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                <title> japan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> japan RSS Feed</description>
                
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                <title>जापान में सजा राजस्थान का रंग, टोक्यो में राजस्थान पर्यटन पवेलियन का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में राजस्थान पर्यटन ने प्रदेश की विरासत, संस्कृति, कला और पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित। राजस्थान पर्यटन पवेलियन का उद्घाटन जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक ने किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/color-of-rajasthan-decorated-in-japan-inauguration-of-rajasthan-tourism/article-166517"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1)79.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जापान के टोक्यो में आयोजित टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में राजस्थान पर्यटन ने अपनी समृद्ध पर्यटन विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। एक्सपो में राजस्थान पर्यटन के पवेलियन का उद्घाटन गुरुवार को जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक ने किया। इस अवसर पर पर्यटन सचिव सुचि त्यागी ने राजदूत का स्वागत किया। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला सहित मंत्रालय एवं अन्य संबंधित अधिकारियों की भी उपस्थिति रही। भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि, जापान के पर्यटक, ट्रैवल ट्रेड से जुड़े प्रतिनिधि और टूर ऑपरेटर्स भी उद्घाटन अवसर पर मौजूद रहे। राजस्थान पर्यटन के पवेलियन में प्रदेश की समृद्ध विरासत, संस्कृति, कला, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को जापानी दर्शकों तक पहुंचाने के लिए पवेलियन में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इन प्रस्तुतियों में जापानी कलाकारों द्वारा राजस्थान के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।</p>
<p>टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 टोक्यो में 24 से 27 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंच के माध्यम से राजस्थान पर्यटन को जापान के ट्रैवल ट्रेड, टूर ऑपरेटर्स और संभावित यात्रियों के बीच प्रचारित करने तथा भारत-जापान पर्यटन संबंधों को और मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 16:25:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जापान का बड़ा कदम : 58 अरब डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी, हमले की क्षमता को बढ़ाना उद्देश्य</title>
                                    <description><![CDATA[जापान ने चीन से बढ़ते क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट मंजूर किया है। अगले वित्तीय वर्ष में रक्षा के लिए करीब 58 अरब डॉलर (9,000 अरब येन) आवंटित किए गए हैं। बजट का बड़ा हिस्सा लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन क्षमताओं पर खर्च होगा। जापान आक्रामक रक्षा नीति की ओर बढ़ रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/japans-big-step-amid-increasing-tension-with-china-approval-of/article-137332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/japan-flag.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय तनाव और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए अब तक के सबसे बड़े रक्षा बजट को अपनी मंजूरी दे दी। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए जापान सरकार ने रक्षा क्षेत्र को लगभग 58 अरब डॉलर का आवंटन किया है। जापानी मुद्रा येन में यह राशि नौ हजार अरब येन है। इस भारी भरकम बजट का मुख्य उद्देश्य जापान की जवाबी हमले की क्षमता को बढ़ाना और अत्याधुनिक मानवरहित हथियारों, ड्रोनों के जरिए तटीय सुरक्षा को पुख्ता करना है।</p>
<p>सरकार ने यह फैसला चीन की ओर से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए लिया है। विशेष रूप से ताइवान पर चीन के संभावित हमले को लेकर जापान ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। ताइवान के मामले में जापानी सेना हस्तक्षेप कर सकती है। जापान अब अपनी रक्षा नीति को आत्मरक्षा तक सीमित रखने के पुराने सिद्धांत से हटकर आक्रामक रक्षा की ओर बढ़ रहा है।</p>
<p>बजट का एक बड़ा हिस्सा यानी करीब 970 अरब  येन लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास पर खर्च किया जाएगा। इसमें 1,000 किमी रेंज वाली टाइप-12 मिसाइलें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जनसंख्या की कमी और सेना में कम स्टाफ की चुनौती से निपटने के लिए जापान शील्ड नामक एक उन्नत प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके तहत जल, थल और नभ में संचालित होने वाले बड़े पैमाने पर ड्रोन तैनात किए जाएंगे।</p>
<p>अनुमान है कि जापान का वार्षिक सैन्य खर्च 10 ट्रिलियन येन तक पहुंच जाएगा, जिससे यह अमेरिका और चीन के बाद रक्षा पर खर्च करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। जापान ने अपनी जीडीपी का दो  प्रतिशत रक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। जापान केवल आयात पर ही नहीं, बल्कि अपने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है। वह ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान बना रहा है। साथ ही, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया द्वारा मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज को अपने जहाजों के अपग्रेडेशन के लिए चुनना जापानी रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस बजट प्रस्ताव को अब मार्च तक संसद की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। सरकार इस खर्च की भरपाई के लिए कॉर्पोरेट और तंबाकू करों में बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 17:02:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कई देशों में कहर बरपा रहा इन्फ्लूएंजा फ्लू : जापान ने महामारी किया घोषित, स्कूल-कॉलेज बंद</title>
                                    <description><![CDATA[जापान ने इन्फ्लूएंजा मामलों में असामान्य तेजी के चलते महामारी घोषित की है। 22 सितंबर से अब तक 6,000 से अधिक मरीज सामने आए हैं और 135 स्कूल-चाइल्डकेयर केंद्र बंद किए गए हैं। एशिया के कई देशों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। फ्लू मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित कर रहा है और अस्पतालों में भीड़ बढ़ी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/influenza-flu-is-wreaking-havoc-in-many-countries-japan-declared/article-129711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। दुनिया में इन दिनों इन्फ्लूएंजा ने दहशत मचाई हुई है। इस कारण बढ़ते मरीजों की संख्या से परेशान जापान ने महामारी की घोषणा कर दी है। सिर्फ जापान में ही नहीं, बल्कि कई देशों में इन्फ्लूएंजा फ्लू ने कहर बरपाया हुआ है। भारत में भी इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इन्फ्लूएंजा फ्लू से सबसे ज्यादा प्रभावित मरीज कम उम्र के हैं। यह फ्लू मरीज में बुखार, खांसी और गले की खसखसाहट से शुरू हो रहा है और देखते ही देखते पूरे शरीर को कमजोर बना दे रहा है। इस कारण कई देशों में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी जबरदस्त वृद्धि देखने को मिली है।</p>
<p><strong>जापान में क्यों घोषित हुई महामारी ?</strong></p>
<p>जापान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि इन्फ्लूएंजा के मामलों में अनुमान से पांच हफ्ते पहले रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई। इस कारण इसे देशव्यापी महामारी घोषित कर दिया गया है। पिछले दो दशकों में यह दूसरी बार हुआ है, जब किसी वर्ष इन्फ्लूएंजा फ्लू इतनी जल्दी प्रकोप बनकर सामने आया है। जापान में 22 से 28 सितंबर के बीच 4,000 से ज्यादा लोगों का फ्लू का इलाज किया गया, जो प्रति निगरानी वाले चिकित्सा संस्थान में औसतन 1.04 मरीजों के बराबर है, जो महामारी की सीमा को पार कर गया।</p>
<p><strong>जापान में स्कूल और चाइल्डकेयर बंद :</strong></p>
<p>29 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच जापान में यह संख्या बढ़कर 6,000 से ज्यादा हो गई, और प्रति संस्थान औसतन 1.56 मरीजों का आंकड़ा रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 0.77 के दोगुने से भी ज्यादा है। 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक, पूरे जापान में 135 स्कूल और चाइल्डकेअर केंद्र बंद रहे, जो पिछले साल इसी अवधि की तुलना में कई गुना ज्यादा है। जापान के 47 प्रान्तों में से 28 ने फ्लू के मामलों में वृद्धि दर्ज की, जिसमें ओकिनावा में इसका अनुपात सबसे ज्यादा देखा गया।</p>
<p><strong>एशिया भर में फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं :</strong></p>
<p>जापान में फ्लू का प्रकोप एक व्यापक क्षेत्रीय रुझान को दर्शाता है। हाल के हफ्तों में सिंगापुर, थाईलैंड और भारत में भी फ्लू के मामले बढ़े हैं। उत्तर भारत में, एच3एन2 वायरस का प्रसार एक बढ़ती हुई चिंता का विषय बन गया है-जो 1968 के हांगकांग फ्लू महामारी का कारण बने स्ट्रेन का वंशज है। जर्मनी के फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर एनिमल हेल्थ (फ्रेडरिक लोफ्लर इंस्टीट्यूट) के उपाध्यक्ष डॉ मार्टिन बीयर ने डीडब्ल्यू न्यूज को बताया कि यह विशेष स्ट्रेन मानव और एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का मिश्रण है।</p>
<p><strong>मौसमी प्रकोप का भी कारण बनते हैं इन्फ्लूएंजा :</strong></p>
<p>इन्फ्लूएंजा वायरस के चार प्रकार होते हैं, जिनमें- ए, बी, सी और डी शामिल हैं। मुख्य रूप से प्रकार ए और बी टाइप के इन्फ्लूएंजा मौसमी प्रकोप का कारण बनता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, हालांकि इन्फ्लूएंजा और सामान्य सर्दी के लक्षण समान होते हैं, लेकिन सामान्य सर्दी राइनोवायरस सहित कई अन्य वायरसों से भी फैल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 12:41:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जापान में टाइफून पेइपाह से भारी बारिश की चेतावनी : बाढ़ और भूस्खलन का खतरा, लोगों से सावधानी रखने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[जापान के वाकायामा प्रांत में शुक्रवार सुबह टाइफून पेइपाह पहुंच गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/warning-of-heavy-rains-from-typhoon-peepah-in-japan-appeal/article-125980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/6622-copy.jpg333.jpg" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के वाकायामा प्रांत में शुक्रवार सुबह टाइफून पेइपाह पहुंच गया है। मौसम विभाग ने इस बात की जानकारी दी। जापान मौसम विभाग के मुताबिक मौसम के इस 15वें टाइफून से भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन होने का खतरा है। यह शिकोकू इलाके में पहुंच कर प्रशांत महासागर तट के साथ पूर्व की ओर बढ़कर वाकायामा प्रांत के उत्तरी भाग में पहुंच गया। इसके शाम तक किन्की, तोकाई, कांतो-कोशिन और तोहोकू क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका है।</p>
<p>विभाग ने आगे कहा कि 24 घंटों के दौरान तोक्यो सहित कांतों-कोशिन क्षेत्र में 300 मिलीमीटर तक बारिश होने की संभावना है। साथ ही तोकाई क्षेत्र में 250 मिलीमीटर और किन्की क्षेत्र में 150 मिलीमीटर बारिश होने के अनुमान है। विभाग के अधिकारियों ने भूस्खलन, निचले इलाकों में बाढ़ और नदियों के उफान पर होने के प्रति सावधानी रखने की अपील की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 17:07:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जापान दौरे पर पीएम मोदी : हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता के लिए भारत-जापान साथ, मोदी बोले- यात्रा छोटी, लेकिन असर लंबे समय तक रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यहां कहा कि उनकी जापान यात्रा भले ही छोटी हो लेकिन इसका प्रभाव दीर्घकालिक होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-tour-of-japan-pm-modi-said-with-india-japan/article-125188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)90.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यहां कहा कि उनकी जापान यात्रा भले ही छोटी हो लेकिन इसका प्रभाव दीर्घकालिक होगा और भारत तथा जापान केवल एशिया ही नहीं बल्कि विश्व में शांति, प्रगति और स्थिरता के मज़बूत स्तंभ बने रहेंगे। अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर पन्द्रहवें जापान-भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दो दिन की जापान यात्रा पर सुबह यहां पहुंचे मोदी ने ‘द जापान न्यूज’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत और जापान एशिया और विश्व में शांति, प्रगति और स्थिरता के लिए एक मज़बूत शक्ति बने रहेंगे। उन्होंने रक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और आर्थिक संबंधों में मज़बूत सहयोग के साथ-साथ लोगों के बीच आपसी संपर्क और ग्लोबल साउथ के लिए समर्थन पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि “ मुझे विश्वास है कि मेरी यह यात्रा भले ही छोटी हो लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक रहेगा।”</p>
<p>दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह भारत-जापान साझेदारी का प्रमुख स्तंभ होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ चिप बाज़ार में आ जाएँगे, जो भारत की डिज़ाइन और निर्माण क्षमताओं का एक स्पष्ट प्रदर्शन होगा। जापानी कंपनियां अपनी तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक नेतृत्व के साथ इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा,“ एक मज़बूत शुरुआत हो चुकी है। भारत के पैमाने और क्षमताओं को जापान की उन्नत तकनीकों के साथ जोड़कर, हम एक मज़बूत और विश्वसनीय सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर सकते हैं। यह सहयोग हमारे दोनों देशों की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को बढ़ाएगा। मैं सेमीकंडक्टर सहयोग को भारत-जापान साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरता हुआ देखता हूँ। आखिरकार इस डिजिटल सदी में चिप्स सिर्फ़ कंप्यूटर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धा, विश्वसनीयता और भविष्य के प्रति आत्मविश्वास का भी ज़रिया हैं।”</p>
<p>अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग से जुडे सवाल पर उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव दैनिक जीवन में कृषि, आपदा प्रबंधन से लेकर संचार और उससे भी आगे की प्रगति से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि “ मुझे विश्वास है कि हमारी वैज्ञानिक टीमें अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगी। और, अंतरिक्ष में हमारी साझेदारी न केवल हमारे क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि हमारे आसपास के जीवन को भी बेहतर बनाएगी। ”</p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग भारत और जापान के लिए एक मज़बूत सफलता की कहानी रही है। दोनों देशों का हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और स्थिरता में साझा हित है। उन्होंने कहा कि “आज हमारी साझेदारी तीनों सेनाओं के स्तर पर है। हम नियमित रूप से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास करते हैं। हम एक मज़बूत रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग का निर्माण कर रहे हैं, और अपनी नौसेना के लिए यूनिकॉर्न के सह-विकास और सह-उत्पादन पर काम कर रहे हैं।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद तेज़ी से अपनी वैश्विक उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। जापान का भी रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक सिद्ध रिकॉर्ड है। राजनीतिक विश्वास और हम न केवल अपने लिए बल्कि दुनिया के लिए भी अगली पीढ़ी के रक्षा प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन और निर्मित कर सकते हैं।”</p>
<p>दोनों देशों के बीच आर्थिक क्षेत्र में सहयोग पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में संभावनाएं बहुत अधिक हैं, जिनका दोहन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “भारत में जापानी कंपनियों की संख्या लगातार बढ़कर लगभग 1,500 हो गई है, जबकि 400 से ज़्यादा भारतीय कंपनियाँ जापान में काम कर रही हैं। ज़ाहिर है, यह तो बस शुरुआत है, वास्तविक संभावनाएँ कहीं ज़्यादा हैं। हमें बड़े लक्ष्य रखने होंगे और महत्वाकांक्षी बने रहना होगा। सरकारों, व्यवसायों और लोगों के बीच तालमेल हमारी आर्थिक साझेदारी में पैमाने और गति पैदा कर सकता है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोनों देशों के महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन ये अभी तक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के तहत सोचे गये स्तरों तक नहीं पहुँच पाए हैं। मुझे विश्वास है कि नए प्रयासों से, हम अपने व्यापार क्षेत्र में विविधता ला सकते हैं, इसे और अधिक संतुलित बना सकते हैं और नए आयाम भी खोल सकते हैं।”</p>
<p>बुनियादी ढांचे से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि 21वीं सदी में जापान भारत के नवाचार, विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभरेगा। भारत की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना से संबंधित सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि “ मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत और जापान के बीच एक प्रमुख परियोजना है। हमारा लक्ष्य कुछ वर्षों में यात्री सेवाएँ शुरू करना है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना प्रगति पर है और हमने एक बड़ी महत्वाकांक्षा का लक्ष्य रखा है, जिसके अंतर्गत देश में 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनाना है। ”</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसे मेक इन इंडिया के तहत बनाया जाएगा जिससे कि यह टिकाऊ और व्यवाहारिक हो। उन्होंने इस प्रयास में जापानी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत किया। हिन्द प्रशांत क्षेत्र से संबंधित सवाल पर मोदी ने कहा कि इस बारे में भारत और जापान के दृष्टिकोण समान हैं और दोनों देशों के बीच बीच मजबूत तालमेल है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान एक ऐसे हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्ध हैं जो शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्थिर हो और जहाँ राष्ट्रों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान किया जाता हो।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोनों देशों के हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ मज़बूत और व्यापक संबंध हैं और दोनों अपने साझा उद्देश्यों को अभिव्यक्त करने के लिए उनमें से कुछ के साथ बहुपक्षीय रूप से जुड़े हुए हैं। चीन के साथ संबंधों में सुधार के बारे में पूछे जाने पर मोदी ने कहा कि पिछले साल कज़ान में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर और सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के सौहार्दपूर्ण संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति तथा समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए 2 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के लिए विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना भी महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 29 Aug 2025 18:53:28 +0530</pubDate>
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