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                <title>renewable energy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>renewable energy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजस्थान में सौर ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान: रूफ टॉप सौर ऊर्जा में राजस्थान तीसरे स्थान पर, 1.44 लाख उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान रूफ टॉप सोलर के मामले में देश में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में 2.45 लाख से अधिक संयंत्र लग चुके हैं, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मिल रही है। ₹78,000 तक की सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं के कारण हर दिन लगभग 700 नए परिवार सौर ऊर्जा अपना रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inclination-of-consumers-towards-solar-energy-in-rajasthan-rajasthan-ranks/article-151240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/solar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में सौर ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में अब तक घरेलू, अघरेलू और औद्योगिक श्रेणी में 2.45 लाख से अधिक रूफ टॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 1.43 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो गया है। कुल 2090 मेगावाट क्षमता के साथ राजस्थान देश में रूफ टॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत राज्य में अब तक 1.77 लाख संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 686 मेगावाट है। प्रतिदिन औसतन 675 से 700 नए उपभोक्ता सौर ऊर्जा अपना रहे हैं। मार्च माह में 20,343 संयंत्र स्थापित हुए, जबकि एक दिन में सर्वाधिक 910 संयंत्र लगाए जाने का रिकॉर्ड भी बना। योजना के तहत उपभोक्ताओं को 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है, जबकि 150 यूनिट योजना में 17 हजार रुपये अतिरिक्त अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 1.52 लाख उपभोक्ताओं को 1185 करोड़ रुपये की सब्सिडी हस्तांतरित की जा चुकी है। साथ ही, बैंकों से लगभग 5.75 प्रतिशत ब्याज दर पर आसान ऋण और सरल प्रक्रियाओं के कारण प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना लगातार तेज़ी से बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:16:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने भारत-जॉर्डन सहयोग की सराहना की, पाँच प्रमुख समझौते पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[अम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत और जॉर्डन के बीच ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल परिवर्तन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़े पांच समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। पीएम मोदी ने इसे द्विपक्षीय साझेदारी का सार्थक विस्तार बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-praised-india-jordan-cooperation-five-major-agreements-signed/article-136115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/prime-minister-modi-jordan-visit-india.png" alt=""></a><br /><p>अम्मान। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को जॉर्डन की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान पांच समझौतों पर हस्ताक्षर होने पर इनकी सराहना करते हुए इसे भारत-जॉर्डन साझेदारी का सार्थक विस्तार बताया। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जिन पाँच समझौतों पर हस्ताक्षर हुये हैं, उनमें नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा में तकनीकी सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन और विकास में सहयोग, विरासत संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रा और एलोरा के बीच एक  समझौता, 2025-2029 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के नवीनीकरण से संबंधित समझौते शामिल हैं। जिससे लोगों के आपसी संपर्क को और बढ़ावा किया जाएगा और डिजिटल परिवर्तन के लिए भारत के सफल डिजिटल समाधानों को बड़े पैमाने पर साझा करने से संबंधित समझौता किया गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे के महत्व पर कहा कि ये समझौते भारत-जॉर्डन संबंधों की बढ़ती गहराई और व्यापकता को दर्शाते हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग स्वच्छ विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु जिम्मेदारी के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, जल संसाधन प्रबंधन में सहयोग से हमें संरक्षण, दक्षता और प्रौद्योगिकी से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर मिलेगा, जिससे दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेट्रा और एलोरा के बीच समझौता शैक्षणिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन के नए अवसर खोलेगा, जबकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का नवीनीकरण भारत और जॉर्डन के लोगों के बीच गहरे संबंधों को बढ़ावा देगा। भारत के डिजिटल नवाचारों को साझा करने से जॉर्डन के डिजिटल परिवर्तन को समर्थन मिलेगा और समावेशी शासन को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री का अल हुसैनिया पैलेस में किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी हितों से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, कृषि, बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे विषय शामिल रहे। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दोहरायी।</p>
<p>अम्मान स्थित अल हुसैन टेक्निकल यूनिवर्सिटी में भारत-जॉर्डन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को भारत की ओर से समर्थन देने की घोषणा भी की गई, जो तीन वर्षों में 10 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेगा और शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को मजबूती प्रदान करेगा। सूत्रों के अनुसार, जॉर्डन यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी इथियोपिया जाएंगे। जिससे पश्चिम एशिया और अफ्रीका में रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध सुदृढ़ होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:36:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अक्षय ऊर्जा असीम शक्ति, स्वच्छ भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[पृथ्वी पर ऊर्जा के परम्परागत साधन बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/renewable-energy-immense-power-clean-future/article-124495"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>पृथ्वी पर ऊर्जा के परम्परागत साधन बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, ऐसे में खतरा मंडरा रहा है कि यदि ऊर्जा के इन पारम्परिक स्रोतों का इसी प्रकार दोहन किया जाता रहा, तो इन परम्परागत स्रोतों के समाप्त होने पर गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। यही कारण है कि पूरी दुनिया में गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जाने लगी और इसी कारण अक्षय ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति करने के प्रयास शुरू हुए। अक्षय का अर्थ है, जिसका कभी क्षय न हो अर्थात् अक्षय ऊर्जा वास्तव में ऊर्जा का असीम और अनंत विकल्प है और आज के समय में यह किसी भी राष्ट्र के अक्षय विकास का प्रमुख स्तंभ भी है। पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए ऐसी ऊर्जा तथा तकनीकें विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे ग्लोबल वार्मिंग की विकराल होती समस्या से दुनिया को कुछ राहत मिल सके। किसी भी राष्ट्र को विकसित बनाने के लिए आज प्रदूषणरहित अक्षय ऊर्जा स्रोतों का समुचित उपयोग किए जाने की आवश्यकता भी है।</p>
<p><strong>प्राकृतिक संसाधन :</strong></p>
<p>आज न केवल भारत में बल्कि समूची दुनिया के समक्ष बिजली जैसी ऊर्जा की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं, साथ ही पर्यावरण असंतुलन और विस्थापन जैसी गंभीर चुनौतियां भी हैं। गंभीर समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा ही एक ऐसा बेहतरीन विकल्प है, जो पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के साथ ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में भी कारगर साबित होगी, लेकिन अक्षय ऊर्जा की राह में भी कई चुनौतियां मुंह बाये सामने खड़ी हैं। अक्षय ऊर्जा उत्पादन की देशभर में कई छोटी-छोटी इकाईयां हैं, जिन्हें एक ग्रिड में लाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इससे बिजली की गुणवत्ता प्रभावित होती है। भारत में अक्षय ऊर्जा के विविध स्रोतों का अपार भंडार मौजूद है, लेकिन इनसे ऊर्जा उत्पादन करने वाले अधिकांश उपकरण विदेशों से आयात किए जाते हैं।</p>
<p><strong>ऊर्जा की मांग :</strong></p>
<p>देश में ऊर्जा की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर भी तेजी से बढ़ रहा है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 450 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जिसमें अब 230 गीगावॉट से अधिक अक्षय ऊर्जा से प्राप्त हो रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो-पावर और छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अधिक बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं से तथा परमाणु ऊर्जा से भी अक्षय ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। कुल बिजली उत्पादन में अब अक्षय ऊर्जा का हिस्सा अब लगातार बढ़ रहा है, जो भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करता है। वर्ष 2040 तक भारत में ऊर्जा की कुल मांग वर्तमान की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाएगी। विशेषकर बिजली तथा ईंधन के रूप में उपभोग की जा रही ऊर्जा की मांग घरेलू एवं कृषि क्षेत्र के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रही है।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण स्रोत :</strong></p>
<p>औद्योगिक क्षेत्रों में ही बिजली तथा पैट्रोलियम जैसे ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोतों का लगभग 55 प्रतिशत उपभोग किया जाता है। हम जिस बिजली से अपने घरों, दुकानों या दफ्तरों को रोशन करते हैं, जिस बिजली या पैट्रोलियम इत्यादि ऊर्जा के अन्य स्रोतों का इस्तेमाल कर देश को विकास के पथ पर अग्रसर किया जाता है, क्या हमने कभी सोचा है कि वह बिजली या ऊर्जा के अन्य स्रोत हमें कितनी बड़ी कीमत पर हासिल होते हैं, यह कीमत न केवल आर्थिक रूप से बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी धरती पर विद्यमान हर प्राणी पर बहुत भारी पड़ती है। दुनियाभर में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन बिजली उत्पादन से ही होता है। यही कारण है कि अब सौर ऊर्जा तथा पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों को विशेष महत्व दिया जाने लगा है।</p>
<p><strong>ग्रीन हाइड्रोजन मिशन :</strong></p>
<p>भारत में अब ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्मार्ट ग्रिड, बैटरी स्टोरेज और इलैक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे कदम भी तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं, जो अक्षय ऊर्जा को व्यावहारिक और टिकाऊ बनाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि निर्यातक देश भी बन सकेगा। सही मायने में अक्षय ऊर्जा ही आज भारत में विभिन्न रूपों में ऊर्जा की जरूरतों का प्रमुख विकल्प है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ टिकाऊ भी है। भारत धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और आज समय है कि हम आर्थिक बदहाली और भारी पर्यावरणीय विनाश की कीमत पर ताप, जल एवं परमाणु ऊर्जा जैसे पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय अपेक्षाकृत बेहद सस्ते और कार्बन रहित पर्यावरण हितैषी ऊर्जा स्रोतों के व्यापक स्तर पर विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ें हैं।</p>
<p><strong>-योगेश कुमार गोयल</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 12:32:56 +0530</pubDate>
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