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                <title>foreign policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>foreign policy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का आरोप : इस्लामाबाद में 'सहमति' के बहुत करीब होने के बावजूद नई शर्तों और प्रतिबंधों का करना पड़ा सामना, वार्ता विफल के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 'सहमति' के करीब होने के बावजूद अमेरिका ने नई शर्तें और प्रतिबंध थोप दिए। अराघची ने चेतावनी दी कि शत्रुता से केवल शत्रुता ही पैदा होती है और अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-alleged-that-despite-being-very/article-150221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि 'बदलती शर्तों और प्रतिबंधों' को हमारे सामने रखा गया। अब्बास अराघची ने सोमवार को 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "वार्ता के दौरान सहमति के बहुत करीब होने के बावजूद बदलती शर्तों और प्रतिबंधों को हमारे समक्ष लाया गया।" अब्बास अराघची ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है और शत्रुता से शत्रुता।"</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 47 वर्षों में उच्चतम स्तर की गंभीर वार्ता में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नीयत के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' से केवल कुछ ही दूर थे, तो हमें बदलती शर्तों और प्रतिबंधों सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी ने दी ट्रंप की 'सभ्यता के अंत' वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया : परमाणु खतरों को बताया अस्वीकार्य, हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान पर "सभ्यता खत्म करने" वाली धमकी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आधुनिक दुनिया में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं है। गांधी ने वैश्विक शक्तियों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-gave-a-sharp-reaction-to-trumps-comment-about/article-149500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gndhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सभ्यता के विनाश की बात करने वाले उनके बयान की आलोचना की और वैश्विक चर्चा में परमाणु खतरों के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक कड़े बयान में कहा, "युद्ध दुखद होते हैं, फिर भी वे एक वास्तविकता हैं। सभ्यता के अंत की कल्पना करने वाली कोई भी भाषा या कार्रवाई आधुनिक दुनिया में अस्वीकार्य है।"</p>
<p>उनकी टिप्पणियों को व्यापक रूप से ट्रंप के हालिया पोस्ट का खंडन माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरानी सभ्यता के संभावित "समाप्ति" का जिक्र किया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं और पर्यवेक्षकों से चिंता और आलोचना को जन्म दिया है। राहुल गांधी ने वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती बयानबाजी के खतरों पर विशेष बल दिया, खासकर जब बात परमाणु क्षमताओं से जुड़ी हो। उन्होंने कहा, "परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।" उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के मामलों में संयम और जिम्मेदार भागीदारी की वकालत करने वाले भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया।</p>
<p>उनकी यह टिप्पणी बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और परमाणु प्रतिरोध तथा सैन्य प्रदर्शन पर नए सिरे से शुरू हुई बहसों के बीच आई है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से परमाणु हथियारों के "पहले इस्तेमाल न करने" के सिद्धांत का पालन किया है और लगातार वैश्विक निरस्त्रीकरण का आह्वान किया है। राहुल गांधी का बयान इस व्यापक नीतिगत ढांचे के अनुरूप है, जो इस चिंता को दर्शाता है कि प्रभावशाली नेताओं की आक्रामक बयानबाजी परमाणु संयम की दिशा में दशकों से किए जा रहे प्रयासों को कमजोर कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:07:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दो हफ्ते का युद्धविराम: शुक्रवार को इस्लामाबाद में शुरू होगी ईरान-अमेरिका के बीच वार्ता, पढ़ें ईरान के भेजे प्रस्ताव में क्या है खास ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू हो गया है। शुक्रवार से इस्लामाबाद में निर्णायक वार्ता शुरू होगी। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की गारंटी दी है, जबकि अमेरिका ने वहां का नियंत्रण ईरान को सौंपने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री अराघची ने इस कूटनीतिक सफलता के लिए पाकिस्तान का आभार जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/two-week-ceasefire-talks-between-iran-and-america-will-start-in/article-149495"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ईरान शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ वार्ता शुरू करेगा। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने परिषद के हवाले से बुधवार को कहा, "अमेरिकी पक्ष पर अविश्वास के साथ यह वार्ता 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान इसके लिए दो सप्ताह का समय देगा। पक्षों की सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान पूर्ण राष्ट्रीय एकता बनाए रखनी होगी।"</p>
<p>परिषद ने कहा कि इस अवधि के लिए युद्धविराम घोषित किया जाएगा साथ ही यह भी कहा कि वार्ता मतलब अमेरिका के साथ युद्ध का अंत नहीं है। बयान के अनुसार, अगर वार्ता के दौरान अमेरिका जरा सी भी गलती करता है तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से मैं अपने प्रिय भाइयों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर के क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के अथक प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करता हूं।"</p>
<p>इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा किया था कि उन्होंने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा की गारंटी देने पर भी सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण ईरान को सौंपने पर भी सहमति व्यक्त की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:21:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संसद में केंद्र का जवाब: मोदी की इज़रायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई पर नहीं हुई चर्चा, इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई बात नहीं हुई। इस दौरे में AI और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के बीच अब तक 4.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/centres-reply-in-parliament-there-was-no-discussion-about-military/article-148997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच ईरान पर उसके दो दिन बाद हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी। सरकार ने राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि श्री मोदी की फरवरी के अंत में हुई इजरायल की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये, लेकिन ईरान पर बाद में हुए सैन्य हमले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।</p>
<p>सांसद अब्दुल वहाब के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 25–26 फरवरी 2026 को अपने इजरायली समकक्ष के निमंत्रण पर यह दौरा किया था। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उत्तर में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में अनेक समझौते, समझौता ज्ञापन, प्रोटोकॉल और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर हुए।</p>
<p>दौरे के दो दिन बाद ईरान पर सैन्य हमले को लेकर जतायी गयी चिंताओं के बारे में मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में सरकार ने कहा कि वह घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाये हुए हुए है और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। विदेश मंत्री ने भी इजरायल, ईरान, अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में अपने समकक्षों के साथ परामर्श किया है।</p>
<p>सरकार ने बताया कि इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना रहा है। इस दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। क्षेत्रीय नेताओं से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वासन भी प्राप्त हुए हैं। उत्तर में बताया गया है कि विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाये हैं। भारतीय दूतावास और मिशन नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं, चौबीसों घंटे सेवा देने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं और आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, "इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, संघर्ष की शुरुआत से अब तक 4.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रहा है, और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से रसोई गैस लाने वाले जहाजों तथा अन्य पोतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:25:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल-ईस्ट में जारी जंग के बीच ज़रीफ ने की शांति की अपील: ट्रंप की लापरवाह आक्रमकता का​ दिया हवाला, अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान फिर खोल देगा होर्मुज जलडमरूमध्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने 'फॉरेन अफेयर्स' के जरिए अमेरिका को शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ट्रंप की आक्रामकता की निंदा करते हुए परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश की। ज़रीफ़ ने जोर दिया कि प्रतिबंध हटने और आपसी सुरक्षा गारंटी से ही क्षेत्रीय स्थिरता संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/zarif-appeals-for-peace-amid-the-ongoing-war-in-the/article-148970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iranian-foreign-minister-mohammad-javad-zarif.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'लापरवाह आक्रमकता' का उल्लेख करते हुए उसके साथ शांति स्थापित करने की अपील की है। जरीफ ने कहा कि लंबी अवधि का संघर्ष केवल विनाश और अनिश्चितता को बढ़ाता है और स्थायी समाधान के लिए प्रत्यक्ष और वास्तविक बातचीत ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण ढंग से विवाद सुलझाने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा है कि मौजूदा संघर्ष के किसी भी समाधान में ईरान के राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।</p>
<p>पूर्व विदेश मंत्री ने इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अपने प्रस्ताव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस शांति योजना को सार्वजनिक करने को लेकर अपने मन में चल रहे द्वंद्व का भी जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "एक ईरानी होने के नाते, मैं डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामकता और उनके अपमानजनक बयानों से गुस्से में हूँ। मुझे अपनी सेना और देश के लोगों पर गर्व है, इसलिए पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में इस शांति योजना को छपवाने को लेकर मेरे मन में उलझन थी। फिर भी, मुझे यकीन है कि युद्ध का अंत ईरान के राष्ट्रीय हितों के हिसाब से ही होना चाहिए।"</p>
<p>ईरान के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके ज़रीफ़ का मानना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी ईरान, अमेरिका-इजरायल के लगातार हवाई हमलों के सामने मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में अपना प्रस्ताव रखने के कुछ घंटों बाद श्री ज़रीफ़ ने कहा, "ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था लेकिन एक महीने से ज्यादा की लड़ाई के बाद यह साफ है कि जीत ईरान की हो रही है। लगातार बमबारी के बावजूद हमने अपने देश को बचाया है और हमलावरों को करारा जवाब दिया है।"</p>
<p>ज़रीफ़ ने अपने लेख में चेतावनी दी कि भले ही ईरान को सैन्य सफलता मिल रही हो लेकिन आगे की लड़ाई से आम जनता और देश के ढांचे का भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह हिंसा एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है। उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि युद्ध के पहले ही दिन करीब 170 स्कूली बच्चों की मौत पर दुनिया खामोश है। अपनी शांति योजना में ज़रीफ़ ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी मजबूत सैन्य स्थिति का फायदा उठाकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, ज़रीफ़ ने अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमला न करने का वादा करने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश दुश्मनी छोड़कर आर्थिक सहयोग बढ़ाएं, तो ईरान अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने और जनता के कल्याण पर ध्यान दे पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान इजरायल युद्ध के बीच अर्जेंटीना का बड़ा फैसला: ईरान के आईआरजीसी को घोषित किया आतंकवादी संगठन, अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[अर्जेंटीना सरकार ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन का दर्जा दे दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने 1990 के दशक में हुए इजरायली दूतावास और यहूदी केंद्र पर आत्मघाती हमलों का हवाला देते हुए यह कड़ा कदम उठाया। इन हमलों में 100 से अधिक निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/argentinas-big-decision-amid-iran-israel-war-declared-irans-irgc-a/article-148682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/irgc.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूनस आयर्स। अर्जेंटीना ने ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति कार्यालय ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति कार्यालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा, "राष्ट्रीय सरकार ने आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।" बयान में यह याद दिलाया गया कि देश ने 1990 के दशक में दो आतंकवादी हमलों का सामना किया था।</p>
<p>पहला हमला इजरायली दूतावास पर और दूसरा ब्यूनस आयर्स में एक यहूदी सांस्कृतिक केंद्र पर हुआ था। इन हमलों में 100 से अधिक लोग मारे गए थे और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:03:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश की विदेश नीति पर चिंता जताते हुए प्रमोद तिवारी ने साधा केन्द्र सरकार पर निशाना, बोले-पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार की विदेश नीति को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान-अमेरिका तनाव में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने की चर्चा पर चिंता जताई। तिवारी ने 'अब की बार ट्रंप सरकार' नारे पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या देश की सुरक्षा और सम्मान से समझौता किया जा रहा है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/expressing-concern-over-the-countrys-foreign-policy-pramod-tiwari-targeted/article-148375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pramod-tiwari-1738226239.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद प्रमोद तिवारी ने देश की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रमोद तिवारी ने सोमवार को यहां एक बयान में कहा कि जिस पाकिस्तान ने पहलगाम जैसी घटनाओं में देश की बहनों का सुहाग उजाड़ने का काम किया, उसी पाकिस्तान को आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की मध्यस्थता की बात कहना और इस्लामाबाद में संभावित वार्ता को भारत के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया।</p>
<p>कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने 'अब की बार ट्रंप सरकार' का नारा दिया था लेकिन आज देश की विदेश नीति को किस दिशा में ले जाया जा रहा है, यह सवाल खड़ा हो रहा है।" उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि, पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए "सार्थक वार्ता" की मध्यस्थता और मेजबानी करने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:58:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>व्लादिमीर सैफ़्रोनकोव का बड़ा बयान, बोले-ईरान संकट में मदद करने वाले बाहरी पक्षों को सिर्फ़ अपने एजेंडे पर ध्यान नहीं देना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के विशेष दूत व्लादिमीर सैफ़्रोनकोव ने चेतावनी दी है कि ईरान संघर्ष का समाधान बाहरी पक्षों की समन्वित कार्रवाई पर निर्भर है। उन्होंने अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बीच 'संकीर्ण एजेंडे' को छोड़कर समान वैश्विक नियमों के पालन पर जोर दिया। रूस के अनुसार, खाड़ी में शांति केवल सामूहिक और निष्पक्ष कूटनीति से ही संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/vladimir-safronkovs-big-statement-external-parties-helping-in-iran-crisis/article-148304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran11.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रुस ने कहा है कि ईरान संकट का समाधान निकालने में मदद करने की कोशिश कर रहे बाहरी पक्षों को सिर्फ़ अपने संकीर्ण एजेंडे पर ध्यान नहीं देना चाहिए। यह बात रूस के विदेश मंत्री के पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया के लिए विशेष प्रतिनिधि व्लादिमीर सैफ़्रोनकोव ने कही है।</p>
<p>सैफ़्रोनकोव ने कहा, "यहाँ मुझे यह बताना ज़रूरी लगता है कि, कुल मिलाकर, खाड़ी में मौजूदा संकट के साथ-साथ अन्य संघर्षों का समाधान बाहरी पक्षों की समन्वित कार्रवाई पर निर्भर करता है। यह ज़रूरी है कि हर कोई 'खेल के एक ही नियम' के अनुसार काम करे और सिर्फ़ अपने संकीर्ण एजेंडे से निर्देशित न हो।"</p>
<p>गौरतलब है कि, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में, जिसमें तेहरान भी शामिल है, ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। ईरान, इज़रायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 15:03:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का ये होगा संभावित मंत्रिमंडल: सुधन गुरूंग को मिला गृह मंत्रालय तो वाग्ले को वित्त मंत्रालय, जानें किसको कौन सा मिला पद?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री बालेन शाह के नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा तैयार हो गई है। सूत्रों के अनुसार, स्वर्णिम वाग्ले को वित्त और सुधन गुरूंग को गृह मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। शिशिर खनाल विदेश मंत्री और सोबिता गौतम कानून मंत्री के रूप में युवा जोश और विशेषज्ञता का संगम पेश करेंगे। जल्द ही आधिकारिक घोषणा संभावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/this-will-be-the-possible-cabinet-of-the-newly-appointed/article-148115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/balen-shah2.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में नव नियुक्त प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के मंत्रियों के नाम लगभग तय कर लिए गए हैं। विभिन्न स्रोतों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं के बीच विभागों का बंटवारा भी किया जा चुका है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सुधन गुरूंग को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। श्री गुरूंग जेन-ज़ी आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे और गोरखा-दो पार्टी से निर्वाचित हुए हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के उपाध्यक्ष स्वर्णिम वाग्ले को वित्त मंत्रालय दिए जाने की संभावना है। वाग्ले वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं और तनहूं निर्वाचन क्षेत्र से दो बार प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जा चुके हैं। इसी तरह, शिशिर खनाल को विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वह पार्टी के विदेश मामलों से जुड़े विभाग का नेतृत्व कर चुके हैं। खड़क राज पौडेल (गणेश) को संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय सौंपे जाने की संभावना है। वह लेखक भी हैं और कास्की निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं। महोत्तरी निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित दीपक साह को श्रम मंत्रालय मिलने की बात कही जा रही है।</p>
<p>काठमांडू-पांच निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सस्मित पोखरेल को शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि विक्रम तिमिल्सिना को सूचना, संचार एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार मिलने की संभावना है। इसके अलावा प्रतिभा रावल (सामान्य प्रशासन),  बिराज भक्त श्रेष्ठ (ऊर्जा), गीता चौधरी (कृषि), सोबिता गौतम (कानून), सीता बादी (महिला एवं बाल विकास) और सुनील लामसाल (भौतिक अवसंरचना) को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई गई है। इन नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा अभी शेष है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 18:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर पाकिस्तान को महत्व देना भारत की कूटनीतिक विफलता: जयराम रमेश ने खड़े किए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को 'ब्रोकर' बनाना आपत्तिजनक है। जयराम ने डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वर्तमान विदेश नीति पर सवाल उठाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/giving-importance-to-pakistan-on-restoration-of-peace-in-west/article-147949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली के वास्ते मध्यस्थ के रूप में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना था कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह देने, परमाणु अप्रसार नियमों के उल्लंघन और ए. क्यू. खान नेटवर्क के जरिए परमाणु प्रसार में शामिल रहा है। उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही नागरिकों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने आसिम मुनीर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद पाकिस्तान विश्व मंच पर और प्रासंगिक बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया "हमारी सरकार की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियों के कारण एक अस्थिर देश को 'ब्रोकर' की भूमिका मिल गई है, जो भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 14:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी शिकायत पर कुछ देर में पोस्ट डिलीट, कश्मीर से मदद पर ईरान की धन्यवाद पोस्ट का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कश्मीरी महिला द्वारा पति की आखिरी निशानी (सोना) दान करने पर आभार जताया, लेकिन पाकिस्तानी दबाव के आगे झुकते हुए पोस्ट डिलीट कर दी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का यह कदम भारत के प्रति उसके दोगलेपन को दर्शाता है। भारतीय नागरिकों की सहानुभूति और मदद के बावजूद, कश्मीर मुद्दे पर ईरान का यह रवैया कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/post-deleted-after-some-time-due-to-pakistani-complaint-case/article-147788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)45.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान/नई दिल्ली। ईरान को भारत के लोग सहानुभूति दिखाते हुए भारी भरकम पैसे मदद के नाम पर भेज रहे हैं। लेकिन कश्मीर को लेकर ईरान दोगलापन कर रहा है। ईरान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कश्मीर के लोगों को शुक्रिया अदा किया था लेकिन कुछ पाकिस्तानियों की शिकायत पर भारत स्थिति ईरानी दूतावास पोस्ट डिलीट कर <br />देता है।</p>
<p>दरअसल ईरानी दूतावास ने एक पोस्ट किया था जिसमें भारत के प्रति आभार जताया गया था। इसमें कहा गया था कश्मीर की एक सम्मानित बहन ने अपने पति की याद में सहेजकर रखा हुआ सोना, जिनका 28 साल पहले निधन हो गया था, ईरान के लोगों के प्रति प्रेम और एकजुटता से भरे दिल के साथ दान कर दिया। आपके आंसू और आपकी पवित्र भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सांत्वना का सबसे बड़ा स्रोत हैं और इन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। धन्यवाद #कश्मीर। धन्यवाद #भारत। </p>
<p>ईरानी दूतावास ने इस पोस्ट के साथ हैशटैग में भारत का भी नाम लिया था। इसपर कुछ पाकिस्तानियों ने शिकायत करनी शुरू कर दी। वजाहत काजमी नाम के पाकिस्तानी पत्रकार ने ईरान दूतावास के पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि हे ईरान, कश्मीर भारत का नहीं है। इसपर भारत की तरफ से अवैध तरीके से कब्जा किया गया है और ये पाकिस्तान का है। अपने फैक्ट को सही करो। जिसके बाद दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पोस्ट को डिलीट कर फरार हो गया। यानि कश्मीर की जिस महिला ने अपने पति की आखिरी निशानी तक ईरान को दान में दे दिया उस महिला के साथ भी ईरान खड़ा नहीं रह सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:38:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ऑस्ट्रेलिया-ईयू के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, सामानों के सस्ते होने की उम्मीद  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कश्मीरी महिला द्वारा पति की आखिरी निशानी (सोना) दान करने पर आभार जताया, लेकिन पाकिस्तानी दबाव के आगे झुकते हुए पोस्ट डिलीट कर दी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का यह कदम भारत के प्रति उसके दोगलेपन को दर्शाता है। भारतीय नागरिकों की सहानुभूति और मदद के बावजूद, कश्मीर मुद्दे पर ईरान का यह रवैया कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/historic-free-trade-agreement-between-australia-and-eu-expected-to/article-147790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/कैनबरा/ब्रसेल्स। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) ने लगभग आठ वर्षों की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच को बढ़ावा मिलेगा, आयात शुल्क में कटौती होगी और आर्थिक संबंध गहरे होंगे। इस समझौते की घोषणा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और  यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की। लेयेन ने इस समझौते को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और खुले एवं नियम-आधारित व्यापार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। समझौते के तहत, ईयू को किया जाने वाला लगभग 98 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई निर्यात शुल्क मुक्त प्रवेश पा सकेगा। इससे ऑस्ट्रेलियाई कृषि, विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों को काफी बढ़ावा मिलेगा। ऑस्ट्रेलियाई किसानों को वाइन, डेयरी, सीफूड, अनाज, फल और नट्स जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क हटने से लाभ होगा, जिसमें अकेले वाइन निर्यातकों को सालाना लगभग 3.7 करोड़ डॉलर का लाभ होने की उम्मीद है। यह समझौता बीफ, भेड़ के मांस, चीनी और डेयरी जैसे प्रमुख उत्पादों के लिए विस्तारित कोटा के माध्यम से सार्थक पहुंच सुनिश्चित करेगा। </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश आयात शुल्क हटने से यूरोपीय सामान जैसे वाइन, स्पिरिट, बिस्कुट, चॉकलेट, पास्ता आदि सामानों के ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में सस्ते होने की उम्मीद है। साथ ही मशीनरी और वाहनों की कीमत भी कम होगी। इस समझौते के महत्व का उल्लेख करते हुए अल्बनीज ने कहा, लगभग आठ वर्षों की बातचीत के बाद, हमने एक ऐतिहासिक समझौता किया है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभ पहुंचाएगा। यह समझौता यूरोपीय संघ की विशाल 30 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर की अर्थव्यवस्था में ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करता है और ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करेगा। </p>
<p>व्यापार में विविधता लाने का अवसर </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फैरेल ने इसे कड़ी मेहनत से किया गया सौदा बताया जो निर्यातकों और उत्पादकों के लिए वास्तविक व्यावसायिक लाभ प्रदान करता है। उन्होंने कहा, यूरोपीय संघ के आयात शुल्क हटने से ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों को 27 देशों और 45 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ व्यापार में विविधता लाने का अवसर मिलता है। फैरेल ने कहा, अधिक व्यापारिक भागीदारों के साथ अधिक व्यापार का अर्थ है अधिक आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, अधिक अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां, सस्ती कीमतें और अधिक राष्ट्रीय आय। यह समझौता ऑस्ट्रेलियाई फर्मों के लिए सालाना लगभग 845 अरब डॉलर मूल्य के यूरोपीय संघ के सार्वजनिक खरीद अनुबंधों तक पहुंच भी प्रदान करता है। इसके साथ ही पेशेवरों की आवाजाही में सुधार करता है और वित्त, शिक्षा, पर्यटन और संचार जैसी सेवाओं में अवसर बढ़ाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:37:50 +0530</pubDate>
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