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                <title>hearing - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>वकील बन कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची ममता: चुनाव बाद हुई हिंसा मामले में करेंगी पैरवी, राज्य में कथित अशांति पर जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में खुद पैरवी करने अधिवक्ता की पोशाक में कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। कोर्ट 2026 विधानसभा चुनावों के बाद हुई तोड़फोड़ और हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमलों के खिलाफ ममता का यह कड़ा रुख चर्चा में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-reached-calcutta-high-court-as-a-lawyer-and-will/article-153800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mamata.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा के संबंध में अपनी पार्टी की ओर से दायर एक मामले की व्यक्तिगत रूप से पैरवी करने के लिए गुरुवार सुबह अधिवक्ता की पोशाक में कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। कलकत्ता उच्च न्यायालय 2026 के पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद तोड़फोड़ और हिंसा की कथित घटनाओं से संबंधित जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करने के लिए तैयार है।</p>
<p>न्यायालय में सुनवाई के लिए एक साथ सूचीबद्ध की गई याचिकाओं में राज्य के कई हिस्सों में कथित अशांति पर चिंता जताई गई है। इनमें से एक याचिका वामपंथी नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कोलकाता में न्यू मार्केट के पास बुलडोजर से किये गये कथित विध्वंस अभियान पर सवाल उठाया है।</p>
<p>एक अलग याचिका तृणमूल कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परिणामों के बाद कई जिलों में तृणमूल कार्यकर्ताओं और पार्टी के कार्यालयों को निशाना बनाया गया। दोनों मामलों को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष संयुक्त सुनवाई के लिए जोड़ दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय पार्टी प्रतिनिधियों के साथ अदालत में मौजूद थे। रिपोर्ट मिलने के समय तक न्यायालय की कार्यवाही जारी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:33:47 +0530</pubDate>
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                <title>ममता बनर्जी बनीं वकील: दीं SIR पर दलीलें; चुनाव आयोग को बताया व्हाट्सएप आयोग, SC ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकार छीने जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-banerjee-became-lawyer-in-sc-gave-arguments-on-sir/article-141949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में खुद पेश होकर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये उनके राज्य को चयनात्मक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने ईसीआई के खिलाफ सीएम बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। इसमें आरोप लगाया गया है कि मौजूदा एसआईआर कवायद से बड़े पैमाने पर मतदाताओं का हक छीना जायेगा। उन्होंने इसे एक अपारदर्शी, जल्दबाजी वाली, असंवैधानिक और गैरकानूनी प्रक्रिया बताया।</p>
<p>इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका पर चुनाव आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर उससे सोमवार तक जवाब देने को कहा। मामले की जैसे ही सुनवाई शुरू हुई तो वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका की गंभीरता का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मामला आइटम संख्या 36 और 37 के रूप में सूचीबद्ध नये विषयों से संबंधित है।</p>
<p>जब न्यायालय ने संकेत दिया कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पोडियम तक गयीं और पीठ को सीधे संबोधित करने का आग्रह किया। सीएम ममता बनर्जी ने तर्क दिया, यह एसआईआर प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं या निवास बदलने वाले गरीब प्रवासियों जैसी सामाजिक वास्तविकताओं के कारण होने वाली मामूली विसंगतियों के आधार पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने न्यायालय को बताया कि मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति के आधार पर हटा दिये गये, भले ही वह विसंगति केवल उपनाम या वर्तनी की भिन्नता मात्र थी। गरीब लोगों जो बाहर जाते हैं, उनके नाम हटा दिये गये हैं। यह निष्कासन का आधार क्यों होना चाहिए।सीएम बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के समय और इसके चयनात्मक होने पर सवाल भी उठाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:43:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उत्तर प्रदेश में सजा सुनने के बाद आरोपी कोर्ट से फरार : तलाश में जुटी पुलिस, 30 हजार का लगाया था जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों के अनुसार शनिवार को एडीजी द्वितीय न्यायालय में कैदी राम भरोसे को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 5 वर्ष की सजा और 30 हजार का जुर्माना की सजा सुनाई गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-hearing-the-sentence-in-the-police-started/article-131877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/6622-copy55.jpg" alt=""></a><br /><p>फतेहपुर। उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले की एक अदालत ने पत्नी और बच्चियों की आत्महत्या के मामले में सजा को सुनकर आरोपी न्यायालय से फरार हो गया। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार शनिवार को एडीजी द्वितीय न्यायालय में कैदी राम भरोसे को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 5 वर्ष की सजा और 30 हजार का जुर्माना की सजा सुनाई गई। सजा सुनते ही कैदी अचानक कोर्ट से गायब हो गया। उसकी तलाश में पुलिस लगी, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 14:29:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विधेयकों की मंजूरी की समयसीमा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, राष्ट्रपति के संदर्भ पर संविधान पीठ ने दी सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने से संबंधी राष्ट्रपति के संदर्भ पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-in-the-supreme-court-on-the-deadline-for-approval/article-124101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने से संबंधी राष्ट्रपति के संदर्भ पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर की संविधान पीठ ने तमिलनाडु और केरल द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया।</p>
<p>5 सदस्यीय पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति के 13 मई 2025 को दिए गए संदर्भ का उत्तर देने से विधेयकों को मंजूरी देने की समयसीमा पर शीर्ष अदालत के तमिलनाडु के संदर्भ में दिए गए फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीठ ने कहा कि “हम यह तय नहीं कर रहे हैं कि तमिलनाडु का फैसला सही है या नहीं। हम उस मुद्दे पर फैसला नहीं कर रहे हैं। हम केवल राष्ट्रपति द्वारा दिए गए संदर्भ का उत्तर दे रहे हैं।”</p>
<p>शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु और केरल सरकारों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता की ओर से राष्ट्रपति के संदर्भ की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाने पर ये टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर राष्ट्रपति स्वयं राष्ट्रपति के संदर्भ के माध्यम से विचार मांग रही हैं तो इसमें क्या गलत है। शीर्ष अदालत केवल सलाहकार क्षेत्राधिकार के तहत कार्य कर रही है।</p>
<p>पीठ ने कहा कि अदालत केवल कानून पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करेगा और तमिलनाडु मामले पर कोई निर्णय नहीं सुनाएगा। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की (शीर्ष अदालत) पीठ ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों पर अपनी स्वीकृति न देने के निर्णय को 8 अप्रैल, 2025 को "अवैध" और "मनमाना" बताया और राष्ट्रपति द्वारा इन विधेयकों को मंजूरी देने के लिए 3 महीने की समय-सीमा निर्धारित की। 2 सदस्यीय पीठ के इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए शीर्ष न्यायालय से यह जानने का प्रयास किया कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करते समय राष्ट्रपति द्वारा अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए न्यायिक आदेशों द्वारा समय-सीमाएं निर्धारित की जा सकती हैं।</p>
<p>तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि वर्तमान मामले की प्रकृति ऐसी है कि पीठ तमिलनाडु मामले के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने हालांकि कहा कि पीठ केवल कानून पर अपना दृष्टिकोण रखेगी और तमिलनाडु मामले पर कोई निर्णय नहीं सुनाएगी। उसने यह भी कहा कि पीठ केवल अपनी राय देगी और इससे निर्णय प्रभावित नहीं होगा।</p>
<p>राष्ट्रपति के इस संदर्भ को अंतर-न्यायालयीय अपील बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने दावा किया कि राष्ट्रपति का परामर्श क्षेत्राधिकार पुनर्विचार याचिका का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान पीठ से तमिलनाडु मामले में निर्णय, गुण-दोष और विषय-वस्तु को बदलने के लिए कहा जा रहा है।</p>
<p>पीठ ने सिंघवी से पूछा कि “यह उस निर्णय को कैसे बदलेगा जो पहले ही एक खंडपीठ द्वारा दिया जा चुका है? आप इस तरह आगे बढ़ रहे हैं मानो निर्णय स्वतः ही रद्द हो जाएगा। यह सही नहीं है। आप ऐसा क्यों मान रहे हैं।”</p>
<p>केरल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही संविधान के अनुच्छेद 200 के संबंध में इसी तरह के प्रश्नों की व्याख्या कर चुका है, जिसके अनुसार राज्यपालों को पंजाब, तेलंगाना और तमिलनाडु से संबंधित मामलों में राज्य के विधेयकों पर ‘यथाशीघ्र’ कार्रवाई करनी होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता वेणुगोपाल ने दलील दी कि तमिलनाडु मामले में पहली बार विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर स्वीकृति के लिए एक समय सीमा तय की गई थी। और इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार जब फ़ैसले इस क्षेत्र को शामिल कर लेते हैं तो राष्ट्रपति के नए संदर्भ पर विचार नहीं किया जा सकता।</p>
<p>उन्होंने ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार को राष्ट्रपति से संदर्भ प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 143 का सहारा लेने के बजाय औपचारिक समीक्षा की मांग करनी चाहिए थी। इस पर पीठ ने उनसे कहा, “हमें एक भी ऐसा फ़ैसला दिखाइए जहाँ खंडपीठ में संदर्भ मान्य न हो। हम इस मुद्दे पर फ़ैसला नहीं कर रहे हैं कि तमिलनाडु सही है या नहीं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने केरल और तमिलनाडु दोनों सरकारों की दलीलों का विरोध किया। </p>
<p>गौरतलब है कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले लिखित दलील में तर्क दिया था कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति पर निश्चित समय-सीमाएँ थोपना सरकार के एक अंग द्वारा संविधान द्वारा उसे प्रदान न की गई शक्तियों को ग्रहण करने के समान होगा तथा इससे ‘संवैधानिक अव्यवस्था’ पैदा होगी। शीर्ष अदालत ने 29 जुलाई को कहा था कि वह राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने से संबंधी राष्ट्रपति के संदर्भ की जांच 19 अगस्त से करेगी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा था , “शुरुआत में हम प्रारंभिक आपत्ति पर एक घंटे तक पक्षकारों की सुनवाई करेंगे। उसके बाद, हम 19, 20, 21, 26 अगस्त को संदर्भ का समर्थन करने वाले अटॉर्नी जनरल और केंद्र सरकार की सुनवाई शुरू करेंगे। संदर्भ का विरोध करने वाले पक्षों की सुनवाई 28 अगस्त, 2, 3 और 9 सितंबर को होगी। यदि कोई प्रत्युत्तर होगा, तो उस पर 10 सितंबर को सुनवाई होगी।” पीठ ने केंद्र सरकार और संदर्भ का विरोध करने वाले पक्षों की ओर से अधिवक्ता अमन मेहता और मीशा रोहतगी को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 17:23:31 +0530</pubDate>
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                <title>धन शोधन मामला : वाड्रा को नोटिस, अगली सुनवाई 28 अगस्त को</title>
                                    <description><![CDATA[ दिल्ली की एक विशेष अदालत ने धन शोधन के मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को शनिवार को नोटिस जारी किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/notice-to-vadra-the-next-hearing-to-vadra-on-august/article-122461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने धन शोधन के मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को शनिवार को नोटिस जारी किया।</p>
<p>राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने हरियाणा ईडी की ओर से गुरुग्राम में एक जमीन सौदे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में यह नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले वह वाड्रा और मामले के 10 अन्य के प्रस्तावित आरोपियों का पक्ष सुनेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:13:11 +0530</pubDate>
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                <title>ग्राम पंचायत के पुनर्गठन के प्रकरण की सुनवाई अब करेगी खंडपीठ</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए खंडपीठ में भेज दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-bench-will-now-hear-the-case-of-reorganization-of/article-116412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए खंडपीठ में भेज दिया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश करौली जिले के राजस्व गांव सिंघनिया और फरकपुर के निवासियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि दोनों राजस्व गांव वर्तमान में ग्राम पंचायत कंचनपुर में आते हैं। अब ग्राम पंचायत कंचनपुर से अलग नई ग्राम पंचायत भोजपुर प्रस्तावित की गई है। जबकि तहसीलदार और एसडीओ ने कलक्टर को भेजी अपनी रिपोर्ट में माना है कि नई प्रस्तावित ग्राम पंचायत की अधिकांश भूमि वन विभाग के अधीन आती है। ऐसे में यहां जरूरी प्रशासनिक भवनों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी। दोनों राजस्व गांवों के लिए कोई सीधा रास्ता भी नहीं है और उनकी दूरी भी मुख्यालय से करीब बीस किलोमीटर है। याचिका में कहा गया कि पंचायती राज विभाग की गत 13 फरवरी के परिपत्र के अनुसार नई पंचायत में शामिल होने वाले सभी स्थानों की सीमा मिलना जरूरी है। जबकि प्रकरण में इस परिपत्र की भी अवहेलना हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने प्रकरण को खंडपीठ की ओर से सुनवाई के योग्य मानते हुए उसे वहां भेज दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jun 2025 11:55:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई का जवाब दाखिल, पांच अगस्त को सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले में भ्रष्टाचार और धनशोधन के अलग-अलग दर्ज मुकदमों के आरोपी मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सीबीआई ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cbis-reply-filed-in-supreme-court-on-sisodias-bail-plea/article-86232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/manish-sisodiya.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले में भ्रष्टाचार और धनशोधन के अलग-अलग दर्ज मुकदमों के आरोपी पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई करते हुए पाया कि सीबीआई ने याचिका पर अपना जवाब दाखिल कर दिया, लेकिन यह रिकॉर्ड में नहीं है। पीठ ने इसके बाद ईडी को भी जवाब दाखिल करने को कहा और पूर्व उपमुख्यमंत्री को अगली सुनवाई पांच अगस्त से पहले अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।</p>
<p>सिसोदिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम ङ्क्षसघवी और सीबीआई तथा ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि सीबीआई का जवाब दाखिल किया गया है, लेकिन रिकॉर्ड में नहीं है। अगर कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है, तो उसे दाखिल किया जाए। ईडी का जवाब गुरुवार से पहले दाखिल किया जाए। मामले को अगली सुनवाई के लिए सोमवार को सूचीबद्ध करें।</p>
<p>राजू ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमारा जवाब तैयार है, लेकिन हमें कुछ प्रारंभिक आपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि यह उसी आदेश को चुनौती देने वाली दूसरी विशेष अनुमति याचिका है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।</p>
<p>राजू की इस दलील पर आपत्ति जताते हुए सिंघवी ने कहा कि अभियोजक द्वारा इस तरह की आपत्ति जताना बहुत चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>सिसोदिया ने अपनी याचिका में कहा है कि वह 16 महीने से हिरासत में हैं। उन्होंने दलील दी कि मुकदमा उसी गति से चल रहा है, जिस गति से अक्टूबर 2023 में चल रहा था।</p>
<p>याचिकाकर्ता सिसोदिया ने सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज मामलों में जमानत की गुहार लगाई है। सीबीआई ने अब रद्द हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में श्री सिसोदिया के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया था। </p>
<p>आम आदमी पार्टी के नेता को निचली अदालत, दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने ईडी और सीबीआई दोनों मामलों में जमानत देने से इनकार कर दिया था। </p>
<p>शीर्ष अदालत ने सिसोदिया की समीक्षा याचिका और क्यूरेटिव याचिका भी खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता ने निपटाई गई अपनी याचिका को पुनर्जीवित करने के लिए नया आवेदन दायर किया।</p>
<p>निचली अदालत ने मार्च में सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वह प्रथम दृष्टया कथित घोटाले के सूत्रधार हैं।</p>
<p>उन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली सरकार में अपने और सहयोगियों के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की अग्रिम रिश्वत के कथित भुगतान से संबंधित आपराधिक साजिश में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 18:09:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>EVM-VVPAT पर सुनवाई पूरी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें विस्तारपूर्वक सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-on-evm-vvpat-completed-supreme-courts-decision-reserved/article-75394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से पड़े मतों के साथ वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पर्चियों की 100 फीसदी गिनती या फिर मतपत्रों से चुनाव कराने की पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।</p>
<p>न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें विस्तारपूर्वक सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से ईवीएम और वीवीपैट की वर्तमान व्यवस्था में उम्मीदवारों के प्रतिनिधि के शामिल होने, छेड़छाड़ रोकने सहित तमाम चुनावी प्रक्रियाओं और कार्यप्रणालियों से संबंधित तमाम आशंकाओं को दूर करने को कहा।</p>
<p>याचिकाएं एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स और अन्य की ओर से दायर की गई थीं। उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ ने उप चुनाव आयुक्त नितेश व्यास से पूछा, आप हमें पूरी प्रक्रिया बताएं कि उम्मीदवारों के प्रतिनिधि कैसे शामिल होते हैं और छेड़छाड़ कैसे रोकी जाती है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा कि ईवीएम और वीवीपैट की चुनावी प्रक्रिया और कार्यप्रणाली से संबंधित कोई भी आशंका नहीं रहनी चाहिए। पीठ ने कहा, हम चाहते हैं कि या तो आपको या किसी अन्य अधिकारी को अदालत कक्ष के अंदर या बाहर के लोगों की सभी आशंकाओं को दूर करना चाहिए.) यह एक चुनावी प्रक्रिया है। इसमें पवित्रता होनी चाहिए। किसी को भी यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि कुछ ऐसा किया जा रहा है, जिसकी अपेक्षा नहीं की जाती है।</p>
<p>शीर्ष अदालत के समक्ष चुनाव अधिकारी ने ईवीएम, इसकी नियंत्रण इकाई, मतपत्र इकाई और वीवीपैट की प्रक्रिया को समझाया। शीर्ष अदालत ने यह भी जानना चाहा कि वीवीपैट और ईवीएम के बीच कोई विसंगति तो नहीं है? पीठ ने पूछा,''अगर किसी मतदाता को यह (वीवीपैट) पर्ची थमा दी जाए कि उसने अपना वोट डाल दिया है तो इसमें क्या नुकसान है?''इस पर चुनाव अधिकारी ने कहा कि इससे वोटों की गोपनीयता प्रभावित होने के साथ ही जानबूझकर शरारत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p>पीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण के एक सवाल पर चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह से इस आरोप की जांच करने को कहा कि केरल के कासरगोड जिले में मॉक पोल के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार को अतिरिक्त वोट मिले थे। भूषण ने एक समाचार रिपोर्ट के हवाले से कहा था कि केरल में एक मॉक पोल के दौरान चार ईवीएम और वीवीपैट में भाजपा के पक्ष में एक अतिरिक्त वोट दर्ज पाया गया।पीठ ने सिंह से इस मामले की फिर जांच करने का निर्देश दिया।</p>
<p>गौरतलब है कि लोकसभा 2024 चुनाव के पहले चरण में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 102 सीटों पर 19 अप्रैल को होने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Apr 2024 18:28:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनुच्छेद 370 पर दो अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई रोजाना</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर दो अगस्त से सभी कार्य दिवसों पर रोजाना सुनवाई करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/daily-hearing-in-supreme-court-on-article-370-from-august/article-51488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/supreme-court--32.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर दो अगस्त से सभी कार्य दिवसों पर रोजाना सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की एक संविधान पीठ मंगलवार को यह आदेश पारित किया।</p>
<p>संविधान पीठ दो अगस्त से पूर्वाहन 10:30 से सुनवाई शुरू करेगी। पीठ ने इससे पहले सभी पक्षों को 27 जुलाई तक संबंधित दस्तावेज दाखिल करने का भी निर्देश दिया। केंद्र सरकार के करीब चार साल पूर्व 05 अगस्त 2019 को संविधान की अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था। इसके बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू और कश्मीर में विभाजित कर दिया गया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा। अदालत ने उनकी इस दलील पर पर भी गौर किया कि गृह मंत्रालय ने अधिसूचना के बाद के जम्मू कश्मीर में बदले हालात पर अपना पक्ष 10 जुलाई को एक अतिरिक्त हलफनामा जरिए अदालत के समक्ष रखा है। मेहता ने साथ ही यह भी कहा कि हलफनामे का संवैधानिक प्रश्न पर कोई असर नहीं होगा। </p>
<p>सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद राज्य में जो स्थिति है, उस पर किसी भी पक्ष के पीछे हटने का कोई कारण नहीं हो सकता है। संविधान पीठ के समक्ष एक पक्षकार की राय रखते हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हलफनामे के बारे में मीडिया ने व्यापक रूप  से रिपोर्ट किया गया है। इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र के हलफनामे का संवैधानिक सवालों से कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<p>शीर्ष अदालत के समक्ष एक अन्य पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। इसलिए उन्हें दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की जरुरत होगी है। इस पर संविधान पीठ ने कहा कि जहां तक ??पक्षकार बनाने का सवाल है, कृपया यह मान लें कि हम किसी को भी चुप नहीं कराएंगे  लेकिन समय को संतुलित करना होगा।</p>
<p>सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने संविधान पीठ को अवगत कराया कि आईएएस अधिकारी शाह फैसल और सामाजिक कार्यकर्ता शेहला राशिद ने अपनी याचिकाएं वापस ले ली हैं। शीर्ष अदालत में यह मामला (अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली) आखिरी बार मार्च 2020 में सूचीबद्ध किया गया था। तब कुछ याचिकाकर्ताओं ने इस मामले को सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेजने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ ने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया था। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की गुहार फरवरी 2023 में भी लगाई गई थी। विशेष उल्लेख के दौरान लगाई गई इस गुहार पर पीठ ने कहा था कि वह इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर उचित समय पर फैसला लेगी। शीर्ष अदालत में 10 जुलाई 2023 को केंद्र द्वारा दायर नए हलफनामे में दावा किया कि तीन दशकों की अशांति के बाद पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत पूर्ववर्ती राज्य का विशेष दर्जा वापस लेने के बाद जम्मू-कश्मीर में जनजीवन सामान्य होने के साथ ही उन्नति और प्रगति के नए युग की शुरूआत हुई है। केंद्र ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि मई 2023 के महीने में श्रीनगर में जी -20 पर्यटन कार्य समूह की बैठक की मेजबानी घाटी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।  पर्यटन और देश ने दुनिया के प्रति अपनी दृढ प्रतिबद्धता को गर्व से प्रदर्शित किया कि अलगाववादी या आतंकवादी क्षेत्र को एक ऐसे क्षेत्र में परिवर्तित किया जा सकता है। क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है और वैश्विक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।</p>
<p>केंद्र सरकार ने कहा है कि तीन दशकों की अशांति के बाद जम्मू-कश्मीर में जीवन सामान्य हो गया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बिना किसी हड़ताल के सुचारू पूर्वक चल रहे हैं। हड़ताल और बंद की पहले की प्रथा अब अतीत की बात हो गई है। खेल गतिविधियों में भागीदारी अभूतपूर्व है। यह संख्या वर्ष 2022-23 में 60 लाख तक पहुंच गयी है। ये तथ्य स्पष्ट रूप से 2019 में किए गए संवैधानिक परिवर्तनों के सकारात्मक प्रभाव को साबित करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 14:36:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बृजभूषण सिंह मामले में एक जुलाई तक सुनवाई टली</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली पुलिस ने 15 जून को आरोपी सांसद सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 , 354-ए, 354-डी और 506 के तहत आरोप पत्र अदालत में दायर किया था।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-in-brijbhushan-singh-case-adjourned-till-july-1/article-50190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दायर कथित यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई मंगलवार को एक जुलाई तक के लिए टाल दी गई। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) हरजीत सिंह जसपाल ने सांसद सिंह के खिलाफ दायर लंबे आरोप पत्र को देखने के बाद मामले को स्थगित कर अगली सुनवाई की तारीख एक जुलाई 2023 मुकर्रर कर दी।</p>
<p>अदालत ने आरोप लगाने वाली कई महिला पहलवानों की ओर से अदालत की निगरानी में जांच की मांग वाले एक आवेदन पर सुनवाई के बाद उसे वापस लेने का निर्देश दिया।अदालत ने यह कहते हुए आवेदन वापस लेने के लिए कहा कि इस मामले में आरोप पत्र पहले ही दायर किया जा चुका है। सीएमएम महिमा राय सिंह की अदालत ने 22 जून को लोक अभियोजक की दलील सुनने के बाद आरोप पत्र को 27 जून को सुनवाई के लिए अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) हरजीत सिंह जसपाल की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।</p>
<p>दिल्ली पुलिस ने 15 जून को आरोपी सांसद सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 , 354-ए, 354-डी और 506 के तहत आरोप पत्र अदालत में दायर किया था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 19:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बैंको को झटका, खातों को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले उधारकर्ताओं को देना होगा सुनवाई का अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा 2020 के एक आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी खाते को धोखाधड़ी घोषित करने से गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं। उच्च न्यायालय के इस आदेश को केंद्र ने चुनौती दी थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/banks-will-have-to-give-opportunity-of-hearing-to-borrowers/article-40964"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/supreme-court--31.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंकों का खातों को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले उधारकर्ताओं को सुना जाना चाहिए। यह उन बैंकों के लिए एक बड़ा झटका है जो धोखाधड़ी को वर्गीकृत करने के लिए केंद्रीय बैंक के सर्कुलर का पालन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा 2020 के एक आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी खाते को धोखाधड़ी घोषित करने से गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं। उच्च न्यायालय के इस आदेश को केंद्र ने चुनौती दी थी।</p>
<p>भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि इसलिए, बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक के मास्टर सर्कुलर के तहत उधारकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देना चाहिए। अदालत ने "ऑडी अल्टरम पार्टेम" सिद्धांत को पढ़ने पर जोर दिया, जिसका अर्थ है मास्टर सर्कुलर के साथ दूसरे पक्ष को सुनना। आरबीआई सर्कुलर को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को छोड़कर नहीं माना जा सकता है। शीर्ष अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के एक फैसले को भी रद्द कर दिया, जो तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले के विपरीत था। धोखाधड़ी के रूप में खातों के वर्गीकरण के लिए आरबीआई परिपत्र भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) प्रावधानों का हवाला देता है, जिसमें धोखाधड़ी, धोखाधड़ी लेनदेन, धोखाधड़ी और जालसाजी शामिल है।</p>
<p>अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व निदेशकों और अन्य ने अपने खातों को धोखाधड़ी के रूप में लेबल किए जाने और जांच के लिए सीबीआई को भेजे जाने पर विभिन्न उच्च न्यायालयों का रुख किया था। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य बैंकों ने दो साल पहले रिलायंस कम्युनिकेशन के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायतें सीबीआई को भेज दी थीं, लेकिन एजेंसी मामला दर्ज नहीं कर सकी क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने यथास्थिति का आदेश दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 15:02:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>पत्नी और नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता कोई व्यक्ति : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने उस व्यक्ति की अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें उसका कहना था कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता देने की स्थिति में नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/no-person-can-run-away-from-the-responsibility-of-wife/article-25627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मेंटेनेंस के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी और नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी से कोई व्यक्ति भाग नहीं सकता। किसी भी शख्स को अलग रह रही पत्नी और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसा कमाना चाहिए। भले ही उसे ऐसा करने के लिए शारीरिक श्रम वाला काम ही क्यों न करना पड़े। अदालत ने उस व्यक्ति की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसका कहना था कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता देने की स्थिति में नहीं है। पति का कहना था कि उसका पार्टी बिजनेस बंद हो गया है। उसके पास कोई कमाई नहीं है, इसलिए वह अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं दे सकता।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति को आदेश दिया है, कि वह पत्नी को हर महीने 10 हजार और नाबालिग बेटे को भी महीने में 6 हजार रुपये की मदद करे। कोर्ट ने तीखी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका दाखिल करने वाला शख्स शरीर से सही है। ऐसे में वह पत्नी और बच्चों के गुजारे के लिए शारीरिक श्रम भी कर सकता है। अदालत ने कहा कि भले ही उसे मेहनत करनी पड़े, लेकिन वह पत्नी और बच्चों की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। बेंच ने कहा कि सीआरपीसी के सेक्शन 125 के तहत महिलाओं के संरक्षण की व्यवस्था की गई है। यदि किसी महिला को पति का घर छोड़ना पड़ता है, तो उसके गुजारे के लिए जरूरी व्यवस्था होनी चाहिए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/no-person-can-run-away-from-the-responsibility-of-wife/article-25627</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Oct 2022 15:48:16 +0530</pubDate>
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