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                <title>यूक्रेन-रूस युद्ध: पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन संकट की बात, यूक्रेन के हमलों का बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया कि यूक्रेन के लगातार हमलों से रूस के तेल ढांचे पर असर पड़ा है और कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी बनी हुई है। सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-shaken-by-ukraines-drone-attack-putin-said-struggling/article-158401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/putin.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया है कि यूक्रेन द्वारा तेल अवसंरचना पर लगातार किए जा रहे हमलों के कारण देश को "कुछ हद तक ईंधन की कमी" का सामना करना पड़ रहा है और सरकार ईंधन उत्पादन बढ़ाने तथा तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है। पुतिन ने रविवार को अधिकारियों के साथ ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक में कहा कि देश "कठिन दौर" से गुजर रहा है, लेकिन सरकार अपनी सभी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी। इस बीच यूक्रेन ने दक्षिणी रूस की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर फिर हमला किया। क्षेत्रीय गवर्नर वेनियामिन कोंद्रात्येव के अनुसार, गिरते मलबे की चपेट में आकर स्लाव्यान्स्क में एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा निकटवर्ती गांव में एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया।</p>
<p>करीब 40 लाख टन कच्चे तेल का वार्षिक प्रसंस्करण करने वाली यह रिफाइनरी दक्षिणी रूस की प्रमुख रिफाइनरियों में शामिल है और काला सागर के बंदरगाहों के जरिए निर्यात होने वाले फ्यूल ऑयल, नैफ्था और समुद्री ईंधन का प्रमुख स्रोत है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन की सीमा से लगभग 700 किलोमीटर दूर यारोस्लाव क्षेत्र स्थित एक अन्य रूसी रिफाइनरी पर भी रात के समय हमला किया गया। हालांकि रूसी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। ताजा हमलों के बाद श्री पुतिन ने तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने और ईंधन उत्पादन में वृद्धि करने का निर्देश दिया। उन्होंने सरकारी टेलीविजन से कहा कि रूस की रक्षा उद्योग जल्द ही वायु रक्षा प्रणालियों का उत्पादन बढ़ाएगी ताकि यूक्रेनी हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।</p>
<p>उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर नहीं है और अस्थायी ईंधन कमी को दूर करने के लिए रूस अधिक ईंधन आयात करेगा तथा क्षतिग्रस्त तेल प्रतिष्ठानों की मरम्मत का कार्य तेज करेगा। पुतिन ने विशेष रूप से क्रीमिया में ईंधन की कमी को शीघ्र दूर करने का आश्वासन देते हुए कहा कि काला सागर प्रायद्वीप में थल और समुद्री मार्ग से ईंधन की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी और उन्हें विश्वास है कि यह लक्ष्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यूक्रेन के तेल रिफाइनरियों पर हमलों को रूसी समाज में विभाजन पैदा करने और रूस को अग्रिम मोर्चे पर अपनी सैन्य प्रगति रोकने के लिए मजबूर करने का प्रयास बताया।</p>
<p>पुतिन ने कहा, "हम उन्हें यह मौका नहीं देंगे। हमारी अवसंरचना पर किये गये हमलों का अग्रिम मोर्चे की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।" रूसी राष्ट्रपति ने पहली बार यह भी खुलासा किया कि यूक्रेन ने दोनों देशों के बीच अग्रिम मोर्चे से दूर गहरे क्षेत्रों पर हमले रोकने का प्रस्ताव दिया था। पुतिन ने दावा किया कि कीव ने यह प्रस्ताव इसलिए दिया क्योंकि रूस की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता अधिक प्रभावी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने 2022 में रूस द्वारा एकतरफा विलय किये गये डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया तक ही सक्रिय लड़ाई सीमित रखने का भी प्रस्ताव दिया था। श्री पुतिन ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह यूक्रेनी सेना को अन्य क्षेत्रों से अपने सैनिक हटाकर इन चार क्षेत्रों में केंद्रित करने की रणनीतिक चाल थी और रूस इस तरह की किसी व्यवस्था से सहमत नहीं होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टिबोर गास्पर का दावा : रूस से ऊर्जा आपूर्ति बंद होने से यूरोप छोड़ रहे हैं उद्योग; रूसी तेल की वापसी पीछे जाने का कदम नहीं, ऊर्जा नीति की दिशा में अहम कदम होगा</title>
                                    <description><![CDATA[स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने चेतावनी दी है कि सस्ती रूसी ऊर्जा के बिना यूरोपीय उद्योग ईयू से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिरता के लिए रूसी ऊर्जा की वापसी को 'यथार्थवादी नीति' बताया। गास्पर के अनुसार, केवल अमेरिकी एलएनजी पर निर्भरता के बजाय रूस को एक विकल्प के रूप में रखना अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tibor-gaspar-claims-that-industries-are-leaving-europe-due-to/article-151035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tibor.png" alt=""></a><br /><p>ब्रातिस्लावा। स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने कहा है कि पूर्व से मिलने वाली स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर आधारित यूरोपीय उद्योग अब उसके अभाव में यूरोपीय संघ से बाहर स्थानांतरित हो रहे हैं। टिबोर गास्पर ने कहा कि रूस के ऊर्जा संसाधन लंबे समय तक अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ते रहे हैं और उनकी वापसी से उद्योग, महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जर्मनी और मध्य यूरोप का औद्योगिक ढांचा पूर्व से मिलने वाली ऊर्जा पर टिका रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ती ऊर्जा के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी नहीं रह सकती और इसी कारण उत्पादन अब यूरोपीय संघ से बाहर जा रहा है।</p>
<p>टिबोर गास्पर के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति का विविधीकरण किसी एक आपूर्तिकर्ता को स्थायी रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि विकल्पों को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि रूस एक विकल्प हो सकता है, न कि एकमात्र, लेकिन उसे पूरी तरह प्रतिबंधित करना भी उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एलएनजी, विशेषकर अमेरिका से, पर निर्भरता के बजाय अधिक आपूर्तिकर्ता होने से बेहतर कीमतें और अधिक स्वतंत्रता मिलती है।</p>
<p>टिबोर गास्पर ने कहा कि रूसी तेल की वापसी ‘पीछे जाने का कदम नहीं, बल्कि यथार्थवादी ऊर्जा नीति की दिशा में कदम’ होगा और विचारधारा को आर्थिक स्थिरता व नागरिकों के जीवन स्तर पर हावी नहीं होना चाहिए। इस बीच, यूरोपीय संघ परिषद ने पहले ही एक जनवरी 2027 से रूसी एलएनजी आयात और 30 सितंबर 2027 से रूसी पाइपलाइन गैस पर प्रतिबंध को अंतिम मंजूरी दे दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस महासचिव का हमला, बोलें-भारत कांग्रेस व्यापार समझौते के तहत हम जरूरत का 52 प्रतिशत तेल नहीं खरीद सकेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत भारत अब रूस से सस्ता कच्चा तेल नहीं खरीद पाएगा। इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-general-secretarys-attack-india-congress-will-not-be-able/article-143383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते के तहत जो शर्त रखी गयी है कि उसके तहत भारत, रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और इस शर्त के बाद भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत कच्चा तेल अब नहीं खरीद सकेगा जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा। </p>
<p>कांग्रेस महासचिव तथा पार्टी के राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने छह फरवरी को एक आदेश में कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और अगर खरीदता है तो अमेरिका इस पर निगरानी रखेगा। निगरानी में यदि पाया जाता है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष से रूस से तेल खरीदा है तो भारत पर सारी टैरिफ पैनल्टी लागू कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, 14 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी यही बात दोहराई है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस शर्त के अनुसार भारत अब अमेरिका के कहने पर रूस से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकेगा। इससे पहले अमेरिका के कहने पर भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी।</p>
<p>रणदीप​ सिंह सुरजेवाला ने एक आंकड़ा देते हुए बताया, रूस तथा ईरान, दोनों देशों से भारत रुपए में तेल खरीदते था और इससे हमारा पैसा बचता था। भारत कच्चा तेल रूस से 40 प्रतिशत और 11 प्रतिशत ईरान से खरीदता था लेकिन ईरान से तेल खरीद पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है तो भारत ने उस प्रतिबंध को आसानी से मान लिया है। अब यह समझौता कर लिया गया है कि भारत रूस से भी तेल नहीं खरीद सकता है। इस तरह से भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत तेल का आयात नहीं कर सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत बराबर रूस तथा ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है और इन दोनों देशों से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिलता था। इसी का परिणाम है कि पिछले चार साल में भारत ने 15 लाख 24 हजार करोड का कच्चा तेल खरीदा और इससे भारत को एक लाख 81 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है लेकिन अब अमेरिका के साथ समझौते के बाद भारत सस्ता तेल नहीं खरीद सकेगा और इस खरीद में बचत नहीं कर सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:34:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या रद्द हो सकता है भारत अमेरिका व्यापार समझौता? व्हाहट हाउस ने दी चेतावनी, कहा-रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने कहा, भारत ने नए समझौते में रूस से कच्चा तेल न लेने, अमेरिका से अधिक तेल खरीदने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जताई बताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/can-india-us-trade-agreement-be-cancelled-white-house-warns-says/article-141924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने बुधवार को दावा किया कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए नये समझौते के तहत रूस से कच्चा तेल न लेने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने का निर्णय लिया है। </p>
<p>व्हाइट हाउस की मीडिया सचिव कैरोलाइन लेविट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सीधी बातचीत के बाद भारत ने यह प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा, जैसा कि आप सब ने देखा, राष्ट्रपति (ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बेहतरीन सौदा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीधे बात की। उन दोनों का रिश्ता बहुत मजबूत है। लेविट ने कहा, भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदने का वादा किया है, बल्कि अमेरिका से भी तेल खरीदने का वादा किया है, और शायद वेनेजुएला से भी। इसका सीधा फ़ायदा अमेरिका और अमेरिकी लोगों को होगा।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश का वादा किया है। लेविट ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों जैसे सेक्टर शामिल हैं। उन्होंने कहा, यह राष्ट्रपति की वजह से एक और शानदार व्यापारिक समझौता है।</p>
<p>उन्होंने अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति और व्यापार रणनीति को श्रेय दिया। प्रशासन की आयात नीति का बचाव करते हुए, लेविट ने कहा कि इससे पहले ही ठोस आर्थिक फ़ायदे मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति की आयात शुल्क नीति काम कर रही है और उनका आर्थिक एजेंडा काम कर रहा है। पूरे अमेरिका में नयी फ़ैक्ट्री परियोजनाओं की वजह से निर्माण से जुड़ी नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है। वे फ़ैक्ट्रियां यहीं अमेरिका में बन रही हैं, और हम अमेरिकियों को काम दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:59:52 +0530</pubDate>
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                <title>भारत से रूसी तेल की खरीद बंद करने का हमें कोई संदेश नहीं: क्रेमलिन</title>
                                    <description><![CDATA[क्रेमलिन ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद भी भारत से रूसी तेल आयात बंद करने या घटाने का कोई आधिकारिक संदेश नई दिल्ली से नहीं मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/we-have-no-message-from-kremlin-to-stop-buying-russian/article-141864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूसी सत्ता केन्द्र क्रेमलिन ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में साफ किया है कि अभी तक उसे भारत से तेल आयात खत्म करने या उसमें कटौती करने का कोई संदेश नहीं मिला है। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते का एलान कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। इस मामले पर अब रूस का बयान भी सामने आ गया है। क्रेमलिन ने मंगलवार को कहा कि उसे भारत से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ व्यापार समझौते की घोषणा के बाद वह रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। </p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार समझौते के एलान के अवसर पर कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैरिफ में ढील देने के समझौते के तहत रूसी तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है। हालांकि भारत की ओर से इसमें कुछ नहीं कहा गया था और अधिकतर भारतीयों ने इसे ट्रंप की पुरानी आदत के तहत नजरअंदाज कर दिया था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने  कहा, अभी तक हमें इस मामले पर नई दिल्ली से कोई बयान नहीं मिला है। दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर रहा है। पेस्कोव ने कहा, हम अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करते हैं। लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है और हम दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और विकसित करने का इरादा रखते हैं। गौरतलब है कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रियायती कीमत पर रूसी समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। </p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल की खरीदने की वजह से 25 फीसदी टैरिफ लगाया था। यह उस पारस्परिक शुल्क से अलग था, जिसे ट्रंप ने भारत के लिए 25 फीसदी कर दिया था। ट्रंप ने सोमवार को रूसी तेल खरीद बंद करने और व्यापार बाधाओं को कम करने के बदले में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:27:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप की भारत को चेतावनी: 'रूसी तेल नहीं छोड़ा, तो और बढ़ेंगे आयात शुल्क', जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि अगर नई दिल्ली रूसी तेल से जुड़ी चिंताओं पर मदद नहीं करता है, तो अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trumps-warning-to-india-that-import-duties-will-increase-further/article-138411"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump-and-modi.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल का आयात करने के मामले में भारत पर आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि वॉशिंगटन इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के लिए तैयार है और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मुद्दे पर उनकी नाराजगी से अवगत हैं।</p>
<p>अपने हवाई जहाज एयर फोर्स वन पर रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमेरिकी ट्रंप ने कहा, पीएम मोदी रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार पर उनकी नाराजगी को जानते हैं। पीएम मोदी एक बहुत अच्छे इंसान हैं और वह जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना महत्वपूर्ण था, क्योंकि वह व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी शुल्क बढ़ा सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आयी है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार (एजेंसी) चल रही है और अमेरिका ने भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगा रखा है।</p>
<p>यह घटनाक्रम वेनेजुएला में हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका ने हिरासत में लिया था। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल भू-राजनीति पर दुनिया का ध्यान खींचा है। ओपेक के आंकड़ों के अनुसार वेनेजुएला के पास 300 अरब बैरल से अधिक का दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 17 से 18 प्रतिशत है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका के आयात शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत तक करने के बाद से पीएम मोदी और अमेरिकी ट्रंप के बीच तीन बार बातचीत हुई है। इस शुल्क वृद्धि से कपड़ा, रसायन और झींगा मछली जैसी चीजों के निर्यात पर असर पड़ा है। दोनों पक्षों के बीच व्यापार (एजेंसी) जुलाई के अंत में तब विफल हो गयी थी, जब भारत ने अपने कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने का विरोध किया था और भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। बातचीत हालांकि तब से जारी है।</p>
<p>दिसंबर 2025 में अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर ने नयी दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ दो दिनों में बैठकें की थीं। इस दौरान भारत ने रूसी तेल खरीद से जुड़े दंडात्मक शुल्कों से राहत देने पर जोर दिया था। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने इन चर्चाओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर अमेरिकी बाजार में चावल की डंपिंग करने का आरोप लगाते हुए भारतीय चावल के आयात पर भी नया शुल्क लगाने का संकेत दे चुके हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:38:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने रूसी तेल आयात को लेकर अपने संकल्प पर मजबूती दिखाई, देश को 78,000 करोड़ से 98,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा है। सरकार इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से लाभकारी मानती है, जिससे सालाना 78,000-98,000 करोड़ रुपए की बचत होती है। अमेरिका ने ऊंचे शुल्क और प्रतिबंधों की चेतावनी दी है, लेकिन भारत ने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-showed-strength-in-its-resolve-regarding-russian-oil-import/article-138201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(5).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के दबाव को बिना शोर शराबे के खारिज करते हुए रूस से कच्चे तेल आयात जारी रखते हुए  सरकार ने अपने रणनीतिक संकल्प की मज़बूती का प्रदर्शन किया है। रूस से आयात करने के खिलाफ अमेरिका ने गत अगस्त से अपने बाजार में भारतीय सामानों पर 50% का दंडात्मक शुल्क दिया और चाहता है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर दे। तेल और गैर के लिए विदेशी स्रोतों पर पर अपनी बड़ी निर्भरता के बीच भारत रूस को तेल आयात एक भरोसेमंद और रणनीतिक आपूर्तिकर्ता मानता है। रूस से तेल आयात करने से भारत को सालाना 78,000 करोड़ से 98,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।</p>
<p><strong>यूक्रेन के विरोध में रूस को मदद :</strong></p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल आयात करने के विरुद्ध कड़ी चेतावनी दे रखी है। अमेरिका कहा तर्क है कि  रूस को भारत से मिलने वाले तेल के मुनाफे से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि रूस की आक्रामकता को रोकने के लिए भारत को रूसी तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए नहीं तो उसे गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों और ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ेगा।  </p>
<p><strong>रूसी कंपनियों पर कड़ी पाबंदियां :</strong></p>
<p>रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखना एक ऐसे संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र  व्यवहार को दिखाता है जो अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देता है। भारत ने यह दृढता ऐसे समय दिखायी है जबकि अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर कड़ी पाबंदियां लगा रखी है।  </p>
<p><strong>अक्टूबर में 26,250 करोड़ खर्च :</strong></p>
<p>रेला एडवाइजर्स के अनुसार अकेले अक्टूबर,2025 में भारत ने रूसी तेल खरीदने पर 26,250 करोड़ खर्च किये। उससे पहले सितंबर में भी भारत ने रूस से इतनी ही राशि का तेल आयात किया था। अमेरिका और चीन के बाद भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक में से एक बन गया है। यूक्रेन युद्ध से पहले, भारत के तेल आयात में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा सिर्फ 0.2 प्रतिशत था।</p>
<p><strong>18 लाख बैरल का आयात :</strong></p>
<p>यह आंकड़ा बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया और एक समय 65% तक पहुंच गया था। अब भारत की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है। भारत औसतन एक दिन में 18 लाख बैरल का आयात कराता है। एक समय इसमें रूसी कच्चा तेल 12 लाख बैरल तक पहुंच गया था।</p>
<p><strong>अमेरिका भी रूस से तेल लेता है :</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका खुद अपनी ज़रूरतों के लिए रूसी तेल आयात करता है, लेकिन वह भारत और रूस की कंपनियों पर ज़बरदस्त दबाव डाल रहा हैऔर प्रतिबंध लगा रहा है। ट्रंप ने भारत पर रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करके और पेट्रोलियम उत्पादों को यूरोपीय देशों सहित निर्यात करके बड़ा मुनाफा कमाने का आरोप लगाया है। उन्होंने रूसी हथियार खरीदने पर भी भारत के विरुद्ध प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।</p>
<p><strong>कीमत सबसे महत्वपूर्ण कारक :</strong></p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर कुमार ने कहा है  कि तेल खरीद तय करने में कीमत सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसके अनुसार, भारत ने प्रतिबंधों से पहले और बाद में लगातार आयात बढ़ाया है। पिछले वर्ष जनवरी और जून के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल, मित्तल एनर्जी, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी प्रमुख रिफाइनरियों ने बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल आयात किया।  </p>
<p><strong>400 रुपए प्रति बैरल की बचत :</strong></p>
<p>इतने ज़्यादा दबाव और बयानबाज़ी के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदने की अपनी नीति से पीछे नहीं हटा, और अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। रूसी कच्चे तेल को खरीदने से भारत को लगभग 400 रुपए प्रति बैरल की बचत हुई है। यह फायदा यूक्रेन युद्ध के बाद दूसरे आपूर्तिकर्ताओं से नहीं मिल रहा था। भारत की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए इस आयात पर निर्भरता से बचा नहीं जा सकता।    </p>
<p><strong>रोक लगाने वाला कोई निर्देश जारी नहीं :</strong></p>
<p>अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच एचपीसीएल के चेयरमैन विकास कौशल ने कहा कि सरकार ने रूसी तेल आयात पर रोक लगाने वाला कोई निर्देश जारी नहीं किया है और खरीद के फैसले लागत-प्रभावशीलता और बाजार की रुचि के आधार पर तेल कंपनियों पर निर्भर करते हैं।</p>
<p><br />    <br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तानी वित्त मंत्री औरंगजेब ने ​कहा,  रूस से तेल समझौते की ओर बढ़ रहा पाकिस्तान</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि रूस और पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय तेल समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसमें अन्वेषण, उत्पादन और शोधन शामिल हो सकता है। रूस पाकिस्तान को तेल आपूर्ति बढ़ाने और रिफाइनरी आधुनिकीकरण में रुचि दिखा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-finance-minister-aurangzeb-said-that-pakistan-is-discussing-russia/article-136151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/us-tariff-pakistan-news.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि रूस और पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय एक तेल समझौते पर चर्चा कर रहे हैं और पाकिस्तान इसे साकार होते देखना चाहता है। जब पाकिस्तानी वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान तेल क्षेत्र में रूस के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर देखता है, जिसमें अन्वेषण, उत्पादन एवं शोधन शामिल हैं, तो उन्होंने कहा, ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जो रूस की शक्ति को दर्शाते हैं। हम चाहेंगे कि वे आएं और पाकिस्तान के साथ इस समीकरण को आगे बढ़ाएं। इस संबंध में दोनों पक्षों के ऊर्जा मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है।</p>
<p>रूसी ऊर्जा मंत्री सर्गेई त्सिविलेव ने नवंबर में कहा था कि रूस और पाकिस्तान रूसी कंपनियों की भागीदारी के साथ देश में एक तेल रिफाइनरी के आधुनिकीकरण की परियोजना पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस तेल आपूर्ति बढ़ाने में भी दिलचस्पी रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 15:53:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी प्रतिबंधों का तोड़ : रूसी तेल में पैसा लगाएंगे भारतीय बैंक, बैंकों ने रखी शर्त- तेल उन कंपनियों से आना चाहिए जिन पर प्रतिबंध नहीं लगा हो</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के बैंक अब प्रतिबंध-मुक्त कंपनियों से आने वाले रूसी तेल के लेन-देन को मंजूरी देने लगे हैं, बशर्ते भुगतान नियमों का पालन हो। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद वे आपूर्ति श्रृंखला की कड़ी जांच कर रहे हैं। लेन-देन दिरहम और युआन में भी संभव है। प्रतिबंधों से यूरल्स तेल सस्ता हुआ है, जिससे भारतीय रिफाइनरों की खरीद रुचि बढ़ी है, हालांकि सतर्कता बनी हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indian-banks-will-invest-money-in-russian-oil-to-break/article-133619"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(1200-x-600-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत के बैंक अब रूसी तेल के व्यापार में पैसा लगाने को तैयार हो गए हैं। लेकिन इसमें एक शर्त है। यह तेल उन कंपनियों से आना चाहिए जिन पर प्रतिबंध नहीं लगा है और पूरा लेन-देन भी प्रतिबंधों के नियमों के हिसाब से होना चाहिए। अमेरिका ने हाल ही में नए प्रतिबंध लगाए हैं जो शुक्रवार से लागू हो गए हैं। इन प्रतिबंधों से पहले बैंक रूसी तेल के किसी भी शिपमेंट के लिए भुगतान करने से कतरा रहे थे। वे सप्लाई चेन की जांच करने में मुश्किलों का हवाला दे रहे थे।</p>
<p>ब्लूमबर्ग के मुताबिक भारत के तेल खरीदने के तरीके पर सबकी नजर है। अमेरिका यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बढ़ा रहा है। साथ ही, अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत को भी बढ़ावा दे रहा है। भारत रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार है। हालांकि, भारत के रिफाइनर दुनिया भर में अच्छी सप्लाई होने के कारण महंगे विकल्प भी खरीद सकते हैं।</p>
<p><strong>बैंकों ने क्या निकाला तरीका ?</strong></p>
<p>बैंकों ने एक ऐसा तरीका निकाल लिया है जिससे वे रिफाइनरों की भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें। यह तरीका रूसी तेल के लिए है। इन लेन-देन को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दिरहम और चीनी युआन में भी किया जा सकता है। भारत के बैंक और रिफाइनर यह भी पक्का कर रहे हैं कि तेल कहां से आ रहा है। वे तेल ले जाने वाले जहाजों की भी जांच कर रहे हैं। इस जांच में जहाजों का पिछला रिकॉर्ड देखा जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि क्या वे किसी ऐसी कंपनी से जुड़े थे जिस पर प्रतिबंध लगा हो, खासकर अगर जहाज से जहाज में तेल ट्रांसफर हुआ हो।</p>
<p><strong>दिसंबर के लिए नहीं दिया ऑर्डर :</strong></p>
<p>ज्यादातर भारतीय रिफाइनरों ने दिसंबर में डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल का ऑर्डर नहीं दिया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका ने प्रमुख उत्पादक कंपनियों जैसे रोसनेफ्ट और लुकोइल पर बैन लगा दिया था। इससे पहले GAZPROM NEFT और SURGUTNEFTAGAS पर भी प्रतिबंध लगे थे। इन सब प्रतिबंधों ने उस व्यापार को बड़ा झटका दिया है जो साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से बढ़ रहा था। भारत रूस का सबसे बड़ा समुद्री कच्चे तेल का ग्राहक बन गया था।</p>
<p><strong>सस्ता मिल रहा रूसी तेल :</strong></p>
<p>इन प्रतिबंधों के कारण रूस के मुख्य यूरल्स ग्रेड के तेल की कीमत में काफी कमी आई है। यह अब बेंचमार्क से लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। इससे कीमत के प्रति संवेदनशील भारतीय रिफाइनरों को सस्ते तेल खरीदने का लालच बढ़ गया है। हाल के प्रतिबंधों से पहले यह छूट लगभग 3 डॉलर प्रति बैरल थी। हालांकि, रिफाइनर अभी भी सतर्क हैं। उन्हें डर है कि अगर कोई भी तेल प्रतिबंधित कंपनियों से जुड़ा पाया गया तो उनका भुगतान अटक सकता है। इससे उन्हें महंगे कानूनी मामलों या दूसरे दर्जे के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। सख्त जांच से ऑर्डर देने में थोड़ी देरी हो सकती है, लेकिन उम्मीद है कि इससे रूसी तेल का कुछ प्रवाह जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 11:06:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>पहले एस-400 मिसाइल, अब रूसी तेल : गुटनिरपेक्ष भारत को अपने इशारे पर नचाना चाहते हैं नाटो देश, हर बार मिली मात</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना के हाथों जेलेंस्की सेना के पिटने से अमेरिका समेत नाटो देशों की बौखलाहट बढ़ती जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/first-the-s-400-missile-now-wants-to-dance-russian-oil/article-121008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news37.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना के हाथों जेलेंस्की सेना के पिटने से अमेरिका समेत नाटो देशों की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इसकी खीज रूस के दोस्त देशों भारत और चीन से निकालना चाहते हैं। अमेरिका में एक विधेयक पेश हुआ है जिसमें रूस से तेल खरीदने पर 500 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ लगाने का प्रावधान है। वहीं अब नाटो के महासचिव जनरल मार्क रुट्टे ने भारत और चीन को बुधवार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि रूस अगर 50 दिनों में शांति के लिए तैयार नहीं होता है तो उससे तेल लेने पर 100 फीसदी सेकेंडरी टैरिफ लगाया जाएगा। नाटो के महासचिव की इस धमकी पर भारत ने भी करारा जवाब दिया है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही पश्चिमी देश भारत को रूस से रिश्ता रखने पर धमकाने में जुटे हुए हैं।</p>
<p>इससे पहले एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने पर भी पश्चिमी देश गीदड़भभकी दे चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी एस 400 एयर डिफेंस सिस्टम ने भारत को पाकिस्तानी मिसाइलों से बचाया था। अमेरिका ने कुछ साल पहले भारत को धमकी दी थी कि अगर वह रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदता है तो उसके खिलाफ सीएएटीएसए प्रतिबंध लगाया जाएगा। अमेरिका यह सीएएटीएसए प्रतिबंध उन देशों के खिलाफ लगाता है जो रूस, उत्तर कोरिया या ईरान से बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त करते हैं।</p>
<p><strong>एस-400 पर भारत अमेरिका के आगे नहीं झुका</strong><br />अमेरिका की इस धमकी के बाद भारत झुका नहीं और उसने साफ कर दिया कि वह रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम डील को लेकर आगे बढ़ेगा। भारत का यह फैसला सही साबित हुआ और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह रूसी सिस्टम हमारे लिए कवच साबित हुआ। भारत के अड़ जाने के बाद अमेरिका को एस-400 डील को लेकर छूट देनी पड़ी थी। रूस से रिश्ते को लेकर अब इसी तरह की धमकी नाटो के चीफ दे रहे हैं। यूक्रेन में नाटो देशों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, हथियार और मिसाइलें दीं लेकिन वे रूस को झुकाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। इससे उनकी बौखलाहट बढ़ती जा रही है और वे भारत को निशाना बनाने की धमकी दे रहे हैं। वहीं नाटो देश तुर्की रूस का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है। अमेरिका में बिल पेश होने के बाद ट्रंप ने भी कहा है कि वे रूस के व्यापारिक साझीदारों पर 100 फीसदी सेकेडंरी टैरिफ लगाएंगे। बता दें कि भारत ने हमेशा से ही पंडित नेहरू के गुटनिरपेक्ष नीति का समर्थन किया है। पीएम मोदी ने रूस में व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात में यूक्रेन युद्ध को लेकर खरी-खरी सुना दिया था। भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए नाटो चीफ को करारा जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि उसके लिए भारतीय लोगों की ऊर्जा जरूरतें सर्वोपरि हैं। भारत ने दोहरे मानदंड के लिए पश्चिमी देशों खासकर यूरोप को चेतावनी भी दी जो अभी भी रूस से तेल ले रहे हैं और भारत को धमका रहे हैं।</p>
<p><strong>नाटो चीफ को चुभ रही है भारत रूस दोस्ती</strong><br />यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस से तेल लेकर न केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया बल्कि इसका फायदा यह हुआ कि दुनिया के बाजार में तेल की कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ पाईं। इससे सभी तेल खरीदने वाले देशों को फायदा हुआ। भारत ने रिफाइन किया हुआ तेल यूरोप को भी दिया। भारत यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पाद निर्यात करने वाला देश बन गया। भारत आज रूस के शीर्ष तेल खरीदारों में शामिल है जो नाटो चीफ को चुभ रहा है। अमेरिका और अन्य नाटो देश भारत को गीदड़भभकी दे रहे हैं, जबकि हिंदुस्तान उनका हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ सहयोगी देश है। एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका या नाटो चीफ की धमकी के बाद भी भारत वही करेगा जो उसके राष्ट्रीय हित में है। पश्चिमी देश भारत को अपनी उंगलियों पर नहीं नचा पाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 11:57:04 +0530</pubDate>
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