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                <title>hearing - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>hearing RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष: अमेरिका का रूस के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी, बोले- मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ राजनयिक संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई द्विपक्षीय मुद्दों का यूक्रेन से संबंध नहीं है। रुबियो ने ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में वापसी की इच्छा जताते हुए कहा कि अमेरिका पूरी तरह यूक्रेन के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-ukraine-conflict-america-needs-to-maintain-relations-with-russia-says/article-155969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/macro.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन में जारी संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। रुबियो ने संसद की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई में कहा, “कम से कम, हमें रूसियों के साथ संबंध और बातचीत जारी रखनी ही होगी। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में ऐसे मुद्दे हैं, जिनका यूक्रेन से कोई लेना-देना नहीं है।” अमेरिकी विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान होने के बाद अमेरिका-रूस संबंध अधिक दोस्ताना और संभालने में आसान हो जाएंगे। उन्होंने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष पर मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।</p>
<p>मार्को रुबियो से जब पूछा गया कि क्या मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन फिर से शामिल होने के लिए तैयार है, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के अब तक के प्रयास ‘कम फलदायी’ रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में संघर्ष को सुलझाने की बातचीत में अमेरिका ‘साफ तौर पर’ यूक्रेन के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने समिति से कहा, “हम उस युद्ध में निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हैं। हम रूस को हथियार नहीं देते, हम केवल यूक्रेन को हथियार देते हैं। हम यूक्रेन पर प्रतिबंध नहीं लगाते, हम केवल रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं, इसलिए हमने स्पष्ट रूप से एक पक्ष लिया है।” मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को आवश्यकता सूची (पर्ल) कार्यक्रम के माध्यम से हथियार बेचना जारी रखे हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत: गोपालगंज न्यायालय ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक, 5 जून को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[गोपालगंज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने जदयू विधायक अनंत सिंह और भोजपुरी गायक गुंजन सिंह की गिरफ्तारी पर 5 जून तक रोक लगा दी है। मीरगंज में एक कार्यक्रम के दौरान समर्थकों द्वारा कथित हथियार प्रदर्शन का वीडियो वायरल होने पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस द्वारा फॉरेंसिक रिपोर्ट न सौंप पाने के कारण सुनवाई टल गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-relief-to-mla-anant-singh-gopalganj-court-bans-arrest/article-155479"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/anant-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>गोपालगंज। मोकामा के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक अनंत सिंह और भोजपुरी गायक गुंजन सिंह की गिरफ्तारी पर शनिवार को गोपालगंज न्यायालय ने तत्काल रोक लगाने के साथ अगली सुनवाई के लिए पांच जून की तिथि निर्धारित की है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश (एडीजे) तृतीय सह एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश राजेंद्र कुमार पांडेय ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों व्यक्तियों की गिरफ्तारी पर पांच जून तक रोक लगाई है।</p>
<p>जदयू विधायक सिंह के अधिवक्ता राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि न्यायालय में पुलिस फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट नहीं सौंप सकी और सरकार के अधिवक्ता ने न्यायालय से इसके लिए समय मांगा है। इसलिए अग्रिम जमानत के बिंदु सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पांच जून की अगली तिथि निर्धारित की है, वहीं, सरकार की ओर से अनंत सिंह के केस को सीआईडी को सौंपे जाने के निर्णय के बाद गोपालगंज पुलिस केस से जुड़ीं फाइलें बिहार सीआईडी को सौंप चुकी है।</p>
<p>इस निर्णय के बाद सबकी निगाहें न्यायालय के पांच जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है। उल्लेखनीय है कि मीरगंज थाने के सेमरांव गांव में बीते 02-03 मई को अनंत सिंह एवं गुंजन सिंह एक उपनयन संस्कार कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां समर्थकों का कथित हथियार प्रदर्शन का वीडियो वायरल हुआ था। मीरगंज पुलिस ने इसी मामले में विधायक अनंत सिंह, भोजपुरी गायक गुंजन सिंह, सहित 09 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 15:42:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दुर्भाग्यपूर्ण! नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा पिछली गलतियों से नहीं लिया सबक, केंद्र और एनटीए से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनटीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र एजेंसी से दोबारा परीक्षा कराने और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-is-strict-on-the-unfortunate-neet-paper-leak/article-154939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली घटनाओं से अब तक कोई सबक नहीं लिया गया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NTA से उस मॉनिटरिंग कमेटी की स्थिति स्पष्ट करने को कहा, जिसे पहले अदालत के निर्देश पर गठित किया गया था। कोर्ट ने पूछा कि समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और उसकी रिपोर्ट कहां है।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की है। इसमें NTA को हटाकर नई स्वतंत्र एजेंसी बनाने, परीक्षा को कंप्यूटर आधारित करने और प्रश्नपत्रों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे सुझाव शामिल हैं। साथ ही, न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने और सेंटरवार रिजल्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: सज्ञान ; सुनवाई शुरू, सीजेआई बोले-निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। वहीं, दिल्ली एम्स की टीम द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद कल ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/twisha-sharma-death-case-supreme-court-took-suo-motu-hearing/article-154912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/twisha-sharma.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि पीड़िता के परिवार या आरोपियों के परिवार के बयानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित न किया जाए। शीर्ष अदालत ने ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत त्रुटियों से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने की।<br />मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कुछ घटनाक्रमों से हमें पीड़ा हुई है। हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों पर ज्यादा ध्यान न दे। मामले को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।"</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि मामले में एक पूर्व जिला न्यायाधीश और एक वकील के खिलाफ आरोप होने के कारण न्यायपालिका द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि पीड़िता के परिवार या आरोपियों के परिवार के बयानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित न किया जाए। नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा पूर्व 'मिस पुणे' विजेता थीं। उन्होंने पांच महीने पहले डेटिंग ऐप के माध्यम से परिचय होने के बाद भोपाल निवासी वकील समर्थ सिंह से विवाह किया था।</p>
<p>समर्थ सिंह का परिवार न्यायपालिका से जुड़ा हुआ बताया गया है। समर्थ सिंह जहां पेशे से वकील हैं, वहीं उनकी मां गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश और वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग की अध्यक्ष हैं। विवाह के महज पांच महीने बाद 12 मई 2026 को ट्विशा शर्मा अपने घर में जिम्नास्टिक रस्सी से लटकी हुई पाई गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई की एक टीम ट्विशा शर्मा की मृत्यु मामले की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में लेने के लिए भोपाल रवाना हो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:30:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा डेथ केस पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: सज्ञान, 25 मई को CBI जांच के बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल की त्विषा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच अपने हाथ में ली है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ 25 मई को सुनवाई करेगी। मामले में संस्थागत पक्षपात के आरोपों के बीच जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, जबकि आरोपी पति सात दिन की पुलिस हिरासत में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-took-suo-motu-cognizance-of-twisha-sharma-death/article-154865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sc.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भोपाल की चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई अपने हाथ में ले ली है। शीर्ष अदालत ने मामले को “अप्राकृतिक मौत और जांच में कथित संस्थागत पक्षपात” से जुड़ा बताते हुए 25 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।</p>
<p>33 वर्षीय त्विषा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में मृत मिली थीं। परिवार ने पति समर्थ सिंह, जो पेशे से वकील हैं, और सास गिरिबाला सिंह, पूर्व जिला न्यायाधीश, पर दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के आरोप लगाए हैं।</p>
<p>समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत अर्जी वापस लेने के बाद सरेंडर कर दिया, जिसके बाद अदालत ने उसे सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। वहीं, गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए पुलिस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:10:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, छात्रों-अभिभावकों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीएसई की नई भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अभिभावकों और छात्रों का तर्क है कि इस अचानक बदलाव के बजाय उन्हें विदेशी भाषाएं चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-cbses-three-language-policy-students-parents-knocked-at-the/article-154638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां छात्रों और अभिभावकों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य बनाने के फैसले को चुनौती दी गई है।</p>
<p>सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अनुसार छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक अन्य भाषा पढ़नी होगी। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि शुरुआत में यह व्यवस्था कक्षा 6 से लागू होने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक बड़े छात्रों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।</p>
<p>कई छात्रों ने तर्क दिया है कि वे तीसरी भाषा के रूप में जर्मन, फ्रेंच या चाइनीज जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ना चाहते हैं। मामले पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई: आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, भ्रामक AI कंटेंट गंभीर विषय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी बदलने पर राजनीतिक आलोचना जायज है, लेकिन फर्जी आवाज और भ्रामक एआई (AI) कंटेंट बेहद गंभीर विषय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hearing-in-delhi-high-court-on-raghav-chadhas-petition-criticism/article-154601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग की थी। राघव चड्ढा का कहना है कि एआई तकनीक के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी नेता के राजनीतिक फैसले की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी बदलने के फैसले पर व्यंग्य या आलोचना को सीधे पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने फर्जी वीडियो,नकली आवाज और भ्रामक एआई कंटेंट को गंभीर विषय बताया। अदालत ने फिलहाल मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इस याचिका में अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वकील बन कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची ममता: चुनाव बाद हुई हिंसा मामले में करेंगी पैरवी, राज्य में कथित अशांति पर जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में खुद पैरवी करने अधिवक्ता की पोशाक में कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। कोर्ट 2026 विधानसभा चुनावों के बाद हुई तोड़फोड़ और हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमलों के खिलाफ ममता का यह कड़ा रुख चर्चा में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-reached-calcutta-high-court-as-a-lawyer-and-will/article-153800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mamata.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा के संबंध में अपनी पार्टी की ओर से दायर एक मामले की व्यक्तिगत रूप से पैरवी करने के लिए गुरुवार सुबह अधिवक्ता की पोशाक में कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। कलकत्ता उच्च न्यायालय 2026 के पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद तोड़फोड़ और हिंसा की कथित घटनाओं से संबंधित जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करने के लिए तैयार है।</p>
<p>न्यायालय में सुनवाई के लिए एक साथ सूचीबद्ध की गई याचिकाओं में राज्य के कई हिस्सों में कथित अशांति पर चिंता जताई गई है। इनमें से एक याचिका वामपंथी नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कोलकाता में न्यू मार्केट के पास बुलडोजर से किये गये कथित विध्वंस अभियान पर सवाल उठाया है।</p>
<p>एक अलग याचिका तृणमूल कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परिणामों के बाद कई जिलों में तृणमूल कार्यकर्ताओं और पार्टी के कार्यालयों को निशाना बनाया गया। दोनों मामलों को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष संयुक्त सुनवाई के लिए जोड़ दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय पार्टी प्रतिनिधियों के साथ अदालत में मौजूद थे। रिपोर्ट मिलने के समय तक न्यायालय की कार्यवाही जारी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:33:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ममता बनर्जी बनीं वकील: दीं SIR पर दलीलें; चुनाव आयोग को बताया व्हाट्सएप आयोग, SC ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकार छीने जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-banerjee-became-lawyer-in-sc-gave-arguments-on-sir/article-141949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में खुद पेश होकर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये उनके राज्य को चयनात्मक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने ईसीआई के खिलाफ सीएम बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। इसमें आरोप लगाया गया है कि मौजूदा एसआईआर कवायद से बड़े पैमाने पर मतदाताओं का हक छीना जायेगा। उन्होंने इसे एक अपारदर्शी, जल्दबाजी वाली, असंवैधानिक और गैरकानूनी प्रक्रिया बताया।</p>
<p>इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका पर चुनाव आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर उससे सोमवार तक जवाब देने को कहा। मामले की जैसे ही सुनवाई शुरू हुई तो वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका की गंभीरता का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मामला आइटम संख्या 36 और 37 के रूप में सूचीबद्ध नये विषयों से संबंधित है।</p>
<p>जब न्यायालय ने संकेत दिया कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पोडियम तक गयीं और पीठ को सीधे संबोधित करने का आग्रह किया। सीएम ममता बनर्जी ने तर्क दिया, यह एसआईआर प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं या निवास बदलने वाले गरीब प्रवासियों जैसी सामाजिक वास्तविकताओं के कारण होने वाली मामूली विसंगतियों के आधार पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने न्यायालय को बताया कि मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति के आधार पर हटा दिये गये, भले ही वह विसंगति केवल उपनाम या वर्तनी की भिन्नता मात्र थी। गरीब लोगों जो बाहर जाते हैं, उनके नाम हटा दिये गये हैं। यह निष्कासन का आधार क्यों होना चाहिए।सीएम बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के समय और इसके चयनात्मक होने पर सवाल भी उठाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:43:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश में सजा सुनने के बाद आरोपी कोर्ट से फरार : तलाश में जुटी पुलिस, 30 हजार का लगाया था जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों के अनुसार शनिवार को एडीजी द्वितीय न्यायालय में कैदी राम भरोसे को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 5 वर्ष की सजा और 30 हजार का जुर्माना की सजा सुनाई गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-hearing-the-sentence-in-the-police-started/article-131877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/6622-copy55.jpg" alt=""></a><br /><p>फतेहपुर। उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले की एक अदालत ने पत्नी और बच्चियों की आत्महत्या के मामले में सजा को सुनकर आरोपी न्यायालय से फरार हो गया। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार शनिवार को एडीजी द्वितीय न्यायालय में कैदी राम भरोसे को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 5 वर्ष की सजा और 30 हजार का जुर्माना की सजा सुनाई गई। सजा सुनते ही कैदी अचानक कोर्ट से गायब हो गया। उसकी तलाश में पुलिस लगी, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 14:29:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विधेयकों की मंजूरी की समयसीमा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, राष्ट्रपति के संदर्भ पर संविधान पीठ ने दी सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने से संबंधी राष्ट्रपति के संदर्भ पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-in-the-supreme-court-on-the-deadline-for-approval/article-124101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने से संबंधी राष्ट्रपति के संदर्भ पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर की संविधान पीठ ने तमिलनाडु और केरल द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया।</p>
<p>5 सदस्यीय पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति के 13 मई 2025 को दिए गए संदर्भ का उत्तर देने से विधेयकों को मंजूरी देने की समयसीमा पर शीर्ष अदालत के तमिलनाडु के संदर्भ में दिए गए फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पीठ ने कहा कि “हम यह तय नहीं कर रहे हैं कि तमिलनाडु का फैसला सही है या नहीं। हम उस मुद्दे पर फैसला नहीं कर रहे हैं। हम केवल राष्ट्रपति द्वारा दिए गए संदर्भ का उत्तर दे रहे हैं।”</p>
<p>शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु और केरल सरकारों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता की ओर से राष्ट्रपति के संदर्भ की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाने पर ये टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर राष्ट्रपति स्वयं राष्ट्रपति के संदर्भ के माध्यम से विचार मांग रही हैं तो इसमें क्या गलत है। शीर्ष अदालत केवल सलाहकार क्षेत्राधिकार के तहत कार्य कर रही है।</p>
<p>पीठ ने कहा कि अदालत केवल कानून पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करेगा और तमिलनाडु मामले पर कोई निर्णय नहीं सुनाएगा। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की (शीर्ष अदालत) पीठ ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों पर अपनी स्वीकृति न देने के निर्णय को 8 अप्रैल, 2025 को "अवैध" और "मनमाना" बताया और राष्ट्रपति द्वारा इन विधेयकों को मंजूरी देने के लिए 3 महीने की समय-सीमा निर्धारित की। 2 सदस्यीय पीठ के इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए शीर्ष न्यायालय से यह जानने का प्रयास किया कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर विचार करते समय राष्ट्रपति द्वारा अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए न्यायिक आदेशों द्वारा समय-सीमाएं निर्धारित की जा सकती हैं।</p>
<p>तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि वर्तमान मामले की प्रकृति ऐसी है कि पीठ तमिलनाडु मामले के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने हालांकि कहा कि पीठ केवल कानून पर अपना दृष्टिकोण रखेगी और तमिलनाडु मामले पर कोई निर्णय नहीं सुनाएगी। उसने यह भी कहा कि पीठ केवल अपनी राय देगी और इससे निर्णय प्रभावित नहीं होगा।</p>
<p>राष्ट्रपति के इस संदर्भ को अंतर-न्यायालयीय अपील बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने दावा किया कि राष्ट्रपति का परामर्श क्षेत्राधिकार पुनर्विचार याचिका का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान पीठ से तमिलनाडु मामले में निर्णय, गुण-दोष और विषय-वस्तु को बदलने के लिए कहा जा रहा है।</p>
<p>पीठ ने सिंघवी से पूछा कि “यह उस निर्णय को कैसे बदलेगा जो पहले ही एक खंडपीठ द्वारा दिया जा चुका है? आप इस तरह आगे बढ़ रहे हैं मानो निर्णय स्वतः ही रद्द हो जाएगा। यह सही नहीं है। आप ऐसा क्यों मान रहे हैं।”</p>
<p>केरल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही संविधान के अनुच्छेद 200 के संबंध में इसी तरह के प्रश्नों की व्याख्या कर चुका है, जिसके अनुसार राज्यपालों को पंजाब, तेलंगाना और तमिलनाडु से संबंधित मामलों में राज्य के विधेयकों पर ‘यथाशीघ्र’ कार्रवाई करनी होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता वेणुगोपाल ने दलील दी कि तमिलनाडु मामले में पहली बार विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर स्वीकृति के लिए एक समय सीमा तय की गई थी। और इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार जब फ़ैसले इस क्षेत्र को शामिल कर लेते हैं तो राष्ट्रपति के नए संदर्भ पर विचार नहीं किया जा सकता।</p>
<p>उन्होंने ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार को राष्ट्रपति से संदर्भ प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 143 का सहारा लेने के बजाय औपचारिक समीक्षा की मांग करनी चाहिए थी। इस पर पीठ ने उनसे कहा, “हमें एक भी ऐसा फ़ैसला दिखाइए जहाँ खंडपीठ में संदर्भ मान्य न हो। हम इस मुद्दे पर फ़ैसला नहीं कर रहे हैं कि तमिलनाडु सही है या नहीं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने केरल और तमिलनाडु दोनों सरकारों की दलीलों का विरोध किया। </p>
<p>गौरतलब है कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले लिखित दलील में तर्क दिया था कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति पर निश्चित समय-सीमाएँ थोपना सरकार के एक अंग द्वारा संविधान द्वारा उसे प्रदान न की गई शक्तियों को ग्रहण करने के समान होगा तथा इससे ‘संवैधानिक अव्यवस्था’ पैदा होगी। शीर्ष अदालत ने 29 जुलाई को कहा था कि वह राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा तय करने से संबंधी राष्ट्रपति के संदर्भ की जांच 19 अगस्त से करेगी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा था , “शुरुआत में हम प्रारंभिक आपत्ति पर एक घंटे तक पक्षकारों की सुनवाई करेंगे। उसके बाद, हम 19, 20, 21, 26 अगस्त को संदर्भ का समर्थन करने वाले अटॉर्नी जनरल और केंद्र सरकार की सुनवाई शुरू करेंगे। संदर्भ का विरोध करने वाले पक्षों की सुनवाई 28 अगस्त, 2, 3 और 9 सितंबर को होगी। यदि कोई प्रत्युत्तर होगा, तो उस पर 10 सितंबर को सुनवाई होगी।” पीठ ने केंद्र सरकार और संदर्भ का विरोध करने वाले पक्षों की ओर से अधिवक्ता अमन मेहता और मीशा रोहतगी को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 17:23:31 +0530</pubDate>
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                <title>धन शोधन मामला : वाड्रा को नोटिस, अगली सुनवाई 28 अगस्त को</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/notice-to-vadra-the-next-hearing-to-vadra-on-august/article-122461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने धन शोधन के मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को शनिवार को नोटिस जारी किया।</p>
<p>राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने हरियाणा ईडी की ओर से गुरुग्राम में एक जमीन सौदे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में यह नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले वह वाड्रा और मामले के 10 अन्य के प्रस्तावित आरोपियों का पक्ष सुनेगी। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:13:11 +0530</pubDate>
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