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                <title>Trade Deficit - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Trade Deficit RSS Feed</description>
                
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                <title>मिडिल ईस्ट में जंग छेड़ने के बाद नए ट्रेड फ्रेमवर्क में भारत समेत कई देशों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा फैसला, बढ़ते व्यापार घाटे को बताया राष्ट्रीय चिंता का विषय</title>
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                        <![CDATA[मिडिल ईस्ट संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 व्यापार नीति जारी कर "मजबूत अमेरिका" का संदेश दिया है। एजेंडे का मुख्य लक्ष्य व्यापार घाटे को कम करना, टैरिफ सख्ती से लागू करना और चीन पर निर्भरता घटाना है। प्रशासन अब भारत और यूरोपीय संघ जैसे सहयोगियों के साथ आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और नए समझौतों पर ध्यान केंद्रित करेगा।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-waging-war-in-the-middle-east-us-president-trumps/article-145166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव के बीच वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। एक ओर अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले तेज हुए हैं, वहीं ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है। इस तनावपूर्ण माहौल में व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 2026 का व्यापार नीति एजेंडा जारी कर नया संदेश दिया है—“अमेरिका फिर से मजबूती से खड़ा है।”</p>
<p>एजेंडे में बढ़ते व्यापार घाटे को राष्ट्रीय चिंता का विषय बताया गया है। दस्तावेज के अनुसार, बीते दशकों में विनिर्माण क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ, लाखों नौकरियां विदेश चली गईं और हजारों कारखाने बंद हुए। प्रशासन का दावा है कि टैरिफ को सख्ती से लागू करने और पुराने व्यापार समझौतों की पुनर्समीक्षा से हाल के महीनों में वस्तु व्यापार घाटे में कमी आई है।</p>
<p>चीन के साथ व्यापार संतुलन में सुधार को भी बड़ी उपलब्धि बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में चीन के साथ घाटा उल्लेखनीय रूप से घटा और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<p>2026 के लिए छह प्राथमिकताओं में पारस्परिक व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा, अमेरिका–मेक्सिको–कनाडा समझौता की समीक्षा और विश्व व्यापार संगठन के ढांचे में संतुलित व्यापार की वकालत शामिल है। भारत, जापान और यूरोपीय संघ जैसे साझेदारों के साथ नए ढांचा समझौतों पर भी जोर दिया गया है।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध और व्यापार नीति का यह मेल आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 10:39:14 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान संघर्ष का एशिया, अफ्रीका और यूरोप के लिए गंभीर नतीजों की आशंका</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ईरान-इजराइल युद्ध ने शिपिंग लागत में 20% की वृद्धि और निर्यात में भारी गिरावट के साथ भारतीय व्यापार को संकट में डाल दिया है। लाल सागर मार्ग बाधित होने से पेट्रोलियम और चाय निर्यात प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और शेयर बाजार में अस्थिरता भारत की आर्थिक रिकवरी और IMEC कॉरिडोर के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-conflict-likely-to-have-serious-consequences-for-asia-africa/article-145016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इस संघर्ष ने यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिये महत्त्वपूर्ण प्रमुख शिपिंग मार्गों पर व्यवधान के जोखिम को बढ़ा दिया है। विश्व के रणीनीति विशेषज्ञ इस जंग से चिंतित हैं।  लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे प्रतिवर्ष 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के माल के आवागमन में सहायक होते हैं। इस अस्थिरता से न केवल नौवहन मार्गों को खतरा है, बल्कि समुद्री व्यापार की समग्र सुरक्षा को भी खतरा है।</p>
<p><strong>निर्यात पर आर्थिक प्रभाव: </strong>संघर्ष के बढ़ने से भारतीय निर्यात पर असर पड़ना आरंभ हो गया है। उदाहरण के लिये अगस्त 2024 में निर्यात में 9 प्रतिनिधि की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण लाल सागर में संकट के कारण पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में 38 प्रतिशत की भारी गिरावट है। ये निर्यात भारत के व्यापार का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है तथा कुल पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात का 21 प्रतिशत  यूरोप को प्राप्त होता है। मूलत: चाय उद्योग में कमजोरी देखी गई है। रान भारतीय चाय के सबसे बड़े आयातकों में से एक है (भारत का निर्यात वर्ष 2024 की शुरूआत में 4.91 मिलियन किलोग्राम तक पहुँच जाएगा), इसलिये शिपमेंट पर संघर्ष के प्रभाव के बारे में चिंताएं उत्पन्न हुई हैं। </p>
<p><strong>बढ़ती शिपिंग लागत:</strong> संघर्ष-संबंधी परिवर्तन के कारण शिपिंग मार्ग लंबे हो जाने से लागत में 15-20प्रतिशत  की वृद्धि हुई है। शिपिंग दरों में इस उछाल से भारतीय निर्यातकों के लाभ मार्जिन पर असर पड़ा है, विशेष रूप से निम्न-स्तरीय इंजीनियरिंग उत्पादों, वस्त्रों और परिधानों का व्यापार करने वाले निर्यातकों के लिये जो माल ढुलाई लागत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। निर्यातकों ने बताया है कि बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत उनके समग्र लाभप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे उन्हें मूल्य निर्धारण रणनीतियों और परिचालन दक्षताओं पर पुनर्विचार करने के लिये बाध्य होना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>भारत-यूरोप आर्थिक गलियारा </strong></p>
<p>भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान भारत, खाड़ी और यूरोप को जोड़ने वाला एक कुशल व्यापार मार्ग बनाने के लिये कटएउ का उद्देश्य स्वेज नहर पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का सामना करना है। जारी संघर्ष से इस गलियारे की प्रगति और व्यवहार्यता को खतरा है, जिससे भारत और उसके साझेदारों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिशीलता पर भी असर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>कच्चे तेल की कीमतों पर असर</strong></p>
<p>चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया है। चूँकि ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक है, इसलिये किसी भी सैन्य वृद्धि से तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। तेल की ऊची कीमतें केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करने से रोक सकती हैं, क्योंकि बढ़ी हुई मुद्रास्फीति आर्थिक सुधार के प्रयासों को जटिल बना सकती है।</p>
<p><strong>भारतीय बाजारों पर प्रभाव</strong></p>
<p>भारत तेल आयात पर बहुत अधिक निर्भर है (इसकी 80 प्रतिशत  से अधिक तेल की जरूरतों की पूर्ति विदेशों से होती है), जिससे यह कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है। तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि से निवेशकों का ध्यान भारतीय इक्विटी से हटकर बॉन्ड या सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर जा सकता है। भारतीय शेयर बाजार पर इसका प्रभाव पहले ही पड़ चुका है, तथा लंबे समय तक संघर्ष चलने की आशंका के बीच सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले।</p>
<p><strong>सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोना </strong></p>
<p>भू-राजनीतिक तनाव और निवेश रणनीतियों में बदलाव के कारण सोने की कीमतें नई ऊँचाइयों पर पहुँच गई हैं। अनिश्चितता के समय में निवेशक प्राय: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे इसकी कीमत और बढ़ सकती है।</p>
<p><strong>रसद संबंधी चुनौतियां</strong></p>
<p>भारतीय निर्यातक वर्तमान में प्रतीक्षा और निगरानी की स्थिति में हैं। कुछ निर्यातक सरकार से विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिये एक प्रतिष्ठित भारतीय शिपिंग लाइन विकसित करने में निवेश करने का आग्रह कर रहे हैं, जो प्राय: उच्च परिवहन शुल्क लगाती हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:45:12 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>रूसी राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने फिनलैंड में आई मुसिबतों के लिए रिश्ते में आई खटास को ठहराया जिम्मेदार, कहा-ईस्टर्न ट्रेड के खत्म होने से देश में आई गहरी आर्थिक मंदी</title>
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                        <![CDATA[रूसी राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने कहा कि रूस से संबंध तोड़कर फिनलैंड गहरे आर्थिक संकट, रिकॉर्ड बेरोजगारी और भारी कर्ज में डूब गया है। देश की जीडीपी वृद्धि भी शून्य हो गई है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-ambassador-pavel-kuznetsov-blamed-the-sourness-in-relations-for/article-143164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>हेलेंस्की। फिनलैंड में रूस के राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने कहा है कि रूस के साथ संबंध टूटने के कारण फिनलैंड संकट का सामना कर रहा है। देश में रिकॉर्ड बेरोजगारी, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में शून्य वृद्धि, तेजी से बढ़ता राज्य ऋण और बजट घाटा बहुत ज्यादा है।</p>
<p>रूसी राजदून कुजनेत्सोव ने कहा, फिनलैंड अपने आधुनिक इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक से गुजर रहा है। मौजूदा सामाजिक-आर्थिक स्थिति की तुलना 1990 के दशक के उस संकट से की जा सकती है, जब सोवियत संघ के पतन के बाद ईस्टर्न ट्रेड के खत्म होने से देश गहरे आर्थिक मंदी में चला गया था। </p>
<p>पावेल कुजनेत्सोव के अनुसार, विशेष सैन्य अभियान शुरू होने के बाद फिनलैंड ने रूस के साथ सभी संपर्क और संबंध तोड़ दिये, जिससे दशकों में विकसित व्यापार और आर्थिक सहयोग को झटका लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फिनलैंड ने यह कदम स्वयं की पहल पर उठाया और अब उसके परिणाम भुगत रहा है।</p>
<p>राजदूत ने कहा कि हाल के वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि ठप हो गयी है और वर्ष 2025 में जीडीपी वृद्धि शून्य या उससे थोड़ा अधिक रहने की संभावना है। सार्वजनिक वित्त की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक ऋण तेजी से बढ़ रहा है और अब जीडीपी के लगभग 90 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है, जबकि कुछ समय पहले तक यह 60 प्रतिशत से कम था। वर्ष 2024 में बजट घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा और 2025 में इसके और बढऩे की आशंका है।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि फिनलैंड में बेरोजगारी दर 10.6 प्रतिशत तक पहुंच गयी है, जो यूरोपीय संघ में सबसे अधिक बतायी जा रही है। साथ ही, 1990 के दशक के संकट के बाद से कंपनियों द्वारा दिवालिया होने के लिए दायर आवेदनों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो 3,900 से अधिक है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 14:53:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>दिसंबर में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर पर पहुंचा</title>
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                        <![CDATA[निर्यात के मुकाबले आयात में 8.67% की तेज वृद्धि से दिसंबर 2025 में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/goods-trade-deficit-increased-to-2504-billion-dollars-in-december/article-139716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bussiness.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। निर्यात के मुकाबले आयात में तेज बढ़ोतरी से देश का वस्तु व्यापार घाटा दिसंबर 2025 में बढ़कर 25.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले साल दिसंबर में यह 20.63 अरब डॉलर रहा था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों में बताया गया है कि दिसंबर 2025 में वस्तु निर्यात 1.88 प्रतिशत बढ़कर 38.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं वस्तु आयात 8.67 फीसदी की वृद्धि के साथ 63.55 अरब डॉलर हो गया। </p>
<p>सेवाओं का निर्यात एक साल पहले के 36.97 अरब डॉलर से घटकर 35.50 अरब डॉलर रह गया। सेवाओं के आयात में भी कमी आयी है और यह 17.80 अरब डॉलर की तुलना में 17.38 अरब डॉलर रह गया। </p>
<p>इस प्रकार, सेवाओं और वस्तुओं को मिलाकर कुल निर्यात 74.01 अरब डॉलर और कुल आयात 80.94 अरब डॉलर रहा। इसमें सालाना आधार पर निर्यात घटा है जबकि आयात बढ़ा है। कुल व्यापार घाटा दिसंबर 2024 के 1.46 अरब डॉलर से बढ़कर 6.92 अरब डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 17:49:09 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>ट्रंप की भारत को चेतावनी: 'रूसी तेल नहीं छोड़ा, तो और बढ़ेंगे आयात शुल्क', जानें पूरा मामला</title>
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                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि अगर नई दिल्ली रूसी तेल से जुड़ी चिंताओं पर मदद नहीं करता है, तो अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ा सकता है।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-warning-to-india-that-import-duties-will-increase-further/article-138411"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump-and-modi.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल का आयात करने के मामले में भारत पर आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि वॉशिंगटन इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के लिए तैयार है और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मुद्दे पर उनकी नाराजगी से अवगत हैं।</p>
<p>अपने हवाई जहाज एयर फोर्स वन पर रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमेरिकी ट्रंप ने कहा, पीएम मोदी रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार पर उनकी नाराजगी को जानते हैं। पीएम मोदी एक बहुत अच्छे इंसान हैं और वह जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी शुल्क बढ़ा सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आयी है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार (एजेंसी) चल रही है और अमेरिका ने भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगा रखा है।</p>
<p>यह घटनाक्रम वेनेजुएला में हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका ने हिरासत में लिया था। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल भू-राजनीति पर दुनिया का ध्यान खींचा है। ओपेक के आंकड़ों के अनुसार वेनेजुएला के पास 300 अरब बैरल से अधिक का दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 17 से 18 प्रतिशत है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका के आयात शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत तक करने के बाद से पीएम मोदी और अमेरिकी ट्रंप के बीच तीन बार बातचीत हुई है। इस शुल्क वृद्धि से कपड़ा, रसायन और झींगा मछली जैसी चीजों के निर्यात पर असर पड़ा है। दोनों पक्षों के बीच व्यापार (एजेंसी) जुलाई के अंत में तब विफल हो गयी थी, जब भारत ने अपने कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने का विरोध किया था और भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। बातचीत हालांकि तब से जारी है।</p>
<p>दिसंबर 2025 में अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर ने नयी दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ दो दिनों में बैठकें की थीं। इस दौरान भारत ने रूसी तेल खरीद से जुड़े दंडात्मक शुल्कों से राहत देने पर जोर दिया था। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने इन चर्चाओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर अमेरिकी बाजार में चावल की डंपिंग करने का आरोप लगाते हुए भारतीय चावल के आयात पर भी नया शुल्क लगाने का संकेत दे चुके हैं।  </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:38:40 +0530</pubDate>
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                <title>व्यापार घाटा कम होकर 20.31 अरब डॉलर हुआ, पेट्रोलियम और ज्वैलरी आयात बढ़ा</title>
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                        <![CDATA[चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का व्यापार घाटा कम होकर 20.31 अरब डॉलर रह गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/trade-deficit-reduced-to-2031-billion-petroleum-and-jewelery/article-120614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer-(5)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का व्यापार घाटा कम होकर 20.31 अरब डॉलर रह गया। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 22.42 अरब डॉलर रहा था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि अप्रैल-जून 2025 में देश का कुल आयात 230.62 अरब डॉलर और कुल निर्यात 210.31 अरब डॉलर रहा। आयात की तुलना में निर्यात ज्यादा बढ़ने से व्यापार घाटे में कमी आयी है। पिछले साल की समान तिमाही में आयात  220.94 अरब डॉलर और निर्यात 198.52 अरब डॉलर था। इसमें वस्तु निर्यात 1.92% बढ़कर 112.17 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 10.93% बढ़कर 98.13 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वस्तु आयात 4.23% और सेवा आयात 4.92% बढ़कर क्रमश: 179.44 अरब डॉलर और 51.18 अरब डॉलर पर रहे। मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल-जून की तिमाही में गैर-पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 5.97% बढ़कर 94.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 89.42 अरब डॉलर था।</p>
<p><strong>पेट्रोलियम और ज्वैलरी आयात बढ़ा :</strong></p>
<p>तिमाही के दौरान पेट्रोलियम और हीरे-जवाहरात को छोड़कर अन्य वस्तुओं का आयात 117.02 अरब डॉलर और निर्यात 88.10 अरब डॉलर रहा। जून 2025 में कुल निर्यात 67.98 अरब डॉलर और कुल आयात 71.50 अरब डॉलर रहा। इसमें वस्तु निर्यात 35.14 अरब डॉलर और आयात 53.92 अरब डॉलर रहा। इस दौरान सेवाओं का निर्यात 32.84 अरब डॉलर और आयात 17.58 अरब डॉलर दर्ज किया गया।   </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 10:51:24 +0530</pubDate>
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