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                <title>power crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>power crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूक्रेनी पीएम स्विरिडेनको ने की कनाडाई मंत्री से मुलाकात: ऊर्जा बहाली के लिए लगाई मदद की गुहार, 16 घंटे से भी अधिक हो रही बिजली कटौती</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा ने यूक्रेन के ऊर्जा सहायता कोष में अतिरिक्त 2 करोड़ कनाडाई डॉलर देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेनको ने इस सहयोग की सराहना की। भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन में 16 घंटे तक बिजली कटौती जारी है, जिससे निपटने के लिए अब कुल कनाडाई मदद 9 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ukrainian-pm-sviridenko-meets-canadian-minister-asks-for-help-in/article-148851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ukrin.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेनको ने कहा है कि उनके देश को ऊर्जा बहाली के लिए कनाडा से दो करोड़ कनाडाई डॉलर (14 करोड़ 40 लाख रुपये) की मदद मिलने की उम्मीद है। पीएम स्विरिडेनको ने बुधवार को एक्स पर कहा "आज, मैं कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय विकास राज्य मंत्री , रणदीप सराय से मिली... हम अपने देश को मजबूत करने में कनाडा के लगातार समर्थन को बहुत महत्व देते हैं, जिसमें हाल ही में घोषित दो करोड़ कनाडाई डॉलर भी शामिल हैं, जो यूक्रेन ऊर्जा सहायता कोष में दिए गए कुल योगदान को बढ़ाकर नौ करोड़ कनाडाई डॉलर तक पहुंचाता है।"</p>
<p>यूक्रेन के ऊर्जा मंत्री और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस श्मिहाल ने 16 जनवरी को देश के ऊर्जा क्षेत्र में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। यूक्रेन की ऊर्जा कंपनी यास्नो के प्रमुख सेरही कोवालेंको ने कहा कि यूक्रेन में बिजली कटौती दिन में 16 घंटे से भी अधिक समय तक चल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 16:52:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदला मौसम : बिजली संकट में राहत  डिमांड घटने से कटौती समय भी घटा</title>
                                    <description><![CDATA[ऊर्जा विभाग के अफसरों का दावा है कि मौसम में बदलाव की वजह से तापमान में गिरावट बनी रही तो सप्लाई के लिए बाहर से मंहगी बिजली कम खरीदनी पड़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/changed-weather-relief-in-power-crisis-reduction-in-demand-cut/article-80258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/electricity-5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में बदले मौसम ने बिजली विभाग को भी कुछ हद तक राहत दी है। आंधी और बारिश के चलते एक दर्जन से अधिक जिलों में पिछले दो दिनों में डिमांड घटने से कटौती भी कम हुई है। अगले कुछ दिनों में भी बिजली कंपनियों को तापमान में कमी से सप्लाई में आसानी रहेगी।</p>
<p>राजस्थान डिस्कॉम को कई जिलों में कम बिजली कटौती करनी पड़ी। मौसम बदलने से दिन और रात दोनों समय डिमांड अचानक कम हुई तो डिमांड और सप्लाई में बने अंतर में करीब 100 लाख यूनिट का अंतर आ गया। पिछले सप्ताह से डिमांड और सप्लाई में बने अंतर के बीच रोजाना 600 लाख यूनिट बिजली अतिरिक्त उपलब्ध करानी पड़ रही थी, लेकिन मौसम बदलाव से यह 500 लाख यूनिट तक पहुंच गया।</p>
<p>डिमांड-सप्लाई अंतर को देखते हुए ही विद्युत उत्पादन निगम और ऊर्जा विकास निगम बिजली उपलब्धता पर काम कर रहे हैं। हालांकि कई जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कटौती जारी है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में डिमांड अभी भी ज्यादा बनी हुई है। ऊर्जा विभाग के अफसरों का दावा है कि मौसम में बदलाव की वजह से तापमान में गिरावट बनी रही तो सप्लाई के लिए बाहर से मंहगी बिजली कम खरीदनी पड़ेगी। फिलहाल प्री मानसून आने तक कुछ दिन और कटौती बनी रह सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 09:33:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिजली संकट पर राठौड़ ने गहलोत सरकार पर साधा निशाना- यह पूर्ववर्ती सरकार के बिजली कुप्रबंधन की देन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में चल रहे बिजली संकट को लेकर भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। राठौड़ ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली संकट पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन की देन है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rathore-targeted-gehlot-government-on-power-crisis-this-is/article-79831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/rajendra-rathore1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में चल रहे बिजली संकट को लेकर भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। राठौड़ ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली संकट पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन की देन है। </p>
<p>राजेन्द्र राठौड़ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि "प्रदेश में बिजली संकट पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के बिजली कुप्रबंधन की ही देन है। पूरे पांच साल अधिकतर समय प्रदेश में स्थित बिजली उत्पादन इकाईयां ठप रही। सरकार ने निजी विद्युत उत्पादन कर्ताओं से महंगी बिजली खरीदकर चांदी कूटने का काम किया और जनता की जेब पर डाका डाला। प्रदेश में बिजली की आपूर्ति के लिए तत्कालीन सरकार ने बैंकिंग समझौते के जरिए दूसरे राज्यों से बिजली ली थी,आज उसी समझौते के तहत इस भीषण गर्मी में 147 लाख यूनिट बिजली दूसरे राज्यों को चुकानी पड़ रही है। जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। राजस्थान में बिजली संकट को दूर करने और बिजली उत्पादन के मामले में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने हेतु भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने विद्युत निगमों और केंद्रीय उपक्रमों के बीच थर्मल और अक्षय ऊर्जा उत्पादन के नए प्रोजेक्ट के लिए करीब 1.60 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए गए हैं। यह आने वाले दिनों में प्रदेश में बिजली संकट को रोकने में सार्थक साबित होंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 19:17:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में बिजली संकट के बीच एक्सचेंज से खरीदी जा रही बिजली भी पर्याप्त नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ऊर्जा विभाग के अनुसार गहलोत सरकार ने पिछले साल रबी सीजन में बिजली डिमांड पूरी करने के लिए अन्य राज्यों से करीब 34,800 लाख यूनिट बिजली का एग्रीमेंट किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amidst-the-power-crisis-in-the-state-the-electricity-being/article-79253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/electricity-52.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में बिजली संकट और कटौती के बीच ऊर्जा विभाग बिजली की कमी से जूझ रहा है। डिमांड और सप्लाई में 500 लाख यूनिट से ज्यादा अंतर को पाटने के लिए एक्सचेंज से महंगी दरों पर खरीदी जा रही बिजली से भी पर्याप्त सहारा नहीं मिल रहा,ऊपर से पिछले साल अन्य राज्यों से एग्रीमेंट के तहत खरीदी गई बिजली इस साल लौटाने के कारण बिजली लोड मैनेजमेंट गड़बड़ाया हुआ है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर बिजली कुप्रबंधन के लिए पूर्ववर्ती गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो फिलहाल कटौती से परेशान लोगों की पीड़ा को तत्काल राहत देने का कोई प्लान भी उनके पास नहीं है।</p>
<p>ऊर्जा विभाग के अनुसार गहलोत सरकार ने पिछले साल रबी सीजन में बिजली डिमांड पूरी करने के लिए अन्य राज्यों से करीब 34,800 लाख यूनिट बिजली का एग्रीमेंट किया था। ऊर्जा विभाग को यह बिजली अक्टूबर 2023 से फरवरी 2024 तक मिली थी। एग्रीमेंट से बंधे होने के कारण पीक सीजन में भी राजस्थान को यह बिजली लौटानी पड़ रही है। ऊर्जा विभाग रोजाना 200 से 225 लाख यूनिट बिजली लौटा रहा है,जो रोजाना डिमांड का करीब पांच प्रतिशत है। अब तक 13,264 लाख यूनिट बिजली लौटाई जा चुकी और 21,536 लाख यूनिट लौटाना शेष है।</p>
<p><strong>आकड़ों पर नजर</strong><br />बिजली लौटाने के बीच संकट से निपटने के लिए रोजाना एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार 17 मई को 569 लाख यूनिट, 18 को 523 लाख यूनिट, 19 को 571 लाख यूनिट, 20 को 497 लाख यूनिट, 21 को 631 लाख यूनिट, 22 को 467 लाख और 23 मई को 665 लाख यूनिट बिजली खरीदी गई। डिमांड-सप्लाई में अंतर अधिक होने से खरीदी बिजली भी फिलहाल अपर्याप्त है।</p>
<p><strong>सरकारी विभागों में फिजूलखर्ची रुके, खाली कमरों में नहीं चलें एसी</strong><br />ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा है कि बिजली संकट की एक वजह यह भी है कि हर साल 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ने वाली डिमांड इस बार 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। गहलोत सरकार में कुप्रबंधन के चलते आज ऐसे हालात बने, लेकिन हमने उत्पादन क्षमता को 65 प्रतिशत से बढ़ाकर 73 प्रतिशत कर दिया है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए हमने काम शुरू कर दिया है और आगामी वर्षों में ऐसी परेशानी के हालात नहीं बनेंगे। सरकारी विभागों में बिजली की फिजूलखर्ची पर कहा कि इस पर अंकुश लगना जरूरी है। अफसर सीट पर नहीं है, फिर भी लाइट, पंखे, एसी चलते रहते हैं। इसके लिए सभी में जागरूकता आना जरूरी है, ताकि बिजली संकट को कम किया जा सके। कोटा और भरतपुर में प्राइवेट बिजली कंपनियों को लेकर कहा कि कंपनियों को लोगों की सुनवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। राहत नहीं देने पर सरकार कठोर कदम उठाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 09:47:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>10 से 15 फीसदी उत्पादन होगा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[ बिना बिजली के न तो फैक्ट्री चल सकती हैं और न ही उद्योग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/10-to-15-percent-production-will-be-affected/article-55536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/10-15-fisdi-utpadan-hoga-prabhavit...kota-news-26-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य में चल रहे बिजली संकट को देखते हुए उद्योगों में सप्ताह में दो दिन 10 घंटे बिजली कटौती करने से कोटा के उद्योगों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। इससे करीब 10 से 15 फीसदी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। राज्य में बरसात कम होने से बिजली का संकट गहरा गया है। ऐसे में किसानों को कृषि के लिए पर्याप्त बिजली देने के लिए उद्योगों में बिजली कटौती का निर्णय किया गया है। हालांकि प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों में सप्ताह में दो दिन  अलग-अलग वार को शाम 7 से सुबह 5 बजे तक दस घंटे की कटौती की जाएगी। उसी के तहत कोटा में बुधवार व गुरुवार को दो दिन बिजली कटौती होगी। </p>
<p><strong>उत्पादन भी कम होगा</strong><br />बिजली विभाग द्वारा बार-बार उद्योगों में की जाने वाली बिजली कटौती का कोटा के उद्यमियों ने विरोध जताया है। साथ ही कहा कि इससे उत्पादन भी कम होगा। दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष  गोविंद राम मित्तल ने बताया कि कोरोना काल के बाद से उद्योग विशेष रूप से स्माल स्केल इंडस्ट्री वैसे ही संकट के दौर से गुजर रही है। बड़ी मुश्किल से संभलने का मौका मिलता है।  </p>
<p><strong>एक शिफ्ट पूरी बंद होगी</strong><br />उन्होंने बताया कि कोटा में पत्थर, वेल्डिंग रोड व प्लास्टिक समेत कई ऐसे उद्योग हैं जिनमें पूरे सप्ताह 24 घंटे काम होता है। ऐसे में सप्ताह में दो दिन 10-10 घंटे बिजली कटौती की गई तो एक शिफ्ट पूरी तरह से बंद रहेगी। जिससे कोटा में करीब 10 से 15 फीसदी उत्पादन कम होगा। जिससे हर क्षेत्र प्रभावित होगा।</p>
<p><strong>कीमत बढ़ने की संभावना </strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्री चल सकती हैं और न ही उद्योग। सप्ताह में दो दिन बिजली कटौती होने का मतलब उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ना है। उन्होंने बताया कि कोटा में छोटे-बड़े करीब एक हजार उद्योग हैं। उनमें उत्पादन कम होगा। जिससे वस्तुओं की कीमत बढ़ने की संभावना है।  उद्यमी अनिल मूंदड़ा ने बताया कि उद्योग व फैक्ट्रियों में बिजली के बिना काम ही नहीं हो सका। उनमें मशीनों को चलाने  में जनरेटर भी काम नहीं करते हैं। ऐसे में सप्ताह में दो दिन तक एक-एक शिफ्ट पूरी बंद रहने से न केवल उत्पादन प्रभावित होगा वरन् रोजगार से लेकर हर चीज पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सरकार हर संकट का दबाव उद्योगों पर डालती है। बिजली पहले से ही महंगी दी जा रही है। उसमें भी पूरी नहीं देकर उद्योग व व्यापार के साथ गलत किया जा रहा है। इस निर्णय का उद्योग जगत में काफी विरोध हो रहा है।  गोविंद राम मित्तल व अशोक माहेश्वरी ने बताया कि उद्योगों में बिजली कटौती का कोटा के उद्यमी विरोध जता रहे हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 18:04:18 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा थर्मल पर फिर मंडराए खतरे के बादल</title>
                                    <description><![CDATA[उर्जा विभाग ने कोटा थर्मल की इकाई-1 व 2 को 31 दिसंबर,2022 तक ही चालू रखने के लिखित निर्देश दिए थे। ऐसे में इन इकाइयों को आगे चालू रखने के अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं।  इससे जहां बिजली संकट गहराएगा वहीं, थर्मल में कार्यरत 2500 से अधिक ठेका श्रमिकों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/clouds-of-danger-loomed-again-on-kota-thermal/article-33494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/kota-thermal-par-fir-mandaraye-khatre-ke-baadal...kota-news-..27.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान का गौरव कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट की पहली व दूसरी इकाई से विद्युत उत्पादन निरंतर जारी है, इसके बावजूद उर्जा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, दोनों इकाइयों को 31 दिसंबर,2022 तक ही चालू रखा जाएगा। इसके बाद पर्यावरण विभाग की अनुमति के बिना इससे विद्युत उत्पादन नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में दोनों इकाइयों को बंद कर दिया जाएगा। एक ओर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट चल रहा है तो दूसरी ओर कोटा थर्मल की दोनों  इकाइयों पर भी बिजली गिरने जैसे आसार दिखाई दे रहे हैं। दरअसल, उर्जा विभाग ने कोटा थर्मल की इकाई-1 व 2 को 31 दिसंबर,2022 तक ही चालू रखने के लिखित निर्देश दिए थे। ऐसे में इन इकाइयों को आगे चालू रखने के अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं।  इससे जहां बिजली संकट गहराएगा वहीं, थर्मल में कार्यरत 2500 से अधिक ठेका श्रमिकों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। </p>
<p><strong>पहले भी हुए थे उच्चस्तरीय प्रयास</strong><br />खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष पंकज मेहता ने पिछले वर्ष मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उर्जा मंत्री एवं नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को पत्र लिखकर 30 जून से दो यूनिटों को बंद करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। उसके बाद मंत्री धारीवाल ने कोटा सुपर थर्मल की यूनिट-1 एवं 2 को 31 दिसंबर तक चालू रखने के लिखित आदेश जारी करवाए थे। मेहता ने कहा कि भाजपा सरकार ने कोटा में आईएल सहित अन्य उद्योगों को बंद करने का ही प्रयास किया है जबकि गहलोत सरकार ने छोटे-बड़े सभी उद्योगों को चालू रखते हुए कोटा की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास किया। इसके अलावा श्रमिकों को कोई नुकसान नहीं होने दिया।  </p>
<p><strong>नगरीय विकास मंत्री पर टिकी नजरें  </strong><br />वर्तमान में 1240 मेगावाट क्षमता वाले कोटा सुपर थर्मल की 7 में से 6 इकाइयों से रोजाना पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। छठी इकाई इन दिनों वार्षिक मरम्मत के लिए बंद है। पिछले वर्ष जून 2021 में कोटा थर्मल की इकाई-1,2,3 व 4 को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। उस वक्त इकाई-1 व 2 को 31 दिसंबर, 2021 तक चलाने की अनुमति थी। लेकिन, थर्मल के अभियंताओं, कर्मचारियों तथा ठेका श्रमिकों ने आंदोलन कर चालू इकाइयों को बंद करने का कड़ा विरोध किया था। तब नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने थर्मल गेट पर एक सभा में थर्मल कार्मिकों को आश्वासन दिया था कि कांग्रेस शासन के दौरान कोटा थर्मल की इकाइयों को किसी भी सूरत में बंद नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने जयपुर में मुख्यमंत्री, ऊर्जामंत्री व उर्जा विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर थर्मल की इकाई 1 व 2 को 31 दिसंबर, 2022 तक चालू रखने के आदेश निकलवाये थे। वर्तमान में यह अवधि मात्र 4 दिन बाद पूरी होने वाली है। ऐसे में सभी अधिकारी फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे लिखित आदेश मिलेंगे, उसके अनुसार ही कदम उठाए जाएंगे। <br /> <br /><strong>39 साल से बिजली उत्पादन कर रही इकाई 1 व 2</strong><br />राजस्थान में 1983 में सबसे पहले बिजलीघर की स्थापना कोटा थर्मल के रूप में हुई थी, तब प्रथम चरण की पहली व दूसरी इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक करीब 39 साल से दोनों यूनिट द्वारा लगातार बिजली उत्पादन किया जा रहा है। इसके बावजूद कोयला प्रदूषण के नाम पर पुरानी चालू इकाइयों को बंद करने की कोशिश कर रही है, जबकि करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित कोटा थर्मल पर अब कोई कर्जा बाकी नहीं है। चंबल नदी से पर्याप्त पानी मिलने से सस्ती दरों पर बिजली पैदा हो रही है।      </p>
<p><strong>सौर ऊर्जा का घटा उत्पादन </strong><br />विद्युत वितरण विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अचानक चालू इकाइयों को बंद करने जैसा कदम उठाने पर प्रदेश में बिजली संकट और बढ़ सकता है, क्योंकि इन दिनों कड़ाके की सर्दी में सौर उर्जा का उत्पादन मांग की तुलना में बहुत कम है। दूसरी ओर कुछ दिनोंं से उद्योगों एवं कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ जाने से उर्जा विभाग अन्य प्रदेशों के निजी बिजलीघरों से 10 से 18 रू यूनिट दर से महंगी बिजली खरीदने पर मजबूर है। जबकि, कोटा थर्मल से लगभग 4.30 रुपए प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली पैदा हो रही है।</p>
<p><strong>पर्यावरणीय सहमति के लिए नहीं किया आवेदन</strong><br />कोटा थर्मल की पहली दो इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से केवल 31 दिसंबर,2022 तक चलाने की पर्यावरणीय सहमति है। थर्मल प्रशासन ने इकाई- 5, 6 व 7 को चालू रखने को पर्यावरणीय सहमति के लिए आवेदन भी कर दिया लेकिन अभी तक इकाई- 1,2,3 व 4 के लिए पर्यावरणीय सहमति के लिए आवेदन तक नहीं किया है। जिससे असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। दो इकाइयां बंद होने पर थर्मल में कार्यरत 2500 से अधिक ठेका श्रमिकों को नौकरी से हाथ धोना पड सकता है।  </p>
<p><strong>अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले</strong><br />थर्मल की ईकाई 1 व 2 को बंद करने को लेकर अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। हालांकि इस संबंध में हमने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। नई यूनिट का प्रस्ताव भी चल रहा है। इस बारे में ज्यादा जानकारी हैड आॅफिस से ही मिल सकती है। <br /><strong>- एके आर्य, चीफ इंजीनियर, कोटा थर्मल सुपर पावर प्लांट</strong></p>
<p><strong>बिना पैनल्टी इकाई चलाने की मिले परमिशन</strong><br />वर्तमान में जो परिस्थितियां चल रही हैं, उसमें नेशनल और स्टेट लेवल पर बिजली की कमी है। (पावर क्राइसिस) ऐसी स्थिति में हम इकाई 1 व 2 को बंद करने की सोच भी नहीं सकते। यदि, हमें पैनल्टी देकर भी इकाइयां चलानी पड़े तो उसके लिए राज्य सरकार से परमिशन लेंगे, सरकार को पुटअप करेंगे। संबंधित मंत्रालय के साथ पत्राचार कर रहे हैं कि देश व राज्य की जो अभी आवश्यकताएं हैं, उसे देखते हुए इसे बंद करना सही नहीं है, जो पैनल्टी हैं उनको भी गिवअप करना चाहिए। हम नई यूनिट ला रहे हैं, तब तक हमें बिना पैनल्टी के ईकाई चलाने की परमिशन दी जानी चाहिए। हमारी तरफ से पूरी कोशिश की जा रही है, मामला केंद्र सरकार का है, अब देखना होगा कि उनका निर्णय क्या रहता है। हालांकि, राज्य सरकार का जो भी निर्णय होगा वह हमें मान्य होगा। <br /><strong>- आर के शर्मा, सीएमडी, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Dec 2022 16:34:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानसून के चलते बिजली की मांग में कमी, 3 महीने बाद बढ़ सकता है संकट</title>
                                    <description><![CDATA[कोयले की कमी से राजस्थान में बिजली का संकट बरकरार है। कटौती के जरिए बिजली मैनेजमेंट के बीच बदलते मौसम ने भले ही कुछ दिनों के लिए संकट स्थगित कर दिया है, लेकिन 3 महीने बाद बिजली संकट फिर गहरा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-power-crisis-may-be-increased/article-13940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4546546520.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोयले की कमी से राजस्थान में बिजली का संकट बरकरार है। कटौती के जरिए बिजली मैनेजमेंट के बीच बदलते मौसम ने भले ही कुछ दिनों के लिए संकट स्थगित कर दिया है, लेकिन 3 महीने बाद बिजली संकट फिर गहरा सकता है। ऊर्जा विभाग अभी से अक्षय ऊर्जा के जरिए बिजली के व्यवस्था में लग गया है। प्रदेश में कोयला संकट के चलते प्रदेश की 23 बिजली उत्पादन इकाइयों में करीब 6 में उत्पादन बंद पड़ा है। शेष उत्पादन इकाइयों में कोयले की कम आपूर्ति के कारण पर्याप्त क्षमता से उत्पादन नहीं हो पा रहा।संकट के बीच छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत नहीं बनने के कारण राजस्थान को आवंटित दो खान ब्लॉक से भी खनन समय पर अभी तक शुरू नहीं हुआ। सरकार को आम उपभोक्ताओं के साथ किसानों को फसली सीजन में बिजली देने की चुनौती बनी हुई है। ऊर्जा विभाग की चिंता यह भी है कि कोयला उत्पादित इकाइयों पर निर्भरता के चलते अक्टूबर के बाद बिजली संकट और गहरा सकता है।</p>
<p>अभी मानसून के चलते तापमान में जारी गिरावट से बिजली की डिमांड में कमी बनी हुई है। किसान के पास भी अभी खेतों में काम नहीं है। संकट थोड़ा कम नजर आ रहा है। अक्टूबर के बाद स्थितियों में बदलाव होगा, क्योंकि बारिश सीजन के बाद फसली सीजन शुरू होगा, तो किसानों में बिजली की डिमांड बढ़ेगी। ऐसे में प्रदेश में पर्याप्त कोयला नहीं मिला, तो बिजली का संकट खड़ा होगा। इसी वजह से ऊर्जा विकास निगम ने अभी से अक्षय ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन इकाइयों से सस्ती बिजली खरीद प्रक्रिया तेज कर दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jul 2022 12:43:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>बिजली संकट में किसानों को झेलनी पड़ेगी कटौती की मार</title>
                                    <description><![CDATA[कोयले की कमी से जारी बिजली संकट का फिलहाल समाधान नजर नहीं आ रहा। मानसून से कोयला संकट की चिंताएं और बढ़ गई हैं। कोयला खदानों में पानी भरने से कोयला सप्लाई में बाधा बढ़ेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-cut-in-power-crisis-to-coustumers/article-12396"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/electricity1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोयले की कमी से जारी बिजली संकट का फिलहाल समाधान नजर नहीं आ रहा। मानसून से कोयला संकट की चिंताएं और बढ़ गई हैं। कोयला खदानों में पानी भरने से कोयला सप्लाई में बाधा बढ़ेगी। राजस्थान की थर्मल इकाइयों को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिला, तो ग्रामीण उपभोक्ताओं और किसानों को कटौती की मार ज्यादा झेलनी पड़ेगी। फिलहाल बिजली संकट में सभी श्रेणी उपभोक्ताओं से कटौती जारी है। मानसून की बारिश से बिजली का लोड कम होगा, तो उपभोक्ताओं को पावरकट का कम सामना करना पड़ेगा, लेकिन कोयला सप्लाई के हालातों से संकट खत्म होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही। छत्तीसगढ़ कोयला खदान विवाद के चलते पहले ही स्टॉक मिलने में परेशानी बनी हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार से अभी सहमति नहीं बनी हैं। यदि सहमति बन भी जाती है, लेकिन खदानों में बारिश का पानी भर गया तो कोयला सप्लाई पाना मुश्किल हो जाएगा।</p>
<p><strong>ग्रामीण-किसानों पर ज्यादा असर</strong><br />प्रदेश में 14 हजार मेगावाट डिमांड बनी हुई है। बाजार से महंगी बिजली खरीद इसे पूरा भी किया जा रहा है। तेज गर्मी में अधिक डिमांड रहती है, लेकिन बारिश के चलते घरेलू उपभोक्ताओं का लोड कम हो जाता है। थर्मल इकाइयों में कोयला संकट बना रहा, तो डिमांड पूरी करना चुनौती भरा काम होगा।</p>
<p><strong>अभी मिल रहा 21 रैक कोयला</strong><br />राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम में 23 विद्युत उत्पादन इकाइयों की 7580 मेगावाट उत्पादन क्षमता है। नियमानुसार इन इकाइयों में 20 से 26 दिन का कोयला स्टॉक रहना जरूरी है। छत्तीसगढ़ खदान विवाद के बाद अभी इकाइयों के पास महज चार से पांच दिन का कोयला स्टॉक ही बचा है। वर्तमान में कोल इंडिया और अन्य माध्यमों से राजस्थान को 20 से 21 रैक कोयला रोजाना मिल रहा है। मौजूदा हालातों में यह कोयला पर्याप्त है, लेकिन रबी सीजन में डिमांड बढ़ने पर संकट और कटौती का दौर बरकरार रहेगा। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 10:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title> फिर बिजली संकट</title>
                                    <description><![CDATA[आने वाले महीनों में कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार बिजली मंत्रालय का एक आंतरिक आंकलन दिखाता है कि सितंबर तिमाही में बिजली की कमी और बढ़ सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/power-crisis-again/article-11588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/electricity-d-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>आने वाले महीनों में कोयले की कमी की वजह से देश में बिजली संकट और गंभीर होने के संकेत मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार बिजली मंत्रालय का एक आंतरिक आंकलन दिखाता है कि सितंबर तिमाही में बिजली की कमी और बढ़ सकती है। बिजली मंत्रालय के आंकलन के अलावा स्वतंत्र जांच संगठन सीआरईए ने भी बिजली संकट गहराने की संभावना बताई है। यदि ऐसा होता है, तो देश में उत्पादन प्रभावित होगा। इस संगठन के मुताबिक जुलाई-अगस्त में एक बार फिर बिजली संकट गहरा सकता है। रिपोर्ट बताती है कि देश के ताप विद्युत संयंत्रों में प्री-मानसून कोयला स्टॉक में कमी के कारण ये स्थिति आ सकती है। इस समय खदान  निकास पावर स्टेशनों में कोयले का स्टॉक 13.5 मिलियन टन है और देश के सभी बिजली संयंत्रों में 20.7 मीट्रिक टन कोयले का स्टॉक है। सीआरईए के आंकड़ों के मुताबिक कोयले से संचालित होने वाले बिजली संयंत्र बिजली की मांग में मामूली वृद्धि को भी झेलने की स्थिति में नहीं हैं। संगठन के मुताबिक, भारत का बिजली संकट कोयला प्रबंधन के कारण पैदा हुआ संकट है। अब संगठन की राय है कि बिजली संकट से बचने के लिए कोयले के परिवहन पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इसके परिवहन की कारगर योजना बनाने की जरूरत है।</p>
<p>कोयले का घरेलू उत्पादन बिजली की बढ़ती मांग के साथ तालमेल नहीं रख पा रहा है। खबरें हैं कि छोटे कारोबारी बिजली की सुनिश्चित उपलब्धता की कमी के कारण प्रभावित हैं। महामारी के कारण मची उथलपुथल से उबर रहा देश का उद्योग जगत अब बिजली की कमी नहीं झेल सकता। यदि बिजली की कमी लगातार बनी रही तो छोटे कारोबार ठप पड़ सकते हैं। उत्पादकों को कोयला आयात के लिए कहने के बाद बताया गया है कि अब सरकार ने यह तय किया है कि कोल इण्डिया भी विदेशों से कोयला खरीद कर बिजली उत्पादकों को देगी। अब यह देखना शेष है कि कोयले की उपलब्धता कितनी जल्दी सुधरती है, लेकिन इस क्षेत्र का संकट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति इस क्षेत्र के लिए ज्यादा चिंता का विषय है। ये कंपनियां अपना बकाया नहीं चुका पा रही हैं और यही कारण है कि केन्द्र सरकार को एक के बाद एक इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज जारी करना पड़ रहा है। लेकिन फिर भी कोई ठोस बदलाव नहीं हो रहा है। बिजली संकट के कई कारण हैं, लेकिन फिलहाल तो व्यवस्था में कारगर सुधारों की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/power-crisis-again/article-11588</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 10:44:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>बिजली संकट के बीच बढ़ा ब्लैकआउट का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी में राजस्थान में बिजली संकट गहराता जा रहा है। कोयला संकट के बीच बिजली उत्पादन डिमांड की तुलना में कम होने लगा है। शहरी क्षेत्रों में कटौती बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार घंटे की अघोषित कटौती बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-increased-risk-of-blackout-amid-power-crisis/article-9376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/el-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भीषण गर्मी में राजस्थान में बिजली संकट गहराता जा रहा है। कोयला संकट के बीच बिजली उत्पादन डिमांड की तुलना में कम होने लगा है। शहरी क्षेत्रों में कटौती बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार घंटे की अघोषित कटौती बढ़ गई है। डिस्कॉम्स में रोस्टर सिस्टम से फीडर्स से कटौती तेज हो गई है। शटडाउन, मेंटनेंस और फॉल्ट के नाम पर बढ़ी कटौती से उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश में पीक ऑवर्स में बिजली डिमांड 15 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जबकि औसत बिजली उपलब्धता 11.50 से 12 हजार मेगावाट बनी हुई है। पावर प्लांट के अलावा सोलर, विंड, बायोमास, गैस, लिग्नाइट आदि से 20 करोड़ यूनिट बिजली ही बन पा रही है। पावर एक्सचेंज और अन्य राज्यों से भी सात करोड़ यूनिट बिजली मिल रही है, जबकि डिमांड करीब 33 करोड़ यूनिट है। मांग और आपूर्ति में अंतर से निपटने के लिए घोषित के साथ अघोषित कटौती भी जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से पांच घंटे की घोषित कटौती के साथ तीन से चार घंटे ही अघोषित कटौती हो रही है। वहीं शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में एक से तीन घंटे की अघोषित कटौती है।</p>
<p><strong>कालीसिंध थर्मल इकाई से उत्पादन शुरू</strong><br />झालावाड़ की कालीसिंध थर्मल पावर परियोजना की 450 मेगावाट क्षमता की पहली इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। तकनीकी खराबी के चलते यह इकाई पिछले चार दिन से बंद थी। इस वजह से प्रदेश को 2.88 लाख यूनिट रोजाना बिजली का नुकसान हो रहा था। वहीं सूरतगढ़ थर्मल की पांच इकाइयों में से तीसरी इकाई रविवार दोपहर को तकनीकी खराबी के चलते बंद हो गई।</p>
<p><strong>ग्रामीण क्षेत्रों मे रोस्टर से चल रहे फीडर्स</strong><br />तीनों डिस्कॉम में कटौती के लिए फीडर्स रोस्टर सिस्टम से चल रहे हैं। रोस्टर सिस्टम में जयपुर डिस्कॉम्स ग्रामीण क्षेत्रों में 89 फीडर्स, अजमेर डिस्कॉम 71 फीडर्स और जोधपुर डिस्कॉम 85 फीडर्स बंद कर कटौती कर रहे। लोड शेडिंग, मेंटनेंस और फॉल्ट के नाम पर जयपुर डिस्कॉम में 24, अजमेर डिस्कॉम में 4 और जोधपुर डिस्कॉम में 19 फीडर्स से कटौती हो रही है। अधिकांश जगहों पर रात आठ से 12 बजे और दिन में 12 से पांच बजे तक कटौती हो रही।</p>
<p><strong>नियम के हिसाब से 26 दिन का कोयला स्टॉक जरूरी</strong><br />अधिकांश पावर प्लांट कोयला संकट से जूझ रहे हैं। छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट में तीन दिन, छबड़ा थर्मल, कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल प्लांट में चार-चार दिन, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट की सात-आठ यूनिट में पांच दिन और कोटा थर्मल प्लांट में आठ दिन का ही कोयला बचा है, जबकि नियमों के हिसाब से 26 दिन का कोयला स्टॉक में होना चाहिए। इससे ब्लैकआउट का खतरा बढ़ गया है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 09:53:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> बिजली संकट के बीच GUD NEWS, आज भी नहीं होगी कटौती</title>
                                    <description><![CDATA[औद्योगिक इकाइयों को भी बिजली संकट से राहत, आज 14 घंटे मिलेगी बिजली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-gud-news-amidst-power-crisis--there-will-be-no-cut-even-today/article-9068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/electricity1.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राज्य में जारी बिजली संकट के बीच उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। डिमांड की तुलना में उपलब्धता बढ़ने से सोमवार को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोई कटौती नहीं की गई। अब आखातीज, ईद और परशुराम जयंती पर मंगलवार को भी कोई बिजली कटौती नहीं की जाएगी। डिमांड-सप्लाई की लगातार मॉनिटरिंग के बाद आगामी दिनों में कटौती का फैसला लिया जाएगा। पिछले एक दो दिनों से मौसम में बदलाव से डिमांड कम हुई है। पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के चलते बिजली सप्लाई स्थिति में सुधार हुआ है। वर्तमान में पवन ऊर्जा से करीब 2400 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। सौर ऊर्जा से भी 2150 मेगावाट बिजली मिल रही है।<br /><br /><strong>महंगी खरीद रेट से भी राहत</strong><br />संकट के बीच बिजली कम्पनियों को कुछ दिन से महंगी रेट पर बिजली खरीदने पर भी नहीं मिल रही थी। अब पावर एक्सचेंज में अन्य दिनों की तुलना में कम रेट से बिजली मिल रही है। सोमवार को बिजली खरीद रेट 10.26 रुपए यूनिट और औसत 4.80 रुपए प्रति यूनिट रही। इस वजह से 200 से 700 मेगावाट की पावर एक्सचेंज में बिजली मिल गई। मौसम में बदलाव की वजह से अन्य दिनों की तुलना में डिमांड भी एक हजार से 1500 मेगावाट कम हो गई है। ऊर्जा विभाग के सूत्रों के मुताबिक एक मई से पहले बिजली डिमांड कटौती के बाद भी करीब 13 हजार मेगावाट थी। अब बिना कटौती के 11,500 से 13,000 मेगावाट चल रही है। <br /><br /><strong>1500 मेगावाट अधिक बिजली उपलब्ध</strong><br />प्रदेश में सोमवार को 12 हजार मेगावाट बिजली की डिमांड रही, जबकि विभाग के पास 13 हजार 500 यूनिट बिजली उपलब्ध रही। विद्युत उत्पादन निगम के पास 1500 मेगावाट बिजली की अधिक उपलब्धता रही। कुल बिजली उपलब्धता में राजस्थान की बिजली उत्पादन इकाइयों से 10 हजार 500 मेगावाट और सोलर से 2150 मेगावाट बिजली मिली। <br /><br /><strong>औद्योगिक इकाईयों को भी राहत</strong><br />राज्य सरकार ने तीन मई को औद्योगिक इकाइयों को सुबह दस से छह बजे यानी आठ घंटे बिजली देना तय किया था। अब राहत देते हुए कुल 14 घंटे बिजली दी जाएगी। औद्योगिक इकाइयों को तीन मई को रात 12 से सुबह छह बजे तक और सुबह दस से शाम छह बजे तक बिजली आपूर्ति की जाएगी।<br /><br /><strong>सूरतगढ़ थर्मल की एक इकाई से उत्पादन शुरू, चार अभी भी ठप</strong><br /> प्रदेश में जारी बिजली संकट के बीच कुछ समय से बंद पड़ी सूरतगढ़ की 250 मेगावाट क्षमता थर्मल इकाई से बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। कोटा की 210 मेगावाट क्षमता की थर्मल इकाई के इसी सप्ताह शुरू होने की संभावना है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की वर्तमान में चार इकाइयां अभी भी ठप पड़ी हैं। सूरतगढ़ की चालू हुई थर्मल इकाई पिछले दिनों मेंटनेंस के नाम पर शटडाउन रखी गई थी। इस इकाई से उत्पादन शुरू होने पर डिस्कॉम को 250 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल सकेगी। निगम अफसरों के मुताबिक कोटा थर्मल की 210 मेगावाट क्षमता वाली इकाई अगले तीन से चार दिनों में शुरू होने के प्रयास जारी हैं। वर्तमान में कालीसिंध की 600 मेगावाट, छबड़ा थर्मल की 250 मेगावाट, सूरतगढ़ थर्मल सुपर क्रिटिकल की 660 मेगावाट क्षमता इकाई और कोटा थर्मल की 210 मेगावाट इकाई से उत्पादन बंद है। इनमें सूरतगढ़ थर्मल सुपर क्रिटिकल 660 मेगावाट इकाई में बुशिंग पार्ट फॉल्ट होने के कारण सुधार के लिए बीएचएल भोपाल भेजा गया है, जो जून तक ठीक हो पाएगी। <br /><br /><strong>एक्शन में मोदी सरकार, अमित शाह के घर हाई लेवल मीटिंग</strong><br />नई दिल्ली। देश में चल रहे बिजली संकट को लेकर मोदी सरकार एक्शन में आ गई है। कोयले की सप्लाई बाधित होने से रोके जाने को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर बैठक हुई। जिसमें रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव, ऊर्जा मंत्री आरके सिंह और कोयला मंत्री प्रहृलाद जोशी शामिल हुए। बैठक के लिए कोयला और ऊर्जा सचिव समेत कई बड़े अधिकारियों को भी बुलाया गया। बैठक में वर्तमान स्थिति और कोयले की उपलब्धता और इसकी सुचारू आपूर्ति के बारे में समीक्षा की गई। बैठक में पावर प्लांट्स तक कोयला पहुंचाने पर जोर दिया गया साथ ही कोयले की सप्लाई को कैसे बाधित होने से रोका जाए इस पर मंथन किया गया, ताकि सभी राज्यों में कोयले की सप्लाई ठीक से हो सके और बिजली संकट को रोका जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 11:24:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिजली संकट पर सियासत: गहलोत ने बिजली संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली संकट का जिम्मेदार कौन?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-jaipur-news--politics-on-power-crisis--gehlot-blamed-the-central-government-for-the-power-crisis--poonia-retaliated--said---four-days-ago--there-was-no-shortage-of-coal--words-and-deeds-were-exposed/article-8832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok-g3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भीषण गर्मी में बिजली की मांग बढऩे पर देश के कई राज्यों में आये बिजली संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि राज्यों को मांग के अनुसार कोयला उपलब्ध नहीं कराने के कारण सोलह राज्यों में बिजली कटौती की नौबत आई है।</p>
<p><strong> सोलह राज्यों में दो से दस घंटे बिजली कटौती</strong></p>
<p>गहलोत ने प्रकाशित समाचार भीषण गर्मी के बीच सोलह राज्यों में दो से दस घंटे बिजली कटौती को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए शुक्रवार सुबह यह बात कही। उन्होंने कहा कि देश के 16 राज्यों में बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ी है एवं इसके अनुरूप कोयले की आपूर्ति नहीं हो रही है जिसके कारण आवश्यकतानुसार बिजली आपूर्ति संभव नहीं है।</p>
<p><strong>भाजपा पर बिजली घरों पर प्रदर्शन का गहलोत ने लगाया आरोप</strong><br />उन्होंने प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और उस पर राज्य के बिजली घरों पर प्रदर्शन कर बिजली संकट में चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे बिजली कर्मचारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा राजस्थान में प्रदेश भाजपा बिजली घरों पर प्रदर्शन कर इस संकट में चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे बिजली कर्मचारियों को परेशान कर उन पर दबाव बनाने का कार्य कर रही है। मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि राज्यों को कोयला उपलब्ध कराने का काम केन्द्र सरकार का है। क्या प्रदेश भाजपा का दिशाहीन नेतृत्व केन्द्र सरकार से इस बारे में सवाल पूछेगा कि वो मांग के अनुसार कोयला उपलब्ध करवाने में सक्षम क्यों नहीं है जिसके कारण 16 राज्यों में बिजली कटौती की नौबत आई है।</p>
<p><strong> बिजली संकट को एक राष्ट्रीय संकट बताया</strong><br />मुख्यमंत्री ने बिजली संकट को एक राष्ट्रीय संकट बताते हुए सभी से अपील की कि इस संकट में एकजुट होकर परिस्थितियों को बेहतर करने में सरकार का साथ दें। अपने निवास या कार्यक्षेत्र के गैर-जरूरी बिजली उपकरणों को बन्द रखें। अपनी प्राथमिकताएं तय कर बिजली का उपयोग जरूरत के मुताबिक करें।  उल्लेखनीय है कि बिजली संकट के चलते राज्य में विभिन्न स्तर पर बिजली कटौती की जा रही हैं।</p>
<p><strong>गहलोत के आरोपों पर पूनिया का पलटवार</strong></p>
<p>बिजली किल्लत पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर पलटवार किया। पूनिया ने कहा कि चार दिन पहले कहा था कोयले की कोई किल्लत नहीं है, कथनी और करनी की पोल खुल गई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ट्वीट देखा। राजस्थान के बिजली संकट और भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान के सभी जिलों में प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा जो प्रदर्शन कर रही है, वह ठीक नहीं हैl</p>
<p><br /> <strong>बिजली संकट के प्रबंधन की विफलता मुख्यमंत्री केंद्र व भाजपा के माथे पर मड़ना चाहते हैं: पूनियां</strong></p>
<p>डॉ. पूनियां ने कहा कि, मुझे लगता है कि राजस्थान में जिस तरीके से बिजली संकट हुआ और इस बिजली संकट के प्रबंधन की विफलता मुख्यमंत्री केंद्र व भाजपा के माथे पर मड़ना चाहते हैंl राजस्थान में बिजली का मिस-मैनेजमेंट यह जाहिर सी बात है,  कोयले की कमी की बात अक्सर की जाती है, लेकिन 24 अप्रैल के राजस्थान सरकार के डीआईपीआर के पत्र में यह स्पष्टीकरण दिया गया है। राजस्थान में कोयले की कोई किल्लत नहीं है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति करेंगे, यह पत्र मुख्यमंत्री की कथनी और करनी की पोल खोलता है l</p>
<p><strong>कांग्रेस सरकार के मुखिया के लिए अग्निपरीक्षा : पूनियां</strong><br />मुझे लगता है राजस्थान पिछले 3 सालों में जिस तरीके से बिजली की आपूर्ति के मामले में पीड़ित था, अब यह पराकाष्ठा हैl प्रदेश का विद्यार्थी परीक्षा के मौके पर बिजली कटौती से पीड़ित है, प्रदेश का आमजन, किसान और व्यापारी भी इस भीषण गर्मी में पीड़ित है l लोक कल्याण और निर्बाध बिजली की आपूर्ति का दावा करने वाली और जनघोषणा पत्र में इन बातों का उल्लेख करने वाली कांग्रेस सरकार के मुखिया के लिए अग्निपरीक्षा है, इस गर्मी में राजस्थान के लोगों को निजात दिलाने कीl</p>
<p><strong>बिजली संकट का कोई जिम्मेदार है तो स्वयं अशोक गहलोत व उनकी सरकार: पूनियां</strong><br />पहली बार तो मुख्यमंत्री बार-बार  कहते थे कि विपक्ष की भूमिका राजस्थान में क्या है, भाजपा लगातार जनहित के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है तो उनको ऐतराज होता है l 2 वर्ष का समय कोरोना की मेहरबानी से निकल गया, जब लोग सड़कों पर नहीं थे, अब सड़कों पर निकले हैं तो उनको ऐतराज हैl मुख्यमंत्री जिस तरीके से सियासी गैंबलिंग करते हैं उसी का नतीजा है राजस्थान में बिजली का पिछले 3 वर्षों से कुप्रबंधन है, इसी कुप्रबंधन के कारण राजस्थान में बिजली संकट खड़ा हुआ हैl<br />इस बिजली संकट का कोई जिम्मेदार है तो स्वयं अशोक गहलोत व उनकी सरकार है, केंद्र को कोसने के अलावा धरातल पर मुख्यमंत्री ने कोई काम नहीं किया हैl<br /><br />केंद्र सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं हैं, जिनको राज्य में प्राथमिकता से मुख्यमंत्री को जमीनी तौर पर लागू करना था, लेकिन ऐसा कुछ किया नहींl राजस्थान में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है, बेरोजगारी से युवा पीड़ित हैं और किसान कर्जमाफी के छलावे से किसान प्रताड़ित हैंl</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 15:06:02 +0530</pubDate>
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