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                            <item>
                <title>28 फीसदी आवासीय व 36 फीसदी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों ने जमा कराया यूडी टैक्स, फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की ओर से जहां वर्ष 2007 के सर्वे के आधार पर ही टैक्स वसूल किया जा रहा था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/28--residential-and-36--commercial-establishments-deposited-ud-tax/article-110423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) जमा करवाने में पहले जहां बहुत कम लोग रूचि लेते थे। वहीं अब इसमें पहले की तुलना में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन अभी भी टैक्स जमा करवाने वालों की संख्या एक चौथाई से तीन चौथाई ही है। नगर निगम कोटा द्वारा आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से वर्ष 2007 में नगरीय विकास कर वसूल करना शुरु किया था। पहले यह काम नगर निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से किया जा रहा था। लेकिन विभाग द्वारा लक्ष्य से काफी कम टैक्स जमा किया जा रहा था। उसे देखते हुए नगर निगम अधिकारियों द्वारा टैक्स वसूली का काम निजी फर्म को दे दिया गया। पहले कोटा दक्षिण ने और उसके बाद कोटा उत्तर में निजी फर्म ने यह काम शुरु किया। हालांकि नगर निगम की बोर्ड बैठकों में निजी फर्म से यूडी टैक्स वसूल करने का विरोध भी जताया गया। लेकिन उसके बाद भी सरकार ने बोर्ड के निर्णय को न मानते हुए निजी फर्म से ही टैक्स वसूल करने का आदेश जारी किया था। पिछले काफी से यूडी टैक्स निजी फर्म द्वारा ही वसूल किया जा रहा है। हालांकि आवासीय व व्यवसायिक दोनों श्रेणियों में टैक्स का दायरा अलग -अलग है। जो सम्पतियां इस दायरे में आ रही है। उनसे ही यह टैक्स वसूल किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कुल सर्वे में से 38 फीसदी सम्पति आवासीय और 23 फीसदी व्यवसायिक सम्पतियां टैक्स के दायरे में आई है। उनमें से आवासीय में 28 फीसदी व व्यवसायिक में 36 फीसदी ने टैक्स जमा कराया है। </p>
<p><strong>फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे</strong><br />नगर निगम की ओर से जहां वर्ष 2007 के सर्वे के आधार पर ही टैक्स वसूल किया जा रहा था। लेकिन निजी फर्म को यह काम मिलने के बाद फर्म ने नए सिरे से सभी सम्पतियों का सर्वे किया। आवासीय व व्यवसायिक समेत अन्य श्रेणियों में आने वाले सम्पतियों में यदि निर्माण होने से बहलाव हुआ है तो उसका टैक्स बढ़ाया गया है। यदि पूर्व में गलत टैक्स लिया जा रहा था तो उसे सही भी किया गया है। </p>
<p><strong>शहर में 4062 सम्पतियों का सर्वे</strong><br />निजी फर्म द्वारा शहर में किए गए नए सिरे से सर्वे में कुल 4062 सम्पतियों का सर्वे किया गया है। फर्म के प्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में 1635 और कोटा दक्षिण निगम में 2427 यानि कुल 4062 सम्पतियों का अभी तक सर्वे किया जा चुका है। </p>
<p><strong>38 फीसदी आवासीय व 23 फीसदी व्यवसायिक सम्पतियां</strong><br />निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में किए गए सर्वे में से करीब 38 फीसदी आवासीय व 23 फीसदी व्यवसायिक प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आए हैं। शहर में हुए कुल 4062 सर्वे में दोनों निगम क्षेत्र में कुल 1554 आवासीय जिनमें 517 कोटा उत्तर में और 1037 कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में है। इसी तरह से कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में 441 और कोटा दक्षिण क्षेत्र में 506 व्यवसायिक प्रतिष्ठान टैक्स के दायरे में  आए हैं। </p>
<p><strong>यह है आवासीय व व्यवसायिक टैक्स की स्थिति</strong><br />निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों निगम क्षेत्रों में आवासीय प्रतिष्ठानों से कुल 4 करोड़ 31 लाख 71 हजार 951 रुपए और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से 5 करोड़ 59 लाख 30 हजार 705 रुपए टैक्स जमा किया गया।  कुल जमा टैक्स में से आवासीय भवनों से जहां 28 फीसदी टैक्स वसूल किया गया वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का प्रतिशत 36 रहा। </p>
<p><strong>15.60 करोड़ से अधिक जमा हुआ टैक्स</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बोर्ड की बजट बैठकों में वित्त वर्ष का यूडी टैक्स वसूली का लक्ष्य 10-10 करोड़ यानि कुल 20 करोड़ रखा गया था। जिसमें से निजी फर्म द्वारा कुल 15 करोड़ 60 लाख 58 हजार 973 रुपए टैक्स वसूल किया गया। जिसमें से कोटा उत्तर में 5 करोड़ 79 लाख 14 हजार 694 रुपए है। वहीं कोटा दक्षिण में 9 करोड़ 81 लाख 44 हजार 279 रुपए है। </p>
<p><strong>ये सम्पतियां भी हैं टैक्स के दायरे मे</strong><br />आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा शहर में कई ऐसी सम्पतियां भी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती है। जिनमें इंस्टीट्यूशनल, इंडस्ट्रीयल व अन्य सम्पतियां भी है।  कोटा उत्तर में 232 व दक्षिण में 192 इंस्टीट्यूशनल, कोटा उत्तर में 32 व दक्षिण में 29 इंडस्ट्रीयल  और कोटा उत्तर में 411 व दक्षिण में 663 अन्य सम्पतियां हैं जो टैक्स के दारे में आती है। उनसे भी करोड़ों रुपए टैक्स वसूल किया गया है। </p>
<p><strong>पहले से काफी सुधार हुआ है</strong><br />इधर निजी फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि यूडी टैक्स की वसूली में पहले से काफी सुधार हुआ है। पहले टैक्स का लक्ष्य कम था वह भी वसूल नहीं हो पा रहा था या बहुत कम लोग जमा करवाते थे। जिसके लिए निगम को सख्ती करनी पड़ती थी। सीजिंग तक की कार्रवाई करने पर टैक्स बहुत कम जमा होता था। जबकि इस बार बिना सख्ती किए ही अच्छा टैक्स जमा हुआ है।  हालांकि कुल सम्पतियों के सर्वे में आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या टैक्स के दायरे में आने वालों की कम है। उनमें से भी अधिकतर लोगों से टैक्स वसूल किया गया है। </p>
<p>                             <strong>     नगर निगम उत्तर         नगर निगम  दक्षिण</strong><br />कुल सम्पति                           1635                        2428<br />आवासीय सम्पति                     517                        1037<br />संस्थानिक सम्पति                   232                          192<br />औद्योगिक सम्पति                     32                             29<br />अन्य सम्पति                          411                           663<br />व्यवसायिक सम्पति                 443                           506 <br />कुल जमा टैक्स              57914694                  98144279<br />आवासीय टैक्स              16766224                   26405721<br />व्यवसायिक टैक्स           19037725                   36892980 </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 15:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नजूल संपत्तियों को डीएलसी दर से बेचने से मिल सकते हैं 6 हजार करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य के विभिन्न जिलों में 3000 से अधिक बेशकीमती नजूल संपत्तियां है, अगर इन संपत्तियों को डीएलसी दर पर भी बेचा जाए तो अनुमान के तौर पर सरकारी खजाने में करीब छह हजार करोड़ की आय हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-6-thousand-crore-can-be-obtained-by-selling-properties/article-12197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/7-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य के विभिन्न जिलों में 3000 से अधिक बेशकीमती नजूल संपत्तियां है, अगर इन संपत्तियों को डीएलसी दर पर भी बेचा जाए तो अनुमान के तौर पर सरकारी खजाने में करीब छह हजार करोड़ की आय हो सकती है। इनमें अधिकतर के किसी न किसी हिस्से पर कब्जा है, लेकिन 496 ऐसी है, जो खाली पड़ी हुई है अर्थात बेकार है। इन संपत्तियों का ना तो सरकार बेचान कर पा रही है और न ही सालों से इनके किराए की वसूली हो रही है। इन संपत्तियों का बेचान कर सरकारी खजाने को भरने की सरकार ने कई बार योजना तैयार की, लेकिन धरातल पर नहीं आ सकी। इन कब्जेशुदा संपत्तियों के निस्तारण को लेकर सरकार ने एक मंत्रिमण्डलीय कमेटी भी बना रखी है।</p>
<p><strong>देखरेख का पीडब्ल्यूडी को जिम्मा</strong><br />राज्य के विभिन्न जिलों में पड़ी नजूल संपत्तियों का वर्तमान में उपयोग नहीं हो रहा है एवं रिक्त है। जिला कलेक्टरों की ओर से उपलब्ध करवाई गई सूचना के अनुसार 496 जिलों में स्थित रिक्त नजूल संपत्तियां उपलब्ध है। राज्य में अवस्थित समस्त नजूल संपत्तियों की देखरेख सार्वजनिक निर्माण विभाग के स्तर की जाती है। ऐसी रिक्त नजूल संपत्तियां जिनका उपयोग राजकीय एवं सार्वजनिक हित में नहीं हो सकता, ऐसी नजूल संपत्तियों को खुली नीलामी से विक्रय करने का प्रावधान है, जिला कलेक्टरों से प्रस्ताव प्राप्त होने पर राज्य सरकार की ओर से आवश्यक निर्णय लिया जाकर कार्रवाई की जाती है।</p>
<p><strong>एक करोड़ तक के कलेक्टरों को अधिकार</strong><br />नजूल संपत्तियों के निस्तारण को लेकर सरकार ने योजना तैयार की, जिसके तहत जिलों में इन संपत्तियों के बेचान के लिए कलेक्टरों को अधिकार दिए गए अर्थात कलेक्टर एक करोड़ तक कीमत की संपत्ति का अपने स्तर पर ही डिस्पॉजल कर सकता है। इससे अधिक राशि के प्रकरणों को सरकार में भेजना होगा। इसके बाद भी योजना धरातल पर नहीं आ सकी।</p>
<p><strong>भविष्य की क्या योजना</strong><br />सरकार नजूल संपत्तियों पर जहां कब्जा है, उससे 25 प्रतिशत राशि लेकर उसे दे दिया जाए ताकि उस संपत्ति से सरकार को कुछ हो आय हो सकेगी। इसे लेकर विभागीय स्तर पर मंथन हो रहा है। उच्चस्तर पर पत्रावली भी भेजी गई है। बजट में भी इन संपत्तियों के निस्तारण को लेकर योजना घोषित की गई है।</p>
<p><strong>क्या होती है नजूल संपत्तियां</strong><br />देश में 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजी हुकुमत का विरोध करने वाले विद्रोहियों को जेल में डाल दिया गया और उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया। इसके बाद यह सिलसिला जारी रहा। ऐसे में 1857 से लेकर देश की आजादी से पहले तक इस तरह जो भी संपत्तियां जब्त की गई, उन्हें नजूल संपत्तियां कहा जाता है।</p>
<p><strong>प्रदेशभर में बेकार पड़ी नजूल संपत्तियों की जिलेवार स्थिति</strong><br /><strong>जयपुर             जयपुर ग्रामीण    31</strong><br />    जयपुर              शहर            10<br />    दौसा    12<br />    अलवर    68<br />    सीकर    00<br />    झुंझुनूं    02<br />अजमेर    अजमेर    00<br /><br />    टोंक    04<br />    नागौर    17<br />कोटा    कोटा    11<br />    बारां    13<br />    झालावाड़    11<br />    बूंदी    04<br /><br />    राजसमंद    02<br />    चित्तौडगढ़    03<br />    प्रतापगढ़    18<br />    डूंगरपुर    02<br />    बांसवाड़ा    00<br />भरतपुर    भरतपुर    85<br />    करौली    135<br />    सवाईमाधोपुर    29<br />    धौलपुर    06<br />बीकानेर    बीकानेर    01<br />    हनुमानगढ़    00<br />    गंगानगर    01<br />    चूरू    02<br />जोधपुर    जोधपुर    13<br />    पाली    06<br />    जैसलमेर    03<br />    जालोर    00<br />    बाड़मेर    00<br />    सिरोही    01<br />    <br />    कुल    496</p>
<p><strong>नजूल संपत्तियों को लेकर बजट में जो घोषणा की गई है, उस पर प्रक्रिया चल रही है। जिलों में बेकार संपत्तियों का निस्तारण कलेक्टरों के माध्यम से किया जाता है। कुछ छोटी-छोटी संपत्ति होती है, जिनका निस्तारण नहीं हो पाता।</strong><br /><strong>-जितेन्द्र कुमार उपाध्याय, शासन सचिव, जीएडी</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 11:11:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सदन में सरकार का जवाब: जम्मू कश्मीर में 610 कश्मीरी प्रवासियों की संपत्तियां वापस मिली, बाकी की प्रक्रिया में</title>
                                    <description><![CDATA[कश्मीरी प्रवासियों की वापसी के लिए एक पोर्टल बनाया ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-s-reply-in-the-house--properties-of-610-kashmiri-migrants-got-back-in-jammu-and-kashmir--rest-in-process/article-7506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/parliament-new-3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर में 610 कश्मीरी प्रवासियों की परिसंपत्तियां वापस कर दी गयी है और बाकी की प्रक्रिया चल रही है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि राज्य में कश्मीरी प्रवासियों की वापसी के लिए एक पोर्टल बनाया गया है। इस पर कोई कश्मीरी प्रवासी अपनी छीनी गयी संपदा का ब्यौरा दर्ज करा सकता है। इस पर दर्ज मामलों की विस्तृत जांच की जाती है और परिसंपत्तियां वापस कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि अभी तक 610 कश्मीरी प्रवासियों की संपदायें वापस की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीरी प्रवासियों की परिसंपतियों का संरक्षक जिला मजिस्ट्रेट होता है और ये संपदा उसी की अधीन है।<br /><br />एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बुनियादी ढ़ांचे का तेजी से विकास किया जा रहा। वर्ष 2023 तक 500 से अधिक आबादी वाली सभी बस्तियों को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कें बन जाने के कारण दूर दराज के इलाकों में जाना सुगम हुआ है। इसके अलावा यात्रा समय में कटौती हुई है। राय ने कहा कि राज्य में 51 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलें हैं जिनसे 4.50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का ब्यौरा देते हुए कहा कि इन्हें नियत समय सीमा के भीतर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार के अवसर सृजित किये जा रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में रिक्त पदों को भरा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 18:18:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवासन मण्डल : सम्पत्तियां खरीदने की अब भी होड़, चार गुना अधिक दर पर बिके भूखंड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर। कोरोनाकाल की मंदी के दौर से अभी लोग उभर नहीं पाए है, लेकिन राजस्थान आवासन मंडल की जमीनों की खरीद के लिए लोगों में अब भी क्रेज है।</p>
<p><br />प्रताप नगर जयपुर में निर्धारित दर से चार गुना अधिक दर पर खरीदारों ने भूखंड लिए हैं। गत एक माह में 805 सम्पत्तियां के बिकने से मंडल को 80 करोड़ 15 लाख रु. से अधिक का राजस्व मिला। वहीं आगामी बुधवार से जोधपुर की कुड़ी भगतासनी योजना में एक हजार आवास 50 प्रतिशत की छूट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। यह आवास 156 किश्तों पर आवंटित होंगे और खरीदार 10</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/--housing-board--still-competing-to-buy-properties--plots-sold-at-four-times-higher-rate/article-5951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rhb.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोरोनाकाल की मंदी के दौर से अभी लोग उभर नहीं पाए है, लेकिन राजस्थान आवासन मंडल की जमीनों की खरीद के लिए लोगों में अब भी क्रेज है।</p>
<p><br />प्रताप नगर जयपुर में निर्धारित दर से चार गुना अधिक दर पर खरीदारों ने भूखंड लिए हैं। गत एक माह में 805 सम्पत्तियां के बिकने से मंडल को 80 करोड़ 15 लाख रु. से अधिक का राजस्व मिला। वहीं आगामी बुधवार से जोधपुर की कुड़ी भगतासनी योजना में एक हजार आवास 50 प्रतिशत की छूट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। यह आवास 156 किश्तों पर आवंटित होंगे और खरीदार 10 प्रतिशत राशि जमा करवाकर अपने घर का सपना पूरा कर सकेगा।</p>
<p><br />आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि मण्डल की रियल स्टेट मार्केट में चमक बरकरार है। गत एक माह में मण्डल की 805 सम्पत्तियां बिकी। इसमें मण्डल की 26 प्रीमियम सम्पत्तियां ई आॅक्शन के माध्यम से बिकी, जिससे मण्डल को 62 करोड़ 96 लाख रु. का राजस्व मिला। बुधवार नीलामी उत्सव ई बिड सबमिशन योजना में गत एक माह में 779 सम्पत्तियां बिकी, जिससे 17 करोड़ 19 लाख रु. मिले।</p>
<p><br />अरोड़ा ने बताया कि जयपुर वृत्त प्रथम, द्वितीय और तृतीय में 196 सम्पत्तियों से 21.77 करोड़ रुपए, जोधपुर वृत्त प्रथम और द्वितीय में 110 सम्पत्तियों से 14.24 करोड़ रुपए, कोटा वृत्त में 28 सम्पत्तियां से 4.47 करोड़ रुपए, बीकानेर वृत्त में 331 सम्पत्तियों से 21.38 करोड रुपए, उदयपुर वृत्त में 120 सम्पत्तियों से 14.33 करोड रुपए और अलवर वृत्त में 20 सम्पत्तियों के बिकने से मण्डल को 3.97 करोड़ रुपए का राजस्व मिला।</p>
<p><br /><strong>जयपुर के 3 प्रीमियम सम्पत्तियों के ऑक्शन से मिला 37 करोड का राजस्व</strong><br />आयुक्त ने बताया कि मण्डल की इंदिरा गांधी नगर और प्रताप नगर योजना में स्थित 3 बडेÞ व्यावसायिक भूखंड 37 करोड़ में बिके, जिनमें प्रताप नगर में 2 भूखण्ड जो कि पेट्रोल पम्प के लिए आरक्षित थे और जिनका न्यूनतम बोली मूल्य 42 हजार और 44 हजार रुपए था। रिलायंस और इण्डियन ऑयल जैसी कम्पनियों ने इनको चार गुना कीमत में खरीदा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 13:12:32 +0530</pubDate>
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                <title>अब पेंडोरा पेपर्स</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8/article-1501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/panama-pepars.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><strong>पनामा पेपर्स लीक</strong></span> के बाद अब पेंडोरा पेपर्स लीक ने पूरी दुनिया में एक बार फिर तहलका मचा दिया है। इन पेपर्स में दुनियाभर के कई नेताओं और अरबपतियों की सम्पत्तियों और गुप्त सौदों का खुलासा हुआ है। पेंडोरा पेपर्स लीक, विश्व के खोजी पत्रकार समुदाय इंटरनेशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के लिए अब तक का सबसे बड़ा लीक है। इनमें विश्व नेताओं में जॉर्डन के बादशाह अब्दुल्ला द्वितीय, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी, येकप्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिस और केन्या के राष्ट्रपति उहुरु केन्याटा आदि के नाम शामिल हैं, जिन्होंने विदेशों में सम्पत्ति छिपा रखी हैं। इन पेपर्स में भारत के दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी से लेकर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का भी नाम है। दस्तावेजों में नीरा राडिया, फिल्म अभिनेता जैकी श्राफ, बायकान की किरण मजूमदार और नीरव मोदी की बहन का भी नाम शामिल है। अनिल अंबानी ने तो भारत में अपने आपको दिवालिया घोषित कर रखा है, लेकिन विदेशों में सम्पत्ति छिपा रखी, लेकिन ये अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं। पेपर्स लीक में यह भी बात सामने आई है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें लॉन डिफाल्टर्स हैं जिन्होंने अपने को दिवालिया घोषित कर रखा है। इनमें से कई को तो गिरफ्तार किया गया और इन्होंने विदेशों में अरबों की सम्पत्ति छिपा रखी है। दस्तावेजों में बताया गया है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और उनकी पत्नी ने लंदन में अपना ऑफिस खरीदते वक्त स्टैंप ड्यूटी नहीं दी और तीन लाख 12 हजार पाउंड बचाए। ऐसे ही पेपर्स में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी और कई मंत्रियों व रिश्तेदारों के नाम शामिल हैं। बताया गया है कि इन लोगों ने गुप्त रूप से आफशोर कंपनियां खरीदीं। पूरे पेपर्स लीक से पता चलता है कि दुनिया में चारों ओर लूट मची है और कैसे प्रभावशाली लोगों ने अपनी कमाई विदेशों में छिपा रखी है। भारत में केन्द्र सरकार ने पंडोर पेपर्स से जुड़े मामलों की जांच के निर्देश दे दिए हैं। हालांकि जांच काफी जटिल होगी। फिर भी देखना है कि भारत को जांच में कितनी सफलता मिलती है?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Oct 2021 16:13:23 +0530</pubDate>
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