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                <title>certificate - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>पीयूसी पोर्टल के हो रहे सर्वर डाउन, सर्टिफिकेट बनाने में आ रही समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों की माने तो केंद्रीय परिवहन विभाग के पीयूसी पोर्टल के सर्वर को मेंटेन करने की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/puc-portal-server-is-down--there-is-a-problem-in-making-certificates/article-91823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। परिवहन विभाग की ओर से सभी प्रकार के कार्य आॅनलाइन माध्यम से किए जा रहे हैं। जिसमें आरसी रजिस्टेÑशन, लाइसेंस, टैक्स और अन्य कार्यो सहित वाहनों के प्रदूषण सर्टिफिकेट बनाने का कार्य भी आॅनलाइन माध्यम से ही किया जा रहा है। लेकिन आॅनलाइन माध्यम कभी कभी मुसीबत भी बन जाता है। जहां इसके सर्वर डाउन होने के समय पर किसी तरह के कार्य करने का कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ दिनों से प्रदूषण सर्टिफिकेट के पोर्टल के साथ हो रहा है। जहां बार बार इसके सर्वर डाउन हो जा रहे हैं।</p>
<p><strong>पिछले कई दिनों से हो रहे सर्वर डाउन</strong><br />केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग विभाग की ओर से चलाए जा रहे पीयूयूसीसी पोर्टल पर कई दिनों से बार बार सर्वर डाउन होने की स्थिति सामने आ रही है। जिसके चलते कई वाहन चालक अपने वाहन का पीयूसीसी सर्टिफिकेट नहीं बनावा पा रहे हैं। कोटा में करीब 20 प्रदूषण जांच केंद्र मौजूद हैं, इन सभी में आए दिन सर्वर डाउन रहने की घटना सामने आती रहती है। ऐसे में वाहन चालकों को तो परेशानी होती ही है, साथ ही विभाग को भी राजस्व का नुकसान होता है। हालांकि सर्वर ठीक भी हो जाते हैं। लेकिन सर्वर के बार बार खराब होने से वाहनों चालकों का समय भी बर्बाद होता है।</p>
<p><strong>निजी कंपनी के पास है सर्वर की जिम्मेदारी</strong><br />सूत्रों की माने तो केंद्रीय परिवहन विभाग के पीयूसी पोर्टल के सर्वर को मेंटेन करने की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास है। वहीं कई बार आवेदन ज्यादा होने के कारण सर्वर पर ट्रैफिक बढ़ जाता है जिससे क्रेश होने की स्थिति में सर्वर डाउन हो जाते हैं। विभाग के अनुसार सर्वर की समस्या के लिए केंद्रीय विभाग को अवगत कराया हुआ है। जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति ना हो।</p>
<p><strong>लोगों का कहना हैह्ण</strong><br />मेरी कार का प्रदूषण सर्टिफिकेट बनान था, जिसके लिए मुझे सात दिन से ज्यादा समय लग गया। क्योंकि जब भी पीयूसी वाले के पास जाते तो सर्वर डाउन होने की बात कहता। कई बार दूसरे केंद्र पर भी गए लेकिन वही समस्या मिली।<br /><strong> - महावीर शर्मा, आरकेपुरम</strong></p>
<p>चौपहिया वाहनों के लिए प्रदूषण सर्टिफिकेट होना जरूरी है, नहीं होने पर चालान बन जाता है। लेकिन कई बार वेबसाइट के नहीं चलने के कारण समय पर सर्टिफिकेट नहीं बन पाता और ट्रैफिक पुलिस वाले यह बात नहीं मानते। सर्वर को ठीक से चलाए रखने की जिम्मेदारी विभाग की है।<br /><strong>- जितेंद्र नाथवत, रायपुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पीयूसीसी पोर्टल के सर्वर डाउन होने की जानकारी नहीं है, आपके माध्यम से ही प्राप्त हो रही है। कई बार ज्यादा ट्रैफिक होने से पोर्टल डाउन हो जाता है उसे री-स्टोर कर लिया जाता है। अभी समस्या होगी तो उसे दूर करेंगे।<br /><strong>- दिनेश सिंह सागर, आरटीओ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Sep 2024 15:03:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ई आरसी सर्टिफिकेट व्यवस्था होगी शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[ई-डीएल और ई-आरसी का प्रिंट प्राप्त करने के लिए सभी परिवहन कार्यालयों में ई मित्र प्लस मशीन भी लगाई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/e-rc-certificate-system-will-be-start/article-72546"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परिवहन विभाग प्रदेश में एक अप्रैल से ई-ड्राइविंग लाइसेंस (ई-डीएल) और ई-पंजीयन प्रमाण पत्र (ई-आरसी) की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके अतंर्गत आवेदक को ड्राइविंग लाइसेन्स और वाहन पंजीयन से संबंधित किसी भी सेवाओं के लिए स्मार्ट कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे। आवेदकों को 200 रुपए स्मार्ट कार्ड शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा। ई-डीएल और ई-आरसी के आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस एवं वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र जारी करने के साथ ही एसएमएस से लिंक प्राप्त होगा, जिससे परिवहन सेवा सिटिजन पोर्टल के माध्यम से ई-डीएल और ई-आरसी घर बैठे ही प्रिंटेबल पीडीएफ फॉरमेट में आवेदक को उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<p>ई-डीएल और ई-आरसी का प्रिंट प्राप्त करने के लिए सभी परिवहन कार्यालयों में ई मित्र प्लस मशीन भी लगाई जा रही है। इसके अलावा प्रिंट किसी भी ई मित्र केन्द्र से निर्धारित शुल्क का भुगतान कर प्राप्त कर सकेंगे। आवेदकों के स्मार्ट कार्ड फीस का भुगतान 31 मार्च तक करने पर उन्हें एक अप्रैल से जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र आॅनलाइन ही उपलब्ध होंगे। इनके आॅनलाइन भुगतान किए स्मार्ट कार्ड शुल्क को लौटाया जाएगा। पुलिस, परिवहन सहित अन्य अधिकृत जांच एजेसियों की तरफ से भी ये ई-डीएल और ई-आरसी मान्य होंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 11:30:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बिल्डिंग बायलॉज को लेकर सरकार सख्त, आसानी से नहीं मिलेगा कंप्लीशन सर्टिफिकेट</title>
                                    <description><![CDATA[बायलॉज के संबंधित प्रावधानों की पालना के बाद ही अधिवास प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा। दरअसल, अधिवास प्रमाण पत्र महज कुछ बिल्ड़िंगों के पास ही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-is-strict-regarding-building-bylaws-completion-certificate-will-not/article-71326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/663322-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरी क्षेत्रों में स्वतंत्र आवास के भवनों को छोड़कर अन्य सभी भवनों तथा फ्लैट्स व ग्रुप हाउसिंग के प्रोजेक्ट में सार्वजनिक उपयोग के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में शारीरिक रूप से विशेष योग्जन व्यक्ति के लिए मॉडल राजस्थान भवन विनियमों में प्रस्तावित प्रावधानों की पालना नहीं हो रही है। संबंधित एजेंसियों की ओर से सख्त पालना सुनिश्चित नहीं करवाने के लिए अब राज्य सरकार ने सख्ती का रवैया अपनाया है अर्थात भविष्य में विशेष योग्यजनों के लिए विशेष सुविधा के बाद ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। नगरीय विकास विभाग ने इस संबंध में प्राधिकरण, यूआईटी और निकायों को मॉडल राजस्थान भवन विनियम-2020 के विनियम संख्या-14 के तहत शारीरिक रूप से विशेष योग्यजन व्यक्तियों के लिए प्रावधानों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। </p>
<p>बायलॉज के संबंधित प्रावधानों की पालना के बाद ही अधिवास प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा। दरअसल, अधिवास प्रमाण पत्र महज कुछ बिल्ड़िंगों के पास ही है अर्थात बायलॉज के प्रावधानों में फायर सिस्टम के साथ ही अन्य नॉर्म्स की पालना शत प्रतिशत नहीं होने से डवलपर्स कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन नहीं करता हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2024 11:33:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान से विस्थापित 14 लोगों को मिली भारतीय नागरिकता </title>
                                    <description><![CDATA[जिला कलक्ट्रेट में 52 वर्षीय जयवंती भावुक हो गई, जब कई सालों के इंतजार के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाण-पत्र मिला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/certificate-give-of-the-14-displaced-peoples/article-68943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/untitled-1666-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पाकिस्तान से विस्थापित होकर वर्षों से भारत में रह रहे 14 लोगों का वर्षों का इंतजार समाप्त हो गया, जब जिला प्रशासन ने उनको भारतीय नागरिकता का प्रमाण-पत्र दिया। जिला कलक्ट्रेट में 52 वर्षीय जयवंती भावुक हो गई, जब कई सालों के इंतजार के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाण-पत्र मिला। </p>
<p>अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुफियान चौहान ने 14 पाकिस्तान विस्थापितों को नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे। इनमें जयवंती के साथ ही भरतराज, पूजा कुमारी, अक्षय कुमार, कंवल देवी, इन्द्रन को भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे गए। इस मौके पर सचानंद दास, हरीश कुमार, पारूल कुमारी, रोमिया कुमारी, राहुल कुमार, मुकुंद मिहिर शर्मा, कुनाल शर्मा के साथ-साथ मनोज कुमार को भी भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र सौंपा गया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Feb 2024 12:00:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>स्टेशनों को दिया ईट राइट स्टेशन सर्टिफिकेट</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे में खानपान सेवाओं की मानक गुणवत्ता के लिए अजमेर और अलवर स्टेशनों को चयनित कर सभी एफबीओ को सूचीबद्ध किया गया, जिसमें सभी एफबीओ के पास एफएसएसएआई खाद्य लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/eat-right-station-certificate-give-of-stations/article-39966"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/a-145.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर और अलवर स्टेशनों को एफएसएसएआई की ओर से ईट राइट स्टेशन का सर्टिफिकेट दिया गया है। कुछ समय पूर्व जयपुर रेलवे स्टेशन को राजस्थान के पहले ईट राइट स्टेशन का दर्जा मिला था। खाद्य सुरक्षा के नियमानुसार लगभग आठ माह से चरणबद्ध तरीके से जयपुर और अजमेर की एफएसएसएआई और उत्तर पश्चिम रेलवे की टीम इसके लिए प्रयासरत थे। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे में खानपान सेवाओं की मानक गुणवत्ता के लिए अजमेर और अलवर स्टेशनों को चयनित कर सभी एफबीओ को सूचीबद्ध किया गया, जिसमें सभी एफबीओ के पास एफएसएसएआई खाद्य लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन था। </p><p>स्टेशनों पर प्री ऑडिट चेक लिस्ट के अनुसार कमियों की जानकारी प्राप्त कर उन्हें दूर किया गया और सभी सुपरवाइजर्स एवं फूड हेंडलर्स को हाईजीन, स्वच्छता, न्यूट्रीशनल, फूड वैल्यू, टेम्परेचर मेंटेनेंस, हेल्दी एवं सीजनल फूड की उपलब्धता, किचन में प्रयोग किए गए खाद्य तेल का निस्तारण करने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देकर सभी को फोस्टेक प्रशिक्षण के सर्टिंफिकेट दिए। प्री-ऑडिट व फाइनल आॅडिट के बाद अजमेर व अलवर स्टेशन को ईट राइट स्टेशन का दर्जा दो वर्षों के लिए दिया गया है। इसके लिए प्रमुख मुख्य चिकित्सा निदेशक डॉ. पीके सामंतराय, संयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. लक्ष्मी मीना, खाद्य सुरक्षा अधिकारी जयपुर तरुण सैनी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजमेर मनोज कुमार सिन्हा और प्रधान कार्यालय फूड सेफ्टी टीम का विशेष योगदान रहा।</p><p><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Mar 2023 11:01:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शहर में रोजाना सवा सौ बच्चे ले रहे जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा इन हैल्प लाइन के माध्यम से इस साल के दस माह में करीब 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। इससे जाहिर है कि हर महीने करीब 35 सौ और रोजाना करीब सवा सौ बच्चों का जन्म हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/one-hundred-and-fifty-children-are-being-born-daily-in-the-city/article-29571"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/shahar-mei-rozana-sawa-sau-bachche-le-rahe-janam...kota-news-14.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में रोजाना करीब सवा सौ बच्चों का जन्म विभिन्न अस्पतालों में हो रहा है। दस माह में ही 35 हजार से अधिक बच्चे जन्ग ले चुके हैं। इसका प्रमाण है नगर निगम की हैल्प लाइन। जहां इस साल के दस माह में ही 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। नगर निगम द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ ही आमजन से जुड़े कार्यों को करने के लिए हैल्प लाइन बनाई हुई है। इस हैल्प लाइन के माध्यम से भी लोगों की हैल्प की गई है। कोटा में एक निगम होने से हैल्प लाइन भी एक ही थी। लेकिन दो निगम बनने के बाद कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण निगम की हैलप लाइन भी अलग-अलग कर दी गई। इस हैल्प लाइन के माध्यम से जन्म-मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र बनाने का काम किया जा रहा है।  नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा इन हैल्प लाइन के माध्यम से इस साल के दस माह में करीब 35 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। इससे जाहिर है कि हर महीने करीब 35 सौ और रोजाना करीब सवा सौ बच्चों का जन्म हुआ है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर से अधिक दक्षिण में जन्मे बच्चे</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में अधिक बच्चे जन्मे हैं। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर निगम में इस साल जनवरी से अक्टूबर तक 13 हजार 424 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए। जबकि कोटा दक्षिण निगम में इसी अवधि में 21 हजार 958  जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। </p>
<p><strong>जन्म की तुलना में मृत्यु एक तिहाई</strong><br />कोटा में इस साल के दस माह में जन्म होने वाले बच्चों की तुलना में मौत करीब एक तिहाई हुई है। इसकी पुष्टि निगम की हैल्प लाइन द्वारा जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र हैं। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा दस माह में कुल 13 हजार 200 मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए। जिनमें  कोटा उत्तर ने 3639 जबकि कोटा दक्षिण ने 9561 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए।  </p>
<p><strong>उत्तर से दोगुने विवाह पंजीयन दक्षिण में</strong><br />जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के साथ ही नगर निगम द्वारा विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र भी बनाए जा रहे हैं। इस साल दोनों निगमों ने हैल्प लाइन के माध्यम से कुल 10 हजार 176 विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए। जिनमें से कोटा उत्तर ने जहां 3057 प्रमाण पत्र बनाए वहीं कोटा दक्षिण निगम ने दोगुने 7119 विवाह प्रमाण पत्र जारी किए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हैल्प लाइन खोली ही लोगों की सुविधा के लिए है। यहा आवेदन करने वाले सभी लोगों का काम आसानी से किया जा रहा है। दस्तावेज पूरे होने पर बिना किसी परेशानी व देरी के जन्म, मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>हैल्प लाइन में आवेदन करने पर बिना किसी देरी के प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। हैलप लाइन कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि जन्म, मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र जारी करने में देरी नहीं की जाए। व्यक्ति को इसके माध्यम से बड़ी राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर दक्षिण तो  व्यवस्था के लिए है लेकिन काम कहीं का भी हो सभी को बिना परेशानी के करवाने का प्रयास करते हैं। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Nov 2022 14:44:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि विभाग से लाइसेंस के लिए अब करना होगा सर्टिफिकेट कोर्स</title>
                                    <description><![CDATA[खाद-बीज की दुकान चलाने वालों या दुकान खोलने वालों के लिए कृषि विभाग एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चला रहा है। यह कोर्स करने के बाद दुकानदारों को खाद-बीज का लाइसेंस लेने में सहूलियत होने के साथ रोजगार भी मिल सकेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/certificate-course-will-now-have-to-be-done-for-license-from-agriculture-department/article-19977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/krishi-vibhag-se-license-k-liye-certificate..kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। युवाओं को रोजगार देने के लिए कृषि विभाग की ओर से चलाया जा रहा एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स रोजगार के नए रास्ते खोल रहा है। सर्टिफिकेट कोर्स के बाद युवा अब खाद-बीज की जो दुकानें चला रहे हैं। जो वर्तमान में खाद बीज की दुकानें संचालित कर रहे उनके लिए भी अनिवार्य लाइसेंस लेने के लिए कृषि विभाग ये सुविधा दे रहा है। दरअसल, खाद-बीज की दुकान चलाने वालों या दुकान खोलने वालों के लिए कृषि विभाग एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चला रहा है। यह कोर्स करने के बाद दुकानदारों को खाद-बीज का लाइसेंस लेने में सहूलियत होने के साथ रोजगार भी मिल सकेगा। कई युवक खुद की दुकान लगाना चाहते हैं, लेकिन लाइसेंस नहीं होने के कारण वो दुकान नहीं लगा पा रहे थे। ऐसे युवकों और आमजन की मदद करने के लिए एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स है। इसे करने के बाद एग्रीकल्चर एक्जीक्यूटिव बनकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कोर्स का डिजाइन कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह सर्टिफिकेट कोर्स 3 वर्ष पहले शुरू किया गया था। कोर्स का डिजाइन राष्ट्रीय स्तर पर हैदराबाद की राष्टÑीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (एमएएनएजीई ) ने तैयार किया है। प्रदेश के राज्य कृषि प्रबल संस्थान (एसआईएम) दुगार्पुरा जयपुर से संचालित किया जा रहा है। कोर्स में अधिकतम 40 लोग एडमिशन ले सकते हैं। इसे कोर्स को दोनों ही संस्थान से मान्यता प्राप्त है। इसलिए जरूरी है यह कोर्स शर्मा के मुताबिक, खाद बीज कीटनाशक खरीदने के लिए किसान गांव-कस्बों में इनपुट डीलर्स से सम्पर्क करते हैं, इसलिए इन डीलर्स को तकनीकी ज्ञान होना आवश्यक है। डीलर शिक्षित होंगे तो सही बीज, खाद एवं दवा किसान को बता पाएंगे। ऐसे में किसान अपनी फसल को जरूरत के मुताबिक खाद बीज दे सकेंगे, जिससे फसल को लाभ होगा। अभी तक डीलर्स बिना तकनीकी ज्ञान के ही किसानों को अंदाजे से खाद बीज व दवा दे देते हैं, इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। किसान का नुकसान न हो इसलिए डीलर्स को प्रोडक्ट से संबंधित तकनीकि ज्ञान होना आवश्यक है। 40 लोगों का होता है बैच कृषि विभाग के पास जैसे ही 40 आवेदन आने के साथ ही बैच शुरू कर दिया जाता है। हालांकि 30 से 35 आवेदन पर भी क्लासें शुरू कर दी जाती है। इसमें आयु सीमा की कोई बाधा नहीं है। वर्तमान में सर्टिफिकेट कोर्स की 4 कक्षाएं कोटा व बूंदी में संचालित हो रही है। कोटा में नयापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबल संस्थान व बूंदी में आत्मा सप्ताह सभागार में चल रही है। अब तक 6 बैच पूर्ण हो चुके हैं, करीब 300 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जोड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश लोग खाद-बीज दुकान का लाइसेंस लेकर खुद का व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। क्या है यह कोर्स खाद-बीज की दुकान चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, जिसके लिए यह कोर्स आवश्यक है। हैदराबाद की राष्टÑीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान व राज्य कृषि प्रबल संस्थान दुर्गापुरा जयपुर द्वारा यह संचालित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम को देशी कोर्स के नाम से जाना जाता है। इसमें आवेदन के लिए 10वीं पास न्यूनत योग्यता है और फीस 2 हजार है। वहीं, आवेदन के लिए आवेदक संबंधित जिले के जिला परिषद के उप निदेशक कृषि विस्तार कार्यालय में सम्पर्क कर सकता है। 48 सप्ताह के कोर्स में प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी डॉ. शर्मा ने बताया कि यह कोर्स 48 सप्ताह का होता है। जिसमें 40 सप्ताह तक थ्योरी क्लासेज और 8 सप्ताह कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रेक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्स करने वाले अधिकांश लोग काम-धंधे वाले होते हैं। इसलिए ये प्रतिदिन क्लास में नहीं आ सकते। इसलिए सप्ताह में एक दिन यानी हर रविवार को कक्षाएं लगाई जाती है। ऐसे में एक दिन में दो व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। 300 लोगों को रोजगार से जोड़ा यह कोर्स करीब 3 साल से कोटा-बूंदी में संचालित हो रहा है। यह पहल शुरू करने का मकसद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और खाद बीज की दुकान लगाने वाले डीलर्स में प्रोडक्ट की तकनीकि समझ विकसित करना है। अब तक 6 बैच निकल चुके हैं और वर्तमान में करीब 4 बैच संचालित हैं। कोर्स का पाठ्यक्रम पूरा होते ही परीक्षाएं करवाई जाती है। जिसमें पास होने के बाद ही प्रशिक्षार्थियों को हैदराबाद संस्थान द्वारा सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसके बाद परीक्षार्थी खाद-बीज दुकान लगाने के लिए लाइसेंस ले सकता है। अब तक करीब 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार से जोड़ चुके हैं। लोगों में इस कोर्स को लेकर रूझान बढ़ा है। कोटा कृषि विभाग ने किसानों को कृषि से संबंधित आ रही समस्याओं को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर कोर्स शुरू किया है। -डॉ. नरेश कुमार शर्मा, कृषि अनुसंधान अधिकारी, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार कार्यालय कोटा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:44:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> 9 साल से लापता हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान का सर्टिफिकेट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के 6 हिल फोर्ट्स को सन 2013 में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की सूची शामिल किया था, जिससे हर प्रदेशवासी का सिर गर्व से ऊंचा हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hill-forts-certificate-missing-from-9-year/article-6434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/am-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के 6 हिल फोर्ट्स को सन 2013 में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की सूची शामिल किया था, जिससे हर प्रदेशवासी का सिर गर्व से ऊंचा हुआ। विभाग को न तो इस संबंध में जारी प्रमाण पत्र की जानकारी है और ना ही उसकी कॉपी मौजूद है। एक आरटीआई कार्यकर्ता महेश पारीक ने हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान के सर्टिफिकेट के संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से जानकारी मांगी तो यह खुलासा हुआ है।</p>
<p>यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद में मिला मुख्य प्रमाण पत्र कहा हैं, इसकी जानकारी ना तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है और ना ही राजस्थान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के पास। कमाल की बात तो यह है कि करीब 9 साल में दोनों विभागों के पास इसकी सूचना ही नहीं है।</p>
<p><strong>विभाग ने माना सर्टिफिकेट तो मिला, लेकिन कहां है, जानकारी नहीं</strong> <br />भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई विभाग) का कहना है कि ‘हिल फोर्ट्स आॅफ राजस्थान’ को लेकर यूनेस्को ने प्रमाण पत्र जारी किया था, लेकिन उसे यह ताज कब मिला, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। एएसआई के विश्व धरोहर अनुभाग इसका लेखा जोखा रखता है, लेकिन उनको ही पता नहीं है कि इसका प्रमाण पत्र कहा है। डब्ल्यूएचएस अनुभाग का कहना है कि सर्टिफिकेट से संबंधित सूचना इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।</p>
<p><strong>सूचना सृजित नहीं</strong> <br />पुरातत्व विभाग से आरटीआई के जरिए जो जवाब मिला है वह भी बड़ा हैरानी करने वाला है। विभाग का कहना है कि यूनेस्को की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्र की जानकारी उन्हें नहीं है। साथ ही इस संबंध में कोई सूचना विभाग में सृजित नहीं है।</p>
<p><strong>पास तो हुए, लेकिन सर्टिफिकेट नहीं</strong> <br />अपनी विशेषता के बल पर प्रदेश के 6 किलों को यूनेस्को ने परीक्षा में पास कर वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की लिस्ट में शामिल कर प्रमाण पत्र जारी किया, लेकिन पास होने के बावजूद भी इन किलों के पास सर्टिफिकेट नहीं है।</p>
<p><strong>ये किले हुए थे लिस्ट में शामिल</strong><br />मई, 2013 में प्रदेश के आमेर महल, गागरौन का किला, रणथम्भौर किला, कुंभलगढ़ किला, चित्तौड़गढ़ किला और जैसलमेर के किले को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स में शामिल किया था। इसमें आमेर महल और गागरौन का किला पुरातत्व विभाग एवं अन्य चार फोर्ट्स भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आते हैं। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 09:59:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवेदन की अंतिम तिथि तक जारी प्रमाण-पत्र ही मान्य</title>
                                    <description><![CDATA[कार्मिक विभाग सभी विभागों को भेजेगा परिपत्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%A5%E0%A4%BF-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF/article-3946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/secretariat_630x4001.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। विभिन्न सरकारी भर्तियों में अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों की पात्रता का मूल्यांकन आवेदन की अंतिम तिथि तक जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर ही किया जाएगा। अंतिम तिथि के बाद जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर अभ्यर्थियों को संबंधित श्रेणी अथवा वर्ग का लाभ नहीं मिलेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संबंध में कार्मिक विभाग की ओर से सभी विभागों को जारी किए जाने वाले परिपत्र को मंजूरी दे दी है। फिलहाल केन्द्र एवं राज्य के अधीन पदों की भर्तियों में आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थियों की ओर से संबंधित श्रेणी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाता है, जिसके आधार पर अभ्यर्थी की श्रेणी की पात्रता का मूल्यांकन किया जाता है। आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी  प्रमाण-पत्र होना आवश्यक है, लेकिन कुछ प्रकरणों में भर्ती एजेंसियों की ओर से अंतिम तिथि के बाद अभ्यर्थियों को त्रुटि सुधार के लिए अवसर प्रदान करने पर अभ्यर्थी इसका फायदा उठाकर आवेदन करने की अंतिम तिथि के बाद जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर देते हैं, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे में कार्मिक विभाग की ओर से सभी विभागों को यह परिपत्र जारी कर निर्देशित किया जाएगा कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी हुए प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित श्रेणी/वर्ग का लाभ नहीं दिया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jan 2022 11:46:34 +0530</pubDate>
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                <title>आज से कोविड की प्रिकॉशन डॉज, प्रिकॉशन डोज के लिए लिए डॉक्टर्स के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[60 पार गंभीर बीमार 12.50 लाख बुजुर्ग, 11.65 लाख हेल्थ-फ्रंटलाइन वर्कर्स]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61dbd3c52110e/article-3909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/vacine-2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में 60 पार को-मोर्बेडिटी वाले बुजुर्गों और हेल्थ-फ्रंटलाइन वर्कर्स को सोमवार से तीसरी यानी प्रिकॉशन डोज दी जा रही है। प्रदेश में सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर यह वर्ग कोरोना वैक्सीन की यह डोज लगवा सकेगा। प्रदेश में इस वर्ग के करीब 24.15 लाख लोग हैं। इनमें 12.50 लाख बुजुर्ग जो गंभीर बीमारियों जैसे डायबिटीज, बीपी, हार्ट सहित अन्य रोगों से ग्रसित हैं, वे सेंटरों पर जाकर यह डोज लेने के लिए योग्य होंगे। वहीं हाई रिस्की जोन में काम कर रहे 5.17 लाख हेल्थ वर्कर्स और 6.48 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं। पूर्व में जिस वैक्सीन की दो डोज दी गई है, तीसरी डोज भी उसी कंपनी की दी जाएगी। ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन में वैक्सीनेशन किया जाएगा। को-मोर्बेडिटी वाले बुजुर्गों को वैक्सीनेशन के लिए बीमारी होने का डॉक्टर का सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी। चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने सभी से प्रिकॉशन डोज लगाने की अपील की है। <br /> <br /> <strong>दूसरी डोज लिए 9 माह होने पर तीसरी डोज</strong><br /> प्रदेश में इस श्रेणी के उन्हीं लोगों को प्रिकॉशन डोज लगाई जा रही है। जिन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज लिए नौ माह बीत चुके हैं। तीसरी डोज लगाने के पीछे वैज्ञानिक आधार यह है कि नौ माह पूरे होने के कारण कोरोना के खिलाफ सुरक्षा कवच यानी एंटीबॉडीज कम हो जाती है। गंभीर बीमार बुजुर्ग में इम्यूनिटी कम होती है, ऐसे में वे संक्रमण लगने पर फिर से बीमार ना हो, इसलिए तीसरी डोज दी जा रही है। हेल्थ व फ्रंटलाइन वर्कर्स को हाईरिस्की जोन में काम करने के कारण सुरक्षित करने का प्लान है। <br /> <strong><br /> गर्भवती महिलाओं, दिव्यांग कर्मचारियों को कार्यालय आने से मिली छूट</strong><br />  सरकार ने कोविड महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए गर्भवती महिला और दिव्यांग कर्मचारियों को कार्यालय आने से छूट देते हुए घर से काम करने की अनुमति दे दी है। केन्द्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी देते हुए यह खुलासा किया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला और दिव्यांग कर्मचारियों को कार्यालय आने से छूट दी गई है हालांकि, उन्हें उपलब्ध रहने और घर से काम करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि कंटेनमेंट जोन (रोकथाम क्षेत्र) में रहने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारियों को भी उस समय तक कार्यालय आने से छूट रहेगी। जब तक उनके क्षेत्र को अधिसूचित क्षेत्र से बाहर नहीं किया जाता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jan 2022 12:12:51 +0530</pubDate>
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                <title>‘हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान’ का सर्टिफिकेट ‘लापता’!</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य पुरातत्व विभाग ने एएसआई से कई बार पत्र के जरिए मांगी सर्टिफिकेट की प्रति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E2%80%98%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%91%E0%A4%AB-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E2%80%98%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E2%80%99/article-3392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/24.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। यूनेस्कों ने साल, 2013 में प्रदेश के 6 फोर्ट्स को वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की लिस्ट में शामिल किया था। ‘हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान’ के तहत राजस्थान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के दो एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 4 फोर्ट्स को चयनित किया गया था। इनमें आमेर महल (पुरातत्व विभाग), गागरौन फोर्ट (पुरातत्व विभाग), कुंभलगढ़ फोर्ट (एएसआई), चित्तौड़गढ़ फोर्ट (एएसआई), जैसलमेर फोर्ट (एएसआई) और रणथम्भौर फोर्ट (एएसआई) शामिल हैं। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने कई बार दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के मुख्यालय को पत्र लिखकर हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान के सर्टिफिकेट की प्रति उपलब्ध करवाने की बात कही, लेकिन दिल्ली स्थित एएसआई मुख्यालय से पुरातत्व विभाग को कोई जवाब नहीं दिया गया है।</p>
<p><br /> दैनिक नवज्योति संवाददाता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के जयपुर सर्किल और जोधपुर सर्किल के अधिकारियों से हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान के सर्टिफिकेट की प्रति उपलब्ध होने की बात पूछी तो कमाल की बात ये है कि दोनों सर्किलों के पास भी सर्टिफिकेट की प्रति नहीं है। जबकि विभाग के ही अधिकारियों का कहना था कि सर्टिफिकेट की प्रति सर्किलों के पास भी होनी चाहिए थी। <br /> <br /> गागरौन फोर्ट हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान की सूची में शामिल है। लेकिन हमारे पास यूनेस्को की ओर से दिए गए सर्टिफिकेट के प्रति तक नहीं है। इसकी प्रति प्राप्त करने के लिए कई बार निदेशालय स्तर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के दिल्ली स्थित मुख्यालय को निदेशालय स्तर से पत्र लिखा गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। - <strong>उमराव सिंह, वृत अधीक्षक, कोटा वृत कोटा</strong><br /> <br /> सर्टिफिकेट की प्रति प्राप्त करने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं। साथ ही निदेशालय स्तर पर एएसआई के दिल्ली मुख्यालय को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक सर्टिफिकेट की प्रति उपलब्ध नहीं हुई है। - <strong>डॉ. पंकज धरेन्द्र, अधीक्षक, आमेर महल<br /> </strong><br /> जयपुर सर्किल में रणथम्भौर दुर्ग आता है। ये भी साल, 2013 में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान की सूची में शामिल हुआ था। उस सर्टिफिकेट की प्रति हमारे पास नहीं है। दिल्ली स्थित एएसआई मुख्यालय से ही इस संबंध में जानकारी मिल सकती है। -<strong>डॉ. प्रवीण सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, जयपुर सर्किल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग<br /> </strong><br /> यूनेस्को की ओर से हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान में शामिल किले-महलों के सर्टिफिकेट की प्रति हमारे पास नहीं है। रिकॉर्ड चैक करके बता पाउंगा। -<strong>डॉ. बिरी सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, जोधपुर सर्किल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग</strong></p>
<p><strong><br /> 4 बार पत्र लिखे, जवाब एक का नहीं मिला</strong><br /> राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सर्टिफिकेट की प्रति भिजवाने के लिए एएसआई को करीब 4 बार पत्र भेजे गए हैं, लेकिन विभाग ने एक पत्र का भी जवाब नहीं भेजा है। पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक प्रकाश चन्द शर्मा ने सितम्बर, 2021 में भी पत्र भेजा था। अधिकारियों के अनुसार यूनेस्को की ओर से जारी सिक्स हिल्स आॅफ फोर्ट की सूची में पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले आमेर महल और गागरौन फोर्ट भी चयनित हुए थे, तो कम से कम यूनेस्को की ओर से दिए गए सर्टिफिकेट की प्रति विभाग के पास होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Dec 2021 12:25:46 +0530</pubDate>
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