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                <title>सर्किट हाउस में बिराजे हैं संकटमोचन गणेशनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[125 साल पुरानी गणेश प्रतिमा, जहां वीआइपी भी नवाते हैं शीश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sankatmochan-ganeshnath-is-seated-in-the-circuit-house/article-124812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)65.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के प्रतिष्ठित सर्किट हाउस में स्थित एक ऐसा ऐतिहासिक मंदिर है, जो न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए भी आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में विराजमान संकटमोचन गणेशनाथ अब पूरे हाड़ौती क्षेत्र में वीआईपी गणेश या सर्किट हाउस गणेश के नाम से जानते है। मंदिर में स्थापित संकटमोचन गणेश प्रतिमा रियासती कालीन धरोहर है, श्रद्धालुओं के अनुसार यह गणेश मंदिर सवा सौ साल पुराना है। मंदिर के पुजारी नितेश शर्मा ने बताया कि रियासतकालीन दौर में बना यह मंदिर सर्किट हाउस परिसर में स्थित है, जो उस समय राजा-महाराजाओं का विश्रामगृह हुआ करता था। मंदिर परिसर में स्थित चबूतरे को उस समय संकटमोचन गणेशनाथ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ सर्किट हाउस और मंदिर दोनों का स्वरूप बदला, लेकिन भगवान गणेश के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उतनी ही अडिग है, जितने प्राचीनकाल में हुआ करती थी। वहीं वर्षों से गणेश मंदिर आ रहे टीकाराम गुर्जर गणेशजी के अनन्य भक्त है। वे हमेशा मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोगी की भूमिका निभाते है। </p>
<p><strong>वीआइपी गणेश मंदिर में लगाते हंै धोक</strong><br />सर्किट हाउस में रुकने वाले सभी उच्च पदस्थ अधिकारी—जैसे मजिस्ट्रेट, कलक्टर, एसपी, आइजी, मंत्री और विधायक—मंदिर में हाजिरी लगाना नहीं भूलते। यही कारण है कि इस गणेश प्रतिमा को वीआईपी गणेश कहा जाता है। इस मंदिर की ख्याति अब कोटा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। देश-विदेश से भी वीआइपी गणेश में हर चतुर्थी पर धोक लगाते आते हैं। यूएसए निवासी प्रियंका  इस बार गणेश चतुर्थी पर सवामणी भी करवा रही है। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें उनकी आस्था और श्रद्धा का प्रमाण दे रही है। वर्तमान में संकटमोचन गणेश अब सर्किट हाउस वाले गणेश या वीआईपी गणेश के नाम से जाने जाते है।</p>
<p><strong>एक सौ पच्चीस साल पहले बाढ़ में बहकर आई थी प्रतिमा</strong><br />सर्किट हाउस परिसर में स्थित ऐतिहासिक वीआइपी गणेश मंदिर की जानकारी देते हुए  पुजारी नितेश शर्मा ने बताया कि यह प्रतिमा वर्षों पहले भीषण बाढ़ में बहकर एरोड्रम वाले क्षेत्र में आई थी, जहां मेरे दादाजी ग्यारसीलाल ने इसे लाकर एक चबूतरे पर स्थापित किया। उन्होंने कहा कि पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जहां अब मंदिर है, वहां पहले से एक चबूतरा था, जहां संकटमोचन गणेशनाथ की प्रतिमा स्थापित थी।  किंवदंती है कि एक बार विश्राम गृह परिसर में मैनेजर के बच्चे की तबीयत खराब हो गई थी। इस पर उन्होंने गणेशनाथ प्रतिमा को हटवाने की कोशिश की थी  लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से हिल नहीं पाई।  इसके बाद उन्होंने वहीं एक छोटा मंदिर बनवाया और संकटमोचन गणेशनाथ प्रतिमा यथावत स्थापित रही।</p>
<p><strong>11 प्रकार के लड्डुओं से लगेगा भोग </strong><br />27 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता घर-घर विराजेंगे। वहीं सर्किट हाउस अर्थात वीआइपी गणेश पूजन का मुख्य कार्यक्रम सुबह 7:30 बजे शुरू होगा। सुबह सवा सौ किलो दूध से पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। उसके बाद गणेश प्रतिमा का स्वर्ण शृंगार किया जाएगा। वहीं मंदिर में हवन भी होगा। इस बार गणेश चतुर्थी पर 11 प्रकार के लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इस दौरान 1600 किलो लड्डु बनाए जाएंगे। जिनमें पांच सौ किलो दूध, 280 किलो बेसन, 5 क्विंटल शक्कर तथा सवा सौ किलो ड्राय फ्रुट तथा 20 पीपे देशी घी के उपयोग में लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Aug 2025 16:03:27 +0530</pubDate>
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