<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/history/tag-5826" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>history - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/5826/rss</link>
                <description>history RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>‘द बैटल ऑफ नरनौल’ पर खास लेखक सत्र: राव तुला राम की वीरता और 1857 के संग्राम की अनकही गाथा पर चर्चा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जयपुर के क्लॉक टावर में कुलप्रीत यादव और मधुर राव ने 1857 के नायक राव तुला राम की वीरता पर आधारित अपनी पुस्तक पर चर्चा की। लेखकों ने इस गुमनाम युद्ध के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में राव तुला राम के वंशज राव राघवेंद्र सिंह भी शामिल हुए, जिन्होंने नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ने की प्रेरणा दी।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-writer-satra-rao-on-the-battle-of-narnaul-discusses/article-146598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)3.png" alt=""></a><br /><p> जयपुर। जयपुर के क्लॉक टावर में रविवार को इतिहास, साहित्य और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जब 2- पेजेज बुक क्लब की ओर से पुस्तक ‘द बैटल ऑफ नरनौल’ पर विशेष लेखक सत्र आयोजित किया गया। पेंगुइन रैंडम हाउस और क्लॉक टावर के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक Kulpreet Yadav और सह-लेखक Madhur Rao ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे भीषण लड़ाइयों में से एक पर आधारित इस किताब के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की।</p>
<p>कार्यक्रम में 1857 के महान योद्धा Rao Tula Ram की वीरता, नेतृत्व और रणनीतिक कौशल पर गहन मंथन हुआ। लेखकों ने बताया कि यह पुस्तक 1857 के संग्राम की उस ऐतिहासिक लड़ाई को सामने लाती है, जिसे इतिहास में अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया।</p>
<p>कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में राव तुला राम के पर-परपोते राव राघवेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने पूर्वज की वीरता और देशभक्ति की विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राव तुला राम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी रणनीतिकार भी थे।</p>
<p>लेखक कुलप्रीत यादव ने बताया कि राव तुला राम ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए वर्षों तक संसाधन जुटाए और राजपूताना के कई शासकों के साथ गुप्त गठबंधन बनाए। उन्होंने फारस, अफगानिस्तान और रूस जैसे देशों से भी सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया, जो उनके व्यापक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।</p>
<p>सह-लेखक मधुर राव ने कहा कि ‘द बैटल ऑफ नरनौल’ जैसी किताबें भारत के इतिहास की उन अनकही कहानियों को सामने लाने का प्रयास हैं, जो समय के साथ भुला दी गईं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे वीरों की गाथाओं को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए और फिल्मों तथा नाटकों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन निष्ठा अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर राजस्थान के पूर्व गृह राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारिया तथा आलसीसर परिवार के मुखिया ठाकुर गज सिंह जी आलसीसर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।</p>
<p>इसके साथ ही 2-पेजेज बुक क्लब के संस्थापक सदस्य डॉ. राम गुलाटी, प्रग्या रामजेवाल और मोहित बत्रा सहित बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। यह सत्र न केवल इतिहास को समझने का अवसर बना, बल्कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अनदेखे अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा भी देता नजर आया।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-writer-satra-rao-on-the-battle-of-narnaul-discusses/article-146598</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-writer-satra-rao-on-the-battle-of-narnaul-discusses/article-146598</guid>
                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 17:51:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/1200-x-60-px%29-%28youtube-thumbnail%293.png"                         length="963478"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 मार्च से शुरू होगा आरएएस परीक्षा 2025 के साक्षात्कार का सातवां चरण: आरपीएससी ने वेबसाइट पर अपलोड किया कार्यक्रम</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राजस्थान लोक सेवा आयोग ने आरएएस 2024 (सातवां चरण) और सहायक आचार्य भर्ती के साक्षात्कार 5 से 13 मार्च तक निर्धारित किए हैं। अभ्यर्थियों को विस्तृत आवेदन पत्र और मूल दस्तावेज लाना अनिवार्य है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/the-seventh-phase-of-interview-of-ras-exam-2025-will/article-144394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/rpsc-1.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार का विस्तृत कार्यक्रम वेबसाइट पर जारी कर दिया। राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2024 के साक्षात्कार का सातवां चरण 5 मार्च से 13 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। इस परीक्षा के साक्षात्कार में उपस्थित हीने वाले सभी अभ्यर्थियों को ऑनलाइन भरे गए विस्तृत आवेदन पत्र को डाउनलोड कर साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में सभी प्रमाण पत्रों व उनकी फोटो कॉपी के साथ प्रस्तुत करना होगा।</p>
<p>इसके अलावा सहायक आचार्य (कॉलेज शिंक्षा विभाग) परीक्षा 2023 के कैमेस्ट्री, इकोनॉमिक्स विषय के द्वितीय चरण के साक्षात्कार का आयोजन 5 से 13 मार्च तक किया जाएगा, हिस्ट्री विषयं के द्वितीय चरण के साक्षात्कार 9 से 13 मार्च तक आयोजित किए जाएंगे। साक्षात्कार में उपस्थित होने वाले जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में अपना विस्तृत आवदेन पत्र आयोग में प्रस्तुत नहीं किया है, उन्हें विस्तृत आवदेन पत्र आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में सभी प्रमाण पत्रों की फोटो कॉपी के साथ अनिवार्य रूप से लाना है। साक्षात्कार के समय अभ्यर्थियों स्वयं का नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, नवीनतम स्पष्ट फोटोयुक्त मूल पहचान पत्र, सभी मूल प्रमाण पत्र व उनकी फोटो कॉपी लानी होगी। इन दस्तावेजों के अभाव में साक्षात्कार से वंचित कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पत्र वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/the-seventh-phase-of-interview-of-ras-exam-2025-will/article-144394</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/the-seventh-phase-of-interview-of-ras-exam-2025-will/article-144394</guid>
                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:04:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/rpsc-1.jpg"                         length="74999"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>800 साल से भी अधिक पुराना है कोटा का आशापुरा माता मंदिर, दशहरा मेले की शुरूआत होती है मंदिर की पूजा से</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कोटा के दशहरा मैदान के पास स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोकमान्यताओं का संगम है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही कोटा शहर भक्ति और आस्था में सराबोर हो उठता है। हर गली-मोहल्ले में देवी के जयकारे गूंजने लगते हैं, माता की चौकियां सजती हैं और भक्तजन व्रत-उपवास रखते हुए माता की साधना में लीन हो जाते हैं। ऐसे पावन अवसर पर कोटा का आशापुरा माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। कोटा के दशहरा मैदान के पास स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोकमान्यताओं का संगम है। माना जाता है कि यह मंदिर करीब 800 साल से भी अधिक पुराना है। इसकी स्थापना रियासतकाल में हुई है। आज यह मंदिर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। दशहरा और नवरात्र के दिनों में यहां देशभर से भक्त पहुंचते हैं। वर्तमान में भी मंदिर का रख-रखाव और पूजा-पाठ परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार ही किया जाता है। यह आशापुरा माता हाड़ौती व चौहानों की कुलदेवी है। इसके लिए अन्य समाज में भी माता की आस्था है तथा कई जने कुलदेवी मानते है।</p>
<p><strong>आशापुरा मंदिर के दर्शन से होती हैं दशहरा मेले की शुरूआत</strong><br />कोटा का दशहरा मेला आज विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी शुरूआत भी इसी मंदिर से होती है। परंपरा के अनुसार, दशहरे के शुभारंभ से पूर्व राजपरिवार के सदस्य यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। जब तक माता की आराधना पूरी नहीं हो जाती, तब तक मेले के कार्यक्रमों की शुरूआत नहीं होती। नगर निगम के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पूजा में शामिल होते हैं। इसके बाद ही दशहरा मैदान का विशाल आयोजन प्रारंभ होता है। कोटा का यह मंदिर एक ऐसा स्थल है, जहां राजपरिवार और आमजन दोनों समान रूप से श्रद्धा अर्पित करते हैं। दशहरा मेला हो या नवरात्र, दोनों अवसरों पर यहां की भव्यता देखते ही बनती है। यहां पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण की परंपरा है, जिसे ग्रहण करने के लिए भक्त उत्सुक रहते हैं।</p>
<p><strong>समाधि और चमत्कारी किंवदंतियां</strong><br />मंदिर परिसर में स्थित सिद्धयोगी महाराज की समाधि स्थित है यह भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। भक्त मानते हैं कि यहां समाधि से निकलने वाली ऊर्जा हर व्यक्ति का कल्याण करती है। कहा जाता है कि जो भी यहां सच्चे मन से मनोकामना मांगता है, माता उसकी हर इच्छा पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि मंदिर का नाम आशापुरा पड़ा  जो सबकी आशा पूरी करती हैं।</p>
<p><strong>आशापुरा से बनीं आशापाला</strong><br />मंदिर के पुजारी सिद्धनाथ योगी बताते हैं कि यहां आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते। माता हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि माता का नाम आशापुरा पड़ा। लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा यह मंदिर आज भी उसी महिमा और चमत्कार से परिपूर्ण है, जैसे सदियों पहले हुआ करता था। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि  माता आशापुरा का प्राकट्य एक अशोक वृक्ष से हुआ था। इसी कारण इस मंदिर को लंबे समय तक आशापाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता रहा। समय के साथ जब भक्तों ने महसूस किया कि माता उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं, तब यह मंदिर आशापुरा माता मंदिर कहलाने लगा। </p>
<p><strong>नवरात्र के दिन होते हैं विशेष कार्यक्रम</strong><br />- भजन संध्या और जागरण आयोजित होते हैं।<br />- भक्तों द्वारा सुंदरकांड पाठ और माता की चौकी सजाई जाती है।<br />- बड़ी संख्या में महिलाएं गरबा और डांडिया खेलकर माता का आह्वान करती हैं।</p>
<p><strong>नवरात्र में उमड़ती है आस्था की गंगा</strong><br />- नवरात्रि आते ही इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं।<br />- सुबह 5 बजे मंदिर खुलता है और दोपहर 12.30 बजे तक दर्शन होते हैं।<br />- शाम को 4 बजे मंदिर पुन: खुलता है और रात 10 बजे तक दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है।<br />- नवरात्रि में मंदिर पूरे दिन खुला रहता है ताकि कोई भी भक्त दर्शन से वंचित न रह जाए। अष्टमी के दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी संख्या में पहुंचते है। अष्टमी के दिन मंदिर में खड़े होने के लिए भी जगह नहीं मिलती।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 14:26:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/11-%281%2920.png"                         length="716363"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहीं चलेगी पुलिस की मनमानी, 3 बार सजा होने पर ही खुलती है हिस्ट्रीशीट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कई बार पुलिस इस कानूनी प्रावधान की अवहेलना कर व्यक्ति की हिस्ट्रीशीट खोल दी जाती है, लेकिन मामला हाईकोर्ट में आने पर अदालत हिस्ट्रीशीट को रद्द कर देती है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-arbitrariness-will-not-work-history-sheet-opens-only-after/article-99663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6688-copy9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पुलिस प्रशासन की ओर से कई बार मनमानी करते हुए समाजकंटक को आदतन अपराधी घोषित कर उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी जाती है। इसके बाद एरिया में कुछ भी संदिग्ध होने पर सबसे पहले इन आदतन अपराधियों का राउंड अप किया जाता है। हालांकि कानून में आदतन अपराधी घोषित करने का भी अलग से प्रावधान है। आदतन अपराधी अधिनियम में बताई शर्त पूरी होने पर ही पुलिस किसी को आदतन अपराधी घोषित कर सकती है। कई बार पुलिस इस कानूनी प्रावधान की अवहेलना कर व्यक्ति की हिस्ट्रीशीट खोल दी जाती है, लेकिन मामला हाईकोर्ट में आने पर अदालत हिस्ट्रीशीट को रद्द कर देती है। </p>
<p><strong>यह कहती है धारा</strong><br />राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 की धारा 2ए के तहत आदतन अपराधी उस व्यक्ति को माना जाता है, जिसे लगातार पांच साल की अवधि में कम से कम तीन बार दोषसिद्ध होकर सजा दी गई हो। इसी तरह 18 साल के कम उम्र के अपराधी को भी आदतन अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता। </p>
<p><strong>हाईकोर्ट कर चुका है पूर्व में रद्द</strong><br />27 मार्च, 2001 को करौली के तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन ने अशोक पाठक की हिस्ट्रीशीट खोली थी। जबकि पाठक पर तब एक ही आपराधिक मामला दर्ज था। इसे इस आधार पर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी कि पांच साल में तीन बार सजा होने पर ही हिस्ट्रीशीट खोल सकते हैं। हाईकोर्ट ने भी इस तथ्य पर मुहर लगाते हुए मार्च, 2017 में पाठक की हिस्ट्रीशीट को रद्द कर दिया था। </p>
<p>पुलिस की ओर से मनमानी करते हुए अक्सर ऐसे लोगों की हिस्ट्रीशीट खोल दी जाती है, जिनके खिलाफ कुछ मामले पुलिस में दर्ज हैं। जबकि आदतन अपराधी घोषित करने के लिए राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम, 1953 की धारा 2ए के तहत व्यक्ति को लगातार पांच साल में कम से कम तीन बार दोषसिद्ध किया गया हो।<br /><strong>- प्रहलाद शर्मा, आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता </strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-arbitrariness-will-not-work-history-sheet-opens-only-after/article-99663</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-arbitrariness-will-not-work-history-sheet-opens-only-after/article-99663</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Jan 2025 12:58:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/6688-copy9.jpg"                         length="145000"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संभल में मंदिर के बाद अब मिली बावड़ी, खुदाई में मिले चार सुरंगनुमा कमरे </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[चंदौसी कोतवाली इलाके के मोहल्ला लक्ष्मणगंज में 17 दिसंबर को खंडहरनुमा प्राचीन बांके बिहारी मंदिर मिला था।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-the-temple-in-sambhal-now-four-tunnel-like-rooms-found/article-98431"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(4)10.png" alt=""></a><br /><p>संभल। तमाम जगह, मंदिर और कुओं के मिलने का सिलसिला 46 साल बाद कार्तिकेय महादेव मंदिर के कपाट के खुलने के बाद शुरू हो गया है। जिले के चंदौसी तहसील इलाके में खंडहरनुमा बांके बिहारी मंदिर मिलने के बाद एक खाली प्लॉट में बावड़ी मिली है. खुदाई में अब तक चार सुरंगनुमा कमरे मिले हैं। खुदाई का काम अभी जारी है। चंदौसी कोतवाली इलाके के मोहल्ला लक्ष्मणगंज में 17 दिसंबर को खंडहरनुमा प्राचीन बांके बिहारी मंदिर मिला था।</p>
<p>अधिकारियों की टीम दो जेसीबी के साथ लक्षमणगंज पहुंची और आबादी के बीच खाली पड़े प्लॉट पर बावड़ी की तलाश में खुदाई शुरू करवाई गयी। खुदाई में अब तक चार सुरंगनुमा कमरे मिले हैं, इस के साथ ही और कमरें मिलने का दावा किया जा रहा है।</p>
<p><strong>जरूरत पड़ने पर कराएंगे एएसआई सर्वे : डीएम </strong></p>
<p>डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि यह 400 वर्ग मीटर एरिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां बिलारी के राजा के नाना के समय की बावड़ी बनी हुई थी। इसके सेकंड फ्लोर ओर थर्ड फ्लोर मार्बल के बने हुए हैं और ऊपर का तल ईंटों का बना हुआ है। इसमें एक कूप भी है और चार कमरे हैं। इसे मिट्टी से चुन दिया गया था। कल जन सुनवाई के दौरान इसकी शिकायत मिली, धीरे धीरे खुदाई करवाई जा रही है. जिस कारण इसके स्ट्रक्चर को कोई नुकसान न पहुंचे। यह लगभग 125 से 150 वर्ष पुराना होगा. डीएम का कहना है कि जरूरत पड़ेगी तो एएसआई को भी पत्र लिखेंगे।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-the-temple-in-sambhal-now-four-tunnel-like-rooms-found/article-98431</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-the-temple-in-sambhal-now-four-tunnel-like-rooms-found/article-98431</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 13:27:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/5554-%284%2910.png"                         length="365477"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Maharana Pratap Jayanti: प्रताप की आभा से देदीप्यमान राजस्थान का इतिहास</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[इतिहास में अगणित सफल और विजेता शासक रहे हैं, लेकिन नैतिक सत्ता बहुत कम शासकों के पास रही है। प्रताप इस मामले में अपनी एक अलग कहानी लेकर चलते हैं, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य की सरहदों को लांघती हुई रौशनी बांटती है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/history-of-rajasthan-resplendent-with-prataps-aura/article-46257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/2_21111.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरज कभी किसी नुजूम का हिस्सा नहीं बनता; क्योंकि वह हुजूम का हिस्सा नहीं होता। महाराणा प्रताप के जीवन का सच भी कुछ ऐसा ही है। हमारे इतिहास में बहुत शूरवीर और न्यायकारी शासक हुए हैं, लेकिन प्रताप इस भीड़ में भी सबसे अलग हैं। वे ऐसे संघर्षशील शासक रहे, जो आज के भारत की प्रेरणा हो सकते हैं। इतिहास में अगणित सफल और विजेता शासक रहे हैं, लेकिन नैतिक सत्ता बहुत कम शासकों के पास रही है। प्रताप इस मामले में अपनी एक अलग कहानी लेकर चलते हैं, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य की सरहदों को लांघती हुई रौशनी बांटती है।</p>
<p>इतिहास में मेवाड़ का गौरवगान तो बहुत ही होता है। उसके शौर्य की उंगलियां थामकर ही हमारा इतिहास एक अनूठा इतिहास बनकर इठलाता है; लेकिन समाज को साथ लेकर चलने और नैतिक सत्ता को बनाए रखने में प्रताप के योगदान को सही से याद नहीं किया जाता। झूठे गर्व की काई से इतिहास के पन्नों को धूल धूसरित करने की कोशिशें हर युग में होती हैं; क्योंकि वर्तमान की शक्तियां अतीत के आंगन को अपनी नासमझियों के गोबर से लीपती हैं। इस मामले में प्रताप का वैभव बहुत अनूठा है। उनके संघर्षों की कोख में नैतिक सत्ता की संस्कृति खिलखिलाती है। हमारी आधुनिक सभ्यता जिस गंगा-जमुनी संस्कृति पर गर्व करती है, वह प्रताप के साथ जीवंत है।</p>
<p>प्रताप का जिक्र आता है तो हल्दीघाटी मानसपटल पर आ जाता है और हल्दीघाटी याद आती है तो हृदय में एक रक्ततलाई उतरती है। अकबर के खिलाफ प्रताप का ऐतिहासिक युद्ध राष्ट्रीय गौरव, स्वाभिमान और स्वतंत्रता का अभियान था। अकबर की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीति थी और महाराणा प्रताप का शासन लोककल्याण से आपूरित था। वे लोक के सेवक थे। उन्होंने अपने आपको कभी शासक माना ही नहीं। वह युद्धभूमि में भी मानवीय मूल्यों को आगे रखकर वीरता की आभा बिखेरता था। सैनिकों के साथ खुद लड़ता था। अकबर की तरह आदेश देकर युद्ध भूमि से दूर नहीं बना रहता था।</p>
<p>मुसलमान अकबर का सेनापति हिन्दू मानसिंह था। चालाक अकबर युद्ध में सदैव यही रणनीति काम में लेता था। मुसलमान शासक के खिलाफ मुसलमान सेनापति को भेजता और हिन्दू शासक के खिलाफ हिन्दू सेनापति। इन दोनों ही तरह की सेनाओं में आम तौर पर हिन्दू सैनिक होते थे, इसलिए उन्हें नृशंसता से काटने के लिए वह मुगल, अफगानी, ईरानी, उज्बेकी और तातार सैनिक युद्ध भूमि में भेजता था, जो भारतीय धरा में पले लोगों से कहीं अधिक क्रूर और हिंसक स्वभाव वाले होते थे। लेकिन प्रताप ने अकबर की रणनीति को बहुत सही भांपा और उन्होंने अकबर के खिलाफ हल्दीघाटी में अपने साथ हकीम खां सूर को सेनापति की तरह रखा।</p>
<p><strong>साहित्यकार कमलेश्वर ने लिखा है </strong>: हकीम खां सूर ने अपने रक्त का अर्घ्य चढ़ाकर बलिदान देने से पहले महाराणा प्रताप से प्रार्थना की थी कि हे मेवाड़ के मालिक, मुझे और मेरे जांबाज सैनिकों को हरावल में लड़ने की इज्जत बख्शें। फिर देखना कि मुसलमान पठान अपने कौल पर कैसे मर मिटता है। जहां आपका पसीना बहेगा, उस मिट्टी को पठान अपने खून से जरखेज कर देगा। कसम खु़दा की, मरने पर भी ये पठान अपनी शमशीर नहीं छोड़ेगा। मुसलमान पठान अपनी जान हार सकता है, लेकिन अपना कौल नहीं। कमलेश्वर लिखते हैं : और इतिहास की जनस्मृति साक्षी है, हल्दीघाटी के इस अमर शहीद के मुर्दा हाथों से तलवार नहीं छुड़ाई जा सकी। अंतत: शहीद हकीम खां सूर को उनकी तलवार सहित दफनाया गया। तभी तो मेवाड़ याद करता है, उनकी स्वामिभक्ति और वतनपरस्ती को मेवाड़ में धर्मनिरपेक्षता की परंपरा सेक्युलरिज्म की अवधारणा से भी पुरानी रही है। यह शब्द वैसे तो यूरोप में पुनर्जागरण काल में अस्तित्व में आया, लेकिन उस वक्त से पहले महाराणाओं ने इस शब्द की भावाभिव्यक्ति को कहीं गहरे तक सींचा था। यह हैरानी की बात है कि उदयसिंह के तीन बेटों के नाम मुस्लिम जैसे हैं। जैसे खानसिंह, सुलतानसिंह और साहेब खान। मैंने इस बारे में एक बार महाराणा परिवार के प्रतिनिधि श्रीजी हुजूर अरविंदसिंह जी से पूछा तो वे बोले : यह भी उस समय का एक गुडविल गेस्चर था।</p>
<p>महाराणा प्रताप ही वह पहले शासक थे, जिन्होंने 'भीली जायो, राणी जायो भाई भाई' जैसा नारा दिया। प्रताप ने कभी हिन्दू या मुसलमान अथवा राजपूत-पठान की भावना को काम नहीं करने दिया। उन्होंने तो राष्ट्रीयता की भावना, कौम के कौल और बलिदानी वीरता पर भरोसा रखा। प्रताप ने ऐसा नहीं किया होता तो मेवाड़ के लोग हकीम खां सूर जैसे योद्धा को पूजते नहीं। हकीम खां सूर को आगे रखना प्रताप को रणनीतिक ही नहीं, मानवीय मूल्यों के हिसाब से बाकी शासकों से अलग करता है। इतिहास में कई ऐसे दौर आए, जब हवाओं में कई तरह से जहर घुला, लेकिन मेवाड़ में हर कहीं हकीम खां सूर की शूरवीरता महाराणा प्रताप की छवि के साथ चेतना की तलवार लिए साथ खड़ी हो जाती है। यहीं मुंह से सहसा निकल पड़ता है कि कुछ अनूठापन कहीं देश में है तो वह यहीं है, क्योंकि हल्दीघाटी की रक्ततलाई से जो आभा फूटती है, उसी से हमारे इतिहास का चेहरा देदीप्यमान है।</p>
<p><strong>त्रिभुवन</strong><br /><br /></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/history-of-rajasthan-resplendent-with-prataps-aura/article-46257</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/history-of-rajasthan-resplendent-with-prataps-aura/article-46257</guid>
                <pubDate>Mon, 22 May 2023 10:52:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-05/2_21111.jpg"                         length="183665"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इतिहास में कई योग्य लोगों को उचित दर्जा नहीं प्राप्त हुआ : सीतारमण</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[केंद्रीय मंत्री ने बरफुकन को सच्चा देशभक्त बताया जिन्हें अपनी मातृभूमि के संरक्षण के लिए सर्वश्रेष्ठ देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा अहोम सैनिक और प्रमुख कमांडर लचित बरफुकन ने असम की सुरक्षा सुनिश्चित की है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sitharaman-many-deserving-people-in-history-did-not-get-proper/article-30570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र में रही कांग्रेस की सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि देश के इतिहास में उल्लेखनीय योगदान करने वाले लोगों को उचित दर्जा नहीं मिला है। सीतारमण ने महान योद्धा लचित बरफुकन की 400वीं जयंती पर आयोजित 3 दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन कहा कि बीते 70 वर्षों में उल्लेख के पात्र लोगों को इतिहास में उचित दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने बरफुकन को सच्चा देशभक्त बताया जिन्हें अपनी मातृभूमि के संरक्षण के लिए सर्वश्रेष्ठ देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा अहोम सैनिक और प्रमुख कमांडर लचित बरफुकन ने असम की सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि असम और उसके लोगों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए उल्लेखनीय योगदान दिए हैं। इसमें अहोम असाधारण थे। असम और इसके पड़ोसी इलाकों को आक्रमणों से सुरक्षित रखा गया। असम में आक्रमण की 17 कोशिशों को रोकना आसान कार्य नहीं है।</p>
<p>निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिस तरह से अहोम वंश ने असम को संरक्षित किया। इसने एक बड़ी किलेबंदी के रूप में भी काम किया है। जिसने पूरे दक्षिण पूर्व एशिया को निर्मम आक्रमणों से बचाया है, और आक्रमणकारी इससे आगे नहीं बढ़ पाए। केंद्रीय मंत्री ने सर्वश्रेष्ठ देशभक्त को याद करने की इस पहल पर असम सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उत्तर पूर्व के कम याद किए जाने वाली हस्तियों को प्रदर्शित करने का एक शानदार प्रयास है। हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सदियों से इतिहास को अलग-अलग तरीकों से दर्ज करने के लिए मैं असम की संस्कृति से बेहद प्रभावित हूं। इसमें इतिहास को विभिन्न तरीकों से दर्ज किया गया है। उन्होंने इस दौरान सांस्कृतिक मंत्रालय से असम सरकार के साथ हाथ मिलाने का आग्रह किया जिसमें देश के महान योद्धाओं के इतिहास को एकत्रित किया जाए और इसका प्रचार किया जाए।</p>
<p>इससे पूर्व असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने अपने संबोधन में कहा कि अगर अहोम मुगल आक्रमण को चकनाचूर नहीं करते तो आज दक्षिण पूर्व एशिया का मानचित्र कुछ अलग ही होता। </p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/sitharaman-many-deserving-people-in-history-did-not-get-proper/article-30570</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/sitharaman-many-deserving-people-in-history-did-not-get-proper/article-30570</guid>
                <pubDate>Wed, 23 Nov 2022 20:10:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-11/sitaraman.jpg"                         length="142165"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बहनें, जिन्होंने भाइयों की रक्षा की और धर्म-इतिहास में नाम लिखवाया </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[यह पंद्रहवीं सदी का सच्चा किस्सा है। करणी माता उन दिनों जीवित थीं और उनका बहुत सम्मान था। मुलतान का शासक हुसैन खां लंगा पूगल के राव शेखा को युद्ध में पराजित कर गिरफ्तार कर ले गया। राव शेखा के परिजन करणी माता से मिलकर मदद मांगने आए।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sisters-who-protected-brothers-and-got-their-names-inscribed-in-history/article-18687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/capture-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>रक्षाबंधन वैसे तो बहन की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भाई के कर्तव्य की याद दिलाने वाला त्योहार है, लेकिन राजस्थान के जर्रे-जर्रे में ऐसी कहानियां भी बिखरी हुई हैं, जिनमें कुछ बहनों ने भाइयों की आगे बढ़कर रक्षा की। आइए, हम आज आपको ऐसी बहनों से मिलवाते हैं, जिन बहनों ने भाइयों की ऐसी रक्षा की कि उनके किस्से जानकर आप हैरान रह जाएंगे।</p>
<p><strong>करणी माता ने भाई पीरों की मदद से राव शेखा को रिहा करवाया, रिश्ता ऐसा कि 1947 तक मुस्लिम पीर मामा की सिलाड़ के रूप में प्रसाद भेजते थे</strong></p>
<p>यह पंद्रहवीं सदी का सच्चा किस्सा है। करणी माता उन दिनों जीवित थीं और उनका बहुत सम्मान था। मुलतान का शासक हुसैन खां लंगा पूगल के राव शेखा को युद्ध में पराजित कर गिरफ्तार कर ले गया। राव शेखा के परिजन करणी माता से मिलकर मदद मांगने आए। वजह थी करणी माता को मुलतान के पीर बहन मानते थे। वे गईं। भाइयों के घर जाकर बैठ गईं। पीरों ने हुसैन खां लंगा को आदेश दिया कि शेखा को सम्मान रिहा करें। हुसैन खां ने न केवल राव शेखा को रिहा किया, उनके साथ अपने दो सैनिक भी भेजे। राव शेखा को पूगल सुरक्षित छोड़कर जाने लगे तो राव ने दोनों के हाथ पकड़कर कहा, आप नहीं जाएंगे। यहीं रहेंगे। वे वहीं रहे। उन्हें बेहद सम्मान मिला। उनकी मृत्यु हुई तो राव शेखा ने उनके सम्मान में खानकाहें बनवाईं, जहां आज भी उनके सम्मान में पूजापाठ और कव्वालियां होती हैं। करणीमाता और पीरों का यह रिश्ता इतना मजबूत रहा कि 1947 तक यानी सरहद बनने तक मुलतान से मुस्लिम पीर मामा की सिलाड़ के रूप में करणी माता के भक्तों के लिए प्रसाद भेजते थे। करणी माता के हिन्दू भक्त उनके पुत्र के समान हुए तो मां के भाई यानी मुस्लिम पीर उनके मामा! ये रिश्ता नाखून और चमड़ी जैसा रहा है।</p>
<p><strong>जीण ने सिर्फ भाई हर्ष की ही नहीं, सभी समाजों के भाइयों की रक्षा की</strong><br />ऐसा ही एक और नाम है जीण माता का, जिनकी याद में आज भी सीकर में प्रसिद्ध मंदिर है। जीण बहन का भाई हर्ष की पत्नी से विवाद हुआ तो वह तपस्या करने लगी। यह तपस्या सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं, सबके लिए हुई और जीण एक जाति विशेष के बजाय सभी धर्म और जातियों के लिए पूजनीय हो गई। जीण माता आज भी हर भाई की रक्षा के लिए तत्पर हैं।</p>
<p><strong>रोक्षन्ना ने राजा पुरु को राखी बांधकर सिकंदर को न मारने का वचन लिया</strong><br />यह बात ईसा से तीन सदी पहले की है, जिसमें सिकंदर भारत पर आक्रमण के लिए आया तो उसने भारतीय संस्कृति के उन पहलुओं का भी फायदा उठाया, जिसमें शत्रु के प्रति भी सदाशयता दिखाना कर्तव्य माना जाता था। सिकंदर की पत्नी रोक्षन्ना ने बड़ी ही चतुराई से पति के शत्रु पुरु को राखी बांधकर वचन ले लिया था कि युद्ध में अगर सिकंदर पराजित भी हो जाएं तो पुरु अपनी बहन को वैधव्य का कलंक नहीं देगा। पुरु ने इस बात को माना और एक मौके पर सिकंदर बचा भी। कहते हैं, बाद में सिकंदर ने भी पुरु के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार किया और उन्हें शाासक ही रहने दिया।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sisters-who-protected-brothers-and-got-their-names-inscribed-in-history/article-18687</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sisters-who-protected-brothers-and-got-their-names-inscribed-in-history/article-18687</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Aug 2022 12:14:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-08/capture-copy1.jpg"                         length="276927"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC के फाइनल रिजल्ट में गुदड़ी के लालों ने रचा इतिहास</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[गंगापुर सिटी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 का फाइनल रिजल्ट सोमवार को जारी किया। 685 कैंडिडेट्स पास हुए हैं। इसमें गंगापुर सिटी क्षेत्र से वंदना मीणा, सिद्धार्थ बरवाल, गगन मीणा, अभिषेक मीणा, अंशुल नागर भी शामिल है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/itihas.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गंगापुर सिटी।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 का फाइनल रिजल्ट सोमवार को जारी किया। 685 कैंडिडेट्स पास हुए हैं। इसमें गंगापुर सिटी क्षेत्र से वंदना मीणा, सिद्धार्थ बरवाल, गगन मीणा, अभिषेक मीणा, अंशुल नागर भी शामिल है। इन अभ्यर्थियों ने रोजाना 7-8 घंटे और परीक्षा के दिनों में 15-16 घंटे तक पढ़ाई की और सफलता हासिल की। इनकी सफलता पर दैनिक नवज्योति ने इनसे बातचीत की</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>वंदना मीणा को मिली 331वीं रैंक</strong> </span>: एक छोटे से गांव टोकसी की बेटी ने यूपीएससी एक्जाम के्रक कर साबित कर दिया कि प्रतिभाएं किसी की मोहताज नहीं होती हैं। कल तक गांव की एक साधारण सी लड़की आज गांव के युवाओं की हीरो हो गई है। बात कर रहे हैं वंदना मीणा की जिसने आईएएस एक्जाम में 331वीं रैंक हासिल कर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर दिया। पढ़ाई में शुरू से ही प्रतिभाशाली रही वंदना ने अपना ग्रेजुएशन 2018 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य नरेंद्र जैन कॉलेज से किया। उन्होंने मैथ्स में आॅनर्स के साथ ग्रेजुएट किया। वंदना के पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में हैं और मां संपति देवी गृहिणी हैं। वंदना के अनुसार सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उसने परीक्षा के दिनों में 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई की। साल के बाकी दिनों में करीब 10 घंटे रोजाना पढ़ाई करना उसका रूटीन रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सिद्धार्थ बोले</strong></span>- मैं कर्मयोगी हूं, भारतीय लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2021 के जारी हुए परिणामों में सिद्धार्थ बरवाल ने एसटी वर्ग में 18वीं रैंक हासिल की है। सिद्धार्थ के पिता बीएल मीणा अभी एक पखवाड़े पहले तक गंगापुर में मंडी सचिव थे, उनका हाल ही में जयपुर स्थानांतरण हुआ है। वहीं माता नीलम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। सिद्धार्थ का कहना है कि मैं कर्मयोगी हूं। कर्म पर विश्वास करता हूं। 2021 में आईआईटी कानपुर पास आउट होने के बाद आईपीएस में सफलता हासिल करने का लक्ष्य बनाया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अंशुल नागर को भी मिली सफलता</strong></span> : बामनवास के गांव कोयला के निवासी अंशुल नागर का भी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में चयन हुआ है। अंशुल के पिता डॉ. बीएल नागर फिलहाल निवाई में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं। अंशुल ने अपनी स्कूली शिक्षा एम्मानुएल मिशन स्कूल से की जबकि उच्च माध्यमिक परीक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर तीन जयपुर से प्राप्त की।<br />तनुश्री को पहले प्रयास में मिली सफलता:बामनवास का एक छोटा सा गांव है नाहरसिंह पुरा। इसी गांव की एक बेटी तनुश्री मीणा ने सफलता की नई इबारत लिख दी। तनुश्री का पहले ही प्रयास में आईएएस में चयन हो गया है। तनुश्री के पिता पुरुषोत्तम मीणा बीएसएनएल में अधिशासी अभियंता हैं और मां नारंगी देवी गृहिणी हैं। तनुश्री की पूरी शिक्षा जयपुर में ही हुई और उसने पहले ही प्रयास में आईएएस क्रेक किया।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>रोज 7-8 घंटे की पढ़ाई से मिली सफलता:</strong></span> सिविल सेवा परीक्षा में गगन सिंह मीणा का चयन आईएएस में हुआ है। गगन के पिता चरण सिंह मीणा किसान है और मां बच्ची देवी गृहिणी है। गगन के एक भाई है जो रेलवे में ईसीआरसी विभाग में कार्यरत है। गगन प्रतिदिन 7-8 घंटे नियमित पढ़ाई करते और उनका सपना आईएएस बनना था। हाल ही जारी की गई मेरिट में गगन को 592वीं मैरिट मिली है।<br />अभिषेक को मिली 670 वीं रैंक: इसी तरह इसी गांव मीणा बड़ौदा के अभिषेक मीणा का चयन यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में हुआ है। अभिषेक के पिता देशराज मीणा जलदाय विभाग में एसई है जबकि मांग सुशीला देवी गृहिणी है। अभिषेक बताते है कि उन्होंने जयपुर से बी-टेक कर दिगी से आईएस की तैयारी शुरू की और आईएएस बनना उनका सपना था। आईएएस की सूची में अभिषेक को 670वीं रैंक मिली है।<br /><br /><br /></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 12:45:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/itihas.jpg"                         length="42581"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड ब्रिज चैंपियनशिप : फाइनल में पोलैंड से होगा मुकाबला</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बरमुडा बाउल का फाइनल स्विटजरलैंड और नीदरलैंड के बीच]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports-news--world-bridge-championship--india-will-face-poland-in-the-final--india-made-history-by-defeating-france-to-reach-the-finals-for-the-first-time/article-7667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/23.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। इटली में खेली जा रही 45वीं वर्ल्ड ब्रिज चैंपियनशिप में शुक्रवार को भारत की सीनियर टीम ने नया इतिहास रच दिया। भारत ने सेमी फाइनल में फ्रांस को 225-197 अंकों से पराजित कर पहली बार डी ओरसी कप सीनियर टीम चैम्पियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया है। फाइनल में भारत का मुकाबला पोलैंड से होगा। पोलैंड ने दूसरे सेमी फाइनल में डेनमार्क को 232-195 अंकों से शिकस्त दी। ब्रिज फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और राजस्थान ब्रिज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीनबंधु चौधरी ने आज यहां बताया कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत पहली बार फाइनल में पहुंचा है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2019 में वुहान वर्ल्ड चैंपियनशिप में रहा, जहां टीम ने कांस्य पदक जीता। भारत ने आज छठे और आखिरी सत्र में 48 अंकों की मजबूत बढ़त के साथ शुरुआत की। गैर खिलाड़ी कप्तान और कोच रामरत्नम कृष्णन की अगुवाई में राजेश दलाल, सुकामल दास, अनिल पांडे, सुब्रत साहा और अशोक कुमार की भारतीय टीम ने हालांकि आखिरी सत्र में 21-41 का ही स्कोर बनाया लेकिन कुल 225-197 के स्कोर के साथ भारतीय टीम फाइनल में पहुंचने में सफल रही।<br /><br /><strong>बरमुडा बाउल का फाइनल स्विटजरलैंड और नीदरलैंड के बीच</strong><br />बरमुडा बाउल ट्रॉफी के लिए पुरुष टीम चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला स्विटजरलैंड और नीदरलैंड्स के बीच खेला जाएगा। स्विटजरलैंड ने सेमी फाइनल में यूएसए-1 और 230-182 अंकों से पराजित किया, वहीं दूसरे सेमी फाइनल में नीदरलैंड्स ने नॉर्वे को 192-78 अंकों से शिकस्त दी। <br /><br /><strong>स्वीडन और टर्की महिला वर्ग के फाइनल में</strong><br />स्वीडन ने कड़े मुकाबले में पोलैंड को 215-213 अंकों से पराजित कर वेनिस कप महिला टीम चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में स्वीडन का मुकाबला टर्की से होगा, जिसने दूसरे सेमी फाइनल में इंग्लैंड को 236-193 अंकों से हरा फाइनल में जगह बनाई। वुहान कप मिश्रित टीम चैंपियनशिप का फाइनल फ्रांस और यूएसए-1 के बीच होगा। फ्रांस ने सेमी फाइनल में जर्मनी को 228-154 से और यूएसए-1 ने इटली को 221-151 अंकों से हरा फाइनल में जगह बनाई।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/sports-news--world-bridge-championship--india-will-face-poland-in-the-final--india-made-history-by-defeating-france-to-reach-the-finals-for-the-first-time/article-7667</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/khel/sports-news--world-bridge-championship--india-will-face-poland-in-the-final--india-made-history-by-defeating-france-to-reach-the-finals-for-the-first-time/article-7667</guid>
                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 13:29:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/23.jpg"                         length="75917"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Administrator]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधायक दल के नेता चुने गए योगी, बाबा की ताजपोशी कल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पद के लिए योगी के नाम का ऐलान किया।  ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/yogi-adityanath-elected-the-leader-of-the-legislature-party--yogi-will-create-history--more-than-50-thousand-guests-will-be-the-witnesses-of-the-coronation/article-6670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/yogi_amit-shah_new.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। यूपी चुनाव जीतने के बाद गुरूवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई। योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुना गया।  गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पद के लिए योगी के नाम का ऐलान किया। जिसके बाद राजभवन पहुंचकर राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया।</p>
<p>करीब 37 साल के लंबे अंतराल के बाद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने का इतिहास रचने जा रहे योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी का गवाह शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत 50 हजार से अधिक मेहमान बनेंगे। शपथ ग्रहण समारोह कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में 25 मार्च को शाम चार बजे से शुरू होगा। इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिये भाजपा और प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह के अलावा कई केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।</p>
<p>राजधानी लखनऊ को इस खास मौके के लिये विशेष रूप से सजाया संवारा गया है। तिरंगे की रोशनी से सजे चौक चौराहे, दुकानों पर भगवा रंग से लहराते झंडे,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के बड़े बड़े कटआउट, फूलों से सजे मंदिर भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार की तस्कीद करते दिखायी दे रहे हैं। इसके अलावा अयोध्या,वाराणसी, मथुरा समेत अन्य जिलों में भी यही नजारा दिख रहा है। लखनऊ के सभी मंदिरों में शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए विशेष पूजा अर्चना की जाएगी, वहीं व्यापार मंडल ने शपथ के बाद मिष्ठान वितरण की व्यवस्था की है।</p>
<p> योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले 1985 में कांग्रेस ने यह कारनामा कर दिखाया था जब 1980 के बाद प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार दोबारा आयी थी।  योगी के अलावा कई अन्य नवनिर्वाचित विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कई नये चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दिये जाने की प्रबल संभावना है जबकि पहले कार्यकाल में मंत्री रहे कुछ नेताओं को पार्टी संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है हालांकि इसकी तस्वीर कल शपथ ग्रहण समारोह के बाद साफ हो सकेगी। कल के शपथ ग्रहण समारोह में हजारों निगाहें यह भी देखेंगी कि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को क्या इसी पद पर दोबारा मौका मिलेगा क्योंकि मौर्य कौशांबी के सिराथू से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। कयास लगाये जा रहे हैं कि जिस तरह उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को हार के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली है, वह नजारा यहां भी दोहराया जा सकता है। <br /><br />शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रामनाईक, भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) की अध्यक्ष एवं केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और निषाद पार्टी के अध्यक्ष के अलावा मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अध्यक्ष जयंत चौधरी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को न्योता भेजा गया है।</p>
<p> इसके अलावा 11 राज्यों के मुख्यमंत्री और पांच राज्यों के उपमुख्यमंत्री इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिये आयोजन स्थल पर मौजूद रहेंगे। इनमे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के सीएम मोहन लाल खट्टर, अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मणिपुर के मुख्यमंत्री एम बिरेन सिंह, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, त्रिपुरा के सीएम बिप्लव कुमार देब, गोवा के मुख्यमंत्री डा प्रमोद सांवत, असम के सीएम हिम्मत बिस्वा शर्मा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और गुजरात के सीएम भूपेन्द्र पटेल शामिल हैं। इसके अलावा बिहार के उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद एवं रेणु देवी समेत अरूणाचल प्रदेश,त्रिपुरा और नगालैंड के उप मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल की शोभा बढायेंगे।  शपथ ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश भर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है। इकाना स्टेडियम की क्षमता करीब 55 हजार दर्शकों की है। इसके अलावा मैदान पर भी अतिविशिष्ट मेहमानों, विधायकों के बैठने की व्यवस्था की गयी है। <br /><br />शपथ ग्रहण का भव्य नजारा स्टेडियम पर लगी विशाल स्क्रीन पर देखा जा सकेगा जबकि स्टेडियम के बाहर और शहर के कई हिस्सों में शपथ ग्रहण समारोह का सजीव प्रसारण दिखाने की व्यवस्था की गयी है। इस दौरान स्टेडियम और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के जवान तैनात किये गये है। शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने आने वाले अतिथियों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिये कुछ स्थानों पर रूट डायवर्जन किया जा रहा है मगर इससे यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों को कोई असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया है। व्यवधान की स्थिति में छात्र छात्राओं के लिये विशेष टोल फ्री नम्बर जारी किये गये है। <br /><br />शपथ ग्रहण समारोह में टाटा ग्रुप के एन चन्द्रशेकरन, अम्बानी ग्रुप के मुकेश अम्बानी, आदित्य बिरला ग्रुप के कुमार मंगलम बिरला, अडानी ग्रुप के गौतम अडानी, महिन्द्रा ग्रुप के आन्नद मङ्क्षहद्रा जैसे बड़े उद्योगपति शामिल होंगे। इसके अलावा कश्मीर फाइल्स की पूरी टीम के साथ बालीवुड अभिनेता अक्षय कुमार, कंगना राणावत समेत कई जानेमाने चेहरे भी शपथ ग्रहण समारोह में आकर्षण का केन्द्र बनेंगे।<br /><br />स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों तरफ 200-200 मीटर का क्षेत्र  नरेंद्र मोदी,  जेपी नड्ढा,  राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ की होर्डिंग्स से पट गया है। अमौसी एयरपोर्ट से स्टेडियम तक 150 वर्टिकल गार्डन व स्टेडियम के आसपास चार हजार गमलों की व्यवस्था की गई है।  मुख्य प्रवेश द्वार के बाएं तरफ मोदी की एक साथ मीन होर्डिंग्स को लगाया गया है। पहली होर्डिंग्स में मोदी ग्रे कलर की सदरी, दूसरी में बंद गले के सूट एवं तीसरी में भगवा कुर्ता पहने शपथ ग्रहण समारोह में आने वाले लोगों की अभिवादन की मुद्रा में थे।<br /><br /> शपथ को लेकर सोशल मीडिया पर मोदी योगी के साथ कई आर्कषक हैशटैग चल रहे हैं। जिसमें आ गए महाराज जी छा गए महाराज जी, यूपी में फिर से भाजपा सरकार, योगी मय हुआ यूपी, योगी ही उपयोगी, जय भाजपा आ गई भाजपा जैसे हेशटैग वहीं योगी जी आए हैं, जो राम को लाए हैं, बाबा का बुलडोजर जैसे गीत लोगों में और भी उत्साह भर रहे हैं। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/yogi-adityanath-elected-the-leader-of-the-legislature-party--yogi-will-create-history--more-than-50-thousand-guests-will-be-the-witnesses-of-the-coronation/article-6670</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/yogi-adityanath-elected-the-leader-of-the-legislature-party--yogi-will-create-history--more-than-50-thousand-guests-will-be-the-witnesses-of-the-coronation/article-6670</guid>
                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 19:13:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/yogi_amit-shah_new.jpg"                         length="62043"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Administrator]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अब जेईई-मेन की तर्ज पर इतिहास में पहली बार दो सेशन में होगी बिटसेट परीक्षा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[परीक्षा पैटर्न भी बदला]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-changes-for-the-first-time--now-on-the-lines-of-jee-main--for-the-first-time-in-history--bitsat-exam-will-be-held-in-two-sessions/article-6298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/exam_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेईई-मेन के बाद देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के रूप में जाने जानी वाली बिटसेट (बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी प्रवेश परीक्षा) इतिहास में पहली बार दो सेशन में होगी। बिटसेट परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा कि यह परीक्षा भी दो बार होगी। देश के इंजीनियरिंग संस्थान बिट्स पिलानी की प्रवेश परीक्षा बिटसेट में इस वर्ष बड़े बदलाव किए गए हैं। इसके साथ ही आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। जेईई-मेन की भांति ही इस वर्ष यह परीक्षा दो सेशन में करवाई जा रही है। परीक्षा का पहला सेशन 20 से 26 जून के मध्य तथा दूसरा सेशन 22 से 26 जुलाई के मध्य आयोजित की जाएगी। विद्यार्थियों को दोनों सेशन में बैठने का अवसर मिलेगा। दोनों सेशन में परीक्षा देने पर उच्चतम बिटसेट स्कोर के आधार पर बिट्स में प्रवेश दिया जाएगा। विद्यार्थी 21 मई तक बिट्स के दोनों परीक्षा सेशन के लिए एक साथ आवेदन कर सकते हैं। विद्यार्थी चाहे तो अभी पहले सेशन के लिए आवेदन कर सकता है और दूसरे सेशन के लिए आवेदन करने का उसे पुन: मौका दिया जाएगा। दोनों सेशन के आवेदन करने के लिए आवेदन शुल्क 5400 रुपए छात्रों एवं 4400 रुपए छात्राओं के लिए रखा गया है।<br /><br /><strong>बदले पैटर्न में होगी परीक्षा</strong><br />बिट्सेट-2022 के परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव किया गया है। इस वर्ष यह परीक्षा 130 प्रश्नों की होगी, जिसमें फिजिक्स, कैमेस्ट्री के 30-30 प्रश्न, मैथ्स के 40 प्रश्न, इंग्लिश प्रोफिशियंसी के 10 प्रश्न, लॉजिकल रीजनिंग के 20 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न का सही उत्तर देने पर 3 अंक दिए जाएंगे और गलत उत्तर देने पर 1 नम्बर की ऋणात्मक मार्किंग रहेगी, पूरा प्रश्नपत्र 390 अंकों का होगा, जबकि गत वर्ष तक बिट्स में 150 प्रश्न पूछे जाते थे और कुल पेपर 450 अंकों का होता था। ऐसे में अब विद्यार्थियों को गत वर्ष के मुकाबले 20 प्रश्न कम हल करने होंगे। बदले पैटर्न में फिजिक्स, कैमेस्ट्री के 10-10 प्रश्न एवं मैथ्स व इंग्लिश प्रोफिशियंसी में 5 प्रश्न कम किए गए हैं, अपितु लॉजिकल रिजनिंग के 10 प्रश्न बढ़ा दिए हैं। <br /><br /><strong>यह होगी पात्रता</strong><br />आईआईटी एनआईटी में प्रवेश के लिए इस वर्ष बोर्ड पात्रता को हटा दिया गया है, परन्तु बिट्स पिलानी में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को 12वीं बोर्ड परीक्षा में फिजिक्स, कैमेस्ट्री, मैथ्स में औसतन 75 प्रतिशत अंकों की बोर्ड पात्रता को पूरा करना अनिवार्य है। कॅरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहूजा ने बताया कि इसके अतिरिक्त इन तीनों विषयों में अलग-अलग विद्यार्थियों को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। यह बोर्ड पात्रता सारी कैटेगिरी के लिए समान रूप से लागू होगी।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-changes-for-the-first-time--now-on-the-lines-of-jee-main--for-the-first-time-in-history--bitsat-exam-will-be-held-in-two-sessions/article-6298</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-changes-for-the-first-time--now-on-the-lines-of-jee-main--for-the-first-time-in-history--bitsat-exam-will-be-held-in-two-sessions/article-6298</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 12:46:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/exam_new.jpg"                         length="36677"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Administrator]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        