पोस्ट के माध्यम से किया जा रहा है। साथ ही अधिकारी पशुपालकों के ग्रुप में भी पोस्ट के माध्यम से उन्हें मेले में अधिक से अधिक संख्या में आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।</p>
<p><strong>झलकेगी सांस्कृतिक विविधता :</strong></p>
<p>डॉ. घीया ने बताया कि इस प्रयास से मेले में जहां पशुओं की संख्या बढ़ेगी, वहीं यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को एक जगह पर ही राजस्थान की संस्कृति, सभ्यता, रहन-सहन, खानपान सहित सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलेगी। जिससे निकट भविष्य में मेले में इनकी संख्या भी बढ़ेगी।</p>]]>
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                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 12:44:17 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>माॅनसून सीजन में कुंभलगढ़, बांसवाड़ा, माउंट आबू और उदयपुर पर्यटकों की पहली पसंद</title>
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                        <![CDATA[पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक का कहना है कि राजस्थान में माउंट आबू हिल स्टेशन के रूप में शुमार है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kumbhalgarh-banswara-mount-abu-and-udaipur-first-choice-of-tourists/article-117754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)58.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में किले, महल, संग्रहालय के साथ ही पर्यटक अब मानसून में प्रकृति से जुड़ी जगहों को भी एक्सप्लोर करना पसंद कर रहे हैं। खासकर मानसून सीजन में पर्यटकों को राजस्थान का वो अलौकिक स्वरूप देखने को मिलता है, जिसे देख पर्यटक यह नहीं कहेंगे, कि राजस्थान की पहचान मात्र रेगिस्तान है। इस सीजन में पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाने के लिए बांसवाड़ा, माउंट आबू, उदयपुर और कुंभलगढ़ जैसी जगहों का रूख करने लगे हैं। पर्यटन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर दलीप सिंह राठौड़ के अनुसार राज्य में अब वर्ष पर्यन्त पर्यटन है। राज्य में मानूसन पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं और यह चौंकाने वाली बात नहीं हैं, क्योंकि राजस्थान का चेरापूंजी कहलाने वाला बांसवाड़ा सौ टापूओं का शहर कहलाता है।</p>
<p><strong>गुजरात से पर्यटक करते हैं माउंट आबू का रुख</strong><br />पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक का कहना है कि राजस्थान में माउंट आबू हिल स्टेशन के रूप में शुमार है। मानसून में इस जगह की खूबसूरती देखने लायक होती है। यहां वैसे तो पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है, लेकिन मानसून सीजन में गुजरात और आस-पास के क्षेत्र से पर्यटक इस ओर रूख करते हैं। माउंट आबू की खड़ी चट्टानों, शांत झीलों के साथ ही अच्छा मौसम पर्यटकों को आनन्दित कर देता है। </p>
<p><strong>इंक्वायरी के लिए पर्यटकों के आ रहे फोन</strong><br />अब मानसून सीजन का लुत्फ उठाने के लिए पर्यटक किले-महलों के अतिरिक्त ऐसी जगह भी जा रहे हैं, जो प्रकृति के करीब हो। इसके लिए पर्यटक पैकेज आदि की जानकारी के लिए ट्रेवल्स कम्पनियों से सम्पर्क करते हैं। पर्यटन विशेषज्ञ नरेन्द्र सिंह राठौड़ का कहना है कि मानसून सीजन में कुंभलगढ़ की खूबसूरती और उदयपुर की विभिन्न लेक्स को देखना भी पर्यटकों की पहली प्राथमिकता बन गई है। उदयपुर की पिछोला झील नाव की सवारी सुबह जहां आनंद की अनुभूति कराती है। वहीं ढलती शाम में पहाड़ों और महलों से घिरी यह झील रोमांच से भर देती है। पिछोला के अलावा उदयपुर की दूसरी बड़ी झील फ तेह सागर है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jun 2025 13:20:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रदेश के गढ़ और किलों के साथ अब धार्मिक स्थल भी बन रहे सैलानियों की खास पसन्द, विदेशियों ने भी धार्मिक स्थलों पर दर्ज कराई अपनी उपस्थिति </title>
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                        <![CDATA[राजस्थान घरेलू व विदेशी पर्यटकों के लिए वर्ष पर्यन्त टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-the-first-quarter-52353010-domestic-and-foreign-tourists-came/article-115724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer49.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान घरेलू व विदेशी पर्यटकों के लिए वर्ष पर्यन्त टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन गया है। इस साल की पहली तिमाही जनवरी, फरवरी व मार्च में प्रदेश में अब तक 5,23,53,010 घरेलू व विदेशी पर्यटक यात्राएं कर चुके हैं।</p>
<p> इनमें 5,15,64,275 घरेलू व 7,88,735 विदेशी पर्यटक पर्यटक शामिल हैं।  पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ के अनुसार प्रदेश के धार्मिक आस्था के केंद्रों पर 3,48,89,072 घरेलू पर्यटकों की यात्राएं दर्ज की गई। वहीं 86,487 विदेशियों ने भी अपनी उपस्थिति धार्मिक स्थलों पर दर्ज कराई है। </p>
<p>खास बात यह भी है कि प्रदेश के गढ़ व किले आज भी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। इस साल के पहले तीन महीनों में प्रदेश के गढ़ व किलों को देखने घरेलू पर्यटकों की संख्या 35,87,875 एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या 2,33,066 रही। राठौड़ का कहना है कि राज्य सरकार की मंशा प्रदेश में विदेशी पर्यटकों की संख्या को बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू पर्यटकों की आमद को बढ़ाने की है। इसी के चलते प्रदेश के धार्मिक आस्था के केंद्रों पर पर्यटन विभाग द्वारा बुनियादी पर्यटकीय सुविधाओं को अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 29 May 2025 14:01:44 +0530</pubDate>
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