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                <title>सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की दी अनुमति, कहा-नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती </title>
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                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग की इच्छा मानते हुए 30 सप्ताह गर्भ समापन की अनुमति दी, कहा महिला को गर्भ जारी रखने को मजबूर नहीं किया जा सकता।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-courts-historic-decision-to-allow-termination-of-pregnancy-at/article-142174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में एक नाबालिग लड़की के 30 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी अदालत किसी महिला को, और विशेष रूप से एक नाबालिग लड़की को, उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है।</p>
<p>न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने जोर देकर कहा कि गर्भवती लड़की को  बच्चे को जन्म देने  या नहीं देने के उसके अधिकार को उचित महत्व दिया जाना चाहिए, खासकर तब जब उसका मन नहीं हो कि वह बच्चे को जन्म दे और ऐसी इच्छा उसने साफ साफ शब्दों में बार बार जाहिर भी की हो। </p>
<p>पीठ ने स्पष्ट किया कि मुख्य मुद्दा यह था कि क्या एक नाबालिग को ऐसी गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जा सकता है जो उसकी मर्जी के बिना है। अदालत ने कहा, अदालत किसी भी महिला को, नाबालिग बच्चे की तो बात ही छोड़एि, अपनी गर्भावस्था पूरी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, अगर उसका ऐसा करने का इरादा ही नहीं हो।</p>
<p>न्यायालय ने माना कि यह मामला इस पर निर्भर नहीं करता कि गर्भधारण सहमति से बने संबंधों के कारण हुआ था या दुष्कर्म से। वास्तव में फैसला इस बात से तय होगा कि नाबालिग की वह स्पष्ट इच्छा क्या है और उसका मन यही है कि वह बच्चे को जन्म न दे। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने स्वीकार किया कि हालांकि एक बच्चे का जन्म अंतत: एक जिंदगी को दुनिया में लाना है, लेकिन इस मामले में नाबालिग की स्पष्ट अनिच्छा सबसे महत्वपूर्ण कारक है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने मुंबई के जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि वे सभी आवश्यक चिकित्सा संबंधी उपायों का पालन करते हुए गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन की प्रक्रिया शुरू करें। यह फैसला भारत में गर्भपात कानून के तहत प्रजनन अधिकारों की व्याख्या में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। कारण यह है कि 24 सप्ताह की कानूनी सीमा के बाद भी विशेष परिस्थितियों में अदालत ने इस लड़की की पसंद को प्राथमिकता दी है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी संशोधन अधिनियम 2021 के अनुसार गर्भपात की समय सीमा को विभिन्न श्रेणियों में निर्धारित किया गया है। सामान्य परिस्थितियों में सभी महिलाओं के लिए 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति है, मगर इसके लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।</p>
<p>विशेष श्रेणियों की महिलाओं जैसे कि दुष्कर्म का शिकार बनी लड़कियां, नाबालिग, विधवाओं, दिव्यांगों या गंभीर बीमारी से पीड़ति महिलाओं के लिए यह सीमा 24 सप्ताह तक निर्धारित है और इसके लिए दो डॉक्टरों की इजाजत अनिवार्य है। यदि गर्भ में पल रहे भ्रूण को गंभीर बीमारी है, तो राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड की अनुमति के बाद 24 सप्ताह के बाद भी गर्भपात कराया जा सकता है। </p>
<p>इसके अलावा अगर गर्भवती महिला के जीवन को तत्काल कोई गंभीर खतरा हो, तो कानून की किसी भी समय सीमा के बिना आपातकालीन स्थिति में गर्भपात की अनुमति दी जाती है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 15:44:50 +0530</pubDate>
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                <title>28 खसरे, 35 खातेदार, सहमति से खत्म हुआ 25 साल का इंतजार, राहत का दूसरा नाम साबित हो रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल शिविर</title>
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                        <![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील पहल के तहत आयोजित हो रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल शिविर आमजन के लिए राहत का दूसरा नाम बन गए हैं]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/28-measles-35-account-holders-ended-with-consent-of-25/article-119608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील पहल के तहत आयोजित हो रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल शिविर आमजन के लिए राहत का दूसरा नाम बन गए हैं। जहां ना केवल आमजन के काम हाथों हाथ हो रहे हैं बल्कि दशकों से राजस्व न्यायालयों में लंबित वाद भी सहमति एवं समझाइश के माध्यम से सुलझ रहे हैं।</p>
<p>ऐसा ही मामला चौमूं उपखंड के भूतेड़ा ग्राम पंचायत में सामने आया, जहां आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल शिविर में 25 सालों से 35 खातेदारों के बीच चले आ रहे 28 खसरों की 28 हेक्टेयर से अधिक भूमि विवाद का निस्तारण सभी पक्षकारों की आपसी सहमति से हुआ। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी की मौजूदगी में पक्षकारों ने भूमि विभाजन पर सहमति प्रस्तुत की। बरसों पुराने राजस्व विवाद का सौहार्दपूर्ण माहौल में निस्तारण के लिए सभी पक्षकारों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भी आभार जताया, साथ ही प्रशासन की इस सकारात्मक पहल की भी सराहना की। इस अवसर पर उपखण्ड अधिकारी दिलीप सिंह राठौड़ सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।</p>
<p>गौरतलब है कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़े के तहत शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जयपुर में शिविरों के सफल आयोजन के लिए जिला कलक्टर डॉ. सोनी स्वयं शिविरों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Jul 2025 14:27:33 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान हाइकोर्ट के लिए पांच और न्यायाधीशों के नामों पर सहमति</title>
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                        <![CDATA[इससे पूर्व गत माह कॉलेजियम ने वकील और न्यायिक कोटे से तीन-तीन नामों पर अपनी सहमति दी थी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF/article-1525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/sc1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान हाइकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्ति के लिए वकील कोटे से चार और न्यायिक कोटे से एक नाम पर अपनी सहमति दी है। इससे पूर्व गत माह कॉलेजियम ने वकील और न्यायिक कोटे से तीन-तीन नामों पर अपनी सहमति दी थी। केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद जल्द ही इनके नियुक्ति वारंट जारी किए जाएंगे।<br /> जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 6 अक्टूबर को आयोजित हुई बैठक में वकील कोटे से कुलदीप माथुर, मनीष शर्मा, रेखा बोरान और समीर जैन को हाइकोर्ट न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए अपनी सहमति दी है। इसी तरह 8 अक्टूबर को कॉलेजियम ने बैठक कर न्यायिक कोटे से शुभा मेहता को हाइकोर्ट न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। फिलहाल शुभा मेहता राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में तैनात हैं।</p>
<p><br /> इसके साथ ही राजस्थान हाइकोर्ट के इतिहास में एक रिकॉर्ड भी बनने वाला है। शुभा मेहता के बतौर हाइकोर्ट न्यायाधीश शपथ लेने के बाद पहली बार होगा जब हाइकोर्ट में न्यायाधीश दंपति एक साथ काम करेंगे। दरअसल शुभा मेहता हाइकोर्ट न्यायाधीश महेंद्र गोयल की पत्नी है। जस्टिस गोयल को कुछ वर्षों पूर्व वकील कोटे से हाइकोर्ट न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वहीं उनकी पत्नी शुभा मेहता डीजे कैडर की वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं। गौरतलब है की राजस्थान हाइकोर्ट में पचास पद स्वीकृत हैं। इनमें से पचास फीसदी से अधिक पद खाली चल रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 15:59:45 +0530</pubDate>
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