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                <title>tourist - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पर्यटन सीजन में जयपुर की रौनक चरम पर : ऐतिहासिक धरोहरों पर उमड़े सैलानी, शेर और बघेरों को देखकर रोमांच किया महसूस </title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी छुट्टियों और नए साल के मद्देनजÞर आने वाले दिनों में जयपुर आने वाले पर्यटकों की संख्या में और भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/at-the-peak-of-jaipurs-in-the-tourist-season/article-137472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यटन सीजन के चलते गुलाबी नगरी जयपुर एक बार फिर देशी और विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बनती नजर आ रही है। शनिवार को शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की खासी चहल-पहल देखने को मिली। पुरातत्व विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आमेर महल में 18,938, हवामहल स्मारक में 15,607 पर्यटक पहुंचे, जबकि जंतर मंतर स्मारक में 13,570 और अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में 9,422 सैलानी आए। </p>
<p>केवल ऐतिहासिक स्मारक ही नहीं, बल्कि जयपुर की टूरिज्म भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। वहीं नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, टाइगर सफारी और लायन सफारी में सैलानियों ने शेर, बाघ और बघेरों को नजदीक से देखकर रोमांच महसूस किया। इसके साथ ही दिल्ली रोड स्थित हाथी गांव में पर्यटकों ने हाथी सवारी का भी भरपूर लुत्फ  उठाया। पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी छुट्टियों और नए साल के मद्देनजÞर आने वाले दिनों में जयपुर आने वाले पर्यटकों की संख्या में और भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे न सिर्फ  शहर की रौनक बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी बड़ा लाभ मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 10:39:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीवी गार्डन की खूबसूरती पर अब बदहाली की छाया, गार्डन में घूम रहे असामाजिक तत्व, पहले भी कई बार हो चुकी चोरियां</title>
                                    <description><![CDATA[रात में गार्डन की सुंदरता को निखारने वाले फव्वारे व लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cb-garden-s-beauty-is-now-marred-by-disrepair--with-anti-social-elements-roaming-the-garden-and-numerous-thefts-having-occurred-in-the-past/article-132708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11128.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में अपनी खूबसूरती, हरियाली और शांत वातावरण के लिए पहचान बनाने वाला सीबी गार्डन इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। एक समय था जब यह गार्डन परिवारों, बच्चों और पर्यटकों की पहली पसंद हुआ करता था। शहर के मंत्री, बड़े अधिकारी और प्रतिष्ठित लोग भी यहां अक्सर सैर करने आते थे, लेकिन आज इसकी दयनीय हालत देखकर हर कोई हैरान है। प्रशासन की अनदेखी और रखरखाव के अभाव ने इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की सुंदरता पर ग्रहण लगा दिया है। गार्डन में पहले जहां रोजाना चलने वाली जोए ट्रेन बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, अब वह हफ्ते में केवल एक बार ही चलाई जा रही है। इससे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। वही पार्क में अव्यवस्थाओं की तस्वीर साफ दिखाई देती है। जगह-जगह कचरे के ढेर फैले हुए हैं, जिससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि सौंदर्य भी पूरी तरह बिगड़ गया है। </p>
<p><strong>शाम होते ही गार्डन में अंधेरा</strong><br />रात में गार्डन की सुंदरता को निखारने वाले फव्वारे व लाइटिंग व्यवस्था भी पूरी तरह ठप पड़ी है। लाइटें खराब होने से शाम के समय गार्डन में अंधेरा छा जाता है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अंधेरा होने पर लोग गार्डन में घूमने से कतराने लगे हैं। वहीं गार्डन में बने दोनों सुविधा घर बदहाली की अव्यवस्था में है। इसमें न तो पानी की व्यवस्था है और नही लाईट की सुविधा है। </p>
<p><strong>लंबे समय से बंद है बोटिंग सुविधा</strong><br />गॉर्डन में वाटर बोटिंग सुविधा भी लंबे समय से बंद पड़ी है। तालाब का पानी दूषित हो चुका है और उसकी देखरेख पूरी तरह ठप नजर आती है। तालाब के चारों ओर का क्षेत्र, जो पहले फोटोग्राफी और घूमने के लिए पसंदीदा स्थान था, अब बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। गंदगी और जलीय काई जमने से तालाब का पानी बदरंग हो चुका है। वहीं गार्डन में लगे बिजली के स्वीच बॉक्स खुले पड़े हुए है, जिससे कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों की अनदेखी</strong><br />यदि समय रहते गार्डन की मरम्मत और साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया, तो शहर के इस महत्वपूर्ण स्थल की पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। सीबी गार्डन को पुन: उसकी पुरानी चमक लौटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। नियमित सफाई, लाइटिंग सुधार, तालाब की साफ-सफाई, जोए ट्रेन और बोटिंग सुविधाओं को फिर से शुरू कर गार्डन को आकर्षक बनाया जा सकता है। यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर की विरासत है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।<br /><strong>- दीपक नायक, शुभम मेहरा</strong></p>
<p>सीबी गार्डन में मौजूद अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। गार्डन में आने वाले पर्यटकों को सभी मूलभूत सुविधाएँ निर्बाध रूप से उपलब्ध हों, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, केडीए सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पर्यटकों का बायोलॉजिकल पार्क के प्रति घटता रुझान : बड़े वन्यजीवों की कमी और टूटते झूलों से मोह हुआ भंग, न टाइगर न लॉयन, पर्यटक और राजस्व में भारी गिरावट </title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक के आंकड़ों से हुआ खुलासा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists--interest-in-the-biological-park-is-declining--the-lack-of-large-wildlife-and-broken-swings-have-dissipated-their-attraction--neither-tigers-nor-lions-have-been-seen--resulting-in-a-sharp-decline-in-tourist-arrivals-and-revenue/article-132707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश-विदेश के पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क अपनी चमक खोता जा रहा है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला राजस्थान का सबसे बड़ा पार्क अब वीरान सा नजर आने लगा है। जहां कद्रदानों की महफिलें सजा करती थी वहां आज पर्यटकों की बेरुखी देखने को मिल रही है। जिसका असर, राजस्व में भारी गिरावट के रूप देखने को मिला। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 31 अक्टूबर तक करीब तीन हजार से ज्यादा पर्यटकों की संख्या घटी है। वहीं, एक लाख रुपए राजस्व का घाटा हुआ है। यह खुलासा वर्ष 2024 व 2025 के 10 माह के आंकड़ों से हुआ है। </p>
<p><strong>3 हजार पर्यटक व 1 लाख से ज्यादा राजस्व घटा</strong><br />वर्ष 2024 व 2025 के जनवरी से अक्टूबर तक के तुल्नात्मक आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में पर्यटकों की संख्या में करीब 3 हजार तथा  1  लाख से ज्यादा के राजस्व में गिरावट दर्ज हुई है।  वन्यजीव विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष जनवरी से अक्टूबर तक करीब 66 हजार 886 पर्यटक बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों के दीदार को पहुंचे थे। जबकि, वर्ष 2025 में 31 अक्टूबर तक यह संख्या घटकर 63 हजार 225 ही रह गई। वहीं, पर्यटकों से होने वाली आय की बात करें तो गत वर्ष अक्टूबर तक करीब 25 लाख 33 हजार से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, अक्टूबर 2025 तक 24 लाख 28 हजार 220 ही हुआ है। </p>
<p><strong>जनवरी के बाद अर्श से फर्श पर पहुंची कमाई </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के लिए जनवरी माह ही कमाई का होता है। पूरे साल में इसी माह में सबसे ज्यादा पर्यटक घूमने आते हैं। वर्ष 2024 की जनवरी में 13 हजार 356 पर्यटक वन्यजीवों की दुनिया निहारने पहुंचे थे। उनसे पार्क को 4 लाख 96 हजार 740 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, वर्ष 2025 में पर्यटकों में 2764 की बढ़ोतरी हुई। साथ ही 1 लाख 7 हजार 730 रुपए का राजस्व ज्यादा प्राप्त हुआ। इस तरह इस वर्ष की जनवरी में कुल 6,04470 रुपए की आय हुई। लेकिन इसके बाद के महीनों में पर्यटकों व राजस्व के आंकड़े अर्श से फर्श पर पहुंच गए।  अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष 2024 में मार्च में कुल 7,796 पर्यटक पार्क की सैर पर आए थे। जबकि, वर्ष 2025 के मार्च में घटकर पर्यटकों की संख्या मात्र 4, 628 ही रह गई। यानी गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 3,168 पर्यटक घट गए। </p>
<p>वनकर्मियों का कहना है कि गर्मी के कारण पर्यटक दिन में नहीं आते। लेकिन, शाम को आते हैं। वर्ष 2024 के मार्च माह में पर्यटकों से बायोलॉजिकल पार्क को 2 लाख 67 हजार 580 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जिसके मुकाबले इस वर्ष के मार्च में 1 लाख 62 हजार 770 रुपए ही राजस्व एकत्रित हुआ। यानी, गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष के मार्च में 1 लाख 4 हजार 810 रुपए राजस्व का नुकसान हुआ है। जानकारों का मानना है कि पर्यटक व राजस्व में गिरावट का कारण गर्मी से ज्यादा बड़े एनिमल की कमी है। यहां टाइगर-लॉयन, मगरमच्छ, घड़ियाल जैसे बड़े एनिमल की कमी है। जिसकी वजह से पर्यटकों का रुझान घटा है। </p>
<p><strong>अप्रेल : 1540 पर्यटक घटे व 65 हजार का नुकसान</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2024 के अप्रेल माह में भीषण गर्मी के बावजूद 3 हजार 484 पर्यटक घूमने आए थे। जबकि, इस वर्ष के अप्रेल में पर्यटकों की संख्या तेजी से घटती हुई 1944 ही रह गई। जबकि, अभी पिछले साल के मुकाबले गर्मी का पारा भी कम रहा। गत वर्ष अप्रेल माह के मुकाबले इस वर्ष 1944 पर्यटकों की संख्या दर्ज की गई। वहीं, राजस्व की बात करें तो 80240 रुपए की आय हुई। यानी, गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 64370 राजस्व का नुकसान हुआ। </p>
<p><strong>पर्यटकों को अखर रहा टिकट का पैसा </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में शाकाहारी व मांसाहारी मिलाकर कुल 70 से ज्यादा वन्यजीव हैं। यहां आने वाले पर्यटक 55 रुपए खर्च करने के बावजूद बब्बर शेर, टाइगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य बडेÞ वन्यजीवों का दीदार नहीं कर पाने से निराश होकर लौट रहे हैं। हालांकि, यहां उम्र दराज बाघिन   महक व लॉयनेस सुहासिनी ही दिखाई देती है। लेकिन, भेडिए, पैंथर, जरख एनक्लोजर में उगी झाड़ियों में छिपे रहने से दिखाई नहीं देते। वहीं, कैफेटेरिया नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी पर्याप्त नहीं है। पानी के लिए भी भटकना पड़ता है। </p>
<p><strong>गर्मी से ज्यादा बड़े एनीमल की कमी बड़ा कारण</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कोटा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा पार्क है। इसके बावजूद यह सुविधाओं व बजट की कमी से जूझ रहा है। यहां पर्यटकों व राजस्व में गिरावट का मुख्य कारण गर्मी से ज्यादा बड़े एनिमल की कमी है।  बजट नहीं होने के कारण बायोलॉजिकल पार्क में पिंजरे यानी एनक्लोजर नहीं बन पा रहे। वहीं, टाइगर-लॉयन जैसे बड़े एनिमल्स की कमी है। जबकि, चिड़ियाघर में  मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित दो दर्जन से अधिक  पक्षी है। यदि, एनक्लोजर बने तो इनकी शिफ्टिंग से पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा। जिसका असर राजस्व की बढ़ोतरी के रूप में नजर आएगा।</p>
<p><strong>चिड़ियाघर से वन्यजीवों की नहीं हो पा रही शिफ्टिंग  </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ, बंदर व कछुए सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे।</p>
<p><strong>द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य </strong><br />पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से करीब 17 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-न कैफेटेरिया न लॉयन टाइगर, क्या देंखे</strong><br />परिवार के साथ पार्क घूमने आए बोरखेड़ा निवासी अजय कुश्वाह, राहुल प्रजापति व उस्मान अली ने बताया कि यहां बड़े एनिमल नहीं है, जो है वो भी झाड़ियों में छिपे रहते हैं। साइटिंग नहीं होने से बच्चे भी मायूस हो जाते हैं। टिकट का पैसा अखर रहा है। </p>
<p><strong>झूले टूटे, बच्चे होते मायूस</strong><br />बजरंग नगर निवासी अखिलेश शर्मा व खेड़ली फाटक के सूर्य प्रकाश मेहरा का कहना था कि यहां कुछ झूले लगे हुए हैं, जो भी टूट चुके हैं। कुछ तो टेडे हो गए। जिनमें बच्चों के गिरने का खतरा रहता है। वहीं, वाटरकूलर भी कम ही जगहों पर लगे हैं। शाकाहारी जानवरों के पिंजरों की तरफ कम है। पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। </p>
<p>टाइगर-लॉयन लाने के प्रयास लगातार जारी है। हमने यहां प्राकृतिक जंगल, जैव विविधता विकसित की है। पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 15:55:24 +0530</pubDate>
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                <title>अभी तक पार्क में स्नैक आए ना पक्षी, सीजेडए की अनुमति के बाद भी पक्षीशाला नहीं हुई शुरु </title>
                                    <description><![CDATA[ पार्क को शुरू हुए करीब डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/till-now-neither-snakes-nor-birds-have-come-to-the-park--even-after-the-permission-of-cza-the-aviary-has-not-started/article-116147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर में एक तरफ तो लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर पर्यटकों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सीजेड की अनुमति मिलने के बाद भी अभी तक न तो स्नेक पार्क शुरु हो सका है और न ही पक्षी शाला। तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर स्नेक पार्क व आॅक्सीजोन पार्क में पक्षी शाला का निर्माण कराया गया है। बूंदी रोड स्थित हर्बल पार्क के पास रा’य का पहला स्नेक पार्क बनाया गया है। करीब 7 करोड़ से अधिक की राशि से इसका दो मंजिला भवन तो काफी समय पहले ही बनकर तैयार हो गया है। साथ ही करीब डेढ़ साल पहले दिसम्बर 2023 में सेन्ट्रल जू अथोरिटी आॅफ इंडिया(सीजेडए) से स्नेक पार्क को शुरु करने की अनुमति भी मिल चुकी है। उसके बाद भी अभी तक यहां न तो स्नेक आए हैं और न ही इसे शुरु किया गया है। </p>
<p><strong>केडीए आयुक्तने किया था गत दिनों दौरा</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के आयुक्त रिषभ मंडल ने पदभार ग्रहण करने के बाद गत दिनों स्नेक पाक का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वहां स्नेक लाने की सभी संभावनाओं को तलाशने के साथ ही इसे शीघ्र शुरु करने की व्यवस्थाओं को देखा था। करीब ढाई महीना होने के बाद भी अभी तक इसे शुरु नहीं किया गया है। </p>
<p><strong>पक्षी शाला का ढांचा</strong><br />इधर केडीए की ओर से आईएल परिसर में करोड़ों की लागत से आॅक्सीजोन पार्क बनाया है। उसमें विशाल पक्षी शाला का निर्माण भी कराया गया है। इस पक्षी शालाो में भी देशी विदेश प्रजातियों के कई तरह के पक्षियों को लाने की योजना है। हालत यह है कि पार्क को शुरू हुए तो करीब डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया। साथ ही यहां पक्षी लाने के लिए सीजेड से भी अनुमति मिल चुकी है। उसके बाद भी अभी तक यहां सिर्फ पक्षी शाला का ढांचा ही नजर आ रहा है। उसमें पक्षी देखने के लिए लोग इंतजार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर में जब कोई चीज बनी है और उस पर करोड़ों रुपए का खर्चा किया गया है तो उसका लोगों को लाभ भी मिलना चाहिए। बसंत विहार  निवासी नीरज गौतम का कहना है कि केडीए हो या नगर निगम। जनता के धन से शहर में कोई विकास कार्य कराया गया है या कोई अच्छी चीज बनाई गई है तो उसे शुरु भी किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>29 प्रजातियों के आने हैं स्नैक</strong><br />स्नेक पार्क में देशी विदेशी 29 प्रजातियों के करीब 200 स् नेक आने हैं। जिनमें 25 देशी व 4 विदेशी प्रजातियों के स् नेक लाए जाएंगे। ये स्नेक देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित स्नेक पार्क से ही यहां लाने की योजना है। हालत यह है कि अभी तक भी केडीए अधिकारी यहां स्नेक लाने से लेकर इसे शुरु करने तक का काम पूरा नहीं कर सके हैं। </p>
<p>आॅक्सीजोन पार्क की शोभा है पक्षीशाला। लेकिन उसका खाली ढांचा कब तक देखते रहेंगे। जब सीजेड से अनुमति मिल ही गई है तो अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करते हुए पक्षियों को लाना चाहिए। <br /><strong>- महेश जैन तलवंडी निवासी </strong></p>
<p>स्नेक पार्क और पक्षी शाला में  स्नेक व पक्षी  लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। व्यवस्थाओं में कुछ समय लग रहा है। शीघ्र ही इन दोनों को शुरु किया जाएगा। <br /><strong>- ऋषभ मंडल, आयुक्त, केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jun 2025 17:09:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कंजी से अटा तालाब, सड़ांध मार रहा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से एक तरफ तो नए पर्यटन स्थल विकसित करने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ जो पर्यटन स्थल हैं उनकी सही ढंग से देखभाल तक नहीं की जा रही है। जिससे वे दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-pond-is-filled-with-silt--the-water-is-stinking/article-114653"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(4)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के मध्य पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किशोर सागर तालाब में इन दिनों इतनी अधिक कंजी छायी हुई है कि पूरा पानी हरा हो रहा है। साथ ही यह पानी दुर्गंध मारने लगा है। किशोर सागर तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बोट चलाई जा रही है और सीबी गार्डन में बनी 4 मंजिला स्वर्ण महल बिल्डिंग को व्यू पॉइंट के रूप में तलाब समेत आस-पास के दृश्यों को दिखाया जा रहा है। उस  किशोर सागर तालाब की हालत यह है कि न्यू क्लॉथ मार्केट की तरफ तालाब में  पूरा पानी हरा हो रहा है। उस पर कांजी की परत छायी हुई है। जबकि दूसरी तरफ का पानी साफ है।  स्थानीय दुकानदारों व लोगों का कहना है कि तालाब में छायी कांजी से पानी का रंग तो बदल ही गया है। साथ ही उसमें से दुर्गंध फेल रही है। जिससे वहां से गुजरने वालों को उसका सामना करना पड़ रहा है।  लोगों का कहना है कि तालाब में कांजी व जल कुम्भी साफ करने के लिए लाखों रुपए की मशीन खड़ी हुई है। उसके बाद भी यहां कांजी को सफाई नहीं हो रही है। जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से एक तरफ तो नए पर्यटन स्थल विकसित करने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ जो पर्यटन स्थल हैं उनकी सही ढंग से देखभाल तक नहीं की जा रही है। जिससे वे दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। </p>
<p>इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि जिस फर्म को सफाई का ठेका दिया हुआ है। उसके संवेदक से कहकर शीघ्र ही सफाई करवा दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 17:30:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एक पर्यटक की शहर के पांच पर्यटन स्थलों पर हो रही गिनती, प्रदेश के अन्य जिलों के पर्यटन स्थलों पर जाने पर फिर हो जाती है काउंटिंग </title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगरी के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटक इस ओर रुख करते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/counting-is-done-again-when-a-tourist-is-counted-at/article-107671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(17).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटक इस ओर रुख करते हैं। आमेर महल, हवामहल, जंतर-मंतर, नाहरगढ़ दुर्ग सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही अधिक रहती है।  दूसरी ओर पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि एक पर्यटक शहर के करीब चार से पांच मॉन्यूमेंट्स का विजिट करता है। अगर पर्यटक पांचों जगहों से अलग-अलग टिकट लेता है तो ऐसे में एक पर्यटक पांच जगह काउंट हो जाता है। कहा जाए तो उसकी पर्यटक के रूप में पांच पर काउंटिंग हो जाती है। जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ना लाजमी है।  </p>
<p><strong>कम्पोजिट टिकट लेने वाला पर्यटक ही सिंगल काउंट</strong><br />पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले स्मारकों में पर्यटकों की सुविधार्थ कम्पोजिट टिकट की व्यवस्था है। इसके तहत अगर पर्यटक कम्पोजिट टिकट लेता है तो इसके जरिए वो शहर के आमेर महल, हवामहल स्मारक, जन्तर-मंतर स्मारक, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, नाहरगढ़ दुर्ग सहित 8 स्मारकों में विजिट कर सकता है। इस तरह का टिकट लेने वाला पर्यटक सिंगल टूरिस्ट में काउंट होता है। अगर एक पर्यटक इन स्मारकों में अलग-अलग टिकट लेता है तो वो हर मॉन्यूमेंट पर पर्यटक के रूप में काउंट किया जाता है। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेन्द्र सिंह शेखावत का कहना है कि पर्यटकों की अलग-अलग काउंटिंग करने का ऐसा कोई सिस्टम नहीं है, लेकिन इसके लिए विभाग कार्य कर रहा है। अभी पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारकों आदि के साथ ही होटलों से पर्यटकों का आंकड़ा लिया जाता है।  </p>
<p><strong>विदेशी पर्यटक के लिए पोर्टल, देशी के लिए नहीं :</strong> पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी पर्यटक शहर में प्रवेश करने के बाद होटल आता है, तो उसकी सारी जानकारी एफआरओ पोर्टल पर अपलोड कर दी जाती है। जैसे कि उसका पासपोर्ट नम्बर, देश का नाम, उसके आने-जाने की जानकारी, कब तक रुकेगा आदि। घरेलू पर्यटकों के लिए कोई पोर्टल नहीं है। </p>
<p><strong>आमेर महल आते है सबसे अधिक पर्यटक </strong><br />पुरातत्व विभाग के अनुसार जयपुर स्थित स्मारकों में सबसे अधिक पर्यटक आमेर महल आते हैं। उसके बाद हवामहल स्मारक, जंतर-मंतर, नाहरगढ़ दुर्ग, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय आदि में आते हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पर्यटन विभाग की टूरिस्टों की गणना करने की प्रक्रिया दोषपूर्ण है। आजतक इसका समाधान नहीं हो सका। यही कारण है कि जयपुर शहर आने वाला एक पर्यटक चार से पांच जगह गिना जाता है। होटल प्रबंधकों को टूरिस्ट परपज से आने वाले पर्यटकों का डेटा एकत्र कर पर्यटन विभाग को देना चाहिए। हर होटल में आने वाले पर्यटक की आईडी ली जाती है, उसे काउंट करना चाहिए। <br /><strong>-नरेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, टूरिस्ट गाइड फैडरेशन ऑफ इंडिया </strong></p>
<p>99 प्रतिशत टूरिस्ट आमेर महल, जंतर-मंतर स्मारक और हवामहल स्मारक जाते हैं। एक टूरिस्ट शहर के तकरीबन पांच पर्यटन स्थल विजिट करता है। ऐसे में एक टूरिस्ट पांच जगह गिना जाता है। इससे आंकड़े बढ़ जाते हैं। पर्यटन विभाग के पास इनकी काउंटिंग के लिए कोई विकल्प नहीं है। टिकट की डिजिटल व्यवस्था हो तो काउंटिंग संभव है। <br /><strong>-मदन सिंह राजपुरिया, अध्यक्ष, जयपुर टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 12:07:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कश्मीर में वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों के लिए पर्यटन स्थलों का विकास करेगी सरकार : उमर अब्दुल्ला ने कहा- मेलों में करेंगे प्रचार, रोडमैप कर रहे है तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें प्रमुख पर्यटन स्थलों को आकार देना होगा। हम वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों को पर्यटन स्थलों की ओर मोड़ने में असफल रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/vaishno-devi-in-%E2%80%8B%E2%80%8Bkashmir-will-develop-tourist-destinations-for-pilgrims/article-106383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy45.jpg" alt=""></a><br /><p>जम्मू। कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार माता वैष्णो देवी का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जम्मू और आसपास के पर्यटन स्थलों का विकास तथा प्रचार करेगी। पर्यटन विभाग का प्रभार संभाल रहे अब्दुल्ला ने सदन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक युद्धवीर सेठी द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि जम्मू में पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार उस तरह नहीं किया गया, जैसा किया जाना चाहिए था, लेकिन हम इन स्थानों पर अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक रोडमैप तैयार कर रहे हैं। जम्मू के लोग इस बात से डरे हुए हैं कि कश्मीर के लिए ट्रेन, रिंग रोड के पूरी तरह चालू हो जाने और निर्माणाधीन दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के कारण जम्मू शहर दरकिनार हो जाएगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें प्रमुख पर्यटन स्थलों को आकार देना होगा। हम वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों को पर्यटन स्थलों की ओर मोड़ने में असफल रहे हैं और मुझे लगता है कि अगर हम 10-15 प्रतिशत तीर्थयात्रियों को लाने में सफल हो जाते हैं, तो यह निश्चित रूप से हमारे पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देगा। अब्दुल्ला ने कहा कि हम आगंतुकों के लिए तीर्थ पर्यटन यात्रा कार्यक्रम व्यापार मेलों में पर्यटन स्थलों का प्रचार करने और बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 19:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यटन विभाग में महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट एवं ब्रज चौरासी यात्रा की प्रस्तुति</title>
                                    <description><![CDATA[इस दौरान उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि आज विभिन्न एजेंसियों ने प्रस्तुति दी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/presentation-of-maharana-pratap-tourist-circuit-and-braj-chaurasi-yatra/article-96533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यटन भवन में सोमवार को उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के समक्ष राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत और शासन सचिव पर्यटन रवि जैन की उपस्थिति में ‘महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किल’ एवं ‘ब्रज चौरासी यात्रा’ का कॉन्सेप्ट प्लान और प्राइमरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्राप्त निविदाओं की कन्सलटेन्टस-आर्किटेक्टस की ओर से प्रस्तुति की गई। जिसमें में महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट एवं ब्रज चौरासी यात्रा का विकास करना तथा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास करने के लिए विभिन्न बिंदु प्रस्तावित किए गए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि आज विभिन्न एजेंसियों ने प्रस्तुति दी है। उक्त आधार पर बिंदुवार नियोजित रूप से योजना बनाकर काम किया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने राजस्थान पर्यटन विभाग की 145 करोड़ की दो बड़ी योजनाओं की मंजूरी पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का आभार जताया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 11:23:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> 'देखो अपना देश' योजना के तहत पीपल्स चॉइस अभियान की शुरूआत</title>
                                    <description><![CDATA[वोटिंग के लिए फॉर्म भरने में लगभग एक मिनट का समय लगेगा, जिसमें लोगों से उनके पसंदीदा स्थलों को चुनने को कहा जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/peoples-choice-campaign-launched-under-dekho-apna-desh-scheme/article-95767"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यटन मंत्रालय ने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और भारत के अद्वितीय स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 'देखो अपना देश' योजना के तहत 'पीपल्स चॉइस 2024' अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों से उनके पसंदीदा पर्यटन स्थलों के बारे में जानना और उनकी धारणा के आधार पर इन स्थलों को उन्नत बनाने की दिशा में कदम उठाना है। वोटिंग के लिए फॉर्म भरने में लगभग एक मिनट का समय लगेगा, जिसमें लोगों से उनके पसंदीदा स्थलों को चुनने को कहा जाएगा। </p>
<p>यह पहल भारत को 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्य की दिशा में ले जाने और सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करने में मदद करेगी। 18 नवंबर से शुरु हुए इस अभियान की वोटिंग की अंतिम तिथि 25 नवंबर तक है। राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से इस योजना में ज्यादा से ज्यादा लोगों को भाग लेने के लिए पहल की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Nov 2024 16:52:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>अवकाश के दिन पर्यटन स्थलों पर उमड़ी भीड़ </title>
                                    <description><![CDATA[हवामहल स्मारक में दोपहर डेढ़ बजे तक 2250 और आमेर महल में करीब 2928 पर्यटक आ चुके हैं। वहीं जंतर मंतर स्मारक, ईसरलाट में भी पर्यटकों की उपस्थिति देखने को मिल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/crowd-gathered-at-tourist-places-on-holidays%C2%A0/article-93983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/6633-copy88.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अवकाश के दिन शहर के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भीड़भाड़ देखने को मिल रही है। हवामहल स्मारक में देशी और विदेशी पर्यटकों के साथ स्कूली बच्चों के ग्रुप भी बड़ी तादाद में आ रहे हैं। ऐसे में बच्चे भी यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरों से मुखातिब हो रहे हैं। </p>
<p>हवामहल स्मारक में दोपहर डेढ़ बजे तक 2250 और आमेर महल में करीब 2928 पर्यटक आ चुके हैं। वहीं जंतर मंतर स्मारक, ईसरलाट में भी पर्यटकों की उपस्थिति देखने को मिल रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Oct 2024 14:40:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हर पर्यटन स्थल पर होनी चाहिए ब्रेल लिपि ब्रोशर सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[इस तरह की सुविधा प्रदेश के साथ ही देश के पर्यटन स्थलों पर होने चाहिए। ताकि वे भी ऐतिहासिक किले, महल, स्मारक और संग्रहालय के इतिहास से रूबरू हो सकें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/every-tourist-destination-should-have-braille-script-brochure-facility/article-93615"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिंदी और अंग्रेजी में बनाए ब्रेल लिपि के ब्रोशर्स दृष्टिबाधित पर्यटकों के लिए हवामहल स्मारक का इतिहास जानने और समझने के लिए सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इनके जरिए दृष्टिबाधित पर्यटकों को स्मारक के हर हिस्से की जानकारी आसानी से मिल रही है। पर्यटकों का कहना है कि जैसे हवामहल में हमारे लिए इस तरह की व्यवस्था की गई है, उसी तरह पुरातत्व विभाग के संरक्षित अन्य स्मारकों में भी दृष्टिबाधित पर्यटकों के लिए यह सुविधा करनी चाहिए।</p>
<p>नई दिल्ली स्थित राजकीय ब्वॉयज सीनियर सैकेंडरी स्कूल से हवामहल स्मारक आए धनजी कुमार, सरोज कुमार, गोविंद और सूरज ने यहां दृष्टिबाधित पर्यटकों के लिए ब्रेल लिपि की सुविधा को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सुविधा प्रदेश के साथ ही देश के पर्यटन स्थलों पर होने चाहिए। ताकि वे भी ऐतिहासिक किले, महल, स्मारक और संग्रहालय के इतिहास से रूबरू हो सकें। </p>
<p><strong>आभानेरी में लगा है बोर्ड</strong><br />भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार दौसा स्थित आभानेरी बावड़ी आने वाले दृष्टि बाधित पर्यटकों की सुविधार्थ एक बोर्ड बनाया गया है। इसमें ब्रेल लिपि में यहां के इतिहास की जानकारी दी गई है। दूष्टिबाधित पर्यटक बोर्ड को छूकर आभानेरी बावड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। </p>
<p><strong>यूपी से आए पर्यटक ने भी की थी मांग</strong><br />इससे पहले यूपी से आए दृष्टि बाधित पर्यटक भी यह मांग कर चुके हैं कि हवामहल स्मारक के साथ ही अन्य पर्यटन स्थलों पर भी ब्रेल लिपि में ब्रोशर्स की सुविधा होनी चाहिए। इससे अन्य दृष्टि बाधित पर्यटकों को भी ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी मिल सके। </p>
<p>दृष्टि बाधित पर्यटकों की सुविधार्थ हिंदी और अंग्रेजी में ब्रेल लिपि के ब्रोशर्स बनवाए गए हैं। ताकि ये पर्यटक भी इनके माध्यम से स्मारक के इतिहास की जानकारी प्राप्त कर सकें। <br />-सरोजनी चंचलानी, अधीक्षक, हवामहल स्मारक</p>
<p>दृष्टि बाधित पर्यटकों के लिए भी प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर ब्रेल लिपि में ब्रोशर्स की सुविधा होनी चाहिए। अभी केवल हवामहल स्मारक में यह सुविधा देखने को मिलती है।<br />-संजय कौशिक, पर्यटन विशेषज्ञ</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 12:04:28 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लॉयन, हाथी, लेपर्ड के बाद अब टाइगर सफ़ारी की शुरुआत कल से, CM भजनलाल करेंगे टाइगर सफ़ारी का लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में पर्यटकों को झालाना और आमागढ़ लेपर्ड रिज़र्व, आमेर महल और हाथीगाँव में हाथी सवारी, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित लॉयन सफ़ारी के बाद अब टाइगर सफ़ारी का रोमांच देखने को मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-lion-elephant-leopard-now-tiger-safari-will-start-from/article-92420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(14).png" alt=""></a><br /><p>नवज्योति, जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित टाइगर सफ़ारी की शुरुआत सोमवार होगी।मुख्य अतिथि सीएम भजन लाल शर्मा सुबह 11 बजे टाइगर सफ़ारी का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा होंगे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री संजय शर्मा करेंगे। </p>
<p>दैनिक नवज्योति ने पहले ही बताया था कि इस पर्यटन सीजन पर्यटकों को टाइगर सफ़ारी की सौग़ात मिल सकती है। अभी सफ़ारी में बाघ गुलाब, बाघिन चमेली और भक्ति को रखा गया है। यहाँ भक्ति को भी टाइगर सफ़ारी में शिफ़्ट करने की ख़बर को सबसे पहले नवज्योति ने ही प्रकाशित की थी। साथ ही बताया गया था कि 32 हेक्टेयर में बनाई गई सफ़ारी में आठ की शेप में ट्रैक बनाए गया हैं। साथ ही दस रेस्टिंग शेल्टर भी बनाए गए हैं। </p>
<p>गौरतलब है कि जयपुर में पर्यटकों को झालाना और आमागढ़ लेपर्ड रिज़र्व, आमेर महल और हाथीगाँव में हाथी सवारी, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित लॉयन सफ़ारी के बाद अब टाइगर सफ़ारी का रोमांच देखने को मिलेगा। जानकारी के अनुसार शुरुआत में क़रीब चार गाड़ियों से टाइगर सफ़ारी की शुरुआत की जा सकती है। आगे चार और गाड़ियाँ यहाँ लगाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Oct 2024 13:55:36 +0530</pubDate>
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