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                <title> शेयर बाजार में लगातार गिरावट का पांचवा दिन, सेंसेक्स 1045.66 अंक औक निफ्टी में 331.55 अंक की गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। अमेरिका के फेडरल रिजर्व के साथ ही दुनिया के कई प्रमुख केन्द्रीय बैंकों द्वारा बढ़ती महंगाई से निजात पाने के लिए नीतिगत दरों में की गई बढोतरी के दबाव में वैश्विक स्तर पर शेयर बाजार में हुई बिकवाली का जबरदस्त असर गुरूवार को घरेलू स्तर पर भी दिखा जहां शेयर बाजार लगातार पांचवें दिन गिरावट लेकर बंद हुये। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/fifth-day-of-continuous-decline-in-the-stock-market--sensex-fell-by-1045-66-points-and-nifty-by-331-55-points/article-12385"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/sensex4.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका के फेडरल रिजर्व के साथ ही दुनिया के कई प्रमुख केन्द्रीय बैंकों द्वारा बढ़ती महंगाई से निजात पाने के लिए नीतिगत दरों में की गई बढोतरी के दबाव में वैश्विक स्तर पर शेयर बाजार में हुई बिकवाली का जबरदस्त असर गुरूवार को घरेलू स्तर पर भी दिखा जहां शेयर बाजार लगातार पांचवें दिन गिरावट लेकर बंद हुये। <br /><br />बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1045.66 अंक उतरकर 52 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 51495.79 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 331.55 अंक गिरकर 15360.60 अंक के स्तर पर आ गया। दिग्गज कंपनियों की तुलना में छोटी और मझौली कंपनियों अधिक बिकवाली देखी गयी। बीएसई का मिडकैप 2.34 प्रतिशत उतरकर 21441.40 अंक पर और स्मॉलकैप 2.87 प्रतिशत गिरकर 24346.96 अंक पर रहा। बीएसई में शामिल सभी समूह गिरावट में रहे जिसमें धातु में सबसे अधिक 5.48 प्रतिशत की और सबसे कम एफढमसीजी में 0.81 प्रतिशत की गिरावट रही। बीएसई में कुल 3476 कंपनियों में कारोबार हुआ जिसमें से 2754 लाल निशान में जबकि 620 हरे निशान में रही। 102 कंपनियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। <br /><br />वैश्विक स्तर सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे जिसमें ब्रिटेन का एफटीएसई2.51 प्रतिशत, जर्मनी का डैक्स 2.91 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसेंग 2.17 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.61 प्रतिशत शामिल है। सिर्फ जापान का निक्केई 0.40 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में सफल रहा। शुरूआत में एशियाई बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों पर बल पर बीएसई का सेंसेक्स 477 अंकों की तेजी लेकर 53018.91 अंक पर खुला। शुरूआती कारोबार में ही यह 53142.50 अंक के उच्चतम स्तर तक चढ़ा लेकिन इसके बाद शुरू हुयी बिकवाली के कारण यह 51425.48 अंक के निचले स्तर तक टूटा। अंत में यह पिछले दिवस के 52541.39 अंक की तुलना में 1.99 प्रतिशत अर्थात 1045.66 अंक गिरकर 51495.79 अंक पर रहा। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से मात्र नेस्ले इंडिया 0.30 प्रतिशत की बढ़त बनाने में सफल रही जबकि शेष 29 कंपनियां नुकसान में रही। <br /><br />एनएसई का निफ्टी  140 अंकों की बढ़त के साथ 15832.25 अंक पर खुला। शुरूआती कारोबार में ही यह 15863.15 अंक के उच्चतम स्तर तक चढ़ा लेकिन इसके बाद शुरू हुयी बिकवाली के दबाव में यह 15335.10 अंक के निचले स्तर तक उतरा। अंत में यह पिछले दिवस के 15692.15 अंक की तुलना में 331.55 अंक टूटकर 15360.60 अंक पर रहा। निफ्टी में शामिल 50 कंपनियों में से मात्र दो हरे निशान में रही जबकि शेष 48 लाल निशान में रही। अमेरिका के फेडरल बैंक ने ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की बढोतरी की है। इसके साथ ही स्विटजरलैंड के केन्द्रीय बैंक और जापान के केन्द्रीय बैंक ने भी ब्याज दरों में बढोतरी की है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के कारण आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने और तेल की कीमतों में हुयी बढोतरी से वैश्विक स्तर पर महंगाई रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और इसको काबू में करने के लिए केन्द्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढोतरी की जा रही है। विश्लेषक ऐसी स्थिति में फिर से एकबार आर्थिक मंदी आने की आंशका जताने लगे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 18:42:20 +0530</pubDate>
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                <title>महंगाई की मार</title>
                                    <description><![CDATA[देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ाए जाने से आम लोगों पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-1521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/petrol-disal3.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><strong>देश </strong></span>में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ाए जाने से आम लोगों पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है। इस साल पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रहने से पेट्रोल एक सौ रुपए से अधिक प्रति लीटर हो गया है, वहीं अब डीजल भी सौ रुपए प्रति लीटर हो गया है। रसोई गैस के दाम हर महीने बढ़ाए जाने से लोगों की कमर और टूट गई है। अब फिर 15 रुपए बढ़ा दिए जाने से रसोई गैस का सिलेण्डर एक हजार की आसपास की कीमत का हो गया है। डीजल के दाम लगभग बढ़ने से माल ढुलाई काफी ज्यादा होने से आम जरूरत की हर चीज काफी महंगी बिकने लगी है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ाई जाने से लग रहा है कि निकट भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। सरकार साफ कह चुकी है कि इन बढ़ते दामों को रोकना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सात साल के उच्चतम स्तर पर चल रहा है। इसी तरह प्राकृतिक गैस के दाम भी काफी बढ़ने से इसका असर रसोई गैस की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत तेल और गैस के आयात पर ही निर्भर है, तो इन उत्पादों का महंगा स्वाभाविक बन जाता है। जब भी घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ाए जाते हैं तो सरकार की तरफ से यही तर्क दिया जाता है। लेकिन सवाल है कि आखिर भारत में इन कीमतों की आखिर कोई सीमा भी तय की जानी चाहिए। सरकार को अच्छी तरह पता है कि देश की बड़ी आबादी रसोई गैस पर ही निर्भर है, इनमें करोड़ों परिवार काफी गरीब हैं। कोई गरीब परिवार ही क्या मध्यम वर्ग तक के परिवारों में एक हजार रुपए का गैस सिलेंडर खरीदने की क्षमता नहीं है। क्योंकि बाजार में पहले से ही आम जरूरत की सभी वस्तुएं काफी ऊंची बनी हुई हैं। इसी तरह यदि डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ती रहीं तो आम आदमी की तो कमर ही टूट जाएगी। केन्द्र व राज्यों की सरकारों को कोई रास्ता निकालना चाहिए। पेट्रोलियम पदार्थों पर वसूले जाने वाले शुल्क में कटौती की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 14:34:27 +0530</pubDate>
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