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                <title>employees - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्टार्टअप स्केलिंग के लिए सिस्टम की पैचिदगियां बड़ी चुनौती, एकल विंडो की जरूरत, आइडिया, टैलेंट, फंड और मजबूत तकनीक जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ यूनिकार्न के लिए प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन प्रभावी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/systemic-complexities-pose-a-major-challenge-for-scaling-startups--a-single-window-system-is-needed--alongside-ideas--talent--funding--and-robust-technology/article-160693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)86.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्टार्टअप को स्केल करने के लिए केवल फंडिंग ही पर्याप्त नहीं है। आइडिया, सही टीम, मजबूत तकनीक, प्रभावी प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन अपनाने पर ही स्टार्ट अप हाडौती में सफल हो सकते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना सकते हैं। यह बात उभर कर आई दैनिक नवज्योति की बुधवार को हुई मासिक परिचर्चा में। दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित इस टॉक शो का विषय था हाडौती में स्टार्टअप स्केलअप होने के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं( चैलेंजज इन स्केलिंगअप स्टार्ट अप इन हाडौती) । इस टॉक शो में इंडस्ट्री,व्यापार,नये और पुराने स्टार्टअप के फाउंडर,कोटा व्यापार संघ से जुडे सदस्य,एसएसआई के मैंबर, आई स्टार्ट के मेंटोर,चार्टर एकाउंटेंट, कंपनी सैकेट्री, सरकारी और प्राइवेट एजेसियों से जुड़े लोगों  ने हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं टॉक शो के उसके अंश-</p>
<p><strong>यह हैं स्टार्टअप स्केलअप के चैलेंज</strong><br />- स्टार्टअप के विस्तार के लिए पूंजी की कमी<br />- टैलेंट और कर्मचारियों की कमी<br />-राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं होता<br />- तकनीकी प्रणाली मजबूत नहीं होने पर सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती <br />-मजबूत प्रबंधन टीम बनाने की आवश्यकता <br /> -नकदी प्रवाह का प्रबंधन<br /> -स्ट्रेटीजी तैयार हो, बाजार में बड़ी कंपनियां भी प्रवेश कर सकती हैं<br />- उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता मेंग्राहक संतुष्टि बनाए रखना बड़ी चुनौती<br />- टैक्स, डेटा सुरक्षा, श्रम कानून, लाइसेंस और अन्य सरकारी नियमों का पालन बड़ी चुनौती<br />-सही समय पर, नियंत्रित और टिकाऊ विस्तार</p>
<p><strong>न्यूक्लियर पावर अपॉर्च्युनिटी</strong><br />हाड़ौती में न्यूक्लियर पावर की प्रचुरता है। इससे संबंधित स्टार्टअप पर फोकस कर उसे शुरू किया जाए तो उसका अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप पूरे देश में अपनी पहचान बना सकते हैं और यहां से विकसित राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। लेकिन अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। साथ ही स्टार्टअप शुरू करने व इन्हें प्रोत्साहित करने के सरकारी नियम तो बने हुए हैं उसमें कई तरह की छूट का प्रावधान भी किया गया है लेकिन उनका वास्तविक रूप में लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि शत प्रतिशत लाभ मिलने लगे तो कोई कारण नहीं हैं कि स्टार्टअप स्केलअप नहीं कर सकें। साथ ही युवाओं को रोजगार व उनकी आय के साधन भी मिलने लगेंगे।<br /><strong>-गोविंद राम मित्तल, फाउंडर प्रेसिडेंट द एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>पूरी रिसर्च से शुरू करें स्टार्टअप</strong><br />स्टार्टअप शुरू करना किसी बिजनेस से कम नहीं है। इसके लिए पहले पूरी तैयारी करने की जरूरत होती है। किसी भी काम के बारे में पूरी जानकारी करने के बाद ही शुरू करने पर उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सरकार की ओर से स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो अच्छी बनाई गई हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम में कई कमियां हैं जिनके कारण युवा चाहकर भी अपना स्टार्टअप शुरू करने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। चीन में उद्योग बढने का कारण वहां सुुविधाएं अधिक है। जबकि तुलनात्मक रूप से भारत में उद्योग, व्यापार या स्टार्टअप को शुरू करने व आगे बढ़ाने में सुविधाएं बाधक बन जाती हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी ,प्रेसिडंट होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप की स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर</strong><br />स्टार्टअप को शुरू हुए दस साल हो गए हैं। देशभर में अब तक दो लाख स्टार्टअप हो चुके हैं। हाड़ौती में 560 व कोटा में 490 स्टार्टअप हैं। नवम्बर 2025 के एक ही महीने में एक साथ 150 स्टार्टअप शुरू हुए थे। लेकिन बहुत कम स्टार्टअप ऐसे है जो व्यापक स्तर पर अपनी पहचान बना सके हैं। राजस्थान के दो ही स्टार्टअप देशभर में अपनी पहचान बना पाए हैं। स्टार्टअप स्केल की समस्या स्थानीय स्तर पर ही नहीं है पूरे देश की समस्या है। स्टार्टअप स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर करता है। प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होगी तो उसका मार्केट भी उतना ही बड़ा होगा। स्टार्टअप शुरू करने से पहले उससे संबंधित सभी पहलुओं की तैयारी करनी पड़ती है तभी सफलता संभव है।<br /><strong>-कोस्तुभ भट्टाचार्य, मेंटोर स्टार्टअप कंसलटेंट आई स्टार्ट राजस्थान</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप स्केलअपन में फंड मैनेजमेंट बड़ी समस्या</strong><br />स्टार्टअप का मतलब ही नए सिरे से किसी व्यवसाय को शुरू करना है। एक बार हिम्मत कर युवा स्टार्टअप शुरू कर भी देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए फंड की आवश्यकता होती है। जबकि फंडिंग ही नहीं होने से युवा अपने स्टार्टअप को आगे नहीं बढ़ा पाते। हालांकि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए कनेक् शन भी होने चाहिए। उन्हें भी फंडिंग व कनेक् शन की समस्या का सामना करना पड़ा था लेकिन देर से ही सही समाधान भी मिला। अब वे गुजरात, मध्य प्रदेश व दिल्ली समेत कई जगह पर अपना काम कर रहे हैं।<br /><strong>-शुभम शर्मा फाउंडर सीबीएस प्लीवर स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>मार्केट की स्वीकार्यता बड़ी चुनौती</strong><br />कोई भी स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है। लेकिन उसकी मार्केट में एक्सेबिलिटी भी होनी चाहिए। युवाओं द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जा रहा है उसकी मार्केट में डिमांड होगी तो वह ग्रो करेगा वरना परेशानी होती है। हालत यह है कि कई स्टार्टअप इसलिए भी आगे नहीं बढ़ पाते कि उनके द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जाता है उसका प्रमोशन नहीं होने से मार्केट नहीं मिल पाता। आरएनडी भी बड़ी समस्या रहती है। मार्केट के साथ उसका प्रमोशन उतना ही जरूरी है।<br /><strong>-सिद्धार्थ गुप्ता ,ट्रेजरार डिवी. चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>बेस्ट टैलेंट की कमी</strong><br />कोटा में स्टार्टअप तो कई शुरू हो रहे हैं। लेकिन ऐसे स्टार्टअप जो देश में अपनी पहचान बनाएं ऐसा स्टार्टअप शुरू करने के लिए यहां तकनीकी विशेषज्ञ या इंजीनियर ही नहीं है। टेलेंट व काम करने वालों की कमी है। लोग स्टार्टअप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए काम की गम्भीरता व जुनून भी होना चाहिए। बाहर से तकनीकी विशेषज्ञ मंगवाने पर उनकी कीमत अधिक चुकानी पड़ती है। साथ ही महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करने या उनके प्रोडक्ट को मार्केट में पहचान दिलाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है।<br /><strong>-नेहा गुप्ता फाउंडर गेन बुक स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>माकेर्टिंग और प्रमोशन के साथ रिसर्च की जरूरत</strong><br />स्टार्टअप शुरू करने से पहले जो भी प्रोडक्ट तैयार किया जाए उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रोडक्ट तैयार करने व उसकी माकेर्टिंग और प्रमोशन के लिए फंड की आवश्यकता होती है। लेकिन स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी समस्या ही फंड की रहती है। साथ ही जिस स्तर का स्टार्टअप होना चाहिए उसमें काम करने के लिए उस स्तर का टेलेंट नहीं मिल पाता है। जिससे स्टार्टअप एक सीमित दायरे तक ही रह जाते हैं। कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जिससे युवाओं को रोजगार के साथ ही उनके प्रोडक्ट की डिमांड भी बढ़े।<br /><strong>-सीए सुधांशु उपाध्याय सैकेट्री आईसीएआई</strong></p>
<p><strong>कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बन रही</strong><br />जिस तरह से कई विभागों में सीएसआर का फंड दिया जाता है। उसी तरह का फंड यदि स्टार्टअप को दिया जाए तो उन्हें आर्थिक सम्बल मिलेगा। स्टार्टअप को फंडिंग के लिए एक सिस्टम बनाने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है लेकिन उसके ग्रो करने में कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बनती हैं। उन सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। स्टार्टअप में प्रोडक्ट उत्पादन पर फोकस किया जाएगा तो अधिक लोगों को रोजगार भी दिया जा सकेगा।<br /><strong>-अमित सिंघल, डायरेक्टर इंडेक्सल इंजीनियरिंग</strong></p>
<p><strong>नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप ग्रो तेजी से करेंगे</strong><br />समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है। फिर चाहे व कोई प्रोडक्ट हो या शिक्षा का क्षेत्र। शिक्षा के क्षेत्र में भी नए-नए स्टार्टअप शुरू किए जा सकते हैं। लेकिन उनमें मेन पावर के साथ ही एआई का अधिक उपयोग किया जाएगा तो उनकी डिमांड व उपयोगिता अधिक होगी। एआई आधारित प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होने से उस काम को करने वाले अधिक युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप की कोटा व हाड़ौती में ही नहीं पूरे देश में डिमांड रहेगी तो स्टार्टअप ग्रो भी तेजी से करेंगे।<br /><strong>-सुदर्शन माथुर ,डायरेक्टर एलबीएस एजुकेशन ग्रुप</strong></p>
<p><strong>सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए </strong><br />स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो बनी हुई हैं लेकिन सिस्टम में कई कमियां हैं। माइंड सेट ही नहीं है। जिनके कारण स्टार्टअप शुरू करने वालों को कई परेशाननियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए तो युवाओं को सुविधा होगी और स्टार्टअप अधिक सुगमता से काम कर पाएंगे।<br /><strong>-समीर सूद, सैकेट्री एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप पर वर्तमान हालात की मार</strong><br />देश दुनिया में जो हालात हैं उससे स्टार्टअप भी अछूते नहीं हैं। इन पर असर पड़ रहा है। मार्केट ग्रोथ में 40 फीसदी कमी आई है। मैने नोएड़ा में वर्क किया पर वहां पर काफी कर्मचारी कोटा सहित अन्य जगहों के कर्मचारी मेरे पास काम करते थे। जिसमे कुछ तो इंटर करने के लिए आते थे तो कुछ अपना टैलेंट एक्सप्लोर करने के लिए आते थे।मेरी मैंटलिटी हमेशा से रही है कि मैं कोटा में ही रहकर काम करूं, इसके लिए मेरे प्रयास हमेशा ही रहत ेथे कि अधिक से अधिक पैसा बाहर से लाने की कोशिश करता हूं। अभी युद्ध से सहित अन्य विभिन्न कारणों से स्टार्टअप फील्ड और अन्य फील्ड में करीब 40 प्रतिशत गिरावट र्दज की गई हैं। इसके चलते हमने बड़ी-बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों को अभी रूक रखा हैं।<br /><strong>-सिद्धार्थ वशिष्ठ ,फाउंडर रिपोर्टस एन्ड इनसाइज बिजनस रिसर्चर </strong></p>
<p><strong>पानी बिजली कोचिंग बड़ी संभावनाएं </strong><br />कोटा में भारी संभावना है। हाड़ौती में पानी, बिजली सहित अन्य व्यवस्था यहां पर हैं। यहां तीन लाख बच्चे आते हैं। इसे टैलेंट में बदलना होगा। यह एक  अपॉर्चुनिटी है। कुछ समय पहले हमारी एसोसिएशन ने हाड़ौती में रोजगार और बिजनेस को लेकर क्या संभावना हैं। साथ ही हाड़ौती के लिए क्या कुछ कर सकते हैंं पर गंभीर चर्चा की। रोजगार बढ़े और अधिक से अधिक से लोग लाभांवित हो इसके लिए क्या करना चाहिए। पैरेंटस यहां पर केवल मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज रहे हैं। पर हमे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे बच्चा यहां पर मेडिकल के साथ ही डिजिटल शिक्षा, स्किल डवलपमेंट सहित अन्य फील्ड में भी वहां शिक्षा प्राप्त कर सके। क्यो कि अभी पैरेंटस शहर में बच्चे को डर-डर के यहां पर भेज रहा हैं।<br /><strong>-राजेश गुप्ता , प्रेसिडंट डिवीजनल चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>मार्केट और सेल में खुद उतरना पड़ता है </strong><br />मैंने बिजनेस की शुरूआत पापड़ व मंगोड़ी बनाने सहित अन्य कार्य से की जिसमें घर-घर जाकर पापड़ बेचे। फिर शुरूआत में मेरे साथ एक महिला जुड़ी इस तरीके से मेरे साथ महिलाएं जुड़ती गई। अब करीब मेरे पास 80 महिलाएं काम करती हैं। शुरूआत में बिजनेस में लोन लेने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्राहक भी प्रोडक्ट नहीं खरीदते थे उनको समझना पड़ता था। तब जाकर प्रोडक्ट कि सेल बढ़ी, उसके बाद मैंने लड्डू गोपाल कि पोशाक बनाना शुरू तो उसके बारे में इधर-उधर से जानकारी जुटाई और इस कार्य को आगे बढ़ाया। बहुत सी बार वर्कस को सुविधाएं देने के बाद भी वहां हमारे साथ कार्य नहीं करना चाहता है। तो इस दौरान हमको विभिन्न परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।<br /><strong>- भावना करमचंदानी .बिजनस वुमन</strong></p>
<p><strong>सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित हो</strong><br />स्टार्टअप के लिए इकोसिस्टम भी तेजी से उभर रहा है। सरकार और विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों से नवाचार को बढ़ावा मिला है। स्टार्टअप्स को बनाए रखने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और उद्योग का एक्सपोजर देना होगा। सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित होना चाहिए, जिससे उन्हें शुरूआती स्तर पर अवसर मिल सके। सरकार को, उद्योग, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ अपनी समस्या साझा करें और स्टार्टअप्स के लिए समाधान प्रस्तुत कर सकें।<br /><strong>- आयुष त्यागी, मेंटोर आई स्टार्टअप राजस्थान</strong></p>
<p><strong>फंड राइजर्स के लिए प्रयास ज़रूरी<br /></strong>मैंने पिछले सालों में करीब तीस हजार लोगों को रोजगार दिया साथ ही कई कंपनियों के साथ हम कार्य करते हैं। इसके तहत एमएसएमई संस्था प्राय सरकारी योजनाओं की विभिन्न सूचनाएं सहित अन्य सूचनाएं उद्योगों को उपलब्ध करती हैं। साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यालय और उद्योगों केबीच संस्था सेतु का काम करती हैं। साथ ही हमारा प्रयास है कि 18-25 वर्ष तक का बच्चा कोटा शहर में रहकर की कार्य करें। साथ ही एमएसएमई के माध्यम से शॉर्ट टैंक से बातचीत करके शहर के उद्योगों को शॉर्ट टैंक से रिवॉर्ड लेकर आ रहे हैं।<strong><br />-दीपक मेहता , एसएसई एसोसिएशन अध्यक्ष</strong></p>
<p><strong>फंड के लिए विश्वास हासिल करना चुनौती<br /></strong> देखा जाएं तो स्टार्टअप में बेसिकली सबसे ज्यादा समस्या फंडिग की आती है क्योकि एंट्ररप्रेन्योर अभी बिजनेस बिल्ड करना चाहते हैं जिसको लेकर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।साथ ही जो पुरानी कंपनियां है फंडिग के लिए उनको प्राथमिकता मिलती हैं। जो पुराने बिजनेस करने वाले है वहां अपना कार्य का तरीका नहीं बदल पा रहे हैं। स्टार्टअप को फंड्स के लिए जल्द कोई तैयार नहीं होता। इस क्षेत्र में आप उतर रहे हैं तो मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है। टैलेंट और लिक्विट केपिटल पर भी ध्यान देना पड़ेगा।<strong><br />-दीक्षा दुग्गड़,कंपनी सचिव आईसीएसआई कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 15:29:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिहार के लाखों कर्मचारियों को बड़ा तोहफा: मंहगाई भत्ते में बढ़ोतरी, सम्राट मंत्रिमंडल ने दी 18 प्रस्तावों को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। बैठक में 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें पुलिस सुदृढ़ीकरण हेतु नए पदों का सृजन और वित्तीय वर्ष के लिए ऋण योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करना शामिल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-gift-to-lakhs-of-employees-of-bihar-increase-in/article-153664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/da.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार के सम्राट मंत्रिमंडल ने बुधवार को राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) में वृद्धि को मंजूरी देने के साथ विकास, वित्त और प्रशासन से जुड़े 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई यह बैठक मंत्रिमंडल के हालिया विस्तार के बाद पहली बैठक थी, जिसमें सभी 34 मंत्री शामिल हुए। बिहार मंत्रिमंडल ने इस वर्ष 01 जनवरी से विभिन्न वेतन आयोगों के तहत डीए बढ़ाने को मंजूरी दी थी। इस निर्णय के तहत छठे वेतन आयोग के तहत डीए 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत किया गया है। पांचवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए इसे 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत किया गया, जबकि सातवें वेतन आयोग के तहत डीए 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।</p>
<p>बैठक में मंत्रिमंडल ने बाजार से 64,141.28 करोड़ रुपये उधार लेने की योजना को भी मंजूरी दी। इस मंजूरी के बाद बाजार ऋण के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल ऋण जुटाने का लक्ष्य 72,901.30 करोड़ रुपये हो गया। इस बैठक में संवेदनशील जिलों में पुलिस व्यवस्था मजबूत करने के लिए पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पांच पद सृजित करने को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल के एक अन्य निर्णय में कैबिनेट ने ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ के माध्यम से मूल्य वर्धित कर प्रबंधन सूचना प्रणाली (वैटमिस) अनुप्रयोग के वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) के नवीनीकरण के लिए एक करोड़ इकतीस लाख अस्सी हजार चार सौर चौदह (1,31,80,414) रूपये लागत को मंजूरी दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना-2027 में स्व-गणना के लिए सरकारी कर्मचारियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए मुख्य सचिव ने सभी सरकारी कर्मचारियों को 15 मई तक स्व-गणना (Self-Enumeration) पूरी करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की पहल के बाद अब प्रशासन की बारी है। वेब पोर्टल के माध्यम से सटीक आंकड़े जुटाना इस राष्ट्रीय मिशन की प्राथमिकता है, जिससे विकास की नई राह खुलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-to-ensure-100-participation-of-government-employees-for-self-enumeration/article-153068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/v.-srinivass.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत राज्य के समस्त राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की स्व-गणना में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और अधिकारियों से कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को 15 मई 2026 से पूर्व स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए प्रेरित करें और आवश्यक निर्देश जारी करें। जारी निर्देशों के अनुसार जनगणना-2027 का प्रथम चरण राजस्थान में 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा।</p>
<p>इससे पहले 1 मई से 15 मई 2026 तक निर्धारित वेब पोर्टल सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल⁠ पर स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। पोर्टल के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि 1 मई को महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं स्व-गणना कर प्रदेशवासियों के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में शत-प्रतिशत एवं सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी कार्मिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:27:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कर्मचारी महासंघ ने 7 दिन में भुगतान की मांग की, आंदोलन की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में 700 निजी अस्पतालों का करोड़ों का भुगतान बकाया होने से RGHS कैशलेस सुविधा बंद हो गई है। लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी इलाज के लिए भटक रहे हैं। कर्मचारी महासंघ ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है और तुरंत बकाया राशि जारी करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/employees-federation-demands-payment-in-7-days-warns-of-agitation/article-151994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rghs.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । RGHS में कैशलेस इलाज ठप, लाखों कर्मचारी-पेंशनभोगी संकट में -कर्मचारी महासंघ ने 7 दिन में भुगतान की मांग की, आंदोलन की चेतावनी राजस्थान में RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) के तहत कैशलेस इलाज की व्यवस्था ठप होने से प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। निजी अस्पतालों द्वारा कैशलेस OPD, IPD और दवा सेवाएं बंद किए जाने से मरीजों को मजबूरन जेब से खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है।</p>
<p>कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के करीब 700 निजी अस्पतालों ने पिछले 8-9 महीनों से लंबित भुगतान के कारण सेवाएं बंद कर दी हैं। अस्पतालों का करोड़ों रुपये बकाया होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जो अब मार्च-अप्रैल 2026 में विकराल रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि RGHS कार्डधारक अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। कैशलेस सुविधा बंद होने से OPD, IPD और दवाओं का पूरा खर्च मरीजों को खुद उठाना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है।</p>
<p>महासंघ के अनुसार, हाल ही में एक चिकित्सक की गिरफ्तारी के विरोध में भी कई अस्पतालों ने सेवाएं रोक दी हैं, जिससे हालात और अधिक बिगड़ गए हैं। डॉक्टरों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बनी हुई है। कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) ने सरकार से मांग की है कि निजी अस्पतालों का समस्त बकाया भुगतान 7 दिनों के भीतर किया जाए। साथ ही RGHS पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर कर व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए। डॉक्टरों के साथ संवाद स्थापित कर गतिरोध समाप्</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:45:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयपुर में लो-फ्लोर बस कर्मचारियों का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी, हालात तनावपूर्ण, प्रशासन पर बढ़ा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में JCTSL कर्मचारी अपनी 14 सूत्री मांगों को लेकर भीषण गर्मी में धरने पर हैं। चार दिनों से आमरण अनशन कर रहे मनीष और नरेंद्र की तबीयत बिगड़ने से तनाव बढ़ गया है। प्रबंधन की बेरुखी के खिलाफ कर्मचारियों ने मंगलवार से मुख्यालय पर प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fast-unto-death-of-low-floor-bus-employees-in-jaipur-continues/article-151809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/buss.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीएसएल) के कर्मचारी अपनी 14 सूत्री मांगों को लेकर भीषण गर्मी में लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन अब तक न तो वार्ता के लिए आगे आया है और न ही उनकी मांगों के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है। चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे मनीष श्रीमाली और नरेंद्र गोचर की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है, जिससे अन्य कर्मचारियों में भी चिंता बढ़ गई है। यह आमरण अनशन जेसीटीएसएल मजदूर कांग्रेस (इंटक) के बैनर तले चल रहा है।</p>
<p>कर्मचारियों का कहना है कि यदि आज भी मांगों पर सकारात्मक समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मंगलवार से जेसीटीएसएल मुख्यालय और डीएलबी कार्यालय पर आमरण अनशन करते हुए धरना दिया जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन से जल्द हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है, ताकि बस सेवा प्रभावित न हो और कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:26:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जेसीटीएसएल कर्मचारियों का शहीद स्मारक पर आमरण अनशन शुरू : चेयरमैन व एमडी से हुई वार्ता, नही बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारियों ने 14 सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार से शहीद स्मारक पर धरना व आमरण अनशन शुरू किया। चेयरमैन रवि जैन व एमडी पुरुषोत्तम शर्मा से वार्ता बेनतीजा रही। कर्मचारी ड्यूटी के साथ अनशन जारी रखेंगे। यूनियन ने नई बसें, भर्ती, बकाया भुगतान, मेंटेनेंस, ओवरटाइम व पदोन्नति सूची जारी करने की मांग उठाई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jctsl-employees-start-fast-unto-death-at-martyr-talks/article-151651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(7)9.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। जेसीटीएसएल के कर्मचारियों ने इंटक यूनियन के बैरन लते 14 सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार से शहीद स्मारक पर धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन शुरू कर दिया है। शुक्रवार को यूनियन पदाधिकारियों की चेयरमैन रवि जैन और कार्यवाहक एमडी पुरुषोत्तम शर्मा से वार्ता हुई। वार्ता में कोई समाधान नही हुआ। अब शनिवार को भी कर्मचारी ड्यूटी करते हुए आमरण अनशन जारी रखेंगे। यूनियन अध्यक्ष रामकुंवार विश्नोई ने बताया कि नई बसों की खरीद, रिक्त पदों पर भर्ती, एनपीएसव जीपीएस का बकाया भुगतान, संविदा पर लगे डिपो मैनेजरों को हटाने, खराब बसों का नियमित मेंटेनेंस कराने, ओवरटाइम का भुगतान, लंबे समय से ऑफिसों में लगे परिचालकों को रूट पर चलाने, और पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची जारी करने की मांग को लेकर शुक्रवार को यूनियन पदाधिकारी मनीष श्रीमाली और नरेन्द्र गोचर शहीद स्मारक पर आमरण अनशन किया। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसके बाद चेयरमैन व कार्यवाहक एमडी से वार्ता हुई, जिसमें कोई सकारात्मक समाधान नही हुआ। उन्होंने बताया कि सविंदा पर लगे डिपो मैनजर यूनियन पदाधिकारियों को छुट्टियां नही दे रहे। इस पर कर्मचारियों ने आमरण अनशन ड्यूटी के दौरान करने का निर्णय लिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरकारी कर्मियों के 2% महंगाई भत्ता बढ़ाने के जल्द जारी होंगे आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 2% की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री दिया कुमारी की स्वीकृति के बाद अब डीए 58% से बढ़कर 60% हो गया है। वित्त विभाग जल्द ही इसके औपचारिक आदेश जारी करेगा, जिससे हजारों परिवारों की आय में इजाफा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/orders-will-be-issued-soon-to-increase-dearness-allowance-of/article-151498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/secre.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला लेते हुए महंगाई भत्ते (डीए) में 2 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग द्वारा प्रस्तावित इस बढ़ोतरी की पत्रावली को वित्त मंत्री दिया कुमारी की स्वीकृति मिल चुकी है। इस निर्णय के बाद राज्य कर्मचारियों का डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे हजारों कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। बताया जा रहा है कि वित्त विभाग ने अनुमोदन के लिए फाइल मंत्री को भेजी थी, जिस पर अब अंतिम स्वीकृति मिल गई है। वित्त विभाग जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करेगा। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार पहले ही अपने कर्मचारियों के डीए में बढ़ोतरी के आदेश जारी कर चुकी है, जिसके अनुरूप राज्य सरकार ने भी यह निर्णय लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:37:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को 31 मार्च तक नहीं मिलेगी छुट्टी : सरकार ने लगाई रोक, अत्यावश्यक परिस्थिति में ही अवकाश का उपभोग करें</title>
                                    <description><![CDATA[वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को देखते हुए राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभागों में काम समयबद्ध तरीके से निपटाया जाए। अत्यावश्यक या आपात स्थिति को छोड़कर किसी भी कर्मचारी को अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-officers-and-employees-will-not-get-leave-till-31st/article-146297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/holiday.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्तीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 2025-26 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समापन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दृष्टिगत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यालय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समयबद्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुचारू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निष्पादन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुनिश्चित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राज्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> 31 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मार्च</span> 2026 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर्मचारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अवकाश</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रशिक्षण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रोक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्य सचिव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वी</span>. <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">श्रीनिवास</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span><span>  </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्देशित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राज्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शासकीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभागों</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यालयों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यरत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर्मचारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अत्यावश्यक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आपातकालीन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिस्थितियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अलावा</span> 31 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मार्च</span> 2026 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अवकाश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रशिक्षण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्वीकृत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जाए।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर्मचारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अवकाश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्वीकृत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आपातकालीन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अत्यावश्यक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिस्थिति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अवकाश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपभोग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 10:28:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होली पर सरकारी कर्मचारियों की मौज : 4 दिन मनाएंगे छुट्टी, जानें क्या है कारण</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारी 28 फरवरी को शनिवार और एक मार्च को रविवार की छुट्टी मनांएगे। इसके बाद होली की दो दिन दो और तीन मार्च की छुट्टी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/government-employees-will-enjoy-holi-for-4-days-know-the/article-144331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। इस बार होली का त्योहार सरकारी कर्मचारियों के लिए वीक एंड के साथ मौज लेकर आ रहा है। वे लगातार चार दिन की छुट्टियां मनाएंगे। सरकारी कलैण्डर के अनुसार ये छुट्टियां 28 फरवरी से शुरू होकर तीन मार्च तक रहेंगी। यानी कर्मचारी 28 फरवरी को शनिवार और एक मार्च को रविवार की छुट्टी मनांएगे। इसके बाद होली की दो दिन दो और तीन मार्च की छुट्टी रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 10:41:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही खुलेगा दरवाजा, बाहर से आने वाले लोगों पर होगा नियंत्रण</title>
                                    <description><![CDATA[केडीए की नई बिल्डिंग में लागू हुआ विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/doors-will-only-open-after-showing-their-faces-in-a-biometric-machine/article-143786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण की नई विस्तारित बिल्डिंग स्थित कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलने जाने वाले बाहरी लोगों को अब बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना व अपना नाम पता नोट करवाना आवश्यक होगा। उसके बाद ही प्रवेश द्वार खुलेगा। केडीए की ओर से नई बिल्डिग में बुधवार से विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। हालांकि इसका ट्रायल तो पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहा था। उसके सही तरह से काम करने के बाद बुधवार से उसे लागू कर दिया गया।</p>
<p><strong>अंदर जाते व बाहर निकलते समय दिखाने होंगे चेहरे</strong><br />सामान्य तौर पर सरकारी व निजी कार्यालयों में बायो मेट्रिक मशीन का उपयोग वहां काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए किया जाता है। लेकिन केडीए की नई बिल्डिंग में इसे कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ ही आमजन के लिए भी लागू किया गया है।बाहरी से आने वाले किसी भी व्यक्ति को यदि अधिकारी व कर्मचारी से मिलना है तो सबसे पहले उन्हें कम्प्यूटराइज बायो मेट्रिक कक्ष में बैठे कर्मचारियों को अपना नाम व मोबाइल नम्बर के साथ ही किससे मिलना है उसकी जानकारी देनी होगी। उसे नोट करने के बाद वहां लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना होगा। जिससे उस व्यक्ति का पंजीयन होगा।उसके बाद मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगी मशीन में भी चेहरा दिखाना होगा। वहां से ओके होने के बाद ही दरवाजा खुलेगा। जिससे अंदर प्रवेश किया जा सकेगा। वहीं कामहोने के बाद वापस बाहर आते समय भी गेट के पास अंदर लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही गेट खुलेगा। पहले दिन कार्यालय आए लोग इस सिस्टम को देखकर चौक गए। जबकि अधिकतर ने इसकी सराहना की।</p>
<p><strong>गेट पर आॅटोमैटिक लॉक सिस्टम</strong><br />बिल्डिंग में प्रवेश के लिए एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है। उसे बायो मेट्रिक मशीन से जोड़ा गया है। साथ ही उसमें आॅटो मेटिक सिस्टम लगाया गया है। बाय मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने के बाद ही वह गेट खुलगा। हालांकि वहां दो होमगार्ड को लगाया गया है लेकिन वे केवल व्यवस्था की दृष्टि से हैं।विजिटर्स के लिए प्रवेश की व्यवस्था सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही रहेगी।</p>
<p><strong>कर्मचारियों के लिए बायो मेट्रिक उपस्थिति</strong><br />आम आदमी के लिए जहां विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। वहीं वहां काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी बायो मेट्रिक उपस्थिति सिस्टम लागू किया गया है। अधिकारी-कर्मचारियों के भी आते-जाते समय बायो मेट्रिक मशीन से ही उपस्थिति दर्ज होगी।</p>
<p><strong>सीसीटीवी से कवर है पूरा सिस्टम</strong><br />केडीए अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम सीसीटीवी कैमरे से कवर है। जिससे इसमें किसी तरह की और किसी के भी द्वारा कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सके। इसके लिए दो होमगार्ड विशेष रूप से लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे सिस्टम का संचालन केडीए कर्मचारियों के द्वारा ही किया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय की नई बिल्डिग में इस सिस्टम को लागू किया गया है। वहां की व्यवस्थाएं उसके अनुरूप है। इससे अनावश्यक रूप से कार्यालय में आने वाले लोगों पर रोक तो लगेगी ही। साथ ही बाहर से आने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रहेगा। अधिकारियों व कर्मचारियों की बायो मेट्रिक उपस्थिति तो पुरानी बिल्डिंग में भी है। विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल कई दिन से चल रहा था। उसे बुधवार से लागू किया गया है। विजिटर्स सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही प्रवेश कर सकेंगे।<br /><strong>- हर्षित वर्मा, उपायुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 15:22:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोहरे के बीच भी रात को हो रही मेन रोड की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण  दुर्घटना हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/main-roads-being-cleaned-at-night-even-amidst-the-fog/article-138579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से दिन के समय ही नहीं रात में भी मेन रोड की सफाई काफी समय से करवाई जा रही है। हालत यह है कि इन दिनों रात के समय पड़ रहे घने कोहरे के बीच भी सफाई जारी है।शहर में सुबह-शाम निकल रहे कचरे को देखते हुए निगम की ओर से दोनों समय पर वार्डों में ही नहीं मेन रोड पर भी सफाई करवाई जा रही है। सुबह बाजार खुलने पर दुकानदारों को सफाई नजर आए। इसे देखते हुए रात के समय ही मेन रोड की सफाई करवाई जा रही है। फिर चाहे डीसीएम रोड हो या सीएडी रोड। स्टेशन रोड या नयापुरा का क्षेत्र। पिछले काफी समय से यह कार्य किया जा रहा है।वही सिलसिला अभी भी बना हुआ है। </p>
<p>शहर में रविवार व सोमवार को सुबह के समय ही नहीं रात के समय भी घना कोहरा छाया हुआ था। उस कोहरे में बिजिबिलिटी इतनी कम थी कि पास के वाहन व रोड लाइटें तक नजर नहीं आ रही थी। उस कोहरे के बीच भी निगम के सफाई कर्मचारी महिलाएं और पुरुष दोनों मेन रोड पर झाडू लगाने से लेकर एकत्र कचरे को ट्रॉली में भरने में जुटे हुए थे।रात के समय मेन रोड से गुजरने वाले वाहन चालक सफाई कर्मचारियों के इस जज्बे को देखकर आश्चर्य करने लगे। लोगों का कहना था कि इतना घना कोहरा है कि उसमें न तो सफाई कर्मचाी नजर आ रहे थे और न ही ट्रेक्टर ट्रॉली। बिल्कुल नजदीक आने पर ही पता चल रहा था कि यहां कोई है। सफाई कर्मचारियों की रेडियम वाली यूनिफार्म तक दूर से नजर नहीं आ रही थी। पास आने पर भी उसकी चमक नहीं दिख रही थी। लोगों का कहना है कि ऐसे में कभी भी रात के समय तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण सफाई कर्मचारियों की दुर्घटना हो सकती है। या फिर कोई वाहन ट्रेक्टर ट्रॉली से टकराकर घायल हो सकता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से रात के समय सफाई करवाना अच्छा है। लेकिन कोहरे की अधिकता व मानवीय पहलू को देखते हुए कोहरा अधिक होने पर कर्मचारियों को राहत दी जानी चाहिए।</p>
<p>इधर नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा का कहना है कि शाम को दुकानें बंद होने के बाद रात को सड़कों पर कचरा अधिक रहता है। ऐसे में रात के समय सफाई करवाई जा रही है। जिससे सुबह सड़कें साफ दिखे। कोहरा तो अभी कुछ समय का है। रात से अधिक दिन के समय हादसों का खतरा अधिक रहता है। साथ ही रात में एक बार सफाई बंद करवाने पर फिर से उसे शुरू करने में परेशानी हो सकती है। फिर भी कोहरा लगातार या अधिक समय तक रहा तो उसके हिसाब से निर्णय किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 15:33:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>टीका बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों नहीं मिल रहा वेतन : सरकारी संस्थाओं का निजीकरण सरकार की सबसे बड़ी दुर्नीति, राहुल गांधी ने कहा- यह कदम देश के लिए अभिशाप</title>
                                    <description><![CDATA[हर बच्चे तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका निर्णायक रही है। लेकिन 2017 तक मुनाफ़े में चल रही इस कंपनी को जानबूझकर, योजनाबद्ध तरीक़े से घाटे के उद्यम में बदल दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/employees-of-vaccine-manufacturing-companies-are-not-getting-salaries-privatization/article-135644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि सरकारी संस्थाओं का दमन और उनका निजीकरण सरकार की सबसे बड़ी दुर्नीति है और मौजूदा सरकार का यह कदम देश के लिए एक बहुत बड़ा अभिशाप बन गया है। गांधी ने एक बयान में कहा कि उनकी हाल ही हुई जन संसद में भारत इम्यूनोलॉजिकल्स तथा जैविकीय निगम लिमिटेड (बिबकॉल) के कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात हुई। इन कर्मचारियों ने अपनी स्थिति को लेकर जो बातें कहीं है वह बहुत हैरान करने वाली है और जो भी इसे सुनेगा हैरान हो जाएगा। उन्होंने लिखा कि इस सरकारी कंपनी के कर्मचारी सालों से वेतनहीन हैं। अपने घर का खर्च चलाने के लिए कर्जा, उधार और मजबूरी पर उनका जीवन टिका हुआ है। ये वही बिबकॉल है जो भारत में वैक्सीन बनाने वाली एकमात्र सरकारी कंपनी थी और जिसने पोलियो जैसी भयंकर बीमारी के उन्मूलन में ऐतिहासिक योगदान दिया। सरकार को कम कीमत पर वैक्सीन उपलब्ध कराने और हर बच्चे तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका निर्णायक रही है, लेकिन 2017 तक मुनाफ़े में चल रही इस कंपनी को जानबूझकर, योजनाबद्ध तरीक़े से घाटे के उद्यम में बदल दिया गया।</p>
<p>गांधी ने आगे कहा कि कारण साफ़ है, ताकि सरकारी कॉन्ट्रैक्ट निजी कंपनियों को सौंपे जा सकें, निजी कंपनियां महंगे दाम पर वैक्सीन बेचकर भारी मुनाफ़ा कमाएं और उसकी कीमत आपकी जेब से निकाली जाए और एक दिन बिबकॉल को नुकसान के नाम पर बंद कर इसकी संपत्ति मुफ्त या सस्ते दामों में पूंजीपति मित्रों में बांट दी जाए। उन्होंने बताया कि बिबकॉल कंपनी बुलंदशहर से संचालित होती थी और उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में स्थित इस कंपनी की भूमि और संपत्ति काफी महंगी है। जब से उत्तर प्रदेश में जेवर एयरपोर्ट बनाने की घोषणा हुई है। उसके बाद इसकी कीमत आसमान छू रही है। उन्होंने कहा,''इस कंपनी के कर्मचारियों की आर्थिक पीड़ा सरकार से साझा की है। उनके द्वारा आश्वासन दिया गया है कि कर्मचारियों का लंबित वेतन और बकाया जल्द दिया जाएगा।</p>
<p>विपक्ष के नेता कहा कि यह चिंता की बात है कि सरकारी संस्थानों को धीरे-धीरे खत्म करने की बहुत गहरी साजिश चल रही है और सरकार का यह कदम देश के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदेह होगा। ये संस्थान जनता के हित के लिए बनाए गए थे, ताकि युवाओं को रोजगार मिले और लोगों को सस्ती, भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध हो सके लेकिन आज इन्हें ही बीमार बनाकर निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल निजीकरण नहीं है - यह जनता की जेब पर हमला और भारत की आत्मा पर आघात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 16:49:26 +0530</pubDate>
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