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                <title> technology - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आधुनिक चिकित्सा से सशक्तीकरण की ओर</title>
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                        <![CDATA[प्रतिवर्ष 25 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय कॉक्लियर इम्प्लांट दिवस मनाया जाता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/from-modern-medicine-to-empowerment/article-144513"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)4.png" alt=""></a><br /><p>प्रतिवर्ष 25 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय कॉक्लियर इम्प्लांट दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना है। यह दिन चिकित्सा इतिहास की एक ऐतिहासिक उपलब्धि की याद दिलाता है। दरअसल, 25 फरवरी 1957 को फ्रांसीसी चिकित्सक ने विश्व का पहला सफल कॉक्लियर इम्प्लांट प्रत्यारोपित किया था। उस समय यह एक प्रयोगात्मक प्रयास था, किंतु आज यह तकनीक लाखों लोगों के जीवन में नई ध्वनि, नई आशा और नया आत्मविश्वास भर रही है। कॉक्लियर इम्प्लांट एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे शल्य चिकित्सा के माध्यम से कान के भीतरी भाग कोक्लिया में स्थापित किया जाता है। सामान्यतः ध्वनि तरंगें कान के पर्दे से होकर मध्य कान के जरिए आंतरिक कान तक पहुंचती हैं और वहां से श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक संदेश पहुंचता है। किंतु जिन लोगों में आंतरिक कान की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं, उनके लिए साधारण हियरिंग एड पर्याप्त नहीं होते। ऐसे में कॉक्लियर इम्प्लांट सीधे श्रवण तंत्रिका को विद्युत संकेतों द्वारा उत्तेजित करता है, जिससे व्यक्ति ध्वनि का अनुभव कर पाता है।</p>
<p><strong>दिवस का प्रमुख उद्देश्य : </strong></p>
<p>इस दिवस का एक प्रमुख उद्देश्य समाज में प्रचलित मिथकों को तोड़ना भी है। अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि जन्मजात मूक-बधिर बच्चे कभी सुन या बोल नहीं सकते। जबकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है कि समय पर पहचान और उचित हस्तक्षेप से यह संभव है। कॉक्लियर इम्प्लांट केवल एक चिकित्सकीय उपकरण नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण का माध्यम है। यह प्रभावित व्यक्ति को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सहभागिता के अवसर प्रदान करता है। इस दिवस के माध्यम से सरकारों और स्वास्थ्य संस्थाओं का ध्यान भी इस दिशा में आकृष्ट किया जाता है कि यह तकनीक अधिक से अधिक लोगों के लिए सुलभ और किफायती बने। वर्तमान समय में श्रवण हानि एक गंभीर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्वभर में लगभग 43 करोड़ लोग मध्यम से गंभीर श्रवण हानि से प्रभावित हैं, जिनमें करोड़ों बच्चे शामिल हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वर्ष 2050 तक यह संख्या 70 करोड़ से अधिक हो सकती है।</p>
<p><strong>डब्ल्यूएचओ की वैश्विक रिपोर्ट :</strong></p>
<p>डब्ल्यूएचओ की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक लगभग 2.5 अरब लोग किसी न किसी स्तर की श्रवण क्षति का सामना कर सकते हैं। इसका अर्थ है कि प्रत्येक चार में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित हो सकता है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि इस दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। भारत में भी श्रवण संबंधी समस्याएं व्यापक हैं। अनुमानतः 6 से 7 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की श्रवण अक्षमता से जूझ रहे हैं। प्रतिवर्ष लगभग 27,000 से अधिक बच्चे जन्मजात बधिरता के साथ जन्म लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और आर्थिक सीमाएं इस समस्या को और जटिल बना देती हैं। हालांकि भारत सरकार द्वारा नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग, टीकाकरण कार्यक्रम और सहायक उपकरणों की उपलब्धता के प्रयास किए जा रहे हैं, फिर भी व्यापक स्तर पर जागरूकता और संसाधनों की आवश्यकता बनी हुई है।</p>
<p><strong>सामाजिक और शैक्षिक प्रभाव :</strong></p>
<p>श्रवण बाधा केवल सुनने की क्षमता तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के सामाजिक, शैक्षिक और भावनात्मक विकास को भी प्रभावित करती है। सुनने में कठिनाई के कारण बच्चों में भाषा विकास बाधित होता है, जिससे शिक्षा में पिछड़ने की आशंका बढ़ जाती है। वयस्कों के लिए यह रोजगार और सामाजिक संबंधों में अवरोध उत्पन्न कर सकती है। अक्सर श्रवण बाधित व्यक्ति आत्मविश्वास की कमी, सामाजिक अलगाव और मानसिक तनाव का अनुभव करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि समाज सहानुभूति के साथ-साथ सहयोग और समावेशी दृष्टिकोण अपनाए। श्रवण हानि के निवारण और सुधार के लिए समय पर पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल, नवजात शिशुओं की सुनने की जांच, नियमित टीकाकरण और कान के संक्रमण का समय पर उपचार कई मामलों में श्रवण हानि को रोक सकता है।</p>
<p><strong>तेज ध्वनि और प्रदूषण से बचाव :</strong></p>
<p>तेज ध्वनि और प्रदूषण से बचाव भी अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक ऊंची आवाज़ में संगीत सुनना या औद्योगिक शोर के संपर्क में रहना श्रवण क्षमता को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। जिन व्यक्तियों को श्रवण हानि है, उनके लिए हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट, स्पीच थेरेपी और सांकेतिक भाषा अत्यंत उपयोगी साधन हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यदि समय पर उचित हस्तक्षेप किया जाए तो अनेक मामलों में श्रवण हानि को रोका या कम किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण है नवजात शिशुओं की अनिवार्य स्क्रीनिंग। जन्म के तुरंत बाद श्रवण जांच से समस्या की शीघ्र पहचान संभव है, जिससे प्रारंभिक अवस्था में उपचार शुरू किया जा सके। यही कदम बच्चे के भविष्य को संवार सकता है। अंतरराष्ट्रीय कॉक्लियर इम्प्लांट दिवस हमें यह संदेश देता है कि आधुनिक विज्ञान ने श्रवण अक्षमता को एक असाध्य बाधा से उपचार योग्य स्थिति में परिवर्तित कर दिया है। आज आवश्यकता केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि सशक्तीकरण की है। सही समय पर पहचान, आधुनिक तकनीक का उपयोग श्रवण बाधित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में स्थापित कर सकते हैं।</p>
<p><strong>-सुनील कुमार महला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/from-modern-medicine-to-empowerment/article-144513</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 12:12:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>इलाज के दौरान जांच पर्चियां संभालने की नहीं होगी जरूरत : चिप से हो सकेगा परिवार नियोजन, इस साल हैल्थ सुविधाएं होंगी आधुनिक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जयपुर में नए साल 2026 से प्रदेश को हाईटेक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। आभा आईडी से मेडिकल हिस्ट्री ऑनलाइन होगी। महिलाओं के लिए तीन साल तक असरदार गर्भनिरोधक चिप, रोबोटिक सर्जरी, भ्रूण जांच, आयुष्मान योजना की देशभर में पोर्टेबिलिटी और गर्भवती महिलाओं के लिए एक डोज एनिमिया इंजेक्शन की सुविधा शुरू होगी।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-will-be-no-need-to-handle-test-slips-during/article-138417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नया साल-2026 में प्रदेशवासियों को हाईटेक चिकित्सा सुविधा की सौगात मिलने जा रही है। आईटी, एआई, साइंन्टिफिक टैक्नोलॉजी से इलाज की सहूलियतें जमीनी स्तर पर लागू होंगी। आभा आईडी बनाकर पूरी आबादी को जोड़ने का काम कुछ माह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद हर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री आॅनलाइन रहेगी। जनाधार कॉर्ड की तरह जनरेट होने वाले आईडी नंबर से उसकी सारी मेडिकल हिस्ट्री ऑनलाइन ही खुल जाएगी। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाते वक्त बनने वाली पर्ची, जांच रिपोर्ट, बीमारियों का सारा डेटा यहां मौजूद रहेगा। इससे मरीज को पुरानी पर्चियां संभाल कर रखने और अस्पताल लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल इन्हें आईडी पर अपलोड करेंगे। डॉक्टर ऑनलाइन मेडिकल हिस्ट्री चेक कर लेंगे।</p>
<p><strong>चिप से तीन साल तक गर्भधारण नहीं होगा : </strong>परिवार नियोजन को महिलाओं को कॉपर टी, नसबंदी, आॅपरेशन या गोलियां इत्यादि की जरुरत नहीं पड़ेगी। एक चार सेंटीमीटर लंबी और दो मिलीमीटर चौड़ी मेडिकल इम्पेलेनोन चिप महिला के बाजू में त्वचा के नीचे इंजेक्ट कर दी जाएगी। इटेनोजेस्ट्राल दवा की यह चिप महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन स्रावित करेगी, इससे अंडकोष में अंडे नहीं बनेंगे और गर्भ नहीं ठहरेगा। तीन साल तक यह असरकारक रहेगी। जरुरत पर महिलाएं इसे हटाकर गर्भधारण भी कर सकेंगी। परिवार नियोजन कार्यक्रम में अस्पताल में यह चिप निशुल्क रूप से महिलाओं के लगाई जाएगी। इसका ट्रायल राजस्थान में बीते साल जयपुर के महिला चिकित्सालय में शुरू हो भी चुका है, अब तक करीब 10 हजार महिलाओं को इसे लगाया भी जा चुका है।</p>
<p><strong>प्रदेशभर में हो सकेगी रोबोट से सर्जरी : </strong>प्रदेश में टेली रोबोटिक सर्जरी अब सौ फीसदी सक्सेस रेट के साथ ऑपरेशन करने की ओर है। आगामी कुछ माह में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी से एसएमएस मेडिकल कॉलेज के बेहतरीन डॉक्टर यहीं से प्रदेश के अन्य अस्पतालों में रोबोट से सर्जरी कर सकेंगे। अभी एसएमएस अस्पताल में दो, जोधपुर मेडिकल कॉलेज में एक रोबोट है। अजमेर, बीकानेर, उदयपुर में खरीदें जा रहे हैं। जयपुर में बनने वाले आधुनिक कमांड सेंटर से डॉक्टर इन अस्पतालों में रोबोट से बड़े ऑपरेशन करेंगे।</p>
<p><strong>भ्रूण की जांच से बीमारियां पता चल जाएंगी :   </strong></p>
<p>जेके लोन अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स खुल चुका है। यहां गर्भ में ही भू्रण की जांच और बीमारियों का पता करने की सुविधा तेजी से विकसित हो रही है। भविष्य की बीमारियों का पता गर्भ में ही चल जाएगा। भ्रूण की जांच 10-14 सप्ताह में महिला चिकित्सालय में फीटल मेडिसिन डिवीजन के जरिये कराई जा सकेगी। इसके लिए यहां करीब एक करोड़ की लागत से एडवांस सोनोग्राफी मशीन लगेगी। गंभीर जेनेटिक्स बीमारियों का इलाज जेके लोन में होगा। लाइलाज बीमारी होने पर भू्रण को एबॉर्ट कराया जा सकेगा।</p>
<p><strong>पोर्टेबिलिटी स्कीम से देशभर में निशुल्क इलाज :</strong></p>
<p>सीएम आयुष्मान आरोग्य योजना में अभी प्रदेश में ही निशुल्क इलाज की सुविधा थी। अब स्कीम में पोर्टेबिलिटी लागू हो गई है। प्रदेश के स्कीम में बीमित परिवार अब देशभर के 30 हजार अस्पतालों में निशुल्क इलाज ले सकेंगे। योजना को पीएम जन आरोग्य योजना से इंटीग्रेट कर दिया गया है।</p>
<p><strong>गर्भवती के खून की कमी एक इंजेक्शन से पूरी होगी :</strong></p>
<p>30 फीसदी प्रग्नेंट महिलाओं में खून की कमी यानी एनिमिया होता है। प्रसव के दौरान इससे कई बार प्रसूता की जान चली जाती है। नवजात भी अस्वस्थ्य पैदा होता है। अब एफसीएम इंजेक्शन की एक ही डोज गर्भवती महिला में खून की कमी को दूर कर देगी। इसकी शुरूआत हो चुकी है। इस साल सेवाओं का विस्तार होने के बाद सरकारी स्तर पर सभी अस्पतालों में इसकी उपलब्धता होगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 14:08:53 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहे सेनाएं : जीत के लिए प्रौद्योगिकी और रणनीति में महारत जरूरी, राजनाथ सिंह ने कहा- तुरंत जवाब देकर ही अपना लोहा मनवा सकेंगी सेनाएं </title>
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                        <![CDATA[राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्धों की बढ़ती जटिलता और अनिश्चितता के मौजूदा दौर में केवल सैनिकों या हथियारों की संख्या ही पर्याप्त नहीं है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/forces-ready-for-a-long-battle-mastery-in-technology-and/article-124962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(630-x-400-px)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्धों की बढ़ती जटिलता और अनिश्चितता के मौजूदा दौर में केवल सैनिकों या हथियारों की संख्या ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, रणनीति और युद्ध के स्वरूप के अनुरूप तुरंत उसका जवाब देने में सक्षम सेनाएं ही अपना लोहा मनवा सकेंगी। उन्होंने देश और सेनाओं को लंबी लड़ाइयों के लिए तैयार रहने तथा इसके लिए जरूरी क्षमता और संसाधनों की उपलब्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के संयुक्त प्रयास पर निर्भर करेंगे। जो देश प्रौद्योगिकी, रणनीति और अनुकूलनशीलता के त्रिकोण में महारत हासिल कर लेगा वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित यान और उपग्रह-आधारित निगरानी भी भविष्य के युद्धों को आकार दे रही हैं। सिंह ने आर्मी वॉर कॉलेज में युद्ध, युद्धनीति और युद्ध-संघर्ष पर तीनों सेनाओं के अपनी तरह के पहले सेमिनार रण संवाद को संबोधित करते हुए प्रौद्योगिकी और चौंकाने वाली रणनीतियों के गठजोड़ को आधुनिक युद्ध की बढ़ती जटिलता तथा अनिश्चितता का मुख्य कारण बताया। उन्होंने नवाचारों और अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत पर बल देते हुए मौजूदा प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने पर भी जोर दिया ताकि समय के साथ आगे रहा जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने भविष्य के युद्धों की अनिश्चितता तथा निरंतर बदलते स्वरूप पर कहा कि आधुनिक युद्ध अब जमीन, समुद्र और हवा तक ही सीमित नहीं रहे अब वे अंतरिक्ष और साइबरस्पेस तक भी फैल गए हैं। उपग्रह प्रणालियाँ, उपग्रह-रोधी हथियार और अंतरिक्ष कमान केंद्र शक्ति के नए साधन हैं। आज हमें केवल रक्षात्मक तैयारी की ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीति की भी आवश्यकता है। भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे, वे प्रौद्योगिकी , खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का संयुक्त प्रयास होंगे। जो राष्ट्र तकनीक, रणनीति और युद्ध के स्वरूप के अनुरूप ढलने के त्रिकोण में महारत हासिल कर लेगा, वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह इतिहास से सीखने और एक नया इतिहास लिखने , भविष्य का अनुमान लगाने और उसे आकार देने का समय है।</p>
<p>सिंह ने जोर देकर कहा कि केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आकार अब पर्याप्त नहीं है, क्योंकि साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित हवाई वाहन और उपग्रह-आधारित निगरानी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं। उन्होंने सटीक निर्देशित हथियारों, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित सूचना को किसी भी संघर्ष में सफलता की आधारशिला बताया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका कोई अंत नहीं है और यह अनिश्चितता युद्ध के परिणामों को बदलने की ताकत रखती है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि जब तक हम एक नवाचार को पूरी तरह से समझ पाते हैं, तब तक दूसरा उभर आता है - जो युद्ध की दिशा को पूरी तरह से बदल देता है। मानवरहित हवाई वाहन, हाइपरसोनिक मिसाइलें, साइबर हमले और एआई-संचालित निर्णय लेने जैसे उपकरण आधुनिक संघर्षों में अप्रत्याशित मोड़ ला रहे हैं। आश्चर्य के इस तत्व की सबसे खास बात यह है कि अब इसका कोई स्थायी रूप नहीं रहा। यह बदलता रहता है, हमेशा अपने साथ अनिश्चितता लेकर चलता है। और यही अनिश्चितता विरोधियों को उलझा देती है, और अक्सर युद्ध के परिणाम में निर्णायक कारक बन जाती है।</p>
<p>सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रौद्योगिकी संचालित युद्ध का असाधारण उदाहरण बताते हुए कहा कि इसमें भारत ने युद्ध का मैदान और उसके नियम तय किये तथा दुश्मन को उसके लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में जो भी देश युद्ध का मैदान तय करता है, वही खेल और उसके नियमों को नियंत्रित करता है, और दूसरों के पास अपनी पसंद के विपरीत शर्तों पर प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। हमारा प्रयास युद्ध के मैदान और खेल के नियमों को स्वयं निर्धारित करना होना चाहिए, जिससे विरोधी को वहाँ लडऩे के लिए मजबूर किया जा सके, ताकि बढ़त हमेशा हमारे पास रहे।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 17:41:34 +0530</pubDate>
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                <title>AI और टेक्नोलॉजी का कमाल : दुबई में नया स्मार्ट पुलिस स्टेशन शुरू, मिलेगी 24x7 डिजिटल सेवा</title>
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                        <![CDATA[ दुबई के डैगन मार्ट इलाके में हाल ही में एक नया स्मार्ट पुलिस स्टेशन खोला गया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ai-and-technology-kamal-will-start-a-new-smart-police/article-124623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)42.png" alt=""></a><br /><p>दुबई। दुबई के डैगन मार्ट इलाके में हाल ही में एक नया स्मार्ट पुलिस स्टेशन खोला गया है। यह केंद्र पूरी तरह से डिजिटल और स्वचालित है, जहां किसी भी प्रकार के मानवीय कर्मचारी मौजूद नहीं रहते। यह स्टेशन नागरिकों को 45 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराता है और खास बात यह है कि इन्हें 7 भाषाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p>डिजिटल टेक्नोलॉजी पर आधारित यह सिस्टम लोगों को सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक सेवाएं प्रदान करता है। चाहे दिन हो या रात, यह सुविधा हमेशा उपलब्ध रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल दुबई की स्मार्ट सिटी और डिजिटल क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे नागरिकों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे, साथ ही पुलिस सेवाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 18:15:41 +0530</pubDate>
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