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                <title>एमबीएस में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का संकट, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बदहाल ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-trolleys--stretchers--and-wheelchairs-at-mbs-hospital--causing-distress-to-patients/article-138578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बिगड़ती जा रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में शहर के बाहर से आने वाले मरीज भी शामिल हैं, जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>परिजन खुद करते मशक्कत</strong><br />अस्पताल में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इमरजेंसी और ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में परिजनों को खुद मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार मरीजों को सहारे से या गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों का कहना</strong><br />एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं किया गया। पहले भी कई बार व्यवस्थाओं की लापरवाही सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में तत्काल पर्याप्त संख्या में ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही अस्पताल प्रबंधन की नियमित निगरानी हो, ताकि संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को सम्मानजनक और सुचारु स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>घर से लाना पड़ रहा स्ट्रेचर</strong><br />सरकारी अस्पताल अब सिर्फ नाम का रह गया है। समय पर इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहा पर ट्रॉली, स्ट्रेचर की व्यवस्था नही होने के कारण घर से ही लाना पड़ रहा है।<br /><strong>-जीतू ,संजय नगर निवासी</strong></p>
<p><strong>ढूंढने पर भी नहीं मिली व्हीलचेयर</strong><br />मैनें पूरे अस्पताल परिसर में ट्रॉली और व्हीलचेयर ढूंढी, लेकिन कहीं भी उपलब्ध नहीं हुई। में मरीज चलने की हालत में नहीं था, ऐसे में परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।  ऐसी स्थिति में मरीज की जान पर भी खतरा बन सकता है।<br /><strong>- रमेश, नया नौहरा</strong></p>
<p>ट्रॉली व स्ट्रेचर की कमी होने पर तुरंत स्टॉक से उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।<br /><strong>- कुंज बिहारी मीणा, नर्सिंग इंचार्ज एवं इमरजेंसी प्रभारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं दिखते ट्रॉली मेन, तीमारदार खुद स्ट्रेचर खींचने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीचेयर की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-trolley-men-are-not-seen--attendants-are-forced-to-pull-the-stretchers-themselves/article-120046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस की व्यवस्था बेपटरी पर चल रही है। यहां आकर मरीज अपने को असहाय महसूस करता है। पहले तो लंबी कतार में खड़े होकर पर्ची बनाने का दर्द झेलना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने से लेकर वार्ड में भर्ती होने तक उसे कई परेशानियों से दोचार होना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी तो गंभीर रूप से बीमार और घायल मरीजों को आती है। वाहन से उतार कर डॉक्टर तक ले जाने के लिए अस्पताल के गेट पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होते है। तीमारदारों  को पहले तो स्ट्रेचर ढूंढना पड़ता है, फिर मरीज को लेटाकर स्वयं ही इमजेंसी तक ले जाना पड़ता है। जबकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास ही ट्रॉली स्टैंड बना रखा है और वहां ट्रॉलीमैन की ड्यूटी भी लगा रखी है।  लेकिन स्टैंड पर ना तो ट्रॉली मिलती है ना ही ट्रॉलीमैन।  अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तीमारदार ट्रॉली से मरीज वार्ड में ले जाने के बाद ट्रॉली वहीं छोड़ देते है। जिससे स्टैंड पर ट्रॉलियां नहीं मिलती है। जबकि ट्रॉली उपयोग करने के बाद उसे स्टैंड पर पहुंचा दें तो ुअन्य मरीजों परेशानी नहीं होगी। उधर तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीचेयर की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तीमारदार ट्रोली नहीं मिलने के कारण गोद में उठाकर ले जाते हंै। अस्पताल प्रशासन का कहना है की तीमारदार अपने मरीजों को जिस वार्ड में लेकर जाते है वहीं पर स्ट्रेचर व व्हीलचेयर को वहीं छोड़ देते है। अगर वह उनकी निर्धारित जगह पर लाकर रखते है तो जरूरत पड़ने पर इधर उधर तलाश नहीं करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ढूंढ कर लाना पड़ता स्ट्रेचर</strong><br />स्ट्रेचर नहीं मिलने से उसे इधर उधर ढूंढना पड़ता है। मरीजों को ओटी, वार्ड और सीटी स्केन के लिए ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के वार्डो से ढूंढ कर व्हीलच्चेयर व स्ट्रेचर लाना पड़ता है। <br /><strong>-दीपक प्रजापति, तीमारदार</strong></p>
<p><strong>ट्रॉलीमैन का स्थान नहीं है निर्धारित,ढूंढना होता मुश्किल</strong><br />मेरे पड़ोसी के बीमार होने पर अस्पताल लेकर गया। डॉक्टर ने इमजेंसी में ले जाने के लिए कहा मैंने स्ट्रेचर और ट्रॉलीमैन को तलाशा लेकिन वो नहीं मिला तो मैं स्वयं ही पड़ोसी को ट्रॉली पर लेटाकर इमरजेेंंसी कक्ष में लेकर गया। अस्पताल में व्यवस्था चरमराई हुई है। अस्पताल में वार्ड में वार्ड बॉय नजर तक नहीं आते है।  वहीं ट्रॉली काउंटर पर लगाए गए कर्मचारी भी वहां नजर नहीं आते हंै। अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों को तीमारदार ही चिकित्सकों के कक्ष से लेकर वार्ड तक लाते ले जाते हैं। कभी व्हीलचेयर तो कभी स्ट्रेचर स्वयं ही ले जाना मजबूरी है। <br /><strong>-मनीष सामरिया, बोरखेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसका पूरा प्रयास किया जाता है। फिर भी स्ट्रेचर की कमी होती है तो स्टोर से उपलब्ध करा दिया जाता है। <br /><strong>-धर्मराज मीणा, अधीक्षक , एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:35:30 +0530</pubDate>
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