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                <title>last week - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अफगान संकट</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान में अफगानिस्तान को लेकर एक दिन मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%85%E0%A4%AB%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/article-3444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/fggdaasas.jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान में अफगानिस्तान को लेकर एक दिन मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। पाकिस्तान के सम्मेलन में 57 देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों के अलावा अफगानिस्तान, रूस, अमेरिका व चीन और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में भारत को आमंत्रित नहीं किया गया। गौरतलब है कि भारत ने पिछले दिनों जब अफगानिस्तान पर पड़ोसी देशों के सुरक्षा सलाहकारों का सम्मेलन हुआ था तब भारत ने पाकिस्तान व चीन दोनों को आमंत्रित किया था, लेकिन दोनों देशों ने उसका बहिष्कार किया। भारत ने विदेश मंत्रियों का जो सम्मेलन बुलाया था उसमें मध्य एशिया के पांचों मुस्लिम गणतंत्रों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। ये देश पाकिस्तानी सम्मेलन में नहीं गए। पाकिस्तानी सम्मेलन में सिर्फ अफगानिस्तान था, जबकि भारतीय सम्मेलन में अफगानिस्तान से संबंधित सभी विषयों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में शामिल कजाकिस्तान किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने भारत सहित अफगानिस्तान की हालात पर चिंता व्यक्ति की। इन सभी देशों पर अफगानिस्तान की हर घटना का असर पड़ रहा है। ये सभी देश अफगानिस्तान के पड़ोसी हैं। सभी देशों की बड़ी चिंता यह थी कि आखिर अफगानिस्तान की जमीन से होने वाले आतंकवाद से कैसे बचा जाए? भारत शुरू से ही इस बात पर जोर देता रहा है कि अफगानिस्तान को आतंकवाद का नया ठिकाना बनने से रोकना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो पाकिस्तान के बाद वह भी दुनियाभर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू कर देगा। अफगानिस्तान इस समय न केवल भुखमरी और कंगाली से जूझ रहा है, बल्कि तालिबानी शासन भी जनता के लिए संकट बना हुआ है। अफगानिस्तान में तालिबानी सत्ता के चार महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक वहां से यह संकेत नहीं मिला कि तालिबानी शासन दुनिया के साथ मिलकर चलना चाहता है। अफगानिस्तान के पड़ोसी देश इस बात से भी चिंतित हैं कि बड़ी संख्या में शरणार्थी उनके यहां पहुंच रहे हैं। तालिबानी लड़ाकों और अन्य आतंकी गुटों के बीच चल रहे संघर्ष से नागरिक खासा चिंतित हैं। महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाए जा रहे हैं। सभी पड़ोसी देश चिंतित हैं, लेकिन भारत की चिंताएं विशेष हैं। सभी पड़ोसी देश अफगानिस्तान की मदद को तैयार हैं, लेकिन तालिबानी सत्ता किसी के हितों को समझने को तैयार नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 17:45:32 +0530</pubDate>
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                <title>भारत और चीन के सैनिकों के बीच फिर झड़प</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और चीन के सैनिकों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के यांगत्से में पिछले सप्ताह मामूली झड़प]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%9D%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%AA/article-1511"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/india-china.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता ये हम यूं ही नहीं कहते। दरअसल भारत और चीन के सैनिकों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के यांगत्से में पिछले सप्ताह मामूली झड़प हुई थी। जिससे चीन के मनसूबों पर सवाल उठना लाजमी है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र में दोनों सेनाओं के सैनिकों का नियमित गश्त के दौरान आमना सामना हुआ और कहासुनी भी हुई। सूत्रों का कहना है कि सीमा रेखा का निर्धारण नहीं होने के कारण वास्तविक नियंत्रण रेखा की दोनों देशों की अपनी-अपनी अलग अवधारणा के कारण इस तरह के टकराव होते रहते हैं और इनका स्थानीय स्तर पर समाधान कर लिया जाता है। इस मामले में भी टकराव का स्थानीय स्तर पर बातचीत के बाद समाधान कर लिया गया और इस दौरान किसी भी तरह की क्षति नहीं हुई है।</p>
<p><br /> पिछले वर्ष गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प के बाद से अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा में पहली बार दोनों देशों के सैनिकों का आमना सामना हुआ है। सूत्रों ने कहा कि सीमा क्षेत्र से संबंधित मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दोनों देशों के बीच शांति और मैत्री कायम की जाती रही है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर दोनों सेनाएं अपनी-अपनी अवधारणा के अनुसार अपने क्षेत्रों में नियमित गस्त करती हैं और जब कभी दोनों देशों के सैनिक व्यक्तिगत रूप से आमने-सामने होते हैं तो स्थिति का समाधान स्थापित प्रोटोकॉल और दोनों पक्षों द्वारा स्थापित प्रणाली के तहत किया जाता है। समस्या के समाधान के बाद दोनों देशों के सैनिक अपने-अपने क्षेत्रों में वापस लौट जाते हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में पिछले सप्ताह कुछ चीनी सैनिकों को हिरासत में लिया था। संभवतः इसी घटनाक्रम के बाद स्थिति को स्पष्ट किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 11:42:48 +0530</pubDate>
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