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                <title>एक ऑपरेटर के भरोसे एमबीएस का आरजीएचएस पर्ची काउन्टर, मची अफरा तफरी</title>
                                    <description><![CDATA[काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital-s-rghs-slip-counter-left-dependent-on-a-single-operator--chaos-ensues/article-151944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ek-operator-k-bharose-mbs-ka-rghs-parche-caunter-,-mache-aphara-taphare...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान भर में निजी अस्पतालों और दवा काउंटरों द्वारा आरजीएचएस  के बहिष्कार के चलते अब सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव असहनीय स्तर तक पहुँच गया है। सोमवार सुबह कोटा के एमबीएस अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरजीएचएस पर्ची काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी। इसके अव्यवस्था इतनी बढ़ गई कि काउंटर पर मौजूद एकमात्र कर्मचारी को देख लोगों के सब्र का बांध टूट गया। वह आपस में ही उलझते नजर आये।संविदा कर्मियों के काम छोड़ने और एक साथ छुट्टी पर जाने से व्यवस्था चरमरा गई।</p>
<p><strong>लाभार्थियों के लिये सरकारी इलाज से दवा में परेशानी</strong><br />एमबीएस अस्पताल से सामने आयी तस्वीरे बताती है कि आरजीएचएस को लेकर निजी अस्पतालों के विरोध के चलते सरकारी तंत्र पूरी तरह से बैकअप प्लान के बिना चल रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता और बुजुर्ग पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों की परेशानी है कि वह निजी अस्पताल में इलाज ले नहीं पा रहे यदि सरकारी मे सामान्य पर्ची से इलाज लेते है तो उन्हे पहले से चल रही ब्राण्ड़ेड दवाओं को सरकारी डॉक्टर सरकारी पर्चे पर नहीं लिख सकता।</p>
<p><strong>5 में से 4 ऑपरेटर नदारद: सिस्टम हुआ फेल</strong><br />जानकारी के अनुसार, आरजीएचएस काउंटर के सुचारू संचालन के लिए कुल 5 कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त हैं, जिनमें से 3 सुबह और 2 शाम की शिफ्ट में रहते हैं। लेकिन सोमवार को बदहाली का आलम यह था कि ऑपरेटर चेतन शर्मा ने काम छोड़ दिया। ऑपरेटर जीतू सहित अन्य कार्मिक छुट्टी पर चले गए। काउंटर पर केवल एक मात्र कर्मचारी योगेंद्र मौजूद था। जिससे लोगों के ओपीड़ी,भर्ती तथा डिस्चार्ज के लिये घंटों लगने लगे।</p>
<p><strong>भर्ती व डस्चार्ज की प्रक्रिया में लगता है समय</strong><br />बाहर खडे मरीजों में भर्ती-डिस्चार्ज की जटिल प्रक्रिया के बीच अकेला कर्मचारी पर्ची नहीं काट पा रहा था। जिससे कतार में खड़े बुजुर्गों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में सामान्य ओपीड़ी के लिये आये मरीजों को आरजीएचएस की पर्ची न बनने के कारण बिना इलाज के लौटना पड़ा।</p>
<p><strong>बुआ को लेने जाने की जिद पर अड़ा</strong><br />हैरानी की बात यह रही कि मुख्य नर्सिंग इंचार्ज खुद ड्यूटी से नदारद थे। इंचार्ज का जिम्मा संभाल रहीं वर्षा राठौर ने आनन-फानन में व्यवस्था संभालने के लिए एक लिफ्ट ऑपरेटर को पर्ची काउंटर पर बैठाया। लेकिन तमाशा तब खड़ा हुआ जब वह लिफ्ट ऑपरेटर भी थोड़ी देर बाद अपनी 'बुआ' को लेने जाने की जिद पर अड़ गया। लगभग 40 मिनट तक प्रभारी वर्षा उस ऑपरेटर की मान-मनुहार करती नजर आईं ताकि काउंटर चालू रह सके।</p>
<p><strong>मरीजों का फूटा गुस्सा, इंचार्ज को सुनाई खरी-खोटी</strong><br />निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने के कारण मजबूरी में सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों को यहाँ भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। घंटों इंतजार से झल्लाए लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन पर नाराजगी जताई और मौके पर मौजूद प्रभारी को भी खरी-खोटी सुनाई। मरीजों का आरोप है कि जब निजी क्षेत्र में विरोध के चलते सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ना तय था, तो प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं की?</p>
<p>संविदा पर लगे कार्मिकों के काम छोडने और छुट्टी के समय लिफ्ट पर लगाये गये व्यक्ति को इमरजेन्सी में ऑपरेटर पर लगाया गया था। सभी को मौके पर मौजुद इंचार्ज के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिये।<br /><strong>- नरेन्द्र खींची, नर्सिंग इन्चार्ज</strong></p>
<p>मै सुबह ओपीड़ी की तरफ गया था मुझे किसी ने इस बारें में सूचना नहीं दी। नर्सिंग इंचार्ज से जानकारी जुटाई जा रही है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:34:35 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही: अस्पताल की व्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर, कैसे होगा उपचार !</title>
                                    <description><![CDATA[जल्द से जल्द अस्पताल की अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--hospital-s-arrangements-are-on-ventilator--how-will-treatment-be-done/article-124066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)51.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम ऐसा है कि मरीजों को अस्पताल में उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का समय सुबह 8 बजे से 2 तक का है, लेकिन जब मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते है तो अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिलते और कई घंटों तक कुर्सियां खाली पड़ी रहती है। वहीं दूसरी ओर यहां पर सिर्फ एक चिकित्सक के भरोसे पुरानी स्वास्थ्य केन्द्र है जिससे मरीजों की लम्बी कतारें लग जाती है। वहीं दवा वितरण, एक्स रे व जांच केन्द्र पर कोई उचित व्यवस्था नहीं है। अभी मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है ऐसे में चिकित्सा व्यवस्थाएं फेल दिखाई पड़ रही है। वहीं मरीजों को सही उपचार नहीं मिलने के कारण निजी अस्पताल की ओर रूख  करना पड़ रहा है। कई बार तो दवा वितरण केन्द्र पर भी दवा लेने के लिए मरीजों को कई घंटों लाइन में लगना पड़ता है। मरीज की पर्ची बनवाने से लेकर मरीज की जांच संबंधी सभी अस्पताल के कायों में लापरवाही दिखाई पड़ती है। मरीजों ने मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल की अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके। </p>
<p> यह तो रोज का ही काम है, मुझे अभी एक घंटा हो गया। लंबी कतार में खड़ा हुआ हूं, 1 बजे आया था, यहां पर केवल एक ही डॉक्टर है। <br /><strong>- संजय पारीक, ग्रामीण  </strong></p>
<p>मुझे 3 घंटे हो गए, मेरा अभी तक कतार में नंबर नहीं आया। डॉक्टर के कमरे खाली है मरीज परेशान वह बेहाल हो रहे हैं ।<br /><strong>- तुलसीराम, ग्रामीण </strong></p>
<p>मैं दवाई लेने के लिए भटक रहा हूं,दवाई वितरण केंद्र पर एक लड़का बैठा हुआ है जो की स्कूल की ड्रेस में है, दवाई देने वाला वहां पर नहीं है, इसलिए बहुत देर से परेशान हो रहा हूं, पहले ही डॉक्टर नहीं है और फिर दवाई लेने में देरी हो रही है। <br /><strong>- बलराम शर्मा, ग्रामीण  </strong></p>
<p>बच्चों को दिखाने आया था, लेकिन लंबी कतार देखकर पसीना आ गया। बच्चों को बिठाकर कतार में खड़ा हो गया। 1 घंटे तक भी मेरा नंबर नहीं आया, क्योंकि पूरे अस्पताल में एक ही डॉक्टर था, बाकी डॉक्टर के कमरों में कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी। <br /><strong>- बजरंग लाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>मैं कटवार से डॉक्टर को दिखाने यहां आया, ताकि मेरा अच्छा इलाज हो सके।  गांव में इतनी सुविधा नहीं है, यह सोचकर मैं खानपुर आया, लेकिन यहां पर तो केवल एक ही डॉक्टर मरीज को देख रहा है। लंबी कतार में खड़ा होकर परेशान हो गया।<br /><strong>- तोलाराम, ग्रामीण </strong></p>
<p> 2 घंटे पहले कमरा नंबर 5 में डॉक्टर बैठा हुआ था, जैसे ही मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो उसे कतार को देखकर कमरा नंबर 5 का डॉक्टर उसे देखकर गायब हो गया। <br /><strong>- महावीर सुमन, ग्रामीण </strong></p>
<p>आज तीन डॉक्टरों की ड्यूटी अस्पताल में लगी हुई थी। जिस कारण इस प्रकार की अव्यवस्था हुई जो भी समस्या है उसका जल्द से जल्द समाधान कर दिया जाएगा। <br /><strong>-  धीरेंद्र गोपाल मिश्रा, सीएचसी इंचार्ज खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 16:17:52 +0530</pubDate>
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