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                <title>एडमिशन शुरू, बिल्डिंग का अब तक पता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कैथनू व अकलेरा कॉलेज को मिला अस्थाई भवन। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/admission-started--building-is-not-known-yet/article-117060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में कोटा संभाग को 4 नए राजकीय कन्या महाविद्यालयों की सौगात तो मिली लेकिन कॉलेज चलाने के लिए अस्थाई भवन अब तक नहीं मिले। जबकि, एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हालात यह हैं, जिन महाविद्यालयों में एडमिशन के लिए छात्राएं ऑनलाइन आवेदन कर रहीं हैं, वह कहां और किस बिल्डिंग में संचालित होगा, यह उनको भी पता नहीं है। ऐसे में छात्राएं और अभिभावक असमंजस में है कि दाखिले के बाद पढ़ने कहां जाएंगे।  हालांकि, इन चार राजकीय कन्या महाविद्यालयों में से कोटा के कैथून और झालावाड़ के अकलेरा कॉलेज को अस्थाई भवन मिल चुका है लेकिन बूंदी  के डाबी व कोटा के सुकेत कॉलेज के लिए अब तक अस्थाई बल्डिंग प्रशासन से आवंटित नहीं हुई है। </p>
<p><strong>कोटा में 2 और बूंदी-झालावाड़ में 1-1 नए कॉलेज</strong><br />बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सत्र 2025-26 में कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिले के कस्बों में चार नए कॉलेज खोले हैं। जिनमें कोटा में कैथून व सुकेत, बूंदी में डाबी और झालावाड़ में अकलेरा शामिल हैं। यह कॉलेज एजुकेशन सोसायटी (राजसेस) के अधीन संचालित होंगे। जिनमें फैकल्टी विद्या संबल योजना के तहत लगाई जानी है। हालांकि, अभी तक विद्या संबल शिक्षकों की भर्ती के लिए स्क्रूटनिंग नहीं की गई। लेकिन, सब्जेक्ट अलॉट कर दिए गए हैं। </p>
<p><strong>स्कूलों में चलेंगे कैथून व अकलेरा कॉलेज</strong><br />राजकीय कन्या महाविद्यालय कैथून व अकलेरा  को अस्थाई भवन के रूप में  राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के कुछ कक्षा कक्ष मिले हैं। जिनमें यह कॉलेज संचालित होंगे। यहां पहली पारी में सुबह के समय स्कूल  चलेगा और दूसरी पारी दोपहर को कॉलेज चलाया जाएगा। ऐसे में छात्राओं को पढ़ने के लिए पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ेगा। </p>
<p><strong>सुकेत व डाबी के लिए अस्थाई भवन चिन्हित, लेकिन अलॉट नहीं हुए</strong><br />गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज सुकेत के नोडल प्राचार्य डॉ. संजय गुर्जर का कहना है, कॉलेज संचालन के लिए कस्बे में स्थित सरकारी विद्यालय की पुरानी बिल्डिंग का चयन किया था। यहां पहले स्कूल चलता था, जो अब वह अपनी नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया है। ऐसे में यह भवन खाली पड़ा है। जिसे सुकेत कॉलेज संचालन के लिए चिन्हित कर अलॉटमेंट के लिए प्रशासन को पत्र लिखा है लेकिन अभी तक अलॉटमेंट नहीं हुआ है। हालांकि, जल्द ही अस्थाई भवन अलॉट होने की उम्मीद है। इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं। इधर, डाबी कॉलेज के नोडल प्रभारी डॉ. संत मीणा ने बताया कि महाविद्यालय के अस्थाई भवन के लिए पंचायत समिति भवन व हाई सैकंडी स्कूल को चिन्हित किया है। इनमें से कोई भी एक भवन मिल जाए, इसके लिए प्रशासन को अवगत किया है लेकिन अभी तक अस्थाई भवन अलॉट नहीं हुए हैं। </p>
<p><strong>कहीं 4 तो कहीं 10 ही आए एडमिशन के आवेदन</strong><br />एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद कॉलेजों को संचालन के लिए अस्थाई भवन नहीं मिलने से छात्राएं व अभिभावकों में असमंजस बना हुआ है कि एडमिशन के बाद बालिकाएं पढ़ने कहां जाएंगी। इस अव्यवस्था का असर दाखिले के लिए किए जा रहे आॅनलाइन आवेदनों की संख्या पर भी नजर आ रहा है। प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं लेकिन आवेदन नाममात्र ही आ रहे हैं। कैथून कॉलेज के लिए अभी तक मात्र 4, सुकेत में 5, अकलेरा के लिए 10 से अधिक आवेदन ही आए हैं। </p>
<p><strong>फेम्पलेट व बैनर बनवाकर कर रहे प्रचार प्रसार</strong><br />कैथून व सुकेत कॉलेज के नोडल प्राचार्यों का कहना है, नवीन महाविद्यालयों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। इसके लिए बैनर, फलेक्स, फेम्पलेट बनवाकर कस्बों में बंटवाए जाएंगे ताकि लोगों को क्षेत्र में नए कॉलेज खुले जाने की जानकारी मिल सके। प्रचार प्रसार होने के बाद आवेदनों की संख्या में वृद्धि होगी। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br />हमने सुकेत कन्या महाविद्यालय में दाखिलने के लिए आवेदन तो कर दिया है लेकिन यह कॉलेज कस्बे में कहां और किस बिल्डिंग में चलेगा, इसकी जानकारी ही नही है। ऐसे में मन में कई सवाल उठते हैं। सरकार को जल्द से जल्द कॉलेज बिल्डिंग की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।<br /><strong>- शोभा कुमारी, छात्रा सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला है, इसकी जानकारी मिली थी लेकिन यह कॉलेज किस भवन में चलेगा,इसका पता नहीं है। ऐसे में यहां सुविधाएं भी मिलेंगी या नहीं, इसको लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में बूंदी गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन के लिए आवेदन करना सही लग रहा है। <br /><strong>- जया, चंचल व अर्पणा, छात्रा डाबी </strong></p>
<p>कैथून कन्या महाविद्यालय कस्बे के पीएम श्री राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में संचालित किया जाएगा। सुबह की पारी में स्कूल चलेगा और दोपहर की पारी में कॉलेज संचालित किया जाएगा। कस्बे की बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए अब घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। यहां बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। छात्राओें की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास जारी है। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या कैथून महाविद्यालय </strong></p>
<p>अकलेरा गर्ल्स कॉलेज, कस्बे में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में संचालित होगा। स्कूल के 4-5 कक्ष मिले हैं। जिसमें सुबह 11 बजे से कॉलेज चलाया जाएगा। अभी तक 10 से 15 आवेदन आ चुके हैं। वहीं, कॉलेज निर्माण के लिए 12 से 13 बीघा जमीन भी अलॉट हो गई है, जो बारां-भोपाल बायपास पर स्थित है। <br /><strong>-फूल सिंह गुर्जर, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय अकलेरा </strong></p>
<p>डाबी कॉलेज के संचालन के लिए कस्बे में दो अस्थाई भवन चिन्हित किए हैं। अलॉटमेंट के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा है। हालांकि, अभी तक अस्थाई भवन अलॉट नहीं हुआ। प्रयास जारी है।<br /><strong>- डॉ. संत राम मीणा, नोडल प्रभारी, राजकीय कन्या महाविद्यालय डाबी</strong></p>
<p>सभी नवीन कन्या महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। दो कॉलेजों को अस्थाई भवन के रूप में स्कूल में कक्ष मिल चुके हैं, वहीं शेष दो महाविद्यालयों के लिए प्रयास जारी है। बालिकाओं को क्वालिटी एजुकेशन देने के प्रति सरकार गंभीर है। <br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>
<p><strong>ताकि व्यवस्थाओं में बना रहे विश्वास</strong><br />वर्तमान परिस्थितियों के मध्यनजर सह शिक्षा के कॉलेज खोले जाना अधिक उचित होगा। प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले ही महाविद्यालय संचालन के लिए अस्थाई भवन का आवंटन हो जाना जरूरी है। ताकि, एक निश्चित जगह से विद्यार्थियों की इंक्वायरी पूरी की जा सके। इससे उनके मन में महाविद्यालय के प्रति उठने वाले सवालों के बेहतर जवाब दिया जा सकता है। जिससे व्यवस्था में विश्वास जाग्रत होगा। वहीं, इसके उलट स्थिति होने का असर आवेदनों की संख्या पर देखने को मिलता है। <br /><strong>- प्रो. संजय भार्गव, रिटायर्ड प्रिंसिपल जेडीबी कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Jun 2025 14:52:12 +0530</pubDate>
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