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                <title>renewable energy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>‘दुनिया में महंगा, भारत में सस्ता’... लाल किले से मोदी ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की ताकत, महंगी कोचिंग से राहत; देशभर में फ्री ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत और 'मेक इन इंडिया' पर जोर दिया। उन्होंने सेमीकंडक्टर प्लांट्स, ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति, युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और एक करोड़ युवाओं को एआई (AI) प्रशिक्षण देने की महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-will-have-to-further-strengthen-the-resolve-of-self-reliant/article-162993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/modi-4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत को आज के माहौल में दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमताओं को बढ़ाते हुए अपने हितों की स्वयं रक्षा करनी है और इसके लिए हमें आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना होगा। पीएम मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि सबकी भागीदारी के संकल्प के साथ देश आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज माहौल बदल है और हर भारतीय'मेक इन इंडिया','स्वदेशी' जैसे अभियानों से जुड़ रहा है।</p>
<p>डिजिटल तकनीकी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौर में चिप का महत्व बहुत अधिक है। इलेक्ट्रॉनिक सामान, चिकित्सा उपकरणों और परिवहन प्रणालियों सहित अनेक क्षेत्रों में चिप अनिवार्य है। भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए है तीन प्रमुख सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित किये हैं और इनमें उत्पादन शुरू होकर निर्यात भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले सात-आठ वर्षों में पांच से आठ और सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने की संभावना है।</p>
<p><strong>संकट में काम आयीं पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं</strong><br /> <br />इसके आगे पीएम मोदी ने कहा सरकार ने पिछले 10-12 साल में 'नागरिक देवो भव' के मंत्र के साथ जो सुधार किये और जो नीतियां अपनायीं, उसी का परिणाम है कि कोरोना महामारी तथा पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि पिछले 10-12 साल में दुनिया में कई संकट आये। कोरोना ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया। उसके बाद यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्ध आये। हर जगह तनाव का माहौल था। 'भविष्य वक्ताओं' ने तो कहा कि वैक्सीन नहीं मिलेगी, कोविड में लोग बचेंगे नहीं, पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी। उन्होंने देश को डराने का काम किया, इसी में उन्हें आनंद आता है। </p>
<p>उन्होंने कहा, देश ने देख लिया कि पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं रंग ला रही हैं। 'नागरिक देवो भव' के मंत्र को लेकर जीते हुए भारत ने पिछले 10-12 साल में जो तैयारियां की थीं, एक के बाद एक जो कदम उठाये थे, वे सभी चीजें काम आ गयीं। आज देश में पेट्रोल भी है, डीजल भी है, गैस भी है, यूरिया भी है। हम अपनी ताकत के बल पर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के इस संकट का प्रभाव हर किसी पर हुआ है और भारत भी अछूता नहीं है। एक बोरी यूरिया की कीमत दुनिया में तीन हजार रुपये पर पहुंच गयी है, लेकिन देश में किसानों पर वह बोझ न डालकर आज भी उन्हें सिर्फ 300 रुपये में यूरिया की बोरी दी जा रही है। डीएपी की कीमत दुनिया में पांच हजार रुपये है जो देश के किसानों को 1,350 रुपये में दी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संसाधन के कारण देश रुकता नहीं है, कई बार इसका कारण सोच होती है। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसी सोच के कारण समुद्री तट का हमारा हिस्सा 90 प्रतिशत हिस्सा 'नो गो एरिया' घोषित कर दिया गया था। यह सोच का दारिद्र था। उनकी सरकार ने उसे 'गो अहेड एरिया' के रूप में खोल दिया है। हम समुद्र के अंदर भी नये-नये भंडार खोजने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, बीते वर्षों में सरकार का ध्येय रहा है कि हमें अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना है, हमें आत्मनिर्भर होना चाहिये। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, लेकिन उससे हमारा सामाथ्र्य नहीं बनता है। हमें भी अपनी क्षमता बढ़ानी है। मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल जैसे क्षेत्रों में आज हर भारतीय का मन जुड़ चुका है। सेमीकंडक्टर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले सेमीकंडक्टर की बातें होती थीं, लेकिन हम उसमें आगे नहीं बढ़ सके। आज की दुनिया में हर इलेक्ट्रॉनिक, मेडिकल और परिवहन उपकरण में चिप जरूरी है। देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो गये हैं। वहां से निर्यात भी शुरू हो चुका है। आने वाले सात-आठ साल में और पांच-छह सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पूरी सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी क्रिटिकल मिनरल पर आधारित हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने कई देशों के साथ इसके लिए समझौते किये हैं। </p>
<p><strong>अगले 10 साल में पांच नये परमाणु ऊर्जा संयंत्र शुरू करने का लक्ष्य</strong></p>
<p>ऐतिहासिक लाल किले के प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों की सोच के कारण देश ऊर्जा के लिए विदेशों पर निर्भर है। पिछले 12 साल में ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उनकी सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये हैं। सरकार ने परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए 'शांति विधेयक' पारित किया है। उन्होंने कहा, वर्ष 2047 तक हमने 100 गीगावाट का लक्ष्य रखा है। इसी दशक में पांच नये परमाणु ऊर्जा संयंत्र का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। ब्रीडर रिएक्टर से परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि मिली है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि साल 2014 से पहले देश में सिर्फ 70 शहरों में पाइप से गैस की व्यवस्था थी। बारह साल में उनकी सरकार ने इसे 700 शहरों तक पहुंचा दिया है। यह होती है रफ्तार, यह होता है विस्तार। आज पौने दो करोड़ घरों में पाइप से गैस की आपूर्ति की जा रही है। साल 2014 में सौर ऊर्जा क्षमता मात्र दो गीगावट थी। आज 160 गीगावाट का लक्ष्य प्राप्त हो चुका है। उसका लाभ गरीबों और मध्यम वर्ग को देने के लिए पीएम सूर्यघर योजना शुरू की गयी है, जिसमें 50 लाख घरों का आंकड़ा पार हो चुका है। इसके कारण हजारों घरों का बिजली बिल शून्य हो गया है। इतना ही नहीं वे अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। इस काम के लिए हर परिवार को सरकार 80 हजार रुपये की मदद दे रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि रेलवे के विद्युतीकरण का काम 1925 में शुरू हुआ था। अगले 90 साल में सिर्फ 30 प्रतिशत रेल का विद्युतीकरण हुआ था। उन्होंने कहा, हमारी रफ्तार देखिये, हमने एक दशक के अंदर शत-प्रतिशत काम पूरा कर दिया। यह होता है काम। इसके कारण डीजल जो हमें बाहर से लाना पड़ता है, उसकी बचत हुई, पर्यावरण को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार यहीं नहीं रुकी। देश ने हाइड्रोजन से चलने वाली पहली ट्रेन शुरू कर दी है। यह सबसे लंबी सबसे ताकतवर ट्रेन है। भारत ने हाइड़्रोजन ट्रेन के क्षेत्र में भी अपना झंडा गाड़ दिया है।  </p>
<p><strong>परीक्षाओं के लिए युवाओं को फ्री ऑनलाइन कोचिंग</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए देश में निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था करने तथा एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने की घोषणा की है। मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विषय को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए यह घोषणा की। देश में बढते महंगे कोचिंग व्यवसाय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह मध्यम वर्ग के लिए बड़ा बोझ बन गया है। उन्होंने कहा कि इस बोझ को दूर करने के लिए सरकार देश भर में युवाओं के लिए निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क बनायेगी। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे मध्यम वर्ग के लिए कोचिंग क्लास की स्पर्धा बहुत बड़ा बोझ बन चुकी है। मां-बाप को लग रहा है कि यदि कोचिंग क्लास में बच्चे को नहीं भेजा तो हम प्रतिष्ठित परिवार नहीं हैं। सरकार ने इन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता की है। उनका हजारों करोड़ रुपये का खर्च भी बचे और उनके बच्चे भी उनके आसपास रहे सके, उनकी देखभाल हो सके, परिवार पर आर्थिक बोझ न आये और इसलिए हमने युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री आनलाइन कोचिंग की व्यवस्था करने का  निर्णय लिया है। </p>
<p>उन्होंने कहा, देश में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर है, उत्तम प्रतिभा और शिक्षक हैं। इन संसाधनों को जोड़कर हम देश के नौजवानों को फ्री कोचिंग देने का नेटवर्क खड़ा करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह घोषणा भी की कि दुनिया भर में एआई की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए तथा युवाओं को इसमें निपुण बनाने के लिए एक करोड़ युवाओं को एआई का प्रशिक्षण दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक होने के विरोध में देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ और सरकार को छात्रों तथा युवा प्रदर्शनकारियों की मांग के आगे झुकना पड़ा। इसके कारण शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। </p>
<p><strong>एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल का मिलेगा प्रशिक्षण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि हमारे देश का नौजवान एआई की दुनिया में नेतृत्व करने का सामथ्र्य विकसित कर सके। पीएम मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि भारत के युवा इस तेजी से उभरते क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 35 साल बाद देश में नयी शिक्षा नीति लेकर आये हैं, जिसका फायदा मध्यम वर्ग के परिवारों को हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 350 से भी कम थी, आज 10-12 साल के भीतर-भीतर 650 नये विश्वविद्यालय खुल चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले मेडिकल शिक्षा के सिर्फ चार सौ कालेज हुआ करते थे, आज करीब 850 कालेज हो गये हैं। उन्होंने कहा कि भारत में विदेशी विश्वविद्यालय भी आ रहे हैं। देश के नौजवानों को विदेशी शिक्षण संस्थानों से डिग्री मिले, इसका भी प्रबंध हो चुका है। </p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश के युवा का मन बचपन से ही तकनीक की तरफ आकर्षित हो, इस दिशा में काम कर रहे हैं, इसलिए देश में 10 हजार से अधिक अटल टिकरिंग लैब छोटे-छोटे बच्चों के हवाले कर दिया है, ताकि उनका नवाचार और तकनीक की तरफ रुझान पैदा हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, कौशल, स्टार्टअप और नयी तकनीकों के क्षेत्र में हो रहे विस्तार से देश के युवाओं के लिये नये अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से इन अवसरों का लाभ उठाकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 12:28:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्युत कनेक्शन और उत्पादन इकाइयों की जांच आसान, 1 एमवीए तक स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने विद्युत सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब 1 MVA क्षमता तक की उत्पादन इकाइयों और 33 KV तक के कनेक्शनों के लिए स्व-प्रमाणीकरण (Self-Certification) की सुविधा मिलेगी। इससे सोलर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा और इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी, जिससे व्यापार करना और भी सरल होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-there-is-no-need-for-electrical-inspection-for-production/article-151595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/इलेक्ट्रिक.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने विद्युत कनेक्शनों और उत्पादन इकाइयों की सुरक्षा जांच प्रक्रिया को आसान बनाते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा एवं विद्युत आपूर्ति से संबंधित उपाय) विनियम-2023 के तहत लागू इस व्यवस्था से 1 एमवीए क्षमता तक की उत्पादन इकाइयों को बड़ी राहत मिलेगी। नई व्यवस्था के अनुसार अब 1 एमवीए तक की क्षमता वाली उत्पादन इकाइयों, जिनमें सोलर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत भी शामिल हैं, का स्व-प्रमाणीकरण किया जा सकेगा। इसके लिए विद्युत निरीक्षक से अनिवार्य प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p>संबंधित उपभोक्ता, परिसर मालिक या आपूर्तिकर्ता स्वयं प्रमाणित कर सकेंगे कि उनका प्लांट निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। इसी तरह 33 केवी तक के विद्युत कनेक्शनों के लिए भी उपभोक्ता स्व-प्रमाणीकरण कर सकेंगे, हालांकि इच्छानुसार विभागीय पोर्टल के माध्यम से निरीक्षक से जांच कराने का विकल्प रहेगा। हालांकि 1 एमवीए से अधिक क्षमता वाली इकाइयों, 33 केवी से अधिक वोल्टेज, 15 मीटर से ऊंची इमारतों, अस्पताल, मॉल और सार्वजनिक स्थलों के लिए विद्युत निरीक्षक द्वारा प्रमाणन अनिवार्य रहेगा। सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाकर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में संशोधन, नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने RIPS-2024 के तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। अब सोलर मॉड्यूल, सेमीकंडक्टर और बैटरी निर्माण इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। केवल मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को पात्र माना जाएगा, असेंबलिंग को नहीं। इस निर्णय से राजस्थान में हरित ऊर्जा निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amendment-in-rajasthan-investment-promotion-scheme-will-give-boost-to/article-151603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/राजस्थान-सचिवालय.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2024 के तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। वित्त विभाग (कर प्रभाग) द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए योजना की उपधारा 7.3.1 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया है। संशोधन के तहत योजना की उपधारा 9.1 में “रिन्यूएबल्स मैन्युफैक्चरिंग” की परिभाषा को नया रूप दिया गया है। अब इसके अंतर्गत सोलर मॉड्यूल, सोलर पीवी सेल, इंटीग्रेटेड सोलर सेल एवं मॉड्यूल, सेमीकंडक्टर, सौर ऊर्जा भंडारण में प्रयुक्त बैटरियां तथा सोलर इलेक्ट्रिक चार्जिंग उपकरणों के निर्माण से जुड़ी इकाइयों को शामिल किया गया है।</p>
<p>स्पष्ट किया गया है कि केवल निर्माण इकाइयां ही पात्र होंगी, असेंबलिंग इकाइयां नहीं। इसके साथ ही योजना में “सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग” को नई औद्योगिक गतिविधि के रूप में जोड़ा गया है। इसमें फोटोवोल्टिक सेल की परतें तैयार करने, उन्हें जोड़ने, टफेंड ग्लास, लेमिनेशन, फ्रेम तथा जंक्शन बॉक्स के माध्यम से उपयोग योग्य मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। सरकार के इस निर्णय से राज्य में हरित ऊर्जा निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:59:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीएम-कुसुम योजना में राजस्थान ने छुआ 4 हजार मेगावाट का आंकड़ा, 2.62 लाख किसानों को दिन में बिजली </title>
                                    <description><![CDATA[पीएम-कुसुम योजना के तहत राजस्थान ने 4,000 मेगावाट सौर क्षमता हासिल कर ली है। अब तक 1,808 संयंत्रों से 2.62 लाख किसानों को दिन में सस्ती बिजली मिल रही है। राज्य सरकार ने 2026-27 तक 10.7 गीगावाट का लक्ष्य रखा है, जिससे खेती और सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-touched-the-figure-of-4-thousand-mw-under-pm-kusum/article-151490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/scaled_1000846705.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पीएम-कुसुम योजना के तहत राजस्थान ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्थापित क्षमता को 4 हजार मेगावाट तक पहुंचा दिया है। प्रदेश में पहले जहां मात्र 122 मेगावाट क्षमता के 92 संयंत्र स्थापित थे, वहीं अब गांव-ढाणी तक 4 हजार मेगावाट क्षमता के 1808 सौर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इन संयंत्रों से करीब 2.62 लाख किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली मिल रही है, जिससे सिंचाई कार्य आसान हुआ है और बिजली वितरण निगमों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राजस्थान को 10.7 गीगावाट की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिन्हें वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने अक्टूबर 2026 तक शेष 6,700 मेगावाट क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया है, जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन में और तेजी आने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:29:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में सौर ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान: रूफ टॉप सौर ऊर्जा में राजस्थान तीसरे स्थान पर, 1.44 लाख उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान रूफ टॉप सोलर के मामले में देश में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में 2.45 लाख से अधिक संयंत्र लग चुके हैं, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मिल रही है। ₹78,000 तक की सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं के कारण हर दिन लगभग 700 नए परिवार सौर ऊर्जा अपना रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inclination-of-consumers-towards-solar-energy-in-rajasthan-rajasthan-ranks/article-151240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/solar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में सौर ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में अब तक घरेलू, अघरेलू और औद्योगिक श्रेणी में 2.45 लाख से अधिक रूफ टॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 1.43 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो गया है। कुल 2090 मेगावाट क्षमता के साथ राजस्थान देश में रूफ टॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत राज्य में अब तक 1.77 लाख संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 686 मेगावाट है। प्रतिदिन औसतन 675 से 700 नए उपभोक्ता सौर ऊर्जा अपना रहे हैं। मार्च माह में 20,343 संयंत्र स्थापित हुए, जबकि एक दिन में सर्वाधिक 910 संयंत्र लगाए जाने का रिकॉर्ड भी बना। योजना के तहत उपभोक्ताओं को 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है, जबकि 150 यूनिट योजना में 17 हजार रुपये अतिरिक्त अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 1.52 लाख उपभोक्ताओं को 1185 करोड़ रुपये की सब्सिडी हस्तांतरित की जा चुकी है। साथ ही, बैंकों से लगभग 5.75 प्रतिशत ब्याज दर पर आसान ऋण और सरल प्रक्रियाओं के कारण प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना लगातार तेज़ी से बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:16:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने भारत-जॉर्डन सहयोग की सराहना की, पाँच प्रमुख समझौते पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[अम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत और जॉर्डन के बीच ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल परिवर्तन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़े पांच समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। पीएम मोदी ने इसे द्विपक्षीय साझेदारी का सार्थक विस्तार बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-praised-india-jordan-cooperation-five-major-agreements-signed/article-136115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/prime-minister-modi-jordan-visit-india.png" alt=""></a><br /><p>अम्मान। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को जॉर्डन की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान पांच समझौतों पर हस्ताक्षर होने पर इनकी सराहना करते हुए इसे भारत-जॉर्डन साझेदारी का सार्थक विस्तार बताया। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जिन पाँच समझौतों पर हस्ताक्षर हुये हैं, उनमें नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा में तकनीकी सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन और विकास में सहयोग, विरासत संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रा और एलोरा के बीच एक  समझौता, 2025-2029 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के नवीनीकरण से संबंधित समझौते शामिल हैं। जिससे लोगों के आपसी संपर्क को और बढ़ावा किया जाएगा और डिजिटल परिवर्तन के लिए भारत के सफल डिजिटल समाधानों को बड़े पैमाने पर साझा करने से संबंधित समझौता किया गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे के महत्व पर कहा कि ये समझौते भारत-जॉर्डन संबंधों की बढ़ती गहराई और व्यापकता को दर्शाते हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग स्वच्छ विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु जिम्मेदारी के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, जल संसाधन प्रबंधन में सहयोग से हमें संरक्षण, दक्षता और प्रौद्योगिकी से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर मिलेगा, जिससे दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेट्रा और एलोरा के बीच समझौता शैक्षणिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन के नए अवसर खोलेगा, जबकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का नवीनीकरण भारत और जॉर्डन के लोगों के बीच गहरे संबंधों को बढ़ावा देगा। भारत के डिजिटल नवाचारों को साझा करने से जॉर्डन के डिजिटल परिवर्तन को समर्थन मिलेगा और समावेशी शासन को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री का अल हुसैनिया पैलेस में किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी हितों से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, कृषि, बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे विषय शामिल रहे। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दोहरायी।</p>
<p>अम्मान स्थित अल हुसैन टेक्निकल यूनिवर्सिटी में भारत-जॉर्डन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को भारत की ओर से समर्थन देने की घोषणा भी की गई, जो तीन वर्षों में 10 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेगा और शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को मजबूती प्रदान करेगा। सूत्रों के अनुसार, जॉर्डन यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी इथियोपिया जाएंगे। जिससे पश्चिम एशिया और अफ्रीका में रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध सुदृढ़ होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:36:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय ऊर्जा असीम शक्ति, स्वच्छ भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[पृथ्वी पर ऊर्जा के परम्परागत साधन बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/renewable-energy-immense-power-clean-future/article-124495"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>पृथ्वी पर ऊर्जा के परम्परागत साधन बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, ऐसे में खतरा मंडरा रहा है कि यदि ऊर्जा के इन पारम्परिक स्रोतों का इसी प्रकार दोहन किया जाता रहा, तो इन परम्परागत स्रोतों के समाप्त होने पर गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। यही कारण है कि पूरी दुनिया में गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जाने लगी और इसी कारण अक्षय ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति करने के प्रयास शुरू हुए। अक्षय का अर्थ है, जिसका कभी क्षय न हो अर्थात् अक्षय ऊर्जा वास्तव में ऊर्जा का असीम और अनंत विकल्प है और आज के समय में यह किसी भी राष्ट्र के अक्षय विकास का प्रमुख स्तंभ भी है। पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए ऐसी ऊर्जा तथा तकनीकें विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे ग्लोबल वार्मिंग की विकराल होती समस्या से दुनिया को कुछ राहत मिल सके। किसी भी राष्ट्र को विकसित बनाने के लिए आज प्रदूषणरहित अक्षय ऊर्जा स्रोतों का समुचित उपयोग किए जाने की आवश्यकता भी है।</p>
<p><strong>प्राकृतिक संसाधन :</strong></p>
<p>आज न केवल भारत में बल्कि समूची दुनिया के समक्ष बिजली जैसी ऊर्जा की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं, साथ ही पर्यावरण असंतुलन और विस्थापन जैसी गंभीर चुनौतियां भी हैं। गंभीर समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा ही एक ऐसा बेहतरीन विकल्प है, जो पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के साथ ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में भी कारगर साबित होगी, लेकिन अक्षय ऊर्जा की राह में भी कई चुनौतियां मुंह बाये सामने खड़ी हैं। अक्षय ऊर्जा उत्पादन की देशभर में कई छोटी-छोटी इकाईयां हैं, जिन्हें एक ग्रिड में लाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इससे बिजली की गुणवत्ता प्रभावित होती है। भारत में अक्षय ऊर्जा के विविध स्रोतों का अपार भंडार मौजूद है, लेकिन इनसे ऊर्जा उत्पादन करने वाले अधिकांश उपकरण विदेशों से आयात किए जाते हैं।</p>
<p><strong>ऊर्जा की मांग :</strong></p>
<p>देश में ऊर्जा की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर भी तेजी से बढ़ रहा है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 450 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जिसमें अब 230 गीगावॉट से अधिक अक्षय ऊर्जा से प्राप्त हो रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो-पावर और छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अधिक बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं से तथा परमाणु ऊर्जा से भी अक्षय ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। कुल बिजली उत्पादन में अब अक्षय ऊर्जा का हिस्सा अब लगातार बढ़ रहा है, जो भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करता है। वर्ष 2040 तक भारत में ऊर्जा की कुल मांग वर्तमान की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाएगी। विशेषकर बिजली तथा ईंधन के रूप में उपभोग की जा रही ऊर्जा की मांग घरेलू एवं कृषि क्षेत्र के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रही है।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण स्रोत :</strong></p>
<p>औद्योगिक क्षेत्रों में ही बिजली तथा पैट्रोलियम जैसे ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोतों का लगभग 55 प्रतिशत उपभोग किया जाता है। हम जिस बिजली से अपने घरों, दुकानों या दफ्तरों को रोशन करते हैं, जिस बिजली या पैट्रोलियम इत्यादि ऊर्जा के अन्य स्रोतों का इस्तेमाल कर देश को विकास के पथ पर अग्रसर किया जाता है, क्या हमने कभी सोचा है कि वह बिजली या ऊर्जा के अन्य स्रोत हमें कितनी बड़ी कीमत पर हासिल होते हैं, यह कीमत न केवल आर्थिक रूप से बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी धरती पर विद्यमान हर प्राणी पर बहुत भारी पड़ती है। दुनियाभर में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन बिजली उत्पादन से ही होता है। यही कारण है कि अब सौर ऊर्जा तथा पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों को विशेष महत्व दिया जाने लगा है।</p>
<p><strong>ग्रीन हाइड्रोजन मिशन :</strong></p>
<p>भारत में अब ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्मार्ट ग्रिड, बैटरी स्टोरेज और इलैक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे कदम भी तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं, जो अक्षय ऊर्जा को व्यावहारिक और टिकाऊ बनाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि निर्यातक देश भी बन सकेगा। सही मायने में अक्षय ऊर्जा ही आज भारत में विभिन्न रूपों में ऊर्जा की जरूरतों का प्रमुख विकल्प है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ टिकाऊ भी है। भारत धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और आज समय है कि हम आर्थिक बदहाली और भारी पर्यावरणीय विनाश की कीमत पर ताप, जल एवं परमाणु ऊर्जा जैसे पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय अपेक्षाकृत बेहद सस्ते और कार्बन रहित पर्यावरण हितैषी ऊर्जा स्रोतों के व्यापक स्तर पर विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ें हैं।</p>
<p><strong>-योगेश कुमार गोयल</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 12:32:56 +0530</pubDate>
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