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                <title>दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते मामले चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[गैर संचारी रोग यानी कि एनसीडीज के तहत आने वाले कैंसर को लेकर लैंसेट कमीशन की ओर से हालिया जारी नई रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और 2040 तक हर साल इससे 10 लाख महिलाओं की मौत होने का खतरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-increasing-cases-of-cancer-around-the-world-are-worrying/article-76632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/cancer.png" alt=""></a><br /><p>गैर संचारी रोग यानी कि एनसीडीज के तहत आने वाले कैंसर को लेकर लैंसेट कमीशन की ओर से हालिया जारी नई रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और 2040 तक हर साल इससे 10 लाख महिलाओं की मौत होने का खतरा है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि 2020 तक पिछले पांच वर्षों में लगभग 78 लाख महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था, जबकि उसी साल इस बीमारी से करीब 6.85 लाख महिलाओं की मौत हो गई थी। रिपोर्ट कहती है कि दुनियाभर में औसतन हर 12 महिलाओं में से एक को 75 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2020 में दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के 23 लाख मामले सामने आए थे, जो 2040 तक बढ़कर 30 लाख से अधिक हो सकते हैं।</p>
<p>असल में कैंसर की बीमारी से दुनियाभर में होने वाली मौतें दूसरे स्थान पर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा कैंसर मरीज भारत में हैं। साल 2022 में दुनिया में 1.93 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आए हैं, जिनमें 14 लाख से अधिक भारतीय हैं। इतना ही नहीं, भारत में सालाना बढ़ते कैंसर के मामलों के चलते 2040 तक इनकी संख्या में 57.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की आशंका है। कैंसर से भारत में साल 2020 में 7.70 लाख, 2021 में 7.89 लाख और 2022 में 8.08 लाख रोगियों की मौत हुई है। देश में कैंसर के मामलों की कुल संख्या साल 2022 में 14.61 लाख रही। वहीं 2021 में यह 14.26 लाख और 2020 में 13.92 लाख रही। भारत के हर 10 में से एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में कैंसर से जूझता है और 15 में एक की मृत्यु इस बीमारी से हो जाती है। भारत में हर साल करीब 15 लाख कैंसर से जुड़े मामले रिपोर्ट किए जाते हैं।</p>
<p><strong>आखिर कैंसर क्या है?</strong> असल में शरीर में होने वाली असामान्य और खतरनाक स्थिति, जिसमें कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है, उसे कैंसर कहते हैं। हमारे शरीर में कोशिकाओं का लगातार विभाजन होना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिस पर शरीर का पूरा नियंत्रण रहता है, लेकिन जब किसी विशेष अंग की कोशिकाओं पर शरीर का नियंत्रण नहीं रहता है, तो वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। इसे ही कैंसर कहा जाता है। ज्यादातर कैंसर ट्यूमर के रूप में होते हैं, लेकिन ब्लड कैंसर के मामले में ट्यूमर नहीं होता है। एक बात यह भी ध्यान रखने योग्य है कि हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। भारत में कैंसर के प्रकार में छह तरह के कैंसर ज्यादा होते हैं, जिसमें फेफड़ों का कैंसर, मुंह का कैंसर, पेट का कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर शामिल है।</p>
<p>आसान शब्दों में कहें तो कैंसर शरीर में होने वाली असामान्य स्थिति है, जिसमें कोशिकाएं असाधारण रूप से बढ़ने लगती हैं और बढ़ी हुई चर्बी की एक गांठ बन जाती है, जिसे ट्यूमर कह सकते हैंं। यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। आमतौर पर कैंसर में होने वाले ट्यूमर दो तरह के होते हैं। पहला बिनाइन ट्यूमर और दूसरा मैलिग्नैंट ट्यूमर। मैलिग्नैंट ट्यूमर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलता है, जबकि बिनाइन नहीं फैलता है। सभी कैंसर के लक्षण उसके प्रकार और स्थान के अनुसार अलग-अलग होते हैं, लेकिन कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जो देखे जा सकते हैं जैसे शरीर का वजन अचानक कम होना या बढ़ना, ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना, त्वचा में गांठ बनना या रंग में बदलाव होना, पाचन संबंधी समस्या, कब्ज या दस्त होना, आवाज बदलना, जोड़ों-मांसपेशियों में दर्द, घाव ठीक होने में समय लगना, भूख कम लगना, लिम्फ नोड्स में सूजन आदि।</p>
<p>यूं तो कैंसर होने के पीछे कोई ज्ञात कारण नहीं है, लेकिन कुछ पदार्थ जिन्हें कार्सिनोजन कहा जाता है, वे प्रमुख कारणों में से एक हैं। ये कारक कैंसर होने की संभावना को बढ़ाते हैं। कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में तंबाकू या उससे बने उत्पाद जैसे सिगरेट, गुटखा या चुइंगम आदि का लंबे समय तक सेवन फेफड़े या मुंह के कैंसर का कारण बन सकता है। लंबे समय तक शराब पीना लिवर कैंसर को बढ़ावा देता है। साथ ही शरीर के अन्य कई हिस्सों में कैंसर के खतरे को बढ़ावा देता है। कैंसर के लिए जीन भी एक प्रमुख कारण है। यदि परिवार में किसी को कैंसर का इतिहास है, तो इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा होती है। वायरस जो कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, उनमें हेपेटाइटिस बी और सी होते हैं, जो 50 प्रतिशत तक लिवर कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। साथ ही ह्यूमन पैपिलोमा वायरस 99.9 प्रतिशत मामलों में सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। अनहेल्दी फूड्स या रिफाइंड खाद्य पदार्थ, जिनमें फाइबर की मात्रा कम होती है, वे कोलन कैंसर की संभावना को बढ़ाते हैं। बार-बार एक्स-रे करवाने के कारण भी रेडिएशन के सम्पर्क में आने से कैंसर होने के खतरे को बढ़ावा मिलता है।<br /><strong>-अमित बैजनाथ गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 11:09:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मॉरीशस के अगलेगा द्वीप पर एयर स्ट्रिप के पास दिखा मिलिट्री हैंगर, हैरत में दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[ओपन सोर्स इंटेलिजेंस की ओर से शेयर की गई सैटेलाइट तस्वीर में अगलेगा द्वीप पर एयर स्ट्रिप के आसपास नए निर्माण दिखाई दे रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/military-hangar-seen-near-airstrip-on-agega-island-of-mauritius/article-49427"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(15)6.png" alt=""></a><br /><p>लुइस। हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस का एक द्वीप पिछले कुछ समय से खूब चर्चा में है। इस द्वीप का कनेक्शन भारत के साथ जोड़ा जाता है। कई सैन्य विशेषज्ञों का दावा है कि इस द्वीप पर भारत ने सैन्य अड्डा बनाया है। हालांकि, भारत की तरफ से इन दावों को न तो स्वीकार किया गया है और ना ही खारिज। अब ताजा सैटेलाइट तस्वीर में अगलेगा द्वीप पर बने एयर स्ट्रिप के करीब हैंगर दिखाई दे रहा है। यह हैंगर सिविलियन न होकर मिलिट्री टाइप का नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, रनवे, टैक्सीवे और एप्रन के चिन्ह भी साफ नजर आ रहे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यह एयर स्ट्रिप अब इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से तैयार है।</p>
<p><strong>हैंगर के अलावा दिखाई दिए कई निर्माण</strong><br />ओपन सोर्स इंटेलिजेंस की ओर से शेयर की गई सैटेलाइट तस्वीर में अगलेगा द्वीप पर एयर स्ट्रिप के आसपास नए निर्माण दिखाई दे रहे हैं। अगलेगा एयर स्ट्रिप पर हैंगर को बनाया जा रहा है, रनवे, टैक्सीवे और एप्रन साइन दिखाई दे रहे हैं। इस एयर स्ट्रिप का इस्तेमाल छोटे हवाई जहाज, सर्विलांस ड्रोन, समुद्री गश्ती विमान को आपरेट करने के लिए किया जा सकता है। पिछले साल आॅस्ट्रेलिया के लोवी इंस्टीट्यूट ने दावा किया था कि अगलेगा द्वीप पर एयर स्ट्रिप का निर्माण भारत ने किया है। इसके कुछ दिनों बाद अरबी मीडिया अल जजीरा ने भी ऐसा ही दावा किया था।</p>
<p><strong>अगलेगा द्वीप कहां स्थित है</strong><br />अगलेगा द्वीप मॉरीशस के मुख्य द्वीप से लगभग 1100 किमी दूर स्थित है। यह दो द्वीपों का समूह है। इसका उत्तरी द्वीप 12.5 किमी लंबा और 1.5 किमी चौड़ा है। वहीं, दक्षिणी द्वीप 7 किमी लंबा और 4.5 किमी चौड़ा है। अगलेगा में जो एयर स्ट्रिप बनी है, वो उत्तरी द्वीप पर स्थित है। यह द्वीप 6400 एकड़ में फैला है। अगलेगा द्वीप पर लगभग 300 लोग रहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और नारियल की खेती करना है। अगलेगा द्वीप पर भारतीय नौसेना की मौजूदगी से हिंद महासागर के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकाने जद में आ जाएंगे। यह द्वीप वैश्विक शिपिंग रूट के बीच में स्थित है। यहां से दुनियाभर के कुल समुद्री व्यापार का 35 फीसदी हिस्सा गुजरता है। अगलेगा से भारत अपने दक्षिणी समुद्री किनारे की अच्छे से निगरानी भी कर सकता है। चीन भी हिंद महासागर में तेजी से उपस्थिति बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत अगलेगा द्वीप के जरिए हिंद महासागर में चीन की हरकतों पर निगाह रख सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 10:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूरोप में एक और जंग की आहट!</title>
                                    <description><![CDATA[नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि हमने पश्चिमी बाल्कन के लिए 700 और सैनिक तैनात करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त रिजर्व बटालियन को हाई अलर्ट पर रखेंगे ताकि उन्हें तत्काल तैनात किया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/another-war-in-europe/article-47372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/z-19.png" alt=""></a><br /><p>कोसोवो। यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप में एक और विवाद तेज होता जा रहा है। कोसोवो में सर्बिया के प्रदर्शनकारियों के हमले में नाटो के 30 शांतिरक्षक सैनिक घायल हो गए हैं। अब नाटो ने फैसला किया है कि वह 700 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने जा रहा है। अभी नाटो के 3800 शांतिरक्षक सैनिक कोसोवा में तैनात हैं। नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि हमने पश्चिमी बाल्कन के लिए 700 और सैनिक तैनात करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त रिजर्व बटालियन को हाई अलर्ट पर रखेंगे ताकि उन्हें तत्काल तैनात किया जा सके। इस बीच सर्बिया ने अपनी सेना को सर्वोच्च अलर्ट पर कर दिया है। एक बटालियन में आमतौर पर 300 से लेकर 1000 सैनिक होते हैं। नाटो के कमांडर एडमिरल स्टुअर्ट मुन्स्च ने कहा कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती एक सही फैसला है ताकि सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। नाटो ने कहा है कि हंगरी और इटली के 30 शांतिरक्षक सैनिक घायल हो गए हैं। इन सैनिकों को फैक्चर हुआ है और आगजनी की वजह से वे बुरी तरह से घायल गए हैं। कोसोवो में साल 1998 से ही विवाद चल रहा है जब जातीय अल्बानी विद्रोहियों ने सर्बिया के शासन के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। इस विद्रोह के खिलाफ सर्बिया ने बहुत क्रूर अभियान चलाया। इस हिंसा में 13 हजार लोग मारे गए जिसमें ज्यादातर लोग अल्बानिया के थे। इसके बाद नाटो की सेना ने साल 1999 में हस्तक्षेप किया और सर्बिया को कोसोवो के इलाके से पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। </p>
<p>इसके बाद वहां पर शांतिरक्षक सैनिकों की तैनाती की गई। सर्बिया ने कोसोवो को देश बनाए जाने को मान्यता देने से इंकार कर दिया है। कोसोवो में अल्बानिया के लोगों की बहुलता है लेकिन देश के उत्तरी इलाके में सर्बिया की सीमा के पास बड़ी तादाद में सर्बिया के मूल के लोग भी रहते हैं।</p>
<p>ताजा विवाद उस समय शुरू हुआ जब अल्बानिया मूल के अधिकारी चुनाव में चुने गए जिसका सर्बिया के लोगों ने पूरी तरह से बायकॉट किया था। ये अधिकारी जब म्यूनिंशिपल बिल्डिंग में घुसे तब सर्बिया के लोगों ने उसका विरोध किया। इसके बाद कोसोवो की पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे ताकि भीड़ को तितर बितर किया जा सके। इसके जवाब में अब सर्बिया ने अपनी सेना को सर्वोच्च अलर्ट पर कर दिया है। यही नहीं सर्बिया ने भारी तादाद में नए सैनिकों को कोसोवो की सीमा पर भेजा है। सर्बिया को चीन और रूस का साथ मिल रहा है। चीन ने कई घातक हथियार सर्बिया को दिए हैं। यूक्रेन युद्ध में भी सर्बिया रूस के साथ खड़ा दिख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 10:43:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सूडान में 72 घंटों के संघर्ष विराम पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को सूडानी सेना के कमांडर अब्देल फतह अल बुरहान और आरएसएफ के कमांडर मोहम्मद हमदान डागालो के साथ बातचीत की और दोनों पक्षों से 23 अप्रैल को मुसलमानों के पर्व ईद अल-फितर तक राष्ट्रव्यापी संघर्ष विराम करने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/72-hour-ceasefire-agreed-in-sudan/article-43428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/manoj-(630-×-400-px)-(630-×-400-px)-(17).jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। सूडान के अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) ने कहा है कि वह मानवीय आधार पर 72 घंटे के संघर्षविराम के लिए सहमत हुआ है, जो कि शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे (04:00 जीएमटी) से शुरू हुआ। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को सूडानी सेना के कमांडर अब्देल फतह अल बुरहान और आरएसएफ के कमांडर मोहम्मद हमदान डागालो के साथ बातचीत की और दोनों पक्षों से 23 अप्रैल को मुसलमानों के पर्व ईद अल-फितर तक राष्ट्रव्यापी संघर्ष विराम करने का आग्रह किया।</p>
<p>रायटर्स ने आरएसएफ के एक बयान के हवाले से कहा कि यह संघर्ष विराम ईद-उल-फितर के समय किया गया है, इससे नागरिकों के निकालने के लिए मानवीय गलियारों को खोलने और उन्हें अपने परिवारों से मिलने तथा बधाई देने का अवसर प्रदान किया गया है। सूडान की राजधानी खार्तूम और देश के अन्य इलाकों में पिछले शनिवार को सूडानी सेना और आरएसएफ के बीच झड़पें शुरू हुईं। सरकारी बलों ने आरएसएफ पर विद्रोह करने का आरोप लगाया और उनके ठिकानों पर हवाई हमला किया। बाद में, सूडानी सेना के प्रमुख अब्देल फतह बुरहान ने आरएसएफ को भंग करने का फरमान जारी कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Apr 2023 12:14:30 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया के स्वास्थ्य के लिए काम कर रहा है भारत: मांडविया</title>
                                    <description><![CDATA[इस अवसर पर मांडविया ने कहा कि यह वसुधैव कुटुम्बकम का भारत का दर्शन है जहां हम सभी के लिए प्रगति के बारे में सोचते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bharat-mandaviya-is-working-for-the-health-of-the-world/article-42027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/111.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में कर्तव्य पथ पर वॉकथॉन का नेतृत्व किया जिसका उद्देश्य गैर संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जागरूकता पैदा करना था। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यहां वॉकथॉन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीन पवार भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम का आयोजन हेल्थ फॉर ऑल की मुख्य विषय वस्तु के अंतर्गत किया गया था। वॉकथॉन का उद्देश्य न केवल गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) को दूर रखने के लिए बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव हेतु स्वस्थ आदतों के बारे में जागरूकता पैदा करना था। वॉकथॉन विजय चौक, कर्तव्य पथ से शुरू होकर इंडिया गेट से होते हुए निर्माण भवन पहुंचा। इसमें 350 से अधिक  प्रतिभागियों ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए पैदल यात्रा में भाग लिया। इन्होंने जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं, बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप को रोकने और नियंत्रित करने के लिए स्वस्थ और सक्रिय जीवन अपनाने का संकल्प लिया।</p>
<p>इस अवसर पर मांडविया ने कहा कि यह वसुधैव कुटुम्बकम का भारत का दर्शन है जहां हम सभी के लिए प्रगति के बारे में सोचते हैं। यह दर्शन कोविड संकट के दौरान देखा गया था, जब भारत ने बिना किसी व्यावसायिक लाभ के जरूरतमंद देशों को टीके और चिकित्सा की आपूर्ति की। भारत हर किसी की मदद करने में सबसे आगे रहा है और इसी भावना के साथ भारत अपने नागरिकों और दुनिया के स्वास्थ्य के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवल स्वस्थ नागरिक ही एक स्वस्थ समाज और बदले में एक विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार एनसीडी वर्तमान में देश में सभी मौतों के 63 प्रतिशत से अधिक के लिए जिम्मेदार है। इनमें तंबाकू और शराब के उपयोग, खराब आहार की आदत, अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि और वायु प्रदूषण शामिल हैं।</p>
<p>एनसीडी के विकास के लिए प्रमुख जोखिम कारण में एक शारीरिक निष्क्रियता है। राष्ट्रीय एनसीडी निगरानी सर्वेक्षण (एनएनएमएस) (2017-18) के अनुसार भी, 41.3 प्रतिशत भारतीय शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं। शारीरिक गतिविधि न केवल कार्डियोवैस्कुलर बीमारी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर इत्यादि सहित एनसीडी के जोखिम को कम करती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है और डिमेंशिया की शुरुआत में देरी करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Apr 2023 11:46:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमारा सम्मान करें और अपना नजरिया बदलें : राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसेकेदी</title>
                                    <description><![CDATA[हाथों से इशारा करते हुए त्सेसीकेदी ने कहा कि हमारा सम्मान करके हमें अलग तरह से देखें। हमें सच्चा साथी मानकर न कि हमेशा पितृसत्तात्मक नजर से देखें और तय करें कि हमारे लिए क्या जरूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/respect-us-and-change-your-attitude-president-felix-tshisekedi/article-39321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/a-141.png" alt=""></a><br /><p>किंशासा। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर दो देशों के नेताओं के बीच बहस होना आम नहीं है। लेकिन कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बहस हो गई। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसेकेदी ने एक प्रेस कॉनफ्रेंस के दौरान मैक्रों से कहा, हमारा सम्मान करें और जिस तरह से हमें देखते हैं वैसे न देखें। हमारे साथ पितृसत्तात्मक तरीके से व्यवहार न करें। फ्रैंकफ्रीक अब मौजूद नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर फ्रैंकफ्रीक से मतलब फ्रांस और बेल्जियम की अफ्रीका में पूर्व कॉलोनियों से होता है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की राजधानी किंशासा में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं के बीच तनावपूर्ण क्षण को देखा गया। दरअसल यूरोप में ब्रिटेन समेत कई देशों ने दुनिया के कई देशों को गुलाम बनाया था। अफ्रीका के कई देशों पर फ्रांस का राज था। राष्ट्रपति त्सेसेकेदी ने कहा कि फ्रांस और पश्चिमी देशों को अफ्रीका के प्रति अपना शाही रवैया छोड़ देना चाहिए। हाथों से इशारा करते हुए त्सेसीकेदी ने कहा कि हमारा सम्मान करके हमें अलग तरह से देखें। हमें सच्चा साथी मानकर न कि हमेशा पितृसत्तात्मक नजर से देखें और तय करें कि हमारे लिए क्या जरूरी है।</p>
<p><strong>समानता पर आधारित पॉलिसी होनी चाहिए</strong><br />राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसेकेदी ने कहा कि फ्रैंकफ्रीक अब अस्तित्व में नहीं है। हमें एक ऐसी पॉलिसी बनानी चाहिए जो समानता पर आधारित हो। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस से आग्रह किया कि देश के गोमा क्षेत्र में चल रहे हिंसक संघर्ष के लिए रवांडा पर प्रतिबंध लगाया जाए। यह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अफ्रीका के लिए नीति में बदलाव के बाद हुआ है। मैक्रों कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में किंशासा आर्थिक मंच में शामिल होने पहुंचे थे।</p>
<p><strong>मैक्रों ने दिया जवाब</strong><br />मैक्रों ने कहा कि फ्रांस अफ्रीका में अपने नियमित सैन्य ठिकानों को होस्ट करना बंद कर देगा और इसके बजाय एकेडमी की स्थापना की जाएगी। फेलिक्स त्सेसेकेदी के बयान पर भी राष्ट्रपति मैक्रों ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई पत्रकार कुछ लिखता या कहता है तो वह फ्रांस का बयान नहीं बन जाता। इसलिए दोनों चीजों को न मिलाएं। त्सेसेकेदी ने कहा कि मैंने अपनी बात फ्रांस के पूर्व विदेश मंत्री ले ड्रियन के बयान पर कही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Mar 2023 10:49:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मारबर्ग वायरस ने दुनिया को फिर डराया, घाना में पहले 2 मामलों की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[मारबर्ग वायरस का अभी तक कोई इलाज मौजूद नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि खूब पानी पीने और खास लक्षण दिखाई देने पर उसका इलाज करवाने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है। यह वायरस फलों के चमगादड़ों से लोगों में फैलता है और शरीर में बने घाव से रिस रहे पानी के जरिए दूसरे मनुष्यों को संक्रमित करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/marburg-virus-scares-the-world-again-first-2-cases-confirmed/article-15218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/fff.jpg" alt=""></a><br /><p>अक्करा। दुनिया अभी कोरोना, मंकीपॉक्स और इबोला के खतरों से ठीक से उबरी भी नहीं कि नए वायरस ने दस्तक दे दी है। अफ्रीकी देश घाना में इस वायरस के पहले 2 मामलों की पुष्टि हुई है। घाना ने कहा है कि उनके देश में घातक मारबर्ग वायरस के दो मरीज मिले हैं। मारबर्ग वायरस अत्याधिक संक्रामक बीमारी है। यह वायरस ही इबोला का कारण बनता है। इसमें कहा गया है कि दोनों मरीजों की हाल ही में दक्षिणी अशांति क्षेत्र के अस्पताल में मौत हो गई। इस बीच भारत में भी मंकीपॉक्स के दूसरे केस की पुष्टि हो गई है। दोनों ही मामले केरल में मिले हैं।</p>
<p><strong> दो संक्रमितों की मौत, 98 क्वारंटीन</strong><br />घाना के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि दोनों मरीजों के नमूने इस महीने की शुरूआत में सकारात्मक आए थे। अब उन नमूनों को दोबारा सेनेगल में बने एक लेबोरेटरी में जांचा गया है, जहां उनमें मारबर्ग वायरस मिलने की पुष्टि हुई है। घाना के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि 98 लोगों को संक्रमितों के संपर्क में आने के कारण क्वारंटीन किया गया है। हालांकि, उनमें से किसी में अभी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी हरकत में आ गया है।</p>
<p><br /><strong>दूसरी बार अफ्रीका में मिले मारबर्ग वायरस के मामले</strong><br />यह दूसरी बार है जब पश्चिम अफ्रीका में मारबर्ग वायरस के मामले की पुष्टि हुई है। पिछले साल गिनी में एक मामला मिला था। लेकिन, इस मामले की पुष्टि के पांच हफ्ते बाद ही सितंबर में गिनी की सरकार ने उस प्रकोप के खत्म होने का ऐलान कर दिया था। वहीं, डब्लूएचओ का कहना है कि अफ्रीका में अंगोला, कांगो केन्या, दक्षिण अफ्रीका और युगांडा इस वायरस के छिटपुट मामलों की पुष्टि हो चुकी है। मारबर्ग वायरस ने 2005 में अंगोला में 200 से अधिक लोगों की जान ले ली थी। जिसके बाद डब्लूएचओ ने इसे मारबर्ग वायरस का सबसे घातक प्रकोप करार दिया था। मारबर्ग का पहला प्रकोप 1967 में जर्मनी में हुआ था जहां सात लोगों की मौत हुई थी।</p>
<p><br /><strong>डब्लूएचओ ने क्या कहा</strong><br />डब्लूएचओ के अधिकारियों ने घाना सरकार को हर मुमकिन सहायता देने का वादा किया है। इतना ही नहीं, डब्लूएचओ ने मारबर्ग वायरस की पुष्टि होने के बाद घाना के त्वरित प्रतिक्रिया की तारीफ भी की है। डब्ल्यूएचओ के अफ्रीका डायरेक्टर डॉ. मात्शिदिसो मोएती ने कहा कि घाना ने काफी अच्छा काम किया क्योंकि तत्काल और निर्णायक कार्रवाई के बिना, मारबर्ग वायरस आसानी से कंट्रोल से बाहर हो सकता है।</p>
<p><br /><strong>मारबर्ग वायरस का इलाज क्या है</strong><br />मारबर्ग वायरस का अभी तक कोई इलाज मौजूद नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि खूब पानी पीने और खास लक्षण दिखाई देने पर उसका इलाज करवाने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है। यह वायरस फलों के चमगादड़ों से लोगों में फैलता है और शरीर में बने घाव से रिस रहे पानी के जरिए दूसरे मनुष्यों को संक्रमित करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 14:12:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में 2 दिनों तक जलते रहे हिंदुओं के घर, दुनिया ने साधी चुप्पी</title>
                                    <description><![CDATA[कट्टरपंथी जब घर को आग लगा रहे थे तब दिपाली (62) पास के एक अन्य घर में अपने बेटे के साथ बेड के नीचे छिपी हुई थीं। उन्होंने कहा कि वे जहां हम छिपे हुए थे वहां इसलिए नहीं पहुंच सके क्योंकि वह बंद था। इसके बाद उन्होंने हमारे घर के पास बने मंदिर पर हमला कर दिया और मूर्ति को तोड़ दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/houses-of-hindus-kept-burning-for-2-days-in-bangladesh---world-kept-silent/article-15216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/home-aag.jpg" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में एक बार फिर से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों के साथ अत्याचार की सारी हदें पार कर दी गईं। नरैल जिले में लोहागारा उपजिला में कट्टरपंथियों की भीड़ ने फेसबुक पर कथित रूप से पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ टिप्पणी करने पर हिंदुओं के 70 घरों और दुकानों को पहले जमकर लूटा और फिर उन्हें जला दिया। उन्मादियों की यह भीड़ यहीं पर नहीं रुकी और उसने एक मंदिर को भी तोड़फोड़ करके बर्बाद कर दिया। इनका आरोप था कि आकाश नाम के शख्स ने पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी की है जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। लोहागढ़ पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर नारन चंद्र पाल का कहना है कि इस घटना से पूरे इलाके में भारी तनाव है। इस इलाके में सक्रिय इस्कॉन समूह का कहना है कि कुल 200 लोगों को बुरी तरह से पीटा गया है। घरों को इस तरह से जलाया गया कि वे दो दिन तक जलते रहे। इस हिंसा की शिकार दिपाली रानी साहा कहती हैं कि वह उस क्षण को नहीं भूल सकती हैं जब शुक्रवार की रात को उन्होंने अपने ही घर को जलते हुए देखा। वह बताती हैं कि कट्टरपंथियों के एक गुट के उनका घर लूटने के बाद दूसरा गुट आया और उसने पाया कि दरवाजा खुला हुआ है। चूंकि वहां पर लूटने के लिए कुछ नहीं बचा था, उन्होंने हमारे घर को ही आग लगा दी।</p>
<p><br /><strong>संयुक्त राष्ट्र से मदद की गुहार</strong><br />कोलकाता में इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमन दास कहते हैं कि हिंदुओं के 70 घरों को जला दिया गया और दुनिया ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के हिंदू अपना धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे और न ही वहां से भागेंगे। वे पहले भी इस तरह के कट्टरपंथियों के हमले के आगे डटे रहे हैं। दास ने बताया कि जब यह हमला हुआ उस समय घटनास्थल पर पुलिस मौजूद थी लेकिन वह मूकदर्शक बनी रही। पुलिस पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पीएम मोदी और संयुक्त राष्ट्र से मदद की गुहार लगाई है।</p>
<p><strong>भीड़ ने पड़ोस के हिंदुओं के घरों पर हमले करना शुरू कर दिया</strong><br />कट्टरपंथी जब घर को आग लगा रहे थे तब दिपाली (62) पास के एक अन्य घर में अपने बेटे के साथ बेड के नीचे छिपी हुई थीं। उन्होंने कहा कि वे जहां हम छिपे हुए थे वहां इसलिए नहीं पहुंच सके क्योंकि वह बंद था। इसके बाद उन्होंने हमारे घर के पास बने मंदिर पर हमला कर दिया और मूर्ति को तोड़ दी। कट्टरपंथी जुमा की अजान के बाद आरोपी छात्र के घर पहुंचे और उसकी गिरफ्तारी की मांग करने लगे। आकाश घर में नहीं था। इसके बाद भीड़ ने पड़ोस के हिंदुओं के घरों पर हमले करना शुरू कर दिया। इन लोगों का पैगंबर पर फेसबुक पोस्ट से कोई लेना देना नहीं था। शाम को पुलिस ने आकाश के पिता अशोक साहा को हिरासत में ले लिया ताकि हालात को काबू में लाया जा सके। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक अभी तक पुलिस ने इन घरों को जलाने वाले किसी भी कट्टरपंथी को अरेस्ट नहीं किया है। इस हमले का शिकार दिपाली कहती हैं, केवल इसलिए कि छात्र हिंदू था और मैं भी हिंदू हूं, मेरे घर को जला दिया गया। मैं नहीं जानती हूं कि हिंसा का यह खतरा कब तक बना रहेगा और हमारा पीछा करता रहेगा। हमें कौन न्याय देगा? हमें कौन सुरक्षा देगा? अब मेरे शरीर पर बस यही एक साड़ी बची है, बाकी सब जल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 14:08:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>वर्ल्ड पॉपुलेशन डे: जिंदगी खूबसूरत है, लेकिन जब ये बोझ बन जाए तो!</title>
                                    <description><![CDATA[सोचने पर मजबूर है दुनियां दानिश, जिंदगी तेरा वजूद क्या, आबाद है देश वही जो बढ़ती आबादी का ख्याल रखे। जनसंख्या पर नियंत्रण या घटते हुए संसाधनों पर चिंता करने से क्या ये सवाल, ये समस्या हल हो जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-population-day-life-is-beautiful-but-when-it-becomes/article-14020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/world-population-new.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सोचने पर मजबूर है दुनियां दानिश, जिंदगी तेरा वजूद क्या, आबाद है देश वही जो बढ़ती आबादी का ख्याल रखे। जनसंख्या पर नियंत्रण या घटते हुए संसाधनों पर चिंता करने से क्या ये सवाल, ये समस्या हल हो जाएगी। समय-समय पर ये सवाल उठता रहा है, जिन्हें फिल्मों ने अपने तरीके से आम लोगों के सामने रखा। आज हम ऐसी ही कुछ फिल्मों का जिक्र करेंगे, जो परिवार  के माध्यम से देश को जागरूक करती हैं।</p>
<p><strong>दंगल:</strong> ये फिल्म इस सोच का खंडन करती है कि बेटे की चाहत में बेटियां पैदा करते जाओ क्योंकि बेटा न हुआ तो वंश, नाम खत्म हो जाएगा। बेटियां भी ये काम गर्व के साथ कर सकती हैं।</p>
<p><strong>परिवार:</strong> बढ़ते परिवार का बोझ जब बढ़ता जाता है तो इंसान टूट जाता है। सीमित परिवार ही सुखी परिवार होता है, उसे रोकने के लिए जो भी कदम उठाने पड़े उठाने चाहिए।</p>
<p><strong>पिया का घर:</strong> ये फिल्म भी छोटे घरों में बड़े परिवार की समस्या को उजागर करती है। अपनी इच्छाओं को मार के जीना भी कोई जीना है। परिवार छोटा तो देश का हर परिवार सुखी।</p>
<p><strong>जल: </strong> पानी की समस्या और पर्यावरण को बढ़ती हुई आबादी की दुविधा से जोड़ के दर्शाती है ।</p>
<p><strong>कड़वी हवा:</strong> आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच असंतुलन के दुष्प्रभाव ये फिल्म दिखाती है।</p>
<p><strong>कृष 3:</strong> ये फिल्म वायरस और घनी आबादी वाले देशों में होने वाले भयंकर दुष्परिणामों पर इसके पड़ने वाले सीधे असर को दिखाती है, जो हमने कोरोना काल में भी देखा कि घनी आबादी के बीच कोई भी महामारी कितनी आसानी से फैलती है और किस तरह पूरा देश श्मशान घाट बन जाता है। वर्ल्ड पॉपुलेशन डे इसलिए बनाया जाता है कि इसकी गंभीरता को लोग समझे, जागरूक हो और अपनी सेहत, भविष्य व देश की खुशहाली का ख्याल रखे।</p>
<p>ऐसी कुछ और भी हैं फिल्में ताकि लोग ये समझे के ‘बच्चे एक या दो ही अच्छे’, इसलिए कई फिल्में हेलमेट, छतरी, पोस्टर बॉयज और जन हित में जारी, जागरूक करती हैं, हर उम्र के आदमी-औरत को कि कंडोम खरीदना या उसका उपयोग करना गलत या शर्म की बात नहीं है बल्कि अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश के प्रति जिम्मेदारी है, जिसे उठाकर हर देशवासी देश के लिए, दुनिया के लिए, अपना योगदान करे तो ये दुनिया खूबसूरत और बहुत अच्छी बन सकती है, जहां हर जीवन, भुखमरी, बेरोजगारी, लाचारी और बेगारी से निजात पा सकता है। शुरुआत कहीं से भी हो, होगी तो ही बदलाव आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-population-day-life-is-beautiful-but-when-it-becomes/article-14020</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 15:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व ऊंट दिवस,ऊष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित </title>
                                    <description><![CDATA[बीकानेर। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, एनआरसीसी बीकानेर के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि ऊंट को यदि औषधि भण्डार, कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/world-camel-day-camel-exhibition-and-animal-health-camp-organized/article-12835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bikaner-new.jpg" alt=""></a><br /><p>बीकानेर। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, एनआरसीसी बीकानेर के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि ऊंट को यदि औषधि भण्डार, कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। डॉ. साहू बुधवार को विश्व ऊंट दिवस पर एनआरसीसी बीकानेर परिसर में आयोजित कार्यक्रम को कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधानों में ऊंटनी का दूध, मधुमेह, क्षय रोग, आॅटिज्म आदि में कारगर साबित हुआ है।</p>
<p>मुख्य अतिथि वेटरनरी विवि बीकानेर के कुलपति प्रो. एसके गर्ग ने कहा कि ऊंट पालकों को ऊंटनी के अधिक से अधिक दूध का उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए।इसका सकारात्मक असर ऊंटों की संख्या पर भी होगा। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक भानुप्रताप ढाका ने ऊष्ट्र डेयरी या पर्यटनीय सजावटी ऊंट जैसे मॉडल तैयार करने की बात कही। केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीकानेर के निदेशक डॉ. दिलीप कुमार समादिया ने कहा कि बागवानी खेती से पशुपालन व्यवसाय को अधिकाधिक लाभ मिल सकता है। राजुवास के अधिष्ठाता, सीवीएएसए डॉ. आरके सिंह व किसान प्रतिनिधि के रूप में श्रीगोपाल उपाध्याय ने भी विचार रखे।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>ऊष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित</strong></span><br />विश्व ऊंट दिवस के उपलक्ष्य पर एनआरसीसी द्वारा ऊष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित सर्वश्रेष्ठ नर ऊंट प्रतियोगिता में इमरान खान ने प्रथम, रफीक खान ने द्वितीय, नैनूराम ने तृतीय तथा मुरली गहलोत व महमूद खान ने सांत्वना पुरस्कार अर्जित किया। सजावटी ऊंट प्रतियोगिता में संजय खान ने प्रथम, इमरान ने द्वितीय, महमूद ने तृतीय तथा सांत्वना पुरस्कार नैनूराम प्राप्त किया। डॉ. वेद प्रकाश ने आभार जताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 13:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक ऐसा मैच जहां चौके-छक्कों की बारिश, 50 ओवर में बनाए 498 रन</title>
                                    <description><![CDATA[एम्सटेलवीन। विश्व चैेंपियन  इंग्लैंड ने शुक्रवार को यहां नीदरलैंड को खेले गए वनडे में 232 रन के विशाल अंतर से पराजित कर कई विश्व रिकॉर्ड बना डाले।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/a-match-where-fours-and-sixes-rained-scored-498-runs/article-12520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/butler.jpg" alt=""></a><br /><p>एम्सटेलवीन। विश्व चैेंपियन  इंग्लैंड ने शुक्रवार को यहां नीदरलैंड को खेले गए वनडे में 232 रन के विशाल अंतर से पराजित कर कई विश्व रिकॉर्ड बना डाले।  इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी करते हुए एकदिवसीय क्रिकेट के सबसे बड़े टीम स्कोर का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 498 रन बनाए।जवाब में नीदरलैंड की टीम 49.4 ओवर में 266 रन ही बना सकी।</p>
<p><br />नीदरलैंड ने टॉस जीत पहले इंग्लैंड को बल्लेबाजी  का निमंत्रण दिया।  इंग्लैंड ने एम्सटेलवीन में जॉस बटलर (162), फिलिप सॉल्ट (122) और लियम लिविंग्स्टोन (66) की बदौलत 50 ओवर में 498 रनर बना  क्रिकेट में नया कीर्तिमान रचा। इससे पहले इंग्लैंड ने ही 2018 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नॉटिंघम में 481 रन बनाकर उस समय का सबसे बड़ा एकदिवसीय टीम स्कोर दर्ज किया था। शेन स्नेटर सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय को एक रन के स्कोर पर आउट करने में सफल भी रहे, लेकिन इसके बाद नीदरलैंड के गेंदबाजों की एक न चली। रॉय के साथी सॉल्ट ने 93 गेंदों पर 14 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 122 रन बनाए, जबकि डेविड मलान ने 109 गेंदें खेलकर 125 रन जोड़े। अपनी पारी में मलान ने नौ चौके और तीन छक्के लगाए।</p>
<p><br /><strong>बटलर ने 70 गेंदों पर खेली 162 रनों की पारी</strong><br />मैच के 30वें ओवर में 223 रन के टीम स्कोर पर सॉल्ट आउट हुए, और चौथे नंबर पर आए जॉस बटलर ने पारी की रफ्तार को बदल कर रख दिया। इंग्लैंड ने अंतिम 20.2 ओवर में 275 रन जोड़े, जिसमें बटलर ने 162 रन का विशाल योगदान दिया। बटलर ने 70 गेंदों की इस विस्फोटक पारी में 14 छक्के और सात चौके जड़े।</p>
<p><br /><strong>इंग्लैंड पारी में लगे रिकॉर्ड 26 छक्के</strong><br />इस मैच में 26 छक्कों की बारिश के साथ इंग्लैंड ने एक मैच में सर्वाधिक छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। इसके अलावा जॉस बटलर ने भी एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे तेज 150 रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर अपना नाम लिखवा लिया। उन्होंने 65 गेंदों में 150 रन पूरे किए, जबकि ए बी डिविलियर्स यह कारनामा 64 गेंदों में कर चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jun 2022 12:33:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दो-तिहाई महिलाओं सहित 7,700 लाख व्यस्क पढ़ना-लिखना नहीं जानते</title>
                                    <description><![CDATA[यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे एजोले ने 7वें अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंड में प्रौढ़ शिक्षा पर कहा कि विश्व में 7,700 लाख लोग अशिक्षित हैं जिनमें दो तिहाई महिलाएं हैं। एजोले देर रात में कहा कि मैं उन सभी के बारे में भी सोच रही हूं जिन्हें बचपन में शिक्षा का अधिकार नहीं मिला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/7700-million-adults-in-the-world-are-illiterate-on-adult/article-12338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/qq5.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p>मॉस्को। यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे एजोले ने 7वें अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंड में प्रौढ़ शिक्षा पर कहा कि विश्व में 7,700 लाख लोग अशिक्षित हैं जिनमें दो तिहाई महिलाएं हैं। एजोले बुधवार देर रात में कहा कि मैं उन सभी के बारे में भी सोच रही हूं जिन्हें बचपन में शिक्षा का अधिकार नहीं मिला। विश्व में 7,700 लाख वयस्क जो पढऩा या लिखना नहीं जानते हैं उनमें दो तिहाई महिलाएं हैं। महानिदेशक ने निरक्षर वयस्कों में शिक्षा का प्रसार करने के प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान किया। प्रौढ़ शिक्षा पर कॉन्फ्रेंस का आयोजन मोरक्को के माराकेश में बुधवार से शुक्रवार तक किया गया है।<br /><br /> <strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><br style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" /></span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 14:58:38 +0530</pubDate>
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