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                <title>dilapidated state - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सुकेत में गंदे पानी का संकट : टंकियों की सफाई नहीं, बीमारियों का बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[2-3 साल से नहीं हुई जलाशयों की सफाई, मटमैले पानी से लोग परेशान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dirty-water-crisis-in-suket--tanks-uncleaned--risk-of-disease-rises/article-153916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)55.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। नगरपालिका क्षेत्र सुकेत में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बदहाल होती नजर आ रही है। जलदाय विभाग को ओवरहेड टंकियों और स्वच्छ जलाशयों की नियमित सफाई नहीं होने से लोगों को दूषित और बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में इससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारी अनुसार विभागीय नियमों में हर छह माह में टंकियों की सफाई अनिवार्य है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई टंकियों की पिछले दो से तीन वर्षों से सफाई तक नहीं हुई। सुकेत कस्बे की मुख्य पानी की टंकी में काई जम चुकी है और पूर्व में मृत पक्षी मिलने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि नलों से आने वाला पानी मटमैला और दुर्गधयुक्त है।</p>
<p><strong>सीएचसी में बढ़ रहे मरीज</strong><br />सुकेत सीएचसी प्रभारी डॉ. जिंदल के अनुसार दूषित पानी के कारण डायरिया और पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। पिछले एक दिन में नियमित रूप से उल्टी-दस्त के 7 से 8 मरीज अस्पताल पहुंचे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। नगरवासियों ने कलेक्टर से टंकियों की सफाई की जांच कराने नियमित सफाई का बोर्ड लगाने और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><strong>प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल</strong><br />नगरवासियों का आरोप है कि जलदाय विभाग केवल कागजों में सफाई और रखरखाव के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द टंकियों की सफाई और जल गुणवत्ता की जांच नहीं करवाई गई तो आंदोलन किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मामले में हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की गई है। वहीं बढ़ती गर्मों के बीच दूषित पानी की समस्या ने आमजन की चिंता और परेशानी दोनों बढ़ा दी हैं।</p>
<p><strong>नगरवासियों में भारी आक्रोश</strong><br />स्थानीय निवासियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे आए दिन उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं, इसलिए मजबूरी में वहीं गंदा पानी उपयोग करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>फिल्टर प्लांट बंद, क्लोरीन का अधिक उपयोग</strong><br />नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर फिल्टर प्लांट बंद पड़े हैं। ऐसे में पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन की अधिक मात्रा डाली जा रही है, जिससे पानी का स्वाद और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p>इसकी जानकारी जेईएन द्वारा दी जाएगी। यह कार्य मेरे स्तर का नहीं है।<br /><strong>- बच्चू सिंह मीणा, एईएन, जलदाय विभाग।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:24:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डेढ़ दशक बाद भी बदहाली में देईखेड़ा पशु चिकित्सालय, न भवन, न चिकित्सक, एक कंपाउंडर के भरोसे चल रहा अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/deikheda-veterinary-hospital-remains-in-a-dilapidated-state-even-after-a-decade-and-a-half--with-no-building--no-doctor--and-a-single-compounder/article-132165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय इन दिनों बदहाली की स्थिति में है। स्थापना के डेढ़ दशक बीत जाने के बावजूद न तो अस्पताल को स्थाई भवन मिल पाया है, न ही पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध हैं। हालात यह हैं कि पूरा चिकित्सालय इन दिनों केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है, जबकि इस अस्पताल से करीब दर्जनभर गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में यह अस्पताल पूर्व में बंद हो चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है। अब पंचायत प्रशासन इसे खाली पड़े पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में स्थानांतरित करने की तैयारी में है, जो करीब तीन दशक पुराना और जर्जर अवस्था में है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है।</p>
<p>गौरतलब है कि चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक कंपाउंडर और एक पशु परिचर के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल कंपाउंडर के सहारे ही अस्पताल संचालित हो रहा है। पशुपालकों ने बताया कि स्थाई भवन और संसाधनों के अभाव में मवेशियों के इलाज के लिए समुचित सुविधा नहीं मिल पाती। ग्रामीणों ने मांग की है कि शीघ्र ही स्थाई भवन हेतु भूमि पट्टा जारी कर निर्माण बजट स्वीकृत किया जाए तथा रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाए।</p>
<p>अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों  के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव  उपचार किया जा रहा है भूमि आवंटन के लिये पँचायत को लिखा जा चुका है पँचायत द्वारा भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक तोर बोला गया  है समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है <br /><strong>- ओमप्रकाश नागर, पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा।</strong><br /> <br />पशु चिकित्सालय के अहाते में ही संचालित राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में कमरों की कमी के कारण उसकी कुछ कक्षाओं को वँहा संचालित करने के लिये व्य्वस्था की निर्देश दिए गए है राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन में शिफ्ट होने से पुराना भवन खाली है पशु चिकित्सालय को वँहा संचालित करने के लिये लिखा है जल्द ही भूमि आवंटन कर दिया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा।</strong></p>
<p>ग्रामीण में पशुपालकों को सुविधाये मुहाये करना मात्र चुनावी वादा ही रहा है देईखेड़ा पशु चिकित्सालय को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी क्रमोन्नत होना दूर स्थायी भवन संसाधन व पर्याप्त क्रमिक तक उपलब्ध नही करवाये जा रहे यह क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की संवेदन हीनता को दर्शता है। <br /><strong>- दिनेश व्यास, देईखेड़ा व्यापार मंडल,अध्यक्ष। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 16:14:36 +0530</pubDate>
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                <title>ढाई सौ साल पुराने दाऊ मंदिर को मरम्मत की दरकार, दाऊ जयंती का बजट अलग से मिले तो हो भव्य आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के सूरजपोल स्थित दाऊ महाराज का मंदिर को मरम्मत की दरकार है। मंदिर का रख रखाव नहीं होने से मंदिर जीण शीर्ण अवस्था में हो रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-250-year-old-dau-temple-needs-repairs/article-118983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer153.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सूरजपोल स्थित दाऊ महाराज का मंदिर को मरम्मत की दरकार है। मंदिर का रख रखाव नहीं होने से मंदिर जीण शीर्ण अवस्था में हो रहा है। यह मंदिर वल्लभ कुल के पुष्टिमर्गीय संप्रदाय में आता है। मंदिर के पुजारी चेतन शर्मा ने बताया कि करीब मंदिर ढाई सौ साल पुराना है और आजादी के समय से ही देवस्थान विभाग के अधीन है। दाऊ महाराज को धाकड़ समाज का आराध्य देव माना है साथ ही इनको बलराम, हलधर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के  दाऊ महाराज जो भी भोग लगाया जाता है वो सब मंदिर में ही बनाया जाता है बाहर से कोई प्रसाद नहीं मंगवाया जाता है।  साथ ही मंदिर में चार बार सुबह आरती व शाम को तीन बार आरती होती है। साथ ही मंदिर में प्रतिदिन सुबह बालभोग,  दस बजे करीब राजभोग, चार बजे करीब संध्या भोग, करीब छह शयन भोग लगाया जाता है। मंदिर मरम्मत और सफाई हो जाए तो श्रद्धालुओं परेशानी नहीं होगी। </p>
<p><strong>बरामदा हो रहा जर्जर</strong><br />मंदिर का बरामदा जीर्ण - शीर्ण अवस्था में होने से बारिश में परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही मंदिर की छत पर झाड़िया उग जाने के कारण  बारिश का पानी निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>मंदिर में सफाई कर्मचारी व गार्ड की की जरूरत</strong><br />मंदिर के पुजारी ने बताया कि देवस्थान विभाग को कई बार अवगत कराया कि मंदिर में सुबह व शाम को सफाई कर्मचारी व रात के समय मंदिर की सुरक्षा के लिए एक गार्ड आवश्यकता है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>चहुंओर उग रही झाडियां</strong><br />मंदिर का बरामद जीर्ण शीर्ण अवस्था में साथ ही बरामदे के चहुंओर घास फूस उग गई  जिसे छत से पानी निकलने में समस्या आ रही है साथ ही बरामदे में बारिश की वजह से  सीलन हो रही है और बारिश के समय बरामदे में से पानी टपकता है जिसे दर्शन करने व आरती के समय श्रद्वालुओं को दिक्कत होती है।मंदिर में लाइट जाने के बाद रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं है जिसे कई बार आरती के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही श्रद्वालुओं को दिक्कत होती है।</p>
<p><strong>रोड बना जब निगम ने नालिया बंद कर दी</strong><br />निगम ने जब रोड बनाया जब नालिया नीचे रह गई व रोड ऊपर ऊपर निकाला गया जिसे मंदिर का पानी निकलने में परेशान का सामना करना पड़ता है बारिश के समय में पानी मंदिर में भरा रहता है। जिसे मंदिर के सामने कीचड़ हो जाता है और साथ ही प्रतिदिन मंदिर के सामने की सफाई भी नहीं होती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />देवस्थान विभाग के जो मंदिर माताजी के है उनको नवरात्र उत्सव का अलग से बजट मिलता है, राममंदिरों में रामनवमी उत्सव व गणेश चतुर्थी पर अलग से बजट मिलता है पर दाऊ जयंती का अलग से बजट नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- चेतना शर्मा, पुजारी </strong></p>
<p>मंदिर के सामने सफाई नहीं होने के कारण गंदगी पड़ी रहती है जिसे हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- कौशल्या, श्रद्वालु </strong></p>
<p>मंदिर में लाइट के लिए इनवर्टर व पीने के पानी की व्यवस्था देवस्थान विभाग को करनी  चाहिए जिसे श्रद्वालु ओ पानी के लिए इधर उधर नहीं जाना पड़े।<br /><strong>- प्रशांत कुमार, श्रद्वालु </strong></p>
<p>दाऊ जयंती के बजट की डिमांड भेजवा देंगे। और मंदिर का बरामद यदि जीर्ण - शीर्ण है तो उसको भी ठीक करा देंगे। <br /><strong>- कृष्णा कुमार खडेÞलवाल असिस्टेड  कमिश्नर देवस्थान विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 16:20:06 +0530</pubDate>
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