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                <title>free trade agreement - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक: देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होगी विदेश नीति, विदेश मंत्री ने दी भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग पर जानकारी</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2026 की पहली परामर्श समिति बैठक में भारत-ईयू के मजबूत रिश्तों की सराहना की। ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर सहमति बनी है। $136 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, यह सौदा 2 अरब उपभोक्ताओं को जोड़कर वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई हिस्से को नई गति देगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-consultation-committee-meeting-on-india-european-union-relations-will/article-145018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वर्ष 2026 की भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की। इस बैठक में भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में आपकी लाभकारी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विदेश मंत्री ने शुक्रवार देर शाम को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए बताया, भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर 2026 की पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की मजबूत गति और व्यापार, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और गतिशीलता सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके पारस्परिक लाभकारी पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के एक प्रतिभागी ने कहा कि अब विदेश नीति के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों में अपूर्व सहमति है। वे मानते हैं कि हमारी विदेश नीति देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होने चाहिए, न कि दबाव समूहों की ब्लैक मेलिंग से। </p>
<p>उन्होंने कहा कि अब तुष्टीकरण के लिए विदेश नीति तय नहीं की जाएगी। उसका पैमाना होगा देश का हित।  एस जयशंकर ने बैठक में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। साथ ही इस मीटिंग की फोटोज भी सोशल मीडिया पर शेयर की। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल में ही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स हुआ है। यह व्यापार समझौता हाल ही में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया। इस समझौते से लगभग 2 अरब उपभोक्ता और दुनिया की कुल जीडीपी के करीब एक-चौथाई हिस्से को एक साथ लाने का वादा किया गया है। यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई।</p>
<p>यूरोपीय संघ एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसमें निर्यात करीब 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:50:48 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>मुक्त व्यापार समझौते के करीब ऑस्ट्रेलिया-ईयू: विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर कर सकते हैं हस्ताक्षर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। प्रधानमंत्री अल्बानीज और उर्सला वॉन डेर लेयन लाल मांस निर्यात से जुड़े शेष विवादों को सुलझाने के करीब हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-eu-close-to-free-trade-agreement-can-sign-agreement-after/article-143376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>कैनबेरा। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत अपने अंतिम दौर में है और आने वाले हफ्तों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के समाचार चैनल एबीसी न्यूज ने ईयू और ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन के हवाले से यह जानकारी दी <br />है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन बचे हुए विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये विवादास्पद मुद्दे लाल गोश्त के निर्यात से संबंधित हैं। वॉन डेर लेयन ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी कर सकती हैं, जहां वह न सिर्फ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी, बल्कि एक सुरक्षा साझेदारी पर भी मुहर लगाएंगी। उनके दौरे की अंतिम तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ईयू के बीच बातचीत कई सालों तक चलने के बाद 2023 में रुक गयी थी। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फरेल ने इससे पहले कहा था कि वह तब तक समझौता नहीं करेंगे, जब तक ईयू लाल गोश्त सहित ऑस्ट्रेलिया के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ कम नहीं कर देता। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम, व्यापार और रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई गति</title>
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                        <![CDATA[भारत ने गुरुवार को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर साइन किए, ताकि 2004 से रुके हुए ट्रेड पैक्ट के लिए बातचीत फिर से शुरू हो सके।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-step-towards-india-gcc-free-trade-agreement-trade-and-strategic/article-142071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किया, जिसके बाद अमेरिका ने अपने टेरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था और अब भारत ने एक और कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में अहम प्रगति करते हुए गुरुवार को टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही वर्ष 2004 से रुकी हुई भारत-GCC व्यापार वार्ता को दोबारा औपचारिक रूप से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>भारत और जीसीसी के बीच FTA वार्ता की शुरुआत 2004 में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके बाद 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन 2011 में GCC ने वैश्विक स्तर पर सभी व्यापार वार्ताएं रोक दी थीं। नवंबर 2022 में GCC के सेक्रेटरी जनरल की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में नई जान आई। अक्टूबर 2023 में GCC ने संशोधित टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस साझा किए, जिन पर अब दोनों पक्षों की सहमति बन गई है।</p>
<p>GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत और GCC देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।</p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-GCC द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.4 प्रतिशत है। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर रहा। UAE के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा GCC व्यापार साझेदार है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचा, पेट्रोकेमिकल्स, आईसीटी, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन देगा। साथ ही, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को संतुलित करने तथा निर्यात विविधीकरण में भी मदद करेगा।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 17:47:51 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>यूरोपीय संघ ने मर्कोसुर व्यापार समझौते को दी मंजूरी</title>
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                        <![CDATA[फ्रांस के विरोध के बावजूद, यूरोपीय संघ ने मर्कोसुर देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते को हरी झंडी दे दी है। यह समझौता 70 करोड़ लोगों का मुक्त-व्यापार क्षेत्र बनाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-approves-mercosur-trade-agreement/article-139146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/eu.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने शुक्रवार को लंबे समय से विचाराधीन ईयू-मर्कोसुर साझेदारी समझौते को हरी झंडी दे दी। ईयू सदस्यों ने व्यापारिक लाभों को बढ़ाने के लिए एक व्यापक साझेदारी समझौते और एक स्वतंत्र अंतरिम व्यापार समझौते की सहमति दी है।  ईयू ने बताया कि यह समझौता ईयू और मर्कोसुर के संबंधों में एक मील का पत्थर है। यह एक आधुनिक साझेदारी के तहत राजनीतिक संवाद, सहयोग और व्यापार के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है। </p>
<p>ज्ञातव्य है कि, लगभग 25 वर्षों से ईयू-मर्कोसुर समझौते पर बातचीत चल रही है, जो बदलती राजनीतिक स्थितियों, दक्षिण अमेरिका में पर्यावरणीय सुरक्षा पर विवादों और यूरोप के कृषि क्षेत्र के कुछ हिस्सों के विरोध के कारण बार-बार रुकती और शुरू होती रही है। इसमें निर्णायक सफलता दिसंबर 2024 में मिली, जब ईयू और मर्कोसुर नेताओं ने घोषणा की कि वे साझेदारी के लिए एक व्यापक समझौते पर पहुंच गये हैं। इसके बाद हस्ताक्षर और समर्थन से पहले आवश्यक कानूनी और तकनीकी कार्य शुरू किए गए। </p>
<p>यूरोपीय आयोग ने इस समझौते को ईयू का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता बताया है। आयोग का कहना है कि इससे 70 करोड़ से अधिक लोगों का मुक्त-व्यापार क्षेत्र बनेगा और ईयू निर्यात पर सालाना चार अरब यूरो (4.65 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक का शुल्क कम हो जाएगा।</p>
<p><strong>ईयू के कुछ सदस्य देशों ने विरोध भी किया</strong></p>
<p>ज्ञातव्य है कि इस समझौते पर ईयू के कुछ सदस्य विरोध जताते रहे हैं। जर्मनी और स्पेन जैसे समर्थकों का कहना है कि यह सौदा नये बाजार खोलने में मदद करेगा क्योंकि यूरोप अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव की भरपाई करना चाहता है। फ्रांस के नेतृत्व वाले विरोधियों ने चेतावनी दी है कि इससे सस्ते गोमांस, पोल्ट्री और चीनी का आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ेगा। </p>
<p>हाल के महीनों में, यूरोपीय आयोग ने संवेदनशील कृषि आयात से होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए अतिरिक्त‘सुरक्षा उपायों’के साथ समर्थन जुटाने की कोशिश की है।  आयोग ने इटली सहित विरोध करने वाले सदस्य देशों को मनाने के उद्देश्य से कुछ उपायों का प्रस्ताव रखा है, जैसे 2028 से‘सामान्य कृषि नीति’के तहत 45 अरब यूरो की सहायता किसानों को उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहन के लिए उर्वरकों पर लगने वाले ईयू के‘कार्बन बॉर्डर टैक्स’को फिलहाल के लिए रोकना। शुक्रवार को फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और हंगरी ने इस समझौते के खिलाफ मतदान किया, जबकि बेल्जियम अनुपस्थित रहा। इटली ने अपने कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त आश्वासन मिलने के बाद इस सौदे का समर्थन किया। राजनयिकों का कहना है कि आवश्यक योग्य बहुमत हासिल करने के लिए इटली का समर्थन महत्वपूर्ण था।</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 12:02:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>भारत ने न्यूजीलैंड से मिलाया हाथ, अब कोटा में सस्ती होगी कीवी</title>
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                        <![CDATA[थोक बाजार में लागत कम होगी और खुदरा ग्राहकों को भी सस्ती दरों पर कीवी मिल सकेगी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/india-and-new-zealand-join-hands--kiwis-to-become-cheaper-in-kota/article-137621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का सीधा फायदा आगामी दिनों में आम उपभोक्ताओं को मिलने जा रहा है। इस समझौते के बाद न्यूजीलैंड से आयात होने वाली कई वस्तुओं पर आयात शुल्क शून्य कर दिया जाएगा, जिनमें कीवी फल भी शामिल है। इससे कोटा सहित देशभर के बाजारों में कीवी की कीमतों में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है। अब तक न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी फल पर करीब 33 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाता था, जिससे इसकी कीमत काफी बढ़ जाती थी। एफटीए लागू होने के बाद यह टैक्स घटकर 0 फीसदी हो जाएगा। इससे थोक बाजार में लागत कम होगी और खुदरा ग्राहकों को भी सस्ती दरों पर कीवी मिल सकेगी।</p>
<p><strong>आयात सस्ता, बाजार में बढ़ेगी उपलब्धता</strong><br />कोटा की थोक फल मंडी के व्यापारी शौभागमल ने बताया कि अब तक न्यूजीलैंड से आने वाला कीवी फल आयात शुल्क, परिवहन लागत और अन्य करों के कारण महंगा पड़ता था। फ्री ट्रेड डील के बाद आयात प्रक्रिया आसान होने के साथ-साथ शुल्क में राहत मिलेगी। जिससे आगामी दिनों में थोक बाजार में कीवी की कीमत कम होती चली जाएगी। इसका फायदा खुदरा ग्राहकों तक पहुंचना तय माना जा रहा है। फल व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीवी की आवक बढ़ेगी। अभी तक कीवी एक महंगा फल माना जाता था, लेकिन दाम घटने से अब मध्यम वर्ग के ग्राहक भी इसे नियमित रूप से खरीद सकेंगे।</p>
<p><strong>एफटीए के तहत तय हुआ आयात कोटा</strong><br />जानकारी के अनुसार एफटीए के तहत पहले चरण में न्यूजीलैंड से 6,250 टन कीवी ड्यूटी फ्री आयात करने का प्रावधान किया गया है। आने वाले कुछ वर्षों में यह कोटा बढ़ाकर 15,000 टन तक किया जाएगा। तय कोटे से ज्यादा आयात होने पर भी पहले की तुलना में कम टैक्स ही देना होगा, जिससे कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। न्यूजीलैंड कीवी का बड़ा उत्पादक देश है। साल 2025 में भारत ने कुल लगभग 55,000 टन कीवी आयात किया था, जिसमें से करीब 2,700 टन कीवी न्यूजीलैंड से आई। अब टैक्स घटने के बाद भारत न्यूजीलैंड से ज्यादा मात्रा में कीवी आयात कर सकेगा, क्योंकि यह अन्य देशों की तुलना में सस्ते दाम पर उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong>सेहत का खजाना है कीवी</strong><br />पोषण विशेषज्ञों के अनुसार कीवी को पोषण से भरपूर फल माना जाता है। इसमें विटामिन-सी, फाइबर और एंटीआॅक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। सस्ती कीमत पर उपलब्ध होने से अब ज्यादा लोग इसे अपने दैनिक आहार में शामिल कर सकेंगे। सस्ता होने से अब लोग इसे रोजमर्रा के आहार में शामिल कर सकेंगे, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से न केवल फलों बल्कि ऊन, लकड़ी, ड्राई फ्रूट और अन्य कृषि उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद कम कीमत पर मिल सकेंगे।</p>
<p><strong>कोटा मंडी में कीवी के भाव</strong><br />बड़ी साइज कीवी 90-100 रुपए प्रति नग<br />मध्यम साइज कीवी 70-80 रुपए प्रति नग<br />छोटी साइज कीवी 55-65 रुपए प्रति नग<br />-अभी बाजार में कीवी के दाम ज्यादा होने से हम इसकी खरीदारी कम करते हैं। बीमारी के दौरान के इसका उपयोग अधिक होता है। अब कीवी के दाम कम होने से काफी राहत मिलेगी।<br />मोहिनी देवी, गृहिणी<br />-पहले कीवी सीमित ग्राहक ही लेते थे, क्योंकि दाम ज्यादा थे। अब आयात सस्ता होने से बिक्री बढ़ेगी और अधिक ग्राहक भी इस फल की ओर आकर्षित होंगे। आगामी दिनों में दाम में गिरावट होगी।<br /><strong>- शब्बीर वारसी, प्रमुख फल व्यापारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 14:41:47 +0530</pubDate>
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                <title>भारत–न्यूजीलैंड FTA से आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, वीजा-व्यापार और निवेश में बड़े अवसर</title>
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                        <![CDATA[भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर औपचारिक रूप से सहमति बना ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात के बाद इस अहम समझौते का ऐलान किया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-new-zealand-fta-gives-new-strength-to-economic-relations-huge/article-136924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/new-zealand-foreign-minister-opposes-fta-with-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर औपचारिक रूप से सहमति बना ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात के बाद इस अहम समझौते का ऐलान किया गया। इस डील से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि बताया है।</p><p>इस FTA की सबसे खास बात कुशल भारतीय कारोबारियों और पेशेवरों के लिए वीजा सुविधा है। समझौते के तहत भारतीय नागरिकों को 5,000 अस्थायी वर्क वीजा दिए जाएंगे। इसके अलावा वर्किंग हॉलीडे वीजा और पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसरों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भारतीय युवाओं को न्यूजीलैंड में करियर के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।</p><p><strong>क्या होगा फायदा?</strong></p><p>ब्रिटेन और ओमान के बाद यह भारत का इस साल तीसरा बड़ा FTA है। इसके तहत भारत से न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी।</p><p><strong>किसानों की बढ़ेगी आमदनी</strong></p><p>FTA में निवेश को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव शामिल है। न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करेगा। इससे भारत के औद्योगिक और आर्थिक विस्तार को मजबूती मिलेगी। साथ ही, भारतीय किसानों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। भारत के फल, सब्जियां, अनाज और मसाले न्यूजीलैंड के बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 15:20:16 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-न्यूजीलैंड ने किया मुक्त व्यापार समझौता, अगले 15 वर्षाें में 18 अरब रुपये निवेश का भरोसा</title>
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                        <![CDATA[नई दिल्ली में भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि इससे व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग बढ़ेगा तथा किसानों, एमएसएमई और युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-new-zealand-sign-free-trade-agreement-promise-of-investment-of/article-136814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-new-zealand-fta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से टेलीफोन पर बातचीत के बाद संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की गयी। बता दें कि प्रधानमंत्री लक्सन की मार्च 2025 में भारत यात्रा के दौरान इस समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी। दोनों नेताओं ने कहा कि रिकॉर्ड नौ महीने में एफटीए पूरा होना दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने वाला है। यह साझा महत्वाकांक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिखाता है। </p>
<p>एफटीए द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा और बाजार पहुंच को बढ़ायेगा तथा निवेश बढ़ाने वाला होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगा। यह समझौता दोनों देशों के नवाचारियों, उद्यमियों, किसानों, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), छात्रों और युवाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नये मौके भी पैदा करेगा। </p>
<p>एफटीए के भरोसेमंद आधार के साथ दोनों नेताओं ने अगले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने और अगले 15 सालों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (17.91 अरब रुपये) के निवेश पर भरोसा जताया। पीएम मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने द्विपक्षीय सहयोग के अन्य क्षेत्रों खेल, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों का आदान-प्रदान में हुई प्रगति का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 16:14:00 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर, व्यापार में 34 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की उम्मीद</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लंबे समय से जारी द्विपक्षीय वार्ता आखिरकार रंग लाई है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-uk-free-trade-agreement-expected-to-increase-the-signature-trade/article-121532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/212142roer-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लंबे समय से जारी द्विपक्षीय वार्ता आखिरकार रंग लाई है। दोनों देशों ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे अब सीईटीए के नाम से जाना जाएगा।</p>
<p>इस समझौते पर दस्तखत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की उपस्थिति में किए गए। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। यह समझौता न केवल व्यापार जगत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच सालाना 34 अरब डॉलर तक व्यापार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि यह व्यापार 2030 तक दोगुना होकर 120 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। </p>
<p>दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर को ऐतिहासिक बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को इससे बड़ा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि “ आज हमारे संबंधों में एक एतिहासिक दिन है। मुझे प्रसन्नता है कि कई वर्षों की मेहनत के बाद आज दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। भारतीय टेक्सटाइल्स, फुटवियर, आभूषणों , समुद्री खाद्य उत्पादों और इंजीनियरिंग उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। भारत के ऐग्रिकल्चर उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड उद्योग के लिए ब्रिटिश मार्किट में नए अवसर बनेंगे। ”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता देश के युवाओं और लघु , सूक्ष्म और मझोले उद्योंगो के लिए खास तौर पर फायदेमंद रहेगा। उन्होंने कहा कि “ भारत के युवाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई सेक्टर के लिए यह समझौता विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। वहीं दूसरी ओर भारत के लोगों और इंडस्ट्री के लिए ब्रिटेन में बने उत्पाद जैसे मेडिकल डिवाइसेज़ और एयरोस्पेस कलपुर्जे सुलभ और किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकेंगे”</p>
<p>श्री मोदी ने कहा कि दोनों देश व्यापक सामरिक साझेदारी को नयी दिशा देने के लिए विजन 2035 पर भी बात करेंगे। उन्होंने कहा कि “ अगले दशक में हमारी व्यापक सामरिक साझेदारी को नयी गति और ऊर्जा देने के लिए आज हम विजन 2035 पर भी बात करेंगे। यह टेक्नोलॉजी, डिफेंस, क्लाइमेट, एजुकेशन और पीपल-टू-पीपल कनेक्ट के क्षेत्रों में एक मजबूत, भरोसेमंद और महत्वाकांक्षी साझेदारी का रोडमैप होगा। ”</p>
<p>विभिन्न देशों के बीच चल रहे संघर्ष और टकरावों पर उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि “ इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता, यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर हम विचार साझा करते रहे हैं। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है। आज के युग की मांग, विस्तारवाद नहीं, विकासवाद है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने पिछले महीने अहमदाबाद में हवाई दुर्घटना में मारे गए ब्रिटिश नागरिकों के परिजनों के प्रति संवेदना भी प्रकट की। मोदी ने क्रिकेट को दोनों देशों के बीच साझेदारी का शानदार उदाहरण बताते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन उच्च स्कोर वाली साझेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि “ हम दोनों के लिए क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है। और साथ ही यह हमारी साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण भी है। कभी-कभी स्विंग और चूक हो सकती है, लेकिन हम हमेशा सीधे बल्ले से खेलते हैं! हम एक मज़बूत और उच्च स्कोर वाली साझेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 18:01:41 +0530</pubDate>
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