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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 50 - मूलभूत सुविधाओं का टोटा, गंदगी से परेशान </title>
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                        <![CDATA[सड़कों पर बने चैंबर हो रहे चौक।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-50---lack-of-basic-facilities--troubled-by-dirt/article-126406"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/c2opy-of-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोचिंग हब के रूप में पहचान रखने वाले कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 50 में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से वार्डवासी लगातार परेशान हैं। शिक्षा की दृष्टि से यह इलाका देशभर में पहचाना जाता है, लेकिन यहां के रहवासियों को मूलभूत समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। वार्ड की स्थिति यह है कि सफाई व्यवस्था से लेकर सुरक्षा और स्वास्थ्य तक हर जगह लापरवाही साफ झलकती है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />रिद्धि-सिद्धि नगर, चंचल बिहार, लक्ष्मण तिहार, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, पेट्रोल पम्प, राधा-कृष्णा मंदिर, लोरिएट पब्लिक स्कूल, मिटल मैरिज गार्डन, विकास नगर, रिद्धि-सिद्धि प्रथम, कमला उधाव, लेण्ड, भाई सिती, एसजीएन गार्डन का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>कॉलोनियों में आवारा कुत्तों का आतंक</strong><br />वार्ड की सड़कों पर बने चैंबर आए दिन चोक रहते हैं। नालियों का पानी सड़क पर बहता है, जिससे न केवल गंदगी फैलती है बल्कि लोगों को आवाजाही में भी परेशानी होती है। वहीं, कॉलोनियों में आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। आए दिन लोगों और बच्चों पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण के लिए भी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जा रही।<br /><strong>- धर्मेंद्र सुवालका, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>कमला उद्यान वर्षों से उपेक्षा का शिकार</strong><br />वार्ड क्षेत्र में आने वाला कमला उद्यान वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। साफ-सफाई नहीं होने से यह कचरे और गंदगी का अंबार बन गया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए टहलने और खेलने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। यही नहीं, वार्ड के खाली पड़े प्लॉट कचरा फेंकने की जगह बन गए हैं। बरसात के दिनों में इन प्लॉटों में पानी भर जाने से मच्छर पनपते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोग कई बार नगर निगम अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।<br /><strong>- आकांशा पालीवाल, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>झूलते तारों से करंट का खतरा</strong><br />स्थानीय निवासीने बताया कि कॉलोनी में बिजली का खंभा लगाया गया है, लेकिन लापरवाही के चलते तार सड़क से टच हो रहे हैं। बारिश के दिनों में इन तारों से करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार इस समस्या की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।<br /><strong>- विनोद शर्मा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>बीमारियों का खतरा बढ़ा</strong><br />नगर निगम की लापरवाही के कारण यह क्षेत्र लगातार समस्याओं की चपेट में है। कोचिंग हब होने के बावजूद यहां की स्थिति अन्य पिछड़े इलाकों जैसी है। अगर समय रहते जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं देंगे, तो आने वाले दिनों में बीमारियों और हादसों का खतरा और ज्यादा बढ़ सकता है।<br /><strong>- रजनी मित्तल, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सफाई व्यवस्था की थोड़ी कमी मानते है। बाकी नालों की स्थिति सहि करवा दी जाएगी, काभी कामों के टेंडर हो गए है। जल्द वार्ड मे काम शुरू करवा दीया जाएगा।<br /><strong>- राकेश पुटरा, पार्षद </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 15:00:29 +0530</pubDate>
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                <title>भनग्याखेड़ी में पक्की सड़क का इंतजार</title>
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                        <![CDATA[आजादी के 78 साल बाद भी गांवों में नहीं पहुंची बुनियादी सुविधाएं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-a-paved-road-in-bhangyakhedi/article-125944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/djhjjd.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमृतकुआं के भनग्याखेड़ी गांव की 3 किलोमीटर सम्पर्क सड़क आजादी के 78 साल बाद भी कच्ची है। ग्रामीण बताते हैं कि पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव के कई कार्यकाल निकल चुके हैं। परंतु अब तक गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। आजादी के इतने सालों बाद भी गांव तक सड़क का नहीं पहुंच पाना सरकार की विफलताओं को दर्शाता है। सालों से ग्रामीण कच्ची सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा हर चुनाव में गांव तक सड़क पहुंचाने का वादा किया जाता है परंतु चुनाव निकलने के बाद ना सत्ता दल गांव तक पहुंच पाता है न हीं सड़क। </p>
<p><strong>कई बार जिम्मेदारों को करवा चुके हैं अवगत</strong><br />कई बार ग्रामीणों ने लिखित में सड़क की समस्या से अवगत करा दिया है। परंतु अब तक सड़क बनने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायती राज चुनाव निकट है फिर से ग्रामीणों को सड़क बनाने के स्वप्न दिखाकर वोट बटोर लिए जाएंगे। परंतु सड़क निर्माण कार्य न तो भाजपा शासन काल में शुरू हुआ न ही कांग्रेस शासन काल में शुरू हुआ था। </p>
<p>भनग्याखेड़ी गांव की सम्पर्क सड़क अभी भी कच्ची सड़क है। बारिश में कीचड़ से सने पंचायत, तहसील, जिला मुख्यालय व अपने गंतव्य स्थल हेतु इस सड़क का उपयोग करना पड़ता है। ग्रामीण को अभी भी पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है। <br /><strong>- रघुनंदन मीणा, ग्रामीण </strong></p>
<p>भनग्याखेड़ी गांव की कच्ची सड़क आजादी के 78 साल बाद भी पक्की नहीं बन पाई है। ग्रामीण कच्चे सड़क से अपने गंतव्य स्थल होकर आते जाते हैं। <br /><strong>- कुलदीप नागर, सोशल वर्कर, खजूरी </strong></p>
<p>कच्ची सड़क से रोज आना व जाना पड़ता है। बारिश के समय बीमार पड़ने या प्रसव पीड़ा होने पर कच्ची सड़क से मुसीबत से होकर निकलना पड़ता है। बारिश में कच्ची सड़क पर दुपहिया वाहन निकलना चुनौती बन जाता है। <br /><strong>- अचल मीणा, ग्रामीण </strong></p>
<p>यह सड़क भनग्याखेड़ी गांव की सम्पर्क सड़क है जो 3 किलोमीटर की कच्ची सड़क है। इस सड़क के लिए कई बार लिखकर दे चुके हैं। फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। <br /><strong>- दिनेश मीणा, ग्रामीण </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जनसंख्या के अनुरूप सड़क निर्माण के मानक पूरे नहीं हो पाने के कारण यह रोड नहीं बन पा रहा था। लोकसभा अध्यक्ष व ऊर्जा मंत्री को अवगत करा दिया है। जल्दी निर्माण कार्य शुरू होगा।<br /><strong>- जयवीर सिंह अमृतकुआं, प्रशासक व प्रधान, सांगोद </strong></p>
<p>सड़क का सर्वे हो चुका है। गांव को गुरायता सारोला संपर्क सड़क से जोड़ा जाएगा।<br /><strong>- महावीर सिंह, भाजपा जनप्रतिनिधि, अमृतकुआं</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 16:02:12 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों के गहरे घाव को मंजूरी के बाद भी नहीं मिल रहा मरहम  </title>
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                        <![CDATA[मार्ग पर घंटों तक यातायात ठप रहता है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/deep-wounds-of-the-roads-are-not-getting-any-relief-even-after-approval/article-122620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(5).png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कवाई कस्बा अटरू तहसील की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत और उप तहसील का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद कस्बा आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यहां की सबसे गंभीर समस्या है जर्जर और खस्ताहाल सड़कें, जो आमजन के लिए रोजाना जानलेवा साबित हो रही हैं। वहीं शुक्रवार को सड़क के गड्ढें में एक बल्गर पलट गया था। जिसे चार के्रनों की सहायता निकाला गया। जहां पर करीबन तीन से चार घंटे जाम लग रहा। वहीं विभाग ने खानापूर्ति कर गिट्टी फैला दी गई है जो बारिश में वापस बह जाएगी। कस्बे की मुख्य सड़कों की हालत इतनी खराब है कि यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। कस्बे से निकल रहे नेशनल हाईवे एनएच 90 की हालत बदतर हो रही है जो कोटा से इकलेरा धरनावदा , कवाई और छबड़ा छीपाबड़ौद मोतीपुरा पावर प्लांट को जोड़ता है, खुद जर्जर हालात में है। इस मार्ग से भारी वाहन, बल्गर और दो पहिया वह चार पहिया वाहन रोजाना हजारों की संख्या में गुजरते हैं। लेकिन गहरे गड्ढे जलभराव के कारण अक्सर वाहन पलट जाते हैं या फंस जाते हैं। कई बार वाहनों को बाहर निकालने के लिए दूसरे वाहनों की सहायता लेनी पड़ती है, जिससे मार्ग पर घंटों तक यातायात ठप रहता है।</p>
<p><strong>सड़कें मांग रही जख्मों के लिए मरहम </strong><br />नेशनल हाईवे कहलाने वाला रास्ता आज गड्ढों की गिरफ्त में है। हर दिन कोई न कोई वाहन लड़खड़ाकर गिरता है, कोई राहगीर फिसलता है, तो कोई जान पर खेलकर निकलता है। सड़कें अब सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि दर्द का दस्तावेज बन चुकी हैं। जैसे हर खड्डा किसी हादसे की दास्तां कह रहा हो। इन सड़कों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि मानो वे खुद अपने टूटे बदन पर मरहम की गुहार लगा रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक न सड़क की चीखें पहुंचती हैं ना जनता की पुकार। अब सड़कें अपने जख्मों को भरने के लिए मरहम मांग रही है। </p>
<p><strong>शमशान घाट से गोवर्धनपुरा तक हादसों का केंद्र </strong><br />कवाई थाने के सामने स्थित करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। वहीं श्मशान घाट से गोवर्धनपुरा तक की लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबी सिंगल सड़क भी बेहद खराब स्थिति में है। बारिश के दिनों में इन मार्गों पर दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं। थाने के सामने सिंगला सड़क पर ओर श्मशान घाट के पास बने बड़े गड्ढे अब जानलेवा बन चुके हैं, लेकिन अब तक इनकी मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>विधायक के प्रयासों से मिली मंजूरी, लेकिन काम ठप </strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब तक कई विधायक आए और गए, मगर किसी ने इन सड़कों की सुध नहीं ली। हालांकि मौजूदा विधायक राधेश्याम बैरवा के प्रयासों से थाने के सामने एवं श्मशान घाट से गोवर्धनपुरा तक की दोनों सिंगल सड़कों को डबल सीसी रोड के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि जब स्वीकृति मिल चुकी है तो फिर कार्य शुरू होने में देरी क्यों हो रही है। कस्बेवासियों का कहना है कि यदि जल्द सड़कों की मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सीसी सड़क का काम अपनी जगह, लेकिन बारिश के इस संवेदनशील दौर को देखते हुए तत्काल प्राथमिकता पर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए ताकि आमजन को थोड़ी राहत मिल सके।</p>
<p><strong>जनता की तकलीफ मेरी अपनी तकलीफ : विधायक बैरवा</strong><br />कवाई क्षेत्र की सड़क समस्या पर अपनी संवेदना जताते हुए विधायक राधेश्याम बैरवा ने कहा कि मैं जनता की पीड़ा को भली-भांति समझता हूं। यह केवल सड़कों का मुद्दा नहीं बल्कि जनसुरक्षा और जनसुविधा का सवाल है। जनता की तकलीफ को मैंने अपनी जिम्मेदारी माना है। अब सिर्फ मौसम की अनुकूलता का इंतजार है, उसके तुरंत बाद निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। मैं लगातार अधिकारियों से संपर्क में हूं और जैसे ही बरसात थमेगी, सीसी रोड निर्माण का कार्य शुरू करवाऊंगा। जनता की तकलीफ मेरी अपनी तकलीफ है। आपके धैर्य और भरोसे के लिए मैं आभारी हूं यह मेरा वादा है कि अब ये सड़कें सिर्फ रास्ता नहीं, विकास का प्रमाण बनेंगी।</p>
<p>थाने के सामने और श्मशान घाट से गोवर्धनपुरा तक की दोनों सड़कों के लिए डबल सीसी रोड निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है। इस कार्य की प्रशासनिक सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब जैसे ही बरसात खत्म होगी, मैं स्वयं कार्य प्रारंभ करवाऊंगा। मैं इन सड़कों को लेकर लगातार अधिकारियों से संपर्क में रहा हूं और प्रत्येक स्तर पर कार्य की प्रगति की निगरानी कर रहा हूं। जनता को आश्वस्त करता हूं कि कोई कोताही नहीं होने दूंगा। यह कार्य मेरी सीधी निगरानी में प्राथमिकता से कराया जाएगा। <br /><strong>- राधेश्याम बैरवा, विधायक बारां अटरु </strong></p>
<p>पहली बार किसी विधायक ने इन सड़कों को लेकर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने अधिकारियों से बार-बार फॉलोअप लिया और स्वीकृति दिलाई, ये कोई छोटी बात नहीं। हम उम्मीद करते हैं कि अब काम भी जल्द शुरू होगा। <br /><strong>- डी एल नागर, कस्बा निवासी</strong></p>
<p>सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर नाराजगी जरूर है लेकिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विधायक राधेश्याम बैरवा के प्रयासों की सराहना भी कर रहे हैं। वर्षों से इस समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन मौजूदा विधायक ने न सिर्फ इन सड़कों का निरीक्षण किया बल्कि डबल सीसी रोड के रूप में स्वीकृति ही नहीं अधिकारियों से रेगुलर संपर्क कर वर्क आर्डर एवं प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी करवा दी गई है। जैसे ही बरसात खत्म होगी, निर्माण कार्य चालू करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- विष्णु चक्रधारी भाया, मंडल अध्यक्ष भाजपा युवा मोर्चा </strong></p>
<p>थाने के सामने स्थित सड़क पर कई बार मरम्मत का कार्य करवाया गया है। यहां तक कि अभी कुछ दिन पहले भी गिट्टी डलवाई गई थी, लेकिन हर बार बरसात आते ही वह बह जाती है। संपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वर्क आॅर्डर भी जारी किए जा चुके हैं। लेकिन वर्तमान में बरसात के कारण काम शुरू करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। बरसात के बाद ही कार्य चलेगा। <br /><strong>-  पी आर मीणा, एक्सईएन, एनएच 90 बारां</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 16:09:42 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 66 - खंडगांवड़ी में नहीं आती स्मार्ट सिटी जैसी फीलिंग</title>
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                        <![CDATA[वार्डवासियों का कहना है सालों से खण्ड गांवड़ी में स्थित रघुनाथ मंदिर का काम अधूरा पड़ा है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-66---khand-gaonwadi-does-not-have-a-smart-city-feeling/article-119690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/kota-uttar-ward-66---khandganvdi-me-nhi-ati-smartcity-jesi-feeling...kota-news-07-07-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 66 को नगर निगम में तो शामिल कर लिया लेकिन वहां सुविधा आज भी ग्रामीण इलाके जैसी ही है। इसकी बसावट गांव जैसी होने से स्मार्ट सिटी जैसी फीलिंग यहां के लोगों नहीं आ रही है। यहां मूलभूत सुविधाएं भी पूरी नहीं है जिससे यहां के निवासी अपने को शहर से जुड़ा होने का अहसास नहीं कर पा रहे है। विकास नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। गंदगी नालियां, कचरों के ढेर लगे है। हालांकि इस वार्ड में सिविल लाइन, पारिवारिक न्यायालय दोस्तपुरा आॅफिसर क्लब इस वार्ड में बने हुए है। इन इलाकों में विकास कार्य हुए है लेकिन वार्ड कई हिस्से अभी विकास कार्यो से अछूते है। वार्डवासियों का कहना है सालों से खण्ड गांवड़ी में स्थित रघुनाथ मंदिर का काम अधूरा पड़ा है। चौथमाता मंदिर चौक में नाला भी सालों से खुला पड़ा हुआ है। वहीं कचरे का अंबार भी लगा हुआ है। कचरा सड़कों पर आने से गंदगी फैली रहती है। कचरे का निस्तारण समय पर नहीं होता है। जिससे चहुंओर रोड किनारे कचरे के ढेर नजर आते है। सिविल लाइन इलाके में प्रशासनिक अधिकारियों, विधायक और शहर के गणमान्य लोगों के घर होने से यहां तो काफी विकास कार्य हुए है। लेकिन इस वार्ड बाकी इलाके अभी उपेक्षा का शिकार है। दोस्तपुरा में कई जगह सड़के टूटी नालियों के ढकान टूट चुके है। वहीं खण्ड गांवडी में कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है। </p>
<p><strong>वार्ड में यह एरिया आते है</strong><br />वार्ड 66 में मोहन निवास, खण्ड गांवडी, पारिवारिक न्यायालय, सिविल लाइन, सुखघाम, दोस्तपुरा, आॅफिसर्स क्लब आता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड के क्षैत्र में आने वाले सारे मंदिरो का नवनिर्माण करवाया गया है। कुछ का काम अभी चल रहा है। वार्डवासियों को कोई समस्या होती है तो उसका तुरंत समाधान भी कर दिया जाता है। मैने कभी वार्ड के विकास को लेकर भेदभाव नही किया। में एक फोन पर जनता के बीच उपस्थित हो जाता हूं।                 <br /><strong>- हरिओम सुमन, वार्ड पार्षद</strong></p>
<p><strong>गार्डन में नहीं है झूले</strong><br />दोस्तपुरा स्थित महावीर पार्क की स्थिती तो सही है लेकिन उसमें बच्चों के झूले कई सालों से टूटे पड़े है। बच्चों के मनोरंजन के साधन नहीं होने से बच्चों को नेहरू गार्डन जाना पड़ता है।  <br /><strong>- विजय सिंह, दोस्तपुरा निवासी</strong></p>
<p><strong>रघुनाथ मंदिर को जीर्णोद्धार की दरकार</strong><br />वार्ड में बने बरसों पुराने रघुनाथ मंदिर का रख रखाव नहीं होने से वो जर्जर अवस्था में पहुंच चुका  है। वार्डवासियों का कहना है कि इस मंदिर का रख रखाव करें तो लोगों को पूजा अर्चना में परेशानी नही होगी। काफी सालों से मंदिर जीर्ण क्षीण अवस्था में पड़ा हुआ है। कई बार स्थानीय पार्षद जनप्रतिनिधियों को इसके बारे में अवगत कराया लेकिन विकास कार्य नहीं हुआ। <br /><strong>- संजय कुमार, खण्ड गांवडी निवासी</strong></p>
<p><strong>सुलभ कॉम्पलेक्स में नहीं है सुविधा</strong><br />वार्ड के सुलभ कॉम्पलेक्स में नियमित सफाई नहीं होती है। इसके दरवाजे टूटे हुए है। पानी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी होती है। रख रखाव नहीं होने से भवन खस्ताहाल हो रहा है। लोगों का कहना है कि इसको ठीक कराया जाए तो वार्डवासियों को सुविधा मिले। बनाने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया है। <br /><strong>- सिद्धांत, खण्ड गांवडी निवासी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 15:26:41 +0530</pubDate>
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                <title>एक चिकित्सक के भरोसे है बांसी का सरकारी अस्पताल </title>
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                        <![CDATA[अस्पताल में दो दर्जन से अधिक ग्रामीण अंचलों के लोग उचित उपचार की आशा में यहां आते हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-government-hospital-of-bansi-is-dependent-on-one-doctor/article-112316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(6)9.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इस समय मौसम परिवर्तन होने के साथ ही रोगियों की संख्या बढती जा रही है। पर यहां फैली अव्यवस्था को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। बांसी अस्पताल में रोगियों के साथ आने वाले तीमारदार भी परेशान हो रहे हैं।  जानकारी के अनुसार देई रोड़ पर स्थित बांसी सरकारी अस्पताल को वर्ष 2023 में फरवरी माह के बजट में तत्कालीन सरकार द्वारा पीएचसी से सीएचसी में क्रमोन्नति के बाद सरकार द्वारा संबंधित विभाग से यहां पर चिकित्सकों के पांच पद स्वीकृत है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्तमान स्थिति में दो ही चिकित्सक लगा रखे हैं। जिनमें से भी एक चिकित्सक के अस्पताल से संबंधित कार्य से मीटिंग सहित अन्य कार्य से चले जाने से एक चिकित्सक के भरोसे ही बांसी अस्पताल संचालित हो रहा है। अस्पताल में दो दर्जन से अधिक ग्रामीण अंचलों के लोग उचित उपचार की आशा में यहां आते हैं। पर यहां स्टॉफ की कमी सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से भी मरीजों को जूझना पड़ता है। शनिवार को अस्पताल में एक ही कार्यरत चिकित्सक होते हुए भी रोगियों की अधिक संख्या होने से भर्ती वार्ड में एक बैड पर ही दो रोगियों को समायोजित करके ड्रिप लगाकर उपचार चल रहा था। वहीं कुछ को वार्ड परिसर में ही कुर्सी पर ही ड्रिप लगाई जा रही थी। रोगियों का कहना था कि पर्याप्त जगह नहीं होने से उपचार लेने में समय लगता नजर आने पर जहां जगह नजर आई वहीं पर जैसी व्यवस्था होने पर ही उपचार लेने को मजबूर होना पडता है। मरीजों ने कहा कि अस्पताल में बैड की बढ़ोतरी हो तो रोगियों को ऐसी समस्याओं से राहत मिले। संबंधित विभाग द्वारा समय रहते पदरिक्त चल रहे चिकित्सकों के पदों को भी भरा जाए तो यहां पर आगंतुक रोगियों को इस तरह परेशान नहीं होना पड़े। इस गर्मी में चिकित्सक को दिखाने के लिए अपनी बारी का लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। वही फिर रजिस्ट्रेशन, दवा वितरण काउंटर व फिर भर्ती वार्ड में भी उपचार के लिए मजबूरन बाट जोह रहे है। असुविधाओं के चलते ग्रामीण इलाकों के लोग उचित उपचार के लिए देई, नैनवां, जिला मुख्यालय सहित अन्य बड़े शहरों की रुख करते नजर आते हैं।   </p>
<p>बांसी अस्पताल में जो जगह है, उसके आधार पर बैड है। रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। सभी को उपचार देकर भेजते हैं। मौसम परिवर्तन के साथ ही रोगियों की संख्या में इन दिनों बढोतरी होती है। इस समय ओपीडी दो सौ से अधिक रहती है। सभी को उचित उपचार देकर भेजते हैं। <br /><strong>- डॉ. अशोक कुमार कुमावत, चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बांसी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 17:49:05 +0530</pubDate>
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                <title>क्या हम केवल टैक्स देने के लिए, सुविधाएं पाने के नहीं हैं हकदार! </title>
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                        <![CDATA[पानी और छांव की कमी, किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/are-we-not-entitled-to-get-facilities-just-to-pay-tax/article-108712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(1)42.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। हरनावदाजागीर छीपाबड़ौद राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण लहसुन मंडियों में से एक है। हरनावदाजागीर लहसुन मंडी इस समय अव्यवस्थाओं का शिकार है। यहां देशभर से हजारों की संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी दयनीय है कि न छांव की कोई व्यवस्था है न स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है और न ही सरकारी दर पर भोजन की सुविधा। सरकार को करोड़ों रुपये का टैक्स देने वाले इन अन्नदाताओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>किसानों का मुश्किल भरा इंतजार, सरकारी मदद नदारद</strong><br />राजस्थान और आसपास के अन्य राज्यों से आने वाले किसान यहां अपनी लहसुन बेचने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं लेकिन मंडी में व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। धूप में खुले आसमान के नीचे बैठकर किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। खासकर गर्मी के इस मौसम में पानी और छांव की कमी किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।</p>
<p><strong>दे रहे करोड़ों का टैक्स, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध </strong><br />स्थानीय किसानों ने बताया कि वे सरकार को करोड़ों का टैक्स देते हैं, फिर भी उनके लिए कोई बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। ऐसे में सरकार और प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>अन्नपूर्णा रसोई योजना पर नहीं हुआ अमल, नवज्योति ने उठाई थी आवाज</strong><br />इससे पहले भी दैनिक नवज्योति ने अन्नपूर्णा रसोई घर की स्थापना को लेकर एक प्रमुख खबर प्रकाशित की थी। इस योजना के तहत किसानों को रियायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक सरकार या प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वहीं एक किसान ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि "हम अपनी फसल लेकर दूर-दूर से आते हैं, सरकार को टैक्स देते हैं, लेकिन हमारे लिए छांव तक की व्यवस्था नहीं है। क्या हम केवल टैक्स देने के लिए हैं, सुविधाएं पाने के हकदार नहीं?"  किसानों ने मंडी में फैली अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन उनकी मांगों को अनसुना कर रहा है। जल्द ही किसान इस मुद्दे पर प्रशासन से ठोस जवाब मांग सकते हैं। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />यहां कुछ लोग खाली ट्रैक्टर लगाकर जगह घेर लेते हैं। जिससे मंडी में आने वाले किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मंडी में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है, न ही सरकारी दर पर भोजन उपलब्ध हो रहा है और न ही छांव की कोई सुविधा है। हमें अपनी लहसुन की बोली लगाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन हमारी परेशानियों की ओर ध्यान नहीं दे रहा। <br /><strong>- कैलाश लववंशी, किसान। </strong></p>
<p>हम दूर-दराज से लहसुन बेचने के लिए यहां आते हैं, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। न छांव की व्यवस्था है, न पीने का पानी मिल रहा है, और न ही सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध है। हमें घंटों तक खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ता है। प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।<br /><strong>- मुरली मनोहर, किसान, मनोहरथाना निवासी। </strong></p>
<p>सरकार को करोड़ों का टैक्स देने वाले हम किसानों के लिए यहां एक घूंट पानी तक नसीब नहीं हो रहा। धूप में खड़े-खड़े लहसुन की बोली लगाने का इंतजार करना हमारी मजबूरी बन गई है।  क्या यही है किसानों की असली स्थिति? बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में हमें केवल परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- राकेश लोधा, किसान।   </strong></p>
<p>हमारी प्राथमिकता मंडी में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जहां तक टेंट या छाया की बात है, पिछले वर्षों में भी यह व्यवस्था नहीं थी। <br /><strong>- फूलचंद्र मीणा, मंडी सचिव, छबड़ा।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 16:29:32 +0530</pubDate>
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                <title>बीमारियों को न्योता दे रहा सीवरेज का पानी</title>
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                        <![CDATA[कई कॉलोनियों में नहीं है सीवरेज पाइप लाइन। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sewerage-water-is-inviting-diseases/article-89584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रिहायशी इलाकों की मूलभूत प्रमुख सुविधाओं में से एक सुविधा सीवरेज लाइन की भी रहती है। जिससे घरों से निकले सीवरेज के पानी को बिना किसी के संपर्क में आए और गंदगी फैलाए ट्रीटमेंट प्लांट या ऐसे स्थान तक पहुंचाया जा सके जहां निवासियों को इससे किसी प्रकार की परेशानी ना हो। लेकिन लाडपुरा क्षेत्र के कई इलाकों में आज भी इस मूल भूत सुविधा की कमी है और जहां है वहां भी इसका सही से रखरखाव नहीं हो रहा है। ऐसे में नालियों और सीवरेज से निकला गंदा पानी सड़कों पर फैला रहता है। हालांकि आरयूआईडीपी की ओर से इस क्षेत्र के धाकड़खेड़ी इलाके में 40 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर कई कॉलोनियों को जोड़ा गया है उसके बाद भी दर्जनों इलाके ऐसे हैं जहां नालियां भी ठीक से नहीं बनी हुई है।</p>
<p><strong>बरसात में बढ़ जाती है परेशानी</strong><br />इलाके में नालियां और सीवरेज की कमी के कारण आम दिनों में गंदा पानी सड़कों पर फैलता ही है। साथ ही बरसात के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है। क्योंकि पर्याप्त सीवरेज लाइन और नालियां नहीं होने के कारण बरसात का सारा पानी सड़कों पर फैलता है, जो बीमारियों को भी न्यौता दे रहा है।</p>
<p><strong>औद्योगिक क्षेत्र में नहीं कोई सीवरेज लाइन</strong><br />लाडपुरा क्षेत्र के औद्योगिक इलाके में आज भी सीवरेज लाइन की कमी है। इस इलाके की किसी भी कॉलोनी में किसी प्रकार की सीवरेज लाइन नहीं डाली गई है। वहीं केडीए द्वारा बनाई गई आवासीय कॉलोनियों के सीवरेज लाइन भी अधूरी पड़ी हुई हैं। विधानसभा क्षेत्र के सूरसागर, थेकड़ा, रायपुरा, गायत्री विहार, श्रीराम नगर, डीसीएम, कंसुआ, बॉम्बे योजना, बापू कॉलोनी और प्रेमनगर क्षेत्र को बसे हुए दशकों हो गए हैं। इसके बाद भी यहां सीवरेज लाइन का कोई प्रस्ताव तक नहीं रखा गया है। इसके अलावा कई कॉलोनियां और मौहल्ले ऐसे हैं, जहां पर नालियां तक नहीं बनी हुई हैं। जिनकी वजह से पानी सड़कों पर निकल आता है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />इलाके में नालियों की दशा बहुत खराब है, कई गलियां ऐसी हैं जहां पर पूरे दिन गंदा पानी सड़कों पर फैला रहता है। ऐसे में यह पानी राहगीरों के लिए परेशानी तो बन ही रहा है साथ ही बीमारियों को भी न्यौता दे रहा है।<br /><strong>- कार्तिक प्रजापति, डीसीएम</strong></p>
<p>क्षेत्र में सीवरेज लाइन होना बहुत जरूरी है क्योंकि ये इलाका घनी आबादी क्षेत्र हो गया है ऐसे में घरों के पानी के बहाव के लिए नालियां छोटी पड़ जाती हैं। जिससे पानी सड़कों पर फैलता है।<br /><strong>- नवीन ऋषि, सूरसागर</strong></p>
<p>सरकार को अन्य क्षेत्रों की तरह इन क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहिए। नालियों के खुले रहने से गंदे पानी के कारण बदबू भी फैलती है साथ ही मच्छर और कीड़े बीमारियों को घरों के अंदर ले जाते हैं।<br /><strong>- इन्द्र कुमार, रायपुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरयूआईडीपी के तहत शहर में चार प्लांट बनाकर उनमें कनेक्शन दिए जा चुके हैं। जिन कॉलोनियों में सीवरेज लाइन और कनेक्शन प्रस्तावित थे उनका कार्य हो चुका है। आगे किसी क्षेत्र कॉलानी के लिए अगर प्रोजेक्ट तैयार किया जाता है तो उस पर कार्य करेंगे।<br /><strong>- राकेश गर्ग, एसई, आरयूआईडीपी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 15:26:52 +0530</pubDate>
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                <title>कहने को पॉश कॉलोनी! लेकिन ना तो सड़क है ना पानी</title>
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                        <![CDATA[कॉलोनी वासियों ने समस्याओं के निराकरण की मांग की है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-is-a-posh-colony-in-name--but-there-is-neither-road-nor-water/article-85842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/36.png" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। एक तरफ जहां सरकार की ओर से अभियान चलाकर लोगों की जिंदगियों में परिवर्तन लाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर की पॉश कॉलोनी में रह रहे 5-6 परिवार के लोगों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। कॉलोनी वासियों ने बताया कि यहां बिजली तो है, लेकिन नल कनेक्शन नहीं है। न ही घरों से निकल रहे पानी को अन्य नालियों से जोड़ा गया है। पिछले कई वर्षों से नगर की पॉश कॉलोनी में मस्जिद के पीछे बसे 5-6 परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। रास्ते में पानी भरा रहता है। यहां सड़क तक नहीं है। जबकि नगर पालिका ने इन बाशिंदों को पट्टे दे रखे हैं।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं को मंदिर जाते समय होती है परेशानी</strong><br />लोगों ने बताया कि शिव मंदिर पास होने के कारण श्रद्धालुओं को भी भरे हुए पानी से गुजरना पड़ता है। उन्होंने समस्याओं के निराकरण की मांग की है।</p>
<p><strong>पालिका ईओ को दी शिकायत</strong><br />मस्जिद के पास रहने वाले लोगों ने नगर पालिका ईओ रामगंजमंडी के नाम की गई शिकायत में बताया कि यहां नाली के पानी की निकासी नहीं है। पूर्व में भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। कुछ गड्डों में पानी भर जाता है। जिसमें मच्छर आदि के कारण बीमारी फैलने का अंदेशा है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />सभी मकानों के पट्टे बने हुए हैं। फिर भी नगर पालिका द्वारा नाली की निकासी व पाइप लाइन की सुविधा नहीं दे रही है। इस कॉलोनी में तीन विधवा महिलाएं भी निवास कर रही हैं। जिनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- विनोद गर्ग, कॉलोनी वासी </strong></p>
<p>मामला संज्ञान में है। शीघ्र ही पानी की निकासी की व्यवस्था की जाएगी।<br /><strong>- दीपक नागर, ईओ, नगर पालिका, रामगंजमंडी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 18:17:05 +0530</pubDate>
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                <title>काई करां अंधेरी नगरी मं चौपट राजा छ:</title>
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                        <![CDATA[समस्याओं के समाधान के लिए कई बार पार्षद को लिखित व मौखिक में अवगत कराया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-should-i-do--andheri-nagari-me-chaupat-raja-chha/article-85207"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अंधेर नगरी चौपट राजा हाळा हाल हो र्ह्या छह, पूरो वार्ड सड़ रहयो छह, कुण सूं जा अर खां, यह हम नहीं शहर के वार्ड 76 के बाशिन्दे कह रहे हैं जो गंदगी,कीचड़ और बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह वार्ड है केशवपुरा का सेक्टर सात इलाका जहां अच्छे और संभ्रान्त कहे जाने वाले ज्यादातर लोग रहते हैं। आर्थिक रूप से सब लोग सम्पन्न हैं लेकिन वार्ड की स्थिति कच्ची बस्ती जैसी हो गई है। कारण इस इलाके के पार्षद कुलदीप गौतम द्वारा वार्ड में कोई ध्यान नहीं देना। कुलदीप गौतम इस इलाके से पार्षद तो बन गए लेकिन इसके बाद उन्होंने जन समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया। केशवपुरा इलाके के वार्ड 76 में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिसकी वजह से वार्डवासियों को कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय बाशिंदों का कहना है, सड़कों पर ढेरों गड्ढ़े हो रहे हैं, जिनमें बरसात का पानी भरा रहने से कीचड़ की समस्या हो जाती है।  गड्ढ़ों में भरे पानी में खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा है। जिससे बीमारियों का अंदेशा बना रहता है। वहीं, नालियों की ठीक से सफाई तक नहीं होती। बारिश में सीवरेज का पानी ओवरफ्लो होकर घरों की दहलीज तक पहुंच जाता है। दुर्गंंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। वहीं, इलाके में बिजली के तार झूल रहे हैं, जरा सी हवा चलने पर ही तार टूटकर गिर जाते हैं। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। समस्याओं के समाधान के लिए कई बार पार्षद को लिखित व मौखिक में अवगत कराया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>खुद के पैसो से करवाते हैं सफाई  </strong><br />वार्ड में कई जगहों पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नगर निगम के सफाईकर्मी नहीं आते, कई दिनों तक कचरा सड़ता रहता है। हालात यह हो रही है कि खुद के खर्चे पर सफाई करवाते हैं। वहीं, नालियों की भी सफाई नहीं होती। समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। किससे शिकायत करें कोई सुनने वाला ही नहीं।  <br /><strong>- रामचंद्री बाई, वार्ड निवासी  सेक्टर 7</strong></p>
<p><strong>वार्ड में नहीं आते पार्षद </strong><br />हमारे सेक्टर में हमने कभी पार्षद को नहीं देखा। बाशिंदे मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। पार्षद की लापरवाही से जगह-जगह गंदगी व कीचड़ फैला हुआ है। गड्ढ़ों में पानी भरा रहता है, जिसमें बीमारियों का लार्वा पनप रहा है। कोई देखने वाला भी नहीं है। नगर निगम में भी शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हुआ। क्षेत्रवासी पार्षद के कार्यालय पर जाते हैं तो वे वहां पर भी नहीं मिलते।  <br /><strong>- आनंद प्रजापति,वार्ड निवासी </strong></p>
<p><strong>पार्क में झूले नहीं, कुर्सियां टूटी</strong><br />हमारी कॉलोनी में महाकालेश्वर पार्क है, जो पार्षद की लापरवाही से बदहाल है। यहां झूले टूटे हुए हैं, बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं है। जलभराव होने से मच्छर पनप रहे हैं। पार्क में आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को खतरा रहता है। <br /><strong>- जगदीश कुमार</strong></p>
<p>छोटे छोटे काम को लेकर मैं कई बार पार्षद के पास गई लेकिन वह मिलते तक नहीं हैं। वार्ड के हालात नारकीय हो रहे हैं। बच्च्े कहां खेलेंगे पार्क में कीचड़ भरा है। पानी निकलता नहीं है। घरों के सामने बिजली के खंभे खड़े हैं। करंट से डर लगता है। क्या करें। पार्षद सुनता ही नहीं है। <br /><strong>- संतोष देवी वार्ड निवासी </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है  </strong><br />समस्या की जानकारी मिली है,जिसका निस्तारण करवाएगें। हालांकि पूर्व में लोगों की परेशानियों से महापौर से लेकर विधायक तक को अवगत करवा चुका हूं। मेरी सुनवाई नहीं होती।</p>
<p><strong>- कुलदीप गौतम पार्षद वार्ड 76</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 14:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क किनारे कच्चे घरों में जीवन-यापन की मजबूरी</title>
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                        <![CDATA[40 साल से पेयजल, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं गाड़िया लोहार परिवार। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/compelled-to-live-in-kutcha-houses-on-the-roadside/article-84483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/sadak-kinare-kacche-ghro-me-jivan-yapan-ki-majboori...rawatbhata,-kota-news-12-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। शहर के बीचों-बीच मुख्य बाजार में बसा गाड़िया लोहार समाज सरकारों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण पिछले 40 सालों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जानकारी के अनुसार गत 40 सालों से मुख्य बाजार में निवास कर रहे करीब 25 परिवारों के बाशिंदे शौचालय और पानी जैसी जरूरत से महरूम हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दस साल की केंद्र सरकार गरीब तबके के लिए कई योजनाएं लाई। जिनमें घर और शौचालय प्रमुखता से गरीब तबके को दिए गए। गाडिया लोहार परिवार केंद्र की इस सुविधा से भी वंचित हैं। यह लोग सड़क किनारे ही अपने कच्चे मकानों में रहते हैं। ना तो बिजली कनेक्शन हैं, ना ही पानी की आपूर्ति की कोई व्यवस्था। </p>
<p><strong>कई बार उठा चुके हैं मांग</strong><br />ये परिवार अपनी समस्याओं के समाधान की वर्तमान और पूर्व सरकारों से कई बार मांग कर चुके हैं। लेकिन सुनवाई आज तक नहीं हुई। ना तो इनको जमीन आवंटित कर निशुल्क पट्टे दिए गए हैं, ना ही मूलभूत सुविधाएं। </p>
<p><strong>दुकानदारों से होती रहती है बहस</strong><br />इनके कारण मुख्य बाजार का रास्ता भी संकरा हो गया है। कई बार दुकानदारों से भी इनकी बहसबाजी हो जाती है। लेकिन प्रशासन फिर भी इन गरीब गाड़िया लोहार परिवारों की मदद को आगे नहीं आता। ना ही इन्हें कहीं जमीन आवंटित कर बसाया गया। </p>
<p>मेरे पिताजी और अन्य लोग करीब 40 साल पहले यहां आ कर बसे थे। तब रावतभाटा छोटा सा क्षेत्र था। तब से लेकर आज तक हम लोगों के लिए किसी भी सरकार ने नहीं सोचा। आज भी हमारी स्थिति दयनीय है। हमें ना बिजली की सुविधा मिली है और ना पानी की। <br /><strong>- जगदीश लोहार, गाडिया लोहार </strong></p>
<p><strong>दयनीय स्थिति में जिन्दगी जीने को मजबूर </strong><br />हम एक छोटी सी कच्ची झोंपड़ी में करीब 12 से 13 लोग रहते हैं। सरकार ने आज तक हमारी सुध नहीं ली। हम आज भी दयनीय स्थिति में जिन्दगी जीने को मजबूर हैं।<br /><strong>- भंवर लोहार, गाड़िया लोहार </strong></p>
<p>गाड़िया लोहार समाज के कच्चे मकान मेरी दुकान के सामने हैं। जिससे मुझे आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। सरकार इनको कहीं निशुल्क जमीन दे। जिससे यह लोग भी अपना जीवन बसर कर पाएं। <br /><strong>- दीपक, दुकानदार </strong></p>
<p><strong>इनको जमीन देकर सही जगह पर बसाया जाए</strong><br />हमारे अस्पताल के सामने इन लोगों का बसेरा है। करीब 40 साल से ये लोग यहीं निवास कर रहे हैं। अब सरकार को भी सोचना चाहिए कि इन गरीब लोगों को कहीं जमीन आवंटित कर बसाया जाए। ताकि यह समाज भी मुख्य धारा में आ सके।<br /><strong>- पंकज परमार, दवा विक्रेता</strong></p>
<p>पहले गाड़िया लोहार के परिवार छोटे थे। अब इनकी जनसंख्या काफी बढ़ गई है। ऐसे में इनके लिए यह स्थान छोटा पड़ता है। जिससे मुख्य सड़क बाधित हो जाती है। सरकार को चाहिए कि इनको सही जगह पर बसाए। <br /><strong>- डॉ. भवानी शंकर परमार </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारी सरकार के समय गाड़िया लोहार परिवारों के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन बाद में क्या हुआ इसकी मुझे जानकारी नहीं।<br /><strong>- दीपिका तिल्लानी, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष, रावतभाटा</strong></p>
<p>गाड़िया लोहार परिवारों की तरफ से जमीन आवंटन की मांग की गई थी। प्रशासन द्वारा मौका मुआयना कर जमीन आवंटित की जाएगी।<br /><strong>- मधु कंवर हाड़ा, पालिकाध्यक्ष, रावतभाटा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 17:19:20 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल रिपोर्ट 2: सैकडों सरकारी विद्यालयों में मौजूद नहीं खेल मैदान और लाइब्रेरी</title>
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                        <![CDATA[जिले के सैंकड़ों विद्यालयों में ना तो लाइब्रेरी मौजूद है और ना ही खेल का मैदान। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/school-report-2--playground-and-library-not-present-in-hundreds-of-government-schools/article-81147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/photo-size-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा विभाग की ओर से जारी विद्यालय रिपोर्ट में कोटा के सरकारी स्कूलों में सत्र 2021-22 की तुलना में सत्र 2022-23 में विद्यार्थियों की संख्या घट गई। इसके अलावा रिपोर्ट के अनुसार कोटा में कई विद्यालय ऐसे हैं जो या तो एक शिक्षक के भरोसे हैं या एक ही कमरे में संचालित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई विद्यालयों में आज भी आधारभूत सुविधाओं की कमी है या उपलब्ध ही नहीं है। जिले के सैंकड़ों विद्यालय आज भी लाइब्रेरी, सुलभघर, बिजली कनेक्शन, नल कनेक्शन, खेल मैदान और कम्प्यूटर लेब जैसी सुविधाओं से वंचित है। ऐसे में शिक्षा विभाग एक ओर तो प्रदेश के सरकारी विद्यालयों को उत्कृष्ट बनाने की बात करता है वहीं दूसरी ओर सैंकड़ों विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।</p>
<p><strong>सबसे जरूरी खेल मैदान और लाइब्रेरी ही मौजूद नहीं</strong><br />विद्यालयों में शिक्षा के साथ विद्यार्थी का मानसिक और शारीरिक विकास होना भी आवश्यक है, ताकि विद्यार्थी भविष्य के अनुरूप खुद को ढाल सकें। लेकिन जिले के सैंकड़ों विद्यालयों में ना तो लाइब्रेरी मौजूद है और ना ही खेल का मैदान। ऐसे में इन विद्यालयों में विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होना बड़ी चुनौती है। सत्र 2021-22 में जिले के 1078 में से 707 विद्यालयों में ही खेल का मैदान मौजूद था वहीं सत्र 2022-23 में 1056 विद्यालयों में से केवल 770 विद्यालयों में ही खेल के मैदान हैं। इसी तरह सत्र 2021-22 में जिले के 1078 विद्यालयों में से 863 और सत्र 2022-23 के दौरान 1056 विद्यालयों में से केवल 852 विद्यालयों में ही लाइब्रेरी मौजूद है। ऐसे में विद्यालयों में लाइब्रेरी नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थी शैक्षणिक शिक्षा के अलावा अन्य विषयों में जानकारी लेने के लिए अन्य स्त्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।</p>
<p><strong>कंप्यूटर लैब और बिजली कनेक्शन की भी कमी</strong><br />वर्तमान में राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों डिजिटलाइजेशन की ओर अग्रसर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है बावजूद इसके सत्र 2021-22 के दौरान जिले के 1078 विद्यालयों में से केवल 205 विद्यालयों में ही कंप्यूटर लैब मौजूद थी, हालांकि सत्र 2022-23 के दौरान इनकी संख्या में थोड़ा इजाफा हुआ जो बढ़कर 247 हो गई। लेकिन इसके अभी भी जिले के करीब 800 विद्यालयों में कंप्यूटर लैब मौजूद नहीं है। इसी तरह सत्र 2021-22 के दौरान कुल 1078 विद्यालयों में से केवल 941 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन था वहीं सत्र 2022-23 के दौरान 1056 में से केवल 988 विद्यालयों में ही बिजली कनेक्शन मौजूद है। </p>
<p><strong>कई विद्यालयों में बाउंड्री वॉल नहीं </strong><br />शिक्षा विभाग ने इसी जनवरी माह में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से जिन विद्यालयों में पर्याप्त बाउंड्री वॉल मौजूद नहीं है या जिन विद्यालयों में अतिक्रमण हो रहा है उनकी जानकारी मांगी थी। लेकिन विभाग की ओर से अभी तक उस पर कोई कारवाई नहीं की गई है, और मामला अभी तक अधर में है। इसी बीच जारी हुई सरकारी रिपोर्ट के अनुसार सत्र 2021-22 में जिले के 71 विद्यालयों और 2022-23 के दौरान 54 विद्यालयों में बाउंड्री वॉल मौजूद नहीं है। जहां या तो अतिक्रमण हो रहा है, या अतिक्रमण होने की संभावना है। वहीं कोटा के 1056 विद्यालयों में से अभी भी 25 विद्यालयों में पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जिले के सरकारी विद्यालयों की वास्तविक विद्यालयों की रिपोर्ट विभाग को भेजी जा चुकी है। जिन विद्यालयों में समस्याएं मौजूद हैं। उन पर कोई भी उच्च स्तरीय पर ही किया जा सकता है। जिला स्तर पर जितना हो सकता है उतनी कोशिश की जाती है।<br /><strong>- के. के. शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 16:07:07 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के 70 साल बाद भी बुनियादी जरूरतों को तरस रहे ग्रामीण</title>
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                        <![CDATA[ग्रामीणों को सता रहा बीमारियों का डर।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-after-70-years-of-independence--villagers-are-yearning-for-basic-needs/article-80614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/22222222222.png" alt=""></a><br /><p>बूढ़ादीत। बूढ़ादीत क्षेत्र का कोटड़ादीपसिंह आजादी के 70 साल भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसने को मजबूर है। ग्रामीणों को अभी तक भी सड़क, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार है। ग्रामीण लोकेश गोचर, देवेंद्र जांगिड़, बिट्टू सुमन ने बताया कि कोटड़ादीपसिंह गांव में मुख्य सड़क मार्गों पर गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। साथ ही मुख्य मार्ग में सड़क किनारे बने नाले की सफाई का कार्य अभी तक नहीं हो पाया है। जबकि क्षेत्र में मानसून आने में कुछ ही दिन शेष बचे हैं। बारिश में ग्रामीणों को संक्रमण जैसी बीमारियों का डर सता रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि माली मोहल्ले में सीसी सड़क मार्ग पर नालियां अवरुद्ध हो चुकी हैं। सड़क मार्ग के दोनों ओर झाड़ बबूल उगे हुए हैं। जिससे लोगों का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। </p>
<p><strong>स्थाई चिकित्सक नहीं होने से जाना पड़ता है दूर</strong><br />ग्रामीण लंबे समय से जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से अस्पताल में स्थाई चिकित्सक लगाने की मांग कर रहे हैं। पंरतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मात्र एक चिकित्सक लगा रखा है, जो समय पर स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम नहीं है। जिससे ग्रामीणों को इलाज के लिए काफी दूर बड़ौद या सुल्तानपुर जाना पड़ता है। एक डेंगू केस निकलने पर किया था क्रॉस वैरिफिकेशन 7 मई को बीसीएमओ सुल्तानपुर डॉ. राजेश सामर ने ब्लॉक सुल्तानपुर के कोटड़ादीपसिंह गांव में एक डेंगू केस निकलने पर क्रॉस वैरिफिकेशन किया था। लेकिन गांव में नालियों की दशा एक माह बाद भी वैसी ही है। नालियां अवरुद्ध होने से मौसमी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। समय रहते सफाई कार्य अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p><strong>मुख्य सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त </strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गांव का मुख्य सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुका है। कोटडदीपसिंह से बड़ौद तक सड़क मार्ग का निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहा है। बारिश के समय ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। </p>
<p>कोटड़ादीपसिंह गांव में मुख्य सड़क मार्गों पर गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। साथ ही मुख्य मार्ग में सड़क किनारे बने नाले की सफाई का कार्य नहीं हो पाया है। जिससे ग्रामीणों को बीमारियां फैलने का डर सता रहा है। माली मोहल्ले में सीसी सड़क मार्ग पर नालियां अवरुद्ध हो चुकी हैं। सड़क के दोनों ओर साइडों पर झाड़ बबूल उगे हुए हैं। <br /><strong>- मनीष सुमन, ग्रामीण, कोटड़ादीपसिंह</strong></p>
<p>ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से अस्पताल में स्थाई चिकित्सक लगाने की मांग की जा रही है। पंरतु स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मात्र एक चिकित्सक लगा रखा है। जो भी समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे रहा है। <br /><strong>- महावीर सुमन, ग्रामीण, कोटड़ादीपसिंह</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा जल्द ही सफाई कार्य करवाया जाएगा। नाले की भी समय रहते सफाई हो जाएगी। जहां-जहां नालियां अवरुद्ध हैं, वहां भी सफाई करवाई जाएगी। ग्राम पंचायत ग्रामीणों की हर समस्या का समाधान करने के लिए तत्पर है।<br /><strong>- संतोष बैरवा, सरपंच, कोटड़ादीपसिंह </strong></p>
<p>वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर यहां पर एक चिकित्सक लगा रखा है जो रोजाना सेवाएं दे रहा है। जो चिकित्सक यहां पर पोस्टेड है वह उच्चाधिकारियों के आदेश के तहत कोटा लगाया हुआ है। यहां पर लगातार चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से मिल रही हैं।<br /><strong>- डॉ. राजेश सामर, मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jun 2024 16:53:58 +0530</pubDate>
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