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                <title>foreign policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आतंकवाद के पूरे तंत्र को करना है ध्वस्त! SCO में बोले PM Modi- आतंकवाद पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के दृष्टिकोण को सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन स्तंभों पर आधारित बताया। उन्होंने आतंकवाद के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने, दोहरे मापदंड समाप्त करने और युद्ध के स्थान पर संवाद व कूटनीति अपनाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-entire-system-of-terrorism-has-to-be-demolished-pm/article-164365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत की सोच को सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित बताया और कहा कि इसके लिए आतंकवाद के समूचे तंत्र को ध्वस्त करना जरूरी है। मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में सोमवार को एससीओ शिखर सम्मेलन में विस्तार से भारत का दृष्टिकोण रखा। उन्होंने एससीओ के अगले 25 वर्षों के लिए भारत की सोच के तीन स्तंभ सुरक्षा, संपर्क और अवसर को आगे बढ़ाकर ठोस परिणामों में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसकी पहली आवश्यकता शांति और सुरक्षा है तथा आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे तंत्र को ध्वस्त करना होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, "इसकी पहली आवश्यकता है – शांति और सुरक्षा। आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम एक्शन-रिएक्शन की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। हमें आतंकवाद के वित्त पोषण, भर्ती , कट्टरपंथ,और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा। हमें एक स्वर में बोलना होगा कि इस गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता।"</p>
<p>उन्होंंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और चीन के राष्ट्रपति की मौजूदगी में जोर देकर कहा कि आतंकवाद पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं हो सकती और जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं तथा आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश देना होगा कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता। मोदी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की मजबूत परंपरा विकसित की है। अब अगले 25 वर्षों में सहयोग को स्पष्ट परिणामों में बदलना लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलकर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया की सोच तक सीमित नहीं रह सकती। शांत और सुरक्षित यूरेशिया की साझा आकांक्षा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा। उन्होंने कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। पश्चिम एशिया के संकट का प्रभाव पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है और इसका सबसे अधिक खामियाजा वैश्विक दक्षिण के देशों को भुगतना पड़ता है। इसलिए सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्धक्षेत्र पर नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने मादक पदार्थों की तस्करी को केवल अपराध नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि एससीओ के तहत सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और मादक पदार्थों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित किए जा रहे केंद्रों को व्यावहारिक समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। संपर्क को साझा विकास का दूसरा आधार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को सुगम बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं। हालांकि, इन प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान आवश्यक है, जो एससीओ के घोषणापत्र की मूल भावना भी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सड़कों, रेलवे और हवाई गलियारों के साथ सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना और रसद नेटवर्क को अधिक दक्ष बनाना होगा।</p>
<p>अवसर को तीसरा स्तंभ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ के सहयोग का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचना चाहिए। भारत के लिए एससीओ महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है और अगले 25 वर्षों में लोगों के बीच संबंधों को सहयोग के केंद्र में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता की वास्तविक कसौटी यह होगी कि युवाओं को कितने नए अवसर मिले, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले, किसानों को प्रौद्योगिकी का कितना लाभ मिला और नागरिकों का जीवन कितना बेहतर हुआ।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ में सहयोग केवल सरकार के नेतृत्व वाला नहीं, बल्कि लोगों के नेतृत्व वाला होना चाहिए। किर्गिस्तान की अध्यक्षता में एससीओ में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने एससीओ में स्टार्ट-अप मंच, युवा लेखक सम्मेलन और युवा वैज्ञानिक मंच जैसी पहल की हैं। पिछले वर्ष भारत ने एससीओ सभ्यतागत संवाद मंच का प्रस्ताव रखा था और इसका पहला सत्र इस वर्ष भारत में आयोजित होगा।</p>
<p>मोदी ने कहा कि एससीओ की विविधता उसकी पहचान और साझा उद्देश्य उसकी शक्ति है। बिश्केक से साझा भूगोल से साझा अवसरों की ओर, दृष्टि से परिणामों की ओर और सरकार के नेतृत्व वाले सहयोग से लोगों के नेतृत्व वाली साझेदारी की ओर बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। भारत इसी विश्वास और प्रतिबद्धता के साथ एससीओ परिवार की साझा यात्रा में अपना योगदान देने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 14:24:08 +0530</pubDate>
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                <title>अगर जेलेंस्की बातचीत के लिए तैयार हों तो रूस उनकी मेजबानी के लिए तैयार, शिखर वार्ता के लिए पूर्व समझौतों की शर्त : क्रेमलिन</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि यदि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की बातचीत के लिए तैयार हैं, तो रूस मास्को में उनकी मेजबानी करने को उत्सुक है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने पुष्टि की कि यह प्रस्ताव अब भी लागू है, हालांकि इसके लिए जटिल वार्ताओं के जरिए समझौते तैयार करने होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-zelensky-is-ready-for-talks-russia-is-ready-to/article-164336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3).png" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि अगर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की बातचीत चाहते हैं, तो रूस यहां उनकी मेजबानी करने को तैयार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने यह जानकारी दी। पेस्कोव ने मीडिया से बात करते हुए याद दिलाया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि अगर जेलेंस्की बातचीत चाहते हैं, तो वह मास्को आ सकते हैं। रूसी नेता के प्रेस सचिव ने पुष्टि की कि यह प्रस्ताव अब भी बरकरार है।</p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या मास्को में बैठक का प्रस्ताव अब भी बरकरार है, तो उन्होंने कहा, "हां, कुछ भी नहीं बदला है।" पेस्कोव ने कहा, "लेकिन जहां तक शिखर वार्ता का सवाल है, इसके लिए केवल कुछ समझौतों को अंतिम रूप देना जरूरी है। हालांकि, इन समझौतों को स्वयं बहुत जटिल वार्ताओं के माध्यम से तैयार किया जाना आवश्यक है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 11:22:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>किर्गिस्तान में मोदी-पेजेशकियान की पहली आमने-सामने बैठक: युद्ध के बीच ईरान के साथ भारत की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ी, होर्मुज नाकेबंदी समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। इस बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव, होर्मुज क्षेत्र में ईरान की नाकेबंदी और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा हुई। मोदी ने आर्मेनियाई प्रधानमंत्री से भी द्विपक्षीय बातचीत की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-pezeshkians-first-face-to-face-meeting-in-kyrgyzstan-indias-diplomatic-activity-increased/article-164299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/kirgistan.png" alt=""></a><br /><p>बिश्केक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। फरवरी में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने बैठक बताई जा रही है। बैठक के एजेंडे की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज क्षेत्र में ईरान की नाकेबंदी से जुड़े घटनाक्रम को देखते हुए इन मुद्दों पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है। ईरानी दूतावास ने भी दोनों नेताओं की मुलाकात और बातचीत की पुष्टि की है।</p>
<p>बिश्केक रवाना होने से पहले पेजेशकियान ने कहा था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत और दृढ़ता से देगा। उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए देशों के बीच सहयोग को जरूरी बताया। मोदी ने सम्मेलन के दौरान आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, फार्मा, विज्ञान-तकनीक, शिक्षा और संस्कृति में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। पश्चिम एशिया समेत वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इसके अलावा वह किर्गिस्तान में विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 15:49:38 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन का भारत दौरा: BRICS Summit में होंगे शामिल, क्यों खास होगी ये यात्रा?</title>
                                    <description><![CDATA[सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा तय हो गई है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यह दौरा दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स 2026 की मेजबानी कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-middle-east-crisis-iranian-president-pejeshkian-will-visit/article-162939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/pezz.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सिंतबर में नई दिल्ली मे होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा फाइनल हो चुका हैं। सूत्रों के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जबकि मिडिल ईस्ट में लगातार तनाव और हिंसा का माहौल हैंं। इस बार भारत कर रहा है ब्रिक्स 2026 की मेजबानी और इसका आयोजन देश की राजधानी दिल्ली में होगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा भारत और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों के लिए भी काफी अहम माना जा रहा हैं। साथ ही बता दें कि, साल 2024 में ही ईरान ने ब्रिक्स की सदस्यता हासिल की थी। वर्तमान में ब्रिक्स (BRICS) के कुल 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 14:48:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान की भारत यात्रा पर सस्पेंस, विदेश राज्यमंत्री बोलीं- अभी कोई तारीख तय नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत और जापान यात्रा की योजनाएं अभी अंतिम रूप में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर बातचीत के बाद फैसला लिया जाएगा, जबकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रयास जारी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/suspense-on-bangladesh-pm-tariq-rahmans-visit-to-india-minister/article-162905"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/tarique-rahman.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा अभी तय नहीं हुई है। ओबेद ने विदेश मंत्रालय में पत्रकारों से कहा, "भारत यात्रा समेत किसी भी यात्रा को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बातचीत के बाद ही अंतिम फैसला लिया जायेगा।" रहमान की भारत और जापान यात्राओं के बारे में पूछे जाने पर ओबेद ने कहा कि फिलहाल किसी भी यात्रा के लिए कोई तारीख तय नहीं की गयी है। उन्होंने कहा, "जापान यात्रा का कार्यक्रम आपसी सुविधा के समय तय किया जायेगा। </p>
<p>प्रधानमंत्री अभी कई कामों में व्यस्त हैं।" नयी दिल्ली और ढाका में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच सीधी बातचीत के जरिए द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने की संभावना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे मौकों का सही इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब भी दोनों देशों के नेता बातचीत करते हैं और द्विपक्षीय चर्चा करते हैं, तो कई मुद्दों को सुलझाने का मौका मिलता है। भारत के साथ संबंध बेहतर करने का मौका है। वे इस बात पर विचार कर सकते हैं कि क्या वे इस मौके का इस्तेमाल करेंगे।"</p>
<p>बांग्लादेशी विदेश राज्यमंत्री की यह टिप्पणी बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की 10 अगस्त को ढाका में रहमान के साथ हुई बैठक के कुछ दिनों बाद आयी है। इस बैठक में उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और सहयोग एवं साझेदारी के नये रास्ते तलाशने पर चर्चा की थी। इसके दूसरे दिन ही त्रिवेदी भारत गये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इससे दोनों पक्षों द्वारा द्विपक्षीय तनाव कम करने की कोशिशों के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के साथ ढाका में हुई बैठक का महत्व और बढ़ गया।</p>
<p>ये बैठकें ऐसे समय में हुई हैं जब बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा गत पांच अगस्त को नयी दिल्ली में ऑनलाइन मीडिया को संबोधित करने पर नाराजगी जतायी थी। यह तारीख तथाकथित छात्र अशांति के बाद उनके भारत में निर्वासन में जाने के दो साल पूरे होने का प्रतीक थी। ग्यारह अगस्त को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि बांग्लादेश प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय यात्रा और बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर नयी दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लेने के लिए भारत आमंत्रित किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमने द्विपक्षीय यात्रा के साथ-साथ दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स आउटरीच सत्र के लिए भी निमंत्रण भेजा है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 11:58:08 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-इजरायल के बीच भूमि आवंटन समझौता: यरुशलम में बनेगा अमेरिकी दूतावास का स्थायी परिसर, ट्रंप के फैसले को मिली नई रफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने के अमेरिकी फैसले की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस निर्णय पर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और विरोध देखने को मिला था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/02.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री गिदोन सार और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने यरुशलम के मेयर मोशे लियोन की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है, जिसे इजरायल अपनी शाश्वत राजधानी मानता है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सरकार के उस निर्णय के क्रियान्वयन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत दूतावास के लिए एलनबी परिसर आवंटित किया गया। यह उस कूटनीतिक प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण चरण है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के साथ हुई थी। गौरतलब है कि, ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी और 14 मई 2018 को अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांतरित कर दिया था। इस फैसले के बाद फ़िलीस्तीनी क्षेत्रों में अशांति फैल गई थी और अरब जगत के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।</p>
<p>इजरायल यरुशलम को अपनी एकीकृत और अविभाज्य राजधानी मानता है, जबकि अधिकांश देश पूर्वी यरुशलम के इजरायल में विलय को मान्यता नहीं देते। उनका मानना है कि यरुशलम की अंतिम स्थिति फ़िलीस्तीनियों और इजरायल के बीच आपसी सहमति से तय की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस-अमेरिका संबंध सबसे निचले स्तर पर: यह स्थिति बेहद खराब, पैनकिन ने कहा-दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच हुई सीधी बातचीत काफी सार्थक रही</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पैनकिन ने कहा कि अमेरिका के साथ संबंध वर्तमान में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। एंकरेज शिखर सम्मेलन के सार्थक होने के बावजूद, ट्रंप प्रशासन की नीतियों में अत्यधिक अनिश्चितता सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा सकारात्मक रही, लेकिन भविष्य अब भी अस्पष्ट है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-america-relations-are-at-their-lowest-level-this-situation-is/article-151401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/alexander-pankin.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पैनकिन ने कहा कि उनके देश और अमेरिका के बीच संबंध इस समय अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। पैनकिन ने संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंधों के बारे में पूछे जाने पर कहा, "ये (संबंध) सबसे निचले स्तर पर हैं। यह मैं नहीं कह रहा, बल्कि हमारे अधिकारी ऐसा मानते हैं... और यह स्थिति बेहद खराब है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि एंकरेज में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच हुई सीधी बातचीत काफी सार्थक रही। पैनकिन ने कहा, "हमारे राष्ट्रपतियों के बीच हुई सीधी बातचीत काफी सार्थक रही। लेकिन एंकरेज में शायद सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वहां कोई निश्चितता नहीं है। आप सुबह कुछ और सुनते हैं, शाम को ठीक उसके विपरीत कुछ और, या फिर अगले दिन कोई ऐसा कदम उठाया जाता है जो उन दोनों बातों के बिल्कुल उलट होता है। इसलिए, इस तरह की अत्यधिक अनिश्चितता ही सबसे बड़ी समस्या है।"</p>
<p>गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 अगस्त, 2025 को अलास्का में बातचीत की थी। यह बैठक एंकरेज स्थित एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन सैन्य अड्डे पर हुई थी। इस दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के उपायों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस बैठक को सकारात्मक बताया। पुतिन ने बैठक के बाद कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान संभव है और उन्होंने इस मुद्दे के दीर्घकालिक समाधान में रूस की गहरी रुचि पर जोर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:05:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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                <title>Donald Trump का बयान : इजरायल को बताया अमेरिका का ‘महान सहयोगी’, कहा-वह जीतना जानता है</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की प्रशंसा करते हुए उसे एक ऐसा सहयोगी बताया जो जीतना जानता है। ट्रूथ सोशल पर उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी काबिलियत साबित की है। हालांकि, यह बयान उनके उस निर्देश के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने इजरायल को लेबनान पर बमबारी तुरंत बंद करने को कहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-statement-called-israel-a-great-ally-of-america/article-150998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है जो जीतना जानता है। ट्रंप ने ट्रूथसोशल पर कहा, "चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, उसने अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है।" उन्होंने कहा कि इजरायल जीतना जानता है, "कुछ लोगों के विपरीत" जिन्होंने संघर्ष और तनाव के दौरान अपना असली रंग दिखाया है। राष्ट्रपति ने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। यह टिप्पणी उनके उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने इजरायल से कहा था कि लेबनान पर बमबारी करना "निषिद्ध" है और "बहुत हो गया"।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:48:33 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का आरोप : इस्लामाबाद में 'सहमति' के बहुत करीब होने के बावजूद नई शर्तों और प्रतिबंधों का करना पड़ा सामना, वार्ता विफल के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 'सहमति' के करीब होने के बावजूद अमेरिका ने नई शर्तें और प्रतिबंध थोप दिए। अराघची ने चेतावनी दी कि शत्रुता से केवल शत्रुता ही पैदा होती है और अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-alleged-that-despite-being-very/article-150221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि 'बदलती शर्तों और प्रतिबंधों' को हमारे सामने रखा गया। अब्बास अराघची ने सोमवार को 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "वार्ता के दौरान सहमति के बहुत करीब होने के बावजूद बदलती शर्तों और प्रतिबंधों को हमारे समक्ष लाया गया।" अब्बास अराघची ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है और शत्रुता से शत्रुता।"</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 47 वर्षों में उच्चतम स्तर की गंभीर वार्ता में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नीयत के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' से केवल कुछ ही दूर थे, तो हमें बदलती शर्तों और प्रतिबंधों सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी ने दी ट्रंप की 'सभ्यता के अंत' वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया : परमाणु खतरों को बताया अस्वीकार्य, हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान पर "सभ्यता खत्म करने" वाली धमकी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आधुनिक दुनिया में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं है। गांधी ने वैश्विक शक्तियों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-gave-a-sharp-reaction-to-trumps-comment-about/article-149500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gndhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सभ्यता के विनाश की बात करने वाले उनके बयान की आलोचना की और वैश्विक चर्चा में परमाणु खतरों के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक कड़े बयान में कहा, "युद्ध दुखद होते हैं, फिर भी वे एक वास्तविकता हैं। सभ्यता के अंत की कल्पना करने वाली कोई भी भाषा या कार्रवाई आधुनिक दुनिया में अस्वीकार्य है।"</p>
<p>उनकी टिप्पणियों को व्यापक रूप से ट्रंप के हालिया पोस्ट का खंडन माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरानी सभ्यता के संभावित "समाप्ति" का जिक्र किया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं और पर्यवेक्षकों से चिंता और आलोचना को जन्म दिया है। राहुल गांधी ने वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती बयानबाजी के खतरों पर विशेष बल दिया, खासकर जब बात परमाणु क्षमताओं से जुड़ी हो। उन्होंने कहा, "परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।" उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के मामलों में संयम और जिम्मेदार भागीदारी की वकालत करने वाले भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया।</p>
<p>उनकी यह टिप्पणी बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और परमाणु प्रतिरोध तथा सैन्य प्रदर्शन पर नए सिरे से शुरू हुई बहसों के बीच आई है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से परमाणु हथियारों के "पहले इस्तेमाल न करने" के सिद्धांत का पालन किया है और लगातार वैश्विक निरस्त्रीकरण का आह्वान किया है। राहुल गांधी का बयान इस व्यापक नीतिगत ढांचे के अनुरूप है, जो इस चिंता को दर्शाता है कि प्रभावशाली नेताओं की आक्रामक बयानबाजी परमाणु संयम की दिशा में दशकों से किए जा रहे प्रयासों को कमजोर कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:07:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दो हफ्ते का युद्धविराम: शुक्रवार को इस्लामाबाद में शुरू होगी ईरान-अमेरिका के बीच वार्ता, पढ़ें ईरान के भेजे प्रस्ताव में क्या है खास ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू हो गया है। शुक्रवार से इस्लामाबाद में निर्णायक वार्ता शुरू होगी। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की गारंटी दी है, जबकि अमेरिका ने वहां का नियंत्रण ईरान को सौंपने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री अराघची ने इस कूटनीतिक सफलता के लिए पाकिस्तान का आभार जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/two-week-ceasefire-talks-between-iran-and-america-will-start-in/article-149495"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ईरान शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ वार्ता शुरू करेगा। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने परिषद के हवाले से बुधवार को कहा, "अमेरिकी पक्ष पर अविश्वास के साथ यह वार्ता 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान इसके लिए दो सप्ताह का समय देगा। पक्षों की सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान पूर्ण राष्ट्रीय एकता बनाए रखनी होगी।"</p>
<p>परिषद ने कहा कि इस अवधि के लिए युद्धविराम घोषित किया जाएगा साथ ही यह भी कहा कि वार्ता मतलब अमेरिका के साथ युद्ध का अंत नहीं है। बयान के अनुसार, अगर वार्ता के दौरान अमेरिका जरा सी भी गलती करता है तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से मैं अपने प्रिय भाइयों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर के क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के अथक प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करता हूं।"</p>
<p>इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा किया था कि उन्होंने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा की गारंटी देने पर भी सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण ईरान को सौंपने पर भी सहमति व्यक्त की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:21:57 +0530</pubDate>
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