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                <title>हाड़ौती के 10 कॉलेज में हालात भयावह: मैं ही प्रिंसिपल, मैं ही चपरासी</title>
                                    <description><![CDATA[ हाड़ौती के बारां, बूंदी, कोटा और झालावाड़ में कई ऐसे राजकीय महाविद्यालय हैं, जहां प्रिंसिपल से लेकर चपरासी तक का सारा काम एक ही शिक्षक के कंधों पर है। संभाग के करीब 10 कॉलेजों में इक्का- दुक्के प्रोफेसर ही लगे हैं। सबसे खराब स्थिति उन महाविद्यालयों की है, जहां एक ही शिक्षक मौजूद हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-situation-in-10-colleges-of-hadoti-is-appalling--i-am-the-principal--i-am-the-peon/article-18705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/hadoti-ke-10-colleges-mei-haalaat-bhayawah...kota-news-11.8.2022-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेशभर में सरकार नए-नए कॉलेज खोल क्वालिटी एजुकेशन देने का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। छात्रों को एडमिशन तो दे दिए लेकिन पढ़ाने को शिक्षक ही नहीं लगाए। बिना गुरु ज्ञान मिलना तो दूर उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। दरअसल, हाड़ौती के बारां, बूंदी, कोटा और झालावाड़ में कई ऐसे राजकीय महाविद्यालय हैं, जहां प्रिंसिपल से लेकर चपरासी तक का सारा काम एक ही शिक्षक के कंधों पर है। संभाग के करीब 10 कॉलेजों में इक्का- दुक्के प्रोफेसर ही लगे हैं। सबसे खराब स्थिति उन महाविद्यालयों की है, जहां एक ही शिक्षक मौजूद हैं। ऐसे में वे शिक्षक बीमार पढ़ जाए तो कॉलेज का ताला खुलना तक मुश्किल हो जाता है। हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद शिक्षक विद्या धर्म का पालन कर अपना दायित्व निभा रहे हैं। इटावा महाविद्यालय एक शिक्षक के भरोसे 600 विद्यार्थी जिले के इटावा में सरकार ने आर्ट्स कॉलेज तो खोल दिया लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए स्थाई प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं की। यहां कार्यवाहक प्राचार्य नरेंद्र कुमार मीणा ही एकमात्र फैकल्टी हैं। जिन्हें बच्चों को पढ़ाने से लेकर प्रशासनिक कार्य भी इन्हीं को करना पड़ता है।</p>
<p>एक संविदा पर तो विद्या संबल योजना के तहत 4 अस्थाई शिक्षक लगाकर काम चलाऊ व्यवस्था की है। साधन-संसाधनों का भी टोटा है। प्राचार्य मीणा का कहना है, विषयवार कई शिक्षकों की कमी है। जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को कोटा से पांच प्रोफेसर तो ट्रांसफर कर यहां लगाना चाहिए। वर्तमान में यहां 600 बच्चे पढ़ रहे हैं। मांगरोल कॉलेज : ताला भी प्रिसिंपल ही खोलती हैं वही लगाती हैं कॉलेज शिक्षा सहायक निदेशक डॉ. रघुराज सिंह परिहार के मुताबिक, मांगरोल में 2016 में सरकार ने कॉलेज खोला था। यहां 20 जनों का स्टाफ स्वीकृत है, जिनमें प्रिंसिपल, 7 असिस्टेंट प्रोफेसर के अलावा नॉन टीचिंग स्टाफ शामिल है। यहां एकमात्र असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रिचा मीणा ही कार्यरत हैं। उन्हें कार्यवाहक प्रिसिपल बनाया हुआ है। कॉलेज में करीब 600 विद्यार्थी हैं, प्रोफेसरों के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कॉलेज का ताला भी प्रिसिंपल्\महाविद्यालय जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। बच्चों की सुरक्षा को भी खतरा है। छबड़ा कॉलेज : प्रशासनिक कार्य व पढ़ाई एक साथ छबड़ा कॉलेज की स्थिति बहुुत खराब है। प्रिंसिपल करुणा जोशी ने बताया कि वर्ष 2016 में कॉलेज खुला था लेकिन, प्रोफेसर नहीं लगाए। यहां प्रशासनिक कार्यों के लिए कौशल किशोर को लगा रखा है लेकिन उन्हें छिपाबड़ौद नोडल आॅफिसर बना रखा है। जिससे कॉलेज का प्रशासनिक कार्य भी मुझे ही करना पड़ता है। साथ ही बच्चों को पढ़ाती भी हूं। इन दिनों यहां प्रवेशित विद्यार्थियों को एडमिशन दे रहे हैं। साथ ही दस्तावेज भी जांच रहे हैं। वर्तमान में महाविद्यालय में करीब 600 विद्यार्थी हैं। प्रोफेसरों के बिना इनकी पढ़ाई कैसी होगी, इसका अंदाजा खुद लगा सकते हैं। केलवाड़ा कॉलेज : एक साल से एक ही प्रोफेसर बारां जिले के केलवाड़ा में 2008 में कॉलेज खुला था। अगस्त 2021 तक यहां 6 फैकल्टी थी, लेकिन इसके बाद यहां से लगातार ट्रांसफर होते रहे वर्तमान में एक ही फैकल्टी मांगीलाल महावर के रूप में मौजूद है। इनके अलावा कॉलेज में कोई अन्य स्टाफ नहीं है। ऐसे में चपरासी से लेकर प्रिंसिपल तक का सारा काम इन्हीं को करना पड़ता है। वहीं, कॉलेज में 900 बच्चों का नामांकन है। लेकिन, फैकल्टी के अभाव में उनकी कक्षाएं नहीं लग पाती। परीक्षा से एडमिशन तक की निभा रहे जिम्मेदारी केलवाड़ा प्रिसिंपल महावर का कहना है, केलवाड़ा महाविद्यालय परीक्षा केंद्र भी है। यहां वर्तमान में 2700 विद्यार्थियों की तीन शिफ्ट में परीक्षाएं चल रही है। हालात यह हैं, एग्जाम से लेकर प्रथम वर्ष के बच्चों को एडमिशन देने तक का सारा काम उन्हें ही करना पड़ रहा है। दस्तावेज भी जांच रहे हैं। परीक्षा संचालन के लिए 35 लोगों को वीक्षक के रूप में लगा रखा है। उन्होंने बताया कि 25 जून को उन्हें तेज बुखार था लेकिन परीक्षाएं चल रही थी, ऐसे में दवाइंया लेकर कॉलेज आ गए। हालांकि 30 जून को प्रतिनियुक्ति पर दो फैकल्टी परीक्षा करवाने के लिए लगाई है, ये परीक्षा के बाद वापस चले जाएंगे। कनवास कॉलेज : 8 में से 2 ही कक्षाएं चलती हैं कनवास आर्ट्स कॉलेज 2018 में खुला था। यहां मात्र दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें एक संविदा पर हैं। जबकि, वर्तमान में 600 विद्यार्थी महाविद्यालय में पढ़ रहे हैं। प्रिंसिपल ललित किशोर नामा ने बताया कि वे प्रशासनिक कार्य करने के साथ संस्कृत भी पढ़ा रहे हैं। वहीं, संविदा पर एक हिन्दी व्याख्याता को लगा रखा है। उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से यहां शिक्षक लगाने की मांग कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ। यहां बच्चों को केवल संस्कृत व हिन्दी की पढ़ाई ही करवा पाते हैं, अन्य विषय के विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित नहीं करवा पा रहे। बच्चे आते हैं तो खाली कक्षाओं में बैठे रहते हैं या फिर आते नहीं है। पढ़ाई करवाना तो दूर सेलेबस पूरा करवाना ही चुनौती है। हिंडोली : डेढ़ साल से एक ही प्रोफेसर चला रहे कॉलेज हिंडोली में वर्ष 2020 में आर्ट्स कॉलेज खुला था। यहां बूंदी कॉलेज से प्रोफेसर रमेशचंद मीणा को डेपुटेशन पर हिंडोली भेज दिया था, इसके बाद से वे ही प्रिंसिपल और फैकल्टी हैं। प्राचार्य मीणा ने बताया कि नवम्बर 2021 में कोटा से एक शिक्षक को ट्रांसफर कर यहां लगाया था लेकिन वे स्टे ले आए। वहीं, बूंदी से मई 2022 में एक फैकल्टी को तबादले पर यहां लगाया लेकिन वे भी कोर्ट से स्टे लेने से उन्होंने भी कॉलेज ज्वाइन नहीं किया। वर्तमान में यहां बूंदी कॉलेज से एक लैब असिस्टेंट व एक चपरासी लगाया हुआ है। उन्होंने कहा कि मुझे 1 महीने के लिए यहां भेजा गया था। बाद में लगातार आदेश जारी कर डेपुटेशन को बढ़ाते रहे। अब तो इसका आदेश देना ही भूल गए है। एक माह के चक्कर में डेढ़ साल से यहीं पर हूं। सरकार स्टाफ भी नहीं बढ़ा रही। शाहबाद : दो प्रोफेसर के भरोसे 600 विद्यार्थी शाहबाद में दो फैकल्टी है, यह कॉलेज बारां शहर से करीब 80 किमी दूर हैं, साथ ही सहरिया बाहुल्य क्षेत्र में है। यहां प्रिंसिपल को मिलाकर कुल 8 पद स्वीकृत हैं। प्रोफेसर डॉ. संजय लक्की को कार्यवाहक प्राचार्य बना रखा है। यह कॉलेज एमपी बॉर्डर पर होने व आने जाने के साधन नहीं होने के कारण यहां कोई शिक्षक आना ही नहीं चाहता। झालावाड़: कहीं एक तो कहीं दो फैकल्टी झालावाड़ जिले में भी इसी तरह के हालात हैं। पिडावा कॉलेज में एक फैकल्टी तैनात है, यहां पर करीब 480 विद्यार्थी हैं। इसी तरह से चौमहला व खानपुर में दो-दो फैकल्टी हैं। स्कॉलरशिप से लेकर एडमिशन तक सब पेंडिंग कॉलेजों में स्टाफ नहीं होने से बच्चों को पढ़ाई के अलावा अन्य कई कार्याे में परेशान होना पड़ता है। इक्के दुक्के स्टाफ पर ही पूरी जिम्मेदारी होने के चलते स्टूडेंट्स के भी कई काम पेंडिंग रह जाते। इनमें बच्चों की स्कॉलरशिप, आॅनलाइन पोर्टल, फीस डिपॉजिट, एग्जाम और एडमिशन से लेकर कई तरह के कार्य शामिल है। कॉलेजों में कोई एक्टिविटी करवाने के बारे में तो यह फैकल्टी सोच भी नहीं सकती। कॉलेज में क्लासेज नहीं लगने के चलते बच्चे भी केवल एडमिशन ही लेकर खानापूर्ति कर रहे हैं। हाड़ौती के कई कॉलेजों से फैकल्टी बढ़ाने को लेकर लगातार पत्र मिलते हैं, जिन्हें आयुक्तालय शिक्षा सचिव और शिक्षा मंत्री को भेज फैकल्टी व स्टाफ लगाने का आग्रह करते हैं, लेकिन अभी ऐसा संभव नहीं हो पाया है। कॉलेजों में फीस जमा करने से लेकर कई काम अटक जाते हैं। अव्यवस्थाओं से नाराज विद्यार्थी हमसे आकर शिकायत करते हैं, जिसका भी समाधान बड़ी मुश्किल से निकाला जाता है। प्रोफेसरों के अभाव में बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर उनका पाठ्यक्रम पूरा करवाना ही चुनौती बनी रहती है। निश्चित रूप से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। - रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Aug 2022 15:06:35 +0530</pubDate>
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                <title> स्टेट हाइवे बदहाल: खामियाजा भुगत रही जनता</title>
                                    <description><![CDATA[  कस्बे के मुख्य बाजार से गुजर रहा नेशनल हाइवे 90 व छबड़ा कोटा स्टेट हाइवे मरहम लगाने की गुजारिश कर रहा है। दोनों रोड़ की हालत दयनीय बनी हुई है परंतु आज तक भी इन दोनों रोड का पेच वर्किंग करना भी सरकार ने मुनासिब नहीं समझा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/state-highway-in-bad-condition--public-is-suffering/article-15265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/smart-city-bani-nahi-....kota-news-19.7.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>कवाई।  कस्बे के मुख्य बाजार से गुजर रहा नेशनल हाइवे 90 व छबड़ा कोटा स्टेट हाइवे मरहम लगाने की गुजारिश कर रहा है। दोनों रोड़ की हालत दयनीय बनी हुई है परंतु आज तक भी इन दोनों रोड का पेच वर्किंग करना भी सरकार ने मुनासिब नहीं समझा है। जिसका खामियाजा कस्बे के दुकानदारों सहित आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल बरसात के चलते इस रोड की गंभीर हालात हो गई है। जिसके चलते दुकानदारों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे के मुख्य चौराहे से मौठपुर चौराहे तक मेन बाजार में रोड की जर्जर हालत हो गई है। <br /><br /> एक से दो फीट के गड्ढे हो गए हैं। बरसात के चलते गड्ढों में पानी भर जाने से रोज दर्जनों बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। मुख्य बाजार में रेस्टोरेंट संचालक पवन बंसल, मंडी व्यापारी, भूपेश मंगल, विक्रम मीणा हेमंत मित्तल निर्मल कुमार कपड़ा व्यापारी चिंटू सुमन ने बताया कि रोड में गहरे गड्ढे होने के कारण बाजार से गुजरने वाले भारी वाहनों के पहियों से गड्ढों में भरा पानी उछलकर दुकानों के अंदर तक पहुंच जाता है सुबह के समय विद्यालय जाने वाले छात्र छात्राएं भी इस गंदे पानी से गंदे हो जाते हैं। सालपुरा स्टेशन निवासी दीपक चौरसिया, राजू गुर्जर, सत्यनारायण सेन संजय, चौरसिया मनीष चौरसिया ने बताया कि कस्बे से गुजर रहे हैं नेशनल हाईवे 90 पर खेल मैदान के सामने से लेकर सालपुरा मेन चौराहे तक एक से 2 फीट गहरे गड्ढे हो रहे हैं। इस मार्ग से सरकार के आला अधिकारियों सहित मंत्री विधायक भी आए दिन हिचकोले खाते हुए गुजरते रहते हैं परंतु उनका ध्यान इस मार्ग दुरुस्त करवाने पर नहीं जा रहा है। <br /><br />वाहन संचालकों का कहना है कि जब प्रशासन व सरकार इस रोड की मरम्मत नहीं करवा सकता है तो टोल टैक्स वसूली भी बंद कर दें। कस्बे के जनप्रतिनिधि पवन चक्रधारी, राजेश सुमन, मुरारी सुमन, मुकेश कुमार, सत्यनारायण सेन, गिर्राज सेन ने बताया कि शीघ्र ही उपखंड मुख्यालय पर एक ज्ञापन देकर रोड को दुरुस्त करने की मांग की जाएगी। उसके उपरांत भी अगर रोड को दुरस्त नहीं किया जाता है, तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा। <br /><br /> <strong>रोड की गिट्टी उछलने से घायल हो रहे राहगीर</strong><br />कस्बे से गुजर रहे नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे की सड़कों की दयनीय हालत है जिसके चलते आए दिन घटनाएं घटित हो रही है। रोड  एक से दो  फीट के गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है परंतु जिम्मेदारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। कस्बे की मुख्य मार्गो पर गहरे गड्ढों में तब्दील होकर रोड की गिट्टी निकल आई है। कस्बे से गुजरने वाले भारी वाहनों के टायरों से गिट्टी उछलकर आए दिन लोगों को घायल कर रही है। वहीं रोड के गड्ढों में तब्दील हो जाने के कारण दिनभर वाहनों के पीछे धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। जिससे दुकानदारों वह मुख्य चौराहे से यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><br /><strong>जिम्मेदार जानकर भी है अनजान</strong><br /> कस्बे की सड़कों के खस्ताहाल होने के कारण कस्बे वासियों सहित अन्य वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता रहा है।  गुजर रहे नेशनल हाईवे व राज्य मार्ग कि कस्बे के बीचो-बीच दर्दनीय हालात बने हुए हैं। दोनों मार्गों पर आमजन को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br />बरसात के चलते गड्ढों में पानी भर जाने से रोज दर्जनों बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। <strong> -पवन बंसल, रेस्टोरेंट संचालक।</strong> <br /><br /> गड्ढों का भरा पानी उछलकर दुकानों के अंदर तक पहुंच जाता है। जिससे दुकान में रखे नए कपडे खराब हो जाते है। <br /><strong> -चिंटू सुमन,कपडा व्यापारी।</strong> <br /><br /> जब प्रशासन व सरकार इस रोड की मरम्मत नहीं करवा सकता है, तो टोल टैक्स वसूली भी बंद कर दें या फिर रोड की मरम्मत करवाकर आमजन को राहत प्रदान करें। <br /><strong> -सत्यनारायण सेन, वाहन चालक।</strong><br /><br /> बारां से अटरू तक तो सड़क की यह दशा है कि सड़क ही नहीं है। वहां पर तो गड्ढे हैं। बारां इकलेरा सड़क को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बजट पास कर रखा हैं। जान बूझकर इसका काम लंबा किया जा रहा है, अगर किसी को इमरजेंसी एंबुलेंस या कोई भी काम हो तो बारां तक पहुंचना उसके लिए बहुत भारी पड़ रहा है। आज सड़क का यह हाल है कि यहां पर वाहन तो दूर पैदल चलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। <br /><strong> - रामपाल मेघवाल, पूर्व विधायक।</strong> <br /><br />क्षतिग्रस्त सड़क की रिपेयर करवा देंगे, आकर देखना पड़ेगा। अगर फिर भी समस्या आती है तो एस्टीमेट देखकर नई सड़क बनवाई जाएगी। <br /><strong>- मनमोहन प्रजापति, एईएन, पीडब्ल्यूडी, बारां।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 15:40:30 +0530</pubDate>
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                <title>बेटी की दोनों किडनियां खराब थी, मां ने किडनी देकर बेटी को दिया नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[कहा जाता है कि संतान अपने फर्ज को छोड़ सकती है, लेकिन मां कभी भी अपनी संतान का बुरा नहीं देख सकती। वह अपनी जान की बाजी लगाकर भी बच्चों की रक्षा करती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-daughter-s-both-kidneys-were-bad--mother-gave-new-life-to-daughter-by-giving-kidney/article-12861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/yyyy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटपूतली।</strong> कहा जाता है कि संतान अपने फर्ज को छोड़ सकती है, लेकिन मां कभी भी अपनी संतान का बुरा नहीं देख सकती। वह अपनी जान की बाजी लगाकर भी बच्चों की रक्षा करती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ग्राम पूतली के किसान परिवार से आने वाली एक महिला सुनहरी देवी पत्नी हीरालाल गुर्जर ने, जिन्होंने अपनी बेटी की जान पर आए संकट को टालते हुए अपने जीवन का खतरा मोल लेकर बेटी के प्राणों को बचा लिया। मानवता का परिचय देने के साथ-साथ एक मां होने के दायित्व को बेहद कुशलतापूर्वक निभाकर उन्होंने सम्पूर्ण समाज व क्षेत्र के समक्ष एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में मां का दर्जा भगवान से भी ऊंचा बताया जाता है। पुत्र महेश कुमार गुर्जर ने बताया कि उसकी बहन ममता देवी (28) पत्नी कृष्ण कुमार गुर्जर निवासी ग्राम खेड़की मुक्कड़ की दोनों किडनियां प्राकृतिक कारणों के चलते खराब हो गई थी। जिससे उनकी बहन के जीवन पर खतरा मंडरा रहा था। परिवार में केवल उनकी मां सुनहरी देवी की किडनी ही अपनी बेटी से मिलान खा रही थी। इस पर किसान परिवार से आने वाली सुनहरी देवी ने 52 वर्ष की उम्र में अपने जीवन का खतरा मोल लेते हुए बेटी के जीवन को बचा लिया। बुधवार को उनकी एक किडनी बेटी ममता को जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में लगाई गई। जहां प्रात: 8 से दोपहर 3 बजे तक लगभग 8 घण्टे तक चले सफल आॅपरेशन में डॉ. सूरज गोदारा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट का सफल आॅपरेशन किया। ट्रांसप्लांट के बाद दोनों की स्थिति सामान्य है। सुनहरी देवी की बड़ी बेटी उर्मिला देवी व दामाद हवासिंह गुर्जर राजस्थान पुलिस में कार्यरत है, जो जयपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हंै। इस प्रकार एक किसान मां ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को सही मायनों में चरितार्थ किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 14:50:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रशासन की अनदेखी के चलते कई वर्षों से शहर के पुस्तकालयों का हुआ बुरा हाल</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रशासन की अनदेखी के चलते कई वर्षों से शहर के पुस्तकालय दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। एक मे एक भी पुस्तक नहीं है तो वही दूसरे में स्टाफ के अभाव के कारण ताला लगा रहता है। नाम मात्र के इन पुस्तकालयों का वर्षों से उपयोग नहीं हो रहा है जिसके कारण नगर में खुली आधुनिक लाइब्रेरियों में युवाओं को फीस देकर अध्ययन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/due-to-the-neglect-of-the-administration--the-libraries-of-the-city-were-in-bad-condition-for-many-years/article-12848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/libaray.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बाड़ी।</strong> प्रशासन की अनदेखी के चलते कई वर्षों से शहर के पुस्तकालय दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। एक मे एक भी पुस्तक नहीं है तो वही दूसरे में स्टाफ के अभाव के कारण ताला लगा रहता है। नाम मात्र के इन पुस्तकालयों का वर्षों से उपयोग नहीं हो रहा है जिसके कारण नगर में खुली आधुनिक लाइब्रेरियों में युवाओं को फीस देकर अध्ययन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। देश में सदियों पहले नालन्दा जैसे विश्वविद्यालय में जिन पुस्तकालयों का इतिहास पुस्तको से ही पढ़ने को मिला था। देश की उस विश्व प्रसिद्ध लाइब्रेरी स्थापना की परंपरा अंग्रेजो से लेकर आजाद हिंदुस्तान में आज भी कायम है। आज भी लोग पुस्तकालयों की पुस्तकों में से ज्ञान का भंडार अर्जित करते हैं। <br />वर्तमान में पुस्तकालयों को आधुनिकी रूप दिया जा रहा है। यही कारण है कि आज भी युवा विशेष ज्ञान अर्जित करने के लिए पुस्तकालयों का सहारा लेते हैं। इसी परम्परानुसार बाड़ी को नगरपालिका द्वारा किला गेट स्थित नेहरू पार्क में एक पुस्तकालय संचालित किया था।</p>
<p>जिसमें उपखण्ड स्तर के लोग पुस्तकों व अखबारों का अध्ययन बड़ी संख्या में करते थे, लेकिन प्रशासन की बेरुखी व नगरपालिका की लापरवाही के चलते यह पुस्तकालय धीरे-धीरे दुर्दशा का शिकार हो गया। सैकड़ों की संख्या में पुस्तकें गायब हो गई। बैठने व पढ़ने का फर्नीचर जर्जर होकर टूट गया। दीवारें उन पर पुस्तकों को रखने के लिए बनी अलमारियों की खिड़कियां टूटकर कबाड़ हो गई। आज स्थिति यह है कि दो चार अखबारों के लिए इसका संचालन ऐसे किया जा रहा है। जैसे कोई धक्का देकर खींच रहा हो। दूसरी ओर राजस्थान का सार्वजनिक पंचायती पुस्तकालय जो लगभग 25 से 30 वर्ष पूर्व किराए के भवन में संचालित हुआ था, जिसमें हजारों पुस्तकें थी।</p>
<p>प्रतिदिन पत्र-पत्रकाओं का आवागमन होता था। पुस्तकालय के नगर में सैकड़ों स्थाई सदस्य थे, लेकिन वह भी कई किरायों के भवनों में बदल-बदल कर दुर्दशा का शिकार हो गया। पुस्तकें चोरी हो गई। विशेष रूप से स्टाफ का अभाव के चलते इस पुस्तकालय पर भी हर वक्त ताला ही जड़ा देखा जा सकता है। लगभग 2 वर्ष पूर्व इसे नए भवन में स्थानांतरित किया गया है, लेकिन जब से ही इसमे ताला लगा हुआ है जो आज तक नहीं खुला। जब इनसे या नगर पालिका से इस बारे में बात की जाती है तो वह कहते हैं कि अब कम्प्यूटर का जमाना है।</p>
<p>लोग अब पुस्तकालयों में रुचि नहीं रखते, जबकि पिछले एक वर्ष में नगर में तीन से चार आधुनिक लाइब्रेरी निजी स्तर पर लोगों ने खोली है जिनका प्रति माह पढ़ने वाले युवा किराया देते है, जिनमें लगभग 2000 से 3000 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। ऐसे में पुस्तकालयो का अस्तित्व समाप्त होने की बात कहना बेमानी ही है। बल्कि प्रशासन व नगरपालिका का पुस्तकालयो के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना है।</p>
<p><br />आपके माध्यम से हमें जानकारी मिली है। इसको लेकर नगर पालिका व पुस्तकालय विभाग के संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर जल्द ही इस ओर सुधार हेतु प्रयास किए जाएंगे। -<span style="background-color:#ffffff;color:#000000;"><strong>राधेश्याम मीणा, एसडीएम बाड़ी</strong></span><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 13:16:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खतरनाक लत: पबजी गेम से बच्चों पर पड़ रहा है बुरा असर</title>
                                    <description><![CDATA[ अभिभावकों की अनदेखी और बच्चों के हिंसक होने के कारण ऐसे केस देखने को मिलते हैं। इस केस ने हमें ये सोचने पर मजबूर किया है कि क्या वाकई बच्चों की गलती है या पेरेटिंग में ही कुछ कमी है। बच्चों के साथ आपको कुछ बातों को अवॉइड करना चाहिए।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/dangerous-addiction-pubg-game-is-having-a-bad-effect-on/article-12107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/63.jpg" alt=""></a><br /><p>आज के समय में बच्चों में फोन और गेम की लत बढ़ती जा रही है इसका खामियाजा हमें समय-समय पर देखने को मिलता है और ऐसा ही एक केस लखनऊ में सामने आया जिसमें मां के बच्चे को गेम खेलने से रोके जाने पर उसने अपनी मां को मार दिया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>एक्सपर्ट का मानना है </strong></span></p>
<p>अभिभावकों की अनदेखी और बच्चों के हिंसक होने के कारण ऐसे केस देखने को मिलते हैं। इस केस ने हमें ये सोचने पर मजबूर किया है कि क्या वाकई बच्चों की गलती है या पेरेटिंग में ही कुछ कमी है। बच्चों के साथ आपको कुछ बातों को अवॉइड करना चाहिए।  </p>
<p>लखनऊ में हाल ही में एक केस सामने आया है जिसमें एक 16 साल के नाबालिग ने अपनी मां को इसलिए मार डाला क्योंकि उसकी मां ने पबजी गेम खेलने से मना किया था। बच्चे ने इस बात का बदला लेने के लिए मां को गोली मारकर हत्या कर दी। यही नहीं,इससे पहले भी मां और बेटे के बीच गेम की लत को लेकर बहस हो चुकी थी ,और मां ने बच्चे पर हाथ भी उठाया था और बच्चा लंबे अरसे से मां के हिंसक व्यवहार से परेशान था। इस केस के बाद मोबाइल खेलने की खतरनाक लत और पेरेंंटग पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।  </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अगर बच्चे को हिंसक होने से रोकना है तो आपको इन आदतों को अवॉइड करना चाहिए।</strong></span></p>
<p>आप बच्चों के सामने या उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग न करें, इससे बच्चों के मन पर बुरा असर पड़ता है।</p>
<p>आप बच्चे को प्यार से समझाएं और दोबारा वही काम करने पर आप उसे बार-बार टोकने से बचें, इससे वह जिद्दी बन जाते हैं। </p>
<p>आपको हर हाल में अपने बच्चे को मारने से या तेज चिल्लाने से बचना है, बच्चे अपना अपमान नहींं पाते।  </p>
<p>बच्चों को समय दें, इतने व्यस्त न हों कि बच्चे अकेला महसूस करें।</p>
<p>आप बच्चे को अन्य बच्चों से कंपेयर न करें, बच्चों की तुलना करने पर उनमें ईर्ष्या के भाव आ जाते हैं। </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्षणों को नोटिस करें </strong></span></p>
<p>आपके बच्चे में कुछ अलग लक्षण नजर आएं तो उस पार गौर करें। </p>
<p>बच्चा पहले से ज्यादा जिद्दी हो जाए। </p>
<p>बच्चा बात करना कम कर दें। </p>
<p>-बात-बात पर बच्चे का रोना। </p>
<p>यादा खाने या सेवन या खाना कम लेना। </p>
<p>मिलना-जुलना बंद कर देना।</p>
<p>बात-बात पर मरने-मारने की बात करना।  </p>
<p>आज की भागती लाइफ का असर बच्चों पर पड़ रहा है।  माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते जिसके कारण वो अकेला महसूस करते हैं और अपना एंटरटेंमेंट खोजने के लिए  गेम की लत का शिकार हो जाते हैं ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/dangerous-addiction-pubg-game-is-having-a-bad-effect-on/article-12107</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 13:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होटलों में आराम कर रही सरकार, जनता के बुरे हाल- विधायक सिंघवी</title>
                                    <description><![CDATA[छबड़ा-छीपाबड़ौद क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस पांच सितारा संस्कृति का दल बन चुकी है, जब भी चुनाव आते है तो कांग्रेस पांच सितारा होटलों में बाड़ेबंदी करने में जुट जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/government-resting-in-hotels-publics-bad-condition-mla-singhvi/article-11350"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/mla-singhvi,-statement,-chhipabarod-baran-new.jpg" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छबड़ा-छीपाबड़ौद क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस पांच सितारा संस्कृति का दल बन चुकी है, जब भी चुनाव आते है तो कांग्रेस पांच सितारा होटलों में बाड़ेबंदी करने में जुट जाती है। अशोक गहलोत सरकार का लगभग कार्यकाल बाड़ेबंदी में ही निकल गया है, कांग्रेस सरकार जनता के दुख-दर्द दूर करने की बजाय उन होटलों में आराम करने की आदी हो गई है। जहां पर कमरे का एक दिन का किराया ही 25 हजार रुपए से अधिक है यानी हर विधायक का कम से कम एक दिन का खर्च 50 हजार रुपए का है, इसमें विधायकों के मनोरंजन के लिए होने वाले कार्यक्रमों का खर्च शामिल नहीं है।<br /><br />विधायक सिंघवी ने कहा कि एक ओर पूरी सरकार पांच सितारा होटलों में तफ रीह कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य की कानून-व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है, बिजली और पानी के लिए जनता तरस रही है। ग्रामीण जनता को तो सरकार ने भगवान भरोसे ही छोड़ दिया है जबकि कांग्रेस सरकार को जनता के बीच में रहकर उनकी समस्याओं को दूर करना चाहिए लेकिन जनता ने अब यह उम्मीद छोड़ दी है और वह भाजपा की तरफ  देख रही है। कांग्रेस के विधायकों के जिस प्रकार अखबार में बयान आ रहे है उससे लगता है कि कांग्रेस एकजुट नहीं है ऐसे में कोई विधायक अपना वोट कांग्रेस को देकर खराब नहीं करेगा। भाजपा प्रत्याशी घनश्याम तिवाड़ी और भाजपा समर्थित प्रत्याशी सुभाष चंद्र की जीत पक्की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 18:28:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में मौसम खराब, फ्लाइट अहमदाबाद डाइवर्ट, चार फ्लाइटों का संचालन रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर एयरपोर्ट से जाने वाली 4 फ्लाइटों का संचालन मंगलवार को रद्द रहा। मंगलवार को एयर एशिया की सुबह 10:25 बजे मुंबई, दोपहर 12:30 बजे चेन्नई, शाम 5:45 बजे हैदराबाद और रात 11:50 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का संचालन रहा। एयरलाइन कंपनी ने इसके पीछे यात्रीभार कम होना बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--bad-weather-in-jaipur--flight-ahmedabad-diverted--four-flights-canceled/article-10338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/jaipur-international-airport.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर एयरपोर्ट पर मौसम खराब होने के चलते फ्लाइट को अहमदाबाद एयरपोर्ट के लिए डायवर्ट किया गया। इस फ्लाइट में सचिन पायलट भी सवार थे। इंडिगो की फ्लाइट दिल्ली से रात 9.55 बजे जयपुर आई थी। यहां मौसम खराब होने के कारण एटीसी ने विमान को लैंड करने की अनुमति नहीं दी। इस पर विमान करीब एक घंटे तक हवा में चक्कर लगाता रहा। इसके बाद विमान को अहमदाबाद के लिए डायवर्ट किया गया। मौसम सुधारने के बाद फ्लाइट रात 2.45 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंची।इसी प्रकार स्पाइसजेट की वाराणसी से जयपुर, इंडिगो के दिल्ली से जयपुर, स्पाइसजेट की सूरत से जयपुर फ्लाइट अहमदाबाद के लिए डायवर्ट हुई। मौसम सही होने के बाद रात करीब 3 बजे यह फ्लाइट जयपुर पहुंची।</p>
<p><strong>चार फ्लाइटों का संचालन रद्द</strong><br />जयपुर एयरपोर्ट से जाने वाली 4 फ्लाइटों का संचालन मंगलवार को रद्द रहा। मंगलवार को एयर एशिया की सुबह 10:25 बजे मुंबई, दोपहर 12:30 बजे चेन्नई, शाम 5:45 बजे हैदराबाद और रात 11:50 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट का संचालन रहा। एयरलाइन कंपनी ने इसके पीछे यात्रीभार कम होना बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--bad-weather-in-jaipur--flight-ahmedabad-diverted--four-flights-canceled/article-10338</link>
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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 15:30:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीषण गर्मी में भी एमबीएस अस्पताल में पंखे खराब</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को भीषण गर्मी में भी ठंडी हवा नसीब नहीं हो पा रही है। अस्पताल के अधिकतर पंखे खराब है और कई पंखों के तो सिर्फ ढांचे लगे हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-in-the-scorching-heat--fans-in-mbs-hospital-are-bad/article-7808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/11111.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में जहां शहर में भीषण गर्मी पड़ रही है  वहां संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को ठंडी हवा तक नसीब नहीं हो पा रही है। अस्पताल के अधिकतर पंखे खराब है और कई पंखों के तो सिर्फ ढांचे लगे हुए हैं।<br /><br />अप्रैल में ही कोटा का तापमान 44 डिग्री से अधिक चल रहा है और न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री से अधिक है । ऐसे में जहां गर्मी से लोग परेशान हैं वहां संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को ठंडी हवा तक नसीब नहीं हो पा रही है। अस्पताल के आउटडोर की गैलरी से लेकर जांच कक्ष तक की गैलरी में पंखे खराब पड़े हुए हैं। हालत यह है  कि घंटो तक अस्पताल में कतारों में लगे रहने के बावजूद लोगों को हवा नसीब नहीं हो पा रही है।<br /> <br />इतना ही नहीं अस्पताल परिसर में ही बने दवा काउंटर में  काफी भीड़ लगी हुई है और उनके सिर पर टीन शेड लगा हुआ है। लेकिन वहां हालत यह है कि आधे टीन शेड में ही 3 पंखे लगे हुए हैं ,उनमें भी अधिकतर बंद है। ऐसे में दोपहर 2.00 बजे बाद तक दवाई की कतार में लगे मरीजों व तीमारदारों के लिए वहां खड़े रहना  मुश्किल हो रहा है । आउटडोर में इमरजेंसी गैलरी अस्थि वार्ड और कई अन्य जगहों पर पंखे बंद होने के साथ ही केवल पंखों के ढांचे लगे हुए हैं। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पिछले कई दिनों से अस्पताल प्रशासन द्वारा यहां से पंखे हटाने के बाद दोबारा लगाने का प्रयास ही नहीं किया गया । जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को यहां आने वाले लोगों के लिए पंखों की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे लोगों को राहत मिल सके । इस गर्मी में पीने का ठंडा पानी भी पूरी तरह से नसीब नहीं हो पा रहा और ना ही हवा मिल पा रही है । ऐसे में अस्पताल में इलाज करवाने आने की जगह बीमार होकर जाना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Apr 2022 17:02:15 +0530</pubDate>
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                <title>रेजीडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल जारी : मरीजों पर बुरा असर, ओपीडी से लेकर ऑपरेशन तक प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ मांगों पर नहीं बनी सहमति रेजीडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%A1%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80---%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%B0--%E0%A4%93%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%91%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-3003"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/hodpital-bhid.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। नीट पीजी काउंसलिंग में देरी सहित अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर रेजीडेंट डॉक्टर्स का कड़ा रुख जारी है। हालांकि राज्य सरकार के स्तर पर मंगलवार शाम को वार्ता दूसरे दौर की वार्ता रेजीडेंट डॉक्टर्स के प्रतिनिधियों के साथ की गई जिसमें लगभग सभी मांगों पर सहमति बन गई थी लेकिन वित्तीय मांगों और एसआरशिप के मुद्दे पर लिखित समझौता नहीं हो पाया। ऐसे में रेजीडेंट्स ने फिलहाल हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। वहीं रेजीडेंट्स ने अब जयपुर सहित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में सभी तरह की सेवाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया है। इससे पहले रेजीडेंट्स ने इमरजेंसी सेवाओं को कार्य बहिष्कार से मुक्त रखा था। जयपुर एसोसिएशन आॅफ रेजीडेंट डॉक्टर जार्ड के अध्यक्ष डॉ. अमित यादव ने बताया कि वार्ता में सभी आठ मांगों पर चर्चा हुई, लेकिन वित्त और एसआर के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई और इसलिए कार्य बहिष्कार सभी मांगों के माने जाने तक जारी रहेगा। <br /><br /><strong>मरीजों की बढ़ती जा रही परेशानी</strong><br />पिछले नौ दिनों से लगातार हड़ताल के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। वहीं अब मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित होने से गंभीर मरीजों को भी एसएमएस सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में इलाज मिलने में परेशानी हो रही है वहीं रेजीडेंट्स के कार्य बहिष्कार से एसएमएस अस्पताल की ओपीडी सेवाओं का हाल बेहाल है। मुट्ठी भर सीनियर डॉक्टर्स के भरोसे मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऑपरेशन लगातार टाले जा रहे हैं। अब लेबर रूम और आईसीयू में भी कार्य बहिष्कार से गंभीर मरीजों की जान पर भी संकट पैदा हो गया है। ऐसे में राज्य सरकार को भी रेजीडेंट्स के साथ वार्ता कर समस्या का हल निकालना होगा नहीं तो मौसमी बीमारियों और कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच मरीजों की जान पर बनी रहेगी। </p>
<p><strong><br />समझौता पत्र बन गया था, लेकिन रेजीडेंट चले गए  </strong><br />जानकारी के अनुसार वार्ता के दौरान रेजीडेटों ने समझौतें पर हामी भर दी थी। अधिकारियों ने बताया कि समझौता पत्र भी तैयार हो गया था, लेकिन रेजीडेंट डॉक्टर्स बाहर आए और बिना समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किए चले गए और हड़ताल जारी रखने की घोषणा कर दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 11:48:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>सीओपीडी से होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर, राजस्थान की भी स्थिति बेहद खराब</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण और धूम्रपान है क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज़ यानी सीओपीडी रोग का बड़ा कारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%93%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A6-%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC/article-2466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/whatsapp-image-2021-11-17-at-12.48.39.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वर्ल्ड copd डे के अवसर आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ अस्थमा एवं स्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि"लगातार धुएं वाले कारकों के संपर्क में आने से और बार-बार लंग संक्रमण के संपर्क से अंतर्निहित सीओपीडी बढ़ सकता है जिससे फेफड़े का दौरा पड़ता है। सीओपीडी पर जागरूकता की कमी की वजह से लोग डॉक्टर्स के पास नहीं जाते हैं जो कि इसके रोकथाम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सीओपीडी के लक्षणों की पहचान करना और लंग-अटैक होने पर चिकित्सक से समय पर सहायता प्राप्त करना इस रोग की प्रगति को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। यदि धूम्रपान करने वालों को यह पता हो कि इससे लंग-अटैक हो सकता है तथा जिसके लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता होती है, वे समय से चिकिसकीय सहायता ले लेंगे। रोग के निदान के लिए नियमित रूप से फेफड़ों के कार्य की जाँच तथा सीओपीडी के जोखिम कारकों कि जांच आवश्यक है।<br /> <br /> फेफड़े के कार्य परीक्षण कि जांच स्पिरोमेट्री से करनी चाहिए जो कि सीओपीडी के निदान के लिए गोल्ड स्टैण्डर्ड है। हालांकि यह आमतौर पर नहीं जांचा जाता है, और निदान काफी हद तक रोगी के इतिहास और लक्षणों पर आधारित होता है। स्पिरोमेट्री नहीं करने की वजह से सीओपीडी के बहुत से मामले जांच में छूट सकते हैं।<br /> <br /> डायग्नोसिस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ वीरेंद्र सिंह ने आगे कहा, "प्रारंभिक स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस फेफड़ों के अटैक के रोग के बोझ को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। श्वसन रोग संबंधी लक्षणों वाली आबादी में स्पिरोमेट्री टेस्ट महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गलत डायग्नोसिस से बचाती है और वायु प्रवाह सीमा की गंभीरता का मूल्यांकन करने में सहायता करती है। जबकि सांस की बीमारियों के कारण पूरी तरह से आपके नियंत्रण में नहीं हो सकते हैं फिर भी समय पर पता लगाने के लिए सतर्क और जागरूक रहना महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 14:17:31 +0530</pubDate>
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                <title>राज्य के हाल-ए-बालिका गृह : कहीं बदहाली तो कहीं व्यवस्थाएं चाकचौबंद</title>
                                    <description><![CDATA[एक वर्ष पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने उदयपुर में किया था पांच अनाथ आश्रमों का निरीक्षण अनेक अनियमितताएं  मिली, सभी बंद, तीन मामलों में जांच जारी,जोधपुर में ऑल इज वेल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%8F-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%83%E0%A4%B9---%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6/article-2311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/balika-grah.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। मंडोर स्थित बालिका गृह में 28 के करीब बालिकाएं निवासरत हैं। बाल अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित इस बालिका गृह में बालिकाओं के संभावित विकास को लेकर काफी बेहतर व्यवस्थाएं की गई है। इनको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो इसका भी विशेष रूप से पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बालिका गृह में सुरक्षा के लिहाज से भी बात करे तो इनके माता-पिता के अलावा किसी अन्य को भी आने की अनुमति तक नहीं है। यहां सुरक्षा कर्मियों की भी नियुक्ति की हुई है। बालिका गृह में शिशु गृह भी संचालित हो रहा है। जहां 13 शिशु हैं। उन्हें गोद देने की प्रक्रिया में चल रहे हैं। नवज्योति टीम ने जब बालिका गृह की व्यवस्थाओं के संबंध में बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. बी एल सारस्वत से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बालिका गृह की बात करे तो यहां पर स्किल डवलपमेंट के कोर्सेज चलाए जा रहे हैं। अभी 6 महीने पहले ही योगा और नेचुरोपैथी के शिविर लगाकर डिप्लोमा कोर्स भी आयुर्वेद विश्वविद्यालय के माध्यम से करवाए गए थे और इस सर्टिफि केट के आधार पर योगा टीचर भी बन सकते हैं। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष धनपत गुर्जर ने कहा कि यहां बालिकाओं के लिए स्किल डवलपमेंट के कोर्स जैसे सिलाई, सेल्फ  डिफेंस व योग के अलावा हर महीने अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जाते हैं। निफ्ट, एनआईएफ टी व एफ डीडीआई के माध्यम से कई महीनों तक प्रशिक्षण कोर्स भी यहां संचालित किए गए।</p>
<p><br /> इनके लिए अलग से आता है फंड:बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष धनपत गुर्जर ने कहा कि सरकार की ओर से काफी बेहतर व्यवस्थाएं की गई है। यहां बच्चियों के शिक्षा से लेकर सभी तरह की जो सुविधाएं होनी चाहिए वह उपलब्ध कराई जा रही है।सरकार इसके लिए बकायदा अलग से फंड देती है जिसके तहत खाना-पीना, रहना व शिक्षा जैसी जरूरतों को बखूबी रूप से पूरा किया जा रहा है। जिससे इनको कभी एहसास नहीं होता है कि वह एक गृह में रह रही है।<br /> <br /> <strong>अनाथ आश्रम में बच्चों से दुर्व्यवहार पर चेता विभाग</strong><br />  उदयपुर। जयपुर के एक अनाथाश्रम में 8 से 10 साल के 8 बच्चों से यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद उदयपुर में भी संबंधित विभाग सतर्क हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद दैनिक नवज्योति की टीम ने गुरुवार को शहर एवं आसपास के निराश्रित बालगृहों का जायजा लिया। निराश्रित बालगृह जीवन ज्योति सुखेर में बच्चे सुबह दस बजे स्कूल में पढ़ने चले गए थे, जो शाम चार बजे तक लौटते हैं। बालगृह में अधीक्षक ओमप्रकाश बंजारा, कोषाधिकारी अरविंद शर्मा सहित स्टॉफ मौजूद था। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा करना उनका दायित्व है। वर्तमान में 60 बच्चे पांच हॉलनुमा कमरों में रहते हैं। एक वर्ष पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तत्कालीन सचिव रिद्धिमा शर्मा ने अभियान चलाकर जिले में संचालित आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया था।  इसमें से करीब पांच स्थलों पर काफी अनियमितताएं सामने आई थी। इसमें कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट को पत्र भी लिखा। परिणामस्वरूप सभी स्थल बंद हो गए। तीन मामलों में अभी जांच चल रही है। <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Nov 2021 14:49:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>एक्शन में मोदी सरकार : खराब काम तो सड़क निर्माण कंपनियों पर होगी कार्रवाई : जुर्माना से ठेका रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के शुरू होने से लेकर निर्माण कार्य और रख-रखाव कार्यों तक के लिए समय सीमा तय कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0---%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%9C%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88---%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A0%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6/article-1508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/sadak-nirman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी की मंशा से अब देश में अच्छी सड़कों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार एक्शन में नजर आ रही है। दरअसल केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के शुरू होने से लेकर निर्माण कार्य और रख-रखाव कार्यों तक के लिए समय सीमा तय कर दी है। सड़क निर्माण कंपनियों ने परियोजना करार के प्रावधानों के अनुसार, काम पूरा नहीं किया तो उनको गैर निष्पादक अर्थात समय पर कार्य पूरा नहीं करने वाले घोषित कर दिये जाएगा। इसके लिए बाकायदा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था में कंपनियों पर जुर्माना लगाने से लेकर ठेका रद्द किया जा सकेगा। इस कवायद का मकसद हर हाल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को समय पर पूरा करना है। एसओपी से निर्माण कंपनियों पर प्रत्येक चरण में नजर रखी जा सकेगी और करार की शर्तों के मुताबिक, काम पूरा नहीं करने पर उनको गैर निष्पादक घोषित किया जा सकेगा। कंपनी का प्रदर्शन सुधरने पर ‘ठप्पा’ हटाया जा सकेगा। मंत्रालय का दावा है कि इससे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर तेजी से काम होगा और परियोजनाएं समय पर पूरा होंगी।<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> गलती पर ये होगी कार्रवाई</strong></span></span><br /> बता दे कि घटिया निर्माण से ढांचा गिरने अथवा क्षतिग्रस्त राजमार्ग से जानमाल का नुकसान पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा और एक साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा। कंपनी की टीम के प्रमुख अधिकारी पर तीन साल के लिए पद से हटा दिया जाएगा। इसमें अधिकारी निर्माण कंपनी का ठेका रद्द कर सकते हैं। हालांकि, इसके पूर्व कंपनी को नोटिस दिया जाएगा और अपनी बात रखने का मौका भी मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 11:20:32 +0530</pubDate>
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