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                <title>epidemic - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>epidemic RSS Feed</description>
                
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                <title>क्या फिर दुनिया बढ़ रही है महामारी की ओर? फ्रांस में पहला इबोला मरीज मिलने से स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क, जानिए किन देशों में बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कांगो में एक महीने में रिकॉर्ड 1,000 से अधिक इबोला मामलों की पुष्टि के बाद यह संक्रमण युगांडा और फ्रांस तक फैल गया है। कांगो में अब तक 277 मौतें हो चुकी हैं। स्थिति से निपटने के लिए कांगो ने चिकित्सा क्षमता बढ़ाई है और युगांडा के साथ मिलकर संयुक्त सीमा अभियान शुरू किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-the-world-moving-towards-an-epidemic-health-agencies-alert/article-157981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ebola.png" alt=""></a><br /><p>किंशासा। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) से शुरू हुआ इबोला वायरस का संक्रमण अब दूसरे देशों में भी पैर पसारने लगा है। कांगो में महज एक महीने के भीतर इबोला के पुष्ट मामले रिकॉर्ड एक हजार पार कर चुके हैं। वहीं बुधवार को युगांडा में इबोला का एक और नया मामला सामने आने के बाद वहां कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 20 हो गयी है। यूरोपीय देश फ्रांस में भी इबोला के पहले मामले की पुष्टि हुई है, जहां कांगो से लौटे एक डॉक्टर को जांच में पॉजिटिव पाया गया है। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पीड़ित डॉक्टर का इलाज शुरू कर दिया गया है।</p>
<p>युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'एक्स' पर बताया कि देश में अब तक आये कुल 20 मामलों में से 15 मरीज पड़ोसी देश कांगो से आये हैं, जबकि पांच स्थानीय संक्रमण के मामले हैं। युगांडा में हालांकि राहत की बात यह है कि रिकवरी रेट काफी बेहतर है और 20 में से 15 मरीज पूरी तरह ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। फिलहाल वहां तीन मरीजों का इलाज चल रहा है और दो लोगों की मौत हो चुकी है।</p>
<p>इबोला के मुख्य केंद्र कांगो में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। 15 मई को घोषित हुए इस नये प्रकोप के शुरुआती एक महीने में ही रिकॉर्ड 1,094 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 277 लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के स्वास्थ्य आपातकाल निदेशक अब्दिरहमान महामुद ने जिनेवा में बताया कि अफ्रीका के इतिहास में इबोला फैलने के पहले महीने के भीतर आने वाले मामलों की यह सबसे बड़ी संख्या है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल 387 मरीज इलाज या क्वारंटाइन में हैं और 131 संदिग्ध मामले भी दर्ज किये गये हैं।</p>
<p>गौरतबल है कि इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए कांगो सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रयास तेज कर दिये हैं। पिछले दो हफ्तों में स्वास्थ्य क्षेत्रों में बेडों की संख्या बढ़ाकर 500 से अधिक कर दी गई है। इसके साथ ही, राजधानी किंशासा समेत सर्वाधिक प्रभावित प्रांतों (इतुरी, उत्तर कीवू और दक्षिण कीवू) में जांच की क्षमता को रोजाना 30 टेस्ट से बढ़ाकर 2,000 टेस्ट प्रतिदिन कर दिया गया है। कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिसिकेदी ने महामारी के केंद्र 'इतुरी प्रांत' का दौरा करने का एलान किया है। इसके साथ ही, संक्रमण को रोकने के लिए युगांडा और कांगो ने मिलकर एक जॉइंट क्रॉस-बॉर्डर अभियान शुरू किया है, जिसके तहत दोनों देशों की रैपिड रिस्पांस टीमें और मोबाइल लैब सीमाओं पर मिलकर काम करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:25:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्यूबा में रहस्यमयी वायरस का हाहाकार, मरीजों के मरने से अस्पताल कनाडा ने लगाया 7 दिनों का क्वारंटाइन</title>
                                    <description><![CDATA[क्यूबा में रहस्यमय वायरस से हालात बिगड़े। अस्पतालों में मरीजों की भरमार, मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप। कनाडा ने स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन लागू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hospital-canada-imposes-7-day-quarantine-as-patients-die-due-to/article-139249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हबाना। क्यूबा में एक रहस्यमय वायरस ने तबाही मचा दी है। देश के कई इलाकों में वायरस का खौफ पसर गया है और भारी संख्या में मरीजों के आने से अस्पताल ढहने के कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं देश की कम्युनिस्ट सरकार ने वायरस की वजह से हो रही मौत को छिपाना शुरू कर दिया है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज तेज बुखार, लाल धब्बे, त्वचा का छिलना, जोड़ों में सूजन, उल्टी, दस्त जैसे लक्षण से परेशान हैं। हालांकि, अभी तक डॉक्टर पता लगाने में नाकाम रहे हैं कि ये वायरस क्या है और लोग किस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। द सन ने कई तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें अस्पतालों में जमीन पर लेटे मरीजों को देखा जा रहा है। तस्वीरों में देखा जा रहा है की जमीन पर लेटे मरीजों का डॉक्टर इलाज कर रहे हैं।</p>
<p><strong>एक तिहाई से ज्यादा लोग इससे संक्रमित </strong></p>
<p>इस बीच कनाडा सरकार ने इस हफ्ते क्यूबा से लौटने वाले लोगों के लिए हेल्थ स्क्रीनिंग और सात दिनों की क्वारंटाइन की घोषणा कर दी है। वहीं, स्पेन ने दिसंबर में अपने नागरिकों को गंभीर महामारी बताकर क्यूबा से दूर रहने से कहा था। कई लोग इस वायरस को द वायरस के नाम से संबोधित कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि क्यूबा में एक तिहाई से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने इस बढ़ोतरी को हाल के दशकों में देश का सबसे गंभीर संकट बताया है। क्यूबा में 17 दिसंबर तक वायरस से 52 मौतें हुई थीं, जिनमें से ज्यादातर बच्चे थे। अभी तक अधिकारियों ने 38 हजार से ज्यादा लोगों के वायरस से संक्रमित होने की आधिकारिक तौर पर सूचना दी है। </p>
<p><strong>रिपोर्ट में वायरस का जिक्र नहीं</strong></p>
<p>द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा के लोगों का आरोप है कि सरकार असली आंकड़ों को छिपा रही है और वास्तविक आंकड़े इससे कई गुना ज्यादा है। वहीं, हवाना के एक जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता मैनुअल कुएस्टा मोरुआ ने कहा है कि यह आउटब्रेक करीब पांच महीने पहले माटांजास में शुरू हुआ था, जहां अचानक लोगों की मौते होने शुरू हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने मरने वालों के जो डेथ सर्टिफिकेट बांटे हैं, उनमें वायरस का कोई जिक्र नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>बीमारी एक तरह का कंबाइंड आबोर्वायरस </strong></p>
<p>स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले साल अक्टूबर के अंत तक देश भर में एक हफ्ते में बुखार से पीड़ित 13 हजार नए मामलों की जानकारी दी थी। जबकि कैमागुए और होल्गुइन जैसे इलाकों में इतने लोगों की मौत हुई है कि कब्रिस्तान भर गए थे। द्वीप पर बीमारी फैलने के तीन महीने बाद, क्यूबा की सरकार ने इस संकट को पहली बार महामारी माना। </p>
<p>लेकिन सरकार ने फिर भी नेशनल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने से इनकार कर दिया। इस बीमारी को एक तरह का कंबाइंड आबोर्वायरस कहा गया है। डॉक्टरों का मानना है कि इसमें डेंगू, ओरोपौचे और चिकनगुनिया, साथ ही एच1एन इन्फ्लूएंजा, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस और कोविड-19 जैसे दूसरे इन्फेक्शियस रेस्पिरेटरी वायरस शामिल हैं। डेंगू से बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या दबाव और रैशेज होते हैं। वहीं ज्यादा गंभीर मामलों में, शॉक, सांस लेने में दिक्कत, गंभीर ब्लीडिंग और अंगों का फेल होना शामिल है। वहीं, माटांजास के एक क्लिनिक की एक नर्स ने बताया कि यह कहना झूठ नहीं होगा कि हम मर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:36:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में 33 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा,  साल 1992 के बाद 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[सीडीसी के अनुसार, साल 2025 में अमेरिका के 44 राज्यों में खसरे के 2,065 मामले दर्ज किए गए। 1992 के बाद यह सर्वाधिक आंकड़ा है, जिससे देश का उन्मूलन दर्जा खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/new-record-in-america-more-than-2000-cases-of-measles/article-138088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/measles-case-in-us.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2025 में खसरे के 2,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए जो 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है। 30 दिसंबर तक, देश में खसरा के कुल 2,065 पुष्ट मामले सामने आए थे, जिनमें से लगभग 11 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, ये मामले अमेरिका के 44 राज्यों में दर्ज किए गए, साथ ही अमेरिका आने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भी मामले सामने आए। यह आंकड़ा 1992 के बाद से सबसे अधिक वार्षिक संख्या है, जब देश में खसरा के 2,126 मामले सामने आए थे।</p>
<p>सीडीसी के अनुसार, 2025 में पांच से 19 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी, जो कुल मामलों का लगभग 42 प्रतिशत थी। 2025 में अमेरिका में खसरा से तीन मौतें दर्ज की गईं। सीडीसी के अनुसार, 2000 में अमेरिका में खसरा को समाप्त घोषित कर दिया गया था, जिसका मतलब है कि देश में खसरा नहीं फैल रहा है और नए मामले केवल तभी पाए जाते हैं जब कोई व्यक्ति विदेश में खसरा से संक्रमित होता है और स्वदेश लौटता है।</p>
<p>पिछले साल खसरे के मामलों में हुई वृद्धि के साथ, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही अपना उन्मूलन दर्जा खो सकता है, जैसा कि कनाडा नवंबर 2025 में खो चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:36:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>G-20 Summit: भारत ने दिया महामारी की रोकथाम पर जोर </title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री  डॉ. भारती प्रवीण पवार ने कहा है कि भारत ने विश्व को महामारी से बचाने और इसकी रोकथाम पर जोर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-stresses-on-prevention-of-epidemic/article-54792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/bhartyi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री  डॉ. भारती प्रवीण पवार ने कहा है कि भारत ने विश्व को महामारी से बचाने और इसकी रोकथाम पर जोर दिया है। डॉ. पवार ने गुजरात के गांधीनगर में जी-20 देशों के स्वास्थ्य उप मंत्रियों की बैठक से पहले प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि  भारत की जी- 20 अध्यक्षता वसुधैव कुटुंबकम - दुनिया एक परिवार है - के दर्शन पर आधारित  है। यह वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि महामारी ने  सिखाया है  कि जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय जी-20 अध्यक्षता ने वन हेल्थ - के महत्वपूर्ण खतरों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है जो माइक्रोबियल प्रतिरोध और जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने हैं।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत एक वैश्विक चिकित्सा समुदाय की परिकल्पना करता है जो दुनिया भर में अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण तंत्र की स्थापना होगी। इससे दुनिया भर में सबसे कमजोर लोगों के लिए, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण में उन लोगों के लिए गुणवत्ता और किफायती टीके, चिकित्सीय तथा निदान तक पहुंच को सक्षम करेगा। डा. पवार ने भारत की जी-20 अध्यक्षता ने स्वास्थ्य आपात स्थिति रोकथाम तैयारी और प्रतिक्रिया क्षेत्र में प्रयासों  की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल भी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 13:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया ने महामारी को रोकने के नाम पर मार दी करोड़ों मधुमक्खियां</title>
                                    <description><![CDATA[कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का वो देश, जहां पर सबसे ज्यादा शहद का उत्पादन होता है। जहां से दुनिया के दूसरे देशों को शहद निर्यात होता है। अब यहां पर शहद बनाने वाली मधुमक्खियों पर आफत आ गई है। यहां पर इंडस्ट्री को बचाने के लिए मधुमक्खियों को मारा जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि मधुमक्खियों को मार कर इंडस्ट्री कैसे बचेगी?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-killed-millions-of-bees-in-the-name-of-stopping-the-epidemic/article-13726"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bees.jpg" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का वो देश, जहां पर सबसे ज्यादा शहद का उत्पादन होता है। जहां से दुनिया के दूसरे देशों को शहद निर्यात होता है। अब यहां पर शहद बनाने वाली मधुमक्खियों पर आफत आ गई है। यहां पर इंडस्ट्री को बचाने के लिए मधुमक्खियों को मारा जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि मधुमक्खियों को मार कर इंडस्ट्री कैसे बचेगी? दरअसल इसकी वजह है एक खतरनाक बीमारी और अगर इसे नहीं रोका गया तो फिर पूरी इंडस्ट्री चौपट हो जाएगी। ऑस्ट्रेलिया की शहद इंडस्ट्री पर इस समय वारोआ मिटे प्लेग का साया मंडरा रहा है और इसलिए ही रोजाना मधुमक्खियां मारी जा रही हैं।<br /><br /><strong>नहीं था कोई और विकल्प</strong><br />अब तक 600 छत्तों में मौजूद कई मधुमक्खियों को मारा जा चुका है। वहीं कई लाखों मधुमक्खियों को मारे जाने का प्लान तैयार किया जा चुका है। आॅस्ट्रेलिया में अथॉरिटीज का मानना है कि अगर बीमारी को आगे बढ़ने से रोकना है तो फिर मधुमक्खियों को मारना ही पड़ेगा। इसके अलावा कोई और आॅप्शन फिलहाल नहीं है। छह मील के दायरे में इन मधुमक्खियों को मारने के लिए इरैडिकेशन जोन बनाया गया है। अथॉरिटीज का मकसद है कि दुनिया को इस खतरनाक प्लेग से किसी तरह बचाया जा सके।</p>
<p><br /><strong>18 मिलियन मधुमक्खियों की मौत</strong><br />न्यू साउथ वेल्स के चीफ प्लांट प्रोटेक्शन ऑफिसर सतेंद्र कुमार ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया वो अकेला सबसे बड़ा शहद उत्पादक देश है जो इस समय वारोआ मिटे प्लेग से मुक्त हो चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि ये प्लेग ऑस्ट्रेलिया की शहद इंडस्ट्री को 70 मिलियन डॉलर का चूना लगा सकता है। डैनी ले फ्यूवेरे जो ऑस्ट्रेलिया की शहद इंडस्ट्री काउंसिल के कार्यवाहक मुखिया हैं, उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने पहले ही 600 छत्तों को खत्म कर दिया है और हर छत्ते में 30,000 मधुमक्खियां थीं। कम से कम इन छत्तों में कुल 18 मिलियन मधुमक्खियां मौजूद थीं। जो प्लेग ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों को शिकार बना रहा है, उसकी वजह से उनकी उड़ने, भोजन जुटाने और शहद का उत्पादन करने की क्षमता पर खासा असर पड़ता है। इस प्लेग की वजह से ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों की संख्या खासी प्रभावित हुई है।<br /><br /> जून के अंत में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में इस प्लेग का पता चला था और तब से ही शहद उत्पादकों ने पूरी तरह से लॉकडाउन लगा दिया है। ऑस्ट्रेलिया में सन 1822 में सबसे पहली मधुमक्खी एपिस मेलीफेरा लाई गई थी। अब ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालक मौजूद हैं और गांवों के हर घर में मधुमक्खियों को पाला जाता है। आज मधुमक्खियां और शहद यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य सोर्स है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 14:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वहीं पहुंचा कोरोना जहां से शुरू हुई थी महामारी , वुहान में दो संक्रमित, जीरो कोविड पॉलिसी 2.0 लाएंगे जिनपिंग</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग। कोरोना वायरस की शुरूआत चीन के वुहान शहर से हुई थी। यहां से यह घातक वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। करीब ढाई साल बाद जब दुनिया के ज्यादातर देशों में महामारी पर काबू पा लिया गया है, चीन कोरोना की अब तक की सबसे घातक लहर से जूझ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक बार फिर संक्रमण के मामले वहीं से मिले हैं जहां से इनकी शुरूआत हुई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/corona-reached-where-the-epidemic-started--two-infected-in-wuhan--jinping-will-bring-zero-covid-policy-2-0/article-13559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/v-4.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। कोरोना वायरस की शुरूआत चीन के वुहान शहर से हुई थी। यहां से यह घातक वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। करीब ढाई साल बाद जब दुनिया के ज्यादातर देशों में महामारी पर काबू पा लिया गया है, चीन कोरोना की अब तक की सबसे घातक लहर से जूझ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक बार फिर संक्रमण के मामले वहीं से मिले हैं जहां से इनकी शुरूआत हुई थी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर जीरो कोविड पॉलिसी पर जोर दिया है। खबरों के मुताबिक मध्य चीनी शहर में कोरोना के दो बिना लक्षण वाले मामले सामने आए हैं। चीन में जल्द ही मास टेस्टिंग की चौथी लहर आ सकती है। शुक्रवार को अनहुई प्रांत में 107 मामले सामने आए और लिंगबी काउंटी में लॉकडाउन लगा दिया गया। गुरुवार को पूरे देश में 163 मामले सामने आए जो बीते तीन हफ्तों में सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब कुछ दिनों पहले ही जिनपिंग ने वुहान का दौरा किया था।<br /><br /><strong>चीन के आंकड़ों पर अमेरिका को संदेह</strong><br />चीन में कोरोना संक्रमण की दर वैश्विव मानकों से काफी कम है। इसके बावजूद अपनी जीरो कोविड पॉलिसी के तहत चीन ने कठोर नियमों को लागू किया हुआ है। चीन का दावा है कि इतनी कठोर नीति देश के बुजुर्गों और चिकित्सा प्रणाली की रक्षा करने के लिए लागू की गई है। चीन की सरकारी डेटा के अनुसार, 140 करोड़ लोगों के देश में कोरोना से सिर्फ 5,226 मौतें हुई हैं। हालांकि, अमेरिका समेत कई देशों ने चीन के इन आंकड़ों पर संदेह भी जताया है।<br /><br /><strong>बड़े पैमाने पर टेस्टिंग और लॉकडाउन में तेजी आने की उम्मीद</strong> <br />जिनपिंग ने वायरस को रोकने के लिए शहरों में एक बार फिर लॉकडाउन और सख्त प्रतिबंध लगाने की इच्छा जताई। जिनपिंग अब एक अपडेट जीरो कोविड पॉलिसी की शुरूआत करेंगे जो बाहर से आने वाले यात्रियों और संपर्क में आने वाले लोगों की क्वारंटीन अवधि को आधा कर देगी। बड़े पैमाने पर टेस्टिंग और लॉकडाउन में तेजी आने की उम्मीद भी जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 12:59:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मंकीपॉक्स महामारी का नाम बदलने का फैसला: WHO</title>
                                    <description><![CDATA[ 30 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों से मिले एक पत्र के बाद डब्ल्यूएचओ ने यह कदम उठाया है। पत्र में नाम को तत्काल रूप से बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पत्र में लिखा गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/decision-to-rename-monkeypox-epidemic-who/article-12243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/who.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p>जिनेवा। दुनिया में तेजी से फैलते मंकीपॉक्स वायरस को कुछ वैज्ञानिकों के 'स्टिगमाटाइजिंग' (कलंकित किया जाना या किसी को दोषारोपण करना) कहे जाने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी अब महामारी का नाम बदलने का फैसला किया है। न्यूयॉर्क पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।<br /><br />संगठन के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयियस ने कहा,''विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनिया भर के अपने सहयोगियों और विशेषज्ञों के साथ मंकीपॉक्स वायरस का नाम बदलने के काम में जुटा हुआ है।  हम जितनी जल्दी हो सके नए नाम की घोषणा करेंगे। ''दरअसल, 30 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों से मिले एक पत्र के बाद डब्ल्यूएचओ ने यह कदम उठाया है। पत्र में नाम को तत्काल रूप से बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पत्र में लिखा गया,''निरंतर बातचीत और मुद्दे पर लगातार विचार-विमर्श करने के बाद यह जरूरी समझा जा रहा है कि हम इसे भेदभाव रहित और गैर कलंकित नाम दें।''<br /><br />इसमें कहा गया,''वायरस का नाम बार-बार अफ्रीका से जोड़ा जा रहा है और इसका नामकरण अफ्रीकी पृष्ठभूमि की तर्ज पर होना बिल्कुल गलत है, यह भेदभाव और किसी को कलंकित करना दिखाता है। मीडिया में भी वायरस से संबंधित जितनी भी तस्वीरें हैं, उनमें से अधिकतर में अफ्रीकी नजर आ रहे हैं। हाल ही में, अफ्रीका के फॉरेन प्रेस एसोसिएशन ने एक बयान जारी करके वैश्विक मीडिया से महामारी के लिए अफ्रीकी लोगों की तस्वीर के इस्तेमाल को बंद करने का आग्रह किया।वैज्ञानिकों का मानना है कि बीमारी का नामकरण कुछ ऐसा किया जाए जिससे किसी देश पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 15:20:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खेलों पर फिर कोरोना का कहर: दो और बड़े टूर्नामेंट भी आए वैश्विक महामारी की चपेट में</title>
                                    <description><![CDATA[रद्द होंगे शांतोउ में होने वाले एशियाई युवा खेल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/corona-wreaks-havoc-on-sports-again--two-more-big-tournaments-also-came-in-the-grip-of-global-epidemic-19th-asian-games-to-be-held-in-hangzhou-postponed/article-9267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/news.jpg" alt=""></a><br /><p>हांगझाऊ। एशियाई ओलम्पिक परिषद ने शुक्रवार को घोषणा की कि चीन के हांगझाऊ में 10 से 25 सितम्बर तक होने  वाले 19वें एशियाई खेल स्थगित कर दिए गए हैं और इन खेलों के लिए नई तारीखों की घोषणा निकट भविष्य में की जाएगी। परिषद ने कहा कि चीनी ओलम्पिक कमेटी (सीओसी) और हांगझाऊ एशियाई खेल आयोजन समिति (हागोक) के साथ विस्तृत बातचीत के बाद एशियाई ओलम्पिक परिषद (ओसीए) के कार्यकारी बोर्ड ने आज चीन के हांगझाऊ में 10 से 25 सितंबर तक होने वाले 19वें एशियाई खेलों को स्थगित करने का फैसला लिया है। परिषद की विज्ञप्ति में कहा गया है कि 19वें एशियाई खेलों की नई तारीख ओसीए, सीओसी और हागोक मिलकर निर्धारित करेंगे जिसकी घोषणा निकट भविष्य में की जाएगी। ओसीए ने कहा कि यह निर्णय खेलों के आकार और कोरोना महामारी को देखते हुए सभी पक्षों की सहमति से लिया गया है। 19वें एशियाई खेलों का नाम और चिन्ह बदला नहीं जाएगा।<br /><br /><strong>रद्द होंगे शांतोउ में होने वाले एशियाई युवा खेल</strong><br />इसके अलावा ओसीए के कार्यकारी बोर्ड ने इस साल चीन के शांतोउ में 20 से 28 सितंबर तक होने वाले तीसरे एशियाई युवा खेलों की स्थिति का भी अध्ययन किया। सीओसी और आयोजन समिति के साथ चर्चा के बाद कार्यकारी बोर्ड ने फैसला किया कि एशियाई युवा खेल शांतोउ 2021 को एक बार स्थगित किया जा चुका है, इसलिए इन्हें रद्द कर दिया जाएगा और अगले एशियाई युवा खेल 2025 में उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित किए जाएंगे।<br /><br /><strong>वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स भी 2023 तक स्थगित</strong><br />लुसाने (स्विट्जरलैंड)। अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेल संघ (फीसू) ने चीन के चेंगदू में होने वाले वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स को 2023 तक स्थगित करने की घोषणा शुक्रवार को की। फीसू खेल पहले 2021 की गर्मियों में होने वाले थे, लेकिन टोक्यो ओलंपिक के स्थगन के बाद इन्हें भी जून 2022 तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। फीसू के कार्यवाहक अध्यक्ष लियोंज एडेर ने कहा कि चेंगदू 2021 को स्थगित करने का फैसला हमारे लिए आसान नहीं था, लेकिन विश्वविद्यालय के एथलीट््स के लिए यही सही फैसला है। उनकी सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिक है। उन्होंने कहा कि  हालात की अनिश्चितता के कारण खेलों का पुनर्निर्धारण ही बेहतर विकल्प है। कई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेल संघों ने अपनी योजना में पहले ही बदलाव कर लिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 May 2022 12:14:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खुला ताला, देखें भारत, हंगरी, मैक्सिको सहित अन्य देशों की ‘गुड़िया’</title>
                                    <description><![CDATA[इस खबर को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाते हुए 17 दिसम्बर, 2021 को ‘ताले में कैद 600 से अधिक गुड़िया’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/it-was-closed-for-the-last-one-and-a-half-years-due-to-the-corona-epidemic--but-it-was-not-reopened--taking-this-news-prominently--the-daily-navjyoti-published-the-news-on-december-17--2021-with-the-title-more-than-600-dolls-imprisoned-in-the-lock/article-6445"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/asarkhabarka_new.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। देश ही नहीं, बल्कि विदेशी गुड़ियाओं का ऐसा संसार, जहां भारत के विभिन्न राज्यों सहित जापान, हंगरी, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड की कला संस्कृति की गाथा बयां करती डॉल्स देखने को मिलती है। हम बात कर रहे हैं त्रिमूर्ति सर्किल स्थित राजकीय सेठ आनन्दीलाल पोद्दार बधिर उ. मा. विद्यालय परिसर स्थित बने डॉल म्यूजियम की। कोरोना महामारी के कारण ये पिछले करीब डेढ़ साल से बंद था, लेकिन इसे पुन: नहीं खोला गया। <br />इस खबर को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाते हुए 17 दिसम्बर, 2021 को ‘ताले में कैद 600 से अधिक गुड़िया’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद संग्रहालय के अंदर रिनोवेशन कार्य करने के बाद इसे अब पुन: पर्यटकों के अवलोकनार्थ खोल गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 11:52:54 +0530</pubDate>
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                <title>फिर खुला आसमान</title>
                                    <description><![CDATA[ इस फैसले से न केवल विदेश जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि ट्रेवल एवं टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/editorial--again-open-skies--due-to-the-corona-epidemic--the-last-long-closed-international-flights-will-be-restored-from-march-27/article-6006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/air-plane.png" alt=""></a><br /><p>कोरोना महामारी के चलते पिछले लंबे समय से बंद अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 27 मार्च से फिर बहाल हो जाएंगी। इस फैसले से न केवल विदेश जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि ट्रेवल एवं टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कोरोना की वजह से मार्च, 2020 से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने से इस उद्योग की कमर टूट गई थी। अब कोरोना का असर दिन प्रतिदिन कम हो रहा है। हालात बेहतर होते हुए भी यदि इस फैसले को आगे तक और टाला जाता तो इस इण्डस्ट्री में संकट और गहरा जाता और इसे फिर संभलने मेंं कई मुश्किलें खड़ी हो जातीं। इस इण्डस्ट्री में काम करने वाले करीब दस लाख लोगों की नौकरी संकट में पड़ने का खतरा बढ़ जाता। सरकार के राजस्व संग्र्रह में इस इण्डस्ट्री का योगदान करीब 10 प्रतिशत है। 2019 पर गौर करें तो ट्रेवल इण्डस्ट्री ने 30 बिलियन डॉलर की कमाई सिर्फ विदेशी यात्रियों से की थी। कोरोना शुरू होने से पहले 2019 में करीब 25 मिलियन भारतीय विदेश घूमने गए थे और 11 मिलियन विदेशी पर्यटक भारत आए थे। इस तरह पिछले दो साल में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने से करीब 60 से 65 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। दो साल तक उड़ाने बंद रहने और कोरोना लॉकडाउन के चलते इस इण्डस्ट्री में काम करने वाले या इससे जुड़े लाखों लोगों की नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। कोरोना का असर कम होता देख दुनिया के कई देशों ने विदेशी यात्रियों के लिए रास्ते खोल दिए हैं। तब से भारत में भी विदेशी यात्रियों के लिए उड़ाने शुरू करने की मांग उठ रही थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार भारतीय एयरलाइंस और हवाई अड्डों को वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 20 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। वहीं, हवाई अड्डों का संचालन करने वाली कंपनियों को भी 5 हजार करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। कई एयरलाइंस ने अपने किराए बढ़ा दिए हैं, जिससे यात्रियों को ज्यादा जेब खाली करनी पड़ रही है। किराये में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी गई है। उड़ानें शुरू होने से विमानन उद्योग व पर्यटन उद्योग की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मांग व आपूर्ति में संतुलन कायम होगा। अंतरराष्ट्रीय यात्रा सस्ती होने की उम्मीद जगेगी। लेकिन रूस-यूक्रेन का युद्ध और रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों की आंच भी इण्डस्ट्री पर पड़ेगी। युद्ध समाप्त होने के बाद ही विमानन उद्योग सामान्य हो सकेगा। फिर भी नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरू होने से यात्रियों को राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 12:50:58 +0530</pubDate>
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                <title>नई गाइडलाइन ‘महामारी सतर्क-सावधान जनअनुशासन’ 11 जनवरी से प्रदेश में होगी लागू, प्रदेश में रविवार को वीकेंड कर्फ्यू, शहर और कस्बों में 12वीं तक के स्कूल 30 जनवरी तक बंद, शादियां और अन्य समारोहों में केवल 50 लोग शामिल हो सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[बाजार, धार्मिक स्थल, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, जिम आदि आठ बजे तक ही खुल सकेंगे,  मास्क नहीं पहनने पर अब एक हजार रुपए जुर्माना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E2%80%98%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E2%80%99-11-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%82--%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82--%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-12%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%82%E0%A4%B2-30-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6--%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2-50-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87/article-3901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/bhid_croud_corona.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। कोविड के बढ़ते मामलों पर राज्य सरकार ने सख्ती और बढ़ाते हुए रविवार को नई गाइडलाइन जारी कर 30 जनवरी तक पाबंदियां बढ़ाई हैं। यह गाइडलाइन प्रदेश में 11 जनवरी से लागू होगी। प्रदेश में रविवार को वीकेंड कर्फ्यू रहेगा। प्रदेश के सभी नगर निगम व पालिका क्षेत्रों में 12वीं तक की स्कूल गतिविधियां 30 जनवरी तक बंद कर दी गई हैं। दसवीं से बारहवीं तक के जिन विद्यार्थियों ने वैक्सीन लगवा ली है, वे अभिभावकों की सहमति से स्कूल जा सकेंगे। स्कूलों में कैंटीनें बंद रहेंगी। ऑनलाइन क्लासें चालू रहेंगी। कोचिंग और कॉलेजों को फिलहाल बंद नहीं किया है। वहीं 15 साल से छोटे बच्चों को घर में रहकर ही पढ़ाई करनी होगी।  टेस्ट पॉजिटिविटी दस फीसदी से अधिक तो येलो या रेड जोन : ग्राम पंचायत और नगर निगम-पालिका क्षेत्रों में कोरोना केसों के हिसाब से जोन भी तय कर दिए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर जीरो एक्टिव केस में ग्रीन जोन, एक से 20 एक्टिव केस पर येलो जोन और 20 से अधिक केसों पर रेड जोन होगा। एक लाख जनसंख्या अनुपात आधार पर नगर निगम-पालिका क्षेत्रों में 50 एक्टिव केस पर ग्रीन जोन, 51 से 100 केस पर येलो जोन और 100 से अधिक केस पर रेड जोन होगा। क्षेत्रों में टेस्ट पॉजिटिविटी रेट दस प्रतिशत से अधिक होने पर कलेक्टर या संबंधित अधिकारी जोन तय कर प्रतिबंध लगा सकेंगे।<br /> <br />     शादियों और अन्य समारोहों में अब 100 की जगह 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे। आयोजन से पहले राज्य सरकार के पोर्टल पर सूचना देना जरूरी होगा। <br />     जनअनुशासन कर्फ्यू का समय रोजाना रात 11 से सुबह पांच बजे तक रहेगा। <br />     धार्मिक स्थल भी अब सुबह पांच बजे से रात आठ बजे तक खुले रहेंगे। <br />     रेस्टोरेंट में 50 फीसद क्षमता के साथ रात दस बजे तक खुले रखने की अनुमति होगी। <br />     सिनेमा हॉल भी 50 फीसदी क्षमता के साथ रात आठ बजे तक खुल सकेंगे। <br />     बाजार, दुकान, शॉपिंग मॉल का समय भी अब आठ बजे तक कर <br /> दिया है। <br />     सिटी और मिनी बसें सुबह पांच से रात 11 बजे तक चल सकेंगी। <br />     लोहड़ी और मकर संक्रांति पर कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं होगा। घर पर ही त्योहार मनाने की अपील की। <br /> <strong><br /> आइसोलेशन जोन में ही हो सकेगी फिल्म शूटिंग</strong><br /> आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों पर पाबंदी के तहत पर्यटन और फिल्म शूटिंग गतिविधियों के लिए आइसोलेशन जोन के आधार पर अनुमति मिलेगी। आइसोलेशन जोन में केवल अधिकृत लोग, कर्मचारी और कार्यक्रम से जुडेÞ लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। आइसोलेशन जोन उन रिसोर्ट या होटलों के लिए भी लागू होगा, जो चार हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल या अधिक के हैं और गेस्ट के लिए कमरों की संख्या 40 से अधिक है। होटल-रेस्टोरेंट्स संचालकों को आयोजनों के दौरान मेहमानों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट या वैक्सीन रिपोर्ट देखना जरूरी होगा। आयोजन समाप्त होने तक मेहमानों को बाहरी सम्पर्क की अनुमति नहीं होगी। <br /> <br /> <strong>शनिवार रात 11 से सोमवार सुबह पांच बजे तक होगी सख्ती</strong><br /> पूरे प्रदेश में रोजाना रात 11 से सुबह पांच बजे तक जनअनुशासन कर्फ्यू रहेगा। हर रविवार को वीकेंड कर्फ्यू में शनिवार रात 11 से सोमवार सुबह पांच बजे तक सभी बाजार, कार्य स्थल और व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बंद रहेंगे। इसमें नियमित उत्पादन, नाइट शिफ्ट वाली फैक्ट्री, आईटी, ई-कॉमर्स कम्पनियां, मेडिकल दुकान, शादी समारोह, इमरजेंसी सेवाएं, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन और लोडिंग वाहनों को छूट रहेगी।</p>
<p><br /> <strong>सरकारी दफ्तरों में 50% कर्मचारी आएंगे</strong><br /> निगम और पालिका क्षेत्रों में सभी सरकारी दफ्तरों में 50 फीसदी स्टाफ आॅफिस और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम के लिए बुलाया जा सकता है। विभागाध्यक्षों को इसके लिए जिला कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। जरूरी सेवाओं से जुडेÞ कार्यालयों पर यह नियम लागू नहीं होगा।<br /> <br /> <strong>गाइडलाइन में जुर्माना राशि भी बढ़ाई</strong><br /> कोविड गाइडलाइन की पालना नहीं करने पर जुर्माने भी बढ़ाए गए हैं। सार्वजनिक स्थान या कार्य स्थल पर मास्क नहीं पहनने पर अब एक हजार रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। बिना मास्क वाले ग्राहक को सामान बेचने पर दुकानदार पर 500 रुपए जुर्माना, सार्वजनिक स्थान पर सोशल डिस्टेसिंग(छह फीट दूरी) नहीं होने पर सौ रुपए, सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 200 रुपए, पान-गुटखा, तम्बाकू और शराब उपयोग पर पांच सौ रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। आॅटो, कैब, बस, ट्रेन आदि में मास्क नहीं लगाने पर 500 रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, खेल-कूद सांस्कृतिक, शैक्षणिक या शादी समारोह में 50 से अधिक लोग होने पर दस हजार रुपए जुर्माना तथा मैरिज गार्डन या सभा स्थल वालों पर भी दस हजार रुपए जुर्माना लगेगा। सभी कार्य स्थलों पर कार्य समय के दौरान सेनेटाइजशन और सोशल डिस्टेसिंग की पालना नहीं करने पर दस हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jan 2022 10:43:39 +0530</pubDate>
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                <title>कोरोना महामारी से 2022 के अंत तक निजात पा सकेंगे: डब्ल्यूएचओ</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर कहा कि वर्ष 2022 में कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए लोगों को अपनी छुट्टियों को रद्द या फिर कार्यक्रमों को स्थगित करना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-2022-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87--%E0%A4%A1%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%8F%E0%A4%9A%E0%A4%93/article-3420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/corona_new11.jpg" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर कहा कि वर्ष 2022 में कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए लोगों को अपनी छुट्टियों को रद्द या फिर कार्यक्रमों को स्थगित करना होगा। डॉ. घेब्रेयसस ने सोमवार अपने संबोधन में कहा कि जिंदगी के जाने से बेहतर अपने आगामी योजना को रद्द करना बेहतर होगा। इसलिए अपने कार्यक्रमों को रद्द करें और बाद में मनाए। अभी जश्न मनाने और बाद में शोक मनाने से अच्छा अभी अपने कार्यक्रम रद्द करना और बाद में जश्न मनाना बेहतर है। उन्होंने रोग नियंत्रण और रोकथाम के लिए केंद्र (सीडिसी) का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका में ओमिक्रॉन को कोरोना को खतरनाक स्वरूप घोषित किया गया है। अमेरिका में पिछले सप्ताह कोरोना के जितने मामले आए थे उसमें 73 प्रतिशत ओमिक्रॉन के थे। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने कहा कि इसके कई पुख्ता सबूत मिले हैं की ओमिक्रॉन लगातार डेल्टा स्वरूप की तुलना में काफी तेजी से फैल रहा है और कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद भी लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं और संक्रमण से लोग स्वस्थ भी हो रहे हैं।  उन्होंने इस महामारी को 2022 के अंत तक समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह साल पूरे देश के लिए भविष्य में होने वाले त्रासदी को बचाने का साल होगा तथा सभी को सतत विकास लक्षय को पूरा करने के लिए प्रयासरत रहना होगा। क्रिसमस के दौरान ओमिक्रॉन के फैलाव को रोकने के लिए न्यूजीलैंड ने सख्त लॉकडाउन लगाया है। जबकि फ्रांस तथा जर्मनी सहित कई अन्य देशों ने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 12:03:04 +0530</pubDate>
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