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                <title>Tariff Policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Tariff Policy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राट्रपति ट्रंप का बड़ा ऐलान: नहीं देना होगा अमेरिकी नागरिकों को टैक्स, जानें क्या है सरकार का पूरा प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप की संसद में घोषणा। टैरिफ राजस्व से अमेरिका इतना समृद्ध होगा कि नागरिकों को इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट की आपत्तियों के बावजूद, ट्रंप ने 1870-1913 के स्वर्ण युग का हवाला देते हुए टैरिफ को आर्थिक मजबूती और कर-मुक्त भविष्य का मुख्य आधार बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-president-trumps-big-announcement-american-citizens-will-not-have/article-144540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिकी संसद के संयुक्त पत्र को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भले ही उनकी तरफ से दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया हो, लेकिन भविष्य में अमेरिका और उसके नागरिकों को इससे इतना फायदा होगा की देश में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को टैक्स देने की जरूरत नहीं होगी। डोनाल्ट ट्रंप ने दावा करते हुए कहा कि टैरिफ राजस्व से अमेरिका की आर्थिक स्थिति इतनी अधिक मजबूत हो जाएगी की नागरिकों से सिर से टैक्स का बोझ पूरी तरह से हट जाएगा।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने पुराने दौर का जिक्र किया और कहा कि साल 1870 से 1913 तक अमेरिका मुख्य रूप से टैरिफ से चलता था और यही कारण है कि उस समय अमेरिका दुनिया का सबसे अमीर देश हुआ करता था। बता दें कि ट्रंप का ये बयान ऐसे समय में आया है जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया था और कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी शक्तियों का नाजायज इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 13:16:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या रद्द हो सकता है भारत अमेरिका व्यापार समझौता? व्हाहट हाउस ने दी चेतावनी, कहा-रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने कहा, भारत ने नए समझौते में रूस से कच्चा तेल न लेने, अमेरिका से अधिक तेल खरीदने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जताई बताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/can-india-us-trade-agreement-be-cancelled-white-house-warns-says/article-141924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने बुधवार को दावा किया कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए नये समझौते के तहत रूस से कच्चा तेल न लेने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने का निर्णय लिया है। </p>
<p>व्हाइट हाउस की मीडिया सचिव कैरोलाइन लेविट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सीधी बातचीत के बाद भारत ने यह प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा, जैसा कि आप सब ने देखा, राष्ट्रपति (ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बेहतरीन सौदा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीधे बात की। उन दोनों का रिश्ता बहुत मजबूत है। लेविट ने कहा, भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदने का वादा किया है, बल्कि अमेरिका से भी तेल खरीदने का वादा किया है, और शायद वेनेजुएला से भी। इसका सीधा फ़ायदा अमेरिका और अमेरिकी लोगों को होगा।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश का वादा किया है। लेविट ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों जैसे सेक्टर शामिल हैं। उन्होंने कहा, यह राष्ट्रपति की वजह से एक और शानदार व्यापारिक समझौता है।</p>
<p>उन्होंने अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति और व्यापार रणनीति को श्रेय दिया। प्रशासन की आयात नीति का बचाव करते हुए, लेविट ने कहा कि इससे पहले ही ठोस आर्थिक फ़ायदे मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति की आयात शुल्क नीति काम कर रही है और उनका आर्थिक एजेंडा काम कर रहा है। पूरे अमेरिका में नयी फ़ैक्ट्री परियोजनाओं की वजह से निर्माण से जुड़ी नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है। वे फ़ैक्ट्रियां यहीं अमेरिका में बन रही हैं, और हम अमेरिकियों को काम दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:59:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्र के नाम संदेश, 'टैरिफ' के फायदों सहित अपनी आर्थिक उपलब्धियों को गिनाया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में आर्थिक सुधारों और आव्रजन नियंत्रण को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने महंगाई के लिए बाइडन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और सैनिकों के लिए ‘वॉरियर डिविडेंड’ भुगतान की घोषणा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-donald-trumps-message-to-the-nation-enumerated-his/article-136394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/trump-and-biden-disput.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम एक टेलीविजन संबोधन में अपने प्रशासन की आर्थिक और आव्रजन संबंधी उपलब्धियों की सराहना की, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों को लेकर पूर्ववर्ती बाइडन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सामानों की लागत कम करने, प्रवासियों के प्रवाह को रोकने और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के अपने रिकॉर्ड का जिक्र किया । इसके  साथ ही उन्होंने 'अमेरिकी इतिहास की सबसे परिवर्तनकारी आवास सुधार पहलों' में से कुछ की घोषणा भी की।</p>
<p>राष्ट्रपति ने 14.5 लाख अमेरिकी सैनिकों के लिए 1,776 डॉलर के 'वॉरियर डिविडेंड' भुगतान की घोषणा की। इसके लिए आंशिक रूप से धन उनके द्वारा लगाए गए आयात शुल्क से प्राप्त राजस्व से आएगा। उन्होंने कहा कि कुल 2.57 बिलियन डॉलर का यह भुगतान राष्ट्र की स्थापना के सम्मान में दिया जाएगा। उम्मीद है कि ये चेक क्रिसमस से पहले प्राप्तकर्ताओं तक पहुंच जाएंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, पिछले 11 महीनों में, हम अमेरिकी इतिहास के किसी भी प्रशासन की तुलना में अधिक सकारात्मक बदलाव लाए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और मुझे लगता है कि अधिकांश लोग इससे सहमत होंगे। राष्ट्रपति ने आर्थिक सुधार के प्रमाण के रूप में पेट्रोल, अंडे, हवाई किराए और होटल की दरों में गिरावट का उल्लेख किया, जबकि जारी महंगाई के लिए पिछले प्रशासन की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, अब, हमारे नेतृत्व में कीमतें कम हो रही हैं और बहुत तेजी से कम हो रही हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रिकॉर्ड विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों के खुलने और नौकरियों के सृजन पर भी जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रशासन के शुल्क ने कंपनियों को विदेशों के बजाय अमेरिका में निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, कंपनियां जानती हैं कि यदि वे अमेरिका में निर्माण करती हैं, तो कोई शुल्क नहीं लगेगा। यही कारण है कि वे रिकॉर्ड संख्या में अमेरिका वापस आ रही हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा, यहाँ अपने देश में, हम अपनी अर्थव्यवस्था को बर्बादी की कगार से वापस ला रहे हैं। पिछले प्रशासन और कांग्रेस में उनके सहयोगियों ने हमारे खजाने से खरबों डॉलर लूटे, जिससे कीमतें ऐसे स्तर पर पहुंच गईं जो पहले कभी नहीं देखी गईं। मैं उन ऊंची कीमतों को नीचे ला रहा हूं और बहुत तेजी से नीचे ला रहा हूं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, मैंने पहले ही अमेरिका में रिकॉर्ड तोड़ 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश सुरक्षित कर लिया है, जिसका अर्थ है नौकरियां, वेतन वृद्धि, विकास, फैक्ट्रियों का खुलना और कहीं अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा। इस सफलता का बड़ा हिस्सा'टैरिफ', जो मेरा पसंदीदा शब्द है, के माध्यम से हासिल किया गया है, जिसका दशकों तक अन्य देशों द्वारा हमारे खिलाफ सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। लेकिन अब और नहीं। उनके इस भाषण का अधिकांश हिस्सा पहले बतायी गयी उपलब्धियों का दोहराव था, लेकिन ट्रंप ने इसे अगले साल के मध्यावधि चुनाव से पहले अपने प्रशासन की सफलताओं को प्रदर्शित करने के व्यापक प्रयास के रूप में पेश किया।</p>
<p>राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि नए आवास सुधार, आर्थिक लाभ और'वॉरियर डिविडेंड' भुगतान राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेंगे, अमेरिकी परिवारों का समर्थन करेंगे और सैनिकों का सम्मान करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि मंहगाई अभी भी कई अमेरिकियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, विशेष रूप से आवास, स्वास्थ्य देखभाल और बच्चों के देखभाल के क्षेत्रों में। उन्होंने इसके लिए अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति जो बाइडन और डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p>यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब वह आलोचनाओं के बीच अपने आर्थिक रिकॉर्ड का प्रचार करना जारी रखे हुए हैं और आगामी चुनावों से पहले मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 14:47:33 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की टैरिफ नीति से बदला माहौल</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह चीन के विदेश मंत्री वांग यी अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर आए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/trumps-tariff-policy-changed-the-atmosphere/article-124917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(7)24.png" alt=""></a><br /><p>पिछले सप्ताह चीन के विदेश मंत्री वांग यी अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर आए। उन्होंने सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर के 24 वें दौर की वार्ता में भाग लिया। इस सिलसिले में उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए अजीत डोभाल के साथ बैठक हुई। द्विपक्षीय संबंधों पर उनकी अपने समकक्ष एस.जयशंकर से बातचीत हुई। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले। उन्हें शंघाई सहयोग संगठन एससीओ में भाग लेने को आमंत्रित किया। कूटनीतिक गलियारों में वांग के इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों में नजदीकी आने और अन्य मसलों पर बनी सहमतियों को काफी सार्थक बताया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एससीओ की बैठक में भाग लेने 31 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर चीन जा रहे हैं। वांग से बातचीत दौरान प्रधानमंत्री ने चीन के साथ शांति और सौहार्द्र बनाए रखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंध वैश्विक शांति में महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>नजरिए में बदलाव :</strong></p>
<p>यही बात बाद में चीन की ओर से दोहराई गई कि भारत और चीन, वैश्विक विकास में डबल इंजन की भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। इसका सीधा मतलब चीन का भारत के प्रति अब नजरिए में बदलाव आता दिखाई दे रहा है। लेकिन चीन के पिछले इतिहास को ध्यान में रखते हुए भारत को निकटता बनाने के साथ पूरी तरह सतर्कता भी बरतनी होगी। इसकी प्रमुख वजह चीन का ऐतिहासिक रूप से भारत के प्रति अविश्सनीय व्यवहार रहा है। वर्ष1962 में भारत-चीन युद्ध हो या डोकलाम या गलवान सैन्य संघर्ष। अरुणाचल प्रदेश के गांवों के नामों को बदलकर अपना दावा ठोक रहा है। पाकिस्तान में रह रहे आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की कोशिशों और सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के भारतीय दावों का चीन लगातार विरोध करता आया है। तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे बड़े बांध का निर्माण कर रहा है।</p>
<p><strong>हथियारों की मदद :</strong></p>
<p>मई माह में पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ शुरू किए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने खुलकर न केवल पाकिस्तान को हथियारों की मदद की बल्कि उसका खुला समर्थन भी किया। भारत की आपत्ति के बावजूद पाकिस्तान में आर्थिक गलियारे का निर्माण कर रहा है। अब तो वह इसे अफगानिस्तान तक विस्तारित करने जा रहा है। हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अपने वर्चस्व को बढ़ाने और भारत की चारों ओर से घेराबंदी करने के उद्देश्य से म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश में बंदरगाहों निर्माण और बीआरआई योजनाओं में भारी पैमाने पर निवेश कर रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि भारत एक लंबे अर्से से चीन की सीपेक और बीआरआई योजनाओं का विरोध करता आया है। एशिया में दोनों देशों में आर्थिक, रक्षा आदि क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा का भाव भी पैदा हुआ है।</p>
<p><strong>हुई द्विपक्षीय वार्ता :</strong></p>
<p>खैर, वांग के ताजा दौरे दौरान हुई द्विपक्षीय वार्ता के क्रम में लिपुलेख पास, शिपकी ला पास और नाथुला पास से सीमाई व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति बनी। हालांकि इस पर नेपाल ऐतराज जाहिर कर रहा है। इसके अलावा भारत-चीन के मध्य सीधी उड़ान शुरू करने और नया एयर सर्विसेज एग्रीमेंट करने पर भी सहमति बनी। कैलाश, मानसरोवर यात्रा, वीजा ढील देने से जुड़े मुद्दे पर सहमति बनी। कोरोना महामारी के दौर में वर्ष 2019 दौरान दोनों देशों के मध्य सीधी उड़ानें बंद हो गई थीं। जो मासिक 500से अधिक उड़ान होती थीं। सालाना बारह लाख से अधिक यात्रियों का आवागमन होता था। फिर चाहे व्यापारी हों या छात्र वर्ग। वर्तमान में हांगकांग, सिंगापुर या दुबई होकर जाना पड़ता है। यात्रा में छह घंटे की बजाय दस घंटे लगते हैं।</p>
<p><strong>आश्वासन का भाव :</strong></p>
<p>चीन भारत को उर्वरकों, रेयर अर्थ मिनरल्स और सुरंगें खोदने वाली मशीनें देगा। बता दें चीन के पास रेयर अर्थ मिनरल्स का सत्तर फीसदी हिस्सा है। यह मिनरल्स ड्रोन, बैटरी स्टोरेज, रक्षा, उपग्रह, अंतरिक्ष तकनीक एवं इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होते हैं। फिलहाल इस पर सहमति की बजाय आश्वासन का भाव अधिक नजर आ रहा है। समझा जाता है इस संबंध में असली प्रगति प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के बाद ही पता चलेगी। वांग-डोभाल में सीमा विवाद को सुलझाने को लेकर हुई बातचीत में सीमा प्रबंधन वर्किंग ग्रुप बनाने, सीमा पर शांति बनाए रखने और डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया शुरू करने पर दोनों देशों में सहमति भी बनी। दोनों देश निवेश और व्यापार बढ़ाएंगे। अगले साल नदियों पर सहयोग बढ़ेगा। चीन आपात हाइड्रोहाइड्रोलॉजिकल सूचना देगा।</p>
<p><strong>भारत-चीन सीमा :</strong></p>
<p>मोदी सरकार भारत-चीन सीमा के समाधान के लिए वर्ष 2005 के राजनीतिक मानदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के समझौते पर आगे बढ़ने पर सहमत हुई। यदि ऐसा होता है तो नईदिल्ली चीनी सेना की ओर से किए गये अतिक्रमणों, गलवान संघर्षों और गतिरोध से आगे बढ़ सकती है। डोभाल ने कहा कि सीमाएं शांत हैं, लेकिन यह एहसास कराया कि स्थिर सीमा के बावजूद अन्य दीर्घकालिक समस्याएं संबंधों पर प्रभाव डालती रहेंगी। वांग की यह यात्रा ऐसे अवसर पर हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रैरिफ नीति के तहत भारत पर सर्वाधिक 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। जिससे दोनों देशों के बीच संबंध तनावग्रस्त बन गए हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी टैरिफ नीति :</strong></p>
<p>25 फीसदी टैरिफ और 25 फीसदी पेनल्टी बतौर लगाया गया। पेनल्टी इस बात की भारत रूस से तेल खरीद रहा है। इससे यूक्रेन के खिलाफ रूस की ओर से छेड़े गए युद्ध में मदद मिल रही है। इस बीच चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने भारत पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ नीति को गलत और धमकाने वाली बताया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत यात्रा दौरान स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच भले ही मतभेद हों, लेकिन कुछ साझा आपसी हित भी हैं, जो दोनों देशों को सहयोग के लिए प्रेरित करते हैं। भारत पर इसका असर कहीं ज्यादा पड़ रहा है। चीन भी इससे आशंकित है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर होना जरूरी हैं, लेकिन भारत को बेहद सतर्क रहना होगा।</p>
<p><strong>-महेश चंद्र शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/trumps-tariff-policy-changed-the-atmosphere/article-124917</link>
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                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 12:14:53 +0530</pubDate>
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