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                <title>Natural Farming - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Natural Farming RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएम मोदी ने पेश किए विकसित भारत 2047 के लिए 9 संकल्प : जनता को संभालनी होगी कमान, सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिनिधित्व का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मांड्या में 'विकसित भारत' के लिए नौ संकल्पों का मंत्र दिया। उन्होंने जल संरक्षण, 'एक पेड़ मां के नाम', स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। पीएम ने स्वस्थ भारत के लिए प्राकृतिक खेती और योग पर जोर देते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-presented-9-resolutions-for-developed-india-2047-people/article-150541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi9.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 'विकसित भारत के लिए नौ संकल्प' लेने का अनुरोध किया और कहा कि यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित भारत 2047 बनाने की यात्रा में तेजी ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने मांड्या जिले के आदिचुंचनगिरी मठ में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल क्षेत्रीय सीमाओं से परे है और सामूहिक भागीदारी एवं जीवनशैली में बदलाव के लिए राष्ट्रव्यापी आह्वान का प्रतिनिधित्व करती है।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की व्यक्तिगत आदतें और दैनिक विकल्प देश के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा, "यदि हम सभी इन नौ संकल्पों पर ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो हम विकसित कर्नाटक और विकसित भारत की ओर प्रगति को तेज कर सकते हैं।" विकास को केवल सरकार संचालित प्रयास के बजाय जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि परिवर्तन की शुरुआत रोजमर्रा के व्यवहार के स्तर से होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने नदी प्रणालियों पर निर्भर क्षेत्रों में जल संरक्षण को प्रमुख प्राथमिकता बताया, और नागरिकों से सामूहिक प्रतिज्ञा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम सब जल संरक्षण और इसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लें।" पर्यावरण स्थिरता पर प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आइए हम अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाएं और धरती मां की रक्षा करें।"</p>
<p>स्वच्छता को नागरिक कर्तव्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थलों, गांवों और शहरों में साफ-सफाई बनाये रखना साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "चाहे वह धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर, स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।" आर्थिक आत्मनिर्भरता के संबंध में, प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और भारतीय उद्योगों को समर्थन देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' दृष्टिकोण को आर्थिक सशक्तीकरण के आधार बताते हुए कहा, "आइए हम भारतीय उत्पादों को अपनाएं और अपने उद्योगों को मजबूत करें।"</p>
<p>उन्होंने राष्ट्रीय जागरूकता और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देते हुए नागरिकों से देश भर में यात्रा करने और इसकी विविधता को जानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "आइए हम पूरे भारत की यात्रा करें और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों के बीच बेहतर जुड़ाव राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देगा। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और पोषण पर मोटे अनाज को अपने आहार में शामिल करने पर जोर देते इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बढ़ता मोटापा बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गयी है। इसके साथ ही नागरिकों से तेल की खपत में 10 फीसदी की कमी का आग्रह किया। कृषि को लेकर उन्होंने किसानों से कहा, "आइए हम रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।"</p>
<p>उन्होंने शारीरिक फिटनेस पर और जोर देते हुए कहा, "योग, खेल और फिटनेस हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।" उन्होने स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय प्राथमिकता में स्थापित किये जाने की बात कही। इस मौके पर उन्होंने जनसेवा की मजबूत भावना का आह्वान करते हुए कहा, "जरूरतमंदों की सेवा समाज को मजबूत करती है और जीवन को बड़ा उद्देश्य देती है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नौ संकल्प एक व्यापक जन-भागीदारी वाले शासन मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां नागरिक स्तर पर व्यवहारिक परिवर्तन सामूहिक रूप से राष्ट्रीय परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामूहिक प्रतिबद्धता "विकसित कर्नाटक और विकसित भारत" के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।</p>
<p>इससे पहले दिन में, उन्होंने मांड्या जिले के ऐतिहासिक आदिचुंचनगिरी मठ परिसर में 'श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर' का उद्घाटन किया, जो दिवंगत संत श्री बालगांगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित एक नया आध्यात्मिक स्थल है। आदिचुंचनगिरी की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच स्थित यह 'गद्दीगे' स्मारक उस विरासत के प्रति श्रद्धांजलि है, जो दशकों से मठ की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p>शैव मत की सदियों पुरानी नाथ परंपरा के तहत निर्मित इस मंदिर को उस गुरु-शिष्य परंपरा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है जो इस संस्थान की आध्यात्मिक शृंखला को परिभाषित करती है। जैसे ही पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजे, बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र हुए, जिससे यह उद्घाटन भक्ति, विरासत और जन-भागीदारी के संगम में बदल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:52:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को मिल रही नई दिशा, प्राकृतिक खेती से 2 लाख 50 हजार किसानों को मिल रहा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा दे रही है। वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख किसानों को शामिल किया जा रहा है। 2 हजार कलस्टर बनाए गए हैं, किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। 180 बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि टिकाऊ कृषि और किसान आय बढ़ सके।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/natural-farming-is-getting-a-new-direction-under-the-leadership/article-140719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/dbnnndxd.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के सशक्तीकरण के लिए निरंतर निर्णय ले रही है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि रसायनों पर निर्भरता कम होने के साथ ही यह क्षेत्र टिकाऊ कृषि की ओर अग्रसर हो। सरकार का लक्ष्य किसानों को रसायन-मुक्त और टिकाऊ प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है, जिससे मिट्टी की उत्पादकता में सुधार हो, खेती की लागत कम हो, किसानों की आय बढ़े और अधिकतम उपज प्राप्त हो सके।</p>
<p>प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में व्यापक एवं दूरदर्शी कार्ययोजना की घोषणा की गई है। इसके तहत 2 लाख 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है। इसमें राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 2 लाख 25 हजार किसानों को केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत योगदान दे रही है। अतिरिक्त 25 हजार किसानों को राज्य सरकार द्वारा शत् प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।</p>
<p><strong>किसानों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण : </strong></p>
<p>प्राकृतिक खेती को संगठित रूप से लागू करने के लिए 125 किसानों के 50 हैक्टेयर क्षेत्र में 1 कलस्टर का गठन किया गया है। योजनान्तर्गत राज्य के सभी जिलों में 1 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में 2 हजार कलस्टर बनाए गए हैं। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किसानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उदयपुर के प्राकृतिक खेती केंद्र द्वारा विभागीय अधिकारियों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं किसान मास्टर ट्रेनरों को भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।</p>
<p>चयनित कलस्टरों में किसानों में जागरुकता के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक कलस्टर में किसानों के साथ समन्वय हेतु कृषि सखी/सीआरपी की नियुक्ति की गई है। इन कृषि सखियों को कृषि विज्ञान केंद्रों के द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिससे वे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकें।</p>
<p><strong>बायो इनपुट संसाधन केंद्र पर किसानों को मिल रहे प्राकृतिक उर्वरक :</strong></p>
<p>प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चयनित किसानों को प्रति एकड़ 4 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है। यह राशि ऑन-फार्म इनपुट उत्पादन इकाइयों के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि स्थानीय स्तर पर किसानों को प्राकृतिक उर्वरक एवं जैविक आदानों की आसानी से उपलब्धता हो। इस हेतु कृषि विभाग द्वारा बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं। कार्ययोजना के तहत प्रत्येक बायो इनपुट संसाधन केंद्र के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक उर्वरक तैयार हो सके। अब तक 180 बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित हो चुके हैं।</p>
<p>राज्य सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी, साथ ही स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और सतत् कृषि विकास की दिशा में राज्य को एक नई पहचान दिलाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 14:41:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, पांच दिवसीय कृषक सखी-सीआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अंतर्गत पांच दिवसीय कृषक सखी, सीआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/national-natural-farming-mission-five-day-farmer-sakhi-crp-training-program-organized/article-121278"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(6)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खेतों में उपलब्ध समस्त संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती करने एवं प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अंतर्गत पांच दिवसीय कृषक सखी,सीआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
<p>श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के प्रसार शिक्षा निदेशालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलराज सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को खेत में उपलब्ध समस्त संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती करने एवं महत्व के बारे में प्रशिक्षार्थियों को जानकारी दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) खंड जयपुर ईश्वर लाल यादव ने मानव शरीर में वर्तमान में हो रही विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचने एवं जहर मुक्त खाद्यान्न उत्पादन में प्राकृतिक खेती के महत्व को बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसआर ढाका ने प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 13:00:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>प्राकृतिक खेती बने आर्थिक प्रगति का कारक</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया चाहे जिस भी स्वरूप में हो, मानव को जीवन चलाने के लिए खाद्यान्न की जरूरत होती ही होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/natural-farming-becomes-a-factor-of-economic-progress/article-117261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>दुनिया चाहे जिस भी स्वरूप में हो, मानव को जीवन चलाने के लिए खाद्यान्न की जरूरत होती ही होती है। चाहे आधुनिक प्रगति के नवीनतम प्रतिमानों के आधार पर आगे बढ़ चुके विकसित देश हों या ऐसे प्रतिमानों को छूने के प्रयास में आगे बढ़ रहे विकासशील देश, सभी के नागरिकों को जीने के लिए भोजन चाहिए। यह दुखद है कि प्रगति के कदमों की रफ्तार के साथ देश-दुनिया में खेती-किसानी का काम दोयम दर्जे का काम बन कर रह गया है। इसी का नतीजा है जो खाद्यान्नों, प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों और यहां तक कि पेयपदार्थों में भी जरूरी पोषक तत्व खत्म होते जा रहे हैं। बीते चार-पांच दशकों में जिस गति से देश की आबादी बढ़ी है उसी गति से प्राकृतिक कृषि में कमी भी आई है। ढांचागत विकास जैसे कि रेलवे, सड़क परिवहन, कारखाना, भवनों, हवाई अड्डों, बस अड्डों, स्कूल, अस्पतालों व महानगरों में आवासीय भवनों के विस्तार के कारण ग्राम्य क्षेत्रों की वानिकी, पर्यावरणीय और कृषकीय भूमि सिकुड़ती गई है। नतीजतन कृषि कार्य भी सिकुड़ता गया। </p>
<p>आधुनिक जीवन का ऐसा अभ्यास कम-ज्यादा मात्रा में पूरी दुनिया में हो रहा है और बीते चार-पांच दशकों में तो इस अभ्यास में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसके विपरीत, इसी दौरान देश-दुनिया की आबादी में बहुत बढ़ोतरी हुई है। इतनी बड़ी आबादी की खाद्य जरूरतें तो बनी ही हुई हैं। इनमें कमी का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। बड़ी जनसंख्या की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारों के माध्यम से कृषि क्षेत्र और कृषकों पर पैदावार बढ़ाने और इसके लिए रासायनिक उर्वरकों, खाद व फसलों में बढ़ोतरी के दूसरे रसायनों के इस्तेमाल का दबाव बीते चालीस-पचास सालों से बना ही हुआ है, लेकिन अब पूरे कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए रासायनिक उर्वरक, खाद व दूसरे रसायन पैदावार बढ़ाने के जरूरी घटक बन गए हैं। अब किसान चाहकर भी इनका इस्तेमाल बंद नहीं कर सकते हैं। </p>
<p>रासायनिक खादों की मदद से पैदा होनेवाले अनाज में जरूरी पोषक तत्व तो पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, लेकिन सिकुड़ती कृषि भूमि में बड़ी आबादी की जरूरत के हिसाब से ज्यादा पैदावार होने का मौका अवश्य ही किसानों के हाथ लग गया है। चार दशक से किसान इस कृषि अभ्यास में पूरी तरह निपुण हो चुके हैं। साथ ही साथ वे ऐसी खेती से फायदे की स्थिति में हैं। सरकारी गोदामों में अनाज के अंबार लगे हुए हैं। फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ ही रहा है। किसानों को खाद, बीज, रसायन और दूसरी चीजें सरकारी रियायत पर मिल रही हैं। कुछ सालों से तो तरह-तरह की सब्सिडी भी किसानों को मिल ही रही है। हर साल की पूरी पैदावार सरकारी खरीद में बिक जा रही है। देखा जाए तो आधुनिक खेती की ऐसी दशाएं किसानों, सरकारों और अनाज की सब्सिडी पाने वाले बीपीएल परिवारों के लिए सीधे तो सुविधाजनक प्रतीत होती हैं, लेकिन इस खेती के अन्न को खाकर ज्यादातर लोग असाध्य और लाइलाज बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र और सरकारों के लिए यह स्थिति चिंताजनक इसलिए नहीं है क्योंकि यहां भी वे आपदा में अवसर ढूंढ लेते हैं। </p>
<p>बीमारियों के बढ़ने से चिकित्सा अनुसंधान के व्यवसाय व कारखाने फलते-फूलते हैं। मानवीय जीवन का अर्थ अब केवल आर्थिक प्रगति की परिधि में सिमट कर रह गया है और इस कारण लगातार उत्पन्न होनेवाली समाधानहीन विसंगतियों के मकड़जाल से बाहर निकलना दिनोंदिन असंभव होता जा रहा है। मानव जीवन पर छाए ऐसे संकट की अवधि में एक खबर आई है कि भारत देश विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। खबर के मुताबिक भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए 4 बिलियन डॉलर मूल्य का आर्थिक लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसी के साथ आर्थिक विशेषज्ञों की तरफ से ये संभावना भी जताई जा रही है कि 2028 तक भारत, जर्मनी को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। देश प्रगति करे, आगे बढ़े और आर्थिक रूप से मजबूत हो, यह बहुत प्रशंसनीय बात है। यदि चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की उपलब्धि हासिल करने के लिए हमें आयात शुल्क, उपभोक्ता खरीद, आबादी के उपभोग, सेवा क्षेत्रों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा है, तो यह हमारी पूरी तरह संतुलित आर्थिक स्थिति नहीं हो सकती। </p>
<p>हमें दुनिया के सामने एक नया आदर्श स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। हम अपनी आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा आधार अपनी कृषि को बनाएं। भारत की पूरी आबादी का साठ फीसद से ज्यादा हिस्सा रोजगार के लिए अब भी कृषि क्षेत्र पर आश्रित है। चाहे कृषि अप्राकृतिक तरीके से ही क्यों न हो रही हो अथवा सब्सिडी के रूप में बहुत बड़ी आबादी को कई सालों से मुफ्त अनाज और मानदेय ही क्यों न दिया जा रहा हो, इससे सिद्ध होता है कि ज्यादातर लोगों का जैविक-आर्थिक जीवन कृषि पर ही निर्भर है। दुनिया में आर्थिक रूप से तरक्की करने के लिए भारत को अपने कृषि क्षेत्र पर नए सिरे से विचार करना होगा। इसके लिए सबसे पहले पूरे कृषि क्षेत्र की जमीन का इस आधार पर संरक्षण हो कि भविष्य में इसका उपयोग केवल और केवल कृषि के लिए ही हो। दूसरा, रासायनिक और अप्राकृतिक उर्वरक पर आधारित कृषि को त्यागना होगा।</p>
<p><strong>-विकेश कुमार बडोला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 13 Jun 2025 12:04:24 +0530</pubDate>
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