<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/jdb-arts-college/tag-55965" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>jdb arts college - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/55965/rss</link>
                <description>jdb arts college RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असर खबर का : जिला प्रशासन ने जेडीबी आर्ट्स प्राचार्य से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[कमेटी ने गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट को सौंपी 40 पेजों की रिपोर्ट में इसके गंभीर दुष्प्रभाव बताए थे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--district-administration-seeks-explanation-from-jdb-arts-principal/article-161841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय कला कन्या महाविद्यालय (जेडीबी आर्ट्स) परिसर में लगाए गए स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कोनोकार्पस इरेर्क्ट्स पौधे का मामला जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। जिला कलक्टर कार्यालय ने रविवार को कॉलेज शिक्षा के क्षेत्रिय सहायक निदेशक से इस मामले में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस पर सहायक निदेशक ने प्रो. नवीन मित्तल ने जेडीबी आर्ट्स कॉलेज प्राचार्य प्रो. सीमा चौहान से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन द्वारा सोमवार को स्पष्टीकरण दिए जाने की तैयारी में जुट गया है।</p>
<p>बता दें, दैनिक नवज्योति ने 2 अगस्त के अंक में जेडीबी आर्ट्स ने कॉलेज में लगा दिए बीमारियों के खतरनाक पौधे, संकट में छात्राओें की सेहत..., शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। कॉलेज की पर्यावरण समिति ने बिना जांच-परख के हरियाली व सौंदर्यीकरण के नाम पर एलर्जिक व अस्थमा के कारण बनने वाले पौधे लगा दिए गए। जिससे छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>सीएसी कमेटी कर चुकी बैन करने की सिफारिश</strong><br />सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी-सीएसी ने कोनोकार्पस इरेक्ट्स पेड़-पौधे को मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता व पर्यावरण के लिए खतरनाक माना है। कमेटी द्वारा गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट में सौंपी 40 पेजों की रिपोर्ट में इसके गंभीर दुष्प्रभावों का उल्लेख किया है। वहीं, देशभर में कोनोकार्पस के आयात, नर्सरी में उत्पादन पर बैन लगाने की सिफारिश की है।</p>
<p><strong>पत्तों में रसायन, मिट्टी की बदल जाती संरचना</strong><br />कमेटी में रिपोर्ट में बताया कि कोनोकार्पस के एलोपैथिक इम्पैक्ट भी है। इसके पत्तों में रसायन होता है, जो टूटकर जमीन पर गिरते हैं तो वह मिट्टी की संचरना को बदल देता है, जिससे हमारे स्थानीय पेड़-पौधों की वृद्धि रुक जाती है। जिससे पूरा ईको सिस्टम गड़बड़ा जाता है।</p>
<p><strong>जड़ें खतरनाक, इमारतों की नींव तक हिला डाली</strong><br />कमेटी ने कहा कि इसकी जड़ें काफी खतरनाक होती है। वह जमीन के नीचे काफी गहराई तक जाती है। <br />जिला कलक्ट्रेट से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। इस पर संबंधित कॉलेज प्राचार्य को जवाब देने के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-प्रो. नवीन मित्तल, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--district-administration-seeks-explanation-from-jdb-arts-principal/article-161841</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--district-administration-seeks-explanation-from-jdb-arts-principal/article-161841</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:04:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%283%296.png"                         length="1123931"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेडीबी आर्ट्स कॉलेज परिसर में हरियाली व सौंदर्यीकरण के नाम पर लगा दिए खतरनाक  प्रतिबंधित कोनोकार्पस </title>
                                    <description><![CDATA[ बिना जांच-परख लगाए गए एलर्जिक पौधे,राजस्थान बायोडायवरर्सिटी बोर्ड भी कर चुका बैन करने की सिफारिश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dangerous-and-banned--conocarpus--plants-were-planted-on-the-jdb-arts-college-campus-in-the-name-of-greenery-and-beautification/article-161819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोनोकार्पस इरेर्क्ट्स पौधा दिखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही मानव स्वास्थ्य व बायोडायवर्सिटी के लिए घातक है। इसके बावजूद राजकीय कला कन्या महाविद्यालय प्रशासन ने बिना जांच-परख के अपने कैम्पस में कोनोकार्पस इरेक्टर्स पौधे लगा दिए। जबकि, इस पौधें के दुष्प्रभाव को देखते हुए देश के 4 बड़े राज्यों ने इसे बैन कर दिया है। क्योंकि, इन पौधों के फूलों से निकलने वाले परागरण एलर्जिक हैं, जो अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। इतना ही नहीं, अस्थमा मरीजों के सम्पर्क में आने अटैक का खतरा भी रहता है। ऐसे में सवाल उठता है, कॉलेज में जहां हजारों छात्राओं की मौजूदगी व आवाजाही रहती है वहीं, बिना जांच परख के इस तरह के खतरनाक पौधे लगाए जाना बालिकाओें के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। हालात यह है कि इस पौधे के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए राजस्थान बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी प्रदेश में कोनोकार्पस को बैन करने की सिफारिश की हुई है।</p>
<p><strong>कॉलेज की पर्यावरण समिति ने लगाए कोनोकार्पस</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोनोकार्पस पौधे कॉलेज की पर्यावरण समिति ने लगाए हैं। यह 3 से 5 फीट ऊंचे हैं, जो मानसून में तेजी से बढ़ने के साथ इसके एलर्जिक परागरण छात्राओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, इस पौधे पर तो पंछी भी घोंसला नहीं बनाते। श्वांस संबंधी बीमारियों के साथ भूजल भी अधिक सोखते हैं। जिससे आसपास उगने वाली स्थानीय प्रजाति के पेड़-पौधों भी नहीं पनप पाते।</p>
<p><strong>इन 4 राज्यों ने लगाया कोनोकार्पस पर प्रतिबंध</strong><br />उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कोनाकार्पस, मनुष्य के साथ बायोडायवर्सिटी के लिए भी हानिकारक है। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी-सीएसी ने कोनोकार्पस इरेक्ट्स पेड़-पौधे को मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता व पर्यावरण के लिए खतरनाक माना है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /><strong>पिछले साल साल लगाए थे यह पौधे</strong><br />यह पौधे पिछले साल लगाए गए थे। जानकारी के अभाव में कॉलेज की पर्यावरण समिति द्वारा लगा दिए गए थे। नुकसान पहुंचाने वाले पौधों को कॉलेज कैम्पस में बिलकुल नहीं रखेंगे।<br />-प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य राजकीय कला कन्या महाविद्यालय (जेडीबी आर्ट्स)</p>
<p>इनके परागरण एलर्जिक होते हैं, जो अस्थमा व सांस से संबंधित बीमारियों का कारण बनाता है। इनकी जगह नीम, बरगद, पीपल, आंवला, बेल, अर्जुन जैसे पौधे लगाए जाना चाहिए, जो ज्यादा मात्रा में आॅक्सीजन जनरेट करते हैं।<br /><strong>-प्रो. निरजा श्रीवास्तव, बोटनी, राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>यह पौधे एलर्जिक होते हैं, इनके हानिकारक दुष्प्रभावों को देखते हुए देश की कुछ राज्य सरकारों ने इसे लगाने को प्रतिबंधित किया है। इनकी जगह स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाना चाहिए। जिससे जैव विविधता बनी रहे।<br /><strong>-सुगना राम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dangerous-and-banned--conocarpus--plants-were-planted-on-the-jdb-arts-college-campus-in-the-name-of-greenery-and-beautification/article-161819</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dangerous-and-banned--conocarpus--plants-were-planted-on-the-jdb-arts-college-campus-in-the-name-of-greenery-and-beautification/article-161819</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:14:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%283%295.png"                         length="1123050"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>16 हजार की डिग्री के लिए बालिकाएं चुका रही 50 हजार, रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</title>
                                    <description><![CDATA[रेगुलर स्कीम के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ढाई गुना ज्यादा लग रही फीस ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(3)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में एमए होम साइंस व जीपीईएम पिछले 7 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहे हैं। जिससे बालिकाओं की शिक्षा महंगी हो गई। नतीजन, 16 हजार की डिग्री के लिए उन्हें 50 हजार रुपए फीस चुकानी पड़ रही है। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, बालिकाओं के शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई। दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस बीए तक तो सरकारी स्कीम के तहत संचालित होता है। जिसमें कोर्स फीस परईयर 3 हजार रुपए लगती है। जबकि, एमए में यही कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से 20 हजार रुपए परईयर हो गई।  महंगी फीस के कारण बालिकाओं को बारां-झालावाड़ की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं, इंडस्ट्रीज में डिमांड होने के बावजूद छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन नहीं ले पा रही। </p>
<p><strong>जीपीईएम :</strong> 40 हजार कोर्स व 10 हजार एग्जाम फीस: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एमए जीपीईएम कोर्स की फीस पर-ईयर 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। पर-सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए छात्राओं को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना चुनौतिपूर्ण रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती। </p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</strong><br />जीपीईएम विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदू चतुर्वेदी बताती हैं, यदि गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) कोर्स सरकारी स्कीम में संचालित किया जाए तो इसकी फीस 20 हजार की बजाय 3 हजार रुपए सालाना हो जाएगी। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस 5 हजार रुपए जोड़कर 8 हजार रुपए में एक साल पूरा हो जाएगा। इस तरह दो साल की यह डिग्री 50 हजार की जगह 16 हजार रुपए में पूरी हो जाएगी। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं दाखिला ले पाएंगी और उन पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। टैक्सटाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभर सकेंगी। </p>
<p><strong>होम साइंस : 15 हजार की जगह लग रहे 30 हजार</strong><br />होम साइंस की विभागाध्यक्ष दीपा स्वामी बताती हैं, एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। इसकी पर-ईयर फीस 10 हजार रुपए तथा 5 हजार रुपए सेमेस्टर एग्जाम फीस है। ऐसे में एक साल में 15 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस तरह दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकारी मोड पर संचालित होने से इसकी फीस परईयर 3 हजार रुपए ही है। </p>
<p><strong>साइड इफेक्ट: हर साल खाली रहती सीटें</strong><br />कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अन्य जिलों से भी लड़कियां जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में एमए जीपीईएम में दाखिले के लिए आवेदन करती हैं। इस विषय में कुल 20 सीटें हैं, जिसके मुकाबले एडमिशन फॉर्म तो दो गुने आते हैं लेकिन फीस ज्यादा होने के चलते 10 से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। कॉलेज में यूजी में 1999 में यह कोर्स शुरू हुआ था। उस समय राज्य में केवल अलवर व बीकानेर में ही चलता था। डिमांड बढ़ने पर जेडीबी में पीजी में वर्ष 2018 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में इस कोर्स को शुरू किया था। जीपीईएम में गत वर्ष प्रिवियस में 15 तथा फाइनल में 11 सीटें खाली रह गई। होम साइंस की 40 सीटों में से आधी सीटें खाली रही थी।  </p>
<p><strong>बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर छात्राएं</strong><br />छात्राओं ने बताया कि हाड़ौती में केवल राजकीय महाविद्यालय बारां व झालावाड़ में ही होम साइंस रेगुलर स्कीम में संचालित हो रहा है। जिसमें सरकारी फीस होने के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं कोटा से बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर होती है। जबकि, कोटा में इसे सरकारी स्कीम में चलाने के लिए आयुक्तालय से लेकर विधायक मंत्री तक को ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>फीस बहुत महंगी, रेगुलर मोड पर चलाए सरकार</strong><br />मैने जीपीईएम में एमए किया है। सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से कोर्स की फीस बहुत महंगा है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो गए। इतनी महंगी शिक्षा से कई छात्राएं रुचि होते हुए भी यह कोर्स नहीं कर पातीं। सरकार को छात्राओं के हित में इस कोर्स को रेगुलर स्कीम में संचालित करना चाहिए। <br /><strong>-निकिता सचवानी, रिसर्चर जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>एक साथ 20 हजार रुपए सालाना फीस जमा करवाना लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। क्योंकि, अधिकतर छात्राएं ग्रामीण परिवेश से आती हैं। जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में चलाने के लिए शिक्षकों व आयुक्तालय से डिमांड की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फॉर्म तो सीटों से दो गुना आते हैं लेकिन महंगी फीस के कारण छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। कुछ समय पहले छात्राओं  ने होमसाइंस व जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। <br /><strong>-अनुश्री सक्सेना, छात्रा जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्रोफेसर </strong><br /><strong>परिधान इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर </strong><br />जीपीएम, गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एम्पोर्ट मैनेजमेंट कोर्स होता है। इसमें कपड़ा निर्माण से लेकर डिजाइनिंग व एक्सपोर्ट-एम्पोर्ट तक की जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में एडमिशन लेकर छात्राएं, फैशन डिजाइनिंग, परिधान उद्योग, गारमेंट व्यवसाय, बुटीक, गारमेंट इंडस्ट्री में कॅरियर बना सकती हैं। वहीं, नेट व सेट कर आरपीएससी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी पा सकती हैं। छात्राओं को जयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा में इंडस्ट्री विजट करवाई जाती है। वहीं,  कैथून में कोटा डोरिया के उत्पादन-निर्माण दिखाया जाता है। इसमें रोजगार के असीम अवसर उपलब्ध हैं।<br /><strong>-प्रो. बिंदू चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष जीपीईएम, जेडीबी आर्ट्स कॅलेज</strong></p>
<p>कोटा जिले में यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां होम साइंस में एमए कराई जाती है। लेकिन, सेल्फ फाइनेंस स्कीम में होने से फीस महंगी हो गई। जिसकी वजह से छात्राओं को बारां-झालावाड़ जाना पड़ता है। होम साइंस में प्रसार शिक्षा, इंटियर डिजाइनिंग, टेक्सटाइल, फू्रड एंड न्यूट्रीशियन तथा फर्नीचर डिजाइनिंग सीखाई जाती है। इसे रेगुलर मोड पर संचालित करवाने के लगातार प्रयास कर रहे हैं। आयुक्तालय को भी पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है इस सत्र से हो जाए। <br /><strong>-प्रो. दीपा स्वामी, विभागाध्यक्ष होम साइंस, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p> यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। पिछले 7 साल से जीपीईएम व होम साइंस कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। फीस बहुत महंगी है, जिसके कारण छात्राओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इन कोर्सेज को सरकार द्वारा संचालित करवाने के लिए हर साल आयुक्तालय को पत्र भेजा जाता है।  हाल ही में लोकसभा स्पीकर के विशेषाधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। उन्होंने समाधान का भरोसा दिलाया है। अब तक उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायकों को भी पत्रों के माध्यम से छात्राओं के हित में इन कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में करवाने की मांग की थी। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। हालांकि, हमारे स्तर पर प्रयास जारी है।  <br /><strong> -प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954</guid>
                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:08:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-05/rtroer-%283%2922.png"                         length="514856"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        