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                <title>तमिलनाडु में मंत्रिमंडल विस्तार : कांग्रेस की 59 साल बाद सत्ता में वापसी, जानें कितने विधायक बने मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी 10 दिन पुरानी कैबिनेट का विस्तार करते हुए 23 नए मंत्रियों को शामिल किया है। इसके साथ ही कांग्रेस के दो विधायकों के मंत्री बनने से राज्य में 59 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई है और तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार गठबंधन सरकार का गठन हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tamil-nadu-gets-first-coalition-government-cm-vijay-expands-cabinet/article-154529"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm-vijay.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री एवं टीवीके संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को अपने 10 दिन पुराने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए नये सहयोगी कांग्रेस को इसमें शामिल किया। इसके साथ ही राज्य में 59 वर्ष बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई और तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे द्रविड़ राजनीति के इस गढ़ में लंबे समय से चली आ रही एकदलीय शासन व्यवस्था का अंत हो गया।</p>
<p>तमिलनाडु में गठबंधन युग की शुरुआत विजय के उस चुनावी वादे की भी पूर्ति मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने सहयोगी दलों के साथ सत्ता साझा करने की बात कही थी। इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास में चुनाव बाद हुए पहले बड़े राजनीतिक पुनर्संयोजन के रूप में भी देखा जा रहा है। सीएम विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 10 दिन बाद अपने नौ मंत्रियों वाले मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 23 नये मंत्रियों को शामिल किया, जिनमें कांग्रेस के दो और सत्तारूढ़ टीवीके के 21 विधायक शामिल हैं। राज्यपाल आर. वी. आर्लेकर ने लोक भवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p>शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और तमिल थाई वाझ्तु से हुई। इससे पहले राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की सिफारिश पर 23 विधायकों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने को मंजूरी दी। नये मंत्रियों में तीन महिला मंत्री भी शामिल हैं, जिससे मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़कर चार हो गयी है और कुल मंत्रियों की संख्या 33 हो गयी है। नवनियुक्त मंत्रियों के विभागों की घोषणा शीघ्र किये जाने की संभावना है।</p>
<p>कांग्रेस के दो मंत्रियों में विधायक दल के नेता एस. राजेश कुमार तथा पी. विश्वनाथन शामिल हैं। किलियूर से निर्वाचित राजेश कुमार और मदुरै जिले की मेलूर सीट से जीते विश्वनाथन के मंत्रिमंडल में शामिल होने के साथ ही कांग्रेस का लगभग छह दशक लंबा इंतजार समाप्त हो गया। वर्ष 1967 में के. कामराज और एम. भक्तवत्सलम सरकार की पराजय के बाद राज्य में कांग्रेस शासन समाप्त हो गया था। लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों का मंत्रिमंडल में शामिल होना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के दिन होना महज संयोग नहीं है।</p>
<p>वर्ष 1967 में द्रविड़ राजनीति के उदय के बाद अगले 59 वर्षों तक द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने बारी-बारी से राज्य पर शासन किया। वर्ष 2026 में नयी गठित टीवीके ने इस लंबे द्रविड़ वर्चस्व को समाप्त करते हुए सत्ता हासिल की और राज्य में पहली गठबंधन सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। गठबंधन सरकार की अवधारणा द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों के लिए लंबे समय तक अस्वीकार्य रही थी। वर्ष 2006 में द्रमुक बहुमत से दूर रहकर भी कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बाहरी समर्थन से सरकार चलाने में सफल रही थी, लेकिन कांग्रेस तब सत्ता में साझेदारी नहीं कर सकी थी। इस बार कांग्रेस ने विजय के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मंत्रिमंडल में शामिल होकर लगभग 60 वर्ष पुराना सपना पूरा कर लिया। दो मंत्री पदों के अलावा कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट मिलने की भी संभावना है, जो विद्रोही अन्नाद्रमुक विधायक सी. वे. शण्मुगम के इस्तीफे से रिक्त हुई है।</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने पहले तमिलनाडु कांग्रेस मुख्यालय और श्रीपेरंबदूर स्थित उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और बाद में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, विजय सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के एक-एक विधायक को भी मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने की संभावना है। दोनों दलों ने हालांकि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। सी. वे. शण्मुगम, एस. पी. वेलुमणि और सी. विजयभास्कर के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के विद्रोही गुट को मंत्रिमंडल विस्तार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला। वाम दलों और वीसीके ने उनके शामिल किये जाने का विरोध किया था।</p>
<p>सीएम विजय की पार्टी टीवीके ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती थीं, जिनमें से एक सीट से विजय के इस्तीफे के बाद उसकी संख्या 107 रह गयी। कांग्रेस के पांच, माकपा, भाकपा और वीसीके के दो-दो विधायकों के समर्थन से सरकार ने 118 के बहुमत का आंकड़ा हासिल कर विश्वास मत जीत लिया। मंत्रिपरिषद में शामिल किये गये 23 नये चेहरों में श्रीनाथ, कमली एस., सी. विजयलक्ष्मी, आर. वी. रंजीतकुमार, विनोत, राजीव, बी. राजकुमार, वी. गांधीराज, मधन राजा, जेगदेश्वरी, एस. राजेश कुमार, एम. विजय बालाजी, लोगेश तमिलसेलवन, विजय तमिलन पार्थिबन, रमेश, पी. विश्वनाथन, आर. कुमार, के. थेन्नारसु, वी. संपत कुमार, मोहम्मद फारवस, डी. शरतकुमार, एन. मेरी विल्सन और विग्नेश के. शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:08:55 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : राजस्थान के संग्रहालयों में इतिहास की धड़कनें, हर साल लाखों की संख्या में आते हैं देशी और विदेशी पर्यटक </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के 22 संग्रहालयों में संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटकों को आकर्षित कर रही। वर्ष 2025-26 में 17.92 लाख देशी-विदेशी पर्यटक संग्रहालय पहुंचे, पिछले साल से 86 हजार अधिक। जयपुर का अल्बर्ट हॉल सबसे लोकप्रिय। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-museum-day-the-beats-of-history-in-the-museums/article-154188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)70.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal, serif;">जयपुर।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">राजस्थान</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">राजपूत</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">शौर्य</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">लोक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संस्कृति</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">हथियार</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">पांडुलिपियां</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">चित्रकला</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">मूर्तिकला</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्त्र</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">आभूषण</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">और</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरातात्विक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">धरोहरों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">का</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अनमोल</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रह</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">है।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जयपुर</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">का</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अल्बर्ट</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हॉल</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">प्रदेश</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">का</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सबसे</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">प्रसिद्ध</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">है</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">जो</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इजिप्ट</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">की</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">ममी</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">प्राचीन</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सिक्के</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">हथियारों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">और</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">दुर्लभ</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">कलाकृतियों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">लिए</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जाना</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जाता</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">है।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">कहा</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जाए</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">तो</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">प्रदेश</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरातत्व</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">एवं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विभाग</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अधीन</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">करीब</span> 22 <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इन</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">तकरीबन</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">दो</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">लाख</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">से</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अधिक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरा</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इनमें</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">से</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">करीब</span> 25 <span style="font-family:Mangal, serif;">से</span> 30 <span style="font-family:Mangal, serif;">हजार</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरा</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटकों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अवलोकनार्थ</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">प्रदर्शित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जबकि</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">बाकि</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">स्टोर</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सुरक्षित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:Mangal, serif;">साल</span> 2025-26 <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 17,92,129 <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटकों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">ने</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">निहारी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">दुर्लभ</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं :</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal, serif;">पुरातत्व</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">एवं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विभाग</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अधीन</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">करीब</span> 22 <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">साल</span> 2025-26 <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 17,92,129 <span style="font-family:Mangal, serif;">देशी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">और</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विदेशी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटकों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">ने</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विभिन्न</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरावस्तुओं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">को</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">देखा।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सबसे</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अधिक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जयपुर</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अल्बर्ट</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हॉल</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 10,57,551 <span style="font-family:Mangal, serif;">आए।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वहीं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">राजकीय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">चित्तौड़गढ़</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 3,87,847, <span style="font-family:Mangal, serif;">भरतपुर</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 1,15,839, <span style="font-family:Mangal, serif;">अजमेर</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 76,774,<span>  </span><span style="font-family:Mangal, serif;">मण्डोर</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 72,672 <span style="font-family:Mangal, serif;">सहित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अलवर</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">कोटा</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">झालावाड़</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">पाली</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">जोधपुर</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">बीकानेर</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">जैसलमेर</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">सीकर</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">बूंदी</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">बारां</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सहित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अन्य</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> 17,92,129 <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">आए।</span></p>
<p class="MsoNormal">2024-25 <span style="font-family:Mangal, serif;">की</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अपेक्षा</span> 2025-26 <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">बढ़ी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संख्या</span>: <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरातत्व</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">एवं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विभाग</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संरक्षित</span> 22 <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span><span>  </span><span style="font-family:Mangal, serif;">एक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अप्रेल</span>, 2024 <span style="font-family:Mangal, serif;">से</span> 31 <span style="font-family:Mangal, serif;">मार्च</span>, 2025 <span style="font-family:Mangal, serif;">तक</span> 17,05,215 <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">आए।</span> 2025-26 <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इनकी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संख्या</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">बढ़कर</span> 17,92,129 <span style="font-family:Mangal, serif;">हो</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">गई।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इस</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">साल</span> 86,914 <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अधिक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">आए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:Mangal, serif;">पुरानी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">दर्शनीय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">ही</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">नहीं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">ज्ञान</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वर्धक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">भी :</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal, serif;">प्रदेश</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">प्रदर्शित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरानी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">केवल</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">देखने</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">लिए</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">नहीं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अपितु</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">ज्ञानवर्धन</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">भी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इनसे</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटकों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">को</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सालों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरानी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संस्कृति</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">खानपान</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">सहित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अन्य</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">चीजों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">की</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">जानकारी</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">मिलती</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">है।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विभाग</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> 22 <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालयों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">में</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">दो</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">लाख</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">से</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अधिक</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरा</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">इनमें</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">से</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">करीब</span> 30 <span style="font-family:Mangal, serif;">हजार</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरा</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">वस्तुएं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">पर्यटकों</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">के</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">अवलोकनार्थ</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">प्रदर्शित</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong>-<span style="font-family:Mangal, serif;">डॉ</span>. <span style="font-family:Mangal, serif;">पंकज</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">धरेन्द्र</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:Mangal, serif;">निदेशक</span>, <span style="font-family:Mangal, serif;">पुरातत्व</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">एवं</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">संग्रहालय</span> <span style="font-family:Mangal, serif;">विभाग।</span><span>   </span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:20:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर वैक्स म्यूजियम, नाहरगढ़ किले में विश्व संग्रहालय दिवस पर नई पहल की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व संग्रहालय दिवस पर नाहरगढ़ किले में स्थित जयपुर वैक्स म्यूजियम को अत्याधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने की घोषणा की गई है। अगस्त 2026 से पर्यटक हाड़ी रानी के त्याग और किले के इतिहास पर आधारित VR फिल्में और लाइव सेट देख सकेंगे। इसके साथ ही प्रसिद्ध शीश महल में ऑटोमेशन लाइटिंग भी शुरू की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-wax-museum-announces-new-initiative-on-world-museum-day/article-154152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/nahargarh.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर जयपुर वैक्स म्यूजियम, नाहरगढ़ किले ने पर्यटकों के अनुभव को नई ऊंचाई देने की घोषणा की है। म्यूजियम अब केवल वैक्स की प्रतिमाएं नहीं, बल्कि फिल्म और लाइव वर्चुअल सेट के साथ कहानियां भी दिखाएगा। म्यूजियम के फाउंडर डायरेक्टर अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि आज के पर्यटक सिर्फ मूर्ति देखना नहीं चाहते। वे उसे महसूस करना चाहते हैं, वर्चुअल रियलिटी के साथ अनुभव लेना चाहते हैं। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए हम अपने म्यूजियम को नई और अत्याधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर रहे हैं। यह राजस्थान सरकार और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी के विजन के अनुरूप है। मंत्री जी ने पिछले साल म्यूजियम का दौरा किया था और हमने उन्हें वादा किया था कि जयपुर वैक्स म्यूजियम को नई तकनीक से समृद्ध किया जाएगा।</p>
<p>इस पहल की शुरुआत हाड़ी रानी की वैक्स प्रतिमा के साथ होगी। इसके लिए विशेष रूप से 10 मिनट की फिल्म बनाई गई है। पर्यटक 22 सीटों वाले थिएटर में न सिर्फ हाड़ी रानी की मूर्ति देखेंगे, बल्कि उनके त्याग, समर्पण, प्रेम और देशभक्ति की कहानी भी समझेंगे। फिल्म की पोस्ट प्रोडक्शन का काम मुंबई में तेजी से चल रहा है। संग्रहालय  नाहरगढ़ किले के इतिहास पर भी एक विशेष फिल्म तैयार कर रहा है। इसमें बताया जाएगा कि किले को क्यों और कैसे बनाया गया, निर्माण के समय किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, साथ ही सवाई जय सिंह जिन्होंने किले का निर्माण पूरा किया, सवाई माधो सिंह जिन्होंने 9 रानियों का महल बनवाया और नाहर सिंह का भी जिक्र किया जाएगा। इससे नाहरगढ़ आने वाले पर्यटकों को किले की पूरी कहानी समझने में मदद मिलेगी।</p>
<p>आने वाले पर्यटन सीजन से कुछ वैक्स प्रतिमाओं के लिए VR फिल्में भी बनाई जा रही हैं, ताकि पर्यटक अनुभव को और बेहतर तरीके से ले सकें। अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि अगस्त के पहले हफ्ते तक ये सभी बदलाव पर्यटकों को देखने को मिल जाएंगे। अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि देश में कई साधारण वैक्स म्यूजियम  खुले हैं, लेकिन जयपुर वैक्स म्यूजियम देश का एकमात्र म्यूजियम है जो 300 साल पुराने धरोहर किले के भीतर स्थित है। यहां लाइव सेट, साउंड और कहानियों के साथ वैक्स की प्रतिमाएं रखी गई हैं, जिसने इसे देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाया है।</p>
<p>रॉयल फिगर्स और शीश महल जयपुर वैक्स म्यूजियम की खास पहचान हैं। शीश महल में 25 लाख से ज्यादा कांच के टुकड़े और ठिकरी काम के साथ शुद्ध सोने का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा पर्यटकों के अनुभव को और बढ़ाने के लिए शीशमहल की लाइटिंग के ऑटोमेशन पर काम चल रहा है जिससे पर्यटकों को अलग-अलग प्रकार की लाइटिंग से शीशमहल को देखने का एक अद्भुत अनुभव प्राप्त होगा साथ ही वैक्स म्यूजियम के बाहरी एरिया को भी कलरफुल एलईडी लाइट्स से सुसज्जित किया जाएगा जिससे रात में भी पर्यटकों को एक अलग अनुभव प्राप्त हो। यही विशेषताएं जयपुर वैक्स म्यूजियम को जयपुर में एक अनिवार्य दर्शनीय स्थल बनाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 14:46:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि, नीदरलैंड लौटाएगा चोल साम्राज्य काल के प्राचीन ताम्रपत्र</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड दौरे पर चोल सम्राट राजा राज चोल प्रथम के काल के 21 ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत को सौंपे जाएंगे। 12 वर्षों के कूटनीतिक प्रयासों और यूनेस्को के सहयोग से यह सांस्कृतिक धरोहर वापस आ रही है। संस्कृत और तमिल में लिखे ये ताम्रपत्र चोल साम्राज्य की धार्मिक सहिष्णुता और प्राचीन वैश्विक संबंधों के जीवंत प्रमाण हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/netherlands-will-return-ancient-copper-plates-of-chola-empire-period/article-154102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/niderland.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नीदरलैंड दौरे की एक बड़ी उपलब्धि आनईमंगलम चोल ताम्रपत्रों की घर वापसी रहेगी। असल में, नीदरलैंड पीएम मोदी को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर सौंपेगा। चोल वंश के महान सम्राट राजा राज चोल प्रथम के शासनकाल (985-1014 ई) से जुड़े यह 21 ताम्रपत्र भारतीय इतिहास और तमिल विरासत के अति महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं। करीब 30 किलोग्राम वजनी इन ताम्रपत्रों को एक कांस्य वलय से जोड़ा गया है। जिस पर चोल साम्राज्य का राज चिह्न अंकित है। </p>
<p>भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत सरकार ने साल 2012 से इन ताम्रपत्रों की वापसी के लिए प्रयास शुरू किए थे। वर्ष 2023 में यूनेस्को के हस्तक्षेप के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई और भारत के दावे को मान्यता मिली। अब 12 सालों के लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद इन ताम्रपत्रों को भारत को लौटाने पर सहमति बन गई है। इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत की दोबारा प्राप्ति की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। जिन पर संस्कृत और तमिल भाषाओं का उपयोग किया गया है। संस्कृत भाग में चोल वंश की वंशावली का वर्णन है। जिसमें भगवान विष्णु से प्रारंभ कर राजवंश की वैधता को दर्शाया गया है। </p>
<p>वहीं, तमिल भाग में उल्लेख है कि राजा राजा चोल प्रथम ने अपने शासन के 21वें वर्ष में नागपट्टिनम स्थित एक बौद्ध विहार के लिए आनईमंगलम के आसपास के गांवों की संपूर्ण आय दान में देने की घोषणा की थी। यह विहार श्रीविजय के एक मलय शासक द्वारा निर्मित कराया गया था। इतिहासकारों के अनुसार, यह दान चोल साम्राज्य की धार्मिक सहिष्णुता और अंतरराष्टÑीय संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जहां एक शैव हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध संस्थान को संरक्षण दिया गया। यह उस समय के भारत के वैश्विक व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी दर्शाता है। इसके अलावा इस दान की घोषणा भले ही राजाराजा चोल प्रथम ने की थी। लेकिन इसे स्थाई रूप देने का काम उनके पुत्र राजेन्द्र चोल प्रथम ने किया था। उनके आदेश पर ही इन अभिलेखों को ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण कराया गया था। जिससे यह धरोहर आज तक सुरक्षित रह सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:59:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>145 साल पुराने सेंट स्टीफंस कॉलेज को मिली पहली महिला प्रिंसिपल, प्रो. सुसान एलियास संभालेंगी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[सेंट स्टीफंस कॉलेज के 145 साल के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया है। प्रोफेसर सुसान एलियास संस्थान की पहली महिला प्रिंसिपल नियुक्त की गई हैं। वह 1 जून 2026 से कार्यभार संभालेंगी। तीन दशक का अनुभव रखने वाली सुसान की नियुक्ति को बिशप डॉ. पॉल स्वरूप की अध्यक्षता वाली काउंसिल ने मंजूरी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/145-year-old-st-stephens-college-gets-its-first-woman/article-153600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/collage.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध देश के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज ने अपने 145 साल से अधिक लंबे इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रिंसिपल नियुक्त किया है। कॉलेज प्रशासन ने प्रोफेसर सुसान एलियास को संस्थान की 14वीं प्रिंसिपल बनाने की घोषणा की है। वह 1 जून 2026 से अपना कार्यभार संभालेंगी।</p>
<p>कॉलेज की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया कि दिल्ली के बिशप और कॉलेज के चेयरमैन डॉ. पॉल स्वरूप की अध्यक्षता वाली सुप्रीम काउंसिल ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी है। सेंट स्टीफंस कॉलेज लंबे समय तक पुरुष प्रधान संस्थान रहा। शुरुआती वर्षों में कुछ छात्राओं को प्रवेश मिला था, लेकिन 1950 से 1975 तक यह पूरी तरह लड़कों का कॉलेज रहा। बाद में इसे सह-शिक्षा संस्थान बनाया गया।</p>
<p>1881 में स्थापित यह कॉलेज राजनीति, साहित्य, कानून और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अपने नामी पूर्व छात्रों के लिए जाना जाता है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लेखक अमिताव घोष जैसे कई चर्चित नाम इसी संस्थान से जुड़े रहे हैं। आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा सुसान एलियास तीन दशक से अधिक समय का शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव रखती हैं। उन्होंने कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में शोध और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 18:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोमनाथ का पुनर्निर्माण: भारत की स्वतंत्र चेतना और प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना का उद्घोष, पीएम मोदी ने खुद को बताया दादा सोमनाथ का अनन्य भक्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने पर इसे भारत की स्वतंत्र चेतना का प्रतीक बताया। उन्होंने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए मंदिर को सनातन गौरव का केंद्र कहा। पीएम ने 11 मई को पोखरण परमाणु परीक्षण की वर्षगांठ पर भारत की वैज्ञानिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी नमन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/reconstruction-of-somnath-proclamation-of-indias-independent-consciousness-and-restoration/article-153407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/photoo.png" alt=""></a><br /><p>सोमनाथ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि 75 वर्ष पहले शुरू हुआ सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की स्वतंत्र चेतना और प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना का उद्घोष था। पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में विग्रह प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित 'अमृत महोत्सव' को संबोधित करते हुए कहा कि "समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं और काल स्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और सनातन चेतना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा, "ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है, आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, उन्हीं की शरण में आज सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है।" पीएम मोदी ने स्वयं को "दादा सोमनाथ का अनन्य भक्त" बताते हुए कहा कि वह अनेक बार यहां आ चुके हैं, लेकिन इस बार यहां पहुंचते हुए उन्हें "समय की यात्रा" का विशेष अनुभव हुआ।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 75 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक था। पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत की नींव रखी और सोमनाथ के पुनर्निर्माण के माध्यम से दुनिया को संदेश दिया कि भारत केवल स्वतंत्र ही नहीं हुआ है, बल्कि अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त करने के मार्ग पर भी अग्रसर है। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया था और अब प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का अवसर मिला है। उन्होंने इसे "हजार वर्षों की अमृत यात्रा" का अनुभव बताया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का भी महोत्सव है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने देशवासियों और भगवान सोमनाथ के करोड़ों भक्तों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई का दिन एक और कारण से भी विशेष है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किए गए थे। उन्होंने कहा कि भारत ने 11 मई को तीन परमाणु परीक्षण कर अपनी क्षमता और सामर्थ्य का परिचय दुनिया को दिया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परीक्षणों के बाद विश्व की अनेक शक्तियों ने भारत पर दबाव बनाने का प्रयास किया और आर्थिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन इसके बावजूद 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण किए गए, जिससे दुनिया को भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय मिला।<br />श्री मोदी ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती। उन्होंने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण को "ऑपरेशन शक्ति" नाम दिया गया था, क्योंकि भारत की परंपरा शिव और शक्ति की आराधना से जुड़ी रही है। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि शिव और शक्ति की यह आराधना देश की वैज्ञानिक प्रगति के लिए भी प्रेरणा बनेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 14:46:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>FIFA World Cup 2026: ओपनिंग सेरेमनी में कैटी पेरी के साथ जलवां बिखरेंगी नोरा फतेही, कनाडा के बीएमओ फील्ड स्टेडियम में देगी धमाकेदार परफॉर्मेंस</title>
                                    <description><![CDATA[बॉलीवुड डांसिंग क्वीन नोरा फतेही 12 जून को टोरंटो में फीफा विश्व कप 2026 की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करेंगी। वह इस मंच पर प्रस्तुति देने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनेंगी। अंतरराष्ट्रीय सितारों के साथ नोरा की यह ऐतिहासिक परफॉर्मेंस फुटबॉल के महाकुंभ में भारतीय ग्लैमर का तड़का लगाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/trending-today/fifa-world-cup-2026-nora-fatehi-will-slay-the-opening/article-153273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/nora.png" alt=""></a><br /><p>मनोरंजन। बॉलीवुड अभिनेत्री और डांसर नोरा फतेही अब फुटबॉल के सबसे बड़े मंच फीफा विश्व कप 2026 में अपनी परफॉर्मेंस से धमाल मचाने जा रही हैं। नोरा 12 जून को कनाडा के टोरंटो स्थित बीएमओ फील्ड स्टेडियम में आयोजित ओपनिंग सेरेमनी में प्रस्तुति देंगी। खास बात यह है कि वह फीफा वर्ल्ड कप के मंच पर परफॉर्म करने वाली पहली बॉलीवुड अभिनेत्री बन सकती हैं।</p>
<p>इस समारोह में नोरा के साथ माइकल बुबले, एलानिस मॉरिसेट, एलेसिया कारा और जेसी रेयेज जैसे कई अंतरराष्ट्रीय कलाकार भी नजर आएंगे। वहीं अमेरिका में होने वाले दूसरे कार्यक्रम में कैटी पेरी, लिसा और रेमा जैसे स्टार्स प्रस्तुति देंगे।</p>
<p>फीफा अध्यक्ष Gianni Infantino ने कहा कि यह समारोह कनाडा की संस्कृति, विविधता और फुटबॉल के प्रति जुनून को दुनिया के सामने पेश करेगा। टूर्नामेंट का फाइनल 19 जुलाई को न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी में खेला जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>Trending Today</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुवेन्दु अधिकारी की दूरदर्शी सोच बंगाल को प्रगति, सुशासन और नई संभावनाओं की ओर अग्रसर करेगी : संजय सरावगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण को ऐतिहासिक बताते हुए 'सोनार बांग्ला' के सपने को साकार होने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बंगाल में जन-विरोधी शासन का अंत सुशासन और प्रगति की नई शुरुआत है। भाजपा के नेतृत्व में राज्य अब विकास और नई संभावनाओं की ओर अग्रसर होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/suvendu-adhikaris-visionary-thinking-will-take-bengal-towards-progress-good/article-153262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sanjay-saravgi.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष संजय सरावगी ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर सुवेंदु अधिकारी की दूरदर्शी सोच बंगाल को प्रगति, सुशासन और नई संभावनाओं की ओर अग्रसर करेगी। संजय सरावगी ने आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण को प्रदेश के लोगों के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में हुए चुनाव में एक 'जन-विरोधी' सरकार हार गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा के नेतृत्व में राज्य में बड़ा विकास होगा। ‎उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली बार सरकार बनने पर देश के भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए भी एक बड़ा दिन बताया।</p>
<p>संजय सरावगी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने पर सुवेन्दु अधिकारी को भी बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि सुवेन्दु अधिकारी की दृढ़ नेतृत्व क्षमता, जनता के प्रति समर्पण और विकास को केंद्र में रखकर कार्य करने की दूरदर्शी सोच निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल को प्रगति, सुशासन और नई संभावनाओं की ओर अग्रसर करेगी। उन्होंने “सोनार बांग्ला” का सपना साकार होने की भी ईश्वर से कामना की है।</p>
<p>संजय सरावगी ने कहा कि ‎पश्चिम बंगाल के लिए इसे एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से राज्य में सरकार बनाने का सपना देखा था। उन्होंने कहा कि आज से पश्चिम बंगाल में एक बड़ा बदलाव आएगा। ‎उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोगों ने आज विकास का सूर्योदय देख लिया है। अब वहां के लोग विकास और सुशासन भी देखेंगे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार लोगों की आकांक्षाएं पूर्ण करेगी। उन्होंने कहा कि यह मात्र एक सत्ता परिवर्तन नहीं है, नए बदलाव की भी शुरुआत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:50:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में ममता राज खत्म, भाजपा शासन शुरू: राजतिलक की तैयारी..आ रहे है अधिकारी, कल ब्रिगेड परेड़ मैदान में होगा शपथ ग्रहण समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 15 साल का टीएमसी शासन समाप्त हुआ। भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री नियुक्त कर इतिहास रच दिया है। ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु के साथ दो उपमुख्यमंत्री भी पद संभालेंगे। आजादी के बाद पहली बार बंगाल में भाजपा सरकार का उदय राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा उलटफेर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamtas-rule-ends-in-bengal-bjp-rule-begins-preparations-for/article-153152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1122.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कौन होगा सीएम, अब इस बात से पूरी तरह पर्दा हट चुका है और भाजपा नेतृत्व में शुभेंदु अधिकारी को राज्य का सीएम नियुक्त किया हैं। बंगाल में देश की आजादी के बाद यह पहली बार है, जब राज्य में भाजपा शासन करेगी। उल्लेखनीय है कि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ा था और ममता को करीब 16,000 वोटों से हराया था। ममता बनर्जी पिछले 15 साल से बंगाल में शासन कर रही थी इस दौरान बनर्जी तीन बार राज्य की सीएम रही। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित विधानसभा सदस्यों ने शुभेदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना है। यह घोषणा पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक एवं गृह मंत्री अमित शाह ने यहां शुक्रवार को विधायक दल की बैठक के बाद की। अमित शाह ने कहा कि विधायक दल की आज हुई बैठक में विधान मंडल दल के नेता के नाम पर कल 08 प्रस्ताव और अनुमोदन प्राप्त हुए थे और ये सभी प्रस्ताव शुभेदु अधिकारी के पक्ष में थे। नवनिर्वाचित सदस्यों को दूसराे नाम का सुझाव देने के लिए भी पर्याप्त समय दिया गया लेकिन कोई अन्य नाम नहीं आया।</p>
<p>अमित शाह ने कहा, "इसके आधार पर मैं शुभेदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल भाजपा विधायक दल का नेता घोषित करता हूं।" इस तरह शुभेदु अधिकारी का राज्य का नया मुख्यमंत्री बनना तय है। परंपरा के अनुसार उनके नेतृत्व में पार्टी राज्यपाल के समक्ष नयी सरकार के गठन का दावा करेगी। पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेतृत्व में पहली बार सरकार का गठन किया जा रहा है।</p>
<p>भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पश्चिम बंगाल भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए अमित शाह के अलावा मोहन चारण माझी को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में कोलकाता भेजा था। शुभेदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुने जाने का वहां उपस्थित भाजपा के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने करतल ध्वनि के साथ स्वागत किया।</p>
<p>भाजपा ने चुनाव जीत कर टीएमसी के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया। शुभेंदु अधिकारी भाजपा की जीत के सबसे बड़े चहरे बनकर उभरें, उन्होंने ममता को नंदीग्राम से उनकी परंपरागत सीट से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। शुभेंदु अधिकारी ने 1998 में ममता बनर्जी द्वारा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थापना के बाद कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल  हो गए। वे टीएमसी के शुरुआती सदस्यों में से एक थे। 2006 में पहली बार विधायक बने – कांथी दक्षिण (साउथ कंटाई) सीट से। उसी वर्ष वे कांथी नगर पालिका के चेयरमैन भी बने। इस दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर जमीनी काम किया, जो बाद में उनकी ताकत बना। 2020 के अंत में टीएमसी के अंदर गुटबाजी बढ़ी। अभिषेक बनर्जी के साथ तनाव और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों ने सुवेंदु को पार्टी से दूर किया। नवंबर 2020 में उन्होंने परिवहन मंत्री और होगली ब्रिज कमीशन के पद से इस्तीफा दिया। 17 दिसंबर 2020 को टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी और 19 दिसंबर को भाजपा जॉइन कर ली। यह बंगाल राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर था।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:40:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तमिलनाडु में सत्ता बनने पर संशय: टीवीके बहुमत के लिए प्रयासरत, कांग्रेस के समर्थन से टीवीके को मिला बूस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में धमाकेदार दस्तक दी है। बहुमत से कुछ कदम दूर विजय का 'पावर शेयरिंग' फॉर्मूला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, जिससे कांग्रेस ने 10 साल पुराना द्रमुक का साथ छोड़ TVK से हाथ मिला लिया। 60 साल बाद राज्य में पहली बार गठबंधन सरकार बनने जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/doubt-over-coming-to-power-in-tamil-nadu-for-the/article-152993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-3.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। नवगठित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) के संस्थापक विजय ने जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले यह दांव चला था कि उनकी पार्टी गठबंधन और सत्ता में हिस्सेदारी के लिए तैयार है, तो किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें अनुभवहीन राजनीतिज्ञ मानकर खारिज कर दिया था। लेकिन चुनावी नतीजों ने सभी एग्जिट पोल के अनुमानों को गलत साबित कर दिया और उन्होंने राजनीतिक पटल पर धमाकेदार दस्तक दी। अभिनेता विजय की पार्टी ने हालांकि अपने दम पर सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत हासिल करने में विफल रही, जिससे तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार गठबंधन सरकार बनने की उम्मीदें जग गयी हैं।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, अभिनेता ने आवश्यक संख्या बल जुटाने के लिए कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और वामपंथी दलों से संपर्क साधा। इस परिदृश्य में, सत्ता के बंटवारे का उनका चुनाव-पूर्व दांव 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हुआ। चुनावी नतीजों की घोषणा के मात्र दो दिन बाद ही कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ अपना 10 साल पुराना गठबंधन अचानक खत्म कर दिया और टीवीके के साथ हाथ मिला लिया। कांग्रेस ने अपने पांच नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन पत्र सौंप दिया है, ताकि सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनायी जा सके। साथ ही, कांग्रेस ने भविष्य के चुनावों, 2029 के लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों, तक इस रिश्ते को जारी रखने की प्रतिबद्धता जतायी है।</p>
<p>कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन ने न केवल टीवीके के लिए 'बूस्टर' का काम किया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में पहली बार चुनाव के बाद पुनर्गठन को भी जन्म दिया है। यह अवधारणा 2006 में भी नहीं देखी गयी थी, जब द्रमुक बहुमत पाने में विफल रही थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बाहरी समर्थन से पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। उस समय कांग्रेस द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी, इसलिए चुनाव बाद गठबंधन का सवाल ही नहीं उठा था।</p>
<p>दो दशक बाद लेकिन अब परिदृश्य अलग है और राष्ट्रीय पार्टी ने पहल करते हुए विजय के साथ गठबंधन किया है, जिससे हार से जूझ रही द्रमुक खेमे में भारी नाराजगी है। इसी राह पर चलते हुए थोल थिरुमावलवन की वीसीके और दो वामपंथी दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के भी ऐसा ही निर्णय लेने की उम्मीद है, जिससे द्रमुक मोर्चे में और अधिक बिखराव हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला शुक्रवार तक पता चलने की उम्मीद है।</p>
<p>कांग्रेस, जो 2016 के विधानसभा चुनाव से द्रमुक के साथ गठबंधन में थी, उसने इस चुनाव के लिए टीवीके के साथ गठबंधन करने में रुचि दिखायी थी, विशेष रूप से विजय के सत्ता में हिस्सेदारी के खुले प्रस्ताव के संदर्भ में। चीजें तब उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं और राष्ट्रीय पार्टी अधिक सीटों और दो राज्यसभा सीटों की मांग पूरी न होने पर भी अनिच्छा से द्रमुक के साथ ही टिकी रही थी। कड़ी सौदेबाजी के बाद कांग्रेस ने 2021 में लड़ी गई 25 सीटों के मुकाबले 39 की मांग की थी, लेकिन अंत में द्रमुक के 28 सीटों और एक राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गठबंधन के अन्य दलों को भी कम सीटों पर राजी करने के लिए काफी दबाव झेला था। स्टालिन ने इस कठिन दौर को कुशलता से संभाला और सहयोगियों को यह कहकर मनाया कि गठबंधन में नये दलों को जगह देनी है।</p>
<p>द्रमुक गठबंधन के इन दलों ने शुरुआत में विजय के सत्ता साझा करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था और द्रविड़ प्रमुख के साथ चुनाव लड़ा। यह गठबंधन 2017 से लगातार चुनाव जीत रहा था, लेकिन इस बार टीवीके की लहर में उसे अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।<br />विजय के पक्ष में लहर ऐसी थी कि तमिलनाडु में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी। टीवीके न केवल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, बल्कि उसने दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगायी। यहां तक कि श्री स्टालिन खुद अपने गढ़ कोलाथुर सीट से हार गये, जहां से वे पिछले तीन बार से लगातार जीत रहे थे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है और टीवीके इस आंकड़े से 11 सीटें दूर रह गई। ऐसे में विजय ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दलों तक पहुंच बनाई। कांग्रेस ने 'अवसर का लाभ उठाते हुए' तुरंत टीवीके को समर्थन दे दिया, जिससे 1967 के बाद पहली बार उसे राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय हो गया है। वीसीके और वामपंथी दलों के पास कुल छह विधायक हैं, और उनके भी पाला बदलने की प्रबल संभावना है।</p>
<p>तकनीकी रूप से टीवीके के पास 107 विधायक हैं, क्योंकि विजय ने दो सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में उन्हें 11 और विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पांच विधायकों के बाद अब सबकी नजरें वीसीके और वामपंथी दलों पर टिकी हैं। इसी बीच, टीवीके द्वारा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) से संपर्क की खबरें भी आईं, जिसके पास 47 विधायक हैं। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता के पी मुनुसामी ने हालांकि इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एडप्पादी के पलानीस्वामी की सहमति से वे यह कह रहे हैं कि पार्टी विजय को कोई समर्थन नहीं देगी। अब देखना यह होगा कि क्या यह पहला चुनाव बाद का पुनर्गठन और गठबंधन शासन तमिलनाडु की राजनीति में एक नया चलन बनेगा और भविष्य के चुनावों में भी कायम रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 15:55:45 +0530</pubDate>
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                <title>अमित शाह के लद्दाख दौरे पर कांग्रेस का निशाना: ऐतिहासिक बौद्ध अवशेषों का किया जिक्र, भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बौद्ध अवशेषों के प्रदर्शन में व्यस्त हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की राज्य का दर्जा और रोजगार की मांगों पर चुप हैं। उन्होंने नेहरू के ऐतिहासिक दौरों का जिक्र करते हुए सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-amit-shahs-visit-to-ladakh-mentions-historical-buddhist/article-152322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे को लेकर प्रतिक्रिया में कहा कि अमित शाह शुक्रवार को पिपरहवा के बौद्ध अवशेषों की "महिमा" में व्यस्त हैं, जबकि लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा और भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसी अहम मांगों पर चुप्पी साधे हुए हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि लद्दाख में इस तरह के धार्मिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिससे गृह मंत्री शायद अनभिज्ञ हैं। उन्होंने 14 जनवरी 1949 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दिन भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महा मोग्गलान के पवित्र अवशेष, जिन्हें 1851 में विक्टोरिया और अलबर्ट संग्रहालय ले गए थे, उन्हें वापस भारत लाया गया था। इन अवशेषों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्राप्त कर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया को कोलकाता में सौंपा था।</p>
<p>कांग्रेस नेता के अनुसार, 1949 में ही नेहरू ने लद्दाख का चार दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान प्रतिष्ठित बौद्ध नेता कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि इन अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल मई 1950 में साकार हुई, जब इन पवित्र अवशेषों को 79 दिनों तक पूरे लद्दाख में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद इन्हें यांगून, कोलंबो और सांची में स्थापित किया गया। जयराम रमेश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवाद और उनकी भावनाओं का सम्मान भी होता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:22:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मुट्ठी में समंदर : 7 साल के इशांक ने रचा इतिहास, 9 घंटे 50 मिनट में Palk Strait तैरकर पार कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड के नन्हे तैराक इशांक ने मात्र 7 साल की उम्र में पाल्क स्ट्रेट तैरकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया। उन्होंने श्रीलंका से भारत तक 29 किलोमीटर की दूरी 9 घंटे 50 मिनट में पूरी की। चुनौतियों और लहरों को मात देकर इशांक दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक बन गए हैं, जिससे पूरा देश गौरवान्वित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sea-in-fist-7-year-old-ishank-created-history-by/article-152318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/isak.png" alt=""></a><br /><p>रांची। महज सात वर्ष की उम्र में झारखंड के नन्हे तैराक इशांक ने अद्भुत साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए Palk Strait को तैरकर पार कर इतिहास रच दिया। इशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोड़ी तक लगभग 29 किलोमीटर की दूरी महज 9 घंटे 50 मिनट में पूरी की।</p>
<p>यह उपलब्धि उन्होंने 30 अप्रैल 2026 को हासिल की, जिसके साथ ही इशांक दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक बन गए, जिन्होंने इस चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग को पार किया। इस सफर के दौरान तेज धाराएं, समुद्री लहरें और बदलते मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए इशांक ने असाधारण धैर्य और अनुशासन का परिचय दिया।</p>
<p>इशांक की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को खेल जगत में बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। उनकी मेहनत और समर्पण ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार और प्रशिक्षकों का भी अहम योगदान रहा, जिन्होंने उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन दिया।</p>
<p>इशांक की इस सफलता पर विभिन्न क्षेत्रों से बधाइयों का सिलसिला जारी है। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में हासिल की गई यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 12:50:21 +0530</pubDate>
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