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                <title>rajasthan tiger protecation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>rajasthan tiger protecation RSS Feed</description>
                
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                <title>अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : बाघों की दहाड़ से गूंज रहा राजस्थान, 149 तक पहुंची बाघों की संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के पांचों टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 149 पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष 135 थी। इस साल 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया। रणथम्भौर में सबसे अधिक 72 और सरिस्का में 56 बाघ हैं। विशेषज्ञ इसे सफल संरक्षण का परिणाम मान रहे हैं, हालांकि बढ़ती संख्या अब नए आवास की चुनौती भी बन रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-is-resonating-with-the-roar-of-tigers-on-international/article-161260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कभी महज 18-20 बाघों तक सिमट चुके राजस्थान के जंगल आज फिर दहाड़ से गूंज रहे हैं। प्रदेश के पांचों टाइगर रिजर्व रणथम्भौर, सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और धौलपुर-करौली में बाघ, बाघिन और शावकों की कुल संख्या बढ़कर 149 हो गई है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 135 था। </p>
<p><strong>54 बाघिनों ने 53 शावकों को दिया जन्म</strong><br />मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद के अनुसार इस वर्ष प्रदेश के पांचों बाघ अभयारण्यों में 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया है, जबकि 2025 में 52 बाघिनों से 43 शावकों का जन्म हुआ था। इस बार सरिस्का टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक 28 शावकों का जन्म दर्ज किया गया। वर्तमान में रणथम्भौर में 72 बाघ (बाघ, बाघिन और शावक) हैं, जबकि पिछले वर्ष यहां इनकी संख्या 66 थी। सरिस्का में इनकी संख्या बढ़कर 56 हो गई है। जो पिछले वर्ष 50 थी। प्रदेश के बाघ अभयारणयों में वयस्क बाघ-बाघिनों की संख्या करीब 96 है। अकेले रणथम्भौर में लगभग 50 वयस्क बाघ-बाघिन और 22 शावक हैं। वहीं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 4 बाघिन, दो बाघ और एक शावक है। </p>
<p><strong>बाघों की नई आबादी बसाने में निभाई अहम भूमिका</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या जंगलों के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। करीब दो दशक पहले राजस्थान में बाघों का अस्तित्व संकट में था, लेकिन आज राज्य देश के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप में शामिल हो चुका है। रणथम्भौर में प्रे-बेस, विकसित घासभूमियां और बेहतर संरक्षण रणनीति को प्रमुख कारण माना जाता है। यहां बाघों का सर्वाइवल रेट लगभग 80 प्रतिशत है। बाघिन मछली (टी-16) की वंश परंपरा ने सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी जैसे क्षेत्रों में बाघों की नई आबादी बसाने में अहम भूमिका निभाई। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के डीसीएफ मानस सिंह ने बताया कि यहां पर्यटकों को बाघों की अच्छी साइटिंग होती है। <br />यहां बाघों के लिए प्रे-बेस की कमी नहीं है। </p>
<p><strong>एक नर बाघ 40-50 वर्ग किमी की होती है आवश्यकता</strong><br />हालांकि बढ़ती संख्या अब वन विभाग के लिए नई परीक्षा भी बन रही है। लगभग 1,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले रणथम्भौर में बाघों का सक्रिय विचरण करीब 700 वर्ग किलोमीटर तक सीमित है। जबकि इसकी क्षमता 40-50 बाघों की मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार एक वयस्क नर बाघ को 40-50 वर्ग किलोमीटर और बाघिन को लगभग 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। ऐसे में युवा बाघ नए क्षेत्र की तलाश में अन्य जंगलों और मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:26:19 +0530</pubDate>
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                <title>सुरक्षा और संरक्षण को लेकर अरण्य भवन में हुई बैठक : सीसीटीवी, ड्रोन सर्विलांस को और अधिक प्रभावी बनाते हुए टाइगर रिजर्व की निगरानी सुदृढ़ की जाएं- संजय शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[बैठक में सांसद दुष्यंत सिंह, हरीश मीना, विधायक संदीप शर्मा, एसीएस फोरेस्ट आनंद कुमार, पीसीसीएफ हॉफ अरिजीत बनर्जी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/meeting-held-in-aranya-bhavan-on-security-and-protection-should/article-120988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/45621.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में बाघों के संरक्षण और टाइगर रिजर्व की प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित राजस्थान बाघ संरक्षण फाउंडेशन के शासी निकाय की तीसरी बैठक शुक्रवार को अरण्य भवन में हुई। इसकी अध्यक्षता वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने की। बैठक में रणथम्भौर, सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, धौलपुर और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों की वर्तमान संख्या, उनके मूवमेंट पैटर्न, मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति, निगरानी व्यवस्था में तकनीकी संसाधनों का उपयोग तथा बाघ संरक्षण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं और भावी रणनीतियों पर चर्चा हुई। वन राज्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीसीटीवी, ड्रोन सर्विलांस और ई-गश्त प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाते हुए टाइगर रिजर्व की निगरानी को सुदृढ़ किया जाए। शर्मा ने निर्देश दिए कि अभयारण्यों में आने वाले पर्यटकों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता और रख-रखाव की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। </p>
<p><strong>कार्मिकों और स्थानीय लोगों का बीमा: </strong>वन विभाग कार्मिकों और टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों के निवासियों के लिए जीवन बीमा किए जा रहे हैं। फाउंडेशन की ओर से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में एक करोड़ रुपए के पेट्रोलिंग वाहन एवं एंटी-पोचिंग कैंप के लिए किए गए एमओयू का अनुमोदन हुआ। बैठक में सांसद दुष्यंत सिंह, हरीश मीना, विधायक संदीप शर्मा, एसीएस फोरेस्ट आनंद कुमार, पीसीसीएफ हॉफ अरिजीत बनर्जी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 12:32:01 +0530</pubDate>
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